27-04-2018 current

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जैव-विविधता संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका सुधार परियोजना के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. इस परियोजना का लक्ष्य जैव-विविधता को खत्म किये बिना रोज़गार का सृजन करना है।
  2. यह परियोजना विश्व बैंक की सहायता से चलाई जा रही है।
  3. इसे दिसंबर 2017 में शुरू किया गया है।

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 2
D) 1, 2 और 3


उत्तरः (a)

व्याख्याः

जैव-विविधता संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका सुधार परियोजना
(biodiversity conservation and rural livelihood improvement project)
biodiversity conservation

जैव-विविधता संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका सुधार परियोजना का लक्ष्य जैव-विविधता को नुकसान पहुँचाए बिना वहाँ रहने वाले लोगों को रोज़गार से जोड़ना है तथा उन्हें जैव-विविधता के संरक्षण के लिये प्रेरित करना है। इसका मूल उदेश्य ग्रामीण लोगों के साथ मिलकर पर्यावरण का संरक्षण करना है ताकि उस क्षेत्र की जलवायु और जैव-विविधताएँ संरक्षित रहें और ग्रामीणों को इसका लाभ मिले तथा इसमें उनकी भागीदारी सुनश्चित की जा सके।

इस परियोजना के तहत जैव सुरक्षा संरक्षण को सुदृढ़ करने और ग्रामीण आजीविका में सुधार लाने हेतु भूमिका सुधार, पारंपरिक फसल का संरक्षण, पारंपरिक जीवन शैली का संरक्षण, डेयरी, कुक्कुट पालन एवं इकोटूरिज्म जैसे क्षेत्रों से रोज़गार जुटाया जाता है। अतः पहला कथन सत्य है।

यह परियोजना विश्व बैंक की सहायता से 2011 में शुरू की गई थी। अतः दूसरा कथन सत्य है तथा तीसरा कथन असत्य है।

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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. अफस्पा कानून के तहत केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।
  2. इस कानून के तहत सशस्त्र बलों को कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर गोली चलाने का भी अधिकार होता है।
  3. अफस्पा कानून को सर्वप्रथम जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी


उत्तरः (a)

व्याख्याः

भारतीय संसद द्वारा 11 सितंबर 1958 को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) (AFSPA-Armed Forces Special Power Act) पारित किया गया था।

अफस्पा के अधिकार

  • अफस्पा के तहत सशस्त्र बलों को निम्नलिखित शक्तियाँ दी जाती हैं:
  • चेतावनी दिये जाने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है या अशांति फैलाता है तो उस पर गोली चलाने का भी अधिकार होता है या मृत्यु तक बल का प्रयोग उस व्यक्ति पर किया जा सकता है।
  • किसी आश्रय स्थल या ढाँचे को तबाह किया जा सकता है जहां से हथियार बंद हमले का अंदेशा हो।
  • किसी भी असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट के केवल शक के आधार पर गिरफ्तार किया जा सकता है। गिरफ्तारी के दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • बिना वारंट किसी के घर में अंदर जाकर उसकी तलाशी ली जा सकती है। इसके लिये ज़रूरी बल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • वाहन को रोक कर उसकी तलाशी ली जा सकती है।
  • सेना के अधिकारियों को उनके वैध कामों हेतु कानूनी कवच प्रदान किया जाता है।

अतः पहला एवं दूसरा कथन सत्य है।

सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) 1958 में संसद द्वारा पारित किया गया तथा सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में यह कानून लागू किया गया। अतः तीसरा कथन असत्य है।

पंजाब में बढ़ते अलगाववादी हिंसक आंदोलन से निपटने के लिये सेना की तैनाती का रास्ता साफ करते हुए 1983 में केंद्र सरकार द्वारा अफस्पा (पंजाब एंड चंडीगढ़) अध्यादेश लाया गया जो 6 अक्तूबर को कानून बन गया। यह कानून 15 अक्तूबर, 1983 को पूरे पंजाब और चंडीगढ़ में लागू कर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर में हिंसक अलगाववाद का सामना करने के लिये सेना को विशेष अधिकार देने की प्रक्रिया के चलते  5 जुलाई, 1990 को पूरे राज्य में अफस्पा लागू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर राज्य का लेह-लद्दाख क्षेत्र इस कानून के अंतर्गत नहीं आता है।

[3]

