25 APRIL 2018 UPSC CURRENT

MCQ’S
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नासा द्वारा ट्रांसिसटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सेटेलाइट (टेस) यान किस उद्देश्य से बनाया गया है?

A) अंतरिक्ष में उन ग्रहों की खोज करना जहाँ जीवन संभव है।
B) हमारे सौरमंडल में उपस्थित ग्रहों की बनने की प्रक्रिया व उनके परिक्रमण का सटीक अध्ययन करना।
C) सूर्य का पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।
D) बृहस्पति के उपग्रहों की वास्तविक संख्या ज्ञात करने के लिये।

उत्तर (a)
व्याख्याः

ट्रांसिसटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सेटेलाइट (टेस)

Tess

  • नासा ने एक नए ग्रह खोजी यान ट्रांसिसटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सेटेलाइट (टेस) का निर्माण किया है। टेस का उद्देश्य उन ग्रहों को खोजना है जहाँ जीवन की संभावना है। कुल मिलाकर एलियन जीवन खोजने के लिये यह वैज्ञानिकों का नया अभियान है।
  • टेस अंतरिक्ष में जीवन की संभावना वाले अनेक बाहरी ग्रहों का पता लगाएगा। भविष्य में भेजा जाने वाला यह यान विभिन्न ग्रहों के वायुमंडल की संरचना का अध्ययन करके वहाँ जीवन के संकेत खोज सकता है।
  • यह यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से पृथ्वी के इर्द-गिर्द 13.7 दिन में अपनी कक्षा में स्थापित हो जाएगा।
  • भविष्य में भेजे जाने वाला यह मिशन हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों के वायुमंडल की संरचना का अध्ययन करके वहाँ जीवन के संकेत खोज सकता है।
  • यह उपग्रह अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के इंजीनियरों ने विकसित किया है। इसका मकसद हमारे सौरमंडल के आसपास हज़ारों बाहरी ग्रहों को खोजना है, जिनमें से कम-से-कम 50 ग्रहों का आकार पृथ्वी जितना है। इस अंतरिक्ष यान का आकार एक रेफ्रिजरेटर से बड़ा नहीं है। इसमें चार कैमरे लगे हुए हैं जो आसमान में निकटस्थ चमकीले तारों का सर्वे करके उनका चक्कर काटने वाले ग्रहों के चिह्न खोजेंगे।
  • टेस यान समूचे आसमान को स्कैन करने में दो साल लगाएगा। उसके पर्यवेक्षण की परिधि में दो करोड़ से अधिक तारे आ सकते हैं। पर्यवेक्षण के पहले वर्ष में दक्षिणी आसमान के 13 सेक्टरों की स्कैनिंग की जाएगी। दूसरे वर्ष में उत्तरी आसमान के 13 सेक्टरों की स्कैनिंग की जाएगी। यह अंतरिक्षयान तारों की चमक में होने वाले परिवर्तनों को नोट करेगा। जब कोई किसी तारे के सामने से गुजरता है तो उसकी चमक कम होने लगती है। वैज्ञानिक तारों की चमक में नियमित परिवर्तन के आधार पर उनके इर्द-गिर्द ग्रहों की मौजूदगी का अनुमान लगाते हैं। एमआईटी की टेस साइंस टीम कम-से-कम 50 छोटे ग्रहों के द्रव्यमान की नापजोख करेगी जिनके अर्धव्यास पृथ्वी के आकार के चार गुना से कम हैं।
  • टेस द्वारा पृथ्वी जैसे ग्रहों की पहचान किये जाने के बाद वैज्ञानिक अपनी दूरबीनें उनकी तरफ लक्षित कर उनके वायुमंडलों का पता लगा सकते हैं और जीवन के चिह्न खोज सकते हैं।
[2]

दर्पण परियोजना के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः

  1. यह परियेाजना ग्रामीण आबादी के वित्तीय समावेशन हेतु आरंभ की गई है।
  2. यह परियोजना वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर (a)
व्याख्याः

