Earth Hour 2018 Fact-WWF

Earth Hour 2018

Earth-Hour

Earth Hour was celebrated on March 24, 2018, from 8:30 to 9:30 in the whole world. This year a campaign called “Give Up to Give Back” was launched by the World Wide Fund for Nature – India.

This year WWF-India is launching ‘Give Up to Give Back’ initiative to motivate organizations, establishments and common people to control certain habits, work systems and life styles that have become overwhelming for our lives and the environment. is.
This campaign should be viewed as an opportunity to consolidate, change in culture and take practical change to sustainable, economical, operational support and cost reduction.
Earth Hour is also an integral part of the ‘Good Deed Movement’, in which each person has the responsibility to take responsibility for a small, voluntary green work for the protection and protection of the environment and the Earth.
It is necessary that every person adopts a green good deed in daily routine such as planting plantation, sorting of litter, using bicycles or car-pool to go to the office or to stop using plastic.
Earth Hour is a major movement for the environment in which people around the world are united to take a stand for climate change by closing unnecessary electricity for one hour.
Earth Hour is a global initiative for nature-WWF has a global initiative, in which 178 countries are included in the record.
The movement, which started signatively from Sydney in 2007, has become the world’s most pragmatic movement in relation to the environment today. This is a global initiative of the World Wide Fund for Nature.

अर्थ ऑवर 2018

Earth-Hour

24 मार्च, 2018 को संपूर्ण विश्व में रात्रि 8:30 से 9:30 तक अर्थ ऑवर यानी पृथ्वी ऑवर मनाया गया। इस वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-भारत (World Wide Fund for Nature – India) द्वारा ‘गिव अप टू गिव बैक’ (Give Up to Give Back) नामक अभियान भी आरंभ किया गया।

इस वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-भारत हमारे जीवन और पर्यावरण पर भार बन चुकी कुछ आदतों, कार्य प्रणालियों और जीवन-शैलियों पर नियंत्रण करने के वास्ते संगठनों, प्रतिष्ठानों और आम लोगों को प्रेरित करने के लिये ‘गिव अप टू गिव बैक’ पहल की शुरूआत कर रहा है।
इस अभियान को सतत्, किफायती, संचालन में मदद और लागत में कमी के प्रति उपभोग संस्कृति में परिवर्तन और व्यावहारिक बदलाव को ग्रहण करने के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिये।
अर्थ ऑवर ग्रीन गुड डीड्स मूवमेंट’ का भी अभिन्न हिस्सा है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की यह ज़िम्मेदारी है कि वह पर्यावरण और पृथ्वी की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये एक छोटा, स्वैच्छिक हरित कार्य करने का ज़िम्मा ले।
इसके लिये आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति पौधा लगाने, कूड़ें को छाँटने, दफ्तर जाने में साइकिल या कार-पूल का इस्तेमाल करने या फिर प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने जैसे एक ग्रीन गुड डीड को रोज़ाना के रूटीन में अपनाए।
अर्थ आवर पर्यावरण के लिये दुनिया का एक बड़ा आंदोलन है जिसमें दुनिया भर के लोग एक घंटे तक ग़ैर-जरूरी बिजली बंद करके जलवायु परिवर्तन के खिलाफ रुख अख्तियार करने के लिये एकजुट होते हैं।
अर्थ आवर प्रकृति के लिये विश्वव्यापी फंड-डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एक वैश्विक पहल है जिसमें रिकॉर्ड 178 देश शामिल होते हैं।
वर्ष 2007 में सिडनी से सांकेतिक तौर पर आरंभ हुआ यह आंदोलन आज पर्यावरण के संबंध में विश्व का सबसे व्यावहारिक आंदोलन बन चुका है। यह वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (World Wide Fund for Nature) की एक वैश्विक पहल है।