IAS 2020 PRE के लिए योजना,कुरुक्षेत्र,साइंस रिपोर्टर का पूरा CURRENT AFFAIRS MCQ’S में

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DEMO 5 QUESTION

1-उत्सर्जन गैप रिपोर्ट 2019 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी की गई है।
  2. इस रिपोर्ट के अनुसार चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत पिछले एक दशक में ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के शीर्ष उत्सर्जक रहे हैं।
  3. राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) वर्ष 2020 के बाद मरुस्थलीकरण को कम करने के लिये स्वैच्छिक राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को अभिनिर्धारित करते हैं

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A केवल 1

B केवल 2

C केवल 2 और 3

D 1, 2 और 3

Explanation

उत्तर: (b)

व्याख्या:

उत्सर्जन गैप रिपोर्ट, 2019

  • यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम(United Nations Environment Programme- UNEP) की एक प्रमुख रिपोर्ट है और यह वर्ष 2030 में प्रत्याशित ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन और पेरिस समझौते के तहत निर्धारित 5°C और 2°C लक्ष्यों के अनुरूप स्तरों के बीच अंतर का आकलन करती है। जल-वाष्प (H2O), कार्बनडाइ ऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और ओज़ोन (O3) पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित प्राथमिक ग्रीन हाउस गैसें (GHGs) हैं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • रिपोर्ट में ऊर्जा संक्रमण की संभावना विशेष रूप से ऊर्जा, परिवहन और इमारत जैसे क्षेत्रों में तथा लौह एवं इस्पात, सीमेंट जैसे सामग्रियों के उपयोग में ऊर्जा दक्षता को रेखांकित किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) का चौथा सबसे बड़ा उत्सर्जक है।
  • विश्व पेरिस समझौते के 5° C तापमान के लक्ष्य को प्राप्त करने में तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि वैश्विक रूप से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में प्रत्येक वर्ष 7.6% की कमी नहीं होती।
  • शीर्ष चार उत्सर्जकों (चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत) ने पिछले एक दशक में कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 55% से अधिक का योगदान दिया, इसमें वनों की कटाई के चलते भूमि-उपयोग परिवर्तनों से होने वाली उत्सर्जन शामिल नहीं है। यदि भू-उपयोग परिवर्तन से होने वाले उत्सर्जन को शामिल किया जाए तो रैंकिंग की स्थिति परिवर्तित होती, जिसमें ब्राज़ील संभवतः सबसे बड़ा उत्सर्जक होता।अतः कथन 2 सही है।
  • सर्वाधिक उत्सर्जन वाले क्षेत्र:
    ऊर्जा> उद्योग> वानिकी> परिवहन> कृषि> बिल्डिंग
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions- NDC):वर्ष 2020 के बाद स्वैच्छिक राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों की पहचान करता है जिसमें शमन और अनुकूलन भी शामिल हैं। पेरिस समझौते के माध्यम से प्रत्येक देश अपने स्तर पर GHG उत्सर्जन में कमी लाने का प्रयास करेगा ताकि इस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। अतः कथन 3 सही नहीं है।
  • पेरिस समझौते के तहत सबसे पहले वर्ष 2015 में NDC को प्रस्तुत किया गया था। उस समय अभिप्रेत राष्‍ट्रीय तौर पर निर्धारित योगदान (Intended Nationally Determined Contributions-INDCs) के रूप में जाना जाता था। जैसे ही कोई देश समझौते की पुष्टि करता है तो उसका INDC पहला NDC बन जाता है।

2-नेट- ज़ीरो उत्सर्जन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इसका तात्पर्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG) को बहुत अधिक सीमा तक कम करने और जिसे समाप्त नहीं किया जा सका उसकी क्षतिपूर्ति करने से है।
  2. भूटान दुनिया का एकमात्र कार्बन नकारात्मक देश है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Aकेवल 1

Bकेवल 2

C1 और 2 दोनों

Dन तो 1 और न ही 2

Explanation

उत्तर: (c)

व्याख्या:

नेट-ज़ीरो उत्सर्जन

  • नेट-ज़ीरो उत्सर्जन तब प्राप्त होता है जब किसी भी बचे हुए मानव-जनित ग्रीनहाउस गैस (GHGs) उत्सर्जन को संतुलित करने के लिये वायुमंडल में उपस्थित GHGs को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया को ‘कार्बन रिमूवल’ के नाम से जाना जाता है।अतः कथन 1 सही है।
  • नेट ज़ीरो के लिये सबसे पहले और सबसे महत्त्वपूर्ण है मानव-जनित उत्सर्जन (जैसे- जीवाश्म-ईंधन वाले वाहनों और कारखानों से होने वाला उत्सर्जन) को यथासंभव शून्य के करीब तक कम करना। शेष GHGs को समान मात्रा में कार्बन को हटाकर संतुलित किया जाएगा। उदाहरण के लिये वनों के पुनर्स्थापन या DACS (Direct Air Capture and Storage) प्रौद्योगिकी के माध्यम से। नेट ज़ीरो उत्सर्जन की अवधारणा ‘जलवायु तटस्थता’ (Climate Neutrality) के समान है।
  • जलवायु तटस्थ नेटवर्क (CN Net) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme- UNEP) की एक पहल है, जिसमें कार्बन फुटप्रिंट को कम करने से संबंधित रणनीतियों एवं पहलों को प्रदर्शित किया जाता है।
  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change- IPCC) की ओर से 5 ̊C की ग्लोबल वार्मिंग पर जारी विशेष रिपोर्ट में पाया गया है कि अगर विश्व वर्ष 2040 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन स्तर पर पहुँच जाता है, तो वार्मिंग को 1.5 ̊C तक सीमित करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
  • भूटानएकमात्र कार्बन-नकारात्मक देश बन गया है। भूटान अपनी तेज़ प्रवाह वाली नदियों से उत्पादित अधिकांश नवीकरणीय उर्जा का निर्यात भारत को करता है। अतः कथन 2 सही है।

3-भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?

  1. अपशिष्ट उत्पादकों द्वारा अपशिष्ट को तीन श्रेणियों में विभाजित करना होता है।
  2. ये नियम रक्षा प्रतिष्ठानों, तीर्थ स्थलों और ऐतिहासिक स्थानों पर लागू नहीं होते हैं।
  3. ये नियम गंदगी फैलाने और कचरे का पृथक्करण न लिये ‘स्पॉट फाइन’ का प्रावधान करते हैं।
  4. सड़क/फुटपाथ पर सामान बेचने वाले प्रत्येक विक्रेता के लिये यह अनिवार्य है कि वह अपशिष्ट के भंडारण के लिये उपयुक्त कंटेनर रखे।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

A केवल 1 और 2

Bकेवल 2 और 3

Cकेवल 1 और 3

D उपरोक्त सभी

Explanation

उत्तर:(c)

व्याख्या:

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016:

  • भारत में अपशिष्ट प्रबंधन नियम ‘सतत् विकास’, ‘निवारक’ और ‘प्रदूषक भुगतान’ के सिद्धांतों पर आधारित हैं। ये सिद्धांत पर्यावरण के प्रति कर्त्तव्य और ज़िम्मेदारियों को परिभाषित कर एक सक्षम और अनुक्रियाशील तंत्र का निर्माण करते हैं।
  • इस नियम के अनुसार उत्पादक द्वारा अपशिष्ट को तीन श्रेणियों में अलग करना होता है: गीला (बायोडिग्रेडेबल), सूखा (प्लास्टिक, कागज़, धातु, लकड़ी आदि) और घरेलू खतरनाक अपशिष्ट (डायपर, नैपकिन, क्लीनिंग एजेंटों के खाली कंटेनर, मच्छर निवारक आदि) के रूप में वर्गीकृत कर इन्हें अलग-अलग डिब्बों में रखकर स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित अपशिष्ट संग्रहकर्त्ता को दिया जाना चाहिये।अतः कथन 1 सही है।
  • अब ये नियम नगर निगम क्षेत्र के बाहर भी लागू हैं। इन नियमों में शहरी समूह, जनगणना शहर, अधिसूचित औद्योगिक टाउनशिप, भारतीय रेलवे के नियंत्रण वाले क्षेत्र, हवाई अड्डे, एयर बेस, बंदरगाह, रक्षा प्रतिष्ठान, विशेष आर्थिक क्षेत्र, राज्य और केंद्र सरकार के संगठन, तीर्थ स्थल, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्त्व के स्थानोंको शामिल किया गया है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
  • यह भी सलाह दी गई है कि बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट को उपचारित किया जाना चाहिये और जहाँ तक संभव हो इस कार्य को परिसर के भीतर खाद या जैव-मेथेनन (Bio-Methanation) के माध्यम से निपटाया जाना चाहिये तथा शेष अपशिष्ट को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट एकत्रित करने वालों या एजेंसी को ही दिया जाएगा।
  • निर्माण और तोड़-फोड़ से उत्‍पन्‍न होने वाले ठोस अपशिष्ट को निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार संग्रहीत करने के बाद अलग से निपटान किया जाना चाहिये।
  • ठोस अपशिष्ट उत्‍पन्‍न करने वालों को ‘उपयोगकर्त्ता शुल्क’ अदा करना होगा तथा गंदगी फैलाने और अपशिष्ट का पृथक्करण न करने की स्थिति में उसे ‘स्पॉट फाइन’ भी देना होगा।अतः कथन 3 सही है।
  • ये नियम अपशिष्ट के खाद के रूप में उपयोग, ऊर्जा में रूपांतरण, भराव क्षेत्र की क्षमता के लिये मापदंडों में संशोधन को बढ़ावा देते हैं।
  • सरकार ने नियमों के समग्र कार्यान्वयन की निगरानी के लिये पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक केंद्रीय निगरानी समिति का भी गठन किया है।
  • लिगेसी वेस्ट के सुरक्षित उपचार के लिये नियम (Rules for the Safe Treatment of Legacy Waste) भारत में सभी खुले डंपिंगसाइट्स और मौजूदा समु में संचालित हो रहे डंपिंगसाइट्स में जैव-उपचार और जैव-खनन को निर्धारित करते हैं।
  • सड़क/फुटपाथ पर सामान बेचने वाले प्रत्येक विक्रेता को अपनी गतिविधि के दौरान उत्पन्न अपशिष्ट के भंडारण के लिये उपयुक्त कंटेनर रखना चाहिये और ऐसे कचरे को स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित अपशिष्ट संग्रहण डिपो या कंटेनर या वाहन में जमा किया जाना चाहिये।यह अनिवार्य नहीं है। अतः कथन 4 सही नहीं है।

4-निम्नलिखित में से कौन-से कारक सौर ऊर्जा क्षेत्र में मंदी के लिये ज़िम्मेदार हैं?

  1. वर्ष 2018 में भारत द्वारा सौर सेल और मॉड्यूल के आयात पर 25% शुल्क आरोपित करना।
  2. विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा विद्युत संयंत्रों को भुगतान करने में देरी।
  3. सरकार का यह निर्णय कि संयंत्र कम शुल्क पर डिस्कॉम को विद्युत की बिक्री करें।
  4. वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का लागू किया जाना।

नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

Aकेवल 1 और 2

Bकेवल 2 और 3

Cकेवल 1, 2 और 3

D1, 2, 3 और 4

Explanation

उत्तर:(d)

व्याख्या:

सौर ऊर्जा क्षेत्र में मंदी के लिये ज़िम्मेदार कारक:

  • वर्ष 2018 में, भारत ने सौर सेल और मॉड्यूल के आयात पर 25% शुल्क आरोपित किया। सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा देना था। लेकिन इससे परियोजना की लागत बढ़ गई।अतः कथन 1 सही है।
  • विद्युत वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम), जो कि ज़्यादातर राज्य सरकारों के स्वामित्व में हैं, सौर ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले संयंत्रों को भुगतान में देरी करती हैं। जुलाई 2019 तक, डिस्कॉम पर देश में सौर ऊर्जा उत्पादकों का 9,736 करोड़ रुपये का बकाया है।इस बकाया राशि में 75% हिस्सेदारी आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक की है। इस देरी का निवेशकों पर बड़ा असर पड़ा है जिसके कारण सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक भी कर्ज देने के प्रति अनिच्छुक होते हैं। अतः कथन 2 सही है।
  • सरकार का यह निर्णय कि ऊर्जा संयंत्र विद्युत वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम को कम शुल्क पर विद्युत की बिक्री करें। कम शुल्क को एक पूर्ण-परिदृश्‍य की आवश्‍यकता होती है जहाँ निष्पादन, संग्रह और सृजन जोखिम कम-से-कम हो।अतः कथन 3 सही है।
  • पूर्ण क्षमता के साथ संचालन में सौर संयंत्रों की अक्षमता। ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि डिस्कॉम सस्ते स्रोतों से बिजली खरीदना पसंद करते हैं।
  • वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का लागू किया जाना। चूँकि कई परियोजनाओं की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी अतः जीएसटी के लागू होने पर उनपर अतिरिक्त बोझ पड़ा जिसने परियोजनाओं को अस्थिर कर दिया।अतः कथन 4 सही है।
  • नीतियों में बार-बार होने वाले बदलाव से परियोजना के प्रति डेवलपर्स और निवेशकों के बीच विश्वास की कमी।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority- CEA) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में नवंबर 2019 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 21% की वृद्धि हुई। लेकिन पिछले पाँच वर्षों में यह वृद्धि लगभग 20% प्रतिवर्ष रही है। वित्त वर्ष 2018-19 में इस क्षेत्र में 24.47% की वृद्धि हुई।

5-निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय विस्फोटकों के उपयोग को चिह्नित करता है।
  2. मिथाइल आइसोसाइनेट भारत में प्रतिबंधित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Aकेवल 1

Bकेवल 2

C1 और 2 दोनों

Dन तो 1 और न ही 2

Explanation

उत्तर: (a)

व्याख्या:

  • भारत का रसायन उद्योग विश्व का छठा सबसे बड़ा रसायन उद्योग है। रसायन उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में रासायनिक उद्योग का योगदान लगभग 3% है।
  • भारत में 15 से अधिक अधिनियम और 19 नियम हैं जो रसायनों से संबंधित उद्योग के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करते हैं। फिर भी अब तक कोई भी अधिनियम विशेष रूप से इस उद्योग के लिये तैयार नहीं किया गया है।
  • केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989सामान्य रूप से सड़क परिवहन के सभी पहलुओं से संबंधित है और विशेष रूप से रसायनों एवं हानिकारक वस्तुओं के परिवहन से संबंधित है।
  • हानिकारक अपशिष्ट (प्रबंधन और पारगमन गतिविधि) नियम 2016, अनिवार्य करता है कि बंदरगाह और सीमा शुल्क अधिकारी हानिकारक और अन्य अपशिष्ट की अवैध तस्करी के बारे में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को सूचित करेंगे।
  • वर्तमान में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 रासायनिक उद्योग के मामले में समग्र अधिनियम के रूप में कार्य करता है।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (MCI) विस्फोटकों के उपयोग को चिह्नित करता है।अतः कथन 1 सही है।
  • पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (Petroleum and Explosives Safety Organisation- PESO) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग के अंतर्गत आता है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1898 में विस्फोटक, संपीडित गैसों और पेट्रोलियम जैसे पदार्थों की सुरक्षा के लिये एक नोडल एजेंसी के रूप में की गई थी।
  • इसका मुख्य कार्यालय नागपुर, महाराष्ट्र में स्थित है।
  • देश में अभी भी मिथाइल आइसोसाइनेट का उपयोग पॉलीयुरेथेन (एक प्रकार का प्लास्टिक) के निर्माण में कानूनी रूप से किया जाता है।
  • मिथाइल आइसोसाइनेट बेहद ज़हरीली गैस है और अगर हवा में इसकी सांद्रता 21प्रति मिलियन भाग (Parts Per Million) के स्तर पर पहुँच जाती है, तो इस गैस के शरीर के अंदर प्रवेश करने के कुछ ही मिनटों में मनुष्य की मौत हो सकती है।अतः कथन 2 सही नहीं है।