आयुष्मान भारत: ‘सभी को स्वास्थ्य’ का सपना साकार करने वाली एक प्रमुख पहल

आयुष्मान भारत: ‘सभी को स्वास्थ्य’ का सपना साकार करने वाली एक प्रमुख पहल

भारत सरकार इस बात से भली-भांति परिचित है कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल वर्तमान में प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य और संक्रमणीय बीमारियों पर केंद्रित है. संक्रमण एक चुनौती बन गई है, जहां पुरुषों में 62 प्रतिशत और महिलाओं में 52 प्रतिशत मौतों की गणना ग़ैर संक्रमणीय बीमारियों के अंतर्गत दजऱ् की जाती है, जो अधिकतर समयपूर्व प्रकृति की होती हैं. यह स्थिति इस तथ्य  से और तीक्ष्ण  हो जाती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का, विशेषकर सामुदायिक स्वास्थ्य  केंद्र के स्तर पर (शिशु जन्म संबंधी सेवाओं को छोडक़र) कम उपयोग होता है. प्रभावी देखभाल और रेफरल सुविधा का बहुत अभाव है जिससे स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं खंडित अवस्था में हैं. परिवार अपनी जेब से भारी भरकम ख़र्च उठाने को मज़बूर होते हैं जिससे चिकित्सा और अस्पताल के ख़र्चों से दरिद्रता और गऱीबी पनपती है. स्वास्थ्य, सरकार के ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ के विकास दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण केंद्र-बिंदु है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में निहित सभी के लिये स्वास्थ्य और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को पूरा करने के लिये सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अग्रणी पहल ‘आयुष्मान भारत’ की कल्पना की.

आयुष्मान भारत: योजना

भारत ने पिछले तीन दशकों के दौरान स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच और गुणवत्ता  में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ और सुधार हासिल किये हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र सबसे बड़े और तेज़ी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से है जिसके 2020 तक 280 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच जाने की आशा है. साथ ही भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के समक्ष अनेक चुनौतियों हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों तरह की जनसंख्या के बीच यह जेब पर पडऩे वाले भारी खर्च़, कम वित्तीय संरक्षण, कम स्वास्थ्य के  बीमा कवरेज को लेकर सुविचारित है. यह बहुत ही चिंता का विषय है कि हमें स्वास्थ्य और चिकित्सा लागतों पर अपने जेब ख़र्च से बहुत ज्यादा रकम व्यय करनी पड़ती है. हमारी 62.58 प्रतिशत जनसंख्या को अपने स्वास्थ्य  और अस्पताल संबंधी ख़र्च को स्वयं वहन करना पड़ता है और वह किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संरक्षा के अंतर्गत नहीं आते हैं. लोगों को अपने स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरतों के लिये अपनी आय और बचत के इस्तेमाल के अलावा राशि उधर लेनी पड़ती है अथवा अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं, जिससे 4.6 प्रतिशत जनसंख्या  गरीबी के नीचे चली जाती है. भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध है कि इसकी जनसंख्या के लिये अच्छी गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं सबके लिये उपलब्ध हों और इसके कारण किसी को भी वित्तीय कठिनाई का सामना न करना पड़े.

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य  योजना (पीएम-जेएवाई) में बार-बार अस्पताल जाने के कारण होने वाले ख़र्च से गरीब और वंचित वर्गों पर पडऩे वाले वित्तीय बोझ को कम करने और उनके लिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की कल्पना की गई है. पीएम-जेएवाई में वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज और सतत् विकास लक्ष्य-3 को हासिल करने के प्रति भारत की प्रगति में तेज़ी लाये जाने की व्यवस्था  है.

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) में नवीनतम सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना विवरण के अनुसार 10.74 करोड़ गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों और शहरी कामगारों की चिन्हित पेशेवर श्रेणियों के परिवारों को (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) वित्तीय संरक्षा (स्वास्थ्य  सुरक्षा) प्राप्त  होगी. यह प्रति परिवार प्रति वर्ष (फैमिली फ्लोटर आधार पर) 5,00,000 रु. का लाभ कवर प्रदान करेगी.

पीएम-जेएवाई में लगभग सभी माध्यमिक देखभाल और अधिकतर तृतीयक देखभाल प्रक्रियाओं के लिये चिकित्सा और अस्पताल संबंधी व्यय शामिल होंगे. पीएम-जेएवाई में दवाइयों, निदान और परिवहन सहित शल्य, चिकित्सा और डे केअर इलाज से संबंधित 1350 चिकित्सा  पैकेजों की पहचान की गई है.

