UPSC DAILY CURRENT 01-05-2018

भारतीय पाक कला संस्थान के नोएडा परिसर का उद्घाटन

ICI

पाक कला में पाठ्यक्रमों को शुरू करने के लिये पर्यटन राज्य मंत्रालय द्वारा भारतीय पाक कला संस्थान (Indian Culinary Institute – ICI) के नोएडा परिसर का उद्घाटन किया गया। यह संस्थान आतिथ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ कुशल मानव शक्ति बनाने तथा पाक कला में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन के संकल्प के अनुरूप है।

  • विश्व के जाने-माने रसोइयों के निर्देशन और सुझावों के अनुरूप इस संस्थान की परिकल्पना की गई है और आशा है कि यह संस्थान विश्व के श्रेष्ठ संस्थान के रूप में उभरेगा।
  • यह संस्थान अपने किस्म का पहला संस्थान है और यह राष्ट्र का गौरव साबित होगा।
  • विश्व स्तरीय संस्थान के विचार में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों, जाने-माने रसोइयों तथा अधिकारियों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने में पाक कला महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है और यह संस्थान पाक कला में प्रलेखन तथा अनुसंधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • आईसीआई पाक कला में डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाता है। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम जुलाई से शुरू होने वाले अकादमिक वर्ष से प्रारंभ होंगे।
  • आईसीआई के नोएडा परिसर में आधुनिक भारतीय पाक कला संग्रहालय होगा, जिसमें समृद्ध ऐतिहासिक और विविध पाक कला प्रयोजन तथा अन्य साहित्य दिखाए जाएंगे।
  • आईसीआई नोएडा परिसर और भवन 2,31,308 वर्ग फीट क्षेत्र में बनाया गया है। विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ इसको बनाने मे दो वर्ष का समय लगा है।
बार-बार रीसाइकल हो सकने वाला अनोखा प्लास्टिक

Plastics

वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसा प्लास्टिक तैयार किया गया है जिसे आप जितनी बार चाहें उतनी बार रीसाइकिल कर सकते हैं। इसके लिये किसी हानिकारक रसायन की भी ज़रूरत नहीं है। इससे सालों तक ज़मीन और समुद्र में पड़े रहकर पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्लास्टिक का निपटारा करने में आसानी होगी।

  • अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा प्लास्टिक की तरह हल्के, मज़बूत, टिकाऊ और तापमान प्रतिरोधी पॉलीमर की खोज की गई है।
  • इससे बनाए गए प्लास्टिक को जितनी बार चाहें उतनी बार इसके वास्तविक अणु की अवस्था में बदलकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पॉलीमर का प्रयोग प्लास्टिक, फाइबर, रबर, कोटिंग और अन्य व्यावसायिक उत्पाद बनाने में किया जाता है।
  • पुरानी पीढ़ी के पॉलीमर प्लास्टिक से काफी मुलायम होते थे और तापमान के प्रति उनकी प्रतिरोधी क्षमता भी कम होती थी। लेकिन नई पीढ़ी का यह पॉलीमर इससे काफी अलग है।
  • कमरे के तापमान पर और बहुत थोड़ी मात्रा में कैटेलिस्ट (उत्प्रेरक) का प्रयोग कर ही इससे प्लास्टिक बनाया जा सकता है।
  • इससे ग्रीन प्लास्टिक यानी पर्यावरण के लिये सुरक्षित प्लास्टिक के निर्माण के रास्ते खुल जाएंगे। सालों तक ज़मीन और समुद्र में पड़े रहे प्लास्टिक को आसानी से डी-पॉलीमराइज़ कर रीसाइकिल किया जा सकेगा। पेट्रोलियम से बने प्लास्टिक से यह संभव नहीं था।
  • फिलहाल इसे केवल लैब में तैयार किया गया है। बड़े पैमाने पर इसके उत्पादन के लिये अभी और शोध किया जाना शेष है।
‘भू-परीक्षक’ से 40 सेकेंड में मिट्टी की जाँच

Soil-check

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआइडीसी) की वित्तीय सहायता से किसानों की सहायता हेतु एक डिजिटल यंत्र तैयार किया है। किसानों की सबसे बड़ी समस्या उर्वरक चयन को लेकर होती है। यही कारण है की वह दुकानदारों की सलाह पर इसका चयन करते हैं। कई बार यह फैसला गलत साबित हो जाता है, जिसका खामियाजा कम उपज, मृदा की उर्वरा क्षमता में कमी के रूप में सामने आता है।

