NCERT MCQ’S ||ECONOMY||CLASS-9

1.पालमपुर गाँव की कहानी (4 प्रश्न)

[1]

वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन के लिये निम्न में से कौन- से कारक आवश्यक हैं?
1. भूमि
2. श्रम
3. भौतिक पूंजी
4. मानव पूंजी

A) 1, 2 और 4
B) 1, 2 और 3
C) 3 और 4
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिये चार कारक आवश्यक हैं। पहली आवश्यकता है भूमि तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे- जल, वन, खनिज आदि। दूसरी आवश्यकता है श्रम अर्थात् जो लोग काम करेंगे। कुछ उत्पादन क्रियाओं में ज़रूरी कार्यों को करने के लिये बहुत ज़्यादा पढ़े-लिखे कर्मियों की ज़रूरत होती है तो दूसरी क्रियाओं के लिये शारीरिक श्रम करने वाले श्रमिकों की तीसरी आवश्यकता है भौतिक पूंजी की अर्थात् उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर अपेक्षित कई तरह के आगत। चौथे स्थान पर आपको स्वयं उपभोग हेतु या बाज़ार में बिक्री हेतु उत्पादन करने के लिये भूमि, श्रम और भौतिक पूंजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिये ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता पड़ेगी जिसे मानव पूंजी कहा जाता है।

[2]

उत्पादन के कारक से संबंधित भौतिक पूंजी के अंतर्गत नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः
1. भौतिक पूंजी के अंतर्गत दो मदें आती हैं। स्थायी पूंजी एवं क्रियाशील पूंजी।
2. भौतिक पूंजी के अंतर्गत औजार, मशीन एवं भवन को कार्यशील पूंजी कहते हैं।
3. भौतिक पूंजी के अंतर्गत कच्चा माल और नगद मुद्रा को स्थायी पूंजी कहते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) केवल 1
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः केवल कथन 1 सही है। भौतिक पूंजी उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण कारक है। भौतिक पूंजी के अंतर्गत दो मदें आती हैं। स्थायी पूंजी एवं क्रियाशील पूंजी।
औजारों, मशीनों और भवनों का उत्पादन में कई वर्षों तक प्रयोग होता है इसलिये इन्हें स्थायी पूंजी कहा जाता है। जबकि उत्पादन के दौरान कई प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता होती है तथा इस कच्चे एवं ज़रूरी माल खरीदने तथा उसका भुगतान करने के लिये कुछ पैसों की भी आवश्यकता होती है। अतः कच्चे माल तथा नगद पैसों को कार्यशील पूंजी कहते हैं।

[3]

भारत में हरित क्रांति के संदर्भ में नीचे दिये गए कथनों में से कौन-से कथन सत्य हैं?
1. भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1960 के दशक के अंत में हुई।
2. हरित क्रांति के दौरान किसानों ने अधिक उपज वाले बीजों (एच.वाई.वी) का प्रयोग किया।
3. हरित क्रांति के दौरान गेहूँ एवं चावल की खेती पर अधिक ज़ोर था।

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः 1960 के दशक के अंत में हरित क्रांति ने भारतीय किसानों को अधिक उपज देने वाले बीजों (एच.वाई.वी) के द्वारा गेहूँ और चावल की खेती करने के तरीके सिखाए। हरित क्रांति का मुख्य प्रभाव गेहूँ एवं धान की खेती पर दिखाई पड़ता है।
परंपरागत बीज की तुलना में एच.वाई.वी बीजों से एक ही पौधे से ज़्यादा मात्रा में अनाज पैदा होने की आशा थी। जिसके परिणामस्वरूप ज़मीन के उसी टुकड़े में पहले की अपेक्षा अधिक अनाज की मात्रा पैदा होने लगी। यद्यपि अति उपज प्रजातियों वाले बीजों से अधिकतम उपज पाने के लिये बहुत छयादा पानी तथा रासायनिक खाद और कीटनाशकों की ज़रूरत थी।

[4]

भारत के किन-किन क्षेत्रों में हरित क्रांति का प्रभाव मुख्य रूप से था?

