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1.ईरान के राष्ट्रपति आज आएंगे भारत

  • ईरान के राष्ट्रपति डा. हसन रोहानी भारत की तीन दिन की सरकारी यात्रा पर बृहस्पतिवार को आएंगे। विदेश मंत्रालय ने यहां बताया, वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंतण्र पर 15 से 17 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे।डा. रोहानी का 17 फरवरी को राजधानी में राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया जाएगा।
  • उसी दिन उनकी राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद और प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठकें होंगी। उल्लेखनीय है कि मोदी मई 2016 में ईरान की यात्रा पर गये थे। ईरान के राष्ट्रपति की आगामी यात्रा में दोनों पक्ष भारत एवं ईरान के द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार विमर्श करेंगे।
  • डा. रोहानी हैदराबाद भी जाएंगे। अपनी दो दिवसीय हैदराबाद यात्रा के दौरान मुस्लिम बुद्धिजीवियों की एक सभा को संबोधित करेंगे। सूत्रों ने बताया, रोहानी अपनी भारत यात्रा के तहत हैदराबाद के दो दिवसीय दौरे के तहत कल यहां पहुंच रहे हैं। रोहानी शाम करीब चार बजे विमान से बेगमपेट हवाई अड्डे पर उतरेंगे।
  • अगस्त 2013 में पदभार संभालने के बाद यह उनकी यहां की पहली यात्रा होगी। सूत्रों ने कहा, उनका कल शाम साढे छह बजे मुस्लिम बुद्धिजीवियों, विद्वानों और धर्मगुरूओं को संबोधित करने का कार्यक्रम है।
  • उन्होंने बताया कि 16 फरवरी को राष्ट्रपति रोहानी ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के बाद साप्ताहिक जलसे को संबोधित करेंगे।

 

  1. पीएनबी में देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला
  • पहले से ही कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे देश के सरकारी बैंकों को अब इतिहास के सबसे बड़े घोटाले से निपटना होगा। लर (11,346 करोड़ रुपये) का घोटाला हुआ है। इस घोटाले की आंच दूसरे बैंकों तक भी जाएगी। इस घोटाले के तार भी रत्न व आभूषण के प्रसिद्ध कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े हुए हैं जिनके खिलाफ पीएनबी ने एक पखवाड़े पहले 280 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप लगाते हुए जांच सीबीआइ को सौंपी थी।
  • प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआइ की एफआइआर के आधार पर मोदी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। पीएनबी की तरफ से बुधवार सुबह शेयर बाजार को सूचना देकर अपनी सरकारी क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने यह राज उजागर किया है कि उसके मुंबई स्थित एक शाखा में 1.77 अरब डॉ एक शाखा में हुई इस धांधली के बारे में जानकारी दी।
  • यह मामला वर्ष 2010 से चल रहा था। बैंक ने बताया है कि उसने मुंबई स्थित अपनी एक शाखा में कुछ गड़बड़ी दर्ज की है। कुछ खाताधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए लेनदेन किए गए। इन लेनदेनों के आधार पर ग्राहकों को दूसरे बैंकों ने विदेशों में कर्ज दिए हैं। इस पूरे मामले का आकार 1.77 अरब डॉलर है। बैंक के अनुसार इसकी सूचना जांच एजेंसियों को दी गई है ताकि कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
  • पीएनबी की तरफ से यह सूचना आने के साथ ही वित्त मंत्रलय और पूरे बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। वित्त मंत्रलय ने पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है। वित्त मंत्रलय के बैंकिंग विभाग में संयुक्त सचिव लोक रंजन के मुताबिक, ‘यह एक बड़ा मामला नहीं है और ऐसी स्थिति नहीं है जिसे कहा जाए कि हालात काबू में नहीं है।’ लेकिन वित्त मंत्रलय के अन्य अधिकारी इस बात से चिंतित है कि इसके तार कुछ दूसरे सरकारी बैंकों से भी जुड़े हुए हैं।
  • यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक ने भी पीएनबी की तरफ से गड़बडी करने वाले खाताधारकों को जारी आशय पत्र (एलओयू) के आधार पर कर्ज दिए हैं। ऐसे में जांच के दायरे मे ये बैंक भी आएंगे। एलओयू एक बैंक शाखा की तरफ से दूसरे बैंक शाखा को जारी एक ऐसा प्रपत्र है जो निश्चित खाताधारकों के पक्ष में दी गई एक गारंटी होती है। इसके आधार पर दूसरे जगह की बैंक शाखा उस ग्राहक को कर्ज की सुविधा देती है।
  • ऐसे चल रहा था गोरखधंधा : बैंकिंग क्षेत्र के सूत्रों का कहना है कि जब नीरव मोदी मामले की जांच की गई तब इस तरह के दूसरे घोटाले का पता चला। नीरव मोदी व अन्य ग्राहक पीएनबी की उक्त शाखा से हासिल एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज हासिल करते थे। यह गोरखधंधा वर्ष 2010 से ही चल रहा था।
  • ग्राहक इस कर्ज को समय पर चुका रहे थे जिससे किसी को पता नहीं चल रहा था। आरबीआइ ने जब पीएनबी से जबाव तलब किया तो उसके पास इसे सार्वजनिक करने और मामला की जांच करवाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। इसी क्रम में दूसरे मामले भी सामने आए।

