डब्लूटीओ में खाद्य सुरक्षा और ई-कॉमर्स विवाद के समाधान की उम्मीद कम

संदर्भ:-

विकासशील और विकसित देश अपने-अपने एजेंडे पर अड़े। खाद्य सुरक्षा पर विकासशील देशों के प्रस्ताव के खिलाफ विकसित देश

– 164सदस्य देशों वाले विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ की बैठक #अर्जेंटीना के #ब्यूनस आयर्स में शुरू हो गई है। यह 13 दिसंबर तक चलेगी। हालांकि इस 11वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में बड़े मुद्दों पर ठोस नतीजे की उम्मीद कम है।

– वजह यह है कि विकासशील और विकसित देश अपने-अपने एजेंडे पर अड़े हुए हैं। मंत्रिस्तरीय बैठक डब्लूटीओ के फैसले लेने वाली सबसे बड़ी बॉडी होती है। विकासशील देश खाद्य सुरक्षा पर स्थायी समाधान चाहते हैं, जिसका विकसित देश विरोध कर रहे हैं। विकसित देश ईकॉमर्स को नए मुद्दे के रूप में बातचीत में शामिल करना चाहते हैं, लेकिन विकासशील देश इसके खिलाफ हैं।

– खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को देखते हुए भारत इस बात का स्थायी समाधान चाहता है कि सरकार कितनी खाद्य सब्सिडी दे सकती है। भारत ने इस मुद्दे पर कई देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश की है। इसके अलावा भारत ने विकासशील देशों के समूह जी-33 की बैठक में भी हिस्सा लिया है। खाद्य सुरक्षा पर दूसरे विकासशील देश भारत के साथ हैं। डब्लूटीओ की एग्रीकल्चर डिवीजन के डायरेक्टर एडविन केसी ने कहा कि अगर कोई समाधान नहीं निकला तो ‘पीस क्लॉज’ जारी रहेगा।

=>क्या है नियम :
– डब्लूटीओ का कोई भी सदस्य देश हर साल पैदावार की कीमत के 10% से ज्यादा खाद्य सब्सिडी नहीं दे सकता है। पैदावार की कीमत के आकलन के लिए 1986-88 को आधार बनाया गया है।

=>भारत की आपत्ति :
– खाद्यसुरक्षा कार्यक्रम पूरी तरह लागू करने पर सब्सिडी 10% की सीमा से अधिक हो जाएगी। इसलिए भारत नियमों में संशोधन चाहता है। यह कीमत आकलन के आधार को भी बदलना चाहता है।

=>क्याहै पीस क्लॉज :
– दिसंबर2013 में बाली बैठक में ‘पीस क्लॉज’ नाम से अस्थायी समाधान निकाला गया। तय हुआ कि अगर किसी विकासशील देश ने 10% से ज्यादा सब्सिडी दी तो कोई देश उसे चुनौती नहीं देगा।

**इंपोर्टड्यूटी बढ़ाने की भी छूट चाहते हैं विकासशील देश

=>एकऔर मुद्दा है स्पेशल सेफगार्ड मेकैनिज्म (एसएसएम) का –
– इसमें प्रावधान है कि विकसित देशों की सब्सिडी से किसी विकासशील देश में कृषि उत्पादों का आयात बढ़ता है और घरेलू बाजार में कीमतें ज्यादा गिरती हैं, तो वह देश आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है।
– यह प्रावधान भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सेब, ऑलिव ऑयल और चावल जैसे प्रोडक्ट पर यह पहले ही अधिकतम कस्टम ड्यूटी लगा चुका है। यानी ड्यूटी और बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है।