A) पंजाब, गुजरात, तमिलनाडु
B) पंजाब, गुजरात, हरियाणा
C) पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश
D) पंजाब, हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः भारत के संदर्भ में 1966-67 की नई कृषि नीति जिसे हम हरित क्रांति के नाम से जानते हैं, का प्रभाव सम्पूर्ण भारत में न होकर पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे सीमित क्षेत्रों में रहा। यहाँ के किसानों ने खेती के आधुनिक तरीकों का सबसे पहले प्रयोग किया।

2.संसाधन के रूप में लोग (13 प्रश्न)

[1]

नीचे दिये गए कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ियेः
1. जब मानव संसाधन को शिक्षा तथा स्वास्थ्य के द्वारा विकसित किया जाता है, तब इसे मानव पूंजी निर्माण कहते हैं।
2. मानव पूंजी में निवेश, भौतिक पूंजी की ही भाँति प्रतिफल प्रदान करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः जब शिक्षा, प्रशिक्षण और चिकित्सीय सेवाओं में निवेश किया जाता है तो वही जनसंख्या मानव पूंजी में बदल जाती है। जब इस विद्यमान मानव संसाधन को और अधिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य के द्वारा विकसित किया जाता है, तब हम इसे मानव पूंजी निर्माण कहते हैं। जो भौतिक पूंजी निर्माण की ही भाँति देश की उत्पादक शक्ति में वृद्धि करता है।
मानव पूंजी में निवेश (शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण) भौतिक पूंजी की ही भाँति प्रतिफल प्रदान करता है। अधिक शिक्षित या बेहतर प्रशिक्षित लोगों की उच्च उत्पादकता के कारण होने वाली अधिक आय और साथ ही अच्छे स्वस्थ लोगों की उच्च उत्पादकता के रूप में इसे प्रत्यक्षतः देखा जा सकता है।

[2]

आर्थिक क्रियाकलाप के संदर्भ में प्राथमिक क्षेत्र में सम्मिलित हैं:
1. वानिकी
2. पशुपालन
3. व्यापार एवं परिवहन
4. खनन

A) केवल 1
B) 1 और 3
C) 1, 2 और 3
D) 1, 2 और 4

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः विभिन्न आर्थिक क्रियाकलापों को तीन प्रमुख क्षेत्रकों- प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक में वर्गीकृत किया गया है। प्राथमिक क्षेत्रक के अंतर्गत कृषि, वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गी पालन और खनन शामिल है। द्वितीयक क्षेत्रक में उत्खनन और विनिर्माण शामिल हैं।

[3]

आर्थिक क्रियाकलाप के अंतर्गत तृतीयक क्षेत्रक में सम्मिलित हैं:
1. व्यापार
2. परिवहन
3. बीमा
4. संचार
5. विनिर्माण

A) 1, 2 और 3
B) 2, 4 और 5
C) 3, 4 और 5
D) 1, 2, 3 और 4

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः आर्थिक क्रियाकलाप के अंतर्गत तृतीयक क्षेत्रक में व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सेवाएँ इत्यादि शामिल किये जाते हैं।

[4]

इस आर्थिक क्रिया में वेतन या लाभ के उद्देश्य से की गई क्रियाओं के लिये पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है, इसमें सरकारी सेवा सहित वस्तु या सेवाओं का उत्पादन शामिल है।
ऊपर कही गई बात किस प्रकार की आर्थिक क्रिया के संदर्भ में है?

A) बाज़ार क्रियाएँ
B) गैर-बाज़ार क्रियाएँ
C) बाज़ार एवं गैर-बाज़ार क्रियाएँ दोनों के लिये
D) इनमें से कोई नहीं

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रकों में क्रियाकलाप के फलस्वरूप वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन होता है। ये क्रियाकलाप राष्ट्रीय आय में मूल्यवर्द्धन करते हैं। ये क्रियाएँ आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं। आर्थिक क्रियाओं के दो भाग होते हैं- बाज़ार क्रियाएँ और गैर-बाज़ार क्रियाएँ। बाज़ार क्रियाओं में वेतन या लाभ के उद्देश्य से की गई क्रियाओं के लिये पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। इसमें सरकारी सेवा सहित वस्तु या सेवाओं का उत्पादन शामिल है। गैर-बाज़ार क्रियाओं से अभिप्राय स्व-उपभोग के लिये उत्पादन है।

[5]

सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत किस आयु वर्ग के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है?

