ड्रोन पंजीकरण हेतु डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म लॉन्च  (Remotely Piloted Aerial System-RPAS)

ड्रोन पंजीकरण हेतु डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म लॉन्च

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा देश में ड्रोन ऑपरेटरों के लिये पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने हेतु ‘डिजिटल स्काई’ नामक पोर्टल की शुरुआत की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • इसी वर्ष अगस्त माह में सरकार ने रिमोटली पायलटेड एरियल सिस्टम (Remotely Piloted Aerial System-RPAS) के संचालन के लिये नियम बनाए थे, जो कि 1 दिसंबर से प्रभावी हो गए।
  • इन नियमों के तहत RPAS के सुरक्षित संचालन और एयर स्पेस के सहकारी उपयोग के लिये ऑपरेटरों, रिमोट पायलट/उपयोगकर्त्ता और निर्माताओं/OEM के दायित्वों का विस्तृत विवरण दिया गया।
  • नागरिक उड्डयन के नियमों (CAR) के तहत डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म की भी घोषणा की गई, जो कि अपनी तरह का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म है जो CAR के उल्लंघन को कम करने के लिये सॉफ़्टवेयर-आधारित आत्म-प्रवर्तन की एक आदर्श प्रणाली ‘बिना अनुमति के उड़ान नहीं’ (No Permission, No Take-off-NPNT) लागू करता है।
  • इन मानदंडों के तहत ड्रोन उपयोगकर्त्ताओं को अपने ड्रोन का एक बार पंजीकरण कराना होगा। उन्हें ड्रोन के मालिकों के साथ-साथ उसके पायलटों को भी पंजीकृत करने की आवश्यकता होगी।
  • भारत में नैनो ड्रोन कानूनी तौर पर 1 दिसंबर से उड़ान शुरू कर सकते हैं। माइक्रो और उससे ऊपर की श्रेणियों के ड्रोन के लिये ऑपरेटरों को डिजिटल स्काई पोर्टल पर पंजीकरण करने की आवश्यकता होगी।
  • मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्त्ताओं का पंजीकरण स्वीकार करना शुरू कर दिया है तथा अनमैंड एरियल ऑपरेटर्स परमिट (Unmanned Aerial Operator’s Permit- UAOP) और यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर (Unique Identification Numbers-UIN) के लिये भुगतान भारत कोष पोर्टल (bharatkosh.gov.in) के माध्यम से स्वीकार किये जाएंगे।
  • मंत्रालय के अनुसार, उड़ान भरने की अनुमति प्राप्त करने के लिये रिमोटली पायलटेड एरियल सिस्टम (Remotely Piloted Aerial System-RPAS) या ड्रोन ऑपरेटरों या रिमोट पायलटों को एक उड़ान योजना (flight plan) दर्ज करनी होगी।
  • मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “ग्रीन ज़ोन में उड़ान भरने के लिये पोर्टल या एप के माध्यम से केवल उड़ानों के समय और स्थान की आवश्यकता होगी। यलो ज़ोन में उड़ान भरने के लिये अनुमति की आवश्यकता होगी और रेड ज़ोन में उड़ानों की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
  • इन क्षेत्रों की पहचान जल्द ही घोषित की जाएगी। पोर्टल पर अनुमति डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। अनधिकृत उड़ानों को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये डिजिटल परमिट के बिना कोई भी ड्रोन उड़ान नहीं भर पाएगा।
  • डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म इस तेज़ी से बदलते उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के साथ विकसित होने के लिये बनाया गया है। आने वाले महीनों में उपयोगकर्त्ताओं के लिये उड़ान की प्रक्रिया को सरल करने और सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी की सुविधा प्रदान करने के लिये नई विशेषताएँ विकसित की जाएंगी।
  • इसके अलावा, यह अनुमान लगाया गया है कि भविष्य में डिजिटल स्काई सेवा प्रदाता (DSPs) अप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस (APIs) के माध्यम से इस मंच की कार्यक्षमता का विस्तार करेगा।
  • मंत्रालय ने जयंत सिन्हा की अध्यक्षता में ड्रोन पॉलिसी 2.0 की सिफारिश पर एक टास्क फोर्स गठित किया है। टास्क फोर्स द्वारा इस साल के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करने की उम्मीद है।
  • मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि RPAS के लिये ड्रोन 2.0 कार्ययोजना में स्वायत्त उड़ानों, ड्रोन के माध्यम से वितरण और दृश्य सीमा से परे (BVLOS) उड़ानों के लिये नियामक ढाँचे को शामिल किये जाने की संभावना है।
  • वज़न के आधार पर ड्रोन की पाँच श्रेणियाँ- नैनो (250 ग्राम से कम), माइक्रो (250 ग्राम से 2 किलो तक), स्माल (2 किलो से 25 किलो तक), मीडियम (25 किलो से 150 किलो तक) तथा लार्ज (150 किलो से अधिक) होंगी।

क्या है ड्रोन?

  • रिमोटली पायलटेड एरियल सिस्टम (Remotely Piloted Aerial System-RPAS) जिसे ड्रोन के रूप में जाना जाता है, व्यापक अनुप्रयोगों वाला एक तकनीकी मंच है।
  • इन्हें एक रिमोट या विशेषकर इसी के लिये बनाए गए कंट्रोल रूम से उड़ाया जाता है। ड्रोन अपने आकार, दायरे, स्थिरता और भार उठाने की क्षमता के आधार पर कई प्रकार के होते हैं।
  • इनमें आमतौर पर स्थिर पंख, रोटर रहते हैं और ये बैटरी से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। जीपीएस सिस्टम के ज़रिये काम करने वाले अलग-अलग ड्रोन की कार्यक्षमता अलग-अलग होती है।
  • सामान्य तौर पर निगरानी के लिये इस्तेमाल किये जाने वाले ड्रोन की रेंज फिलहाल 100 किमी. तक है। एक बार बैटरी चार्ज होने पर यह काफी ऊँचाई पर 100 किमी. प्रति घंटा की गति से उड़ सकता है।