ECONOMY NCERT MCQ’S IN HINDI, CLASS-11

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1. स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था (कुल 6 प्रश्न)

[1]

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत आर्थिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. अंग्रेज़ी शासन की स्थापना से पूर्व भारत की अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी।
2. औपनिवेशिक शासकों की आर्थिक नीतियाँ शासित देश और वहाँ के लोगों के आर्थिक हितों के संरक्षण और संवर्धन से प्रेरित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः 

  • अंग्रेज़ी शासन की स्थापना से पूर्व भारत की अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी, परंतु औपनिवेशिक शासन द्वारा अपनाई गई नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था के मूल रूप को बदल कर रख दिया। अतः कथन 1 सही है।
  • औपनिवेशिक शासकों की आर्थिक नीतियाँ शासित देश और वहाँ के लोगों के आर्थिक विकास से नहीं बल्कि इंग्लैण्ड के आर्थिक हितों के संरक्षण और संवर्धन से प्रेरित थीं। उदाहरण स्वरूप बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत की राष्ट्रीय आय की वार्षिक संवृद्धि दर 2 प्रतिशत से कम जबकि प्रतिव्यक्ति उत्पादन वृद्धि दर मात्र आधा प्रतिशत ही थी। अतः कथन 2 गलत है।

[2]

औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत कृषि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत बढ़ते उद्योगों के कारण भारत मूलतः एक कृषि अर्थव्यवस्था से एक औद्योगिक अर्थव्यवस्था में बदल गया।
2. इस काल में एक बड़ी जनसंख्या का व्यवसाय होने के बाद भी कृषि क्षेत्र में गतिहीन विकास की प्रक्रिया चलती रही।
3. इस काल में कृषि क्षेत्र में वृद्धि के कारण कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) 1, 2 और 3

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः 

  • ब्रिटिश औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत भारत मूलतः एक कृषि अर्थव्यवस्था ही बना रहा। देश की 85 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में बसी थी और प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से आजीविका के लिये कृषि पर ही निर्भर थी। अतः कथन 1 गलत है।
  • इस काल में एक बड़ी जनसंख्या का व्यवसाय होने के बाद भी कृषि क्षेत्र में गतिहीन विकास की प्रक्रिया चलती रही। इसके साथ ही अनेक अवसरों पर उसमें अप्रत्याशित गिरावट भी आई। हालाँकि इस काल में कृषि क्षेत्र में वृद्धि के कारण कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, परंतु कृषि उत्पादकता में कमी आती रही। कृषि क्षेत्रक की गतिहीनता का मुख्य कारण औपनिवेशिक शासन द्वारा लागू की गई भू-राजस्व प्रणालियों को ही माना जा सकता है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

[3]

औपनिवेशिक काल में हो रहे वि-औद्योगीकरण के पीछे औपनिवेशिक शासकों के उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. वे भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिये कच्चे माल का निर्यातक बनाना चाहते थे।
2. वे इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के उत्पादन के लिये भारत को ही एक विशाल बाज़ार बनाना चाहते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सही हैं।

  • भारत में हो रहे वि-औद्योगीकरण के पीछे विदेशी अथवा औपनिवेशिक शासकों का दोहरा उद्देश्य था। एक तो वे भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिये कच्चे माल का निर्यातक बनाना चाहते थे। दूसरे वे इंग्लैंड में विकसित हो रहे उन्हीं आधुनिक उद्योगों के उत्पादन के लिये भारत को ही एक विशाल बाज़ार भी बनाना चाहते थे। इस प्रकार, उन उद्योगों के प्रसार के सहारे वे अपने देश के लिये अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना चाहते थे।
  • उल्लेखनीय है कि भारत के औद्योगिक क्षेत्रक में यद्यपि उन्नीसवीं शताब्दी के उतरार्द्ध और बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक वर्षों में कुछ आधुनिक उद्योगों की स्थापना हुई परंतु भारत में भावी औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु पूंजीगत उद्योगों का प्रायः अभाव ही बना रहा। पूंजीगत उद्योग वो होते हैं जो तात्कालिक उपभोग में कम आने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिये मशीनों तथा कलपुर्जों का निर्माण करते हैं।

[4]

औपनिवेशिक शासनकाल में विदेशी व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई वस्तु उत्पादन, व्यापार तथा सीमा शुल्क की प्रतिबंधकारी नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार की संरचना, स्वरूप और आकार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
2. इस काल में भारतीय आयत-निर्यात में निर्यात का आकर आयत के आकार से बड़ा बना रहा।
3. इस काल में निर्यात अधिशेष का देश में सोने और चांदी के प्रवाह पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।

  • औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई वस्तु उत्पादन, व्यापार तथा सीमा शुल्क की प्रतिबंधकारी नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार की संरचना, स्वरूप और आकार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। जिसके कारण भारत कच्चे उत्पाद जैसे रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन आदि का निर्यातक होकर रह गया और यह सूती, रेशमी, ऊनी वस्त्रों जैसी अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं और इंग्लैंड के कारखानों में बनी हल्की मशीनों आदि का आयातक भी बन गया।
  • इस काल में भारतीय आयत-निर्यात में निर्यात का आकर आयत के आकार से बड़ा बना रहा अर्थात् निर्यात अधिशेष की स्थिति बनी रही, परंतु इस अधिशेष से भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी हानि हुई। इससे देश में सोने और चांदी के प्रवाह पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। असल में इसका प्रयोग तो अंग्रेज़ों की भारत पर शासन करने के लिये गाढ़ी गई व्यवस्था का खर्च उठाने में ही हो जाता था।
  • अन्य शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि विदेशी व्यापार तो केवल इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति को पोषित कर रहा था।

[5]

औपनिवेशिक शासनकाल में भारत में जनांकिकीय परिस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

A) वर्ष 1921 के पूर्व का भारत जनांकिकीय संक्रमण के प्रथम सोपान में था।
B) इस समय भारत की जनसंख्या की संवृद्धि दर विस्फोटक अवस्था में थी।
C) इस काल में जीवन प्रत्याशा स्तर 35 वर्ष से भी कम था।
D) इस काल में सकल मृत्यु दर बहुत ऊँची थी।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः 

  • औपनिवेशिक शासनकाल में भारत की जनसंख्या का विस्तृत ब्योरा सबसे पहले 1881 की जनगणना से एकत्र किया गया। वर्ष 1921 के पूर्व का भारत जनांकिकीय संक्रमण के प्रथम सोपान में था। द्वितीय सोपान का आरंभ 1921 के बाद से माना जाता है। इस समय तक भारत की जनसंख्या न तो बहुत विशाल थी न ही उसकी संवृद्धि दर बहुत अधिक थी। अतः कथन (a) सही परंतु (b) गलत है।
  • सामाजिक विकास के विभिन्न सूचक भी बहुत उत्साहवर्धक नहीं थे। साक्षरता दर 16 प्रतिशत से कम जबकि महिला साक्षरता दर नगण्य केवल 7 प्रतिशत थी। इस काल में जीवन प्रत्याशा स्तर केवल 32 वर्ष ही कम था। अतः कथन (c) सही है।
  • इस काल में सकल मृत्यु दर बहुत ऊँची थी, विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर तो चौंकाने वाली थी। पर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, बार-बार प्राकृतिक आपदाओं और अकाल ने जनसामान्य को बहुत ही निर्धन बना दिया और इसके कारण उच्च मृत्यु दर का सामना करना पड़ा। अतः कथन (d) भी सही है।

[6]

