‘हेल्प अस ग्रीन’ को मिला UN सम्मान

चर्चा में क्यों?


काटोवाइस (पोलैंड) में 12 दिसंबर को एक भारतीय स्टार्टअप, जो मंदिरों के हज़ारों टन पुष्प अपशिष्ट को रिसाइकल करके गंगा नदी को साफ और स्वच्छ बनाने हेतु काम करता है, को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित किया गया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र के आह्वान के बाद उत्तर प्रदेश स्थित ‘हेल्प अस ग्रीन’ (HelpUsGreen) ने मंदिर के कचरे की समस्या के लिये दुनिया के पहले लाभदायक समाधान (profitable solution) के रूप में काम शुरू किया।
  • इस पहल द्वारा अब तक 1,260 महिलाओं को स्टार्टअप के माध्यम से समर्थन दिया गया है, इसी के परिणामस्वरूप वे 19 बच्चों जिनकी माँ मैनुअल स्केवेंजर्स के रूप में काम करती थीं, अब स्कूल जाने लगे हैं।
  • इस स्टार्टअप के द्वारा उत्तर प्रदेश के मंदिरों से दैनिक आधार पर 8.4 टन पुष्प अपशिष्ट एकत्र किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि देश भर में लोग प्रतिदिन 800 मिलियन मीट्रिक टन फूलों को उत्सव के लिये, सुखी जीवन के लिये आशीर्वाद की कामना हेतु देवताओं को उपहारस्वरूप मंदिरों में अर्पित करते हैं।
  • बाद में इन फूलों को गंगा नदी और भारत की अन्य पवित्र नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है जो दुर्भाग्य से नदियों के पारिस्थितिक तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
  • इस पहल के तहत एकत्र किये गए ‘फूलों की पुनर्चक्रण तकनीक’ के माध्यम से इन पवित्र फूलों से हस्तनिर्मित चारकोल/धुँआ मुक्त धूपबत्ती, कार्बनिक वर्मीकंपोस्ट और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग सामग्री आदि तैयार की जाती है।

पहल के लाभ

  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस भारतीय पहल के साथ काम करने वाली महिलाओं द्वारा अब तक 11,060 मीट्रिक टन मंदिरों से एकत्र अपशिष्ट यानी फूलों को रिसाइकल किया गया है।
  • मंदिरों के इस कचरे को रिसाइकल किये जाने से नदी में प्रवेश करने वाली 110 मीट्रिक टन रासायनिक कीटनाशकों को रोकने का प्रयास किया गया है तथा इससे 73 मैनुअल स्केवेंजर परिवारों की आय में कम-से-कम छह गुना वृद्धि हुई है।
  • इस पहल ने महिलाओं की भागीदारी और भारतीय सामुदायिक भावना को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पहचान दिलाई है।
  • इसके अतिरिक्त इस पहल ने हमारी आध्यात्मिकता में पहले से ही विद्यमान स्वच्छता के आदर्श को पुनःस्थापित करने का प्रयास किया है।