जेनेटिकली मोडीफाइड सरसों

Q-जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) द्वारा ‘जेनेटिकली मोडीफाइड सरसों’ (GM Mustard) को मंजूरी प्रदान कर दी है। GM सरसों की कृषि से क्या-क्या लाभ होने की संभावनाएँ हैं? स्पष्ट करें। GM सरसों से संबंधित चिंताओं का भी उल्लेख करें।

उत्तर :

हाल ही में जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) जो भारत में जेनेटिकली मोडीफाइड बीजों के संबंध में शीर्ष नियामक है, के द्वारा जेनेटिकली मोडीफाइड सरसों (GM Mustard) की ‘धारा मस्टर्ड हाइब्रिड-11’ (DMH-11) को पर्यावरणीय एवं कृषि के लिये मंजूरी प्रदान की है। यदि इसे पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत में वाणिज्यिक उत्पादन के लिये अनुमति प्राप्त करने वाली पहली खाद्य ट्रांसजेनिक फसल होगी। हालाँकि समिति द्वारा इससे पहले खाद्य फसलों में Bt- बैंगन को भी वर्ष 2010 में मंजूरी प्रदान की गई थी लेकिन सिविल सोसायटी के भारी विरोध के कारण पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी नहीं मिल पाई जिससे उसका वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पाया था।

GM सरसों की कृषि से लाभ-

  • GM सरसों में एक जीवाण्विक जीन के प्रवेश द्वारा के नर भाग पौधे (Male part) का बंध्यीकरण किया जा सकता है जिससे पर-परागण के माध्यम से नई संकर प्रजातियाँ विकसित की जा सकती है।
  • GM सरसों उत्पादन को 20-30% बढ़ा सकती है जो भारत की खाद्य तेलों के बढ़ते आयात पर निर्भरता कम करेगा।
  • GM सरसों हर्बीसाइड के खिलाफ प्रतिरोधी होती है अतः ये बेहतर खरपतवार-प्रबंधन में सहायक होगी।
  • इसके तेल में संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है एवं असंतृप्त वसा तथा ओमेगा-3 वसीय अम्ल की उच्च मात्रा इसे अधिक लाभदायक बनाती है। इसकी खली परंपरागत सरसों के तेल से अधिक पौष्टिक होगी अतः मवेशियों को खिलाने एवं पोल्ट्री फार्मिंग में उपयोगी होगी।
  • GM सरसों के ‘सार्वजनिक स्वामित्व’ (दिल्ली विश्वविद्यालय एवं धारा वनस्पति तेल कंपनी) के कारण यह न केवल 20-30% अधिक उत्पादक होगी बल्कि Bt- कपास जैसी फसलों की तुलना में सस्ती भी होगी (क्योंकि इस GM सरसों में Bt- कपास की तरहे मोनसेंटो जैसी कंपनियों का एकाधिकार नहीं है।

इससे संबंधित चिंताएँ

  • भारत में सरसों के पौधे के प्रत्येक भाग का उपयोग किया जाता है। लेकिन हमारे पास जैव सुरक्षा से संबंधित आँकड़े अपर्याप्त है। कुछ आधारभूत एलर्जी परीक्षणों के अलावा GM सरसों के प्रभावों का कोई अध्ययन नहीं किया गया।
  • उत्पादकों ने GM सरसों की तुलना सरसों की एक 40 वर्ष पुरानी प्राकृतिक किस्म से की ओर इस प्राकृतिक किस्म को काफी उत्पादक पाया। इसके अलावा, कुछ पारंपरिक पद्धतियों के प्रयोग द्वारा भी किसी फसल के उत्पादन में 25% तक की वृद्धि की जा सकती है।
  • GM सरसों की हर्बीसाइड प्रतिरोधी प्रकृति का कारण उसमें विकसित कुछ विषाक्त रसायन हैं जो मानव एवं पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिये भी घातक हैं। WHO के अनुसार इसमें पया जाने वाला ग्लााइफोसेट (glyphosate) एक संभावित कैंसरजन्य पदार्थ है।
  • GM सरसों की कृषि से ग्रामीण रोजगार में कमी आएगी क्योंकि हाथ से निराई (Weeding) करने वालों की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • इसके अलावा, इसमें एक संवैधानिक मुद्दा भी शामिल है। चूँकि कृषि राज्य सूची का विषय है अतः इतना बड़ा निर्णय केंद्र द्वारा लिये जाने का कई राज्य विरोध कर रहे हैं।

यद्यपि जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश एवं विकास को बढ़ावा देने के लिये सरकार की योजनाओं में GM फसलें केंद्र में हैं एवं भारत में कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिये सरकार ने इन फसलों को महत्त्वपूर्ण माना है। किंतु, इन फसलों को पर्याप्त वैज्ञानिक जाँच के बिना अनुमति देना देश में स्वास्थ्य एवं विकास के लिये घातक सिद्ध हो सकता है।