UPSC DAILY CURRENT 02-05-2018

ओमान की चट्टानों में कार्बन खनिजीकरण (carbon mineralization)

carbon-mineralization

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ओमान की चट्टानों में कार्बन खनिजीकरण(carbon mineralization) की प्रक्रिया तीव्र गति से हो रही है जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार हो सकती है।

  • अरब प्रायद्वीप चट्टानों में स्थित ओमान की शुष्क विशाल चट्टानें  प्राकृतिक रूप से वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और इसे पत्थर में बदलते हैं।
  • इस प्राकृतिक प्रक्रिया को कार्बन खनिजीकरण कहा जाता है।
  • कार्बोनेट से घिरे कंकड़ और कोयले के टुकड़े सामान्य बजरी को प्राकृतिक मोज़ेक में बदल रहे हैं।
  • कार्बन कैप्चरिंग फॉर्मेशन में पेरिडोटाइट नामक चट्टान मुख्य रूप से शामिल होता है जो समुद्री सागर से जुड़े टुकड़े होते हैं।
  • उत्तरी कैलिफ़ोर्निया, पापुआ न्यू गिनी और अल्बानिया में अन्य स्थानों पर भी पेरिडोटाइट की इसी प्रकार की छोटी मात्रा पाई जाती है।
पश्चिमी घाट में सोनरीला (Sonerila) पादप की खोज

Sonerila

हाल ही में पश्चिमी घाट में विभिन्न प्रजातियों के पौधों की खोज की गई है।

  • छह प्रजातियों में दो झाड़ियाँ, दो ब्लोसम मिंट परिवार (लैमियासी) से, जबकि एक जड़ी बूटी कॉफ़ी परिवार (रूबियासी) से संबंधित है और एक फूल पौधा सोनरीला (10 सेमी लंबा) की खोज की गई है।
  • कोझिकोड इस नई ब्लोसम सोनरिलस प्रजाति का घर है जहाँ यह कक्कयम के सदाबहार जंगल में गीली, चट्टानी सतहों से पाई गई है।
  • इस  पुष्पीय पौधे की प्रजाति आमतौर पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • कुछ सोनरिलस को सजावटी पौधों के रूप में भी जाना जाता है।
  • सोनरीला लेटरिटिका (Sonerila lateritica) चट्टानों में उगने वाली जंगली जड़ी-बूटी है जिसे  केरल के कोझिकोड ज़िले के पोंकुनु की पार्श्व पहाड़ियों में खोजा गया है।
स्पेसक्राफ्ट इनसाइट 

Spacrucet-Insight

हाल ही में अमेरिका के पश्चिमी तट से नासा पहला स्पेसक्राफ्ट इनसाइट लॉन्च करेगी।

  • स्पेसक्राफ्ट इनसाइट को कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग वायुसैनिक अड्डे के कॉम्लेक्स-3 नामक स्पेसलॉन्च से छोड़ा जाएगा।
  • इस स्पेसक्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य मंगल पर भूकंप और ताप की जाँच करना है, अर्थात् यह मंगल की गहन आतंरिक संरचना का अध्ययन करेगा।
  • यह स्पेसक्राफ्ट किसी अन्य ग्रह पर भूकंप को मापने के लिये बनाए गए यन्त्र को मंगल ग्रह पर प्रतिस्थापित करेगा जिसके माध्यम से मंगल ग्रह पर आने वाले भूकंप से उत्त्पन्न होने वाली सिस्मिक तरंगों के उपयोग से ग्रह के आतंरिक नक़्शे बनाने में मदद मिलेगी।
  • गौरतलब है कि यह पश्चिमी तट से लॉन्च किया जाने वाला पहला मिशन है। अब तक अमेरिका के पूर्वी तट पर स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर (फ्लोरिडा) से ही अधिकांश इंटरप्लेनेट्री मिशन लॉन्च किये जाते थे।
  • इसके साथ ही यह क्यूबसेट तकनीक पर आधारित पहला अंतरिक्ष परीक्षण होगा।
  • इसके माध्यम से भविष्य के मिशनों हेतु संचार और नौवहन क्षमताओं को जाँचा जा सकेगा।
1]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. 2017 का सरस्वती सम्मान गुजराती कवि सीतांशु यशसचंद्र को उनके कविता संग्रह ‘वखार’ के लिये दिया जाएगा
  2. सरस्वती सम्मान संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है।
  3. सरस्वती सम्मान सभी भाषाओं के लेखकों द्वारा प्रकाशित साहित्यिक कृति के लिये प्रदान किया जाता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1
C) 2 और 3 दोनों
D) केवल 1 और 3
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उत्तरः (b)
व्याख्याः 

