26 APRIL 2018 UPSC CURRENT

 

ग्रेफाइन शल्य प्रतिरोपण पर बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है

graphite-surgery

ग्रेफाइन कार्बन का एक प्रकार है जिसमें कार्बन अणुओं की एक परत होती है। परत में कार्बन के अणु षटकोणीय जाली के रूप में व्यवस्थित होते हैं। अनुसंधानकर्त्ताओं में भारतीय मूल का एक शोधकर्त्ता भी शामिल है।

  • स्वीडन में क्लैमर्स प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं के अनुसार, कूल्हे और घुटने के प्रतिरोपण या दंत प्रतिरोपण जैसे सर्जिकल प्रतिरोपण में हाल के वर्षों में वृ्द्धि हुई है। इस तरह की प्रक्रियाओं में बैक्टीरिया संक्रमण का जोखिम हमेशा रहता है।
  • ग्रेफाइन फ्लेक्स की परत एक सुरक्षात्मक सतह का निर्माण करती है जो बैक्टीरिया को जुड़ने नहीं देती है। ग्रेफाइन शल्य प्रतिरोपण जैसी प्रक्रियाओं के दौरान संक्रमण को रोकने में सहायक होती है।
  • क्लैमर्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, वैज्ञानिक संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को रोकना चाहते हैं।
  • अगर ऐसा न किया जाए तो एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है, जो सामान्य जीवाणुओं के संतुलन को बाधित कर सकती है और रोगाणुओं में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी क्षमता पैदा का खतरा भी बढ़ा सकती है।
  • यह अध्ययन पत्र ‘एडवांसड मैटेरियल्स इंटरफेस’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ।
शंघाई सहयोग संगठन

Shanghai

भारत, पहली बार शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मं‍त्रियों की बैठक में भाग ले रहा है। एससीओ के रक्षा मंत्रियों की यह बैठक चीन के पेइचिंग शहर में आयोजित की गई।

शंघाई सहयोग संगठन

  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO-Shanghai Cooperation Organisation) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संगठन है। यूरेशिया का अर्थ है यूरोप और एशिया का संयुक्त महाद्वीपीय भूभाग।
  • इस संगठन की शुरुआत शंघाई-5 के रूप में 26 अप्रैल, 1996 को हुई थी। शंघाई-5 चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान देशों का संगठन था।
  • 15 जून, 2001 को जब उज़्बेकिस्तान को इसमें शामिल किया गया तो इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया।
  • हेड ऑफ स्टेट काउंसिल इसका शीर्षस्थ नीति-निर्धारक निकाय है।
  • चीनी और रूसी शंघाई सहयोग संगठन की आधिकारिक भाषाएँ हैं।
वायु गुणवत्ता को मापने के लिये नई प्रणाली

particulate-matter

भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और फिनलैंड के साथ मिलकर एक प्रदूषण-पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने का प्रयास कर रहा है जो पीएम (particulate matter) स्तर के विषय में कम-से-कम दो दिन पहले और जितना संभव हो उससे अधिक रिज़ॉल्यूशन पर अनुमान लगाने में मदद करेगा।

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) द्वारा इस कार्य में समन्वय किया जाएगा। इस कार्य योजना के एक सिस्टम के आगामी सर्दी तक कार्यान्वित होने की संभावना है।
  • वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान, पुणे द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान प्रणाली (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research – SAFAR) दिल्ली, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद में प्रदूषण के रुझानों के शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करता है।

सफर क्या है?

  • यह इन शहरों के लिये एक दिन पहले से ही संभावित वायु गुणवत्ता प्रोफ़ाइल उत्पन्न करता है।
  • इस प्रणाली से वायु प्रदूषण का अग्रिम तीन दिनों के लिये स्थान विशेष का अनुमान लगाने के साथ ही लोगों को सावधानी के उपाय करने में मदद करने हेतु परामर्श देना संभव हो पाया है।
  • यह प्रणाली लोगों को उनके पास के निगरानी स्टेशन पर हवा की गुणवत्ता को देखने और उसके अनुसार उपाय अपनाने का फैसला लेने में मदद करती है।
  • ‘सफर’ के माध्यम से लोगों को वर्तमान हवा की गुणवत्ता, भविष्य में मौसम की स्थिति, खराब मौसम की सूचना देना और संबद्ध स्वास्थ्य परामर्श के लिये जानकारी तो मिलती ही है, साथ-साथ अल्ट्रा वायलेट सूचकांक के संबंध में हानिकारक सौर विकिरण की तीव्रता की जानकारी भी मिलती है।

