पूर्वोत्तर की जीवन रेखा ब्रह्मपुत्र पर चीन की टेढ़ी नज़र

– यह पहली बार नहीं है कि तिब्बती हिस्से वाले ब्रह्मपुत्र पर चीन की अनैतिक हरकतों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो. चीन पर इससे पहले भी बांध निर्माण के अलावा भारत आने वाले तिब्बती प्रवाहों में परमाणु कचरा डालने का आरोप भी लग चुका है.
– इस बार लगा आरोप ज्यादा संगीन इसलिए है कि इस बार मामला बांध निर्माण का न होकर, प्रवाह के मार्ग को ही चीन की ओर मोड़ लेने हेतु 1000 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने को लेकर है. यह सुरंग तिब्बत से लेकर चीन के ज़िगजियांग क्षेत्र के तकलीमाकन रेगिस्तान तक जायेगी.

– ब्रह्मपुत्र का मूल स्रोत, तिब्बत के आंगसी ग्लेशियर में स्थित है. ब्रह्मपुत्र को इसके तिब्बती भू-भाग में ‘सांगपो’ नाम से जाना जाता है. तिब्बत और भारत के हिस्से में कई प्रवाह ब्रह्मपुत्र से मिलते हैं. सियांग उनमें से एक है.
– ब्रह्मपुत्र का विशाल प्रवाह भारत में 918 किलोमीटर और बांग्लादेश में 363 किलोमीटर की तुलना में यह प्रवाह तिब्बत में ज्यादा लंबाई (1625 किलोमीटर) तय करता है. एक विशाल और वेगवान प्रवाह होने के कारण ही ब्रह्मपुत्र को नदी न कहकर, नद कहा जाता है.
– खासियत यह कि ब्रह्मपुत्र, चार हज़ार फीट की ऊंचाई पर बहने वाला दुनिया का एकमात्र प्रवाह है. जल की मात्रा के आधार पर देखें, तो भारत में सबसे बड़ा प्रवाह ही है. वेग की तीव्रता (19,800 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेण्ड) के आधार पर देखें, तो ब्रह्मपुत्र दुनिया का पांचवां सबसे शक्तिशाली जलप्रवाह है. बाढ़ की स्थिति में यह ब्रह्मपुत्र के वेग की तीव्रता एक लाख क्यूबिक मीटर प्रति सेकेण्ड तक जाते देखा गया है.
– ब्रह्मपुत्र की औसत गहराई 124 फीट और अधिकतम गहराई 380 फीट आंकी गई है. ब्रह्मपुत्र, जहां एक ओर दुनिया के सबसे बड़े बसावटयुक्त नदद्वीप-माजुली की रचना करने का गौरव रखता है।
– सुंदरबन, दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा क्षेत्र है. सच्ची बात यह है कि इतना बड़ा डेल्टा क्षेत्र निर्मिंत करना अकेले गंगा के बस का भी नहीं था. ब्रह्मपुत्र ने गंगा के साथ मिलकर सुंदरबन का निर्माण किया.

– असलियत यह है कि ब्रह्मपुत्र, पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी है, सभ्यता भी और अस्मिता भी. ब्रह्मपुत्र, पूर्वोत्तर भारत की लोकास्थाओं में भी है, लोकगीतों में भी और लोकगाथाओं में भी. चूंकि एक नद के रूप में ब्रह्मपुत्र एक भौतिकी भी है, भूगोल भी, जैविकी भी, रोज़गार भी, जीवन भी, आजीविका भी, संस्कृति और सभ्यता भी. ब्रह्मपुत्र का यात्रा मार्ग इसका जीता-जागता प्रमाण है.

– हम ब्रह्मपुत्र को पूर्वोत्तर भारत की एक ऐसा नियंता कह सकते हैं, जिसके बगैर पूर्वोत्तर भारत की समृद्धि की कल्पना का चित्र अधूरा ही रहने वाला है।