ANCIENT HISTORY TEST-1 ANSWER KEY

QUESTION PAPER

ANCIENT HISTORY TEST-1 ANSWER KEY

1-उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सही हैं।

  • वैदिकोत्तर काल में समाज चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र) में विभाजित था। यह वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर निश्चित की गई थी। इसमें ब्राह्मणों को विशेषाधिकार दिये गए और वे समाज में सर्वोच्च होने का दावा करते थे। क्षत्रियों को दूसरा तथा वैश्य को तीसरा स्थान प्राप्त था। वैश्य वर्ण को कर चुकाने का दायित्व  तथा चतुर्थ शूद्र वर्ण को तीनों वर्णों की सेवा का कर्त्तव्य था। इस तरह के वर्ण-विभाजन वाले समाज में तनाव पैदा होने की प्रतिक्रिया-स्वरूप तथा ब्राह्मणों के श्रेष्ठता के विरुद्ध क्षत्रियों का खड़ा होना भी इसका अन्यतम कारण हुआ।
  • पूर्वोत्तर भारत में अच्छी वर्षा होने के कारण घने जंगल छाए हुए थे। उन जंगलों को साफ करने के लिये लोहे के औज़ारों का इस्तेमाल होने लगा तो मध्य गंगा के मैदानों में भारी संख्या में लोग बसने लगे। इस प्रदेश में बड़ी-बड़ी बस्तियाँ बसने लगीं और खेती करने के लिये लोहे के हलों के लिये बड़ी संख्या में बैलों की ज़रूरत होने लगी। हालाँकि उस समय बैलों (वैदिक कर्मकाण्डों में बलि के कारण) की कमी थी, इसलिये नई कृषिमूलक अर्थव्यवस्था को चलाने के लिये पशु-वध को रोकना आवश्यक था। अतः इन दोनों धर्मों में अहिंसा पर बल दिया गया।

2-उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

  • दोनों धर्मों का उदय तात्कालिक जन्ममूलक वर्ण व्यवस्था पर आधारित समाज की प्रतिक्रिया-स्वरूप हुआ था। उन्होंने आरंभिक अवस्था में वर्ण व्यवस्था को कोई महत्त्व नहीं दिया।
  • दोनों धर्मों ने अहिंसा को विशेष स्थान दिया, क्योंकि अहिंसा से युद्धों का अंत हो सकता था। इसके फलस्वरूप व्यापार वाणिज्य में उन्नति हो सकती थी और असंख्य यज्ञों में बछड़ों और साँडों के लगातार मारे जाने से क्षीण होते पशुधन को बचाया जा सकता था। चूँकि यह पशुधन कृषिमूलक अर्थव्यवस्था के लिये आवश्यक था।
  • दोनों धर्मों के भिक्षुओं को आदेश था कि वे जीवन की विलासता की वस्तुओं का प्रयोग न करें। वे दाताओं से उतना ही दान ग्रहण करें जितना प्राण रक्षा के लिये आवश्यक हो। वे सरल, शुद्ध और संयमित जीवन के पक्षधर थे।

3-उत्तरः (c)
व्याख्याः जैन धर्म में धर्म के सिद्धांतों के उपदेष्टा तीर्थंकर कहलाते थे। इसमें 24 तीर्थंकर हुए थे। महावीर को चौबीसवाँ व अंतिम तीर्थंकर माना जाता है। अतः कथन (1) सत्य है।

  • जैन धर्म के संस्थापक ऋषभदेव को माना जाता है। पार्श्वनाथ तेइसवें तीर्थंकर माने जाते हैं, जो वाराणसी के निवासी थे। अतः कथन (2) असत्य है।
  • महावीर की माता का नाम त्रिशला था, जो बिम्बिसार के ससुर लिच्छवी- नरेश चेतक की बहन थी। उनके पिता का नाम सिद्धार्थ था तथा वे क्षत्रिय कुल के प्रधान थे। अतः कथन (3) सत्य है।

4-उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • जैन धर्म में पूर्वजन्म का अस्तित्व स्वीकार किया गया है। तीर्थंकर महावीर के अनुसार, पूर्वजन्म में अर्जित किये गए पुण्य या पाप के अनुसार ही उच्च या निम्न कुल में जन्म होता है। उनके मतानुसार शुद्ध और अच्छे आचरण वाले निम्न जाति के लोग भी मोक्ष पा सकते हैं। कथन (c) असत्य है जबकि, अन्य तीनों कथन सत्य हैं ।
  • कैवल्य द्वारा सुख-दुख पर विजय प्राप्त करने के कारण महावीर ‘जिन’ और उनके अनुयायी ‘जैन’ कहलाते थे।
  • महावीर ने जैन धर्म के पाँच व्रतों में पाँचवां व्रत ब्रह्मचर्य को जोड़ा था।
  • जैन अनुयायियों के संघ में स्त्री और पुरुष दोनों को स्थान मिला था।