 

  1. बैंकों में फंसे कर्जे को लेकर उभरीं नई चिंताएं
  • देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक में 1.8 अरब डॉलर (करीब 11346 करोड़ रुपये) के घोटाले का पर्दाफाश। पिछली तिमाही में भारतीय स्टेट बैंक को 17 वर्षो बाद पहली बार घाटा और सारे सरकारी बैंको को संयुक्त तौर पर 15,200 करोड़ रुपये का नुकसान। ये कुछ उदाहरण हैं जो बताते हैं कि फंसे कर्ज यानी एनपीए की समस्या किस तरह से देश के बैंको को खोखला कर रही है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि आने वाले दिनों में एनपीए की समस्या और विकराल हो सकती है।
  • दो दिन पहले भारतीय स्टेट बैंक ने एनपीए को लेकर जो नए नियम बनाए हैं, उनसे बैंकिंग तंत्र में दो लाख करोड़ रुपये के नए एनपीए सामने आने का अनुमान है। अगर यही हाल रहा तो सरकार की तरफ से इन बैंकों को दिए गए 88 हजार करोड़ रुपये के पैकेज पर पानी फिर सकता है।
  • इस नई मुसीबत का सामना करने के लिए इन बैंकों को 25 हजार करोड़ रुपये की और पूंजी की दरकार होगी।1आरबीआइ के निर्देश के बाद बकाए कर्ज के निपटारे के मौजूदा आधे दर्जन नियम खत्म हो गए हैं। अब 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज पर हर हफ्ते बैंको को रिपोर्ट देनी होगी। इससे उन ग्राहकों की पहचान जल्दी होगी जिनके कर्ज की राशि एनपीए होने के कगार पर हैं। इससे बैंक ज्यादा सतर्क रहेंगे। साथ ही किसी भी कर्ज डिफॉल्ट के मामले में उसका समाधान छह महीने के भीतर निकालना होगा। नहीं तो उसे दिवालिया प्रक्रिया में ले जाना होगा।
  • कंसल्टेंसी फर्म क्रेडिट सुइस और क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि नए प्रावधान से दो लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त एनपीए का बोझ बैंकिंग सेक्टर पर पड़ेगा। यानी अगर यह सच हो गया तो मार्च, 2018 तक भारतीय बैंकों का एनपीए मौजूदा 9.40 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 11 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच सकता है।
  • एनपीए ने एक तरह से सरकारी बैंकों को अंदर से खोखला कर दिया है। अक्टूबर-दिसंबर, 2017 की तिमाही में एसबीआइ को 2416 करोड़ रुपये की हानि हुई है, बैंक को 17 वर्षो बाद हानि हुई है। इसी अवधि में बैंक ऑफ इंडिया को 2,341 करोड़ रुपये, कार्पोरेशन बैंक को 1240 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक 971 करोड़ रुपये और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 637 करोड़ रुपये की हानि हुई है।
  • केयर रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी बैंकों ने इस तिमाही में एनपीए की वजह से 51 हजार करोड़ रुपये का समायोजन किया और इन्हे संयुक्त तौर पर 15,200 करोड़ रुपये की हानि हुई है। दूसरे शब्दों में कहें तो अगर एनपीए के लिए प्रावधान नहीं करना होता तो बैंक 51 हजार करोड़ रुपये का उपयोग अपनी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में कर सकते थे। मौजूदा तिमाही के दौरान भी बैंकों को भारी हानि होने के पूरे आसार हैं।
  • एनपीए की समस्या में सरकारी बैंक पिछले कई वर्षो से जकड़े हुए हैं लेकिन पिछले दो वर्षो में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। सरकार की तरफ से उठाए जाने वाले किसी भी कदम के खास परिणाम नहीं निकला हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते संसद में एनपीए की समस्या को कांग्रेस राज का पाप बताया था। बैंक का बढ़ता एनपीए परोक्ष तौर पर बैंक की ग्राहक सेवा को प्रभावित करती है। इससे बैंकों के लिए कर्ज देने की लागत बढ़ती है। वे तकनीक वगैरह पर ज्यादा खर्च नहीं कर पाते हैं।

