तितली ‘अति दुर्लभ’ साइक्लोन

संदर्भ

अफ्रीका और एशिया में आपदा की पूर्व चेतावनी देने वाली 45 देशों की संस्था ‘रीजनल इंटीग्रेटेड मल्टी-हैज़र्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (Regional Integrated Multi-Hazard Early Warning System-RIMES)’ ने अक्तूबर में आए भयावह साइक्लोन तितली (Titli) को अति दुर्लभ के रूप में नामित किया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • ‘रिम्स’ के अनुसार, ओडिशा तट पर चक्रवातों के 200 से अधिक वर्षों के इतिहास पर एक नजर डालने से पता चलता है कि तितली चक्रवात अपनी विशेषताओं के मामले में अति दुर्लभ है, जैसे-भूमि से टकराने के बाद पुनरावृत्ति और टकराने के बाद भी दो दिनों तक अपनी विनाशकारी क्षमता को बरकरार रख पाने जैसी विशेषताएँ।
  • इससे पहले, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तितली की बनावट को ‘अति दुर्लभ’ घटना के रूप में परिभाषित किया था। इस तीव्र तूफ़ान ने ज़मीन से टकराने (Landfall) के बाद अपना रास्ता बदल दिया था।
  • तितली नामक चक्रवाती तूफान की वज़ह से मुख्य रूप से अंदरूनी गजपति ज़िले में भू-स्खलन के कारण 60 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। ओडिशा जो कि आपदा से निपटने हेतु तैयारियों को लेकर अत्यधिक मुस्तैद रहता है, के अंदरूनी ज़िलों में तितली के कारण जीवन तथा संपत्ति दोनों का नुकसान उठाना पड़ा।
  • तितली की वज़ह से सबसे ज़्यादा मौतें गजपति ज़िले के बरघारा गाँव में भू-स्खलन की वज़ह से हुई थीं क्योंकि इस चक्रवात को लेकर कोई भी सटीक चेतवानी नहीं दी जा सकी थी।

तितली

  • भयावह चक्रवात तितली अक्तूबर में ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों पर टकराया था।
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में इतने ताकतवर चक्रवाती तूफान दुर्लभ ही उत्पन्न होते हैं। तितली का नामकरण पाकिस्तान द्वारा किया गया है।
  • सक्रिय अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) तट की तरफ दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू हो गया था। समुद्र में हलचल के पीछे यही मुख्य कारक था। यह चक्रवात ITCZ का ही उपशाखा के रूप में था।
  • इसके अलावा, मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO) भी हिंद महासागर के निकट था।

अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ)

  • अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र या ITCZ पृथ्वी पर भूमध्य रेखा के पास वृत्ताकार क्षेत्र है। यह पृथ्वी पर वह क्षेत्र है, जहाँ उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धों की व्यापारिक हवाएँ, यानी पूर्वोत्तर व्यापारिक हवाएँ तथा दक्षिण-पूर्व व्यापारिक हवाएँ एक जगह मिलती हैं।
  • भूमध्य रेखा पर सूर्य का तीव्र तापमान और गर्म जल ITCZ में हवा को गर्म करते हुए इसकी आर्द्रता को बढ़ा देते हैं जिससे यह उत्प्लावक बन जाता है।
    व्यापारिक हवाओं के अभिसरण (Convergence) के कारण यह ऊपर की तरफ उठने लगता है। ऊपर की तरफ उठने वाली यह हवा फैलती है और ठंडी हो जाती है, जिससे भयावह आँधी तथा भारी बारिश शुरू हो जाती है।

मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO)

  • मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन उष्णकटिबंधीय परिसंचरण और वर्षा में एक प्रमुख उतार-चढ़ाव है जो भूमध्य रेखा के साथ पूर्व की ओर बढ़ता है तथा 30-60 दिनों की अवधि में पूरे ग्लोब की परिक्रमा करता है।
  • इसलिये MJO हवा, बादल और दबाव की एक चलती हुई (Moving) प्रणाली है। यह जैसे ही भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमती है वर्षा की शुरुआत हो जाती है।
  • ‘रिम्स’ के अनुसार, राजकीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ओडिशा (OSDMA) को तितली के प्रभावों से निपटने में इसलिये परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पास कार्रवाई-योग्य पूर्व सूचना उपलब्ध नहीं थी।
  • तितली तूफ़ान से मिली सीख का उपयोग करते हुए राजकीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ओडिशा (OSDMA) भविष्य में तितली जैसे तूफानों से निपटने में सक्षम होगा।
  • ‘रिम्स’ ने सिफारिश की है कि ओडिशा में तितली द्वारा किये गए विनाश के संदर्भ में जोखिमों को समझने हेतु विस्तृत जोखिम मूल्यांकन किया जाना चाहिये।