नई व्यवस्था

  • फिनिश मौसम विज्ञान संस्थान (Finnish Meteorological Institute) और अमेरिका के राष्ट्रीय महासागर तथा वायुमंडलीय प्रशासन (U.S.’ National Oceanic and Atmospheric Administration) की विशेषज्ञता के साथ संयुक्त रूप से विकसित होने वाली नई प्रणाली, एक अलग मॉडलिंग दृष्टिकोण के साथ-साथ सफर मॉडल में नियोजित कंप्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग करेगी।
  • ‘सफर’ इस नई व्यवस्था के आधार के रूप में कार्य करेगा लेकिन यह नई प्रणाली के अंतर्गत (इसके लिये भारतीय वैज्ञानिकों को अलग से विशेष परीक्षण देने की आवश्यकता होगी) आँकड़ों का विश्लेषण करने के लिये एक पृथक विधि का प्रयोग किया जाएगा।
पश्चिमी घाट में दुनिया का सबसे छोटा भूमि फर्न

Ahwa-forests

भारतीय शोधकर्त्ताओं ने गुजरात के डांग ज़िले के पश्चिमी घाटों के अहवा जंगलों (Ahwa forests) में दुनिया के सबसे छोटे भूमि फर्न की खोज की है। हाल ही में ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ नामक एक अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, नाखून के आकार का मालवी नामक यह फर्न एक विशेष समूह से संबंधित होता है, साँप की जीभ के आकार (Adder’s-tongue ferns) के समान रचना के कारण इसका यह नाम रखा गया है।

  • इसका वैज्ञानिक नाम Ophioglossum malviae  है। इसका आकार मात्र एक सेंटीमीटर है।
  • यह न केवल आकार में अन्य फर्न से भिन्न होता है बल्कि इसमें अन्य जटिल फर्न विशेषताएँ भी निहित हैं।
  • शोधकर्त्ताओं द्वारा इस पौधे के डीएनए का विश्लेषण करने पर पाया कि यह अपने वर्ग की अन्य प्रजातियों से भिन्न है। इसका एक कारण यह है कि इस क्षेत्र में फर्न का पाया जाना बहुत समान्य बात नहीं है।
  • शोधकर्त्ताओं ने अहवा वन क्षेत्र में केवल 12 पौधों को उजागर किया, जो जाखाना गाँव के पास घास के मैदानों में चूहों के साथ बढ़ रहे थे। चूँकि स्थानीय लोगों द्वारा घास के मैदानों का प्रयोग किया जाता है, इसलिये इन प्रजातियों का संरक्षण करना बहुत महत्त्वपूर्ण है।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.

MCQ’S

[1]

हाल ही में नोबेल बैक्टीरिया के विभिन्न उप-प्रकारों का उपयोग करके, जीवाश्म ईंधन से सल्फर को हटाया गया। इस  संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में चार बैक्टीरियल उप-प्रकारों का उपयोग किया है।
  2. नोवेल बैक्टीरियल उप-प्रकारों की प्राप्ति के लिये माइक्रोबियल टाइप कल्चर कलेक्शन (एमटीसीसी) की खोज की गई है।
  3. सल्फर से छुटकारा पाने के लिये एक ऊर्जा स्रोत के रूप में डाईबेंजोथियोफिन (dibenzothiophene) का उपयोग किया गया है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A)  केवल 1
B)  केवल 1 और 2
C)  केवल 2 और 3
D) 1, 2, और 3

उत्तर: (d)
व्याख्या: 

 बैक्टीरिया जीवाश्म ईंधन से सल्फर को हटाने में सहायक

bacteria

  • हाल ही में, भुवनेश्वर के सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी (सीएसआईआर-आईएमएमटी) केवैज्ञानिकों ने नोबेल बैक्टीरिया के विभिन्न उप-प्रकारों का उपयोग करके पेट्रोलियम और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन से सल्फर को सफलतापूर्वक हटाया है।
  • ध्यातव्य है कि सल्फर जीवाश्म ईंधन के दहन के दौरान उत्सर्जित प्रमुख प्रदूषकों में से एक है।
  • वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में चार नोवेल बैक्टीरियल उप-प्रकारों का उपयोग किया। अतः पहला कथन सत्य है।  
  • सल्फर से छुटकारा पाने के लिये, एक ऊर्जा स्रोत के रूप में डाईबेंजोथियोफिन (जीवाश्म सल्फर यौगिक जो जीवाश्म ईंधन का एक प्रमुख प्रदूषक है) का उपयोग किया गया । अतः तीसरा कथन भी सत्य है।
  • ऑर्गेनिक सल्फर को चुनिंदा रूप से नष्ट करने वाले नोवेल बैक्टीरियल उप-प्रकारों की प्राप्ति के लिये माइक्रोबियल टाइप कल्चर कलेक्शन (एमटीसीसी) की खोज की गई और डीएसजेड जीन (dsz genes) के साथ 10 बैक्टीरियल उप-प्रकारों का चयन किया गया। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।
  • ध्यातव्य है कि डीएसजेड जीन टिकाऊ जैव-डिसल्फ्यूराइज़ेशन (desulfurization) के लिये केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
  • डीएसजेड जीन और मेटाबोलाइट्स (metabolites) की उपस्थिति में, जो डिसल्फ्यूराइज़ेशन में भाग लेते हैं, पहले इनकी जाँच की जाती है ।
  • चयनित चार बैक्टीरियल उप-प्रकारों में  Rhodococcus rhodochrous, Arthrobacter sulfureou, Gordonia rubropertinita  और Rhodococcus erythropolis शामिल हैं।