5 उत्तरः (c)
व्याख्याः जैन धर्म में सांसारिक बंधनों से छुटकारा पाने के उपाय बताए गए हैं। मोक्ष पाने के लिये कर्मकांडीय अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है। यह सम्यक् ज्ञान, सम्यक ध्यान और सम्यक् आचरण से प्राप्त किया जा सकता है। ये तीनों जैन धर्म के त्रिरत्न माने जाते हैं।

6 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • कपिलवस्तु के निकट नेपाल के  तराई में अवस्थित लुम्बिनी को महात्मा बुद्ध का जन्म स्थान माना जाता है। अन्य तीनों नगर महावीर से संबंधित हैं।
  • वैशाली को महावीर का जन्म स्थान, पावापुरी को निवार्ण स्थान तथा चंपा में महावीर ने उपदेश दिये थे।

7 उत्तरः (a)
व्याख्याः 

  • जैन धर्म के उपदेशों को संकलित करने के लिये पाटलिपुत्र में एक परिषद् का आयोजन किया गया था।
  • उल्लेखनीय है कि महावीर की मृत्यु के 200 वर्षों के बाद मगध में 12 वर्षों तक अकाल पड़ा, जिससे भद्रबाहु के नेतृत्व में बहुत से जैन लोग दक्षिणापथ चले गए थे,तथा  शेष स्थलबाहु के नेतृत्व में मगध में रह गए। अकाल समाप्त होने पर भद्रबाहु वापस लौटे तो स्थानीय जैनियों से उनका मतभेद हो गया। इसी को सुलझाने के लिये पाटलिपुत्र में एक परिषद् का आयोजन किया गया लेकिन दक्षिणी जैनियों ने इसका बहिष्कार कर दिया, जिसके फलस्वरूप दक्षिणी जैन दिगम्बर और मगध के जैन श्वेताम्बर कहलाए। अतः कथन (1) सत्य है।
  • जैन धर्म में धर्मोपदेश के लिये आम लोगों के बोलचाल की प्राकृत भाषा को अपनाया गया तथा धार्मिक ग्रन्थों के लिये अर्द्ध-मागधी भाषा को, ये ग्रन्थ ईसा की छठी सदी में गुजरात के वलभी नामक स्थान में जो महान विद्या का केन्द्र था, अंतिम रूप से संकलित किये गए। प्राकृत भाषा से कई क्षेत्रीय भाषाएँ विकसित हुईं।
  • इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय शौरसेनी है, जिनसे मराठी भाषा की उत्पत्ति हुई है। जैनियों ने अपभ्रंश भाषा में पहली बार कई महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ लिखे व इसका पहला व्याकरण तैयार किया। अतः कथन (2) सत्य है।
  • बौद्धों की तरह जैन लोग आरम्भ में मूर्तिपूजक नहीं थे, बाद में वे महावीर और तीर्थंकरों की पूजा करने लगे। इसके लिये सुन्दर और विशाल प्रस्तर-प्रतिमाएँ विशेषकर कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में निर्मित हुईं। अतः कथन (3) असत्य है।

8  उत्तर: (b )
व्याख्याः

  • जैन धर्म ने देवताओं का अस्तित्व स्वीकार किया है, परंतु उनका स्थान ‘ जिन’ से नीचे रखा गया है।अतःकथन (b ) असत्य है |जबकी अन्य तीनों कथन सत्य हैं |
  • पाँचवीं सदी में कर्नाटक में स्थापित जैन मठ ‘बसदि’ कहलाते थे।
  • जैन धर्म में कृषि और युद्ध दोनों वर्जित  हैं क्योंकि दोनों से जीव हिंसा होती है। फलतः जैन धर्मावलम्बियों में व्यापार और वाणिज्य करने वालों की संख्या अधिक थी।

 

9 उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • गौतम बुद्ध ने अपने ज्ञान का प्रथम प्रवचन वाराणसी के सारनाथ नामक स्थान पर दिया। बौद्ध धर्म में इसे धर्म-चक्रप्रवर्तन कहा गया है। अतः कथन (1) सत्य है।
  • महात्मा बुद्ध ने अपना ध्यान सांसारिक समस्याओं में लगाया, वे व्यर्थ के वाद-विवादों में नहीं उलझे, चूँकि उस समय आत्मा और परमात्मा के विषय पर चर्चा ज़ोरों से चल रही थी। बुद्ध कहते थे संसार दुःखमय है, मनुष्य की इच्छाएँ (लालसा) दुःख का कारण हैं, अगर इन पर विजय पाई जाए तो मनुष्य का निर्वाण संभव है। अतः कथन (2) असत्य है।
  • महात्मा बुद्ध ने दुःख की निवृत्ति के लिये अष्टांगिक मार्ग  बताया है, अष्टांगिक मार्ग के आठ मार्ग हैं-
  1. सम्यक् दृष्टि
    2. सम्यक् संकल्प
    3.  सम्यक् वाक्
    4. सम्यक् कर्मान्त
    5. सम्यक् आजीव
    6. सम्यक् व्यायाम
    7. सम्यक् स्मृति
    8. सम्यक् समाधि

