MyHomeToUniverse Part-1 हमने जन्म क्यों लिया है ?

 

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हमने जन्म क्यों लिया है ?

पृथ्वी पर आने का हमारा उद्देश्य क्या हैं ?

“गोल्डेज स्वर्गीय का ये रिसर्च लेख आपका जीवन परिवर्तन करने की क्षमता रखता है ये आपको आत्मविश्वास से भर देगा और जीवन को एक नई दिशा देगा”

 हमारे जीवन का अंतिम प्रश्न “हमने जन्म क्यों लिया है” इसका जबाव आपको शायद ही कभी मिला हो और मिला भी होगा तो वह वैज्ञानिक नहीं होगा अर्थार्त आपको संतुष्टि नहीं मिली होगी इस लेख से आप अंत में संतुष्टि पा सकंगे ये मेरा दावा हैं| मैंने अपने जीवन मैं इसका जबाव खोज लिया है जिसे मैं आपके सामने रख रहा हूँ |बहुत ही सरल अंदाज में मैंने अपनी बात कही है वैज्ञानिक द्रष्टिकोण के साथ इसे समझने के लिए बस 10th तक शिक्षा की आवश्यकता होगी तो चलिए शुरू करते हैं |

                                                        हमारा जन्म इस ब्राह्मण से ही हुआ है ये तो सर्वमान्य है तो सबसे पहले हमें समझाना होगा कि आखिरकार ब्रह्माण्ड कैसे काम कर रहा है साधारण समझ के आधार पर हम जानते हैं कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है अर्थार्त कुछ नया बन रहा हैं अर्थार्त कुछ रचना हो रही है अब हम मान सकते हैं की ब्रह्माण्ड का कार्य रचना करना है और इसकी रचना अब भी हो रही है |

चलिए अब हम जान लेते हैं कि हम कौन हैं और इस ब्रह्माण्ड में हमारी स्थिति क्या है,जैसा की आप सभी जानते हैं किसी एक बिंदु से ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ(बिग बैंग )उसके बाद तारे बने,आकाश गंगाएं बनीं,उसी पदार्थ से ग्रह बने जीवों में मनुष्य बना-मनुष्य भी उसी पदार्थ से बना है जिनसे सूरज ,तारे ,पृथ्वी आदि बने हैं |मनुष्य के साथ ही साथ हमारी पृथ्वी पर सारे जीव-जन्तु,पेड़-पौधे,सजीव निर्जीव जो भी है वो सब उसी पदार्थ से बना है –तो अब हम आसानी से समझ सकते हैं की मनुष्य कोई अद्भुत चीज नहीं है वो भी वही है जो चाँद ,सूरज ,पौधे ,हवा हैं बस फर्क इतना है की किसी में किसी पदार्थ की मात्रा ज्यादा है तो किसी में कम|और स्पष्ट रूप से समझने के लिए हमने अब तक जिन पदार्थों की खोज की है उन्हें ही देख लेते हैं जैसे पृथ्वी पर 70% जल है तो मनुष्य में भी लगभग 70% जल ही है,लोहा भी शारीर और पृथ्वी दोनों में ही मिलता है यानी जिन पदार्थों ,गैसों से ये ब्रह्माण्ड बना है मनुष्य भी उन्हीं से बना है यानी सभी एक ही पदार्थ से बने हैं इसी को कहते हैं अद्वेतवाद(दो नहीं एक ही),इसी को कहते हैं एकेश्वरवाद(एक ही ईश्वर है जिसमें हम भी शामिल हैं),इसी को कहते हैं कण-कण भगवान(पूरा ब्राह्मण ही भगवान है हम उससे अलग नहीं हैं )

“तो अब हम समझ चुके हैं कि ब्रह्माण्ड में हमारी स्थिति क्या है और हम कौन हैं”

अब हम समझेंगे की ब्रह्माण्ड का विस्तार क्यों हो रहा है ,ब्रह्माण्ड क्यों बना,सूर्य क्यों बने ,पृथ्वी क्यों बनी और वास्तविक प्रश्न की हम क्यों बने अर्थार्त हमने जन्म क्यों लिया?    अब यहाँ से आगे आपको खुद को मुझे समर्पित करना होगा यानी मुझपर पूरा विश्वास करना होगा और आप जान जायेंगे कि आपका इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य क्या है |   सुनिए …………….

जब हम कुछ भी नया करते हैं तो मजा आता है जैसे संगीत पैदा करना ,कविता लिखना ,जो किसी को नहीं पता उसे पता करने में अर्थार्त इस पृथ्वी पर प्रत्यक्ष रूप से जो दिखाई ,सुनाई न दे उस काम को करने में हमें मजा आता है क्योंकी उसे पैदा करने में हमें मजा आता है |अब यदि नया कुछ बना है जैसे कविता,संगीत,बल्ब आदि तो ये जो नए बने हैं और किसी से सवाल पूछें की हमें क्यों बनाया गया है तो आप समझ गए होंगे की जवाब क्या होगा,जवाब होगा बनाने वाले को मजा आया बस | अब उस कविता ,संगीत ,बल्ब का कार्य यही है कि उसे पढ़कर ,सुनकर ,देखकर जिन्हें मजा आ रहा है उसे मजा लेने दें और खुद भी वही मजा लें