दर्पण परियोजना

darpan

  • संचार मंत्रालय द्वारा सेवा गुणवत्ता में सुधार लाने, सेवाओं में मूल्यवर्द्धन तथा बैंक सेवाओं से वंचित ग्रामीण आबादी के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये ‘दर्पण – डिजिटल एडवांसमेंट ऑफ रूरल पोस्ट ऑफिस फॉर ए न्यू इंडिया” (DARPAN – “Digital Advancement of Rural Post Office for A New India) परियोजना का शुभारंभ किया गया। अतः पहला कथन सत्य है व दूसरा कथन असत्य है।
  • 1400 करोड़ रुपए की इस परियोजना का लक्ष्य प्रत्येक पोस्ट ऑफिस की शाखा के पोस्टमास्टर (Branch Postmaster – BPM) को कम शक्ति वाली तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। ताकि ग्रामीण आबादी तक डाक विभाग की पहुँच में विस्तार हो।
  • इसके अंतर्गत सभी राज्यों के ग्रामीण उपभोक्ताओं हेतु सेवा में सुधार के लिये लगभग 1.29 लाख डाकघरों को शामिल किया जाएगा।
  • इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही तकरीबन 43,171 शाखा डाकघरों द्वारा दर्पण परियोजना को अपनाया गया, ताकि ग्रामीण आबादी के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को कम-से-कम समय में प्राप्त किया जा सके।

इस परियोजना के लाभ: 

  • इससे सभी वित्तीय प्रेषणों, बचत खातों, ग्रामीण डाक जीवन बीमा और नकद प्रमाण पत्रों में वृद्धि होगी।
  • इससे स्वचालित बुकिंग-अनुमति तथा खाता योग्य सामग्री की डिलीवरी हेतु डाक संचालनों की प्रक्रिया में सुधार होगा।
  • खुदरा डाक व्यवसाय से राजस्व में वृद्धि होगी।
  • मनरेगा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं हेतु वितरण व्यवस्था को और अधिक सहज बनाया जा सकेगा।
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संयुक्त राष्ट्र आर्थिक-सामाजिक परिषद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. यह परिषद सामान्य सभा को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग एवं विकास कार्यक्रम में सहयोग करता  है।
  2. 2018 में इस परिषद में हुए चुनाव में एशिया प्रशांत वर्ग में जापान को सबसे अधिक वोट मिले।
  3. 2018 में हुए चुनाव में भारत ने गैर-सरकारी संगठन (NGO) के लिये चुनाव जीता है।

कूटः

A) 1 और 2
B) केवल 2
C) 1, 2 और 3
D) केवल 2 और 3

उत्तर (c)
व्याख्याः

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक-सामाजिक परिषद

ECOSOC

  • संयुक्त राष्ट्र आर्थिक-सामाजिक परिषद संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों में से है। संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं- महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक और सामाजिक परिषद, प्रन्यास परिषद, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, सचिवालय।
  • संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक-सामाजिक परिषद सतत् विकास के तीन आयामों (आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण) के लिये काम करता है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक-सामाजिक परिषद (ECOSOC) संयुक्त राष्ट्र संघ के कुछ सदस्य राष्ट्रों का एक समूह है, जो सामान्य सभा को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग एवं विकास कार्यक्रमों में सहायता करता है। अतः पहला कथन सत्य है। 
  • यह परिषद सामाजिक समस्याओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति को प्रभावी बनाने के लिये प्रयासरत है। यह विश्व की जनसंख्या के जीवन में सुधार हेतु गरीबों, घायलों एवं अशिक्षितों की सहायता करके अंतर्राष्ट्रीय शांति बहाली के प्रयास करती है। यह अंतर्राष्ट्रीय मामलों में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य आदि मामलों का अध्ययन करती है। इसकी स्थापना 1945 में गई थी तथा वर्तमान में इसके 193 देश सदस्य हैं।
  • 2018 में इस परिषद में हुए चुनाव में एशिया प्रशांत वर्ग में जापान को सबसे अधिक वोट मिले तथा इसके बाद इस वर्ग में भारत दूसरा देश है जिसे सबसे अधिक वोट प्राप्त हुआ है। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।
  • भारत ने 16 अप्रैल 2018 को संयुक्त राष्ट्र की एनजीओ समिति समेत आर्थिक और सामाजिक परिषद की 6 संस्थाओं के चुनाव में जीत दर्ज की। इनमें से पाँच में भारत को निर्विरोध चुन लिया गया। भारत ने यूएन कार्यकारी बोर्डों की अन्य अहम सीटों, जैसे- यूएन विकास कार्यक्रम, यूएन जनसंख्या निधि और यूएन ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विस के लिये हुए चुनाव में भी जीत दर्ज की है। भारत का कार्यकाल जनवरी 2019 से शुरू होगा और इसका कार्यकाल तीन साल का होता है।
  • यूएन की एनजीओ समिति को बहुत प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि यह सलाह देने के साथ गैर सरकारी संगठनों के कामकाज पर नजर रखती है। किसी गैर सरकारी संगठन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार भी इस समिति के पास है। भारत इस समिति में चार साल तक अपनी सेवाएं देगा।