 

10 उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सही हैं।

  • बौद्ध धर्म में मध्यम मार्ग को ही श्रेष्ठ मार्ग माना गया है। वे अत्यधिक विलासिता और अत्यधिक संयम को स्वीकार नहीं करते थे।
  • बौद्ध धर्म में ईश्वर और आत्मा की सत्ता स्वीकार नहीं की गई है। बौद्ध धर्म शुरू से ही दार्शनिक वाद-विवादों के जंजाल में नहीं पड़ा, इसने लोगों के व्यावहारिक दुखों को दूर करना ही अपना उद्देश्य समझा।

 

11 उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • ब्राह्मणों ने बौद्ध धर्म की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये अपने धर्म में सुधार किया। उन्होंने गोधन की रक्षा पर बल दिया तथा स्त्रियों और शुद्रों के लिये भी धर्म का मार्ग प्रशस्त किया।
  • बौद्ध भिक्षु जनजीवन की मुख्य धारा से कटते गए। उन्होंने पालि भाषा को छोड़ दिया और संस्कृत भाषा को ग्रहण किया। बौद्ध विहार राजाओं से सम्पत्तियाँ दान में लेने लगे। विहारों में अपार संपत्ति आने से और स्त्रियों के प्रवेश होने से उनकी स्थिति और भी खराब हो गई। अब बौद्ध धर्म में कर्मकांडों को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा।

 

 

12 उत्तरः (b)
व्याख्याः 
उत्तर-वैदिक काल में दो उच्च वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय) को द्विज कहा जाता था। द्विज को जनेऊ पहनने का और वेद पढ़ने का अधिकार था। वैश्य को भी द्विज समूह में शामिल किया जाता था। परंतु शूद्रों को इससे वंचित रखा गया था।

 

13 उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • भारत में सबसे प्राचीन सभ्यता ‘हड़प्पा सभ्यता’ अपनी नगर योजना के लिये प्रसिद्ध है।
  • लोहे का ज्ञान कांसे के बाद वैदिक काल में 1000 ई.पू. में हुआ।
  • भारत में सबसे प्राचीन सिक्के पंचमार्क्ड/आहत सिक्के 6ठी शताब्दी ई.पू. में अस्तित्व में आए।
  • सबसे पहले भारत में सोने के सिक्के हिंद-यवन शासकों (द्वितीय शताब्दी ई.पू.) ने जारी किये।

 

14 उत्तरः (b)
व्याख्याः 
वैश्यों में वणिक जो व्यापार करते थे, सेट्ठि कहलाते थे। क्षत्रियों के अतिरिक्त वैश्यों ने महावीर और गौतम बुद्ध दोनों की उदारतापूर्वक सहायता की थी

15 उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • दोनों धर्म समान रूप से अहिंसा का उपदेश देते हैं। दोनों धर्मों के पंचव्रत में अहिंसा को स्थान दिया गया है। अतः कथन (1) सत्य है।
  • बौद्ध और जैन दोनों संप्रदाय सरल शुद्ध और संयमित जीवन के पक्षधर हैं। दोनों संप्रदाय के भिक्षुओं को आदेश था कि वे जीवन में विलास की वस्तुओं का उपयोग नहीं करें। उन्हें दाताओं से उतना ही ग्रहण करना था जितने से उनकी प्राण-रक्षा हो। अतः कथन (2) सत्य है।
  • मध्यम मार्ग (मध्यम प्रतिपदा) का मार्ग बौद्ध धर्म में अपनाया गया है, जैन धर्म में नहीं। बौद्ध धर्म के अनुसार न अत्यधिक विलास करना चाहिये न अत्यधिक संयम में रहना चाहिये। वे मध्यम मार्ग के प्रशंसक थे। अतः कथन (3) असत्य है।

16 उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • दोनों धर्मों में शांति और अहिंसा का उपदेश होता था, जिससे विभिन्न राजाओं के बीच होने वाले युद्धों का अंत हो सकता था। फलस्वरूप वैश्व वर्ग के व्यापार-वाणिज्य में उन्नति संभव थी।
  • ब्राह्मणों की कानून संबंधी पुस्तकें जो धर्मसूत्र कहलाती थीं, सूद पर धन लगाने के कारोबार को निंदनीय समझा जाता था और सूद पर जीने वालों को अधम कहा जाता था। अतः जो वैश्य व्यापार-वाणिज्य में वृद्धि होने के कारण महाजनी करते थे, वे समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिये इन धर्मों (जैन एवं बौद्ध) की ओर आकर्षित हुए। व्यापार में सिक्कों के प्रचलन से व्यापार-वाणिज्य बढ़ा और उससे समाज में वैश्यों का महत्त्व बढ़ा। स्वभावतः वे किसी ऐसे धर्म की खोज में थे जहाँ उनकी सामाजिक स्थिति सुधरे। इसलिये उन्होंने उदारतापूर्वक दान दिये।

