Nishant Jain निशान्त जैन,2014 हिंदी माध्यम IAS TOPPER ||उनका STUDY से सम्बंधित लेख

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नमस्कार दोस्तों!!!

उम्मीद है आप हमेशा की तरह व्यस्त और मस्त होंगे।बहुत दिनों बाद संवाद (यह सम्वाद अपेक्षाकृत लम्बा है) हो रहा है आपसे।
आपमें से बहुत से दोस्तों ने कई बार मुझसे मेसेंजर और कमेंट आदि के माध्यम से पूछा है कि हिंदी माध्यम के लिए सर्वश्रेष्ठ कोचिंग कौन सी है?
इस सवाल का जवाब एक शब्द या वाक्य में दिया जाना सम्भव नहीं है। फिर भी मैं कोशिश करूँगा। उससे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि मैं दिल्ली मुखर्जीनगर या राजेंद्रनगर या पूरे देश के किसी भी कोचिंग संस्थान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ नहीं हूँ।

अब हम इस प्रासंगिक से सवाल पर लौटते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की जाए या नहीं और यदि कोचिंग जॉइन करें तो आख़िर कौन सी?

दोस्तों, व्यक्तिगत तौर मेरी सबसे पहली सलाह यह होगी की आपने जो भी वैकल्पिक विषय चुना है, उसमें कोई बेहतर मार्गदर्शन मिल जाए, तो इससे अच्छा कुछ नहीं। विशेष रूप से तब, जब आपने अपने शैक्षिक बैकग्राउंड से अलग कोई विषय चुना हो।
दरअसल UPSC में आप जो भी वैकल्पिक विषय चुनते हैं, उसमें अच्छा स्कोर प्राप्त करने के लिए विषय पर अच्छी समझ और पकड़ की दरकार होती है। लिहाज़ा अगर आपको उस वैकल्पिक विषय में कोई अच्छे शिक्षक (कोचिंग संस्थान या कॉलेज/यूनिवर्सिटी कहीं भी), तो बेझिझक उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करें। साथ ही उस विषय के पिछले वर्षों (आम तौर पर पिछले पाँच वर्ष) के प्रश्नपत्रों का क़ायदे से अध्ययन करें। अपने अध्ययन और लेखन कौशल पर फ़ीड्बैक प्राप्त करने के लिए टेस्ट सिरीज़ जॉइन करना भी आम तौर पर फ़ायदेमंद होता है।

अब आती है सामान्य अध्ययन या निबंध की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान में प्रवेश लेने की बात।
इस सम्बंध में एक बात जो मैं हमेशा से कहता रहा हूँ और मैंने अपनी पुस्तक ‘मुझे बनना है UPSC टॉपर’ में भी इसका ज़िक्र किया है, वह यह है कि सिविल सेवा परीक्षा में अच्छा स्कोर लाने के लिए कोचिंग करना क़तई अनिवार्य नहीं है। यह बात अपने चेतन और अवचेतन मन से निकाल दें कि बग़ैर कोचिंग के आप सिविल सेवा के अधिकारी नहीं बन पाएँगे। ऐसे एक नहीं, ढेरों उदाहरण हैं, जिन अभ्यर्थियों ने बग़ैर कोचिंग किए UPSC में शानदार सफलताएँ दर्ज कीं।
वैसे भी 2013 के बाद का नया पैटर्न इतना समावेशी (inclusive) और गत्यात्मक (dyanamic) क़िस्म का है कि इसमें कोई भी संस्था या शिक्षक आपको सटीक ज्ञान परोसने या स्पून फ़ीडिंग करने में समर्थ नहीं हो सकता।

सूचना क्रांति के इस दौर में, मुद्रित सामग्री (प्रामाणिक किताबों और पत्र-पत्रिकाओं) के अलावा ग़ैर-मुद्रित सामग्री (वेबसाइटें, यूट्यूब चैनल, ब्लॉग आदि) प्रचुर मात्रा/संख्या में उपलब्ध हैं। बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आप सूचना के विस्फोट के इस युग में इंटरनेट पर टहलते हुए भ्रमित या कनफ़्यूज ना हो जाएँ कि कौन सी वेबसाइट/video देखूँ और कौन सा नहीं? इंटरनेट का प्रयोग करते वक़्त विचलन की सम्भावनाएँ भी अब अधिक हैं क्योंकि अब इंटरनेट पर UPSC परीक्षा से सम्बंधित बेशुमार सामग्री उपलब्ध है। अगर आप यहाँ भी स्मार्ट तरीक़े सी अच्छी और प्रामाणिक (authentic) सामग्री की पहचान कर पाएँ, तो आधी जंग आपने जीत ली।