A) 07 से 16 वर्ष
B) 06 से 12 वर्ष
C) 06 से 14 वर्ष
D) 05 से 18 वर्ष

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः वर्ष 2000-01 में घोषित तथा वर्ष 2001-02 में शुरू किये  गए ‘सर्व शिक्षा अभियान’ का उद्देश्य 06 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी स्कूली बच्चों को वर्ष 2010 तक प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना था।

[6]

सरकार द्वारा ‘सेतु-पाठ्यक्रम’ एवं ‘स्कूल लौटो शिविर’ कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य थाः

A) अनपढ़ वयस्कों को शिक्षित करना।
B) प्राथमिक शिक्षा में बच्चों का नामांकन बढ़ाना।
C) बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
D) शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करना।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः प्राथमिक शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के लिये सरकार द्वारा ‘सेतु-पाठ्यक्रम’ और ‘स्कूल लौटो शिविर’ कार्यक्रमों का प्रारंभ किया गया, जिनका उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा में बच्चों का नामांकन बढ़ाना था।

[7]

शिशु मृत्यु-दर से अभिप्राय किस वर्ष से कम शिशु की मृत्यु से है?

A) 1 वर्ष से कम
B) 2 वर्ष से कम
C) 5 वर्ष से कम
D) 1 से 2 वर्ष के बीच

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः शिशु मृत्यु-दर से अभिप्राय एक वर्ष से कम आयु के शिशु-मृत्यु से है।
जन्म दर से अभिप्राय एक विशेष अवधि में प्रति एक हज़ार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या से है।

[8]

नीचे दिये गए कथनों में से कौन-सा कथन बेरोज़गारी को सही तरीके से परिभाषित करता है?

A) जब प्रचलित मज़दूरी की दर से कम मज़दूरी पर लोग काम करते हैं।
B) जब प्रचलित मज़दूरी की दर पर काम करने के इच्छुक व्यक्ति को रोज़गार नहीं मिलता।
C) जब व्यक्ति को अपनी रुचि के मुताबिक काम नहीं मिलता।
D) जब डिग्री धारक व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुरूप कार्य एवं वेतन नहीं मिलता।

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः बेरोज़गारी उस स्थिति को कहते हैं, जब प्रचलित मज़दूरी की दर पर काम करने के लिये इच्छुक लोगों को रोज़गार प्राप्त नहीं होता।

[9]

श्रम बल जनसंख्या में किस आयु वर्ग के लोग शामिल किये जाते हैं?

A) 15 से 59 वर्ष
B) 18 से 60 वर्ष
C) 21 से 60 वर्ष
D) 18 से 59 वर्ष

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः श्रम बल जनसंख्या में वे लोग शामिल किये जाते हैं, जिनकी उम्र 15 वर्ष से 59 वर्ष के बीच है।

[10]

‘प्रच्छन्न बेरोज़गारी’ का सामान्यतः अर्थ होता है-

A) गृहणियों में बेरोज़गारी।
B) 60 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों में बेरोज़गारी।
C) जिस कार्य को कम व्यक्ति कर सकते हैं, उसको अधिक व्यक्तियों द्वारा करना तथा उत्पादकता में कोई वृद्धि ना होना।
D) जब लोग बड़ी मात्रा में बेरोज़गार रहते हैं।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः प्रच्छन्न बेरोज़गारी के अंतर्गत लोग नियोजित (काम करते हुए) प्रतीत होते हैं। किन्तु उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है। ऐसा प्रायः कृषिगत काम में लगे परिजनों में होता है। किसी काम में पाँच लोगों की आवश्यकता होती है, लेकिन उसमें आठ लोग लगे होते हैं। इसमें तीन लोग अतिरिक्त हैं। इन तीन लोगों के द्वारा किया गया अंशदान पाँच लोगों द्वारा किये गए योगदान में कोई बढ़ोतरी नहीं करता है। अगर तीन लोगों को हटा दिया जाए तो खेत की उत्पादकता में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतः तीन लोग प्रच्छन्न रूप से नियोजित हैं।