हेपेटाइटिस-बी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह एक जीवाणु जनित रोग है।
  2. इससे मनुष्य के लीवर में सूजन आ जाती है या क्षतिग्रस्त हो जाता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2


उत्तरः (b)

व्याख्याः

हेपेटाइटिस-बी विश्व का सबसे अधिक सामान्य यकृत (लीवर) का संक्रमण है जो हेपेटाइटिस-बी वायरस (HBV) के कारण होता है। अतः पहला कथन असत्य है।

हेपेटाइटिस-बी वायरस लीवर/यकृत पर हमला करते हैं और उसे क्षति पहुँचाते हैं, जिसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है, जिसे हेपाटाइटिस कहते हैं। अतः दूसरा कथन सत्य है।

हेपेटाइटिस-बी ख़तरनाक है, क्योंकि यह एक “शांत संक्रमण” है, जो लोगों को उनकी जानकारी के बिना ही संक्रमित करता है। अधिकतर लोगों को हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित होते हैं वे इस संक्रमण से अंजान रहते हैं। हेपेटाइटिस बी वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के रक्त युक्त तरल पदार्थ के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप होता है। संचरण के संभावित रूपों में असुरक्षित यौन संपर्क, रक्त आधान, संदूषित सुइयों और सिरिंजों का दुबारा उपयोग और माँ से बच्चे को प्रसव के दौरान ऊर्ध्वाधर संचरण शामिल हैं। हस्तक्षेप के बिना, एक माँ जो HBsAg के लिये सकारात्मक है उसके वंश को जन्म के समय उसके द्वारा संक्रमण होने का 20% जोखिम रहता है। यह जोखिम 90% की ऊँचाई पर चला जाता है अगर माँ भी HBeAg के लिये सकारात्मक है। एचबीवी घरों के भीतर परिवार के सदस्यों के बीच संचरित हो सकता है, संभवतः नॉमिन्टैक्ट त्वचा या स्त्राव के साथ म्युकस मेमब्रेन या एचबीवी युक्त लार के संपर्क द्वारा।

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निम्नलिखित में से कौन-सी रिपोर्ट ‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum) के द्वारा जारी की जाती  है?

  1. वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा सूचकांक
  2. वैश्विक जेंडर गैप रिपोर्ट
  3. समावेशी वृद्धि एवं विकास रिपोर्ट

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 1 और 2
C) केवल 3
D) 1, 2 और 3


उत्तरः (d)

व्याख्याः

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum)

world economic

‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum-WEF) स्विट्ज़रलैंड के “Cologny” में अवस्थित एक गैर-लाभकारी संगठन (non-profit organization) है। दुनिया की स्थिति में सुधार के लिये प्रतिबद्ध यह संगठन सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।

इसकी स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी एवं इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में अवस्थित है।

‘विश्व आर्थिक मंच’ की बैठक प्रत्येक वर्ष जनवरी माह के अंत में स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित की जाती है।

‘विश्व आर्थिक मंच’ के द्वारा निम्नलिखित प्रमुख रिपोर्ट्स जारी की जाती हैं:

  1. वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा सूचकांक रिपोर्ट (Global Competitiveness Index Report)
  2. वैश्विक जेंडर गैप रिपोर्ट (Global Gender Gap Report)
  3. समावेशी वृद्धि एवं विकास रिपोर्ट (Inclusive Growth and Development Report)
  4. वैश्विक जोखिम रिपोर्ट (Global Risk Report)

इसका मूल उदेश्य ग्रामीण लोगों के साथ मिल कर पर्यावरण का संरक्षण करना है जिस से इस छेत्र की जलवायु और जैवविवधताएँ संरक्षित रहें और ग्रामीणो को इसका लाभ मिले इसमें उनकी भागीदारी सुनश्चित की जा सके।

[5]

डोमेस्टिक सिस्टमैटिक इम्पॉर्टेन्ट बैंक (Domestic Systematic Important Bank) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।

  1. DSIB केवल उन बैंकों को माना जाता है जिनकी परिसंपत्ति सकल घरेलू उत्पाद के 5 प्रतिशत से अधिक है।
  2. DSIBs को भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी से छूट प्राप्त होती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2


उत्तरः (d)

व्याख्याः

डोमेस्टिक सिस्टमैटिक इम्पोर्टेन्ट बैंक (Domestic Systematic Important Bank : DSIB)
हाल ही में आरबीआई द्वारा पिछले वर्ष निर्धारित ‘बकेट स्ट्रक्चर’ के अंतर्गत एचडीएफसी को डोमेस्टिक सिस्टमैटिक इम्पोर्टेन्ट बैंक (Domestic Systematic Important Bank : DSIB) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।डोमेस्टिक सिस्टमैटिक इम्पोर्टेन्ट बैंक (DSIBs) क्या हैं?