17 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • बौद्ध धर्म तथा ब्राह्मण धर्म के अनुयायी दोनों समाज में वर्ग/वर्णमूलक व्यवस्था के समर्थक थे। परंतु बौद्ध धर्म गुण और कर्म के अनुसार वर्ण व्यवस्था मानते थे, जबकि ब्राह्मण जन्म के अनुसार मानते थे। अतः कथन (b)असत्य है, जबकि अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
  • उल्लेखनीय है कि बौद्ध भिक्षु संसार से विरक्त रहते थे और ब्राह्मणों की निंदा करते थे, परंतु दोनों के विचार परिवार का पालन करने, निजी सम्पत्ति की रक्षा करने और राजा का सम्मान करने पर समान थे।

 

 

18 उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • बौद्ध धर्म ने अहिंसा और जीवमात्र के प्रति दया की भावना जगा कर देश में पशुधन की वृद्धि की। प्राचीनतम बौद्ध ग्रन्थ सुत्तनिपात में गाय को भोजन, रूप और सुख देने वाली (अन्नदा, वन्नदा और सुखदा) कहा गया है और इसी कारण उसकी रक्षा करने का उपदेश दिया गया है। अतः कथन (1) सत्य है।
  • बौद्ध धर्म में अपने सिद्धांतों का प्रतिपादन करने के लिये बौद्धों ने साहित्य-सर्जना में आमजन की भाषा पालि को अपनाया, जबकि जैन धर्म ने प्राकृत भाषा को। अतः कथन (2) असत्य है।
  • बौद्ध धर्म ने बौद्धिक और साहित्यिक जगत में भी चेतना जगाई। इसने लोगों को बताया कि किसी भी वस्तु को भली-भाँति गुण-दोषों का विवेचन करके ग्रहण करें, तथा अंधविश्वास की जगह तर्क के आधार पर विश्वास करें। इससे लोगों में ‘बुद्धिवाद’ का महत्त्व बढ़ा। अतः कथन (3) सत्य है।

 

 

19   उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • बौद्ध धर्म के आरम्भिक पालि साहित्य को तीन कोटियों में बाँटा जा सकता है। (a) बुद्ध (b) संघ और (c) धम्म। अतः कथन (1) सत्य है।
  • बौद्ध साहित्य की तीसरी कोटि ‘धम्म’ में दार्शनिक विवेचन दिये गए हैं। अतः कथन (2) असत्य है। उल्लेखनीय है कि प्रथम कोटि में ‘बुद्ध’ के वचन और उपदेश हैं। दूसरी कोटि ‘संघ’ में सदस्यों द्वारा पालनीय नियम बताए गए हैं।

 

20 उत्तरः (d)
व्याख्याः 

  • बौद्ध विहार महान विद्या केंद्र हो गए थे, जिन्हें आवासीय (छात्रावासीय) विश्वविद्यालय की संज्ञा दी जा सकती है। इनमें बिहार में नालंदा और विक्रमशीला तथा गुजरात में वलभी उल्लेखनीय है। सम्राट अशोक के शासनकाल में तक्षशिला महान बौद्ध विद्या केंद्र था।

21 उत्तरः (a)
व्याख्याः 

  • प्राचीन भारत की कला पर बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव है। भारत में पूजित पहली मानव प्रतिमाएँ बुद्ध की हैं। श्रद्धालु उपासकों ने बुद्ध के जीवन की अनेक घटनाओं को पत्थरों पर उकेरा है। अतः कथन (1) सत्य है।
  • भारत के पश्चिमोत्तर सीमांत में यूनान और भारत के मूर्तिकारों ने नए ढंग की कला की सृष्टि करने के लिये सम्मिलित रूप से प्रयास किया, जिसका परिणाम ‘गंधार कला’ शैली के नाम से विख्यात है। अतः कथन (2) सत्य है।
  • भिक्षुओं के निवास के लिये चट्टान तराश कर कमरे बनाए गए और इस प्रकार गया की बराबर की पहाड़ियों और पश्चिम भारत में नासिक के आस-पास की पहाड़ियों में गुहा-वास्तुशिल्प का आरम्भ हुआ। अतः कथन (3) असत्य है।

 

22 उत्तरः (b)
व्याख्याः विकल्प में दी गई घटनाएँ एवं उनके स्थानों का सुमेलन निम्नानुसार हैं-
स्तंभ-I                 स्तंभ-II
(
घटनाएँ)                            (स्थान)
A. जन्म                  लुम्बिनी
B. ज्ञानप्राप्ति         बोधगया
C. प्रथम प्रवचन   सारनाथ
D. निर्वाण                             कुशीनगर

23 उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • गौड़ देश के शिवभक्त राजा शशांक ने बोधगया में उस बोधिवृक्ष को काट डाला जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  • ब्राह्मण शासक पुष्यमित्र शुंग ने बौद्धों को सताया था।
  • शैव संप्रदाय के हूण राजा मिहिरकुल ने सैकड़ों बौद्धों को मौत के घाट उतारा था।
  • सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को ग्रहण किया तथा इस धर्म को दूसरे देशों में फैलाया और इसे विश्व धर्म का रूप दिया

