ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट 

उत्तर: b)

  1. ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट से दो नए अध्ययनों के निष्कर्षों के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में मीथेन उत्सर्जन (Methane Emissions) की मात्रा में वृद्धि जारी है।
  2. इसके अनुसार शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस के वैश्विक उत्सर्जन में 2008 से 2017 के दशक में प्रति वर्ष 576 मिलियन मीट्रिक टन की कुल वृद्धि हुई है (पिछले दशक की तुलना में 9 प्रतिशत की वृद्धि)।
  3. अध्ययन के वर्षों के दौरान, वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में आर्द्रभूमियों  (Wetlands) का 30 प्रतिशत का योगदान रहा, वहीं तेल, गैस और कोयला गतिविधियों का 20 प्रतिशत का योगदान रहा। कृषि क्षेत्र (जिसमें आण्विक किण्वन और खाद प्रबंधन शामिल हैं) का उत्सर्जन में 24 प्रतिशत का और भूमिभराव (लैंडफिल) का 11 प्रतिशत योगदान रहा। दक्षिण अमेरिकाएशिया और अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का उत्सर्जन में 64 प्रतिशत का योगदान रहा और शीतोष्ण क्षेत्रों का 32 प्रतिशत एवं आर्कटिक का प्रतिशत योगदान रहा।
  4. अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक (short-lived climate pollutants) शक्तिशाली जलवायु कारक हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की तुलना में अल्पकालीन तक वायुमंडल में विद्यमान रहते हैंफिर भी वातावरण को गर्म करने की उनकी क्षमता कई गुना अधिक होती है। कुछ अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक भी खतरनाक वायु प्रदूषक होते हैं जो लोगों, पारिस्थितिक तंत्र और कृषि उत्पादकता के लिए हानिकारक होते हैं।
  5. अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक: कार्बन डाइऑक्साइड के बाद, ब्लैक कार्बन, मीथेन, ट्रोपोस्फेरिक ओजोन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन मानव निर्मित वैश्विक ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं, जिनका वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग में 45% तक का योगदान है।