ECONOMY NCERT MCQ’S IN HINDI, CLASS-10

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1. विकास (6 प्रश्न)

[1]

किसी भी देश की औसत आय की गणना किस प्रकार की जाती है?

A) देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर।
B) जिन व्यक्तियों की वार्षिक आय एक लाख रुपए है, उनकी कुल आय को कुल जनसंख्या से गुणा करके।
C) गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर।
D) सरकार द्वारा प्राप्त कुल कर की राशि को कुल जनसंख्या से भाग देकर।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः किसी भी देश की आय उस देश के सभी निवासियों की आय है। लेकिन देशों के बीच तुलना करने के लिये कुल आय इतना उपयुक्त माप नहीं है। क्योंकि हर देश की जनसंख्या अलग-अलग होती है। क्या एक देश के लोग दूसरे देश के लोगों से बेहतर हैं? वस्तुतः इसके लिये हम औसत आय की तुलना करते हैं। औसत आय देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है। औसत आय को प्रतिव्यक्ति आय भी कहा जाता है।
विश्व बैंक की विकास रिपोर्ट के अनुसार देशों का वर्गीकरण करने में इस मापदण्ड का प्रयोग किया गया है। वे देश जिनकी 2013 में प्रतिव्यक्ति आय US $12736 प्रतिवर्ष या उससे अधिक है, उसे समृद्ध देश और वे देश जिनकी प्रतिव्यक्ति आय 2013 में केवल US $1045 प्रतिवर्ष या उससे कम है, उन्हें निम्न आय वाला देश कहा गया।

[2]

नीचे दिये गए राज्यों में शिशु मृत्यु दर सबसे कम किस राज्य में है?

A) महाराष्ट्र
B) पश्चिम बंगाल
C) केरल
D) तमिलनाडु

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः केरल में शिशु मृत्यु दर सबसे कम है। शिशु मृत्यु दर किसी वर्ष में पैदा हुए 1000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों का अनुपात दिखाती है।
केरल में शिशु मृत्यु दर कम इसलिये है, क्योंकि यहाँ स्वास्थ्य एवं शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

[3]

वैश्विक स्तर पर मानव विकास रिपोर्ट का प्रकाशन किस संस्था के द्वारा किया जाता है?

A) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
B) विश्व बैंक
C) अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक कोष
D) विश्व व्यापार संगठन

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा 1990 से मानव संसाधन के संपोषणीय एवं सृजनात्मक विकास के संबंध में एक रिपोर्ट पेश की जाती है, जिसे ‘मानव विकास रिपोर्ट’ (Human Development Report) के नाम से जाना जाता है।

[4]

विभिन्न देशों के संदर्भ में मानव विकास रिपोर्ट में उनका स्थान (रैंकिंग) किस/किन आधार पर तय किया जाता है?
1. लोगों का शैक्षणिक स्तर
2. लोगों की स्वास्थ्य स्थिति
3. प्रति व्यक्ति आय

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित ‘मानव विकास रिपोर्ट’ में देशों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर (स्कूली शिक्षा), उनकी स्वास्थ्य स्थिति और प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर करता है।

[5]

निम्नलिखित में से किस पड़ोसी देश की मानव विकास के लिहाज से स्थिति भारत से बेहतर है?

A) नेपाल
B) श्रीलंका
C) म्याँमार
D) बांग्लादेश

 

उत्तरः (b)

[6]

किसी देश की आर्थिक संवृद्धि का सबसे उपयुक्त मापदंड क्या है?

A) सकल घरेलू उत्पाद
B) सकल राष्ट्रीय उत्पाद
C) प्रति व्यक्ति आय
D) बेरोज़गारी की दर

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः किसी देश की संवृद्धि को मापने का सबसे उपयुक्त मापदंड उसकी प्रतिव्यक्ति आय है। जिन देशों की प्रतिव्यक्ति आय अधिक होती है उन्हें कम प्रतिव्यक्ति आय वाले देशों की तुलना में विकसित समझा जाता है।

2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक (7 प्रश्न)

[1]

नीचे दिये गए कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ियेः
1. जब प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन किया जाता है तो इसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है।
2. द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अंतर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के ज़रिये अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सही हैं। जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं तो इसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है। क्योंकि यह उन सभी उत्पादों का आधार है जिन्हें हम क्रमशः निर्मित करते हैं। चूँकि हम अधिकांश प्राकृतिक उत्पाद कृषि, डेयरी, मत्स्यन और वनों से प्राप्त करते हैं इसलिये इस क्षेत्रक को कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहा जाता है।
द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अंतर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के ज़रिये अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। यह प्राथमिक क्षेत्रक के बाद अगला कदम है। यहाँ वस्तु सीधे प्रकृति से उत्पादित नहीं होती है, बल्कि निर्मित की जाती है। यह प्रक्रिया किसी कारखाना, किसी कार्यशाला या घर में हो सकती है।