जिस तरह बाज़ार में उपलब्ध अनगिनत प्रकाशकों की उपलब्ध किताबों और पत्रिकाओं में उत्कृष्ट सामग्री छाँटना ज़रूरी है, वैसे ही इंटरनेट पर भी यह मेहनत करनी ज़रूरी है। ऐसा न हो कि आप आभासी (virtual) दुनिया की चकाचौंध भारी आकाशगंगा में कहीं खो जाएँ और हर किसी video को देखना शुरू कर दें।

मुझे याद है, कि आज से चार-पाँच साल पहले तक मुद्रित और ग़ैर-मुद्रित सामग्री में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए ज़्यादा विकल्प उपलब्ध नहीं थे। पर अब बाज़ार आपकी माँग के अनुरूप सजग हो गया है।
आज जाने-माने प्रकाशकों की प्रामाणिक पुस्तकों के अच्छे हिंदी अनुवाद भी बाज़ार में उपलब्ध हैं। यही नहीं, इंटरनेट पर भी हिंदी में बेहतर सामग्री उपलब्ध हुई है।
NCERT, NBT, IGNOU, प्रकाशन विभाग आदि सरकारी प्रकाशक़ों की अधिकांश किताबें हिंदी में अब उपलब्ध हैं।

इसीलिए यह अपने मनोमस्तिष्क में स्पष्ट तौर पर बैठा लें, कि कोचिंग लेना या न लेना आपकी निजी चॉइस है। ऐसे भी अनेक सफल अभ्यर्थी हैं, जो कोचिंग संस्थान या किसी शिक्षक विशेष को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। इसमें किसी को भी कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। किसी भी अच्छे और अपने शैक्षिक पेशे के प्रति ईमानदार कोचिंग संस्थान का काम है, UPSC के विशाल पाठ्यक्रम पर फैली सामग्री को समेटकर सरलीकृत रूप में अभ्यर्थियों के लिए प्रस्तुत करना और उचित मार्गदर्शन प्रदान करना।
आप भले ही कोचिंग संस्था में प्रवेश लें या न लें; मेरी आपको यह व्यक्तिगत सलाह होगी कि अपनी तार्किक और वैज्ञानिक मनोवृत्ति का इस्तेमाल करना न छोड़ें। कक्षाओं में ज्ञान प्राप्त करें और साथ ही अपने आँख-कान भी खुले रखें। अनुकरण करें, पर अंधानुकरण नहीं। यदि आपकी कोचिंग के बाहर कहीं कोई अच्छे नोट्स या सामग्री मिले, तो उसे पढ़ने में भला क्या समस्या हो सकती है।

मैं यह भी हमेशा से कहता आया हूँ कि अध्ययन सामग्री (किताब, पत्र-पत्रिका, नोट्स, वेबसाइट, video आदि) को फैलाएँ नहीं, बल्कि समेटें। किसी एक टॉपिक/विषय को एक स्त्रोत से पढ़ना ही बेहतर है। क्योंकि आप सिविल सेवा अभ्यर्थी हैं, शोधार्थी (research scholar) नहीं। यदि अभी आपने एक टॉपिक को कई स्त्रोतों से पढ़ा, तो बाद में revision करते वक़्त आपको जूझना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर राजव्यवस्था (polity) हेतु एम.लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप और डीडी बसु; तीनों किताबें पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। (It is better to read one book for ten times than to read ten books for one time).

सामान्य अध्ययन के जिन हिस्सों (segments) में आपको समस्या है, उनमें मार्गदर्शन प्राप्त करना एक बेहतर विकल्प है। पर स्वाध्याय (self study) और रिवीज़न का न तो कोई विकल्प कभी था और न ही अब है।
संक्षेप में कहूँ तो, न तो कोचिंग संस्थान में प्रवेश लेने से सफलता सुनिश्चित की जा सकती है, और न ही, कोचिंग संस्थान में प्रवेश लिए बग़ैर तैयारी करने पर असफलता की भविष्यवाणी की जा सकती है। हमारे बीच दोनों ही श्रेणियों के सफल अभ्यर्थी मौजूद हैं।
कोचिंग संस्थान या किसी शिक्षक के इन्पुट्स या क्लास लेने में कोई समस्या नहीं है, बस अपनी मेहनत और तार्किक चिंतन (logical thought) पर विश्वास रखें और श्रेष्ठ विचारों को चारों ओर से आने दें। (आ नो भद्रा, क्रतवो यंतु विश्वतः -ऋग्वेद)

नोट-
आपमें से ज़्यादातर दोस्तों ने बहुत मन से मेरी किताब पढ़ी है। बाक़ी साथी अगर चाहें तो मेरी पुस्तक ‘मुझे बनना है UPSC टॉपरयाAll about UPSC Civil Services Exam पढ़कर अपनी अधिकांश जिज्ञासाओं को शांत कर सकते हैं। दोनों किताबें Amazon पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

 

शुभकामनाएँ…
—निशान्त