संभावित लाभ:

नई प्रक्रिया पर्यावरण और आर्थिक रूप से अनुकूल है और इन नए जीवाणु उप-प्रकारों को व्यावसायिक पैमाने पर जीवाश्म ईंधन से सल्फर हटाने के लिये प्रयोग किया जा सकता है।

[2]

इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. इसकी संकल्पना 2008 में भारतीय नौसेना द्वारा प्रस्तुत की गई थी।
  2. इस फोरम का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय देशों की नौसेना के बीच महत्त्वपूर्ण सामुद्रिक मुद्दों पर आपसी सहयोग को मज़बूत करना है।
  3. 2018 में इस फोरम की मेजबानी ईरान के द्वारा की जा रही है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (d)
व्याख्याः 

 इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (IONS)

IONS

  • आईओएनएस की संकल्पना भारतीय नौसेना द्वारा 2008 में की गई थी। इस फोरम का उद्देश्य हिन्द महासागर क्षेत्र के तटीय देशों की नौसेनाओं के बीच क्षेत्रीय रूप से महत्त्वपूर्ण सामुद्रिक मुद्वों, जिससे भविष्य के लिये एक समान समझदारी विकसित हो सके, पर चर्चा के लिये एक खुले एवं समावेशी फोरम उपलब्ध कराने के ज़रिये आपसी सहयोग को मजबूत बनाना था।
  • आईओएनएस का उद्घाटन संस्करण फरवरी, 2008 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी भारतीय नौसेना ने दो वर्षों तक अध्यक्षता की। इसके बाद यूएई ने 2010 से 2012 तक इसकी अध्यक्षता की, दक्षिण अफ्रीका ने 2012 से 2014 तक, ऑस्ट्रेलिया ने 2014 से 2016 तक इसकी अध्यक्षता की एवं बांग्ला देश 2016-2018 तक इसका अध्यक्ष है।
  • इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) के छठे संस्करण एवं कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स की मेजबानी ईरान द्वारा तेहरान में 23 से 25 अप्रैल, 2018 तक की जा रही है। अतः तीनों कथन सत्य हैं।
[3]

ई-विधान परियोजना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. यह परियोजना राज्य विधान सभा के कार्य को डिजिटलीकृत रूप प्रदान करने हेतु शुरू की गई है।
  2. यह परियोजना भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है।

कूटः

A)  केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः 

ई-विधान परियोजना: 

  • सरकार ने संसद और विधानसभाओं में कामकाज को कागज रहित बनाने के लिये ई-संसद और ई-विधान परियोजना शुरू की है।
  • ई-विधान परियोजना भारत में राज्य विधानसभाओं के कामकाज के भार को कम करने ,पेपर लेस करने अर्थात विधानसभाओं को डिजिटलीकृत रूप प्रदान करने हेतु शुरू की गई है।
  • यह केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है। यह काफी हद तक कागज़ के उपयोग को कम करके स्वच्छता और पर्यावरण में योगदान करेगा ।
  • यह परियोजना राज्य विधानसभा को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी, उत्पादक , जनता के लिये अधिक जवाबदेह और कुशल बनाएगी।
  • संसदीय मामलों का मंत्रालय इस परियोजना के लिये नोडल मंत्रालय है।
  • केंद्रीय और साथ ही राज्य स्तर पर परियोजना निगरानी इकाइयों को बनाना परियोजना के कार्यान्वयन के लिये तैयार किये गए प्रमुख घटकों में से एक है।
[4]

हाल ही में जीआई टैग प्राप्त करने वाले तेलंगाना के प्रमुख शिल्पों के संबंध में कौन-सा/से युग्म सही  सुमेलित है/हैं?