[2]

निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
1. तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करतीं बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग या मदद करती हैं।
2. तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग या मदद करती हैं, जैसे- प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक द्वारा उत्पादित वस्तुओं को थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को बेचने के लिये ट्रकों एवं ट्रेनों द्वारा परिवहन करने की ज़रूरत पड़ती है। परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक सेवाएँ तृतीयक गतिविधियों के कुछ उदाहरण हैं। चूँकि ये गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाए सेवाओं का सृजन करती हैं, इसलिये तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।

[3]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को सही तरीके से परिभाषित करता है?

A) किसी विशेष वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य।
B) किसी विशेष वर्ष में देश की नागरिकों द्वारा देश के भीतर एवं बाहर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य।
C) किसी विशेष वर्ष में देश के गरीबी रेखा से ऊपर के नागरिकों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य।
D) किसी विशेष वर्ष में देश के करदाता नागरिकों द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य।

उत्तरः (a)
व्याख्याः किसी विशेष वर्ष में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, उस वर्ष में क्षेत्रक के कुल उत्पादन की जानकारी प्रदान करता है। तीनों क्षेत्रकों के उत्पादनों के योगफल को देश का सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।

[4]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. भारत की जी.डी.पी. में सबसे अधिक योगदान तृतीयक क्षेत्रक में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का है।
2. भारत में लोगों को सबसे अधिक रोजगार प्राथमिक क्षेत्रक के अंतर्गत मिलता है।
3. भारत के सेवा क्षेत्र में उत्पादन की जितनी वृद्धि हुई उतनी रोजगार में वृद्धि नहीं हुई है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (d)
व्याख्याः भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सबसे अधिक योगदान तृतीयक क्षेत्रक का है तथा सबसे कम योगदान प्राथमिक क्षेत्रक का है। किन्तु रोज़गार के संदर्भ में इसकी एकदम विपरीत स्थिति है। सबसे अधिक नियोक्ता प्राथमिक क्षेत्र में लगे हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में रोजगार के पर्याप्त अवसर का सृजन नहीं हुआ है।
परिणामतः देश में आधे से अधिक श्रमिक प्राथमिक क्षेत्रक, मुख्यतः कृषि क्षेत्र में लगे हुए हैं, जिनका जी.डी.पी. में योगदान केवल एक-चौथाई है। इसकी तुलना में द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक का जी.डी.पी. में हिस्सा तीन-चौथाई है परन्तु ये क्षेत्र आधे से भी कम लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।

[5]

निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रक का विकास जितना अधिक होगा तृतीयक क्षेत्रक का विकास भी उतना ही अधिक होगा।
2. 
विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में अधिकांश श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में ही नियोजित हैं।

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः कृषि, खनन एवं उद्योगों के विकास से परिवहन, व्यापार एवं भण्डारण जैसी सेवाओं का विकास होता है। अतः प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रक का विकास जितना अधिक होगा, सेवाओं की मांग उतनी ही अधिक होगी जिस कारण तृतीयक क्षेत्रक के विकास में भी वृद्धि होगी।
विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में सामान्य लक्षण यह दिखाई देता है कि वहाँ के अधिकांश श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में नियोजित होते हैं।

[6]

अर्थव्यवस्था के संगठित क्षेत्रक के संबंध में नीचे दिये गए कथनों में से कौन-से सत्य हैं?
1. संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम अथवा कार्य-स्थान आते हैं, जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है।
2. संगठित क्षेत्रक सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और उन्हें सरकारी नियमों एवं विनियमों का अनुपालन करना होता है।
3. संगठित क्षेत्रक के कर्मचारी को सवेतन छुट्टी, अवकाश, बीमारी के कारण छुट्टी इत्यादि का कोई प्रावधान नहीं होता है।

A) 1 और 3
B) 2 और 3
C) 1 और 2
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (c)
व्याख्याः कथन 1 एवं 2 सही हैं। संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है। इसलिये लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है। वे क्षेत्रक सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और उन्हें सरकारी नियमों एवं विनियमों की अनेक विधियों जैसे कारखाना अधिनियम, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, सेवानुदान अधिनियम इत्यादि में उल्लेख किया गया है। इसे संगठित क्षेत्रक कहते हैं क्योंकि इसकी कुछ औपचारिक प्रक्रिया एवं कार्यविधि है।
संगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा के लाभ मिलते हैं। उनसे एक निश्चित समय तक ही काम करने की आशा की जाती है। इस क्षेत्र के कर्मचारी नियोक्ता से कई दूसरे लाभ भी प्राप्त करते हैं। जैसे सवेतन छुट्टी, अवकाश काल में भुगतान, भविष्य निधि, सेवानुदान इत्यादि।

