ECONOMY NCERT MCQ’S IN HINDI, CLASS-12

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1. परिचय (4 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित में कौन-से आर्थिक एजेंट के अंतर्गत आते हैं?
1. उपभोक्ता
2. सरकार
3. निगम
4. बैंक
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

A)  केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1 और 4
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (d)
व्याख्याः आर्थिक इकाई अथवा आर्थिक एजेंट से हमारा तात्पर्य उन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं से है जो आर्थिक निर्णय लेते हैं। वे उपभोक्ता हो सकते हैं जो यह निर्णय लेते हैं कि क्या और कितना उपभोग करना  है। वे वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादक भी हो सकते हैं जो यह निर्णय लेते हैं कि क्या उत्पादन करना है और  कितना करना है। वे सरकार, निगम व बैंक जैसी संस्थाएँ भी हो सकती हैं जो विभिन्न प्रकार के आर्थिक  निर्णय लेते हैं, जैसे कितना खर्च करना है, साख पर कितना ब्याज दर लेना है, कितना कर लगाना है।

[2]

अर्थशास्त्र की प्रसिद्ध पुस्तक “द जनरल थ्योरी ऑफ इम्प्लॉयमेंट, इन्टरेस्ट एंड मनी” के लेखक कौन हैं?

A) एडम स्मिथ
B) जॉन मेनार्ड कीन्स
C) पी.सी. महालनोबिस
D) अमर्त्य सेन

उत्तरः (b)
व्याख्याः अर्थशास्त्र की पुस्तक ‘द जनरल थ्योरी ऑफ इम्प्लॉयमेन्ट, इन्टरेस्ट एंड मनी’ जॉन मेनार्ड कीन्स द्वारा लिखी गई है। 1936 ई. में प्रकाशित इस पुस्तक के बाद ही समष्टि अर्थशास्त्र का एक अलग शाखा के रूप में विकास हुआ।

[3]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन “निवेश व्यय” को परिभाषित करता है?

A) उत्पादन क्षमता में वृद्धि लाने के लिये किया गया व्यय।
B) सरकारी उपक्रमों से सरकार द्वारा विनिवेश की प्रक्रिया।
C) किसी देश की सरकार द्वारा निर्यात बढ़ाने हेतु सब्सिडी देना।
D) वस्तुओं की मांग और आपूर्ति का बाज़ार की शक्तियों द्वारा नियंत्रण।

उत्तरः (a)
व्याख्याः उद्यमियों द्वारा उत्पादन क्षमता में वृद्धि लाने के लिये जो व्यय किया जाता है, उसे निवेश व्यय कहते हैं, जैसे- नई मशीनें खरीदना, नई उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करना आदि।

[4]

निम्नलिखित में से कौन-सी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ हैं-
1. उत्पादन के साधनों पर सरकार का नियंत्रण।
2. बाज़ार में निर्गत को बेचने के लिये उत्पादन करना।
3. श्रमिकों की सेवाओं का क्रय-विक्रय एक निश्चित कीमत पर।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (b)
व्याख्याः वह अर्थव्यवस्था जिसमें अधिकांश आर्थिक क्रियाकलापों के निम्नलिखित अभिलक्षण होते हैं उसे पूंजीवादी अर्थव्यवस्था कहते हैं।

  • उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है।
  • बाजार में निर्गत (वस्तुओं एवं सेवाओं) को बेचने के लिये ही उत्पादन किया जाता है।
  • श्रमिकों की सेवाओं का क्रय-विक्रय एक निश्चित कीमत पर होता है, जिसे मज़दूरी की दर कहते हैं। (श्रम का क्रय-विक्रय जिस दर पर किया जाता है उसे श्रमिक की मज़दूरी दर कहते हैं।)

2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन (9 प्रश्न)

[1]

आधुनिक अर्थशास्त्र का जनक किसे कहा जाता है?

A) एडम स्मिथ
B) जॉन मेनार्ड कीन्स
C) अमर्त्य सेन
D) माल्थस

उत्तरः (a)
व्याख्याः एडम स्मिथ को आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक के रूप में जाना जाता है। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘एन इन्क्वायरी इन्टू द नेचर एंड काउज ऑफ द वेल्थ ऑफ नेशंस’ (1776) को अर्थशास्त्र विषय के मुख्य व्याख्यात्मक के रूप में जाना जाता है।

[2]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. ऐसी वस्तुएँ जिनका अंतिम उपभोग उपभोक्ताओं के द्वारा किया जाता है, अंतिम वस्तुएँ कहलाती हैं।
2. वस्तुएँ अपनी प्रकृति के कारण अंतिम वस्तुएँ बनती हैं।
3. मध्यवर्ती वस्तुएँ, अन्य वस्तुओं के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होती हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 2
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (c)
व्याख्याः पहला एवं तीसरा कथन सत्य है तथा दूसरा कथन असत्य है।
वस्तु की ऐसी मद या प्रकार जिनका अंतिम उपयोग उपभोक्ताओं के द्वारा होता है अर्थात् जिन्हें पुनः उत्पादन के प्रक्रम के किसी चरण से गुजरना नहीं पड़ता है अथवा जिनमें पुनः कोई परिवर्तन नहीं होता है, उन्हें अंतिम वस्तु कहते हैं।

  • कोई वस्तु अपनी प्रकृति के कारण नहीं बल्कि उपयोग की आर्थिक प्रगति की दृष्टि से अंतिम वस्तु बनती है। उदाहरण के लिये घर में बनाया गया भोजन बाज़ार में विक्रय हेतु नहीं जाता है, यद्यपि इसी प्रकार के भोजन बनाने का काम किसी होटल या रेस्त्राँ में किया जाए, जहाँ कि इन पकाए गए पदार्थों का विक्रय उपभोक्ताओं को किया जाता है, तब वही भोजन अंतिम वस्तु कहलाएगी तथा आगत के रूप में गिनी जाएगी जिससे कि आर्थिक मूल्यवर्द्धन होता है।
  • मध्यवर्ती वस्तुएँ, अन्य वस्तुओं के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होती हैं। जैसे- ऑटोमोबाइल निर्माण के लिये इस्पात की चादर का उपयोग और बर्तन बनाने के लिये ताँबे का प्रयोग। ये मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं जो प्रायः अन्य वस्तुओं के उत्पादन में कच्चे माल अथवा आगत के रूप में प्रयुक्त होती हैं।

[3]

किसी भी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की गणना करने के लिये किन विधियों का प्रयोग किया जाता है?
1. आय विधि
2. व्यय विधि
3. उत्पाद विधि
4. मूल्यह्रास विधि
कूट

A) केवल 1 और 2
B) केवल 3 और 4
C) केवल 2, 3 और 4
D) केवल 1, 2 और 3

उत्तरः (d)
व्याख्याः किसी भी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की गणना तीन में से किसी एक विधि से  कर सकते हैं-

  • आय विधिः कारक अदायगी के समस्त मूल्यों की माप करके।
  • व्यय विधिः फर्मों द्वारा प्राप्त व्यय के समस्त मूल्यों की माप करके।
  • उत्पाद विधिः फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के समस्त मूल्यों की माप करके।

[4]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) का सर्वोत्कृष्ट वर्णन करता है?

A) किसी वर्ष विशेष में देश की भौगोलिक सीमा के अंतर्गत सृजित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य का योग।
B) किसी वर्ष विशेष में देश के लोगों द्वारा भौगोलिक सीमा के अंदर एवं बाहर सृजित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य का योग।
C) किसी विशेष वर्ष में देश के लोगों द्वारा उपभोग की गई वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य।
D) एक वर्ष में देश के द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात के कुल मूल्य का योग।

उत्तरः (a)
व्याख्याः सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी वर्ष विशेष में किसी देश की भौगोलिक सीमा के अंतर्गत सृजित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य का योग होता है।

[5]

भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना के दौरान निम्नलिखित में से किन मदों को शामिल किया जाएगा?
1. किसान द्वारा उत्पादित गन्ने के मूल्य को।
2. विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की आय को।
3. विदेशियों के स्वामित्व वाली उत्पादन इकाइयों द्वारा भारत में उत्पादित वस्तुओं के मूल्य को।
कूटः

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (c)
व्याख्याः भारत की GDP की गणना के दौरान विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की आय की गणना भारत की GDP में नहीं की जाती है। इस आय को हम उसी देश के GDP में गणना करेंगे जहाँ वह काम कर रहा होता है, जबकि विधिक रूप से वह भारतीय है।

[6]

किसी भी देश के सकल घरेलू उत्पाद में शेष विश्व में नियुक्त उत्पादन के घरेलू कारकों द्वारा अर्जित कारक आय को जोड़कर उसमें से घरेलू अर्थव्यवस्था में नियोजित शेष विश्व के उत्पादन के कारकों द्वारा अर्जित आय को घटाकर प्राप्त होगा:

A) सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
B) कुल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP)
C) सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP)
D) राष्ट्रीय आय (NI)