औपनिवेशिक शासनकाल में व्यावसायिक और आधारिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. इस काल में सेवा क्षेत्रक विनिर्माण क्षेत्रक की तुलना में अधिक रोज़गार उपलब्ध करता था।
2. औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत देश में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार जैसी सेवाओं का विकास जन-सामान्य को अधिक सुविधाएँ देने के उद्देश्य से किया गया।
3. भारत में रेल की शुरुआत ने लोगों को भूक्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक व्यवधानों को कम कर आसानी से लंबी यात्राएँ करने के अवसर दिये।
4. भारत में रेल की शुरुआत से भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A) केवल 1, 2 और 3
B) केवल 2 और 4
C) केवल 1, 3 और 4
D) 1, 2, 3 और 4

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • कृषि सबसे बड़ा व्यवसाय था जो 70 से 75 प्रतिशत जनसंख्या को रोज़गार देता था, जबकि विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रकों में क्रमशः 10 प्रतिशत और 15 से 20 प्रतिशत जन-समुदाय को रोज़गार मिल पा रहा था। अतः कथन 1 सही है।
  • औपनिवेशिक शासनकाल के अंतर्गत देश में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार जैसी सेवाओं का विकास हुआ परंतु इसका उद्देश्य जन-सामान्य को अधिक सुविधाएँ देना नहीं बल्कि औपनिवेशिक हितों को साधना था। सड़कों तथा रेलों, आतंरिक व्यापार और समुद्री जलमार्गों का विकास सेनाओं के आवागमन एवं कच्चे माल को बंदरगाह तक पहुँचाने के लिये किया गया जबकि तार व्यवस्था का विकास कानून व्यवस्था को मज़बूती प्रदान करने के लिये किया गया। अतः कथन 2 गलत है।
  • रेलों की शुरुआत भले ही जनमानस को सविधा देने के लिये नहीं की गई थी परंतु फिर भी इसने भारत की अर्थव्यवस्था की संरचना को दो महत्त्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया। एक तो इसने लोगों को भूक्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक व्यवधानों को कम कर आसानी से लंबी यात्राएँ करने के अवसर दिये। दूसरे इससे भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिला। किंतु व्यावसायीकरण का भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर विपरीत प्रभाव पड़ा। भारत में निर्यात का स्तर तो बढ़ा परंतु इसका लाभ भारतवासियों को नहीं मिला। अतः सांस्कृतिक लाभ व्यापक होते हुए भी ये देश की आर्थिक हानि की भरपाई में सक्षम नहीं थे। अतः कथन 3 और 4 सही हैं।

2. भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990 (14 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख लक्षण है?

A) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
B) समाजवादी अर्थव्यवस्था
C) गांधीवादी अर्थव्यवस्था
D) मिश्रित अर्थव्यवस्था

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने एक आर्थिक पद्धति की कल्पना की, जिसमें समाजवाद और पूंजीवाद की  विशेषताएँ सम्मिलित थीं। इसकी परिणति मिश्रित अर्थव्यवस्था मॉडल के रूप में हुई।
[2]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन मिश्रित अर्थव्यवस्था का सर्वोत्कृष्ट वर्णन करता है?

A) वृहत् एवं कुटीर उद्योग का सहअस्तित्व।
B) औद्योगिक क्षेत्र और सेवा क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक योगदान।
C) निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की विद्यमानता।
D) आर्थिक नियोजन और विकास में केंद्र व राज्यों की समान भागीदारी।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की सहभागिता होती है अर्थात् सरकार व बाज़ार मिलकर निर्धारित करते हैं कि क्या उत्पादन किया जाए, किस प्रकार उत्पादन हो तथा किस प्रकार वितरण किया जाए। मिश्रित अर्थव्यवस्था में बाज़ार उन्हीं वस्तुओं और सेवाओं को सुलभ कराता है, जिसका वह अच्छा उत्पादन कर सकता है तथा सरकार उन आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को सुलभ कराती है जिन्हें बाज़ार सुलभ कराने में विफल रहता है।
[3]

निम्नलिखित में से कौन-से समाजवादी अर्थव्यवस्था के लक्षण हैं?

  1. इसमें समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं का उत्पादन होता है।
  2. इस व्यवस्था में आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक सिद्धांत द्वारा निर्देशित होती हैं।
  3. निजी संपत्ति का संग्रह नहीं किया जा सकता।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।

  • समाजवादी अर्थव्यवस्था में सरकार निर्णय करती है कि समाज की आवश्यकताओं के अनुसार भिन्न वस्तुओं का उत्पादन हो। समाजवादी व्यवस्था में यह माना जाता है कि सरकार यह जानती है कि देश के लोगों के हित में क्या है, इसलिये लोगों की वैयक्तिक इच्छाओं को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है। सरकार ही यह निर्णय करती है कि वस्तुओं का उत्पादन तथा वितरण किस प्रकार किया जाए।
  • समाजवादी अर्थव्यवस्था में अधिकतर आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक सिद्धांत द्वारा निर्देशित होती हैं।
  • समाजवाद में वस्तुओं और सेवाओं का वितरण लोगों की आवश्यकता के आधार पर होता है न कि उनकी क्रय क्षमता के आधार पर। इसके विपरीत इसमें निजी संपत्ति का कोई स्थान नहीं होता, क्योंकि प्रत्येक वस्तु राज्य की संपत्ति होती है।

[4]

यदि श्रम, पूंजी से सस्ता है तो अधिक श्रम प्रधान विधियों का प्रयोग होगा और यदि श्रम की अपेक्षा पूंजी सस्ती है, तो उत्पादन की अधिक पूंजी प्रधान विधियों का प्रयोग होगा।
ऊपर दिया गया विवरण किस प्रकार की अर्थव्यवस्था को निरूपित करता है?

A) मिश्रित अर्थव्यवस्था
B) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
C) समाजवादी अर्थव्यवस्था
D) स्वतंत्र अर्थव्यवस्था

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः उपरोक्त विवरण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से संबंधित है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की मांग और पूर्ति बाज़ार की शक्तियों पर निर्भर करती है। इस व्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं का विभिन्न व्यक्तियों के बीच वितरण उनकी क्रय क्षमता के आधार पर होता है।

[5]

भारत में योजना आयोग की स्थापना किस वर्ष की गई?

A) 1948
B) 1950
C) 1951
D) 1955

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः वर्ष 1950 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में योजना आयोग की स्थापना की गई। इसी के साथ भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के युग का सूत्रपात हुआ।

[6]

निम्न में से कौन-सी पंचवर्षीय योजना ‘महालनोबिस मॉडल’ पर आधारित थी।

A) दूसरी
B) पाँचवीं
C) सातवीं
D) बारहवीं

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत में द्वितीय पंचवर्षीय योजना प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् प्रशांत चंद्र महालनोबिस के योजना संबंधी दृष्टिकोण पर आधारित थी। इस कारण इस पंचवर्षीय योजना को महालनोबिस मॉडल पर आधारित कहा जाता है।

[7]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. एक वर्ष की अवधि में देश में उत्पादित हुए सभी वस्तुओं और सेवाओं के अंतिम बाज़ार मूल्य को उस देश की राष्ट्रीय आय कहते हैं।
  2. भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में कृषि क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन असत्य हैं।

  • एक वर्ष की अवधि में देश में उत्पादित हुए सभी वस्तुओं और सेवाओं का अंतिम बाज़ार मूल्य, उस देश का सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) होता है।
  • भारत देश के सकल घरेलू उत्पाद में सर्वाधिक योगदान सेवा क्षेत्र का है।

[8]

हमारे देश में स्वतंत्रता के बाद लागू किये गए भू-सुधार कार्यक्रम को किन राज्यों में सर्वाधिक सफलता मिली?