 

[4]

भारतीय विधि आयोग के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः

  1. यह एक संवैधानिक संस्था है।
  2. प्रथम विधि आयोग का गठन लार्ड मैकाले की अध्यक्षता में हुया था।
  3. भारत में अब तक 15 विधि आयोगों का गठन हो चुका है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) केवल 2 और 3

उत्तर (c)
व्याख्याः

  • भारतीय विधि आयोग एक ‘गैर-सांविधिक निकाय’ (Non-Statutory Body) है जो विधि एवं न्याय मंत्रालय के करीबी समन्वय में तथा उसके सामान्य निर्देशों के अंतर्गत कार्य करता है। अतः पहला कथन असत्य है।
  • भारत में प्रथम विधि आयोग लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में 1833 के चार्टर अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1834 में स्थापित किया गया था। इसके उपरांत वर्ष 1853, 1861 तथा 1879 में क्रमशः द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ विधि आयोगों का गठन किया गया। भारतीय सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संपत्ति स्थानांतरण अधिनियम इत्यादि इन पहले चारों विधि आयोगों के ही परिणाम हैं। अतः दूसरा कथन सत्य है।
  • 1955 में अटॉर्नी जनरल श्री एम.सी. सीतलवाड़ की अध्यक्षता में स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि आयोग की स्थापना की गई। तब से अब तक तीन-वर्षीय कार्यकाल वाले कुल 21 विधि आयोगों का गठन हो चुका है। अतः तीसरा कथन भी असत्य है।
  • 15 मार्च, 2016 को केंद्र सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. बलबीर सिंह चौहान के अध्यक्षता में 21वें विधि आयोग की नियुक्त की गई। 21वें विधि आयोग का कार्यकाल 1 सितंबर, 2015 से प्रभावी होगा तथा यह तीन वर्ष का (31 अगस्त, 2018 तक) होगा।
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‘अटल टिंकरिंग लैब’ पहल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. इस पहल की शुरुआत मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा की गई है।
  2. इसके तहत लैब में कृषि से संबंधित हुए रिसर्च को किसानों तक पहुँचाया जाएगा।

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2


उत्तर (d)
व्याख्याः

अटल टिंकरिंग लैब

ATAL

  •  नीति आयोग ने अपने प्रमुख कार्यक्रम अटल इनोवेशन मिशन (Atal innovation Mission) के हिस्से के रूप में अटल टिंकरिंग लेबोरेटरीज (Atal Tinkering Lab) नामक पहल की शुरुआत की है।
  •  माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिये नीति आयोग ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूलों में लैब स्थापित करने की योजना बनाई है। अतः पहला व दूसरा दोनों कथन असत्य हैं।
  • इस योजना के तहत सरकारी, स्थानीय निकाय से संचालित स्कूल और ट्रस्ट या सोसाइटी द्वारा संचालित 6वीं से 12वीं तक के स्कूल अपने यहाँ लैब स्थापित करने के लिये आवेदन कर सकेंगे। खास बात यह है कि अटल लैब स्थापित करने में उन्हीं स्कूलों को वरीयता दी जाएगी जिनके छात्रों और शिक्षकों की हाजिरी पिछले तीन वर्षों में 75 प्रतिशत से अधिक है। साथ ही बोर्ड परीक्षाओं बीते तीन वर्षों के रिजल्ट को भी संज्ञान में लिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल में उपस्थित ढाँचागत सुविधाएँ जैसे कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और प्ले-ग्राउंड की जानकारी भी स्कूलों को आवेदन में देनी होगी। हालाँकि कम से कम 25 प्रतिशत लैब सरकारी स्कूलों में ही स्थापित की जाएंगी।
  •  स्कूलों को लैब की स्थापना के लिये कुल 20 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी जिसमें से 10 लाख रुपए शुरु में तथा अन्य 10 लाख रुपए पांच साल तक उसके रख-रखाव के लिये दिये जाएंगे। मोदी सरकार के अटल इनोवेशन मिशन के तहत चलने वाली नीति आयोग की इस महत्त्वाकांक्षी योजना का मकसद 10 बच्चों को ‘निओटेरिक इनोवेटर’ के रूप में निखारना है। अंग्रेजी भाषा के ‘निओटेरिक’ शब्द का हिन्दी में अर्थ होता है- एक ऐसा व्यक्ति जो नए विचारों की वकालत करता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बालमन से ही प्रतिभा को निखार कर बच्चों को आविष्कारक बनाया जाए।
  • अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के विभिन्न पहलुओं को समझाने के साथ-साथ उपकरणों और औजारों का इस्तेमाल कर कुछ नया करने का अवसर दिया जाएगा।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.