उत्तरः (c)
व्याख्याः सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) = सकल घरेलू उत्पाद (+) शेष विश्व में नियुक्त उत्पादन के घरेलू कारकों द्वारा अर्जित कारक आय (-) घरेलू अर्थव्यवस्था में नियोजित शेष विश्व के उत्पादन के कारकों द्वारा अर्जित आय। अथवा दूसरे शब्दों में सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) किसी देश के नागरिकों द्वारा (देश के भीतर या बाहर) एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से विदेशियों के स्वामित्व वाले उत्पादन के कारकों को की गई अदायगी को घटाने से प्राप्त होता है। उदाहरण के लिये कोरियाई स्वामित्व की हुंडई कार फैक्ट्री के द्वारा अर्जित लाभ को भारत के सकल घरेलू उत्पाद से घटाना होगा।

[7]

किसी भी देश में पिछले वर्ष कि तुलना में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें दोगुनी हो जाएँ जबकि उत्पादन स्थिर रहे तो उस देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

A) दोगुना हो जाएगा।
B) स्थिर रहेगा।
C) आधा रह जाएगा।
D) कुछ नहीं कहा जा सकता।

उत्तरः (a)
व्याख्याः यदि हम दो लगातार वर्षों में किसी देश के घरेलू उत्पादों की माप करें और देखें कि घरेलू उत्पादों की माप दूसरे वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद का आँकड़ा पूर्व वर्ष के आँकड़े का दुगुना है तो हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि देश के उत्पादन का परिमाण दोगुना हो गया है, किंतु यह संभव है कि दोनों वर्षों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें ही केवल दोगुनी हुई है, जबकि उत्पादन स्थिर है।

[8]

उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) का प्रयोग किया जाता है:

A)  जी.डी.पी. में उपभोक्ता वस्तुओं के प्रतिशत योगदान की गणना करने के लिये।
B) किसी अर्थव्यवस्था में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न वस्तुओं के उपभोग की मात्रा ज्ञात करने में।
C) किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के कीमतों में परिवर्तन की माप करने के लिये।
D) इनमें से कोई नहीं।

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) अर्थव्यवस्था में कीमतों में परिवर्तन की माप करने की एक विधि है। यह वस्तुओं की दी गई टोकरी, जिनका क्रय प्रतिनिधि उपभोक्ता करते हैं, का कीमत सूचकांक है। उपभोक्ता कीमत सूचकांक को प्रायः प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। हम दो वर्षों पर विचार करते हैं-एक आधार वर्ष होता है तथा दूसरा चालू वर्ष। हम आधार वर्ष में वस्तुओं की दी हुई टोकरी के क्रय की लागत की गणना करते हैं। फिर हम परवर्ती को पूर्ववर्ती के प्रतिशत के रूप में व्यक्त करते हैं। इससे हमें आधार वर्ष से संबंधित चालू वर्ष का उपभोक्ता कीमत सूचकांक प्राप्त होता है।

[9]

जी.डी.पी. के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
1. किसी भी देश की जी.डी.पी. में वृद्धि उस देश के सभी लोगों के कल्याण का सूचकांक होता है।
2. अपने घरों में घरेलू कार्य का संपादन करने वाली महिलाओं का पारिश्रमिक जी.डी.पी. के अंतर्गत नहीं आता है।
कूट

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (b)
व्याख्याः 

  • पहला कथन असत्य है। सकल घरेलू उत्पाद को किसी देश के कल्याण के सूचकांक के रूप में लेना गलत होता है, क्योंकि किसी देश के जी.डी.पी. में सभी लोगों का योगदान एक समान नहीं रहता है तथा उद्योगों के द्वारा फैलने वाले ऋणात्मक बाह्यकारक भी अलग-अलग लोगों को अलग-अलग रूप में प्रभावित करते हैं।
  • दूसरा कथन सत्य है। अर्थव्यवस्था में अनेक कार्यकलापों का मूल्यांकन मौद्रिक रूप में नहीं होता है जिससे वे जी.डी.पी. में शामिल नहीं हो पाते हैं। उदाहरणार्थ, महिलाएँ जो अपने घरों में घरेलू सेवाओं का निष्पादन करती हैं, सुदूर अल्पविकसित क्षेत्र जहाँ पर वस्तु विनिमय होता है

3. मुद्रा और बैंकिंग (20 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित में से कौन- से मुद्रा से संबंधित कार्य हैं?

  1. विनिमय का माध्यम
  2. लेखा इकाई
  3. मूल्य संचय
  4. साख सृजन

कूट

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 1, 3 और 4
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (b)
व्याख्याः

  • मुद्रा की सर्वप्रथम भूमिका यह है कि वह विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करती है। बड़ी अर्थव्यवस्था में वस्तु विनिमय अत्यंत कठिन कार्य है, क्योंकि उच्च कीमतों के कारण व्यक्तियों को अपने आधिक्य के विनिमय के लिये योग्य व्यक्तियों की तलाश करनी होती है
  • मुद्रा सुविधाजनक लेखा इकाई के रूप में भी कार्य करती है। सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मौद्रिक इकाई के रूप में अभिव्यक्त किया जा सकता है।
  • मुद्रा नाशवान वस्तु नहीं है और इसकी संचय लागत अत्यंत कम होती है। मुद्रा किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी समय ग्रहण करने योग्य होती है। अतः मुद्रा व्यक्तियों के लिये मूल्य संचय का काम करती है। भविष्य के लिये धन का संचय मुद्रा के रूप में किया जा सकता है।

[2]

मुद्रा की एक इकाई का, एक इकाई अवधि में जितनी बार हस्तांतरण होता है, कहलाता है-

A) मुद्रा का संचलन वेग (Velocity of circulation of money)
B) तरलता अधिमान
C) मुद्रा गुणक
D) मुद्रा प्रसार

उत्तरः (a)

व्याख्याः मुद्रा की एक इकाई का एक इकाई अवधि में जितनी बार हस्तांतरण होता है, उसे मुद्रा का संचलन वेग कहते हैं।

[3]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. सरकार एवं फर्म जनता से उधार लेने के लिये “बंधपत्र” (Bonds) जारी करते
  2. बंधपत्र (Bonds) को सरकारी बैंकों के माध्यम से बेचा जाता है।
  3. बंधपत्र (Bonds) की कीमत और ब्याज की बाज़ार दर में प्रतिलोम संबंध होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) केवल 1 और 3

उत्तरः (d)

व्याख्याः

  • पहला कथन सत्य है। बंधपत्र (Bonds) ऐसे कागज़ हैं, जो एक समयावधि के उपरांत भविष्य में मौद्रिक प्रतिफल की धारा का वादा करते हैं सरकार अथवा फर्म जनता से लिये गए उधार के लिये इन कागज़ों को जारी करते हैं।
  • दूसरा कथन असत्य है। बंधपत्रों (Bonds) को बाज़ार के माध्यम से खरीदा/बेचा जाता है।
  • तीसरा कथन सत्य है। बंधपत्र (Bonds) की कीमत और ब्याज की बाज़ार दर में प्रतिलोम संबंध होता है। उदाहरण के लिये यदि अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होती है और लोग बंधपत्र (Bonds) खरीदते हैं, तो बंधपत्र (Bonds) के लिये मुद्रा की इस अतिरिक्त माँग में वृद्धि होगी, जिससे बंधपत्र की कीमत बढ़ेगी और ब्याज की दर में गिरावट आएगी।

[4]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1.  भारत में करेंसी नोट और सिक्के भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किये जाते हैं
  2. बचत खाते और चालू खाते को आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा कहा जाता है
    उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (b)

व्याख्याः

  •  पहला कथन असत्य है। भारत में करेंसी नोट भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है जो कि भारत का मौद्रिक प्राधिकरण है, किंतु सिक्के भारत सरकार द्वारा जारी किये जाते हैं।
  • दूसरा कथन सत्य है। व्यावसायिक बैंकों में लोगों द्वारा खोले गए बचत खाते और चालू खाते को आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा कहा जाता है, क्योंकि इन खातों से आहरित चेकों का उपयोग संव्यवहार (Transaction) के लिये किया जाता है। बचत खाते अथवा चालू खाते में आहरित चेक को किसी के भी द्वारा अस्वीकार किया जा सकता है, अतः यह वैध मुद्रा नहीं है।

[5]

मुद्रा की वैकल्पिक मापों के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?