 

  1. एलटीसीजी का असर एनपीएस पर नहीं
  • शेयरों से कमाई पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) का राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) पर कोई खास असर नहीं पडेगा क्योंकि इसके पेंशन योजना के धन का निवेश जो न्यास करता है उसे कर से छूट प्राप्त है। पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के अधिकारी ने यह जानकारी दी।
  • एनपीएस नियामक पीएफआरडीए के चेयरमैन हेंमत कान्ट्रैक्टर ने यहां कहा, ‘‘एलटीजीसी का हम पर ज्यादा बोझ नहीं पडेगा। राष्ट्रीय पेंशन योजना में निवेश एनपीएस न्यासी द्वारा किया जाता है, जो एक कर छूट प्राप्त संस्था है। जहां तक पेंशन निवेश का संबंध है, एलटीसीजी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • स्टाक होंिल्डग कारपोरेशन के सहयोग से एनपीएस पर आयोजित एक सम्मेलन के मौके पर कान्ट्रैक्टर ने यह बात कही।उन्होंने कहा कि एलटीजीसी का प्रभाव टियर-2 खातों और स्वैच्छिक रूप से योजना को चुनने वाले गैर-पेंशन योजना वाले खातों पर पड़ेगा।
  • टियर-2 खातों को कोई कर लाभ नहीं मिलता है। पर इन टियर-2 का निवेश कोष बहुत छोटा है। एनपीएस दो तरह के खातों-टियर-1 और टियर-2- का प्रबंधन करता है। बजट 2018-19 में शेयर बाजार में एक लाख रपए से अधिक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर दस प्रतिशत कर (एलटीजीसी) लगाने की घोषणा की गई है।
  • वर्तमान में एनपीएस का कुल कोष 2.25 लाख करोड़ रपए है। इसके 2 करोड़ ग्राहकों हैं।

 