दीव स्‍मार्ट सिटी पहला शत्-प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा वाला नगर

Smart City

दीव स्‍मार्ट सिटी भारत का पहला ऐसा नगर बन गया है जो दिन के समय शत्- प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होता है। हरे-भरे और स्‍वच्‍छ रहने के लिये इस नगर ने दूसरे नगरों के लिये उदाहरण प्रस्‍तुत किया है। पिछले वर्ष तक दीव अपनी ऊर्जा आवश्‍यकताओं का 73 प्रतिशत गुजरात से आयात करता था।

  • इसके समाधान के लिये दीव ने दो तरीके अपनाए। पहला- 50 एकड़ की पथरीली बंजर भूमि पर 9 मेगावाट शक्‍ति की सौर ऊर्जा परियोजना की स्‍थापना की गई है।
  • इसके अलावा 79 सरकारी भवनों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जिससे 1.3 मेगावाट विद्युत पैदा होती है।
  • सौर क्षमता बढ़ाने के लिये दीव ने अपने नागरिकों को छत पर 1-5 किलोवाट की क्षमता वाले सौर पैनल लगाने पर 10,000-50,000 रुपए की सब्‍सिडी देने का प्रस्‍ताव दिया है।
  • दीव प्रत्‍येक वर्ष 13,000 टन कार्बन उत्‍सर्जन की बचत कर रहा है। कम लागत वाले सौर ऊर्जा के कारण दीव ने बिजली की घरेलू दरों में पिछले वर्ष 10 प्रतिशत तथा इस वर्ष 15 प्रतिशत की कटौती की है।
  • बंगलुरू स्‍मार्ट सिटी में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिये इलेक्‍ट्रॉनिक सिटी टाउनशिप ऑथोरिटी (ईएलसीआईटीए) की सहायता से यातायात प्रबंधन समाधान के एक मूल प्रारूप का परीक्षण किया जा रहा है।
  • यह यातायात की वैसी जानकारी प्रदान करेगा, जो वर्तमान में उपलब्‍ध नहीं है। इसके अंतर्गत कई कैमरों की मदद से वीडियो बनाए जाएंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता के उपयोग से इसका प्रसंस्‍करण किया जाएगा, ताकि वास्‍तविक समय में स्‍वचालित तरीके से वाहन की पहचान, यातायात के घनत्‍व का आकलन, और ट्रैफिक लाइट को नियंत्रित किया जा सके।
  • आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने, शहरी सार्वजनिक स्‍थलों का विस्‍तार करने तथा क्षेत्र को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाने के लिये जयपुर स्‍मार्ट सिटी लिमिटेड (जेएससीएल) ने गुलाबी शहर के हृदय में स्‍थित चौड़े रास्‍ते में रात्रि बाज़ार विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिये जेएससीएल 700 दुकानदारों का पंजीकरण करेगा।
  • ये दुकानदार 9:00 बजे रात्रि से 1:00 बजे मध्‍य रात्रि तक अपनी दुकान चला सकेंगे। इस परियोजना से नागरिकों को कार्यालय के समय के बाद मनोरंजन और खरीदारी का अवसर मिलेगा।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

NDMA

राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) पटना के लोक नायक जयप्रकाश हवाई अड्डे पर एक पाँच-दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। इस पाँच-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्‍य सीआरबीएन यानी रासायनिक, जीव वैज्ञानिक रेडियोधर्मी तथा परमाणु सामग्री से उत्‍पन्‍न आपात स्थिति से निपटने की तैयारी में वृद्धि करना है।

  • यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (एएआई) तथा इंस्टीट्यूट ऑफ न्‍यूक्लियर मेडिसन एंड एलाइड सांइसेज (इन्‍मास) के सहयोग से चलाया जा रहा है।
  • इससे पहले इस तरह का कार्यकम चेन्‍नई, कोलकता, मुंबई तथा वाराणसी में आयोजित किया जा चुका है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) भारत में आपदा प्रबंधन के लिये एक सर्वोच्च निकाय है, जिसका गठन ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ के तहत किया गया था।
  • यह आपदा प्रबंधन के लिये नीतियों, योजनाओं एवं दिशा-निर्देशों का निर्माण करने के लिये एक ज़िम्मेदार संस्था है, जो आपदाओं के वक्त, समय पर एक प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है।
  • भारत के प्रधानमंत्री द्वारा इस प्राधिकरण की अध्यक्षता की जाती है।