A) M1 और M2 संकुचित मुद्रा कहलाती है।
B) M1, संव्यवहार (Transaction) में सबसे तरल एवं आसान है।
C) M4, संव्यवहार के लिये सबसे कम तरल है।
D) इनमें से कोई नहीं।

उत्तरः (d)

व्याख्याः एक निश्चित समय में लोगों में संचरण करने वाली कुल मुद्रा को मुद्रा की पूर्ति कहते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रा की पूर्ति के वैकल्पिक मापों को चार रूपों M1, M2, M3 और M4 में प्रकाशित करता है। ये सभी निम्नलिखित तरह से परिभाषित किये जाते हैं:
M1 = CU+DD
M2 = M1+ डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएँ
M3 = M1+ व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ
M4 = M3+ डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएँ (राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्रों को छोड़कर)
यहाँ, CU लोगों द्वारा रखी गई करेंसी (नोट और सिक्के) हैं और DD व्यावसायिक बैंकों द्वारा रखी गई निवल माँग जमा है। ‘निवल’ शब्द से बैंक के द्वारा रखी गई लोगों की जमा का ही बोध होता है और इसलिये यह मुद्रा की पूर्ति में शामिल है। अंतर बैंक जमा, जो एक व्यावसायिक बैंक दूसरे व्यावसायिक बैंक में रखते हैं, को मुद्रा की पूर्ति के भाग के रूप में नहीं जाना जाता है।

[6]

निम्नलिखित पर विचार कीजिये:

  1. जनता के पास मुद्रा।
  2. बैंकों के पास माँग जमा (डिमांड डिपॉजिट)।
  3. बैंकों के पास समय जमा (टाइम डिपॉजिट)।

इनमें से कौन-से भारत में M3 (व्यापक धन) में शामिल हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (d)
व्याख्याः भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रा की पूर्ति के वैकल्पिक मापों को चार रूपों M1, M2, M3, और M4 में प्रकाशित करता है। M3 मुद्रा पूर्ति की माप का सबसे साधारण रूप है। इसे समस्त मौद्रिक संसाधन भी कहते हैं।
M3 = M1 + व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ।
M1 = CU + DD + व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ।
जहाँ CU = जनता के पास रखी गई मुद्रा (नोट और सिक्के)।
DD = व्यावसायिक बैंकों के पास रखी गई निवल माँग जमा।

[7]

करेंसी जमा अनुपात (cdr) के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह लोगों द्वारा करेंसी में धारित मुद्रा और बैंक जमा के रूप में धारित मुद्रा का अनुपात है।
  2. त्योहारों के सीजन में करेंसी जमा अनुपात बढ़ जाता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)

व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • लोगों द्वारा करेंसी में धारित मुद्रा और बैंक जमा के रूप में धारित मुद्रा के अनुपात को करेंसी जमा अनुपात (cdr) कहा जाता है।
    cdr = CU/DD
  • करेंसी जमा अनुपात से लोगों का तरलता अधिमान प्रतिबिंबित होता है। यह शुद्ध रूप में व्यावहारिक प्राचल (Behavioral Parameter) है, जो अन्य बातों के अतिरिक्त व्यय संबंधी मौसम के स्वरूप पर निर्भर करता है। त्योहारों के मौसम में जब लोग अपनी जमा को इन मौसमों में होने वाले अतिरिक्त खर्चे के लिये नगदी में बदलते हैं तो करेंसी जमा अनुपात (cdr) बढ़ जाता है।

[8]

निम्नलिखित में से किसे वैधानिक पत्र कहते हैं?

A) प्राइवेट बंधपत्र (Bonds)
B) करेंसी नोट
C) आवधिक जमा पत्र
D) शेयर

 

उत्तरः (b)

व्याख्याः करेंसी नोट सिक्कों को कागजी मुद्रा या वैधानिक पत्र भी कहते हैं, क्योंकि देश के किसी भी नागरिक के द्वारा इसके किसी भी प्रकार के संव्यवहार (Transaction) को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक करेंसी नोट पर भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा एक वादा किया जाता है। यदि कोई भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा किसी व्यावसायिक बैंक को नोट प्रस्तुत करता है तो भारतीय रिज़र्व बैंक उस नोट पर अंकित मूल्य के बराबर क्रय शक्ति प्रदान करने के लिये उत्तरदायी है।

[9]

भारतीय बैंक द्वारा आरक्षित जमा अनुपात (rdr) को बनाए रखने के लिये किन नीतिगत साधनों का प्रयोग किया जाता है?

  1. आरक्षित नगद अनुपात (CRR)
  2. सांविधिक तरलता अनुपात (SLR)
  3. रेपो रेट (Repo Rate)
  4. बैंक दर (Bank Rate)

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 4
D) केवल 3 और 4

उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • लोग अपने बैंक खाते में जो मुद्रा जमा करते हैं, उसका एक अंश आरक्षित मुद्रा के रूप में रखकर शेष राशि को बैंक विविध निवेश परियोजनाओं को कर्ज़ के रूप में देती है। व्यावसायिक बैंक अपनी कुल जमा का जो अनुपात आरक्षित निधियों के रूप में रखते हैं, उसे ही आरक्षित निधि जमा अनुपात (rdr) कहा जाता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक, व्यावसायिक बैंकों के पास आरक्षित जमा अनुपात (rdr) को बनाए रखने के लिये विविध नीतिगत साधनों का प्रयोग करती है-
  1. आरक्षित नगद अनुपात (CRR)
  2. सांविधिक तरलता अनुपात (SLR)
  3. बैंक दर (Bank Rate)

 

[10]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. आरक्षित निधियों को रखना बैंकों के लिये लाभप्रद होता है
  2. व्यावसायिक बैंक आरक्षित निधि की कमी पर बैंक दर पर रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों

उत्तरः (b)
व्याख्याः 

  • पहला कथन असत्य है। आरक्षित निधि रखना बैंकों के लिये हानिकारक होता है, क्योंकि बैंक इस राशि को ब्याज प्राप्त करने वाली परियोजनाओं को ऋण के रूप में नहीं दे सकते हैं।
  • दूसरा कथन सत्य है। भारतीय रिज़र्व बैंक आरक्षित जमा अनुपात को नियंत्रित करने के लिये एक निश्चित ब्याज दर का प्रयोग करता है, जिसे बैंक दर कहते हैं। व्यावसायिक बैंक आरक्षित निधि की कमी की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से इस दर पर कर्ज़ ले सकते हैं। ऊँची बैंक दर की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से व्यावसायिक बैंकों को ऋण लेना महंगा पड़ता है। अतः व्यावसायिक बैंकों को लाभप्रद आरक्षित जमा अनुपात रखने के लिये प्रोत्साहन मिलता है।

 

[11]

आरक्षित नगद अनुपात (Cash Reserve Ratio) के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इसके अंतर्गत व्यावसायिक बैंक रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित जमा राशि के एक भाग को अपने पास रखते हैं।
  2. इसके अंतर्गत व्यावसायिक बैंक इसे सोना, सरकारी बांड तथा करेंसी नोट के रूप में रखते हैं।
    उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन असत्य हैं।

  • आरक्षित नगद अनुपात (CRR) के अंतर्गत व्यावसायिक बैंकों को अपनी जमा राशि के एक भाग को रिज़र्व बैंक के पास रखना पड़ता है।
  • CRR के तहत नगद राशि के रूप में व्यावसायिक बैंक, रिज़र्व बैंक के पास जमा राशि का अंश रखते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था में तरलता को बढ़ाने या घटाने के लिये CRR का उपयोग करता है।

 

[12]

सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) के अंतर्गत व्यावसायिक बैंक किन परिसंपत्तियों को शामिल करते हैं

  1. डॉलर
  2. सोना
  3. सरकारी प्रतिभूति
  4. रुपया

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 2, 3 और 4
D) केवल 1 और 4

उत्तरः (c)
व्याख्याः सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) के अंतर्गत व्यावसायिक बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशानुसार अपनी जमा राशि का एक भाग तरल परिसंपत्तियों (नगदी, सोना, सरकारी प्रतिभूतियों) के रूप में अपने पास रखना होता है।

 

[13]

बैंक दर में वृद्धि सामान्यतः इस बात का संकेत करती है कि-

A) ब्याज की बाज़ार दर गिरने की संभावना है।
B) केंद्रीय बैंक अब वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज़ नहीं दे रहा।
C) केंद्रीय बैंक सस्ती मुद्रा नीति का अनुसरण कर रहा है।
D) केंद्रीय बैंक महँगी मुद्रा नीति का अनुसरण कर रहा है।

उत्तरः (d)
व्याख्याः बैंक दर वह दर है जिसके अतंर्गत व्यावसायिक बैंक आरक्षित निधि की कमी की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से कर्ज़ ले सकते हैं। ऊँची बैंक दर की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से ऋण लेना महँगा पड़ता है अर्थात् केंद्रीय बैंक महँगी मुद्रा नीति का अनुसरण कर रहा है।

 

[14]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘उच्च शक्तिशाली मुद्रा’ का सर्वोत्कृष्ट रूप में वर्णन करता है?