सरस्वती सम्मान

Saraswati-Samman

  • 27 अप्रैल, 2018 को प्रसिद्ध गुजराती कवि सीतांशु यशसचंद्र को वर्ष 2017 के 27वें सरस्वती सम्मान के लिये चुना गया है। यह सम्मान उन्हें 2009 में प्रकाशित उनके कविता संग्रह ‘वखार’ के लिये दिया जाएगा। सरस्वती सम्मान पुरस्कार में 15 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र और फलक शामिल होता है। सितांशु यशसचंद्र गुजराती साहित्य परिषद के अध्यक्ष हैं। अतः पहला कथन सत्य है।
  • सरस्वती सम्मान के. के. बिड़ला फ़ाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला  साहित्य पुरस्कार है। अतः दूसरा कथन असत्य है। 
  • सरस्वती सम्मान प्रतिवर्ष केवल भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं के  भारतीय लेखकों की पिछले 10 सालों में प्रकाशित साहित्यिक कृति को पुरस्कृत किया जाता है। पहला सरस्वती सम्मान हिंदी के साहित्यकार डॉ. हरिवंश राय बच्चन को उनकी चार खंडों की आत्मकथा के लिये दिया गया था। अतः तीसरा कथन असत्य है।
[2]

निम्नलिखित में से कौन-से देश शंघाई सहयोग संगठन के संस्थापक सदस्य हैं?

A) चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान
B) चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ईरान, अफगानिस्तान
C) चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ईरान, तुर्कमेनिस्तान
D) चीन, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ईरान, पाकिस्तान
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उत्तरः (a)
व्याख्याः

शंघाई सहयोग संगठन

sco-2011

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसकी स्थापना चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के नेताओं द्वारा 15 जून, 2001 को शंघाई (चीन) में की गई थी।

चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान ने 1996 मेॱ “शंघाई V” नाम से संगठन की स्थापना शऺघाई मेऺ की । सन 2001 में शंघाई मे आयोजित शिखर सम्मेलन मेऺ उज्बेकिस्तान को इसमें शामिल कर “शंघाई VI” मेऺ बदल दिया गया जो अब शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organization) या SCO के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्यालय बीजिऺग मेऺ है।

भारत और पाकिस्तान को वर्ष 2005 में संगठन के पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया। रूस के उफा में वर्ष 2015 के सम्मेलन में एससीओ ने औपचारिक तौर पर प्रस्ताव पारित कर भारत और पाकिस्तान को संगठन में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2016 में उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित 16वीं शिखर बैठक में दोनों देशों ने संगठन में शामिल होने के लिये दायित्व ज्ञापन (Memorandum of Obligation) पर हस्ताक्षर किये। तथा 2017 में अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की राज्य परिषद के प्रमुखों की बैठक में भारत एवं पाकिस्तान को संगठन के पूर्ण सदस्य का दर्जा प्रदान किया गया।

भारत और पाकिस्तान के पूर्ण सदस्य बनने के बाद अब इसमें अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया पर्यवेक्षक देश हैं।

[3]

हाल के दिनों में विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, किंतु भारत की जीडीपी संवृद्धि दर में गिरावट देखी जा रही है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  1. दोहरे तुलन-पत्र की समस्या
  2. क्रूड आयल की बढ़ती कीमत
  3. विमुद्रीकरण
  4. खराब मानसून

उपरोक्त में से कौन-से कारण सही हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 3 और 4
D) उपरोक्त सभी।
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उत्तरः (b)
व्याख्याः 

वर्ष 2016 के पूर्व जब अन्य देशों की विकास दर में गिरावट हो रही थी तब भारत की विकास दर में वृद्धि हो रही थी। लेकिन बाद में यह स्थिति परिवर्तित हो गई। विश्व अर्थव्यवस्था में हाल के दिनों में सुधार आरंभ हुआ है, लेकिन भारत की जीडीपी संवृद्धि दर  तथा अन्य संकेतकों जैसे- औद्योगिक उत्पादन ऋण और निवेश आदि में गिरावट आई है। इसे डीकप्लिंग के रूप में संदर्भित किया गया है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  1. दोहरे तुलन-पत्र की समस्या (Twin Balance Sheet Problem) के कारण निवेश में कमीं आई है जिसने आर्थिक गतिविधियों को बाधित किया है। परिणामस्वरूप विकास दर में कमी आई है।
  2. 2017 से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड आयल की कीमत लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत सरकार के आयात मद में अधिक धन खर्च हो रहा है।
  3. विमुद्रीकरण और जीएसटी के कारण मांग में अस्थायी रूप से कमी आई है और विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र में उत्पादन बाधित हुआ है। जीएसटी ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है।
  4. भारत की संकुचित मौद्रिक स्थितियों ने उपभोग और निवेश को कम करने में योगदान दिया है, जिसके कारण रुपए में मज़बूती आई है। इससे निवल सेवाओं के निर्यात और विनिर्माण व्यापार संतुलन दोनों में अवरोध उत्पन्न हुआ है।
[4]