[11]

भारत में प्रच्छन्न बेरोज़गारी पाई जाती है-

A) कृषि क्षेत्र में
B) सेवा क्षेत्र में
C) औद्योगिक क्षेत्र में
D) व्यापार क्षेत्र में

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत में प्रच्छन्न बेरोज़गारी कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।

[12]

मौसमी बेरोज़गारी से तात्पर्य हैः

A) जब उच्च डिग्री धारक को रोज़गार नहीं मिलता है।
B) जब किसी खास फसली मौसम में ही रोज़गार मिलता है।
C) जब वर्ष के कुछ महीनों में रोज़गार प्राप्त नहीं होता है।
D) जब वैकल्पिक रोज़गार उपलब्ध नहीं है।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः मौसमी बेरोज़गारी का तात्पर्य है कि जब लोग वर्ष के कुछ महीनों में रोज़गार प्राप्त नहीं कर पाते हैं। कृषि पर आश्रित लोग आमतौर पर इस तरह की समस्या से जूझते हैं। वर्ष में कुछ व्यस्त मौसम होते हैं जब जोताई, बुआई, कटाई, गहाई होती है। कुछ विशेष महीनों में कृषि पर आश्रित लोगों को अधिक काम नहीं मिल पाता।

[13]

नीचे दिये गए कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ियेः
1. अर्थव्यवस्था के समग्र विकास पर बेरोज़गारी का अहितकर प्रभाव पड़ता है।
2. किसी अर्थव्यवस्था के बेरोज़गारी में वृद्धि मंदीग्रस्त अर्थव्यवस्था का सूचक है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः बेरोज़गारी से जनशक्ति संसाधन की बर्बादी होती है। जो लोग अर्थव्यवस्था के लिये परिसंपत्ति होते हैं, बेरोज़गारी के कारण दायित्व में बदल जाते हैं। बेरोज़गारी से आर्थिक बोझ में वृद्धि होती है। कार्यरत जनसंख्या पर बेरोज़गारी की निर्भरता बढ़ती है। किसी व्यक्ति और साथ-ही-साथ समाज के जीवन की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।

3.निर्धनता : एक चुनौती (8 प्रश्न)

[1]

भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण के लिये स्वीकृत कैलोरी आवश्यकता ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन कितनी है?

A) 2400 कैलोरी तथा 2100 कैलोरी
B) 2100 कैलोरी तथा 2400 कैलोरी
C) 2000 कैलोरी तथा 1500 कैलोरी
D) 1500 कैलोरी तथा 2000 कैलोरी

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः भारत में गरीबी निर्धारण में स्वीकृत कैलोरी आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन एवं नगरीय क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है।
गरीबी निर्धारण का यह फार्मूला भारत में पहली बार वर्ष 1979 में वाई. के. अलघ की अध्यक्षता में बनी समिति के द्वारा तय किया गया था।

[2]

भारत में निर्धनता रेखा का आकलन किसके द्वारा किया जाता है?

A) नीति आयोग
B) राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एन.एस.एस.ओ.)
C) वित्त मंत्रालय
D) राष्ट्रीय विकास परिषद

 

उत्तरः (b)
व्याख्याः भारत में निर्धनता रेखा का आकलन समय-समय पर (सामान्यतः हर पाँच वर्ष पर) प्रतिदर्श सर्वेक्षण के माध्यम से किया जाता है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन अर्थात् नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइज़ेशन (एन.एस.एस.ओ.) द्वारा कराए जाते हैं।

[3]

विश्व बैंक के द्वारा समूचे विश्व की निर्धनता रेखा के निर्धारण के लिये समान मानक तय किये गए हैं। इन मानकों के अनुसार किसे निर्धनता रेखा के नीचे माना जाता है?