  1. इस औद्योगिक वृद्धि पर खुशी मनाएं या गम
  • देश की औद्योगिक प्रगति हर किसी के लिए खुशी लेकर आती है लेकिन केंद्रीय सांख्यिकी आयोग ने औद्योगिक विकास के जो आंकड़े जारी किये है, उसमें एक गंभीर चिंता की झलक है। 7.1 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी औद्योगिक प्रगति में सबसे तेजी पाचन, एसिडिटी, उच्च रक्तचाप और केलोस्ट्रोल बीमारी से लड़ने की दवाइयों के उत्पादन में वृद्धि का योगदान है।
  • यानि देश में इन बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सीएसओ ने इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) के आंकड़े जारी किये हैं। ये आंकड़े 2016 दिसम्बर और 2017 दिसम्बर के हैं, ताकि पिछले साल और इस साल में तुलना की जा सके।
  • सीएसओं के आंकड़ों के मुताबिक गत दिसम्बर में दवा बनाने की कंपनियों, मेडिकल कैमिकल और बोटेनिकल उत्पाद में 33.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इनमें खून को पतला करने, कोलेस्ट्रोल और तनाव व उच्च रक्तचाप कम करने वाली दवाइयों के उत्पादन में 250 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जबकि पाचन, एसिडिटी और 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में पाचन, एसिडिटी और अल्सर जैसे पीपीआई की दवाइयों के उत्पादन का योगदान मात्र 0.22 प्रतिशत है, लेकिन इसके उत्पादन में हिस्सेदारी 2.22 प्रतिशत हो गयी है जो सबसे अधिक है।
  • यानि देश में सीमेंट, बिजली, डीजल, दोपहिया वाहनों के उत्पादन से ज्यादा पाचन और पेट संबधी बीमारियों के दवाइयों का उत्पादन बढ़ रहा

 

  1. योग्यता के मुताबिक काम न मिलना बड़ी समस्या : नीति आयोग
  • भारत में लोगों को योग्यता के हिसाब से काम नहीं मिल पाता है। अंडर-एंप्लॉयमेंट की यह समस्या बेरोजगारी से ज्यादा गंभीर है।
  • यह बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार सीआईआई कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन और एआई जैसी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और रोजगार के बीच संतुलन एक चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए हमें कोई स्मार्ट तरीका ढूंढ़ना होगा।
  • किसी विदेशी मॉडल की हूबहू नकल करके हम सफल नहीं हो सकते। कुमार ने कहा, ‘युवाओं की इच्छाएं कोसों आगे की हैं। बेरोजगारी हमारे लिए बड़ी समस्या नहीं है। योग्यता से कम नौकरी मिलना या असंतोषजनक रोजगार ज्यादा बड़ी समस्या है।’

 

  1. नौकरी चाहने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है; भारत को रेगुलर सैलरी वाली नौकरियां ज्यादा पैदा करनी होंगी: विश्व बैंक
  • विश्व बैंक ने कहा है कि भारत को नियमित सैलरी आधारित नौकरियां ज्यादा पैदा करने की जरूरत है। बढ़ती वर्किंग पॉपुलेशन को देखते हुए ऐसा करना जरूरी भी हो गया है। विश्व बैंक ने भारत के लिए बनाए गए सिस्टेमेटिक कंट्री डायग्नोस्टिक (एससीडी) मसौदे में यह बात कही है और इसे प्राथमिकता में शामिल करने का सुझाव दिया है। एससीडी विश्व बैंक की एनालिटिकल स्टडी है जो वह दुनियाभर के देशों में करता है।
  • इस मसौदे के मुताबिक 2005-2012 के बीच हर साल करीब 1.30 करोड़ लोगों ने कामकाजी उम्र में प्रवेश किया इनकी तुलना में नौकरियां सिर्फ 30 लाख ही पैदा की गईं। सबसे बढ़िया नौकरियां देने वाला पब्लिक सेक्टर भी महज 5% लोगों को रोजगार दे सका। अपनी तरह की पहली रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल देश के 20% से भी कम वर्कर्स ही सैलरी वाली नौकरियों में हैं।
  • विश्व बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत में नौकरी चाहने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कहीं ऐसा न हो जाए कि नौकरियों की ये कमी ने देश की जनसांख्यिकीय उपलब्धि को अभिशाप में बदल दे। विश्व बैंक के मुताबिक पिछले एक दशक से भारत को लोअर-मिडिल इनकम वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • बैंक ने यह भी कहा है कि देश में भूमि और श्रम बाजारों में सुधार का फायदा बिजनेस को मिल सकता है, इसमें स्थिरता आएगी। भूमि बाजार अच्छी तरह काम करें इसके लिए जरूरी है कि संपत्ति के अधिकार सही व्यक्ति के पास हों, ताकि सही रजिस्ट्री हो सके। निवेश और भूमि के इस्तेमाल में बदलाव के नियम स्पष्ट हों, इनमें जल्द बदलाव न किए जाएं।
  • इसके साथ ही श्रम बाजार लचीला हो, बाजार में बदलाव की स्थिति में भी उन्हें काम मिलना जारी रहे। उत्पादकता और नौकरियों में बढ़ोतरी के लिए यह जरूरी है।