A) भारतीय रिज़र्व बैंक की देश की मौद्रिक प्राधिकरण की संपूर्ण देयता।
B) सरकारी प्रतिभूतियों का रिज़र्व बैंक द्वारा क्रय-विक्रय।
C) व्यावसायिक बैंकों का आरक्षित निधि के अंतर्गत तरल परिसंपत्तियों को अपने पास रखना।
D) विदेशों से व्यापार के क्रम में कीमती धातुओं का प्रयोग करना।

उत्तरः (a)
व्याख्याः रिज़र्व बैंक की देश की मौद्रिक प्राधिकरण की संपूर्ण देयता को मौद्रिक आधार या उच्च शक्तिशाली मुद्रा कहते हैं। इसमें करेंसी (आम जनता के साथ संचरण में नोट और करेंसी तथा व्यावसायिक बैंक की कोष्ठ नकदी राशि)  तथा व्यावसायिक बैंक और भारत सरकार द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक में रखी गई जमाएँ आती हैं। यदि आम जनता भारतीय रिज़र्व बैंक को करेंसी नोट प्रस्तुत करती है, तो रिज़र्व बैंक को उस मुद्रा के मूल्य पर अंकित मूल्य की राशि के बराबर का भुगतान करना होता है। इसी तरह भारतीय रिज़र्व बैंक में जमा की गई राशि भी लौटाए जाने योग्य होती है, जब जमाधारी इसकी माँग करते हैं। इन मदों को दावा कहते हैं जो कि आम जनता, सरकार और बैंकों का रिज़र्व बैंक पर होता है। अतः इनको रिज़र्व बैंक के दायित्व के रूप में माना जाता है।

 

[15]

निम्नलिखित में से किसे बैंकों का बैंक कहते हैं?

A) वित्त मंत्रालय
B) भारतीय रिज़र्व बैंक
C) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
D) सेबी

उत्तरः (b)
व्याख्याः भारतीय रिज़र्व बैंक को बैंकों का बैंक कहा जाता है।

 

[16]

भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्यों के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये:

  1. आरबीआई भारत सरकार की तरफ से ऋण बंधपत्र (Bonds) और प्रतिभूतियाँ (Share) जारी करता है।
  2. भारतीय अर्थव्यवस्था में अंतिम ऋणदाता की भूमिका निभाता है।
  3. अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति और साख सृजन के नियंत्रक के रूप में कार्य करता है।
  4. आयात-निर्यात संबंधी कानून को बनाने एवं लागू करने का कार्य करता है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 3 और 4
D) केवल 1, 2 और 4

उत्तरः (b)
व्याख्याः केवल पहला, दूसरा व तीसरा कथन ही सत्य है।

  • भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत सरकार की तरफ से ऋण बंधपत्र (Bonds) और प्रतिभूतियाँ जारी करता है तथा बदले में सरकार को करेंसी उपलब्ध कराता है।
  • किसी भी प्रकार के मौद्रिक संकट की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक व्यावसायिक बैंकों का जमानतदार होता है तथा यह व्यावसायिक बैंकों को ऋण भी प्रदान करता है। मुद्रा प्राधिकरण की इस भूमिका को अंतिम ऋणदाता के रूप में जाना जाता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति और साख सृजन के नियंत्रण के रूप में है। अर्थव्यवस्था के लिये सर्वाधिक उपर्युक्त मौद्रिक नीति का संचालन करने के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक एक स्वतंत्र प्राधिकरण है। आरबीआई अर्थव्यवस्था में उच्च शक्तिशाली मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि अथवा कमी करता है तथा व्यावसायिक बैंकों के निवेशकों को कर्ज़ अथवा साख प्रदान करने के लिये प्रोत्साहित या हतोत्साहित करता है।

[17]

भारतीय रिज़र्व बैंक, मौद्रिक नीति के संचालन के लिये किन उपकरणों का प्रयोग करता है?

  1. खुली बाज़ार कार्यवाही (Open Market Operation)
  2. नगद आरक्षित अनुपात (CRR)
  3. बैंक दर (BR)
  4. सांविधिक तरलता अनुपात (SLR)

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

A) केवल 1, 2 और 3
B) केवल 2 और 3
C) केवल 2, 3 और 4
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति के संचालन के लिये निम्न उपकरणों का प्रयोग करता है-

  1. खुली बाज़ार कार्यवाही (Open Market Operation)
  2. आरक्षित निधि (नगद आरक्षित अनुपात एवं सांविधिक तरलता अनुपात) में परिवर्तन करके।
  3. बैंक दर (Bank Rate)
  4. स्थिरीकरण (Sterilization)

[18]

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में ‘खुली बाज़ार कार्यवाही’ (Open Market Operation) किसे निर्दिष्ट करता है?

A) अनुसूचित बैंकों द्वारा आरबीआई (RBI) से ऋण लेना।
B) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा उद्योग और व्यापार क्षेत्र को ऋण देना।
C) RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय और विक्रय।
D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तरः (c)
व्याख्याः 

  • खुली बाज़ार कार्यवाही (Open Market Operation) के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था में उच्च शक्तिशाली मुद्रा के स्टॉक में वृद्धि अथवा कमी करने के लिये बोली लगाकर जनसाधारण से सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय अथवा विक्रय करता है।
  • बाज़ार में मुद्रा की मात्रा अधिक होने पर रिज़र्व बैंक, सरकारी प्रतिभूतियों की बाज़ार में बिक्री करके बाज़ार में धन की कमी कर देता है। इस प्रकार रिज़र्व बैंक बाज़ार में तरलता को नियंत्रित करता है। इसी तरह तरलता बढ़ाने के लिये रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय करता है।

 

[19]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अर्थव्यवस्था के संदर्भ में स्थिरीकरण (Sterilization) की सबसे सटीक व्याख्या करता है?

A) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना।
B) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा सुदूर पिछड़े क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा का विस्तार करना।
C) रिज़र्व बैंक द्वारा गैर-निष्पादक संपत्तियों की नीलामी करना।
D) रिज़र्व बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा के प्रवाह से उत्पन्न अतिरिक्त मुद्रा को नियंत्रित करना।

उत्तरः (d)
व्याख्याः मान लीजिये भविष्य में ऊँची विकास की आशा से पूरे विश्व के निवेशक भारतीय बंधपत्रों (Bonds) में निवेश करने लगते हैं। मुद्रा की बढ़ी हुई मात्रा अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिये हमेशा अच्छी नहीं होती है। यदि अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा अपरिवर्तित रहती है, तो अतिरिक्त मुद्रा से वस्तुओं की कीमत में वृद्धि होगी।
प्रायः रिज़र्व बैंक इस प्रकार के परिणाम को रोकने के लिये अपने उपकरणों से हस्तक्षेप करता है। रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था में विदेशी विनिमय अंतरप्रवाह की मात्रा के बराबर मात्रा में सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री खुले बाज़ार में करती है। इस प्रकार शक्तिशाली मुद्रा का स्टॉक और कुल मुद्रा पूर्ति अपरिवर्तित रहती है। अतः इससे अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल बाह्य आघातों के विरुद्ध स्थिर रखा जाता है। भारतीय रिज़र्व बैंक की इस कार्यवाही को ‘स्थिरीकरण’ कहते हैं।

 

[20]

वस्तु की पूर्ति यथावत रहने पर यदि वस्तु की माँग में वृद्धि होती है, तो-

A) कीमत स्तर में गिरावट आ जाएगी।
B) ब्याज की दर में वृद्धि हो जाएगी।
C) ब्याज की दर में कमी हो जाएगी।
D) आय और रोज़गार के स्तर में वृद्धि हो जाएगी।

उत्तरः (b)
व्याख्याः यदि बाज़ार में किसी वस्तु की पूर्ति यथावत है तथा उस वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है तो उस वस्तु की कीमत में वृद्धि होगी अर्थात् मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न होगी। इस स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज की दर को ऊँचा कर देता है, जिससे कि ऋण महँगा हो जाए और लोग कम-से-कम वस्तु का उपभोग करें।

 

[21]

नब्बे के दशक में भारत ने वित्तीय संकट के समय किन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त किया था?
1.  विश्व बैंक
2.  एशियाई विकास बैंक
3.  बैंक ऑफ अमेरिका
4.  अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A)  केवल 1 और 2
B) केवल 1, 3 और 4
C) केवल 2 और 4
D) केवल 1 और 4

उत्तरः (d)
व्याख्याः नब्बे के दशक में भारत सरकार द्वारा वित्तीय संकट का सामना करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय पुननिर्माण और विकास बैंक (आई.बी.आर.डी.) जिसे सामान्यतः विश्व बैंक के नाम से जाना जाता है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 7 बिलियन डॉलर का ऋण लिया गया।

 4. आय निर्धारण (3 प्रश्न)

[1]

अंतिम वस्तु अथवा उत्पाद की समस्त माँग के अंतर्गत निम्नलिखित में से किन्हें शामिल किया जाता है?

  1. प्रत्याशित उपभोग
  2. प्रत्याशित निवेश
  3. सीमांत उपभोग
  4. सरकारी व्यय

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 4
D) उपरोक्त सभी।

उत्तर: (c)
व्याख्या: जब किसी विशेष कीमत स्तर पर अंतिम वस्तु की समस्त माँग, समस्त पूर्ति के बराबर होती है, तो अंतिम वस्तु अथवा उत्पाद बाज़ार संतुलन की स्थिति में होता है। अंतिम वस्तु की समस्त माँग में प्रत्याशित उपभोग, प्रत्याशित निवेश तथा सरकारी व्यय आदि आते हैं।

[2]

आय में इकाई वृद्धि के कारण प्रत्याशित उपभोग में वृद्धि की दर को क्या कहते हैं?