A) जिन व्यक्तियों की आय 5 डॉलर प्रतिदिन से कम है।
B) जिन व्यक्तियों की आय 2 डॉलर प्रतिदिन से कम है।
C) जिन व्यक्तियों की आय 1 डॉलर प्रतिदिन से कम है।
D) जिन व्यक्तियों की आय 20 डॉलर प्रति माह से कम है।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः 
विश्व बैंक के द्वारा समूचे विश्व की निर्धनता रेखा के निर्धारण के लिये समान मानक तय किये गए हैं।    इन मानकों के अनुसार जिन व्यक्तियों की आय 1 डॉलर प्रतिदिन से कम है उन्हें निर्धनता रेखा के नीचे माना जाता है।

[4]

नीचे दिये गए भारत के विभिन्न सामाजिक समूहों एवं आर्थिक समूहों में सबसे अधिक निर्धनता अनुपात किसमें पाया जाता है?

A) अनुसूचित जनजाति
B) ग्रामीण खेतिहर मज़दूर
C) अनुसूचित जाति
D) नगरीय अनियमित मज़दूर

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः निर्धनता रेखा से नीचे के लोगों का अनुपात भी भारत में सभी सामाजिक समूहों और आर्थिक वर्गों में भी एक-समान नहीं है। अनुसूचित जनजातियों के 100 में से 51 लोग अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्रों में 50 प्रतिशत अनियमित मज़दूर निर्धनता रेखा के नीचे हैं।

[5]

राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम 2005 के संदर्भ में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः
1. यह विधेयक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के सुनिश्चित रोज़गार का प्रावधान करता है।
2. इसमें प्रस्तावित रोज़गारों का एक-तिहाई महिलाओं के लिये आरक्षित है।
3. इस कार्यक्रम के अंतर्गत अगर आवेदक को 30 दिन के अंदर रोज़गार उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह दैनिक रोज़गार भत्ते का हकदार होगा।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 3
C) 1 और 2
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम सितंबर 2005 को पारित किया गया। यह विधेयक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के सुनिश्चित रोज़गार का प्रावधान करता है। प्रस्तावित रोज़गारों का एक-तिहाई रोज़गार महिलाओं के लिये आरक्षित है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अगर आवेदक को 15 दिन के अंदर  रोज़गार उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह दैनिक रोज़गार भत्ते का हकदार होगा।

[6]

प्रधानमंत्री रोज़गार योजना से संबंधित नीचे दिये गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इस योजना को 1993 में आरंभ किया गया।
2. इस योजना में ग्रामीण एवं छोटे शहरों के शिक्षित बेरोज़गार युवाओं को शामिल किया गया।

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः प्रधानमंत्री रोज़गार योजना को 1993 में प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोज़गार युवाओं के लिये स्वरोज़गार के अवसर सृजित करना है। इसके अंतर्गत युवाओं को लघु व्यवसाय और उद्योग स्थापित करने में सहायता दी जाती है।

[7]

प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना के अंतर्गत कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
1. प्राथमिक स्वास्थ्य
2. प्राथमिक शिक्षा
3. ग्रामीण पेयजल
4. ग्रामीण विद्युतीकरण
5. ग्रामीण आवास

A) 1, 2 और 3
B) 1, 3, और 4
C) 1, 2, 4 और 5
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (2000 से प्रारंभ) के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आवास, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिये राज्यों को अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

[8]

राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘काम के बदले अनाज’ को किस वर्ष शुरू किया गया?