A) पंजाब, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश
B) केरल, पश्चिम बंगाल
C) राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र
D) पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश की भू-धारण पद्धति में ज़मींदार-जागीरदार आदि का वर्चस्व था। कृषि में समानता लाने के लिये भू-सुधारों की आवश्यकता हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य जोतों के स्वामित्व में परिवर्तन करना था। स्वतंत्रता के एक वर्ष बाद ही देश में बिचौलियों के उन्मूलन व वास्तविक कृषकों को ही भूमि का स्वामी बनाने जैसे कदम उठाए गए। भू-सुधार कानून में अनेक कमियाँ होने के कारण अधिकतर ज़मींदारों ने अपनी भूमि पर अधिकार बनाए रखा, किंतु केरल व पश्चिम बंगाल की सरकारें वास्तविक किसान को भूमि देने की नीति के प्रति प्रतिबद्ध थीं, इसी कारण इन प्रांतों में भू-सुधार कार्यक्रमों को विशेष सफलता मिली।

[9]

हरित क्रांति के पहले चरण में उच्च पैदावार वाली किस्मों के बीजों (HYV) का प्रयोग किन राज्यों तक सीमित रहा?

A) पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
B) पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार
C) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा
D) पंजाब, हरियाणा, सिक्किम

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः औपनिवेशिक काल का कृषि गतिरोध हरित क्रांति के आरंभ होने से स्थायी रूप से समाप्त हो गया। हरित क्रांति के पहले चरण में (लगभग 1960 के दशक के मध्य से 1970 के दशक के मध्य तक) HYV बीजों का प्रयोग पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे अधिक समृद्ध राज्यों तक ही सीमित रहा।

[10]

हरित क्रांति के परिणामों के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः

  1. आरंभ में केवल गेहूँ एवं चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई।
  2. उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ा।
  3. खाद्यान्न की वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत कमी आई।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 2
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।

  • हरित क्रांति का तात्पर्य, कृषि क्षेत्र में उच्च पैदावार वाली किस्मों के बीजों (HYV) के प्रयोग से है। आरंभ में HYV बीजों के प्रयोग से केवल गेहूँ व चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • कृषि में HYV बीजों के प्रयोग के लिये पर्याप्त मात्र में उर्वरकों, कीटनाशकों तथा निश्चित जल पूर्ति की आवश्यकता होती थी। इन आगतों का सही अनुपात में प्रयोग होना भी महत्त्वपूर्ण है।
  • हरित क्रांति काल में किसान अपने गेहूँ और चावल के अतिरिक्त उत्पादन का अच्छा खासा भाग बाज़ार में बेच रहे थे। इसके फलस्वरूप खाद्यान्न की कीमतों में उपभोग की अन्य वस्तुओं की अपेक्षा कमी आई।

[11]

भारत में निम्नलिखित में से किस पंचवर्षीय योजना में अर्थव्यवस्था के समाजवादी स्वरूप को अपनाया गया?

A) पहली पंचवर्षीय योजना में।
B) दूसरी पंचवर्षीय योजना में।
C) तीसरी पंचवर्षीय योजना में।
D) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः द्वितीय पंचवर्षीय योजना में अर्थव्यवस्था के समाजवादी स्वरूप का आधार तैयार करने का प्रयास किया गया। द्वितीय पंचवर्षीय योजना में भारतीय अर्थव्यवस्था को समाजवाद के पथ पर अग्रसर करने के लिये यह निर्णय लिया गया कि सरकार अर्थव्यवस्था में बड़े तथा भारी उद्योगों पर नियंत्रण रखेगी। इसका अर्थ यह था कि राज्य उन उद्योगों पर पूरा नियंत्रण रखेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिये महत्त्वपूर्ण थे। निजी क्षेत्रक की नीतियाँ सार्वजनिक क्षेत्रक की नीतियों की अनुपूरक होंगी और सार्वजनिक क्षेत्रक अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

[12]

औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 के अंतर्गत निजी क्षेत्र के उद्योगों के लिये ‘लाइसेंस पद्धति’ लागू की गई। इसका प्रमुख उद्देश्य था-

  1. निर्यात को बढ़ाना।
  2. पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देना।
  3. अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की मात्रा को नियंत्रित करना।
  4. जी.डी.पी. में कृषि क्षेत्र की जगह सेवा क्षेत्र के योगदान को बढ़ावा देना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः

A) केवल 1, 2 और 3
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3 और 4
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः भारी उद्योगों पर नियंत्रण रखने के राज्य के लक्ष्य के अनुसार औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 को अंगीकार किया गया। इस प्रस्ताव को द्वितीय पंचवर्षीय योजना का आधार बनाया गया। इस प्रस्ताव के अनुसार उद्योगों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया। प्रथम वर्ग में वे उद्योग शामिल थे, जिन पर राज्य का स्वामित्व था। दूसरे वर्ग में वे उद्योग शामिल थे, जिनके लिये निजी क्षेत्रक, सरकारी क्षेत्रक के साथ मिल कर प्रयास कर सकते थे, परंतु जिनमें नई इकाइयों को शुरू करने की एकमात्र जिम्मेदारी राज्य की होती। तीसरे वर्ग में वे उद्योग शामिल थे, जो निजी क्षेत्रक के अंतर्गत आते थे। यद्यपि निजी क्षेत्रक में आने वाले उद्योगों का भी एक वर्ग था, लेकिन इस क्षेत्रक को लाइसेंस पद्धति के माध्यम से राज्य के नियंत्रण में रखा गया। नए उद्योगों को तब तक अनुमति नहीं दी जाती थी, जब तक सरकार से लाइसेंस नहीं प्राप्त कर लिया जाता था। इस नीति का प्रयोग पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये किया गया। यदि उद्योग आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में लगाए गए, तो लाइसेंस प्राप्त करना आसान था। इसके अतिरिक्त, उन इकाइयों को कुछ रियायतें जैसे, कर लाभ तथा कम प्रशुल्क पर बिजली दी गई। इस नीति का उद्देश्य क्षेत्रीय समानता को बढ़ावा देना था। वर्तमान उद्योग को भी उत्पादन बढ़ाने या विविध प्रकार की वस्तुओं की नई किस्मों का उत्पादन करने के लिये लाइसेंस प्राप्त करना होता था। इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना था कि उत्पादित वस्तुओं की मात्रा अर्थव्यवस्था में अपेक्षित मात्रा से अधिक न हो।

[13]

डी.के. कर्वे समिति का संबंध है-

A) लघु उद्योगों के विकास से।
B) सार्वजनिक उपक्रमों के विकास से।
C) बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण से।
D) भुगतान संतुलन से।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः 1955 में ग्राम तथा लघु उद्योग समिति का गठन किया गया, जिसे कर्वे समिति भी कहा जाता था। इस समिति ने इस बात की संभावना पर विचार किया कि ग्राम विकास को प्रोत्साहित करने के लिये लघु उद्योगों का प्रयोग किया जाए। लघु उद्योग की परिभाषा किसी इकाई की परिसंपत्तियों के लिये दिये जाने वाले अधिकतम निवेश के संदर्भ में दी जाती है। समय के साथ-साथ निवेश की सीमा भी बदलती रही है। 1950 में लघु औद्योगिक इकाई उसे कहा जाता था, जो पाँच लाख रु. का अधिकतम निवेश करती थीं। इस समय, वह उद्योग जहाँ प्लाण्ट एवं मशीनरी में निवेश 25 लाख रूपए से अधिक लेकिन 5 करोड़ रूपए से कम होता है।

[14]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-

  1. आज़ादी के बाद सरकार द्वारा व्यापारिक नीति के तहत आयात-प्रतिस्थापन की नीति को अपनाया गया।
  2. आयात-प्रतिस्थापन की नीति के तहत आयात को प्रोत्साहित किया जाता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः पहला कथन सत्य है। स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई औद्योगिक नीति, व्यापारिक नीति से घनिष्ट रूप से संबंद्ध थी। प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में व्यापार की विशेषता अंतर्मुखी व्यापार नीति थी। तकनीकी रूप से इस नीति को आयात-प्रतिस्थापन कहा जाता है।
आयात-प्रतिस्थापन नीति का उद्देश्य आयात को हतोत्साहित कर ज़रूरत के सामान की आपूर्ति घरेलू उत्पादन द्वारा करना।

3. उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण: एक समीक्षा (8 प्रश्न)

 

[1]

नब्बे के दशक में भारत ने वित्तीय संकट के समय किन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त किया था?
1. विश्व बैंक
2. एशियाई विकास बैंक
3. बैंक ऑफ अमेरिका
4. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 3 और 4
C) केवल 2 और 4
D) केवल 1 और 4

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः नब्बे के दशक में भारत सरकार द्वारा वित्तीय संकट का सामना करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय पुननिर्माण और विकास बैंक (आई.बी.आर.डी.) जिसे सामान्यतः विश्व बैंक के नाम से जाना जाता है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 7 बिलियन डॉलर का ऋण लिया गया।

[2]

कथनः भारत सरकार ने 1990 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की।
कारणः वित्तीय संकट के समय विश्व बैंक और आई.एम.एफ. द्वारा वित्तीय सहायता उदारीकरण और  निजीकरण की शर्तों पर दी गई थी।
कूटः

A)  कथन सही है, कारण भी सही है तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
B) कथन सही है, कारण भी सही है, लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
C) कथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
D) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः कथन गलत है तथा कारण सही है। भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति की घोषणा 1991 में की थी। नब्बे के दशक में जब भारत सरकार के पास आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिये भी विदेशी मुद्रा नहीं बची तब उस स्थिति में सरकार ने विश्व बैंक और आई.एम.एफ. का दरवाज़ा खटखटाया। इस वित्तीय संकट का सामना करने के  लिये इन संस्थानों द्वारा कुछ शर्तों के साथ ऋण दिया गया, जैसे- सरकार उदारीकरण करेगी, निजी क्षेत्रों पर लगे प्रतिबंधों को हटाएगी तथा अनेक क्षेत्रों में सरकारी हस्तक्षेप कम करेगी।

[3]

नई आर्थिक नीति के तहत औद्योगिक क्षेत्र में किये गए सुधारों से संबंधित नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये-
1. निजी क्षेत्रों के लिये सभी उद्योगों के लिये लाइसेंसिंग व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
2. सार्वजनिक क्षेत्र के सभी आरक्षित उद्योगों को निजी क्षेत्र के लिये खोल दिया गया।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन असत्य हैं।

  • 1991 के बाद से आरंभ हुई सुधार नीतियों ने इनमें से अनेक प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया। एल्कोहल, सिगरेट, जोखिम भरे रसायनों, औद्योगिक विस्पफोटकों, इलेक्ट्रोनिकी, विमानन तथा औषधि-भेषज; इन छः उत्पाद श्रेणियों को छोड़ अन्य सभी उद्योगों के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
  • सार्वजनिक क्षेत्रक के लिए सुरक्षित उद्योगों के लिये प्रतिरक्षा उपकरण, परमाणु ऊर्जा उत्पादन और रेल परिवहन बचे हैं थे। लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित अनेक वस्तुएँ भी अब अनारक्षित श्रेणी में आ गई हैं। अनेक उद्योगों में अब बाज़ार को कीमतों के निर्धारण की अनुमति मिल गई है।

[4]

1991 के बाद शुरू हुई आर्थिक सुधार नीतियों के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?

A) वित्तीय क्षेत्रक सुधार के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को और अधिकार देकर आर्थिक क्षेत्र में नियंत्रक की भूमिका पर लाया गया।
B) विदेशी निवेश संस्थाओं (एफ.आई.आई.) को म्यूचुअल फंड में निवेश की अनुमति दी गई।
C) प्रत्यक्ष करों में कटौती की गई।
D) मुद्रा का अवमूल्यन किया गया।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः पहला कथन असत्य है। भारत में वित्तीय क्षेत्र का नियंत्रक रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया है। भारतीय रिज़र्व बैंक के विभिन्न नियम और कसौटियों के माध्यम से ही बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों के कार्यों का नियमन होता है। रिज़र्व बैंक ही तय करता है कि कोई बैंक अपने पास कितनी मुद्रा जमा रख सकता है। साथ ही ब्याज दरों को भी निर्धारित करता है। विभिन्न क्षेत्रकों को उधार देने की प्रकृति इत्यादि को भी यही तय करता है।

1991 के वित्तीय क्षेत्रक सुधार नीतियों का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि रिज़र्व बैंक को वित्तीय क्षेत्र में नियंत्रक की भूमिका से हटाकर उसे इस क्षेत्रक के एक सहायक की भूमिका तक सीमित कर दिया गया। इसका अर्थ है कि वित्तीय क्षेत्रक रिज़र्व बैंक से सलाह किये बिना ही कई मामलों में अपने निर्णय लेने में स्वतंत्रता हो गया।

[5]

आयात के परिमाण को सीमित करने के लिये सरकार द्वारा किन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?
1. प्रशुल्क (Tariff)
2. कोटा
3. सब्सिडी
कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) 1, 2 और 3
D) केवल 3

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः सरकार आयात के परिमाण को सीमित करने के लिये प्रशुल्क (Tariff), कोटा और सब्सिडी का प्रयोग करती है।

प्रशुल्क आयातित वस्तुओं पर लगाया गया कर है। प्रशुल्क लगाने पर आयातित वस्तुएँ अधिक महँगी हो जाती हैं, जो वस्तुओं के आयात को हतोत्साहित करती है।

कोटे में वस्तुओं की मात्र निर्दिष्ट की होती है, जिन्हें आयात किया जा सकता है।

सब्सिडी के तहत निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही साथ घरेलू उद्योगों को विदेशी सामानों से प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु सहायता भी प्रदान की जाती है, जो कहीं न कहीं आयात को हतोत्साहित करती है।

[6]

विश्व व्यापार संगठन (WTO) का गठन किस वर्ष किया गया?

A) 1994
B) 1995
C) 1999
D) 2001

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः व्यापार और सीमा शुल्क महासंधि (GATT)  के स्थान पर 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO)  की स्थापना की गई। GATT  की रचना विश्व व्यापार प्रशासक के रूप में 23 देशों ने मिलकर 1948 में की थी।

[7]

विश्व व्यापार संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है-

A)  विकासशील देशों को उनके भुगतान संतुलन में मदद करना।
B)  गरीब देशों को आधारभूत संरचना के विकास हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना।
C) विश्व के सभी देशों को व्यापार में समान अवसर सुलभ कराना।
D) विकसित एवं विकासशील देशों को पर्यावरण संरक्षण हेतु धन उपलब्ध करवाना।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य, विश्व व्यापार में सभी देशों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। विश्व व्यापार संगठन का ध्येय ऐसी नियम आधारित व्यवस्था की स्थापना करना है, जिसमें कोई देश मनमाने ढ़ंग से व्यापार के मार्ग में बाधाएँ खड़ी नहीं कर पाए। साथ ही इसका ध्यये सेवाओं के सृजन और व्यापार को प्रोत्साहन देना भी है, ताकि विश्व के संसाधनों का इष्टतम स्तर पर प्रयोग हो और पर्यावरण का भी संरक्षण हो सके।

[8]

1991 में अपनाई गई नई आर्थिक नीतियों के परिणामों के संदर्भ में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये-
1. कृषि की संवृद्धि दर में गिरावट आई।
2. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि हुई।
3. विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त तीनों कथन सही हैं। 1991 में अपनाई गई आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप कृषि और उद्योगों की संवृद्धि दरों में कुछ गिरावट आई। आर्थिक सुधार कार्यों से कृषि को कोई लाभ नहीं हो पाया और कृषि की संवृद्धि दर कम होती गई। औद्योगिक संवृद्धि की दर में भी शिथिलता आई है। यह औद्योगिक उत्पादों की गिरती हुई मांग के कारण है। मांग में गिरावट के कई कारण हैं। जैसे- सस्ते आयात, आधारित संरचना में अपर्याप्त निवेश आदि। अर्थव्यवस्था के खुलने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा विदेशी विनिमय रिज़र्व में तेज़ी से वृद्धि हुई।

4. निर्धनता (6 प्रश्न)

 

[1]

ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में ‘गरीबी रेखा’ के निर्धारण में प्रतिदिन औसतन कितने कैलोरी ऊर्जा उपभोग  का निर्धारण किया गया है?