24 उत्तरः (a)
व्याख्याः 

  • सम्राट अशोक ने बुद्ध के निर्वाण के दो सौ साल बाद बौद्ध धर्म ग्रहण किया। अशोक ने अपने धर्मदूतों के द्वारा इस धर्म को मध्य-एशिया, पश्चिम-एशिया, श्रीलंका, बर्मा,  तिब्बत तथा चीन और जापान के भागों में फैलाया और इसे विश्व धर्म का रूप दिया। अतः कथन (1) सत्य है।
  • बौद्ध धर्म के तीन प्रमुख अंग थेः बुद्ध, संघ और धम्म। संघ के तत्त्वावधान में सुगठित प्रचार की व्यवस्था होने से बुद्ध के जीवन काल में ही बौद्ध धर्म ने तेज़ी से प्रगति की। मगध, कोसल और कौशाम्बी के राजाओं और अनेक गणराज्यों ने बौद्ध धर्म को अपनाया। अतः कथन (2)  असत्य है।

25 उत्तरः (c)
व्याख्याः बौद्ध धर्म पुनर्जन्म को मानता है। बौद्ध धर्म यह भी उपदेश देता है कि जो व्यक्ति दरिद्र भिक्षुओं को भीख देगा,वह अगले जन्म में धनवान बनेगा।
उल्लेखनीय है कि बौद्ध धर्म के प्रतीत्य समुत्पाद (किसी वस्तु के होने पर किसी अन्य वस्तु की उत्पत्ति) में बारह क्रम है, जिसे द्वादश निदान भी कहते हैं।
जिसमें संबंधित हैं-

  • जाति, जरा-मरण-भविष्य काल से, अविद्या, संस्कार, विज्ञान, नामरूप, स्पर्श-भूतकाल से,
  • तृष्णा, वेदना, षडायतन, भव, उपादान-वर्तमान काल से
  • इसमें बताया गया है कि मनुष्य जब तक निर्वाण प्राप्त नहीं करता वह जन्म और मृत्यु के चक्र में फँसा रहता है

26 उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • ईसा-पूर्व छठी सदी से पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में लोहे का व्यापक प्रयोग होने से बड़े-बड़े प्रादेशिक या जनपद राज्यों के निर्माण के लिये उपयुक्त परिस्थितियाँ बनीं।
  • खेती के नए औजारों और उपकरणों की मदद से किसान आवश्यकता से अधिक अनाज पैदा करने लगे, इसलिये राजा अपने सैनिकों के लिये और प्रशासनिक प्रयोजनों के लिये इस अनाज को जमा कर सकता था। इन भौतिक लाभों के कारण किसानों को अपनी ज़मीन से लगाव होना स्वाभाविक था, साथ ही वे अपने पड़ोस के क्षेत्रों में भी ज़मीन हड़प कर फैलने लगे। लोगों की जो प्रबल निष्ठा अपने जन या कबीले के प्रति थी, वह अब अपने जनपद या स्वयंद्ध भूभाग के प्रति हो गई।

27  उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • पूर्व से शुरू करने पर सबसे पहले अंग जनपद था जिसमें आधुनिक मुंगेर और भागलपुर जिले पड़ते हैं। उसके बाद मगध जनपद जो आधुनिक पटना और गया जिले में तथा शाहाबाद का कुछ हिस्सा पड़ता था। उसके बाद काशी जनपद उसके पश्चिम में कोसल जनपद जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में पड़ता था तथा सबसे पश्चिम में मत्स्य जनपद पड़ता था।

 

 

28 उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • विकल्प में दिये गए महाजनपद एवं उनकी राजधानी का सुमेलन निम्नानुसार हैः
(महाजनपद) (राजधानी)           
(a) अंग चंपा
(b) मगध राजगीर
(c) काशी वाराणसी
(d) कोसल श्रावस्ती

29  उत्तरः (c)
व्याख्याः 

(राज्य) (राजधानी)           
1. मल्ल कुशीनारा
2. वत्स कौशांबी
3. लिच्छवि वैशाली

 

30 उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • बिम्बिसार की पहली पत्नी कोसलराज की पुत्री और प्रसेनजित की बहन थी। कथन (c) असत्य है, जबकि अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
  • उल्लेखनीय है कि बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों से भी अपनी स्थिति को मजबूत किया। उसने तीन विवाह किये, प्रथम  विवाह से काशी ग्राम दहेज स्वरूप मिला और कोसल के साथ शत्रुता समाप्त हो गई।उसकी दूसरी पत्नी वैशाली की लिच्छवि-राजकुमारी चेल्लणा थी, जिसने अजातशत्रु को जन्म दिया और तीसरी रानी पंजाब के मद्र कुल के प्रधान की पुत्री थी।
  • बिम्बिसार ने अंग देश पर अधिकार कर लिया और शासन अपने पुत्र अजातशत्रु को सौंप दिया।
  • उसने अपने राजवैद्य जीवक को अवन्ति राजा चण्डप्रद्योत महासेन के पीलिया रोग हो जाने पर इलाज़ करने के लिये उज्जैन भेजा था।

