समुद्री गाय Sea Cow (Dugong)

– समुद्री गाय (अंग्रेजी में इसे डुगोंग कहते हैं) हाथियों के दूर का रिश्तेदार है, यद्यपि बाहरी बनावट में वह सीलों और जलसिंहों से मिलती-जुलती होती है। हाथियों के समान उसके भी अस्ति-पंजर वृहदाकार होता है और ऊपरी कृंतक दंत लंबे और नीचे की ओर बढ़े हुए होते हैं।
– शरीर की आकृति लंबोतर और गोलाकार होती है जिससे उन्हें तैरने में आसानी रहती है। पूंछ ह्वेलों की पूंछ के समान चपटी होती है। इसे ऊपर-नीचे फटककर समुद्री गाय आगे बढ़ती है, न कि मछलियों के समान दाएं-बाएं झटककर। उनके हाथ-पैर भी चपटे और चप्पूनुमा होते हैं।
=>भारत में अवस्थिति :-
– भारतीय समुद्रों में समुद्री गाय की सबसे बड़ी बस्तियां **मन्नार की खाड़ी** में होती हैं। उन्हें कच्छ की खाड़ी, अंडमान द्वीप समूह तथा मलबार तट के समुद्रों में भी देखा गया है। वैसे वे प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी पाई जाती हैं। मेडागास्कर से लेकर आस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तटों तक तथा फारस की खाड़ी में भी समुद्री गाय दिखाई देती है।
=>एनी विशेषताएं :-
– इन जीवों का नामकरण उनकी आदतों और स्वभाव को देखते हुए अत्यंत सार्थक है। गाय-भैंसों के ही समान वे भी पूर्णतः शाकाहारी हैं और समुद्री घास पर निर्भर हैं।
– मेनाटी नामक एक अन्य समुद्री स्तनी और समुद्री गाय, ये ही दो समुद्री स्तनी हैं जो पूर्णतः शाकाहारी होते हैं। मेनाटी समुद्री गाय का निकट संबंधी है। यह समुद्री घास छिछले उष्णकटिबंधीय सागरों और तटों के पास उगती है।
– समुद्री गाय अत्यंत सौम्य स्वभाव का प्राणी है। सामान्यतः वे गहरे पानी में सतह से थोड़ा नीचे तैरती रहती हैं, जहां उन्हें धूप की गरमी भी लगती रहती है। रह-रहकर वे सांस लेने ऊपर आती जाती हैं। शाम के वक्त वे छिछले पानी की ओर चली आती हैं।
– समुद्री गाय समूहचारी प्राणी है। नर और मादा उम्र भर के लिए नहीं तो कम-से-कम प्रजनन काल की पूर्ण अवधि के लिए साथ रहते हैं। मादा 50 साल के अपने जीवनकाल में केवल पांच या छह बच्चों को जन्म देती है।
– एक बार में केवल एक बच्चा पैदा होता है। बच्चे पानी के किनारे किसी रेतीले भाग में दिए जाते हैं। यह स्थान तट से थोड़ी ही दूरी पर होता है मां अपने शिशु को दो साल तक दूध पिलाकर बड़ा करती है।
=> मनुष्य सबसे बड़ा खतरा :-
– इन शांतिप्रिय प्राणियों को मनुष्यों से ही सबसे बड़ा खतरा है। तटीय इलाकों के लोग उन्हें मांस, चर्बी और दांत के लिए मारते हैं। अब समुद्र प्रदूषण, पर्यटन एवं शक्तिशाली मोटर नौकाओं से भी उन्हें खतरा पैदा हो गया है। इन नौकाओं से भिड़ने से अनेक समुद्री गाएं घायल हुई हैं।
=> संकटग्रस्त प्राणियों की सूची में
इसे संकटग्रस्त प्राणियों की सूची में रखा गया है। उसकी नस्ल को बचाने के लिए उसके आवास-स्थलों को अधिक संरक्षण प्रदान करना होगा। अन्यथा समुद्री गाय एक किंवदंती बनकर रह जाएगी।
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