 

  1. नए तरह के परमाणु हथियार बना रहा पाक
  • अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने आगाह किया कि पाकिस्तान छोटी दूरी के हथियारों सहित नए तरह के परमाणु हथियारों का विकास कर रहा है। नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक डैन कोट्स ने शनिवार को जम्मू में सुंजवान सैन्य शिविर पर हुए पाकिस्तानी आतंकियों के एक समूह के हमले के बाद यह टिप्पणी की है।
  • कोट्स ने खुफिया मामलों से जुडी सीनेट की प्रवर समिति द्वारा विश्वव्यापी खतरों के विषय पर आयोजित की गई सुनवाई के दौरान मंगलवार को सांसदों से कहा, पाकिस्तान छोटी दूरी के रणनीतिक हथियारों सहित नए तरह के परमाणु हथियारों का विकास कर रहा है।
  • उन्होंने अगाह किया कि पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का निर्माण एवं छोटी दूरी के रणनीतिक हथियारों सहित नए तरह के परमाणु हथियारों, समुद्र आधारित वूज मिसाइलों, हवा में छोड़े जाने वाली वूज मिसाइल और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का विकास करना जारी रखा है।कोट्स ने कहा, इन नए तरह के परमाणु हथियारों से क्षेत्र में सुरक्षा के लिए नए खतरे पैदा होंगे।
  • उन्होंने कहा, अमेरिका के लिए अगले साल से उत्तर कोरिया सबसे बड़े खतरों में से एक होगा। उत्तर कोरिया के ईरान और सीरिया समेत कई देशों को बैलिस्टिक मिसाइल की तकनीक देने के इतिहास तथा सीरिया द्वारा परमाणु रिएक्टर बनाने के दौरान उसकी मदद करना यह दिखाता है कि वह खतरनाक तकनीकों का प्रसार करना चाहता है।
  • उत्तर कोरिया ने लगातार दूसरे साल 2017 में अपनी पहली अंतमर्हाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने समेत कई बार बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।

 

  1. केन और बेतवा नदी को जोड़ने का रास्ता साफ
  • राजग सरकार के महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो कार्यक्रम के तहत केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा। इस बारे में प्रमुख अवरोधों को दूर करते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच अगले तीन-चार दिनों में समझौता होने जा रहा है।
  • जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को यहां बताया कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के बारे में उत्तर प्रदेश पहले ही तैयार था। अब मध्य प्रदेश के साथ भी सहमति बन गई है। 1उन्होंने कहा कि केंद्र ने मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार कर लिया है। अब कुछ छोटे-मोटे मुद्दे हैं, जिन्हें तीन-चार दिनों में सुलझा लिया जाएगा।
  • मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को इस विषय पर गडकरी के साथ दिल्ली में बैठक की थी। बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना की मूल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में इसे दो चरणों में पूरा किया जाना था।
  • जल संसाधन मंत्रलय ने मूल परियोजना में परिवर्तन करते हुए अब दोनों चरणों को एक साथ मिला दिया है।
  • जल संसाधन, नदी विकास मंत्रलय द्वारा केन-बेतवा लिंक के प्रथम और द्वितीय चरण को मिलाने का फैसला मप्र के आग्रह पर किया गया है। दोनों चरणों को साथ मिलाने के बाद इसकी अनुमानित लागत 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। पहले इस पर 18 हजार करोड़ लागत का अनुमान था।
  • परियोजना की फंडिंग केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के अनुपात में होगी। मप्र ने कथित तौर पर जोर दिया था कि निचले ओर्र बांध, बीना कम्प्लेक्स और कोठा बराज परियोजना से जुड़े कार्यो को पहले चरण में लिया जाए। मूल परियोजना में इन तीनों को दूसरे चरण में लिया जाना था।