31 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार की हत्या करने सिंहासन पर अधिकार किया था। अतः कथन (1) असत्य है।
  • अजातशत्रु ने राज्य विस्तार की आक्रमक नीति से काम लिया। उसने अपने समय में काशी और वैशाली को मगध में मिलाया और अपने साम्राज्य का विस्तार किया। अतः कथन (2) सत्य है।

32 उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

  • उदायिन अजातशत्रु के बाद मगध का राजा बना। उसके शासन की महत्त्वपूर्ण घटना है कि उसने पटना में गंगा और सोन के संगम पर एक किला बनवाया था
  • मगध पर शिशुनाग वंश के बाद नंद वंश का शासन हुआ। नंद वंश का महापद्म नंद ने कलिंग को जीतकर मगध शक्ति को बढ़ाया और विजय स्मारक के रूप में ‘जिन’ की मूर्ति भी उठा लाए थे। महापद्म नंद ने ‘एकराट’ की उपाधि धारण की थी।
  • मगध पर शिशुनाग वंश के शासन के समय अवन्ति राज्य की शक्ति को समाप्त कर उसे मगध राज्य में मिला लिया था, इसके साथ ही अवन्ति और मगध के बीच की सौ साल पुरानी शत्रुता का अंत हो गया।

 

33 उत्तरः (b)
व्याख्याः
मगध साम्राज्य पर शासन करने वाले राजवंशों का सही क्रम इस प्रकार हैः
हर्यक वंश > शिशुनाग वंश > नंद वंश > मौर्य वंश

 

34 उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

  • मगध राज्य के पास समृद्ध लौह खनिज के भंडार थे। जिसके कारण वे प्रभावशाली हथियार बना सके। उनके विरोधी ऐसे हथियार आसानी से नहीं प्राप्त कर सकते थे।
  • मगध राज्य मध्य गंगा के मैदान के मध्य में पड़ता था। इस उर्वरक प्रदेश से जंगल साफ हो चुके थे। यहाँ भारी वर्षा होने के कारण सिंचाई के बिना भी अच्छी पैदावार की जाती थी। परिणामतः यहाँ के किसान काफी अनाज पैदा कर लेते थे और भरण-पोषण के बाद भी उनके पास काफी अनाज बचता था। शासक कर के रूप में इस फाजिल उपज को एकत्र कर लेते थे, अतः कथन (2) सत्य है।
  • मगध की दोनों राजधानियाँ-प्रथम राजगीर और द्वितीय पाटलिपुत्र सामरिक दृष्टि से परम महत्त्वपूर्ण स्थानों पर थी। राजगीर पाँच पहाड़ियों की श्रृंखला से घिरी थी इसलिये वह दुर्भेद्य था। मगध की दूसरी राजधानी पाटलिपुत्र केन्द्र भाग में स्थित होने के कारण सभी दिशाओं से संचार-संबंध स्थापित कर सकते थे। पाटलिपुत्र गंगा, गंडक और सोन नदियों के संगम पर स्थित थी। सोन और गंगा नदियाँ इसके पश्चिम और उत्तर में थीं, तो पुनपुन दक्षिण और पूर्व की ओर से घेरे हुए थी। इस प्रकार पाटलिपुत्र एक जलदुर्ग था। अतः कथन (3) सत्य है।

 

 

35 उत्तर:  (c)
व्याख्याः

(राजा) (राज्य)    
1. चंद्प्रद्योत अवन्ति
2. प्रसेनजित कोसल
3. अजातशत्रु मगध

36 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • मगध ही पहला राज्य था जिसने अपने पड़ोसियों के विरुद्ध युद्ध में हाथियों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया। देश के पूर्वांचल से मगध के शासकों के पास हाथी पहुँचते थे।

 

37  उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • मौर्योत्तर काल में पूर्वी भारत, मध्य भारत और दक्कन में मौर्यों के स्थान पर शुंग, कण्व और सातवाहन शासक सत्ता में आए। अतः कथन (1) सत्य है।
  • इस काल में मध्य एशियाई लोगों के आने से मध्य एशिया और भारत के बीच घनिष्ठ व्यापारिक संबंध स्थापित हुए परिणामस्वरूप भारत को मध्य एशिया से भारी मात्रा में सोना प्राप्त हुआ और रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया। अतः कथन (2) सत्य है।
  • मौर्यों के स्थान पर मध्य एशिया से आए कई शासकों में कुषाण सर्वाधिक प्रसिद्ध हुए, परंतु मध्य एशिया से आए शासकों में हिन्द-यूनानियों ने भारत में पहली बार राजाओं के नाम वाले सिक्के जारी किये। अतः कथन (3) असत्य है।

