बाल सुरक्षा नीति का मसौदा

चर्चा में क्यों?


हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित सुझावों के अनुसार बाल सुरक्षा नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर मसौदा नीति अपलोड करते हुए 4 जनवरी तक हितधारकों से टिप्पणियाँ भी आमंत्रित की हैं।

मसौदा नीति

  • देश में बच्चों से संबंधित अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को बाल सुरक्षा नीति तैयार करने पर विचार करने को कहा था।
  • यह बच्चों की सुरक्षा हेतु समर्पित पहली नीति होगी, जो अब तक व्यापक राष्ट्रीय बाल नीति, 2013 का हिस्सा थी।
  • सभी बच्चे हिंसा, शोषण, उपेक्षा, वंचितता और अन्य सभी प्रकार के भेदभाव से मुक्त बचपन तथा सम्मानित जीवन जीने के अधिकारी हैं।
  • भारत युवाओं का देश है, जहाँ बच्चों की आबादी 472 मिलियन से भी अधिक है। इस युवा आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल मानवाधिकार है बल्कि भारत के सुनहरे भविष्य के लिये एक निवेश भी है।
  • वर्तमान मसौदा नीति भारत के संविधान, विभिन्न बाल-केंद्रित कानूनों, अंतर्राष्ट्रीय संधि के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा और कल्याण हेतु अन्य मौजूदा नीतियों के तहत प्रदान किये गए सुरक्षा उपायों पर आधारित है। इस नीति के चार मुख्य पहलू इस प्रकार हैं-

♦ जागरूकता
♦ रोकथाम
♦ रिपोर्टिंग
♦ प्रतिक्रिया देना

  • इसका उद्देश्य बच्चों के शोषण और उपेक्षा की रोकथाम तथा प्रतिक्रिया के माध्यम से सभी बच्चों हेतु एक सुरक्षित एवं अनुकूल माहौल प्रदान करना है।
  • यह नीति सभी संस्थाओं और संगठनों (कॉर्पोरेट और मीडिया घरानों सहित), सरकारी या निजी क्षेत्र को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से बच्चों की सुरक्षा/बचाव के संबंध में उनकी ज़िम्मेदारियों को समझाने के लिये एक ढाँचा प्रदान करती है।