09-11-2018 DAILY CURRENT FOR UPSC/UPPSC/RAS/MPPSC AND OTHER STATE PCS EXAMS

09-11-2018 DAILY CURRENT FOR UPSC/UPPSC/RAS/MPPSC AND OTHER STATE PCS EXAM

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

विश्व का पहला ब्लू बॉण्ड (first blue bond of the world)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सेशेल्स ने विश्व का पहला ब्लू बॉण्ड जारी किया है। इस बॉण्ड के माध्यम से सेशेल्स ने अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों से 15 मिलियन डॉलर एकत्र कर लिये हैं। इस बॉण्ड के माध्यम से एकत्रित धनराशि द्वारा सतत् सामुद्रिक एवं मत्स्य पालन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रमुख बिंदु

  • इस बॉण्ड के माध्यम से कोई भी देश सामुद्रिक संसाधनों के सतत् उपयोग के लिये वित्त हेतु किसी भी प्रकार के पूंजी बाज़ार से धनराशि एकत्र कर सकता है।
  • इस बॉण्ड के माध्यम से सरकारी और निजी दोनों स्रोतों से निवेश प्राप्त होगा।
  • इस बॉण्ड के ज़रिये सेशेल्स को सतत् मत्स्य पालन को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
  • सेशेल्स द्वारा जारी किये गए ब्लू बॉण्ड को विश्व बैंक द्वारा 5 मिलियन डॉलर की गारंटी प्राप्त है।
  • उपरोक्त के अतिरिक्त इसे वैश्विक पर्यावरण सुविधा (Global Environment Facility – GEF) की तरफ से 5 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण भी उपलब्ध कराया गया है।
  • इस बॉण्ड के माध्यम से प्राप्त आय में से कम से कम 12 मिलियन डॉलर स्थानीय मछुआरा समुदायों को कम ब्याज वाले ऋण के रूप में आवंटित किये जाएंगे, जबकि शेष राशि का उपयोग सतत् मतस्य परियोजनाओं के शोध हेतु वित्तपोषण के लिये किया जाएगा। इस निधि का प्रबंधन सेशेल्स विकास बैंक (Development Bank of Seychelles – DBS) करेगा।
  • इंडोनेशिया और अन्य द्वीपीय राष्ट्र सतत् मत्स्य पालन और समुद्री परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये बॉण्ड बाज़ार को टैप करने में एक मॉडल के रूप में सेशल्स द्वारा जारी ब्लू बॉण्ड संरचना का उपयोग कर सकते हैं।
  • ब्लू ग्रांट्स निधि के ज़रिये अनुदान भी दिया जाएगा। इस निधि का प्रबंधन सेशेल्स के संरक्षण एवं जलवायु अनुकूलन न्यास द्वारा किया जाएगा।

बॉण्ड से प्राप्त आय का उपयोग

  • संरक्षित समुद्री क्षेत्रों का विस्तार करने के लिये।
  • बेहतर मत्स्य पालन के लिये।
  • सेशेल्स में नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) का विकास करने के लिये।

पृष्ठभूमि

  • आधिकारिक तौर पर इस बॉण्ड की शुरुआत 9 अक्तूबर, 2018 को की गई थी और 10 साल की अवधि वाले इस बॉण्ड को संयुक्त राज्य अमेरिका के तीन सामाजिक प्रभाव वाले निवेशकों- कैलवर्ट इंपैक्ट कैपिटल, नुवेन (nuveen) और प्रुडेंशियल को सीधे स्टैंडर्ड चार्टर्ड जिसने इस कार्य में प्लेसमेंट एजेंट के रूप में काम किया, के माध्यम से बेचा गया।

सेशेल्स

  • सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित 115 द्वीपों का एक द्वीपसमूह है।
  • यह कई समुद्र तटों, प्रवाल भित्तियों और प्राकृतिक भंडार के साथ-साथ दुर्लभ जानवरों जैसे कि विशाल अल्टबरा कछुओं का घर है।
  • यह दुनिया के विशाल जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है।
  • यहाँ पर्यटन के बाद सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण उद्योग मत्स्य पालन है।

भारतीय विरासत और संस्कृति

ढोकरा शिल्प कला (Dhokra sculptures)

संदर्भ

ढोकरा कला दस्तकारी की एक प्राचीन कला है। बस्तर ज़िले के कोंडागाँव के कारीगर ढोकरा मूर्तियों पर काम करते हैं जिसमें पुरानी मोम-कास्टिंग तकनीक का उपयोग करके मूर्तियाँ बनाईं जाती हैं।