A) प्रत्याशित उपभोग
B) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
C) पैरामेट्रिक शिफ्ट
D) व्यय गुणक

उत्तर: (b)
व्याख्या: आय में इकाई वृद्धि के कारण प्रत्याशित उपभोग में वृद्धि की दर को सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहते हैं। सीमांत उपभोग प्रवृत्ति 0 से 1 के बीच होती है।

 

[3]

सरकार द्वारा अप्रत्यक्ष कर नहीं लगाने अथवा उपदान (Subsidy) नहीं देने की स्थिति में सकल घरेलू उत्पाद होगा-

A) कुल निर्यात के बराबर।
B) राष्ट्रीय आय के बराबर।
C) सकल राष्ट्रीय उत्पाद के बराबर।
D) सरकार के पूँजीगत व्यय के बराबर।

उत्तर: (b)
व्याख्या: सरकार के द्वारा अप्रत्यक्ष कर नहीं लगाने पर अथवा उपदान (subsidy) नहीं देने की स्थिति में अंतिम वस्तुओं के कुल निर्गत का मूल्य अथवा सकल घरेलू उत्पाद, राष्ट्रीय आय के बराबर होता है।

5. सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था (20 प्रश्न)

[1]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. सार्वजनिक वस्तुएँ बिना किसी भुगतान के मुफ्त में उपलब्ध होती हैं।
  2. सार्वजनिक वस्तुएँ प्रतिस्पर्धी प्रकृति की होती हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a)
व्याख्या:

  • पहला कथन सत्य है। सार्वजनिक वस्तुओं का प्रावधान बजट में किया जाता है तथा बिना किसी प्रत्यक्ष भुगतान के मुफ्त में उपलब्ध होती हैं। सार्वजनिक वस्तुओं का उत्पादन पूर्णत: सरकारी प्रबंधन के अंतर्गत हो सकता है अथवा निजी क्षेत्र के द्वारा।
  • दूसरा कथन असत्य है। सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग कई व्यक्तियों के द्वारा किया जाता है और ये ‘प्रतिस्पर्धी’ नहीं होती हैं। इसका कारण यह है कि एक व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के उपभोग को कम किये बगैर इनका भरपूर उपभोग कर सकता है जैसे- सड़क, स्ट्रीट लाइट, रेलवे आदि।

 

[2]

भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष में प्रस्तुत किये जाने वाले ‘बजट’ का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?

A) अनुच्छेद 108
B) अनुच्छेद 112
C) अनुच्छेद 122
D) अनुच्छेद 212

उत्तर: (b)
व्याख्या: भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्ययों का विवरण संसद के समक्ष प्रस्तुत करना अनुच्छेद 112 के तहत एक संवैधानिक अनिवार्यता है। बजट को “डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमी अफेयर” द्वारा तैयार किया जाता है।

[3]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. सरकार की वे प्राप्तियाँ जिनके लिये सार्वजनिक संपत्तियों को कम करना पड़ता है, राजस्व प्राप्तियाँ कहलाती हैं।
  2. सरकार की वे सभी प्राप्तियाँ जिसमें न तो दायित्वों (Liabilties) का सृजन होता है और न हि वित्तीय परिसंपत्तियाँ कम होती हैं, पूँजीगत प्राप्तियाँ कहलाती हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (d)
व्याख्या: उपरोक्त दोनों कथन असत्य हैं।

  • भारत सरकार की ऐसी प्राप्तियाँ जो न तो सार्वजनिक देयताओं (Liabilities) को बढ़ाती हैं और न ही सार्वजनिक संपत्तियों (Assets) को कम करती हैं, राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts) कहलाती हैं।
  • सरकार की वे सभी प्राप्तियाँ जो दायित्वों का सृजन या वित्तीय परिसंपत्तियों को कम करती हैं, पूँजीगत प्राप्तियाँ (Capital Revenue) कहलाती हैं।

 

[4]

निम्नलिखित में से कौन-से प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) के उदाहरण हैं?

  1. व्यक्तिगत आय कर (Income Tax)
  2. निगम कर (Corporate Tax)
  3. उत्पाद शुल्क (Excise Duty)
  4. सेवा शुल्क (Service Duty)

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 3 और 4
D) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: (a)
व्याख्या: प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) वे कर होते हैं जिनका बोझ प्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति या फर्म (निगम) पर पड़ता है तथा कर भार को किसी और पर नहीं डाला जा सकता है।
उदाहरण के लिये व्यक्तिगत आय कर, निगम कर (Corporate Tax), संपत्ति कर (Wealth Tax)  आदि।

[5]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

A) सीमा शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है।
B) सरकार के राजस्व प्राप्ति में प्रत्यक्ष कर का योगदान अप्रत्यक्ष कर से ज़्यादा है।
C) संपत्ति कर व उपहार कर को ‘कागजी कर’ भी कहते हैं।
D) उपरोक्त में से कोई नहीं।

उत्तर: (d)
व्याख्या: उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं।

  • राजस्व प्राप्ति के दो महत्त्वपूर्ण घटक हैं- प्रत्यक्ष कर व अप्रत्यक्ष कर। वे कर जहाँ पर कर का बोझ अन्य लोगों पर स्थानांतरित किया जा सके व जहाँ पर करदाता चिन्हित न किया जा सके अप्रत्यक्ष कर कहलाते हैं। जैसे- उत्पाद शुल्क (देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क), सीमा शुल्क (भारत में आयात की जाने वाली अथवा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर शुल्क), सेवा शुल्क आदि।
  • प्रत्यक्ष करों के माध्यम से सरकार को लगभग 55% राजस्व, जबकि अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से 45% राजस्व की प्राप्ति होती है। प्रत्यक्ष कर के अंतर्गत संपत्ति कर व उपहार कर द्वारा प्राप्त होने वाले राजस्व का आय में कभी भी बहुत महत्त्व नहीं रहा है। इसलिये इसे ‘कागजी कर’ भी कहा जाता है।

   नोट: Union Budget 2016-17 से संपत्ति कर को हटा दिया गया है।

[6]

केंद्र सरकार को प्राप्त होने वाली गैर-कर राजस्व में कौन-सी प्रमुख मदें शामिल की जाती हैं?

  1. केंद्र सरकार द्वारा जारी ऋण से ब्याज।
  2. सरकार के निवेश से प्राप्त लाभांश।
  3. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रदान किये जाने वाले नगद सहायता अनुदान।

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)
व्याख्या: केन्द्र सरकार के गैर-कर राजस्व में मुख्य रूप से, केंद्र सरकार द्वारा जारी ऋण से ब्याज प्राप्तियाँ, सरकार के निवेश से प्राप्त लाभांश और लाभ तथा सरकार द्वारा प्रदान की गई सेवाओं से प्राप्त शुल्क और अन्य प्राप्तियाँ शामिल हैं। इसके अंतर्गत विदेशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रदान किये जाने वाले नगद सहायता अनुदान भी शामिल किये जाते हैं।

[7]

केंद्र सरकार द्वारा किया जाने वाला ब्याज भुगतान किसके अंतर्गत आता है?

A) पूंजीगत व्यय
B) योजना व्यय
C) राजस्व व्यय
D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर: (c)
व्याख्या: राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) केंद्र सरकार का भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों के सृजन के अतिरिक्त अन्य उद्देश्यों के लिये किया गया व्यय है। राजस्व व्यय के अंतर्गत सरकारी विभागों के सामान्य कार्यों तथा विधिक सेवाओं, सरकार द्वारा उपागत ऋण ब्याज अदायगी, प्रतिरक्षा सेवाएँ, उपदान (subsidy), वेतन और पेंशन आते हैं।

[8]

संघ के बजट के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से गैर-योजना व्यय के अधीन आता है/आते हैं?