A) 2400, 2100
B) 2000, 1500
C) 1000, 500
D) 3000, 2000

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः निर्धनता मापन की कई विधियाँ हैं, जिनमें से एक न्यूनतम कैलोरी उपभोग के मान (प्रति व्यक्ति व्यय) का निर्धारण करने की विधि है। प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी को ही निर्धनता रेखा या निरपेक्ष निर्धनता कहते हैं।

[2]

‘सेन-सूचकांक’ का संबंध है-

A) बेरोज़गारी से।
B) निर्धनता से।
C) शिक्षा से।
D) भ्रष्टाचार से।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः निर्धनता के आकलन की सरकारी विधियों की सीमाओं के कारण अनेक विद्वानों ने वैकल्पिक विधियों का प्रयोग करने के प्रयास किये हैं। निर्धनता के आकलन हेतु नोबेल पुरस्कार विजेता अर्मत्य सेन ने एक सूचकांक का विकास किया, जिसे ‘सेन-सूचकांक’ के नाम से जाना जाता है।

[3]

भारत में निर्धनता के स्तर का आकलन किया जाता है-

A) विभिन्न राज्यों में प्रति-व्यक्ति आय के आधार पर।
B) परिवार की औसत आय के आधार पर।
C) परिवार के उपभोग-व्यय के आधार पर।
D) देश की मलिन बस्तियों के आधार पर।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः हमारे देश में निर्धनता विषयक आधिकारिक आँकड़े योजना आयोग (नीति आयोग) उपलब्ध कराता है। ये आँकड़े प्रतिवर्ष सर्वेक्षण संगठन द्वारा परिवार के उपभोग-व्यय के आधार पर आकलित किये जाते हैं।

[4]

भारत के निम्नलिखित में से किन चार राज्यों में गरीबी, राष्ट्रीय गरीबी के स्तर से ऊपर है?

A) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु
B) केरल, बिहार, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश
C) ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश
D) हरियाणा, बिहार, गुजरात, असम

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः 1973 के बाद से कई भारतीय राज्यों ने गरीबी के स्तर को कम करने का काफी प्रयास किया और उसमें सफलता भी पाई। फिर भी चार राज्यों- ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में गरीबी का स्तर, राष्ट्रीय गरीबी के स्तर से ऊपर है।

[5]

किसी भी अर्थव्यवस्था में व्याप्त निर्धनता की समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं?
1. निम्न पूंजी निर्माण
2. धारिक संरचनाओं का अभाव
3. मांग का अभाव
4. अधिक जनसंख्या
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1, 2 और 3
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 3 और 4
D)

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः किसी भी देश में निर्धनता उस देश की अर्थव्यवस्था में व्याप्त निम्न समस्याओं के कारण भी हो सकती है-
1. निम्न पूंजी निर्माण।
2. आधारिक संरचनाओं का अभाव।
3. मांग का अभाव।
4. अत्यधिक जनसंख्या का दबाव।
5. सामाजिक/कल्याण व्यवस्था का अभाव।

[6]

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये तथा नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-
1. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोज़गार योजना                         – 1999
2. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम     – 2005
3. प्रधानमंत्री जन-धन योजना                                   – 2015
कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) केवल 1 और 2

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः तीसरा युग्म गलत है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना 2014 में शुरू की गई एक ऐसी योजना है जिसके अंतर्गत भारतवासियों को बैंक खाता खोलने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है

5. भारत में मानव पूंजी का निर्माण (4 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित में से कौन-से मानव पूंजी निर्माण के प्रमुख स्रोत हैं?

  1. शिक्षा में निवेश
  2. स्वास्थ्य
  3. आधुनिक उद्योगों की स्थापना
  4. प्रवसन

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 4
C) 2, 3 और 4
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः शिक्षा में निवेश, कार्य स्थल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, प्रवसन और सूचना मानव पूंजी निर्माण के स्रोत हैं।

[2]

मानव पूंजी एवं भौतिक पूंजी के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?

A) मानव पूंजी का निर्माण आंशिक रूप से एक सामाजिक प्रक्रिया है, जबकि भौतिक पूंजी का निर्माण एक आर्थिक व तकनीकी प्रक्रिया है।
B) मानव पूंजी अदृश्य होती है तथा भौतिक पूंजी सदृश्य होती है।
C) मानव पूंजी से केवल एक व्यक्ति लाभान्वित होता है जबकि भौतिक पूंजी का लाभ सारे समाज को प्राप्त होता है।
D) मानव पूंजी का प्रवाह भौतिक पूंजी से अधिक जटिल होता है।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः तीसरा कथन असत्य है। मानव पूंजी द्वारा सृजित हितलाभ के प्रवाह, भौतिक पूंजी के प्रवाह से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होते हैं। मानव पूँजी से केवल उसका स्वामी ही नहीं वरन् सारा समाज लाभांवित होता है। इसे एक बाह्य हित लाभ कहा जा सकता है। एक सुशिक्षित व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावपूर्ण भागीदारी के माध्यम से राष्ट्र की सामाजिक, आर्थिक प्रगति में योगदान करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति अपने वैयक्तिक स्तर पर तथा आस-पास में सफाई आदि के माध्यम से रोगों का संक्रमण रोक उन्हें महामारियों का रूप धारण नहीं करने देता। मानवीय पूँजी से व्यक्तिगत के साथ-साथ सामाजिक हितलाभों का भी सृजन होता है। किंतु भौतिक पूँजी तो प्रायः निजी लाभ को ही जन्म दे पाती है। पूँजीगत पदार्थों के लाभ उन्हीं को मिल पाते हैं जो उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की कीमत चुका सकें।

[3]

‘शिक्षा का अधिकार’ अधिनियम द्वारा किस आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है?

A) 5 से 12 वर्ष
B) 6 से 18 वर्ष
C) 6 से 14 वर्ष
D) 8 से 20 वर्ष

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः वर्ष 2009 में भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम को कानून बनाया, जिसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के आयु-वर्ग के सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है।

[4]

भारत सरकार ने सभी केंद्रीय करों में कितना प्रतिशत ‘शिक्षा उपकर’ लगाया है?

A) 2
B) 4
C) 8
D) 13

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत सरकार द्वारा सभी केंद्रीय करों पर 2 प्रतिशत का ‘शिक्षा उपकर’ लगाया जाता है। शिक्षा उपकर से प्राप्त राजस्व को प्राथमिक शिक्षा पर व्यय करने हेतु सुरक्षित रखा जाता है।

6. ग्रामीण विकास (7 प्रश्न)

 

[1]

भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित में से किस बैंक की स्थापना संपूर्ण ग्रामीण वित्त व्यवस्था के समन्वय के लिये एक शीर्ष संस्था के रूप में की गई है?