यह सुनिश्चित करने के लिये कि कोई भी इस योजना से वंचित न रहे (विशेषकर बालिकाएं, महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग), मिशन में परिवार के आकार और आयु के संबंध में कोई सीमा नहीं होगी. योजना सरकारी अस्पतालों और पैनल बद्ध निजी अस्पतालों में नकदी रहित तथा कागज़ रहित होंगी. लाभार्थियों को अस्पताल संबंधी कोई भी ख़र्च का भुगतान नहीं करना होगा. इसके अंतर्गत अस्पताल पूर्व और बाद के ख़र्चे भी शामिल होंगे. योजना पात्रता पर आधारित है और लाभार्थी का निर्णय एसईसीसी डाटाबेस में शामिल परिवार के आधार पर किया जायेगा. पूरी तरह लागू हो जाने के बाद पीएम-जेएवाई दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्तापोषित स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन बन जायेगा.

पीएम-जेएवाई के लाभ

लाभार्थी स्तर

*सरकार प्रति परिवार प्रति वर्ष 5,00,000 रु. का स्वास्थ्य  बीमा कवर प्रदान करती है.

*देशभर में 10.74 करोड़ गरीब और वंचित परिवार (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) शामिल किये जायेंगे.

*परिभाषित मानदंड के अनुसार एसईसीसी डॉटाबेस में सूचीबद्ध सभी परिवार इसमें शामिल किये जायेंगे. परिवार के आकार और सदस्यों की आयु की कोई सीमा नहीं.

*बालिकाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को वरीयता

*आवश्यकता के अनुसार सभी सरकारी और पैनलबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज़ की सुविधा

*माध्यमिक और तृतीय अस्पताल देखभाल सुविधा शामिल.

*शल्य, चिकित्सा  और डे केअर इलाज, दवाइयों और निदान की लागत से संबंधित 1350 चिकित्सा  पैकेज शामिल

*पूर्व की सभी बीमारियां शामिल. अस्पताल, इलाज से मना नहीं कर सकता.

*गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की नकदी रहित और कागज़ रहित पहुंच

*अस्पतालों को इलाज के लिये लाभार्थियों से कोई अतिरिक्त राशि वसूलने की अनुमति नहीं होगी.

*पात्र लाभार्थी राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के साथ भारत में कहीं भी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं. सूचना, सहायता, शिकायतों और सुझावों के लिये चौबीसों घण्टे हेल्प्लाइन नंबर 14555 पर संपर्क किया जा सकता है.

स्वास्थ्य  प्रणाली

*भारत के वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) और सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्रगामी रूप से हासिल करने में मददगार

*सरकारी अस्पतालों और निजी देखभाल प्रदाताओं, विशेषकर लाभ रहित सेवा प्रदाताओं से स्वास्थ्य देखभाल से वंचित क्षेत्रों में सेवाओं की सही आकलित रणनीति प्रापण के संयोजन के जरिए गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक और तृतीयक देखभाल सेवाओं की वर्धित और किफायती पहुंच सुनिश्चित

*अस्पाताल के लिये जेब पर पडऩे वाले खर्च में महत्वपूर्ण कमी. बार-बार स्वास्थ्य संबंधी होने वाले खर्चों के कारण वित्तीय जोखि़म और परिणामस्वरूप गरीबी तथा अभाव से ग्रसित परिवारों में कमी.

*सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों के साथ निजी क्षेत्र के विकास के लिये संयोजन होगा

*प्रमाण आधारित स्वास्थ्य देखभाल में वृद्धि होगी और वर्धित स्वास्थ्य परिणामों के लिये लागत में नियंत्रण

*बीमा राजस्व वृद्धि से सार्वजनिक स्वास्थ्य  देखभाल प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण

*ग्रामीण, दूरस्थ और अल्प सेवारत क्षेत्रों में नई स्वास्थ्य अवसंरचना के सृजन में सहायता होगीसकल घरेलू उत्पाद की प्रतिशतता के तौर पर सरकार द्वारा स्वास्थ्य संबंधी खर्च में वृद्धि

*रोगियों की संतुष्टि में वृद्धि

*स्वास्थ्य संबंधी परिणामों में सुधार

*जनसंख्या स्तर उत्पादकता और कार्यकुशलता में सुधार

*जनसंख्या के जीवन की गुणवत्ता में सुधार