उद्देश्य

  • इस संस्था का उद्देश्य एक समग्र, प्रो-एक्टिव, प्रौद्योगिकी संचालित टिकाऊ विकास रणनीति के माध्यम से सुरक्षित और डिजास्टर रेसिलिएंट भारत का निर्माण करना है, जिसमें सभी हितधारकों को शामिल किया गया है।
  • यह आपदा की रोकथाम, तैयारी एवं शमन की संस्कृति को बढ़ावा देती है।
अंतरराष्‍ट्रीय एसएमई सम्‍मेलन 2018

SME

नई दिल्‍ली में 22 से 24 अप्रैल, 2018 तक आयोजित किये जा रहे अब तक के पहले अंतरराष्‍ट्रीय एसएमई सम्‍मेलन 2018 में 37 देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। भाग लेने वाले प्रमुख देशों में ऑस्‍ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, फ्राँस, इंडोनेशिया, इटली, केन्‍या, कोरिया, मलेशिया, मोरक्‍को, नाइज़ीरिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, स्‍पेन, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका एवं यूएई शामिल हैं।

  • इन देशों के प्रतिनिधिमंडल कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, रणनीतिक रक्षा प्रशिक्षण, शिक्षा, लॉजिस्टिक, डिजिटल मनोरंजन एवं अपशिष्‍ट प्रबंधन के क्षेत्रों में अपने देशों के लघु उद्यमों का प्रतिनिधित्‍व कर रहे हैं। इस सम्‍मेलन में भारत के 400 से अधिक उद्यमी भी भाग ले रहे हैं।
  • सम्‍मेलन के दौरान ‘सीमाओं से आगे’ नामक एक खादी फैशन शो का भी आयोजन किया जाएगा।
  • इस सम्‍मेलन में महिला उद्यमियों के लिये भी एक विशेष सत्र रखा गया है, जहाँ सफल महिला व्‍यवसायी महिला उद्यमियों के लिये टिकाऊ आजीविका के निर्माण पर चर्चा करेंगी।
  • एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के सबसे गतिशील क्षेत्रों के रूप में उभरा है और अपशिष्‍ट प्रबंधन, रत्‍न एवं जवाहरात, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्‍करण तथा ऑटोमोटिव उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों में व्‍यवसाय करने की सरलता के कारण विश्‍व भर में इसने अपनी पहचान बनाई है।
‘नैरो मनी’ और ‘ब्रॉड मनी’

Broad Money

डिफ्लेशन और इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिये आरबीआई ‘नैरो मनी’ और ‘ब्रॉड मनी’ के रूप में धन को वर्गीकृत कर मनी सप्लाई पर नज़र रखता है।

  • नैरो मनी : ‘नैरो मनी’ के दो पैमाने होते हैं ‘एम1’ और ‘एम2’।

♦ ‘एम1’ में जनता के पास मौजूद करेंसी, बैंकों के पास डिमांड डिपॉजिट यानी बचत और चालू खातों में जमा राशि और आरबीआई के पास जमा अन्य राशियों को शामिल किया जाता है।
♦ इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष व विश्व बैंक के पास मौजूद भारत की जमाराशियों और इंटर बैंक डिपॉजिट को शामिल नहीं किया जाता है।
♦ ‘एम1’ में जब डाकघर की जमा बचत राशियों को जोड़ लिया जाता है तो उस योग को ‘एम2’ कहते हैं।

  • ब्रॉड मनी : ‘ब्रॉड मनी’ के भी दो सूचक होते हैं ‘एम3’ और ‘एम4’। इन दोनों को ही ब्रॉड मनी कहते हैं।

♦ ‘एम3’ में ‘एम1’ एवं बैंकों के पास जमा टाइम डिपॉजिट यानी फिक्स्ड और रिकरिंग डिपॉजिट को शामिल किया जाता है।
♦ ‘ब्रॉड मनी’ का दूसरा सूचक ‘एम4’ होता है जिसमें ‘एम3’ और डाकघरों में जमा सभी तरह के डिपॉजिट्स शामिल होते हैं। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) की राशि को शामिल नहीं किया जाता है।
♦ अर्थव्यवस्था में मनी सप्लाई पर नज़र रखने का सबसे प्रचलित तरीका ‘एम3’ है। ‘एम1’ में नकदी का योगदान सबसे अधिक होता है जबकि ‘एम4’ में यह सबसे कम होता है।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.