हाल ही में चर्चा में रहे राष्ट्रीय पोषण अभियान (नेशनल न्यूट्रीशन मिशन: एनएनएम) के संबंध में  निम्नलिखित कथनों पर चार कीजिये:

  1. इसके अंतर्गत अल्पपोषण तथा संबंधित मामलों में कमी लाना, जन्म के समय बच्चों के कम वजन तथा रक्ताल्पता जैसी समस्याओं से चरणबद्ध तरीके से निपटना शामिल है।
  2. इस अभियान को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।
  3. इसके क्रियान्वयन हेतु सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को आधारभूत साधन के रूप में प्रयुक्त किया जाएगा।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी।
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उत्तर (c) 
व्याख्या

राष्ट्रीय पोषण अभियान

NNM

  • भारत सरकार ने तीन वर्ष के लिये 9046.17 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान करते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान  (National Nutrition Mission-NNM) की शुरुआत की है।
  • एनएनएम सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करके वांछित तालमेल कायम करेगा, ताकि इस समस्या को कुछ कम किया जा सके।
  • एनएनएम एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्य निर्धारित करने तथा मार्गदर्शन का काम करेगा।
  • राष्ट्रीय पोषण अभियान का लक्ष्य ठिगनापन, अल्पपोषण, रक्ताल्पता (छोटे बच्चों, महिलाओं एवं किशोरियों में) को कम करना है।
  • इस अभियान को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा जल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।
  • इस अभियान के तहत एक अत्यधिक मज़बूत अभिसरण तंत्र (Convergence Mechanism) प्रारंभ किया जाएगा।
  • इसमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित वास्तविक समय (Real Time) निगरानी प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा तथा आईटी आधारित उपकरणों के प्रयोग के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे आंगनवाड़ी में रजिस्टरों के प्रयोग को समाप्त किया जा सके।
  • इस कार्यक्रम से 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ पहुँचेगा। सभी राज्यों और ज़िलों को चरणबद्ध रूप से अर्थात् 2017-18 में 315 ज़िले, वर्ष 2018-19 में 235 ज़िले तथा 2019-20 में शेष ज़िलों को शामिल किया जाएगा
  • कुछ समय पूर्व नीति आयोग द्वारा देश में कुपोषण पर नए सिरे से ध्यान देने के लिये राष्ट्रीय पोषण रणनीति (National Nutrition Strategy) शुरू की गई।  नीति आयोग ने देश-विदेश के विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ विचार-विमर्श कर यह रणनीति बनाई है और इस लक्ष्य को हासिल करने का रोडमैप भी सुझाया है।
[5]

हाल ही में आरंभ की गई गोबर-धन (GOBAR-DHAN) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह कार्बनिक अपशिष्टों से ऊर्जा तथा संपदा उत्पन्न करने पर लक्षित एक योजना है।
  2. इसे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
  3. यह खुले में शौच से मुक्त (ODF) ग्रामों के लिये आगे की रणनीति की अभिकल्पना करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A) 1 और 2
B) 2 और 3
C) 1 और 3
D) उपर्युक्त सभी।
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उत्तर: (d)
व्याख्या:

गोबर-धन योजना 

gobar-dhan-yojana

  • गोबर-धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources – DHAN) योजना की शुरुआत पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा की गई है।
  • इस योजना का लक्ष्य ग्रामीण स्वच्छता को सकारात्मक रूप से प्रभावित करना तथा मवेशी एवं कार्बनिक अपशिष्टों से ऊर्जा तथा संपदा उत्पन्न करना है। इस योजना का लक्ष्य किसानों तथा अन्य ग्रामीण लोगों के लिये आजीविका के अवसर सृजित करना भी है।
  • स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) के तहत 3.5 लाख ग्रामों के खुले में शौच से मुक्त (Open defecation free- ODF) होने के बाद यह आगे की रणनीति है जिसे ‘ODF प्लस’ की संज्ञा दी गई है।
  • इस योजना के तहत देश के विभिन  राज्यों में 700 बायोगैस इकाइयों की स्थापना भी की जाएगी। इसके साथ ही, ग्रामीण परिवारों को रसोई गैस तथा तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जाएगा जिससे यह योजना संवहनीय रूप से कार्यान्वित हो सके।अतः सभी कथन सत्य हैं

“विद्युतीकरण गाँव की परिभाषा में बदलाव की ज़रूरत नहीं: विद्युत मंत्रालय” 