  1. रक्षा व्यय
  2. ब्याज अदायगी
  3. वेतन एवं पें शन
  4. उपदान (subsidy)

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) 1, 2, 3 और 4
D) कोई नहीं

उत्तर: (c)
व्याख्या:

  • बजटीय दस्तावेज़ में कुल राजस्व व्यय को योजनागत और गैर-योजनागत व्यय मदों में बाँटा  जाता है। गैर-योजनागत व्यय राजस्व व्यय का अपेक्षाकृत अधिक महत्त्वपूर्ण घटक है, जिसमें सरकार द्वारा प्रदत्त सामान्य, आर्थिक और सामाजिक सेवाओं पर व्यापक व्यय शामिल होते हैं। गैर-योजनागत व्यय के प्रमुख मदों में ब्याज अदायगी, प्रतिरक्षा सेवाएँ, सब्सिडी, वेतन और पेंशन आते हैं।
  • योजनागत-राजस्व व्यय का संबंध केंद्रीय योजनाओं (पंचवर्षीय योजनाओं) और राज्यों तथा संघ-शासित प्रदेशों की योजनाओं के लिये केंद्रीय सहायता से है।

[9]

केंद्रीय बजट में राजस्व व्यय की सबसे बड़ी मद होती है-

A) रक्षा व्यय
B) मुख्य उपदान (सब्सिडी)
C) ब्याज की अदायगी
D) राज्यों को अनुदान

उत्तर: (c)
व्याख्या: बाज़ार ऋणों, बाह्‌य ऋणों और विविध आरक्षित निधियों पर ब्याज अदायगी गैर-योजनागत व्यय का सबसे बड़ा घटक होता है। प्रतिरक्षा व्यय गैर-योजनागत व्यय का दूसरा सबसे बड़ा घटक है।

[10]

पूंजीगत प्राप्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इन प्राप्तियों के अंतर्गत सरकार की वित्तीय परिसंपत्तियाँ कम हो जाती हैं।
  2. पूंजीगत प्राप्तियों की मुख्य मदें सार्वजनिक कर्ज़ हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)
व्याख्या: उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • सरकार की वे सभी प्राप्तियाँ जो दायित्वों का सृजन या वित्तीय परिसंपत्तियों को कम करती हैं, पूंजीगत प्राप्तियाँ कहलाती हैं।
  • पूँजीगत प्राप्तियों की मुख्य मदें सार्वजनिक कर्ज़ हैं जिसे सरकार द्वारा जनता से लिया जाता है, इसे बाज़ार ऋण-ग्रहण भी कहते हैं।

 

[11]

केंद्रीय बजट में निम्नलिखित में से कौन-सी मदें पूँजीगत प्राप्तियों के अंतर्गत आती हैं?

  1. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त कर्ज़।
  2. सावर्जनिक उपक्रम के शेयरों की बिक्री से प्राप्त धन।
  3. वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात से प्राप्त धन।
  4. तंबाकू और पेट्रोलियम पदार्थों पर उच्च कर लगाकर प्राप्त धनराशि।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 3 और 4
D) केवल 1, 3 और 4

उत्तर: (a)
व्याख्या:पूंजीगत प्राप्तियों में ट्रेजरी बिल की बिक्री के द्वारा रिज़र्व बैंक और व्यावसायिक बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से सरकार द्वारा ऋण ग्रहण, विदेशी सरकारों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त कर्ज़ और केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त ऋणों की वसूली आदि शामिल हैं। अन्य मदों में लघु बचतें (डाकघर बचत खाता, राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र इत्यादि), भविष्य निधि और सार्वजनिक उपक्रम (पी.एस-ण्यू.) के शेयरों की बिक्री से प्राप्त निवल प्राप्तियाँ हैं। इसे सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रम का विनिवेश कहा जाता है।

[12]

सरकार के द्वारा किये जाने वाले किस व्यय के परिणामस्वरूप भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन अथवा वित्तीय दायित्व में कमी आती है?

A) राजस्व व्यय
B) पूंजीगत व्यय
C) योजना व्यय
D) पूंजीगत एवं राजस्व दोनों।

उत्तर: (b)
व्याख्या: पूंजीगत व्यय सरकार के वे व्यय हैं जिनके परिणामस्वरूप भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन या वित्तीय दायित्वों में कमी होती है। पूंजीगत व्यय के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी उपकरण, शेयरों में निवेश और केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकारों एवं संघ-शासित प्रदेशों को तथा सार्वजनिक उपक्रमों व अन्य पक्षों को प्रदान किये गए ऋण और अग्रिम संबंधी व्ययों को शामिल किया जाता है।

[13]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. राजस्व प्राप्तियों के ऊपर राजस्व व्यय के अधिशेष को राजस्व घाटा कहते हैं।
  2. राजस्व घाटे में केवल उन्हीं लेन-देन को शामिल किया जाता है, जिनसे सरकार के आय-व्यय पर प्रभाव पड़ता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)
व्याख्या: उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं।

  • सरकार की राजस्व प्राप्तियों के ऊपर राजस्व व्यय के अधिशेष को राजस्व घाटा कहते हैं, अर्थात्‌सरकार का कुल राजस्व खर्च, कुल राजस्व प्राप्ति से अधिक है राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
  • राजस्व घाटे में केवल उन्हीं लेन-देन को शामिल किया जाता है, जिनसे सरकार के वर्तमान आय और व्यय पर प्रभाव पड़ता है।

[14]

सरकारी बजट में राजस्व घाटा उच्च होने के कारण-

  1. सरकारी ऋण और ब्याज दायित्वों (Liabilities) में वृद्धि होगी।
  2. सरकार पूंजीगत व्यय अथवा लोक कल्याण संबंधी व्यय में कटौती कर सकती है।
  3. अर्थव्यवस्था के विकास की दर धीमी होगी।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)
व्याख्या: उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।

  • सरकार को यदि राजस्व घाटा होता है, तो इससे संकेत मिलता है कि सरकार निर्बचत (Dissaving) कर रही है और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की बचतों का उपयोग अपने उपभोग संबंधी व्यय के कुछ हिस्सों को पूरा करने के लिये कर रही है। इस स्थिति में सरकार को न केवल अपने निवेश के लिये अपितु अपने उपभोग संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये ऋण-ग्रहण करना पड़ेगा। इससे ऋणों और ब्याज दायित्वों का निर्माण होगा और अंततोगत्वा सरकार के अपने व्यय में कटौती के लिये प्रतिबद्ध होना पड़ेगा।
  • राजस्व व्यय का एक बड़ा भाग व्यय के लिये प्रतिबद्ध होता है इसलिये इसमें कटौती नहीं की जाएगी। इस कारण अधिकांशत: सरकार उत्पादक पूंजीगत व्यय अथवा कल्याण संबंधी व्यय में कटौती करती है। इसी के परिणामस्वरूप विकास की गति धीमी होती है और सामाजिक कल्याण संबंधी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

 

[15]

संघीय बजट में राजकोषीय घाटे का तात्पर्य है-

A) कुल व्यय और ऋण-ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर।
B) राजस्व व्यय में से ब्याज अदायगी को घटाने के बाद प्राप्त अंतर।
C) चालू व्यय और चालू राजस्व में अंतर।
D) भारत सरकार को कुल प्राप्तियों की तुलना में कुल व्यय की अधिकता।

उत्तर: (a)
व्याख्या: राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण-ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है। दूसरे शब्दों में राजकोषीय घाटा कुल व्ययों (राजस्व, पूँजीगत) का कुल प्राप्तियों पर आधिक्य होता है, जबकि पूंजीगत प्राप्तियों में बाज़ार से उधार एवं अन्य देयताओं को शमिल नहीं किया जाता है।
राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूंजीगत व्यय – गैर ऋण से सृजित पूंजीगत प्राप्तियाँ

 

[16]

भारत सरकार के बजट के कुल घाटे में सबसे अधिक योगदान है:

A) राजस्व घाटा (Revenue deficit)
B) आय-व्यय घाटा (Budgetary deficit)
C) राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)
D) प्राथमिक घाटा (Primary deficit)

उत्तर: (c)
व्याख्या: भारत सरकार के बजट के कुल घाटे में सबसे अधिक योगदान राजकोषीय घाटे का होता है।

 

[17]

यदि राजकोषीय घाटे में से ब्याज अदायगी को घटा दिया जाए तो प्राप्त होगा-

A) सकल राजकोषीय घाटा
B) प्रभावी राजस्व घाटा
C) प्राथमिक घाटा
D) राजस्व घाटा

उत्तर: (c)
व्याख्या: प्राथमिक घाटा, राजकोषीय घाटों में से ब्याज अदायगी को घटाने पर प्राप्त होता है। प्राथमिक घाटे के माप का लक्ष्य वर्तमान राजकोषीय असंतुलन पर प्रकाश डालना है। वर्तमान व्यय के राजस्व से अधिक होने के कारण होने वाले ऋण-ग्रहण के आकलन के लिये हम प्राथमिक घाटे की परिकल्पना करते हैं।

[18]

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये-

 A. राजकोषीय घाटा 1. कुल राजस्व प्राप्ति से अधिक व्यय
B. बजटीय घाटा 2. राजस्व प्राप्तियों की तुलना में राजस्व व्यय का अधिशेष
C. राजस्व घाटा 3. राजस्व घाटे में से ब्याज अदायगी को घटाने पर प्राप्त अधिशेष
D. प्राथमिक घाटा 4. कुल व्यय और ऋण-ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर

कूट:
A    B          C         D

A) 1          2          3          4
B) 3          2          1          4
C) 4          1          2          3
D) 2          3          4          1

उत्तर: (c)
व्याख्या:

  • जब सरकार राजस्व प्राप्ति से अधिक व्यय करती है, तो उस स्थिति को बजटीय घाटा कहते हैं।
  • राजस्व घाटा सरकार की राजस्व प्राप्तियों के ऊपर राजस्व व्यय के अधिशेष को बताता है।
  • राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण-ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है।
  • सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ)

या (or)

  • सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + ऋणों की वसूली + विनिवेश से प्राप्तियाँ)
  • राजकोषीय घाटे में से ब्याज अदायगी को घटनों पर प्राथमिक घाटा प्राप्त होता है।
  • सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा – निवल ब्याज दायित्व

[19]

सरकार बजटीय घाटे के वित्त पोषण के लिये कौन-सा/से कदम उठा सकती है/हैं?