A) नाबार्ड
B) सिडबी
C) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
D) केंद्रीय सहकारी बैंक

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः 
भारत सरकार द्वारा 1982 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank For Agriculture And Rural Development—NABARD) की स्थापना ग्रामीण वित्त व्यवस्था के समन्वय के लिये एक शीर्ष संस्था के रूप में की गई। यह भारत में कृषि क्षेत्र को वित्त देने वाली एक शीर्ष संस्था है।

[2]

महिलाओं की ओर उन्मुख एक निर्धनता निवारक सामुदायिक कार्यक्रम ‘कुटुंब श्री’ निम्नलिखित में से किस राज्य में चलाया जा रहा है?

A) पश्चिम बंगाल
B) झारखंड
C) उड़ीसा
D) केरल

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः 
केरल प्रांत में महिलाओं की ओर उन्मुख एक निर्धनता निवारक सामुदायिक कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका नाम ‘कुटुंब श्री’ है। 1995 में सरकारी बचत एवं साख सोसायटी के रूप में गरीब महिलाओं के लिये बचत बैंक की स्थापना की गई थी। इसे अब सदस्य संख्या और बचत के आधार पर एशिया का विशालतम अनौपचारिक बैंक माना जाता है।

[3]

‘अतिलघु साख कार्यक्रम’ संबंधित है:

A) स्वयं सहायता समूह से।
B) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से।
C) मुद्रा व्यापार सहयोग निधि से।
D) भारतीय रिज़र्व बैंक से।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः 
स्वयं सहायता समूह में प्रत्येक सदस्य द्वारा जमा न्यूनतम अंशदान राशि में से ज़रूरतमंद सदस्यों को ऋण दिया जाता है। उस ऋण की राशि आसान किश्तों में लौटाई जाती है तथा ब्याज दर भी उचित रखी जाती है। देश में लाखों साख प्रदान करने वाले स्वयं सहायता समूह अनेक भागों में कार्य कर रहे हैं। इस प्रकार की साख उपलब्धता को ‘अतिलघु साख कार्यक्रम’ भी कहा जाता है।

[4]

निम्नलिखित में से कौन-से बैंकिंग संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों की संस्थागत संरचना हेतु ऋण उपलब्ध कराते हैं?

  1. व्यावसायिक बैंक
  2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  3. सहकारी समितियाँ
  4. भूमि विकास बैंक

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 4
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः
 ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत संरचना में सुधार हेतु उपरोक्त सभी बैंकों द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है।

[5]

सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः

  1. यह योजना 2015 में शुरू की गई।
  2. इस योजना के तहत 2019 तक प्रत्येक सांसद को 3 गाँव मॉडल गाँव के रूप में करने हैं।
  3. यह योजना केवल मैदानी इलाकों में लागू की गई है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 2
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • पहला कथन असत्य है। अक्तूबर 2014 में भारत सरकार ने सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों के लिये सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) नामक एक नई योजना की शुरुआत की।
  • दूसरा कथन सत्य है। इस योजना के तहत भारत के सांसदों को एक गाँव की पहचान करने और उसे विकसित करने की ज़रूरत है। इस योजना के तहत सांसद को वर्ष 2016 तक एक मॉडल गाँव और 2019 तक दो और गाँवों को मॉडल गाँव के रूप में विकसित करने की योजना है।
  • तीसरा कथन असत्य है। यह योजना मैदानी एवं पहाड़ी दोनों इलाकों के लिये है सिवाय यह कि सांसद का खुद या अपने/अपनी पति/पत्नी का गाँव नहीं होना चाहिये।

[6]

भारत के पशुधन में किसका सर्वाधिक योगदान है?

A) गाय
B) मुर्गी
C) भेड़
D) भैंस

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः 
भारत के पशुधन में सर्वाधिक योगदान मुर्गी पालन का है जो कि लगभग 58 प्रतिशत है।

[7]

भारत का फल- सब्ज़िओं के उत्पादन में विश्व में कौन-सा स्थान है?

A) दूसरा
B) तीसरा
C) पाँचवा
D) पहला

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः 
फल एवं सब्ज़िओं के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।

 

7. रोज़गार संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे (10 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. वे सभी क्रियाएँ जो जीडीपी में योगदान देती हैं, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं।
  2. वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।
  3.  स्व-नियोजन में लगे व्यक्ति भी श्रमिकों के अंतर्गत आते हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A)  केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं।

किसी भी देश में एक वर्ष के अंदर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य उस देश का ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (जीडीपी) कहलाता है। जीडीपी में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को हम आर्थिक क्रियाएँ कहते हैं तथा वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं ‘श्रमिक’ कहलाते हैं।

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि जिन्हें काम के बदले नियोक्ता द्वारा कुछ भुगतान किया जाता है, उन्हें श्रमिक कहा जाता है। परन्तु ऐसा नहीं है, जो व्यक्ति स्वनियोजित होते हैं वे भी श्रमिक ही होते हैं। अपने खेत/व्यवसाय आदि का स्वतंत्र रूप से संचालन करने वाले व्यक्ति भी स्वनियोजित कहलाते हैं।

[2]

कथनः ग्रामीण श्रमबल का अनुपात शहरी श्रमबल से अधिक है।
कारणः ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च आय के अवसर सीमित होते हैं।
कूटः

A) कथन सही है, कारण भी सही है तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
B) कथन सही है, कारण भी सही है, लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
C) कथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
D) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत में प्रत्येक 100 व्यक्तियों में से लगभग 39 श्रमिक हैं। शहरी श्रमिकों में यह अनुपात 36 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 40 है अर्थात् ग्रामीण श्रमबल का अनुपात शहरी श्रमबल से अधिक है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च आय के अवसर सीमित होने के कारण है, जिससे रोज़गार बाज़ार में उनकी भागीदारी अधिक है।

[3]

भारत में लोगों की आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत क्या है?

A) अनियत रोज़गार (casual wage labourers)
B) नियमित वेतनभोगी रोज़गार
C) स्वरोज़गार
D) कहना मुश्किल है।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः भारत में पुरुष और महिला श्रमिकों के 50 प्रतिशत से अधिक तो स्वरोज़गार वर्ग में आते हैं। अतः स्वरोज़गार ही देश की आजीविका का सबसे प्रमुख स्रोत है।

[4]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. केवल शहरी क्षेत्रों में पुरुषों की श्रमशक्ति की भागीदारी महिलाओं से अधिक है।
  2. अनियत रोज़गार (casual wage labourer) में महिलाओं का अंश पुरुषों से अधिक है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः पहला कथन असत्य है। शहरी और ग्रामीण दोनों ही वर्गों में पुरुषों की श्रमशक्ति की भागीदारी महिलाओं की तुलना में अधिक है। शहरी क्षेत्रों में तो पुरुष और महिला भागीदारी का अंतर बहुत बड़ा है। केवल 15 प्रतिशत शहरी महिलाएँ ही किसी आर्थिक कार्य में व्यस्त दिखाई देती हैं, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की रोज़गार बाज़ार में भागीदारी 25 प्रतिशत आँकी गई है।

अनियत रोज़गार (casual wage labourers) में महिलाओं का अंश पुरुषों से अधिक है। निर्माण कार्य में लगे मज़दूर अनियत मज़दूरी वाले श्रमिक कहलाते हैं। ऐसे मज़दूर जो अन्य लोगों के खेतों पर अनियत रूप से कार्य करते हैं और उसके बदले पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।

[5]

भारत में लोगों को सर्वाधिक रोज़गार किस क्षेत्र में प्राप्त होता है?

A) प्राथमिक क्षेत्र
B) द्वितीयक क्षेत्र
C) तृतीयक क्षेत्र
D) तीनों क्षेत्रों का अंश बराबर है।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत में श्रमिकों के रोज़गार का सबसे बड़ा स्रोत (जो कि लगभग 48 प्रतिशत है) प्राथमिक क्षेत्र है। प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कृषि, खनन एवं उत्खनन से संबंधित गतिविधियों को शामिल किया जाता है।

[6]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. विनिर्माण से संबंधित गतिविधियाँ द्वितीयक क्षेत्रक के अंतर्गत आती हैं।
  2. शहरी श्रमिकों को सर्वाधिक रोज़गार तृतीयक क्षेत्र में प्राप्त होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

[7]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘रोज़गारहीन संवृद्धि’ का सर्वोत्कृष्ट वर्णन करता है?