[7]

अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्रक के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः
1. असंगठित क्षेत्रक में छोटी-छोटी और बिखरी इकाईयाँ शामिल होती हैं, जो अधिकांशतः सरकारी नियंत्रण से बाहर होती हैं।
2. यहाँ रोजगार सुरक्षित नहीं होता है तथा श्रमिकों को बिना किसी कारण काम से हटाया जा सकता है।
3. असंगठित क्षेत्रक के लिये कोई नियम एवं विनियम नहीं होते हैं।
उपरोक्त कथनों में कौन-से सत्य हैं?

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (a)
व्याख्याः असंगठित क्षेत्रक छोटी-छोटी और बिखरी इकाईयों, जो अधिकांशतः सरकारी नियंत्रण से बाहर होती हैं, से मिलकर बनी होती हैं। इस क्षेत्रक के नियम और विनियम तो होते हैं परन्तु उनका अनुपालन नहीं होता है। ये कम वेतन वाले रोजगार हैं और प्रायः नियमित नहीं हैं। यहाँ अतिरिक्त समय में काम करने, सवेतन छुट्टी, अवकाश, बीमारी के कारण छुट्टी इत्यादि का कोई प्रावधान नहीं होता है। बहुत से लोग नियोक्ता की पसंद पर निर्भर होते हैं।

3. मुद्रा और साख (3 प्रश्न)

[1]

नीचे दिये गए कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ियेः
1. लोगों का बैंक खातों में जमा धन को मांग जमा कहा जाता है।
2. मांग जमा आधुनिक अर्थव्यवस्था मे मुद्रा की भाँति कार्य करता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों

उत्तरः (c)
व्याख्याः मुद्रा ऐसी चीज है जो लेन-देन के लिये विनिमय का माध्यम बनती है। लोग अपने धन (मुद्रा) को बैंकों में जमा करते हैं। क्योंकि लोगों का धन बैंकों के पास सुरक्षित रहता है, और इन पर सूद (ब्याज) भी मिलता है। लोगों को अपनी आवश्यकता अनुसार इसमें से धन निकालने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। चूँकि बैंक खातों में जमा धन को मांग के ज़रिये निकाला जा सकता है, इसलिये इस जमा को मांग जमा कहा जाता है।
मांग जमा में मुद्रा के अनिवार्य लक्षण मिलते हैं। मांग जमा से चेक के द्वारा बिना नगद इस्तेमाल किये सीधा भुगतान करना संभव हो जाता है। चूँकि मांग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार्य किया जाता है। इसलिये आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है।

[2]

औपचारिक क्षेत्रक ऋण के संदर्भ में नीचे दिये गए कथनों में से कौन-से सत्य हैं?
1. औपचारिक क्षेत्रक ऋण के अंतर्गत बैंक एवं सहकारी समितियों के द्वारा दिया जाने वाला कर्ज़ आता है।
2. भारतीय रिज़र्व बैंक ऋणों के औपचारिक स्रोतों की कार्यप्रणाली पर नज़र रखता है।
3. ग्रामीण इलाकों में किसान एवं छोटे कर्ज़दारों के कर्ज़ का सबसे ज़्यादा भाग औपचारिक क्षेत्रक के द्वारा पूरा होता है।

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1 और 3
D) उपरोक्त तीनों

उत्तरः (a)
व्याख्याः कथन 1 एवं 2 सही हैं। विभिन्न प्रकार के ऋणों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है- औपचारिक एवं अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण। औपचारिक क्षेत्रक में बैंक एवं सहकारी समितियों के द्वारा दिये गए कर्ज़ आते हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ऋणों के औपचारिक स्रोतों की कार्य-प्रणाली पर नज़र रखता है। आर.बी.आई. इस बात पर नज़र रखता है कि बैंक केवल लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायों एवं व्यापारियों को ही ऋण मुहैया नहीं करा रहे बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्यमियों, छोटे व्यापारियों एवं छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दे रहे हैं। बैंकों द्वारा आर.बी.आई. को यह जानकारी देनी पड़ती है कि वे कितना ऋण दे रहे हैं तथा उनकी ब्याज दरें क्या हैं।
ग्रामीण इलाकों में किसानों एवं छोटे कर्ज़दारों के ऋणों का प्रमुख स्रोत अनौपचारिक क्षेत्रक है। क्योंकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों का पर्याप्त विस्तार नहीं है। बैंक जहाँ कहीं मौजूद भी हैं तो बैंक से कर्ज़ लेना अनौपचारिक स्रोत से कर्ज़ लेने की तुलना में ज़्यादा मुश्किल है।