38  उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

  • चीन की महादीवार बनने के बाद शक शासकों ने अपना राज्य विस्तार यूनानियों और पार्थियनों (भारत) की ओर करना शुरू किया। शकों से पराजित होकर बैक्ट्रियाई यूनानी भारत में विस्तार के लिये आगे बढ़ने लगे
  • सेल्यूकस द्वारा स्थापित निर्बल साम्राज्य मध्य एशियाई आक्रमण का महत्त्वपूर्ण कारण था। शकों के बढ़ते दबाव के कारण परवर्ती यूनानी शासक इस क्षेत्र में सत्ता नहीं बनाए रख सके।
  • अशोक के निर्बल उत्तराधिकारी इन बाहरी आक्रमणों का सामना नहीं कर सके। वंशानुगत साम्राज्य तभी तक बने रह सकते हैं, जब तक योग्य शासकों की श्रृखंला बनी रहे।

 

39 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • भारत पर मध्य एशियाई आक्रमणकारियों का सही कालानुक्रम निम्न प्रकार है- हिंद-यूनानियों  या बैक्ट्रियाई-यूनानियों ने ईसा-पूर्व दूसरी सदी के आरम्भ में पश्चिमोत्तर भारत के विशाल क्षेत्र पर अधिकार किया। यूनानियों के बाद शक आए। इनकी पाँच शाखाएँ थीं। पश्चिमोत्तर भारत में शकों के अधिपत्य के बाद पार्थियाई (पह्लव) लोगों का अधिपत्य हुआ। पार्थियाइयों के बाद कुषाण आए, जो यूची और तोखारी भी कहलाते हैं।

 

 

40 उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • हिन्द-यूनानियों ने पश्चिमोत्तर भारत के विशाल क्षेत्र पर अधिकार किया था। सबसे प्रसिद्ध यूनानी शासक मिनांदर था। उसे मिलिन्द नाम से भी जाना जाता था। उसे नागसेन ने बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। अतः कथन (a) असत्य है, जबकि अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
  • उसकी राजधानी पंजाब में शाकल (आधुनिक सियालकोट) में थी।
  • भारत के इतिहास में हिन्द-यूनानी शासन का महत्त्व इसलिये है कि यूनानी शासकों ने भारी संख्या में सिक्के जारी किये सबसे पहले भारत में हिन्द-यूनानी शासकों ने ही सोने के सिक्के जारी किये थे।
  • भारत में सबसे पहले हिन्द-यूनानी शासकों ने राजाओं के नाम वाले सिक्के जारी किये थे।

 

41 उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • ‘मिलिन्द पञ्हो’ अर्थात् मिलिन्द के प्रश्न में यूनानी शासक मिनांदर द्वारा नागसेन से बौद्ध-धर्म पर पूछे गए प्रश्नों व नागसेन द्वारा दिये गए उत्तरों का एक पुस्तक के रूप में संकलन है। अतः कथन (1) सत्य है।
  • हिन्द-यूनानी शासकों ने भारत के पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में यूनान की कला का प्रचलन आरम्भ किया, जिसे ‘हेलेनिस्टिक आर्ट’ कहते हैं। यह कला विशुद्ध यूनानी नहीं थी। सिकंदर की मृत्यु के बाद विजित गैर-यूनानियों के साथ यूनानियों के संपर्क से इसका उदय हुआ था। भारत में गांधार कला इसका उत्तम उदाहरण है। अतःकथन (2) असत्य है|

 

42उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • शकों द्वारा स्थापित पाँच शाखाएँ भारत और अफगानिस्तान के अलग-अलग भागों में थी। इनकी दूसरी शाखा पंजाब में बसी, जिसकी राजधानी तक्षशिला थी। मथुरा में तीसरी शाखा थी, जहाँ उन्होंने दो सदियों तक राज्य किया था। अतः कथन (1) असत्य है।
  • सर्वाधिक प्रसिद्ध शक शासक रुद्रदामन प्रथम था। उसका शासन सिंध, कोंकण, नर्मदा घाटी, मालवा, काठियावाड़ और गुजरात के बड़े भाग में था। अतः कथन (2) सत्य है।
  • रूद्रदामन संस्कृत का बड़ा प्रेमी था। उसने सबसे विशुद्ध संस्कृत भाषा में लम्बा अभिलेख जारी किया। अतः कथन (3) सत्य है।
  • उल्लेखनीय है कि इससे पहले जो लम्बे अभिलेख देश में पाए गए थे, सभी प्राकृत भाषा में रचित हैं।

43 उत्तरः (c)

व्याख्याः

  • रुद्रदामन प्रथम ने गुजरात काठियावाड़ के अर्धशुष्क क्षेत्र की मशहूर झील सुदर्शन का जीर्णोद्धार किया था।
  • उल्लेखनीय है कि सुदर्शन झील का निर्माण चन्द्रगुप्त मौर्य के आदेश से गिरनार में नियुक्त राज्यपाल ‘पुष्यगुप्त वैश्य’ ने करवाया था। सम्राट अशोक के महामात्य तुषास्प ने इस झील का पुनर्निर्माण करवाकर इसे मज़बूती प्रदान की।