  • DSIBs ऐसे बैंकों को कहा जाता है जो अपने आकार, अनेक क्षेत्राधिकारों में गतिविधियों के संचालन, जटिलता एवं प्रतिस्थापन के अभाव एवं अंतर्संबंधों के कारण ‘इतने विशाल हैं कि ध्वस्त नहीं हो सकते हैं।’
  • ऐसे बैंक जिनकी परिसंपत्तियाँ सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत से अधिक हों वे DSIBs माने जाते हैं। अर्थव्यवस्था पर इनके विफल होने का विघटनकारी प्रभाव हो सकता है। अतः पहला कथन असत्य है।
  • DSIBs को पाँच श्रेणियों (बकेट) में वर्गीकृत किया गया है। इन श्रेणियों के अनुसार बैंकों को अलग से जोखिम भारित आस्तियों (RWAs) के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्त सामान्य इक्विटी टियर-1 को बनाए रखना होता है। वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक को श्रेणी 3 के तहत रखा गया है एवं इसे वित्तीय वर्ष 2018 की शुरुआत के अतिरिक्त 0.45 प्रतिशत जोखिम भारित आस्तियाँ (RWAs) बनाए रखने का अधिदेश दिया गया है।
  • HDFC एवं ICICI बैंक श्रेणी 1 के अंतर्गत शामिल हैं।
  • DSIBs को विशेष प्रावधानों के तहत अधिदेशित किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अवैध कार्यों से दूर रखने तथा बेहतर कार्य संस्कृति सुनिश्चित करने के लिये उन पर केंद्रीय बैंक द्वारा बारीकी से नज़र रखी जाती है। DSIBs की निगरानी केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थात् भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा की जाती है, ताकि वैश्विक वित्तीय संकट जैसी चरम परिस्थितियों को कम किया जा सके। अतः दूसरा कथन भी असत्य है।
  • डोमेस्टिक सिस्टमैटिक इम्पोर्टेन्ट बैंकों का घरेलू रूप से देश के केंद्रीय बैंक द्वारा और वैश्विक रूप से बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति द्वारा पहचान की जाती है।

DSIBs के लिये फ्रेमवर्क:
DSIBs के लिये जारी फ्रेमवर्क वर्ष 2008 के आर्थिक संकट के बाद 22 जुलाई 2014 को जारी किया गया था। इसे वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) द्वारा अक्टूबर 2010 में जारी सिफारिशों के आधार पर बनाया गया है। वित्तीय स्थिरता बोर्ड ने सभी सदस्य राष्ट्रों को यह निर्देश दिया कि वह अपने प्रणालीबद्ध बैंकों का चयन करें।

वित्तीय स्थिरता बोर्ड:

  • वित्तीय स्थिरता बोर्ड (FSB) एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय है जो वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की निगरानी करता है तथा उसके संबंध में अनुशंसाएँ प्रदान करता है।
  • यह सशक्त विनियामक एवं पर्यवेक्षण नीतियों के विकास की दिशा में कार्य करने वाले राष्ट्रीय वित्तीय प्राधिकरणों एवं अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारण निकायों के बीच समन्वय स्थापित कर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा देता है।

 

हरिमऊ शक्ति

Harimau Shakti

भारत – मलेशिया रक्षा सहयोग के एक हिस्‍से के रूप में 30 अप्रैल, 2018 से 13 मई, 2018 तक मलेशिया के हुलु लंगट स्थित सेंगई परडिक के घने जंगलों में एक संयुक्‍त प्रशिक्षण अभ्‍यास हरिमऊ शक्ति का संचालन किया जाएगा।