ढोकरा शिल्पकारों की समस्या

  • ढोकरा कारीगरों के अनुसार, वर्तमान में इन कारीगरों की सबसे बड़ी समस्या है- जीएसटी। नई टैक्स प्रणाली का पालन कर पाना मुश्किल है और इसके कारण इनके द्वारा निर्मित मूर्तियों की बिक्री लगभग आधी हो गई है।
  • वर्तमान बाज़ार में इस कला के पारंपरिक स्वरुप बदल गया है। मधुमक्खियों से प्राप्त मोम जो कि इस कला की प्राथमिक आवश्यकता थी, अब उसका अधिक उपयोग नहीं किया जाता है, क्योंकि यह इतनी महँगी हो चुकी है कि इसे खरीदना आसान नहीं है।
  • पारंपरिक पशु मूर्तियों- घोड़े, हाथी, ऊँट और ऐसी ही अन्य मूर्तियाँ- धीरे-धीरे पेपरवेट्स, पेन होल्डर, मोमबत्ती होल्डर जैसी अधिक कार्यात्मक चीज़ों द्वारा प्रतिस्थापित की जा रही हैं।

पृष्ठभूमि

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ विभिन्न कलाओं व संस्कृतियों का मिश्रण देखने को मिलता है। सभी प्रकार की कलाएँ किसी-न-किसी रूप में इतिहास से जुडक़र अपनी गौरवशाली गाथा का बखान करती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले की ढोकरा कला भी इन्हीं कलाओं में से एक है। इस कला का दूसरा नाम घढ़वा कला भी है। यह कला प्राचीन होने के साथ-साथ असाधारण भी है।

  • इस कला में तांबा, जस्ता व रांगा (टीन) आदि धातुओं के मिश्रण की ढलाई करके मूर्तियाँ, बर्तन, व रोज़मर्रा के अन्य सामान बनाए जाते हैं।
  • इस प्रक्रिया में मधुमक्खी के मोम का इस्तेमाल होता है। इसलिये इसे मोम क्षय विधि (Vax Loss Process) भी कहते हैं।
  • इस कला का उपयोग करके बनाई गई मूर्ति का सबसे पुराना नमूना मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त नृत्य करती हुई लड़की की प्रसिद्ध मूर्ति है।

जीव विज्ञान और पर्यावरण

सनस्क्रीन पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश (First country to ban sunscreen)

संदर्भ

वैज्ञानिकों का मानना है कि सनस्क्रीन में मौजूद रसायन प्रवाल भित्तियों (coral reefs) को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाते हैं। वैज्ञानिकों के इस अध्ययन का अनुसरण करते हुए पश्चिमी प्रशांत के देश पलाऊ ने सनस्क्रीन पर प्रतिबंध लगा दिया है और ऐसा करने वाला वह पहला देश बन गया है।

प्रमुख बिंदु

  • यह प्रतिबंध वर्ष 2020 से प्रभावी होगा। इस प्रतिबंध के अंतर्गत देश में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के पास यदि सनस्क्रीन है तो उसे ज़ब्त कर लिया जाएगा और यदि कोई खुदरा विक्रेता इसे बेचता है तो उस पर 1,000 डॉलर तक ज़ुर्माना लगाया जा सकता है।
  • हालाँकि जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर की प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुँचा है लेकिन इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि सनस्क्रीन में निहित रसायन, जो अलग-अलग माध्यम से महासागर में प्रवेश करते हैं, भी प्रवाल भित्तियों को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाते हैं।
  • पलाऊ के राष्ट्रपति के अनुसार, यह एक सही समय पर लिया गया फैसला है। इस फैसले के पीछे प्रमुख कारक 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट थी जिसमें देश की यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में से एक जेलीफ़िश झील में सनस्क्रीन उत्पादों को व्यापक रूप से पाया गया था।