A) 2002
B) 2006
C) 2004
D) 1999

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘काम के बदले अनाज’ को 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया था। यह कार्यक्रम उन सभी ग्रामीण निर्धनों के लिये है, जिन्हें मज़दूरी पर रोज़गार की आवश्यकता है और जो अकुशल शरीरिक काम करने के इच्छुक हैं। यह पूर्णतः केन्द्र द्वारा पोषित कार्यक्रम है।

हितकर प्रभाव पड़ता है। बेरोज़गारी में वृद्धि मंदीग्रस्त अर्थव्यवस्था का सूचक है

4.भारत में खाद्य सुरक्षा (4 प्रश्न)

[1]

नीचे दिये गए कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. बफर स्टॉक भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज, गेहूँ और चावल का भंडार है।
2. ‘न्यूनतम समर्थन कीमत’ के अंतर्गत सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसल के लिये पहले से ही घोषित कीमतें दी जाती हैं।

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर दिये दोनों कथन सत्य है।

[2]

निर्गम कीमत (Issue Price) का अभिप्राय हैः

A) समाज के गरीब तबकों को बाज़ार कीमत से कम कीमत पर अनाज का वितरण करना।
B) समाज के गरीब तबकों को बाज़ार कीमत पर अनाज का वितरण करना।
C) समाज के सभी लोगों को बाज़ार कीमत से कम कीमत पर अनाज का वितरण करना।
D) समाज के समृद्ध लोगों को बाज़ार कीमत से कम कीमत पर अनाज का वितरण करना।

 

उत्तरः (a)
व्याख्याः सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से अनाज, गेहूँ एवं चावल का भंडारण करती है, जिसे बफर स्टॉक भी कहा जाता है। सरकार ऐसा इसलिये करती है ताकि अनाज कमी वाले क्षेत्रों में और समाज के गरीब वर्गों में बाज़ार कीमत से कम कीमत पर अनाज का वितरण किया जा सके। इस कीमत को ‘निर्गत कीमत’ भी कहते हैं।

[3]

राशन कार्ड के संदर्भ में नीचे दिये गए युग्मों में कौन- सा/से सही सुमेलित है/हैं?

1. अंत्योदय कार्ड लोगों के लिये – निर्धन में भी निर्धन
2. बीपीएल कार्ड के लोगों के लिये – गरीबी रेखा से नीचे
3. एपीएल कार्ड – अन्य लोगों के लिये।

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

 

उत्तरः (d)
व्याख्याः राशन कार्ड तीन प्रकार के होते हैं :
1. निर्धनों में भी निर्धन लोगों के लिये अंत्योदय कार्ड।
2. गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिये बीपीएल कार्ड।
3. अन्य लोगों के लिये एपीएल कार्ड।

 

[4]

भारत सरकार के द्वारा खाद्य सुरक्षा के संबंध में शुरू की गईं विभिन्न योजनाएँ एवं उनके लक्षित समूहों के संदर्भ में कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

योजना लक्षित समूह
1. सार्वजनिक वितरण सर्वजनीन (सबके लिये)
2. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली निर्धनों में सबसे निर्धन और गैर-निर्धन
3. अंत्योदय अन्न योजना निर्धनों में सबसे निर्धन
4. अन्नपूर्णा योजना पिछड़े ब्लाक

कूटः

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1, 2 और 3
D) उपरोक्त सभी।

 

उत्तरः (c)
व्याख्याः कथन 1, 2 एवं 3 सही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भारत सरकार का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कदम है। प्रारंभ में यह प्रणाली सबके लिये थी। निर्धनों और गैर-निर्धनों के बीच कोई भेद नहीं किया जाता था। बाद के वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक लक्षित बनाने के लिये संशोधित किया गया। 1992 में देश के 1700 ब्लाकों में संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (आर पी डी एस) शुरू की गई। इसका लक्ष्य दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से लाभ पहुँचाना था। जून 1997 में सभी क्षेत्रों में गरीबों को लक्षित करने के सिद्धांत को अपनाने के लिये लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टी. पी. डी. एस.) प्रारंभ की गई। यह पहला मौका था जब निर्धनों और गैर-निर्धनों के लिये विभेदक कीमत नीति अपनाई गई।
इसके अलावा 2000 में शुरू की गई ‘अंत्योदय अन्न योजना’ जो गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब तथा ‘अन्नपूर्णा योजना’ जो कि दीन वरिष्ठ नागरिक समूहों को लक्षित करते हुए बनाई गई थी