44 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • 57-58 ई. में उज्जैन के शासक ने, जो अपने आप को विक्रमादित्य कहता था, शकों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में 57 ई. पू. से विक्रम संवत् आरम्भ किया। अतः कथन (1) असत्य है।
  • शक संवत् कुषाण शासक कनिष्क ने 78 ई. में चलाया था। अतः कथन (2) असत्य है।
  • वर्तमान में भारत सरकार द्वारा शक संवत् प्रयोग में लाया जाता है। अतः कथन (3) सत्य है।

 

45 उत्तरः (a)
व्याख्याः

  • पह्लव यूनानियों और शकों के विपरीत ईसा की पहली सदी में पश्चिमोत्तर भारत के एक छोटे से भाग पर ही अधिकार कर सके। अतः कथन (a) असत्य है, जबकि अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
  • सबसे प्रसिद्ध पह्लव शासक गोंदोफर्निस था।
  • पह्लव लोगों का मूल निवास स्थान ईरान था।
  • उनके शासनकाल में सेंट टॉमस ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिये भारत आया था

46 उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • उनका साम्राज्य अमुदरिया से गंगा तक, मध्य एशिया के खुरासान से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक फैला था। कुषाणों ने सोवियत गणराज्य में शामिल मध्य एशिया का हिस्सा ईरान, अफगानिस्तान और पूरे पाकिस्तान पर अधिकार कर लिया था। अतः कथन (1) सत्य है।
  • कैडफाइसिस द्वितीय ने बड़ी मात्रा में स्वर्ण मुद्राएँ जारी की थी। अतः कथन (2) असत्य है।
  • कुषाणों की पहली राजधानी आधुनिक पाकिस्तान में अवस्थित पुरुषपुर या पेशावर में थी। उल्लेखनीय है कि मथुरा में कुषाणों के सिक्के, अभिलेख और मूर्तियाँ मिले हैं, इससे प्रकट होता है कि मथुरा कुषाणों की द्वितीय राजधानी थी।

47 उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • वह बौद्ध धर्म का संरक्षक था, उसने बड़ी उदारता से बौद्ध धर्म का संपोषण-संरक्षण किया। वह महायान संप्रदाय को मानता था। अतः कथन (1) असत्य है।
  • उसने कश्मीर में बौद्धों का सम्मेलन आयोजित करवाया, जिसमें बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय को अंतिम रूप दिया गया। अतः कथन (2) सत्य है।

48  उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • कुषाण शासकों में कैडफाइसिस प्रथम ने हिन्दुकुश के दक्षिण में रोमन सिक्कों की नकल करके बड़ी मात्रा में तांबे के सिक्के ढलवाए थे।
  • उल्लेखनीय है कि कुषाण शासकों ने स्वर्ण एवं ताम्र दोनों ही प्रकार के सिक्कों को व्यापक पैमाने पर प्रचलित किया था।

 

49उत्तरः (c)
व्याख्याः

  • मध्य एशियाई लोगों के पास अपनी लिपि, लिखित भाषा और कोई सुव्यवस्थित धर्म नहीं था। इसलिये उन्होंने संस्कृति के इन उपादानों को भारत से लिया। वे भारतीय समाज के अभिन्न अंग बन गए। अतः कथन (c) असत्य है, जबकि तीनों अन्य कथन सत्य हैं।
  • इस काल की एक विशेषता ईंटों के कुँओं का निर्माण है।
  • इस काल में व्यापक पैमाने पर भवन-निर्माण के कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई और इनके बर्तन भी असाधारण प्रकार के फुहारों और टोटियों वाले थे।
  • इनके पास बड़े पैमाने पर उत्तम अश्वारोही सेना थी। उन्होंने अश्वारोहण की परंपरा चलाई। उन्होंने लगाम और जीन का प्रयोग प्रचलित किया था। वे रस्सी का बना एक प्रकार का अंगूठा-रकाब भी लगाते थे, जिससे उन्हें घुड़सवारी में सुविधा होती थी।

 

50 उत्तरः (a)
व्याख्या:

  • मध्य एशिया और भारत के बीच घने संपर्क के परिणामस्वरूप भारत को मध्य एशिया के अल्ताई पहाड़ों से भारी मात्रा में सोना प्राप्त हुआ। इसके अलावा रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार के द्वारा भी सोना प्राप्त होता था। अतः कथन (1) सत्य है।
  • कुषाणों ने रेशम के प्रख्यात मार्ग पर नियंत्रण कर लिया था, जो चीन से चलकर कुषाण साम्राज्य में शामिल मध्य एशिया और अफगानिस्तान से गुज़रते हुए चीन जाता था और पूर्वी भूमध्यसागरीय अंचल में रोमन साम्राज्य के अंतर्गत पश्चिम एशिया तक जाता था। अतःकथन (2) असत्य है|

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