प्रवाल भित्तियों पर सनस्क्रीन का प्रभाव

  • यह अनुमान लगाया गया है कि हर साल दुनिया के महासागरों में 14,000 टन सनस्क्रीन महासागरों में समाहित हो जाता है।
  • ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं के अनुसार, पानी में सनस्क्रीन की कम सांद्रता भी युवा प्रवाल के विकास को बाधित कर सकती है।
  • विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि सनस्क्रीन में रसायन स्थानीयकृत कोरल ब्लीचिंग का कारण बन सकते हैं और उनके हार्मोनल सिस्टम में हस्तक्षेप करके मछली प्रजनन को भी बाधित कर सकते हैं।
  • 2015 के एक अध्ययन में पाया गया कि सनस्क्रीन में मौजूद ऑक्सीबेंज़ोन प्रवाल वृद्धि को रोकता है और यह भित्तियों के भीतर रहने वाले शैवाल के लिये ज़हरीला होता है।

पलाऊ के बारे में

  • पलाऊ पश्चिमी प्रशांत महासागर में माइक्रोनेशिया क्षेत्र का हिस्सा है तथा 500 से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह है।
  • कोरोर द्वीप जिसे कोरोर के नाम से भी जाना जाता है, देश की पूर्व राजधानी है और द्वीपों का वाणिज्यिक केंद्र है।
  • इसकी वर्तमान राजधानी बाबेल्डाओब (Babeldaob) है।

भारत-विश्व

भारत पुनः ITU परिषद का सदस्य चुना गया (India elected as a Member of the ITU)

चर्चा में क्यों?

भारत को अगले 4 वर्षों की अवधि (2019-2022) के लिये पुनः अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) परिषद का सदस्य चुना गया है। परिषद का चुनाव दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में चल रहे ITU परिपूर्णता सम्मेलन (ITU Plenipotentiary Conference-2018) के दौरान आयोजित किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • भारत 165 वोट प्राप्त करके एशिया-आस्ट्रेलेशिया क्षेत्र से परिषद के लिये चुने गए 13 देशों में तीसरे स्थान पर रहा और वैश्विक रूप से परिषद के लिये चुने गए 48 देशों में इसका स्थान 8वाँ रहा।
  • ITU के 193 सदस्य देश, परिषद में प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ

  • इसकी स्थापना 17 मई, 1865 को पेरिस में हुई थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union- ITU) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की शीर्ष संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है।
  • विश्व के 193 देश ‘अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ’ के सदस्य हैं।
  • इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।

प्रमुख कार्य

  • सुचारु सेवा के साथ-साथ दूरसंचार की यथासंभव न्यूनतम दरें बनाए रखने की कोशिश करना।
  • दूरसंचार संघ के आर्थिक प्रशासन को स्वतंत्र एवं सुस्पष्ट आधार प्रदान करना।
  • यह संचार और दूरसंचार के अंतर्राष्ट्रीय मानकों का नियमन करती है।
  • रेडियो आवृत्तियों को निश्चित करना तथा निर्दिष्ट रेडियो आवृत्तियों का आलेखन करना।
  • दूरसंचार के दौरान जीवन को किसी प्रकार से क्षति न पहुँचे, इस दृष्टि से विभिन्न उपाय खोजना तथा उन उपायों को लागू करने के उपरांत उनका विस्तार करना।
  • दूरसंचार प्रणाली संबंधी विभिन्न अध्ययन करके उपयुक्त सिफारिशें करना तथा इससे संबंधित विभिन्न सूचनाओं को इकट्ठा करके प्रकाशित करना, ताकि सदस्य देश उक्त सूचनाओं से लाभ उठा सकें।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स : 08 नवंबर, 2018

संघवारी‘ मतदान केंद्र

चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं को विधानसभा चुनाव में मतदान हेतु प्रोत्साहित करने के लिए ‘संघवारी’ मतदान केंद्रों की स्थापना की है।

  • छत्तीसगढ़ की बोली में ‘संघवारी’ का अर्थ है ‘मित्र’। अतः इन मतदान केंद्रों पर केवल महिला अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी जिसमें सुरक्षाकर्मी और पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।
  • चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 5 संघवारी मतदान केंद्रों की स्थापना की है।
  • उलेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में मतदाताओं की कुल संख्या 1 करोड़ 85 लाख है जिसमें 92 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। राज्य में 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम

नाम बदलने की प्रक्रिया को जारी रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में नव निर्मित इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदल कर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम कर दिया है।

  • नामकरण के बाद इस स्टेडियम का उद्घाटन 6 नवंबर, 2018 को किया गया।
  • इस स्टेडियम 50,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है।
  • स्टेडियम का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है क्योंकि वह 1991 और 2009 के बीच लगातार पाँच बार लखनऊ से सांसद चुने गए थे।