A) अर्थव्यवस्था के जीडीपी में सेवा क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान।
B) अर्थव्यवस्था में रोज़गार सृजन के बिना ही अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन।
C) रोज़गार के क्षेत्र में पुरुष श्रमिकों का अनुपात महिला श्रमिकों से अधिक होना।
D) अर्थव्यवस्था में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले श्रमिकों की संख्या में वृद्धि।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः जब किसी अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद में लगातार वृद्धि हो तथा रोज़गार में वृद्धि उस अनुपात में न हो या रोज़गार क्षेत्र में वृद्धि दर नकारात्मक हो तो इस परिघटना को रोज़गारहीन संवृद्धि कहा जाता है। दूसरे शब्दों में इसका अर्थ यह है कि अर्थव्यवस्था में रोज़गार सृजन के बिना ही वस्तुओं एवं सेवाओं का अधिक उत्पादन हो रहा है।

[8]

भारत में बेरोज़गारी के आँकड़े एकत्रित एवं प्रकाशित करता हैः

A) नीति आयोग
B) वित्त आयोग
C) एन.एस.एस.ओ.
D) मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः भारत में बेरोज़गारी के आँकड़े राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा एकत्रित एवं प्रकाशित किये जाते हैं।

[9]

प्रच्छन्न बेरोज़गारी का सामान्यतः अर्थ होता है कि:

A) लोग बड़ी संख्या में बेरोज़गार रहते हैं।
B) वैकल्पिक रोज़गार उपलब्ध नहीं है।
C) श्रमिक की सीमांत उत्पादकता शून्य है।
D) श्रमिकों की उत्पादकता नीची है।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः प्रच्छन्न बेरोज़गारी के अंतर्गत श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता लगभग शून्य होती है। उदाहरणस्वरूप यदि किसी किसान के पास चार एकड़ का भूखंड है और उसे अपने खेत में विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को निष्पादित करने के लिये दो श्रमिकों की आवश्यकता है, किंतु यदि वह अपने परिवार के पाँच सदस्यों (पत्नी, बच्चों) को भी कार्य में लगा ले तो यह स्थिति प्रच्छन्न बेरोज़गारी के नाम से जानी जाती है। क्योंकि यहाँ तीन अन्य लोगों की उत्पादकता शून्य है।

[10]

भारत के कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित में से किस प्रकार की बेरोज़गारी पाई जाती है?

  1. मौसमी बेरोज़गारी
  2. अनैच्छिक बेरोज़गारी
  3. चक्रीय बेरोज़गारी
  4. प्रच्छन्न बेरोज़गारी

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1, 2 और 3
B) केवल 2 और 3
C)  केवल 1, 3 और 4
D) केवल 1 और 4

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः भारत के कृषि क्षेत्र में प्रच्छन्न एवं मौसमी दोनों तरह की बेरोज़गारी पाई जाती है

8. आधारिक संरचना (6 प्रश्न)

 

[1]

‘विश्व विकास रिपोर्ट’ प्रकाशित की जाती है-

A) विश्व बैंक द्वारा
B) आईएमएफ द्वारा
C) यूनेस्को द्वारा
D) यूरोपीय विकास बैंक द्वारा

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः सन् 1978 से विश्व बैंक द्वारा हर साल ‘विश्व विकास रिपोर्ट (World Development Report) प्रकाशित की जाती है।

[2]

निम्नलिखित में से कौन-से ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों के अंतर्गत आते हैं?

  1. सौर ऊर्जा
  2. ज्वारीय ऊर्जा
  3. पेट्रोलियम
  4. पवन ऊर्जा

कूटः

A)  केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1 और 4
D) केवल 1, 2 और 4

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों के अंतर्गत सौर ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और पवन ऊर्जा आते हैं।

[3]

भारत के कुल ऊर्जा उपभोग का सर्वाधिक भाग किस स्रोत से पूरा होता है?

A) कोयला
B) प्राकृतिक गैस
C) पेट्रोलियम पदार्थ
D) नाभिकीय ऊर्जा

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत देश में कुल ऊर्जा उपभोग का सर्वाधिक हिस्सा कोयले के उपयोग द्वारा पूरा होता है।

[4]

विश्व के किस देश में प्रतिव्यक्ति ऊर्जा की खपत सर्वाधिक है?

A) चीन
B) जर्मनी
C) अमेरिका
D) भारत

उत्तरः (c)
व्याख्याः अमेरिका में प्रतिव्यक्ति ऊर्जा की खपत विश्व में सर्वाधिक है।

[5]

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को पोलियो मुक्त किस वर्ष घोषित किया गया?

A) 2012
B) 2014
C) 2015
D) 2016

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 2014 में भारत को पोलियों मुक्त देश घोषित किया गया, जबकि भारत चेचक रोग से 1980 में मुक्त हो गया था।

[6]

विश्व रोग भार (Global Burden of Disease- GBD) सूचक संबंधित है-

A) किसी रोग के कारण असमय मरने या रोगों के कारण असमर्थता में बिताए जाने वाले सालों से।
B) गंदी एवं मलीन बस्तियों में रहने वाले लोगों की बीमारी से।
C) किसी असाध्य रोग से लोगों के आय पर पड़ने वाले वित्तीय भार से।
D) कुपोषण के कारण महिलाओं एवं बच्चों के बौद्धिक एवं शारीरिक विकास के अवरुद्ध होने से।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः विश्व रोग भार (GBD) एक सूचक है, जिसका प्रयोग किसी विशेष रोग के कारण असमय मरने वाले लोगों की संख्या के साथ-साथ रोगों के कारण असमर्थता में बिताए सालों की संख्या जानने के लिये करते हैं।

भारत के जी.डी.बी. के आधे से अधिक हिस्से के अंतर्गत अतिसार, पेचिस, मलेरिया और क्षय रोग जैसी संक्रामक बीमारियाँ आती हैं।

9. पर्यावरण और धारणीय विकास (10 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित में से कौन-सा गैस समूह ‘ग्रीन हाउस प्रभाव’ में योगदान देता है?

A) अमोनिया तथा ओज़ोन
B) कार्बन मोनोऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड
C) कार्बन टेट्राफ्रलोराइड तथा नाइट्रस ऑक्साइड
D) कार्बन डाइऑक्साइड तथा मीथेन

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः मानव द्वारा वन विनाश तथा जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से पृथ्वी के निचले वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि होती है। ‘ग्रीन हाउस प्रभाव’ में योगदान देने वाली महत्त्वपूर्ण गैसें- जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड तथा मीथेन हैं।

[2]

‘क्योटो प्रोटोकाल’ का संबंध है-

A) ओज़ोन परत संरक्षण से।
B) आर्द्रभूमि के विकास एवं संरक्षण से।
C) ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करने से।
D) वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्द्धन से।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः 1997 में क्योटो, जापान में जलवायु परिवर्तन पर एक संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हुआ, जिसमें ग्लोबल वार्मिंग का सामना करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समझौता हुआ। इस समझौते में औद्योगीकृत राज्यों से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करने की मांग की गई। क्योटो समझौता 2005 से प्रभावी हुआ है।

[3]

निम्नलिखित में से कौन-से रसायन ओज़ोन परत अपक्षक हैं?