  1. करारोपण
  2. ऋण-ग्रहण
  3. नोट छापकर
  4. कर में कटौती

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1, 2 और 3
D) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: (c)
व्याख्या: बजटीय घाटे के लिये वित्त पोषण या तो करारोपण या ऋण अथवा नोट छापकर किया जा सकता है। सरकार प्राय: ऋण-ग्रहण पर आश्रित रहती है, जिसे सरकारी ऋण कहते हैं।

[20]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. उच्च राजकोषीय घाटे के साथ माँग ऊँची और निर्गत अत्यधिक होते हैं।
  2. सरकार कर राजस्व में वृद्धि करने के लिये अप्रत्यक्ष करों पर ज्यादा निर्भर रहती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a)
व्याख्या:

  • पहला कथन सत्य है। राजकोषीय घाटा उच्च होने का अर्थ है कि सरकार का व्यय उसकी प्राप्तियों से अधिक है। अत: बाजार में माँग और निर्गत अत्यधिक होते हैं।
  • दूसरा कथन असत्य है। भारत में सरकार कर राजस्व में वृद्धि के लिये प्रत्यक्ष करों पर ज्यादा भरोसा करती हैं क्योंकि अप्रत्यक्ष कर अपनी प्रकृति में प्रतिगामी होते हैं और इनका प्रभाव सभी आय समूहों के लोगों पर एक समान पड़ता है।

6. खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र (15 प्रश्न)

[1]

‘बंद अर्थव्यवस्था’ वह अर्थव्यवस्था है जिसमें–

A) मुद्रा पूर्ति पूर्णत: नियंत्रित होती है।
B) घाटे की वित्त व्यवस्था होती है।
C) केवल निर्यात होता है।
D) न तो निर्यात और न ही आयात होता है।

उत्तर: (d)
व्याख्या: ‘बंद अर्थव्यवस्था’ के अंतर्गत विदेशों से व्यापार नहीं होता है अर्थात्‌बंद अर्थव्यवस्था वाले देश न तो किसी अन्य देश के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं का आयात करते हैं और न ही निर्यात करते हैं। वहीं खुली अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है, जिसमें अन्य राष्ट्रों के साथ वस्तुओं और सेवाओं तथा बहुधा वित्तीय परिसंपत्तियों का भी व्यापार किया जाता है।

[2]

किसी देश का अदायगी संतुलन (भुगतान-संतुलन) किसका व्यवस्थित अभिलेख है?

A) किसी निर्धारित समय के दौरान सामान्यत: एक वर्ष में किसी देश का समस्त आयात और निर्यात का लेन-देन।
B) किसी वर्ष में एक देश द्वारा निर्यात की गई वस्तुएँ।
C) एक देश की सरकार और दूसरे देश की सरकार के बीच आर्थिक लेन-देन।
D) एक देश से दूसरे देश को पूंजी का संचलन।

उत्तर: (a)
व्याख्या: भुगतान संतुलन में किसी खास समयावधि में खासकर एक वर्ष में एक देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच वस्तुओं, सेवाओं और संपत्तियों के आयात-निर्यात का विवरण दर्ज होता है। भुगतान संतुलन में दो मुख्य खाते होते हैं– चालू खाता (Current Account) व पूंजी खाता (Capital Account)।

[3]

भुगतान संतुलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से किन-किन से चालू खाता बनता है?

  1. वस्तुओं के आयात-निर्यात से।
  2. सेवाओं के आयात-निर्यात से।
  3. बंधपत्र (Bond) के अंतर्राष्ट्रीय क्रय-विक्रय से।
  4. अंतरण-अदायगी (Transfer Payments) से।

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 4
D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (c)
व्याख्या:

  • भुगतान संतुलन के अंतर्गत चालू खाते में वस्तुओं एवं सेवाओं के आयात-निर्यात और अंतरण अदायगी (Transfer Payments) संबंधी विवरण को दर्ज़ किये जाते हैं।
  • अंतरण अदायगी ऐसी प्राप्तियाँ होती हैं जो किसी देश के निवासियों को ‘नि:शुल्क’ प्राप्त होती हैं और उनके बदले में उन्हें वर्तमान में या भविष्य में कोई अदायगी नहीं करनी पड़ती है। इनमें प्रेषित धन, उपहार और अनुदान (Grants) शामिल हैं।

[4]

भुगतान संतुलन के संबंध में नीचे दिये गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  1. व्यापार घाटा – आयात, निर्यात से अधिक
  2. अदृश्य व्यापार – सेवाओं का व्यापार
  3. गैर-उपदान आय (Non-Factor Income) – पर्यटन

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये-

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)
व्याख्या: उपरोक्त तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।

  • जब किसी देश का निर्यात, आयात से अधिक होता है तो व्यापार आधिक्य होता है और जब आयात, निर्यात से अधिक होता है तो ‘व्यापार घाटा’ होता है।
  • भुगतान संतुलन के अंतर्गत सेवाओं के व्यापार को अदृश्य व्यापार कहा जाता है क्योंकि उसे सीमाओं को पार करते देखा नहीं जा सकता है। अदृश्य व्यापार के अंतर्गत उपदान आय (Factor Income) और गैर-उपदान आय (Non-Factor Income) आते हैं।
  • उपदान आय के अंतर्गत विदेशों में हमारी परिसंत्तियों पर ब्याज, लाभ और लाभांश में से भारत में विदेशियों की परिसंपत्तियों से उनकी आय घटाने पर प्राप्त होती है तथा गैर-उपदान आय के अंतर्गत जहाजरानी, बैंकिंग, बीमा, पर्यटन, सॉफ्टवेयर इत्यादि सेवाएँ आती हैं।

[5]

भुगतान संतुलन के संदर्भ निम्नलिखित में से किन्हें पूंजीखाते के अंतर्गत रखा जाता है–

  1. विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में निवेश करना।
  2. भारतीय निवेशकों द्वारा विदेशी बंधपत्रों (Bonds) को खरीदना।
  3. भारत द्वारा विदेशों से ऋण लेना।
  4. भारत द्वारा विदेशों से हथियार खरीदना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये–

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 1, 2 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (c)
व्याख्या: उपरोक्त में से कथन 1, 2 और 3 सत्य हैं।
भुगतान संतुलन में दो मुख्य खाते होते हैं– चालू खाता और पूंजी खाता। पूंजी खातों में परिसंपत्तियों, जैसे– मुद्रा, स्टॉक, बंधपत्र (Bonds) आदि सभी प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय क्रय-विक्रयों का विवरण होता है। जैसे–

  1. विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में निवेश करना।
  2. भारतीयों द्वारा विदेशों में परिसंपत्तियों का क्रय करना।
  3. भारत द्वारा विदेशियों से ऋण ग्रहण करना।

विदेशियों को जिस किसी भी प्रकार के अंतरण द्वारा अदायगी की जाती है, उसे ‘डेबिट’ में दर्ज़ करते हैं और उसे ऋणात्मक चिह्न दिया जाता है। कोई भी अंतरण जो विदेशियों से प्राप्ति के रूप में प्रविष्ट करते हैं, उसे क्रेडिट में दर्ज़ करते हैं और उसे धनात्मक चिह्न दिया जाता है।

[6]

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विनिमय दर का सर्वोत्कृष्ट वर्णन करता है?

A) एक देश से दूसरे देश में पूंजी का संचलन।
B) विदेशी मुद्रा की एक इकाई क्रय में खर्च हुई घरेलू मुद्रा की कुल इकाई।
C) घरेलू मुद्रा के मूल्य में विदेशी मुद्रा के सापेक्ष गिरावट।
D) एक निश्चित समय में किसी देश का अन्य देश के साथ आयात-निर्यात का अनुपात।

उत्तर: (b)
व्याख्या: दूसरे देश की मुद्रा के रूप में प्रथम देश की मुद्रा की कीमत को विनिमय दर कहा जाता है। चूँकि दो करेंसियों के बीच  एक प्रतिसाम्य की स्थिति होती है, इसलिये विनिमय दर को दो में से किसी भी प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है। पहला, घरेलू मुद्रा के रूप में किसी विदेशी मुद्रा की एक इकाई क्रय में घरेलू मुद्रा की जितनी इकाइयों की आवश्यकता होती है, जैसे- रुपया और डॉलर की विनिमय दर 50 रु॰ है, इसका अर्थ यह है कि 1 डॉलर का क्रय करने के लिए 50 रु॰ की लागत आती है। दूसरे, घरेलू मुद्रा की एक इकाई का क्रय करने के लिये विदेशी करेंसी  की लागत के रूप में। उपर्युक्त मामले में हम कहेंगे कि 1 रुपया खरीदने की लागत 2 सेंट होगी। यद्यपि अर्थशास्त्र में पहली परिभाषा ही अधिक प्रचलित व व्यावहारिक है। यह द्विपक्षीय सांकेतिक विनिमय दर है। द्वि-पक्षीय इस अर्थ में है कि यह विनिमय दर किसी एक मुद्रा के लिये दूसरी मुद्रा के रूप में कीमत होती है तथा सांकेतिक इसलिये क्योंकि ये मुद्रा के रूप में विनिमय दर अंकित करती है।