जो भी वस्तु विश्व में हमें दिखाई दे रही है उसे बनाने वाले को मजा आया है |यहीं हम समझ लेते हैं की बिग –बेंग जैसी घटना इसका कारण मजा ही था यानी उससे ब्रह्माण्ड बना उसे मजा आया,सूर्य(तारे) बना जिस पदार्थ से बना उसे मजा आया ,पृथ्वी सूर्य से बनी सूर्य को बनाने में मजा आया,इसी क्रम में पृथ्वी पर मौजूद हर जीव-जंतु,पेड़ –पौधे,यहाँ तक की मनुष्य जो भी पृथ्वी से पैदा हुआ उसके अस्तित्व की एक ही वजह है पृथ्वी को इसे बनाने में मजा आया| अब थोडा सा मानव केन्द्रित हो जाते हैं आप समझ चुके हैं कि मानव को पृथ्वी के क्यों जन्म दिया उसे मजा आया बस और यही क्रिया मानव भी करते हैं मजा के कारण ही हम- आप सभी पैदा होते हैं(आप समझदार हैं)

जब हमारे पैदा होने कारण केवल किसी का मजा है तो हमें परेशान नहीं होना चाहिए की हमें जन्म क्यों दिया गया है जब हमें पता चल गया है की ये दुनिया मजा पर आधारित है तो हम भी इसी दुनिया के ही अंश हैं तो क्या हमें भी वही नहीं करना चाहिए जिसमे हमें मजा आता हो|

अब में बताता हूँ हमें मजा किसमें आता है- कुछ नया करने में ,नया पैदा करने में ,कुछ भी क्रिएट करने में| इस ब्रह्माण्ड की रचना हो रही है और हम उसके अंश हैं तो हमारी जन्मजात जो प्रकृति है वो कुछ क्रिएट करने की है यानी नया करने की, तो हमें प्रकृति के नियम को अपनाना चाहिए यही हमारा कर्तव्य है इसी के लिए हमने जन्म लिया है इसी में हमारी खुशहाली है |

अब हम अपना कर्तव्य जान चुके हैं हमें क्या करना चाहिए –कुछ नया करना चाहिए ,कुछ पैदा करना चाहिए ,कुछ क्रिएट करना चाहिए इससे हमें क्या मिलेगा ?वही जो हम चाहते हैं- आनंद ,मजा ,खुशहाली

वास्तव  में इस ब्रह्मांड में दो श्रेणी हैं एक बनाने वाला(क्रिएटर-रचनाकार),दूसरा जो बनाया गया(क्रिएसन-रचना)यह इतनी लम्बी चेन है की इसे अनंत कह सकते हैं जिसका न कोई ओर है और न कोई छोर | इस चेन में जब आपको अपना कर्तव्य पता है तो आप वही करें |वैज्ञानिकों ने जो बिग-बेंग की थ्योरी दी है वह भी मात्र इस चेन की एक कढ़ी है ये कढ़ी क्यों बन रही है इसका उत्तर अब आप दे सकते हैं मजा और आनंद

इस पूरे ब्रह्माण्ड में  चीजें  पैदा हो रही हैं पैदा कर रही हैं बीच में उन्हें आनंद ,मजा मिल रहा है और ब्रह्माण्ड की रचना हो रही है | पृथ्वी को पेड़-पौधे पैदा करने में मजा आया तो पेड़ पौधों को फल,फूल | उनके मजे वाली वस्तुओं का मनुष्य उपयोग करके लाभ उठा सकते हैं और अपना ध्यान क्रिएट करने में लगा सकते हैं वास्तव में आप जहाँ भी बैठे हैं अपने आस-पास जो भी देखेंगे जैसे मेज,कुर्सी,कपड़े,पंखा,आदि तो ये मान के चलिए जिसने इन्हें सबसे पहले बनाया था उसे बनाकर मजा आया था और उनके मजे का हम लाभ ले रहे हैं

हमें वास्तविक मजा तब आएगा जब हम किसी के मजे से बनी बस्तु का उपयोग करके खुद कुछ नया करेंगे ऐसा नहीं होना चाहिए की आराम दायक सोफे पर बैठकर आप सोचें की मजा आ गया …वो मजा छड भर का होगा जबकि आपको वहां बैठकर कुछ क्रिएट करने के लिए वो सोफा बना है

लोगों के पास सब कुछ है सारी सुबिधाजनक बस्तुएं हैं लेकी फिर भी वो मजे से वंछित हैं क्योकि वो इन वस्तुओं को मजा समझ बैठे हैं जबकि उन्हें इनका उपयोग करके कुछ नया करना चाहिए ,कुछ रचना करनी चाहिए तभी उन्हें आनंद प्राप्त होगा

दोस्तों आनंद केवल और केवल प्रकृति के नियम के अनुसार चलने पर ही आएगा और प्रकृति का नियम है –क्रिएटिविटी(रचनात्मकता),नया करना

अंत में मैं यही कहूँगा:-

              “हम पैदा(क्रिएट) हुए हैं पैदा(क्रिएट) करने के लिए”

“हमने जीवन क्रिएट करने के लिए लिया है और मृत्यु तक क्रिएटर बना रहना चाहिए”   

     गोल्डेज स्वर्गीय

                END  

NEXT PART- “आखिरकार ये ब्रह्माण्ड में क्या रचना हो रही है”

                                                       जारी है …………………

                                                  

                                                                 

                            

 

 

 

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