  • इस अभ्‍यास का उद्देश्‍य दोनों देशों की सेनाओं के मध्‍य परस्‍पर सहयोग और समन्‍वय बढ़ाना तथा घने जंगलों में अराजकता निरोधक कार्रवाई के संचालन में विशेषज्ञता को साझा करना है।
  • भारतीय सेना का प्रतिनिधित्‍व देश की सबसे पुरानी बटालियनों में से एक, 4 ग्रेनेडियर्स कर रही है। इस बटालियन के पास पारंपरिक तथा अराजकता निरोधक कार्रवाई का समृद्ध अनुभव है।
  • मलेशियाई दल का प्रतिनिधित्‍व 1 रॉयल रंजेर रेजिमेंट तथा रॉयल मलय रेजिमेंट के सैनिक कर रहे हैं। ये दोनों रेजीमेंट जंगल युद्ध में विशेषज्ञता के लिये जाने जाते हैं।
  • पहली बार मलेशिया की भूमि पर भारत – मलेशिया सैनिकों का इतने बडे पैमाने पर संयुक्‍त प्रशिक्षण अभ्‍यास का आयोजन हो रहा है।
  • इस अभ्‍यास के अंतर्गत पहले परस्‍पर प्रशिक्षण चरण तथा इसके बाद हुलु लंगट के जंगलों में 7 दिनों का क्षेत्र प्रशिक्षण चरण आयोजित किया जाएगा।
  • इसके तहत दोनों सेनाएँ संयुक्‍त रूप से प्रशिक्षण प्राप्‍त करेंगी, योजनाएँ बनाएंगी तथा प्रशिक्षण गतिविधियों की एक श्रृंखला का संचालन करेंगी। इसका फोकस जंगल युद्ध में रणनीतिक कार्रवाई पर रहेगा।
अटल न्यू इंडिया चैलेंज

Niti Aayog

नीति आयोग के अधीनस्थ अटल नवाचार मिशन (Atal Innovation Mission – AIM) की ओर से 26 अप्रैल, 2018 को ‘अटल न्यू इंडिया चैलेंज’ का शुभारंभ किया गया। पाँच मंत्रालयों के सहयोग से संचालित ‘अटल न्यू इंडिया चैलेंज’ के तहत एआईएम 17 चिन्हित फोकस क्षेत्रों में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों अथवा प्रोटोटाइप का उपयोग कर ‘बाज़ार में पेश करने हेतु तैयार उत्पादों’ को डिज़ाइन करने के लिये संभावित अन्वेषकों/एमएसएमई/स्टार्ट-अप्स को आमंत्रित करेगा।

  • इन चिन्हित फोकस क्षेत्रों में जलवायु स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture), स्मार्ट गतिशीलता (Smart Mobility), रोलिंग स्टॉक का पूर्वानुमानित रख-रखाव (Predictive Maintenance of Rolling Stock), अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) इत्यादि शामिल हैं।
  • संबंधित प्रौद्योगिकियों को तैयार करने की विशिष्ट क्षमता, तत्परता एवं संभावनाएँ दर्शाने वाले आवेदकों को एक करोड़ रुपए तक के अनुदान दिये जाएंगे।
  • इस अनुदान के अलावा संबंधित उत्पादों के वाणिज्यीकरण के विभिन्न चरणों के साथ-साथ इन उत्पादों को बड़े पैमाने पर विभिन्न स्थानों पर लगाने के लिये आवश्यक मार्गदर्शन, सहायता, इन्क्यूबेशन एवं अन्य तरह की मदद भी सुलभ कराई जाएगी।
लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी एम के4 परियोजना

mk4project

लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी एम के4 परियोजना के तीसरे जहाज़ को पोर्ट ब्लेयर में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस जहाज़ को आईएनएलएसयू एल53 के रूप में नौसेना में शामिल किया गया। गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजिनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा डिज़ाइन और निर्मित यह जहाज़ देश की देसी जहाज़ निर्माण क्षमता की संभावना को उजागर करता है जो मेक इन इंडिया के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