[7]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. किसी वस्तु की देशी कीमत स्तर और विदेशी कीमत स्तर के अनुपात को वास्तविक विनिमय दर कहते हैं।
  2. वास्तविक विनिमय दर एक से अधिक होने पर विदेशों की तुलना में देशी वस्तुएँ महँगी होंगी
  3. किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा की माप लिये वास्तविक विनिमय दर का प्रयोग किया जाता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)
व्याख्या:

  • पहला कथन सत्य है। देशी कीमत स्तर और विदेशी कीमत स्तर के बीच के अनुपात को वास्तविक विनिमय दर कहते हैं जिसकी माप एक ही मुद्रा में की जाती है। उदाहरण के लिये यदि कोई व्यक्ति घूमने के लिये विदेश जाता है, तो उसे यह जानना आवश्यक है कि उस जगह पर वस्तुएँ अपने देश की तुलना में कितनी महँगी हैं। इसकी माप वास्तविक विनिमय दर से हो पाती है।
  • दूसरा कथन असत्य है। यदि वास्तविक विनिमय दर एक से अधिक है तो अपने देश की तुलना में विदेश में वस्तुएँ अधिक महँगी होंगी।
  • तीसरा कथन सत्य है। वास्तविक विनिमय दर का प्रयोग अक्सर किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा की माप के लिये किया जाता है।

[8]

नम्य विनिमय दर (Flexible Exchange Rate) के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इसमें विनिमय दर का निर्धारण बाज़ार मांग व पूर्ति की शक्तियों द्वारा होता है।
  2. केंद्रीय बैंक आवश्यकता पड़ने पर विनिमय दर को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाला कदम उठा सकता है।

कूट:

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a)
व्याख्या: पहला कथन सत्य है। नम्य विनिमय दर (Flexible Exchange Rate) प्रणाली में विनिमय दर का निर्धारण बाज़ार मांग व पूर्ति की शक्तियों द्वारा होता है।
दूसरा कथन असत्य है। पूर्णरूपेण नम्य विनिमय प्रणाली में केंद्रीय बैंक नियमों के सरल समुच्चय को अपनाते हैं। बैंक विनिमय दर स्तर को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाला कोई कार्य नहीं करता है। वह विदेशी विनिमय बाज़ार में दखल नहीं देता है।

 

[9]

कथन: मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation) निर्यात को बढ़ाने के लिये किया जाता है।
कारण: मुद्रा के अवमूल्यन (Devaluation) के कारण विदेशी बाज़ार में देशी वस्तुएँ सस्ती हो जाती हैं।
कूट:

A) कथन सही है, कारण भी सही है तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
B) कथन सही है, कारण भी सही है लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
C) कथन सही है तथा कारण गलत है।
D) कथन गलत है तथा कारण सही है।

उत्तर: (a)
व्याख्या: 

  • अवमूल्यन का अर्थ है विदेशी मुद्रा की तुलना में देशी मुद्रा के मूल्य में ह्रास होना। उदाहरण के लिये यदि रुपया-डॉलर विनिमय दर 45 रुपए पर साम्य की स्थिति में थी और अब वह 50 रु. प्रति डॉलर हो गई है तो डॉलर के विरुद्ध रुपए के मूल्य में ह्रास हुआ है।
  • रुपए के अवमूल्यन से आयात में कमी आएगी, क्योंकि आयातित वस्तुओं की रुपयों में कीमत अधिक होगी साथ ही विदेशों में वही वस्तुएँ सस्ती होंगी। अत: निर्यात में वृद्धि होगी।

 

 

[10]

रुपए की परिवर्तनीयता का तात्पर्य है–

A) रुपए के नोटों के बदले सोना प्राप्त करना।
B) रुपए के मूल्य को बाज़ार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होने देना।
C) रुपए को अन्य मुद्राओं और अन्य प्रमुख मुद्राओं को रुपए में मुक्त रूप में परिवर्तित करने की अनुमति देना।
D) मुद्राओं के लिये भारत में अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार का विकास करना।

उत्तर: (c)
व्याख्या: प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त परिवेश में देशी-विदेशी मुद्राओं के परिवर्तन अर्थात्‌विनिमय की सुविधा एवं स्वतंत्रता को परिवर्तनीयता कहते हैं।

  • रुपए की परिवर्तनीयता का तात्पर्य है रुपए को विदेशी मुद्राओं तथा विदेशी मुद्रा को रुपए में निर्बाध रूप से परिवर्तित किया जा सकता है।
  • यह भुगतान संतुलन (BOP) से जुड़ी हुई अवधारणा है। वर्तमान में भारतीय रुपया BOP के चालू खाते पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय है। यह परिवर्तनीयता 1994 से लागू है। पूंजी खाते के संदर्भ में भारतीय रुपया चयनात्मक रूप से परिवर्तनीय है।

[11]

नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये–

  • इस विनिमय दर व्यवस्था में विनिमय दर का निर्धारण सरकार के द्वारा किया जाता है।
  • इस विनिमय दर प्रणाली में जब सरकार द्वारा विनिमय दर में वृद्धि की जाती है तो इसे मुद्रा का अवमूल्यन (devaluation) कहते हैं।

उपरोक्त विशेषताएँ किस विनिमय दर प्रणाली से संबंधित हैं–

A) नम्य विनिमय दर (Flexible Exchange Rate)
B) स्थिर विनिमय दर (Fixed Exchange Rate)
C) प्रबंधित तिरती विनिमय दर (Managed Floating Exchange Rate)
D) वास्तविक विनिमय दर (Real Exchange Rate)

उत्तर: (b)
व्याख्या: उपरोक्त विशेषताएँ स्थिर विनिमय दर से संबंधित हैं।

[12]

ब्रेटनवुड्‌स प्रणाली के अंतर्गत किन अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की स्थापना हुई?

  1. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)
  2. विश्व बैंक
  3. यूनेस्को
  4. वर्ल्ड वाइड फंड

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2, 3 और 4
C) केवल 2
D) केवल 3 और 4

उत्तर: (a)
व्याख्या: 1994 में ब्रेटनवुड्‌स सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की स्थापना हुई तथा स्थिर विनिमय दर प्रणाली की भी पुनर्स्थापना की गई।

[13]

निम्नलिखित में से किसे अंतर्राष्ट्रीय करेंसी के रूप में ‘कागजी स्वर्ण’ के नाम से जाना जाता है?

A) डॉलर
B) विशेष आहरण अधिकार (SDRS)
C) यूरो
D) गिल्डर

उत्तर: (b)
व्याख्या: 1967 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के नियंत्रण में सोने को अंतर्राष्ट्रीय करेंसी के रूप में विस्थापित करने के लिये विशेष आहरण अधिकार (SDRS) का सृजन किया गया। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के आरक्षित स्टॉक में वृद्धि करने के आशय से विशेष आहरण अधिकार को अंतर्राष्ट्रीय करेंसी के रूप में ‘कागजी स्वर्ण’ के रूप में जाना जाता है। सोने के रूप में परिभाषा में 35 (SDRS) को एक आउंस सोना (ब्रेटनवुड्‌स पद्धति की डॉलर-सोना की दर) के समान माना गया। 1974 से इसे कई बार पुनर्परिभाषित किया गया है। वर्तमान में प्रतिदिन इसकी गणना पाँच देशों (फ्राँस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका) की चार करेंसियों (यूरो, डॉलर, जापानी येन, पौंड, स्टर्लिंग) की डॉलर में मूल्य के भारित योग के रूप में होती है।

[14]

जब किसी अर्थव्यवस्था में व्यापार घाटा और बजटीय घाटा दोनों हों तो उसे कहते हैं–

A) पूंजीगत घाटा
B) दोहरा घाटा
C) चालू खातागत घाटा
D) सकल घरेलू उत्पाद घाटा

उत्तर: (b)
व्याख्या: जब किसी भी अर्थव्यवस्था में व्यापार घाटा और बजटीय घाटा दोनों हों तो उसे दोहरा घाटा कहा जाता है।

[15]

निम्न में से किस वित्तीय वर्ष में भारतीय रुपए का दो बार अवमूल्यन किया गया?

A) 1966-67
B) 1991-92
C) 1990-91
D) 1989-90

उत्तर: (b)
व्याख्या: भारत में 1 जुलाई, 1991 और 3 जुलाई, 1991 (वित्तीय वर्ष 1991-92) को रुपए में दो चरणों में 18-19 प्रतिशत   का अवमूल्यन किया गया तथा मार्च 1992 में दुहरे विनिमय दरों वाली उदारवादी विनिमय दर प्रबंधन व्यवस्था को  अपनाया गया।

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