1. आदिलाबाद डोकरा प्राचीन घंटी धातु शिल्प
2. वारंगल धुर्री कपास गलीचा
3. जड़ाव कला साड़ियों के किनारों पर नक्काशी करना

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त तीनों।

उत्तर (a)
व्याख्या: 

DOKRA

हाल ही में तेलंगाना के दो शिल्प रूपों को भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ऑफ इंडिया  द्वारा भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है।

इन दो प्रमुख शिल्प रूपों में, पहला प्रतिष्ठित आदिलाबाद डोकरा (प्राचीन घंटी धातु शिल्प) और दूसरा वारंगल धुर्री (लोकप्रिय कपास गलीचा) शामिल है। अतः कूट (a) के तहत शामिल युग्म 1 और 2 सही हैं।

आदिलाबाद डोकरा (Adilabad dokra)

  • डोकरा कारीगर वोज समुदाय से संबंधित हैं, जिन्हें वोजरिस कहा जाता है और तेलंगाना में ओतरिस भी कहा जाता है।
  • इस वंशानुगत शिल्प में आदिलाबाद ज़िले के पाँच गाँवों के 100 से अधिक परिवार शामिल हैं।
  • आदिलाबाद डोकरा की विशिष्टता यह है कि आकार के साथ-साथ आकार में कोई भी दो टुकड़े समान नहीं होते हैं और इसलिये मूल आकृति की प्रतिकृति लगभग संभव नहीं है, जो एड-ऑन विशेषता है।
  • शिल्पकार एक प्राचीन कास्टिंग तकनीक  द्वारा पीतल की वस्तुएँ बनाते हैं, जिसे सिरे पेड्यू (cire perdu) कहा जाता है। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।
  • आदिलाबाद डोकरा धातु शिल्प से बने उत्पादों में मुख्य रूप से स्थानीय देवता, घंटियाँ, नृत्य करती आकृतियाँ, आभूषण और कई अन्य सजावटी वस्तुएँ शामिल हैं।

वारंगल धुर्री (Warangal Dhurrie)

  • कपास की उपलब्धता ने मुख्य भौगोलिक कारक के रूप में वारंगल को गलिचाओं के बुनाई केंद्र के रूप में विश्व प्रसिद्ध किया (तेलंगाना कपास उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है)।
  • आज़म जाही जैसे कताई मिलों ने सूती आधारित बुनाई उद्योगों के लिये पारिस्थितिक तंत्र बनाने में मदद की है।
  • वर्तमान कोथवाड़ा (वारंगल) में 2,000 से अधिक बुनकर समुदाय के सदस्य इस कार्य के लिये मौजूद है।
  • वर्तमान वारंगल धुर्री का निर्यात मुख्य रूप से यू.के., जर्मनी के साथ कुछ अन्य यूरोपीय और अफ्रीकी देशों को होता है।

जड़ाव कला

जड़ाव कला का प्रयोग संगमरमर के पत्थर पर बहुमूल्य धातु और पत्थरों को जड़ने में प्रयोग किया जाता है।  इसे ताज महल की वास्तुकला में देखा जा सकता है। कारीगरों द्वारा संगमरमर के जड़ाव पर छेनियों से फूलों और ज्यामिती के पैटर्न बनाए गए हैं। मोती, फीरोजा, लाजवर्द, मूँगा, जैस्पर जड़ने से प्रत्येक वस्तु बेशकीमती बन जाती है।

[5]

हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा करांग द्वीप को देश का पहला कैशलेस द्वीप घोषित किया गया है। करांग द्वीप किस राज्य में स्थित है?

A) मणिपुर
B) असम
C) पश्चिम बंगाल
D) केरल

उत्तरः (a)
व्याख्याः 

 केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत मणिपुर में करांग को देश का पहला कैशलेस द्वीप घोषित किया है।

करांग द्वीप:

‘करांग द्वीप’ (Karang island) मणिपुर में अवस्थित एक छोटा सा झील द्वीप (lake island) है, जो कि लोकटक झील के मध्य अवस्थित है। करांग द्वीप एक दूरदराज़ और पिछड़ा इलाका है जो लंबे समय से उग्रवाद से ग्रसित रहा है।

Phumdi

ध्यातव्य है कि लोकटक झील, उत्तर-पूर्व भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह अपनी सतह पर तैरते हुए वनस्पति और मिट्टी से बने द्वीपों के लिये प्रसिद्ध है, जिन्हें ‘फुम्डी’ (Phumdi) कहते हैं। केयबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान (Keibul Lamjao National Park) जो विश्व का इकलौता ‘तैरता हुआ’ पार्क (floating park) है, इसी झील के समीप मणिपुर के विष्णुपुर ज़िले में अवस्थित है। संगई हिरण (Sangai deer) / Eld’s deer यहाँ की स्थानिक प्रजाति (endemic species) है, जो कि आई.यू.सी.एन. की रेड-डाटा सूची की ‘संकटग्रस्त सूची’ (Endangered list) में शामिल है। इसके साथ ही, लोकटक झील आर्द्रभूमियों की रामसर सूची एवं मॉण्ट्रियाक्स रिकॉर्ड दोनों में शामिल है।