  • 830 टन की विस्थापन क्षमता वाला एलसीयू एमके-4 जहाज़ जल और थल पर चलने योग्य है।
  • यह अर्जुन, पी72 जैसे मुख्य युद्ध टैंकों और अन्य बख्तरबंद वाहनों जैसे युद्ध सामग्री ढोने में सक्षम है।
  • यह जहाज़ एकीकृत पुल व्यवस्था (Integrated Bridge System – IBS) और एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन व्यवस्था (Integrated Platform Management System – IPMS) जैसे अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत व्यवस्था से सुसज्जित है।
  • इस जहाज़ में देशी सीआरएन 91 गन भी लगा है जिससे इस जहाज़ को पेट्रोलिंग करने के लिये ज़रूरी आक्रामकता हासिल है।
  • लेफ्टिनेट कमांडर विकास आनंद के नेतृत्व में इस जहाज के लिये पाँच अफसर और 45 नाविक हैं। इसके अतिरिक्त 160 सैन्य टुकड़ियों को ढोने की क्षमता वाले इस जहाज़ की तैनाती अंडमान और निकोबार में होगी।
  • इस परियोजना के बाकी 5 जहाज़ निर्माण की अंतिम व्यवस्था में हैं और डेढ़ साल के बाद इन्हें भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना है।
  • इन जहाज़ों के नौसेना में शामिल होने से राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा की ज़रूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे जहाज़ निर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
  • एल.सी.यू. एम. के4 जहाज़ एक ऐसा जहाज़ है, जो मुख्य लड़ाकू टैंकों (Battle Tanks), बख़्तरबंद वाहनों (Armoured Vehicles), सैनिकों एवं उपकरणों को जहाज़ से किनारे तक (equipment from ship to shore) लाने में प्राथमिक भूमिका का निर्वाह करता है।
  • इन जहाज़ों को अंडमान एवं निकोबार कमान के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। साथ ही इन्हें समुद्र तट पर संचालन, तलाशी व बचाव, आपदा राहत संचालन, आपूर्ति तथा पुनःपूर्ति एवं निकासी जैसे कामों को पूरा करने के लिये भी तैनात किया जा सकता है।
ई कॉमर्स पर राष्‍ट्रीय नीति

ecommerce

केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा 24 अप्रैल, 2018 को ई कॉमर्स पर राष्‍ट्रीय नीति के लिये थिंक टैंक की पहली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ई कॉमर्स के विभिन्‍न पहलुओं से जुड़े भारत सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारियों द्वारा भाग लिया गया।

  • हाल ही में वाणिज्‍य विभाग द्वारा ई कॉमर्स पर राष्‍ट्रीय नीति के लिये संरचना पर थिंक टैंक की स्‍थापना की गई। यह एक समावेशी तथा तथ्‍य आधारित संवाद के लिये विश्‍वसनीय मंच उपलब्‍ध कराएगा, जिससे विस्‍तृत नीति निर्माण संभव हो सकेगा।
  • इससे देश अवसरों का लाभ उठाने और उन चुनौतियों का सामना करने में, जो कि डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति की अगली धारा से उत्‍पन्‍न होंगी, का सामना करने के लिये समुचित रूप से तैयार हो सकेगा।
  • थिंक टैंक द्वारा ई कॉमर्स पर एक व्‍यापक एवं अति महत्त्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय नीति विकसित करने के लिये डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था एवं ई कॉमर्स के क्षेत्र में भारत के सामने खड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया गया।
  • थिंक टैंक द्वारा जिन मुद्दों पर विचार किया गया, उनमें भौतिक एवं डिजिटल बुनियादी ढाँचे जैसे- ई कॉमर्स एवं डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के पहलू, नियामकीय व्‍यवस्‍था, कराधान नीति, डाटा प्रवाह, सर्वर लोकेलाइज़ेशन, एफडीआई, प्रौद्योगिकी प्रवाह, कौशल विकास एवं व्‍यापार से संबंधित पहलू शामिल हैं।
  • ई कॉमर्स पर वैश्विक प्रगति एवं अंतर्निहित मुद्दों पर उत्‍पन्‍न हो रही उपयुक्‍त राष्‍ट्रीय स्थिति थिंक टैंक के विचार-विमर्श का एक अन्‍य महत्त्‍वपूर्ण आयाम था।
  • थिंक टैंक की पहली बैठक के प्रमुख परिणामों में से एक परिणाम ई कॉमर्स पर भारत की राष्‍ट्रीय नीति के लिये अनुशंसाएँ तैयार करने हेतु कार्यबल का गठन करने का फैसला था।
  • इस कार्यबल को विभिन्‍न उप समूहों में विभाजित किया जाएगा जिसमें भारत सरकार के प्रतिनिधि, ई कॉमर्स उद्योग एवं डोमेन नॉलेज़ के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कार्यबल छह महीनों के भीतर अपनी अनुशंसाओं को अंतिम रूप दे देगा।

स्रोत : द हिंदू