[3]

अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण के अंतर्गत किन लोगों के द्वारा दिये गए कर्ज़ को शामिल किया जाता है?
1. साहूकार
2. व्यापारी
3. रिश्तेदार
4. दोस्त

A) 1 और 3
B) 2 और 4
C) 1 और 4
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः अनौपचारिक उधारदाता में साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार एवं दोस्त आते हैं। शहरी निर्धन एवं ग्रामीण परिवारों के लिये अनौपचारिक क्षेत्रक, ऋण का प्रमुख स्रोत है। अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।

4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था (3 प्रश्न)

[1]

नीचे दिये गए कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ियेः
1. जो कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है, बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है।
2. कंपनियों के द्वारा भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः ऊपर दिये गए दोनों कथन सही हैं। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन के लिये कारखाने स्थापित करती है, जहाँ उसे सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिलते हैं। कंपनियों द्वारा परिसंपत्तियों जैसे- भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा किये गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।

[2]

निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. सरकार द्वारा व्यापारिक गतिविधियों से अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।
2. विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सत्य है।

[3]

विश्व व्यापार संगठन का मुख्य कार्य हैः

A) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना।
B) विभिन्न देशों के बीच सीमा विवादों का निपटारा करना।
C) विकासशील एवं गरीब देशों को विकास कार्यों हेतु आर्थिक सहायता देना।
D) बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सरकारों के साथ विवाद का निपटारा करना।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। विकसित देशों की पहल पर शुरू किया गया विश्व व्यापार संगठन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है और यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो

 5. उपभोक्ता अधिकार (3 प्रश्न)

[1]

भारत सरकार के द्वारा उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिये बनाए गए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (कोपरा) के संदर्भ में कौन-से कथन सत्य हैं?
1. इस अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता अदालत का गठन किया गया।
2. इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य एवं ज़िला स्तरीय (त्रिस्तरीय) न्यायिक तंत्र की स्थापना की गई है।
3. इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत के आदेश के विरुद्ध अन्यत्र कहीं अपील नहीं की जा सकती।
4. इस अधिनियम में उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अदालत में ‘प्रतिनिधित्व का अधिकार’ नहीं दिया गया है।

A) 1 और 2
B) 3 और 4
C) 1, 2 और 3
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः केवल कथन 1 एवं 2 सही हैं। भारत सरकार के द्वारा उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिये 1986 में एक बड़ा कदम उठाया गया जिसे उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 कोपरा (COPRA) के नाम से जाना जाता है।
कोपरा के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिये ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है। ज़िला स्तर का न्यायालय 20 लाख तक के दावों से संबंधित मुकद्दमों पर विचार करता है, राज्य स्तरीय अदालतें 20 लाख से 1 करोड़ तक और राष्ट्रीय स्तर की अदालतें 1 करोड़ से ऊपर की दावेदारी से संबंधित मुकद्दमों को देखती हैं।
कथन 3 एवं 4 गलत हैं। राष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ता अदालत के आदेश के विरुद्ध एक माह की अवधि में उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है किन्तु शर्त यह है कि आदेशित धनराशि का 50 प्रतिशत अथवा 50,000 जो भी कम हो जमा कराना होगा। साथ ही इस अधिनियम ने उपभोक्ता को उपभोक्ता न्यायालय में ‘प्रतिनिधित्व का अधिकार’ देकर और सशक्त बनाया।

[2]

भारत में ‘सूचना का अधिकार’(RTI) कानून कब बना?

A) 2004
B) 2005
C) 2006
D) 2008

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः सन 2005 के अक्तूबर में भारत सरकार ने एक कानून लागू किया जो RTI (राइट टू इन्फॉरमेशन) या सूचना पाने के अधिकार के नाम से जाना जाता है। यह अपने नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्य-कलापों की सभी सूचनाएँ पाने के अधिकार को सुनिश्चित करता है।

[3]

उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के द्वारा एक उपभोक्ता को निम्नलिखित में से कौन-कौन से अधिकार प्रदान किये गए हैं?
1. चयन का अधिकार
2. क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार
3. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
4. प्रतिनिधित्व का अधिकार

A) 1, 2 और 3
B) 3 और 4
C) 1 और 2
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त सभी अधिकार उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 के द्वारा उपभोक्ताओं को दिये गए हैं

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