  1. क्लोरोफ्लोरो कार्बन
  2. कार्बन टेट्राक्लोराइड
  3. कार्बन टेट्राफ्लोराइड
  4. ब्रोमोफ्लोरो कार्बन

कूटः

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 4
D) केवल 1 और 4

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः ओज़ोन परत के क्षरण के लिये निम्न रसायन उत्तरदायी हैं-

  • क्लोरोफ्लोरो कार्बन
  • कार्बन टेट्राक्लोराइड
  • मिथाइल क्लोरोफॉर्म
  • ब्रोमोफ्लोरो कार्बन (ब्रोमाइन यौगिक जिन्हें हैलोन कहा जाता है।)

[4]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

A) ओज़ोन परत के क्षरण का कारण समताप मंडल में क्लोरीन और ब्रोमीन का उच्च स्तर है।
B) रेफ्रिज़रेटर, एयरकंडीशन तथा अग्निशामकों में उपयोग किये जाने वाले यौगिक ओज़ोन परत के लिये हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं।
C) ओज़ोन अपक्षय के कारण पृथ्वी पर आने वाली पराबैंगनी विकिरण जलीय जीवों को प्रभावित करती हैं।
D) इनमें से कोई नहीं।

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।

  • ओज़ोन अपक्षय का अर्थ समतापमंडल में ओज़ोन की मात्रा में कमीं से कमी है। ओज़ोन अपक्षय की समस्या का कारण समतापमंडल में क्लोरीन और ब्रोमीन के ऊँचे स्तर हैं।
  • ओज़ोन अपक्षय पदार्थों के मूल यौगिकों हैं- क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स (CFC) जिनका प्रयोग रेफ्रिज़रेटर और एयरकंडीशन को ठंडा रखने वाले पदार्थ या एरासोल प्रोपेलेन्ट्स में तथा अग्निशामकों में प्रयुक्त किए जाने वाले ब्रोमोफ्लोरोकार्बन्स में होता है।
  • ओज़ोन स्तर के अपक्षय के परिणामस्वरूप पराबैगनीं विकिरण पृथ्वी की ओर आते हैं और जीवों को क्षति पहुँचाते हैं। पराबैगनीं विकिरण विकारण से मनुष्यों में त्वचा कैंसर होता है, यह पादपप्लवक (फीटोप्लैंकटन) के उत्पादन को कम कर जलीय जीवों को प्रभावित करता है।

[5]

निम्नलिखित में कौन-सा सम्मेलन ओज़ोन परत के संरक्षण से संबंधित है?

A) मांट्रियल प्रोटोकॉल
B) क्योटो प्रोटोकॉल
C) मराकेश समझौता
D) कोपेनहेगेन समझौता

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः मांट्रियल प्रोटोकॉल का संबंध ओज़ोन परत के संरक्षण  से है।

[6]

अप्पिको आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-

  1. यह आंदोलन तमिलनाडु से संबंधित है।
  2. यह जल संरक्षण से संबंधित एक जन आंदोलन है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन असत्य हैं। चिपको आंदोलन के तर्ज पर कर्नाटक में भी एक ऐसा ही आंदोलन चला “अप्पिको” जिसका अर्थ होता है- बाहों में भरना। 8 सितंबर, 1983 को सिरसी जिले के सलकानी वन में वृक्ष काटे जा रहे थे। तब 160 स्त्री-पुरूष, और बच्चों ने पेड़ों को बाहों में भर लिया और लकड़ी काटने वालों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। वे अगले 6 सप्ताह तक वन की पहरेदारी करते रहे। इन स्वयंसेवकों ने वृक्षों को तभी छोड़ा, जब वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि वृक्ष वैज्ञानिक आधार पर और जिले की वन संबंधी कार्य योजना के तहत काटे जाएँगे।

[7]

निम्नलिखित में से भारत में मृदा अपरदन के प्रमुख कारण है-

  1. वन विनाश
  2. दावानल
  3. रासायनिक खादों का उपयोग
  4. सुपोषण

कूटः

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 1, 3 और 4
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः भारत में भूमि के अपक्षय के लिए उत्तरदायी कुछ प्रमुख कारण हैं-

  1. वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि
  2. अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे का निष्कर्षण
  3. खेती-बारी
  4. वन-भूमि का अतिक्रमण
  5. वनों में आग और अत्यधिक चराई
  6. भू-संरक्षण हेतु समुचित उपायों को न अपनाया जाना
  7. अनुचित फसल-चक्र
  8. कृषि-रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे- रासायनिक खाद और कीटनाशक
  9. सिंचाई व्यवस्था का नियोजन तथा अविवेवकपूर्ण प्रबंधन
  10. भूमि जल का पुनः पूर्ण क्षमता से अधिक निष्कर्षण
  11. संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता
  12. कृषि पर निर्भर लोगों की दरिद्रता।

[8]

भारत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना कब की गई?

A) 1972
B) 1974
C) 1984
D) 1998

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः भारत में वायु तथा जल प्रदूषण की दो प्रमुख पर्यावरणीय चिंताओं से निपटने के लिये सरकार ने 1974 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना की। यह बोर्ड जल, वायु और भूमि प्रदूषण से संबंधित सूचनाओं का संकलन और वितरण करता है।

[9]

ब्रंटलैंड कमीशन (Brundtland Commission) का संबंध है-

A) पर्यावरणीय समस्याओं के अध्ययन से।
B) मानव तस्करी की समस्या से।
C) असाध्य रोगों के प्रसार एवं उनके रोकथाम के उपायों के अध्ययन से।
D) वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध व्यापार से।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1983 में विश्व की पर्यावरण समस्याओं के अध्ययन के लिये ब्रंटलैंड आयोग का गठन किया। इस आयोग ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें ‘धारणीय विकास’ की परिभाषा के बड़े व्यापक रूप से उद्धरण दिये गए। धारणीय विकास की अवधारणा पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) ने बल दिया, जिसने इसे इस प्रकार परिभाषित किया- ‘ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता का समझौता किये बिना पूरा करें’।

[10]

फोटोवोल्टिक सेलों का मुख्य कार्य है-

A) सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना।
B) पवन ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना।
C) भूतापीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना।
D) कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक ऊर्जा का संचय करना।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः फोटोवोल्टिक सेलों का उपयोग सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तन करने के लिये किया जाता है

अर्थशास्त्र  › कक्षा 11  › 10. भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव (3 प्रश्न)

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[1]

सूची-II को सूची-I से मिलाइए तथा नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

सूची-I सूची-II
A. सार्क 1. 1985
B. ब्रिक्स 2. 1999
C. आसियान 3. 2006
D. G-20 4. 1967

कूटः
A         B      C              D

A) 1          2          4          3
B) 2          1          3          4
C) 4          3          2          4
D) 1          3          4          3

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः 
(संगठन)                  (स्थापना वर्ष)
सार्क                              1985
ब्रिक्स                            2006
आसियान                       1967
G-20                            1999

[2]

भारत पाकिस्तान और चीन के आर्थिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-

  1. तीनों देशों ने पंचवर्षीय योजनाओं को विकास के स्वरूप को आधार बनाया।
  2. चीन ने संरचनात्मक सुधारों का निर्णय स्वयं लिया था, जबकि भारत और पाकिस्तान ने सुधार अंतर्राष्ट्रीय दबावों के परिणामस्वरूप किया।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

[3]

‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ अभियान का संबंध निम्नलिखित में से किस देश से है?

A) चीन
B) पाकिस्तान
C) दक्षिण कोरिया
D) भारत

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः चीन ने 1998 में ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर देश का औद्योगीकरण करना था। लोगों को अपने घर के पिछबाड़े में उद्योग लगाने के लिये प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रें में कम्यून प्रारंभ किये गए। कम्यून पर्द्धात के अंतर्गत लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे। कम्यून में प्रायः समस्त कृषक शामिल थे।

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