  • कृषि विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों में पुराने ढर्रे पर ही मिटटी की जाँच की जाती है और इस जाँच की रिपोर्ट्स के लिये किसानों को लंबे समय तक इंतज़ार करना पड़ता है।
  • परंतु, अब इस यंत्र के बनने के बाद किसान खेत में ही मिट्टी की जाँच कर यह पता लगा सकेंगे कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्त्वों की कमी हो रही है, ऐसा कर यह जानना आसान हो जाएगा कि किस प्रकार के उर्वरकों का चयन किया जाना चाहिये।
  • इस यंत्र की सहायता से एक हेक्टेयर खेत की जाँच करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है।
  • इसके लिये 10 ग्राम मिट्टी को 100 ग्राम पानी में घोला जाता है। उसे फिर छलनी की सहायता से छानकर दूसरे गिलास में रख लिया जाता है। यंत्र के एक सिरे को गिलास के अंदर डाला जाता है, जबकि दूसरे छोर पर मोबाइल को संबद्ध किया जाता है। करीब 40 सेकेंड के अंदर मोबाइल स्क्रीन पर मिट्टी की गुणवत्ता की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है।
एडॉप्ट ए हेरिटेज के तहत लाल किला एवं गंदिकोटा किला को लिया गया गोद

Adopt-a-Heritage

कॉर्पोरेट समूह डालमिया भारत ने ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ (Adopt a Heritage) योजना के तहत दिल्ली स्थित लाल किला तथा आंध्र प्रदेश के कदपा ज़िला स्थित गंदिकोटा किला को गोद लिया है।

  • इस योजना के तहत अगले पाँच साल तक डालमिया भारत इन विरासत स्थलों में बुनियादी एवं आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ-साथ इनके संचालन तथा रख-रखाव की ज़िम्मेदारी भी निभाएगा।
  • इस समझौते के तहत डालिमया भारत छह महीने के भीतर लाल किला में ज़रूरी सुविधाएँ जैसे- एप बेस्ड गाइड, डिजिटल स्क्रिनिंग, फ्री वाईफाई, डिजिटल इंटरैक्टिव कियोस्क, पानी की सुविधा, टेक्टाइल मैप, रास्तों पर लाइटिंग, बैटरी से चलने वाले वाहन, चार्जिंग स्टेशन, सर्विलांस सिस्टम, आदि उपलब्ध कराएगा।
  • पर्यटन मंत्रालय द्वारा विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर 27 सितंबर, 2017 को ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ की शुरुआत की गई थी।
  • यह भारतीय पर्यटन मंत्रालय, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग तथा राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के मध्य पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु शुरू की गई एक सहयोगी योजना है।
  • इसमें हमारे धनी और विविध विरासत स्मारकों को पर्यटन मैत्री बनाने की क्षमता है।
  • यह योजना भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के प्रमुख स्मारकों में शुरू की गई है, जिसके तहत अभी तक देश के 95 स्मारकों को शामिल किया जा चुका है।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.

 

नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण हेतु ड्राफ्ट मिशन

 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन। 
(खंड-09 : बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।)
(खंड-8: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इसका प्रभाव।)

Renewable Energy

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने भारत के लिये राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन के निर्माण हेतु एक मसौदा तैयार किया है। MNRE द्वारा स्थापित समिति ने मंत्रालय के पास अपनी सिफारिशें जमा करा दी हैं और जिसे कुछ महीनों के लिये सार्वजनिक सुझावों/टिप्पणियों हेतु खुला रखा जाएगा।

ड्राफ्ट संबंधित प्रमुख बिंदु

  • समिति अनुसार, भारत में ग्रिड से जुड़े ऊर्जा भंडारण को शुरू करने, एक विनियामक ढाँचा स्थापित करने और बैटरियों के स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिये राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन का मसौदा तैयार करने की उम्मीद जताई गई है।
 राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन

  • राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन (National Solar Mission)  का उद्देश्‍य फॉसिल आधारित ऊर्जा विकल्‍पों के साथ सौर ऊर्जा को प्रतिस्‍पर्धी बनाने के अंतिम उद्देश्‍य सहित बिजली उत्पादन एवं अन्‍य उपयोगों के लिये सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्‍य दीर्घकालिक नीति, बड़े स्‍तर पर परिनियोजन लक्ष्‍यों, महत्त्‍वाकांक्षी अनुसंधान एवं विकास तथा महत्त्वपूर्ण कच्‍चे माल, अवयवों तथा उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादन के माध्‍यम से देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत को कम करना है।
  • इसका परिणाम यह है कि फॉसिल ईंधन आधारित सृजन की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा निरंतर लागत प्रतिस्पर्द्धी बनती जा रही है।

♦ लक्ष्य: भारत सरकार ने 2022 के अंत तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है।
♦ इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से तथा 5 गीगावाट लघु पनबिजली से प्राप्त किया जाना शामिल है।

  •  राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन का मसौदा अगले पाँच वर्षों में ग्रिड से जुड़े भंडारण को15-20 गीगावाट घंटे (जीडब्ल्यूएच) का “यथार्थवादी लक्ष्य” निर्धारित करता है।
  • हालाँकि, पावर ग्रिड द्वारा वर्तमान में भंडारण विकल्पों का उपयोग नहीं किया जा रहा है, जो कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को आसानी से एकीकृत करने में मदद करते हैं ।
  • राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन सात लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा जिनमें स्वदेशी विनिर्माण; प्रौद्योगिकी और लागत के रुझान का मूल्यांकन; एक नीति और नियामक ढाँचा; व्यापार मॉडल और बाज़ार निर्माण के लिये वित्त पोषण; अनुसंधान और विकास; मानकों का निर्धारण तथा परीक्षण; ऊर्जा भंडारण के लिये ग्रिड योजना शामिल हैं।

energy

नवीकरणीय ऊर्जा के संग्रहण की समस्या

  • भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता में लगभग पाँचवां हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत का हैं।
  • हालाँकि, यदि पावर ग्रिड सौर और पवन ऊर्जा की उत्पादन की क्षमता में वृद्धि भी करते हैं, तब भी नवीकरणीय स्रोतों की सर्वोच्च आपूर्ति हमेशा सर्वोच्च मांग को पूरा नहीं करती है।
  • गौरतलब है कि अक्षय ऊर्जा स्वाभाविक रूप से अस्थायी स्रोत है, अतः इसके साथ एक समस्या अनुचित समय पर किये जाने वाले उर्जा संग्रहण की भी है।
  • सौर ऊर्जा उत्पादन दोपहर में अपने चरम पर होता है, लेकिन जब उसे सही समय पर संगृहीत नहीं किया जाएगा, तो रात में घरों को प्रकाश उपलब्ध नहीं होगा।
  • इसी प्रकार ऐसा दिन जब हवा नहीं बहती या आकाश में बादल छाए रहेंगे तब भी संग्रहण में समस्याएँ होंगी।
  • इसके साथ ही संबंधित निविदाओं के रद्द होने की घटनाएँ सामने आई हैं, वर्ष 2017 में SECI के साथ-साथ NTPC और NLC ने ग्रिड स्टोरेज के लिये कम से कम नौ निविदाएं रद्द कर दी थीं।
  • अतः इस प्रकार की घटनाएँ वैश्विक और भारतीय स्तर पर कंपनियों के निर्माताओं को नकारात्मक संकेत भेजती है जो लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण में विविधता लाने की तलाश में हैं।
  • वर्तमान में, बैटरी भंडारण के लिये आवश्यक लिथियम आयन कोशिकाओं (ion cells) का निर्माण भारत में नहीं किया जाता है।
  • बैटरियाँ वर्तमान अधिशेष ऊर्जा को स्टोर करने में मदद कर सकती हैं।
  • इसके लिये नवीनीकरण और बेसलोड लोड थर्मल क्षमता (बेस लोड न्यूनतम 24 घंटे की अवधि में बिजली की मांग की आवश्यकता है, भार को बिजली के घटकों की प्रकृति के आधार पर बेस लोड और पीक लोड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।) के बीच ऊर्जा स्थानांतरण करते समय ग्रिड को स्थिर रखने की तत्काल आवश्यकता होती है।

स्रोत: द हिंदू