 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-12 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के प्रति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।)
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-9 : बुनियादी ढाँचा- ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।)
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

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चर्चा में क्यों?
हाल ही में विद्युतीकृत गाँव की परिभाषा को लेकर हुई तमाम आलोचनाओं के बावजूद विद्युत मंत्रालय ने कहा है कि सरकार वर्तमान विद्युतीकृत गाँव की आलोचनात्मक परिभाषा को संशोधित नहीं कर रही है ध्यातव्य है कि एक गाँव  को विद्युतीकृत तब माना जाता है जब उस गाँव के कम-से-कम 10% घरों में बिजली कनेक्शन हो।

विद्युतिकृत गाँव की परिभाषा क्या है?
एक विद्युतीकृत गाँव को निम्न आधारों पर परिभाषित किया जा सकता है:

    1. निवास योग्य स्थान पर बुनियादी ढाँचे के प्रावधान जैसे-वितरण ट्रांसफॉर्मर और आसपास के इलाकों में लाइनों की सुविधा।

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  1. सार्वजनिक स्थानों जैसे- स्कूलों, पंचायत कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्रों, औषधालयों और सामुदायिक केंद्रों में बिजली की उपलब्धता।
  2. गाँव के परिवारों की कुल संख्या में से कम से कम 10% के पास विद्युत कनेक्शन हो।
  3. ध्यातव्य है कि अक्तूबर,1997 में स्थापित इसी परिभाषा के अनुसार एक गाँव की पहचान विद्युतीकृत गाँव के रूप में की जाती है।

ग्रामीण विद्युतीकरण  से जुड़े मुद्दे

  • बुनियादी ढाँचे और गाँव के कुछ सार्वजनिक केंद्रों के विद्युतीकरण के अलावा, गाँव के कुल परिवारों की संख्या में से केवल 10% परिवारों के पास विद्युत कनेक्शन होने के आधार पर एक गाँव को विद्युतीकृत माना जाता है, भले ही 90% परिवारों के पास बिजली कनेक्शन न हो।
  • हालाँकि, भारत ने अब पूर्ण विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है लेकिन भारत के ग्रामीण परिवारों (अनुमानित 31 मिलियन) का लगभग पाँचवा हिस्सा अभी भी बिजली की सुविधा से वंचित है।
  • यहाँ तक की अकेले उत्तर प्रदेश राज्य में अंधेरे में रहने वालों की संख्या 13 मिलियन से अधिक है।
  • इसके अलावा, आधिकारिक आँकड़ों में कई गाँवों को विद्युतीकरण माना जाता है, किंतु वहाँ शिकायतें दर्ज की गई हैं कि गाँवों की अनदेखी के कारण ट्रांसमिशन तारों जैसे प्रमुख घटक के चोरी की घटनाएँ भी बढ़ गई हैं।
  • हालाँकि, सरकार का कहना है कि पुराने ग्रामीण विद्युतीकरण की परिभाषा में परिवर्तन की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सौभाग्य योजना के माध्यम से पूर्ण विद्युतीकरण और हर घर तक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सौभाग्य योजना क्या है?

  • सौभाग्य योजना का शुभारंभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण सुनिश्चित करने के लिये किया गया।
  • इस योजना के तहत केंद्र सरकार से 60% अनुदान राज्यों को मिलेगा, जबकि राज्य अपने कोष से 10% धन खर्च करेंगे और शेष 30% राशि बैंकों से बतौर ऋण के रूप में प्राप्त करना होगा।
  • विशेष राज्यों के लिये केंद्र सरकार योजना का 85% अनुदान देगी, जबकि राज्यों को अपने पास से केवल 5% धन लगाना होगा और शेष 10% बैंकों से कर्ज़ लेना होगा।
  • ऐसे सभी चार करोड़ निर्धन परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान किया जाएगा, जिनके पास अभी कनेक्शन नहीं है।
  • इस योजना का लाभ गाँव के साथ-साथ शहर के लोगों को भी मिलेगा।
  • ये मुफ्त बिजली कनेक्शन गरीब परिवारों को 2018 तक प्रदान किये जाएंगे।
  • केंद्र सरकार द्वारा बैटरी सहित 200 से 300 वाट क्षमता का सोलर पावर पैक दिया जाएगा, जिसमें हर घर के लिये 5 एलईडी बल्ब, एक पंखा भी शामिल है।
  • बिजली के इन उपकरणों की देख-रेख 5 सालों तक सरकार अपने खर्च पर करवाएगी।
  • बिजली कनेक्शन के लिये 2011 की सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना को आधार माना जाएगा। जो लोग इस जनगणना में शामिल नहीं हैं, उन्हें 500 रुपए में कनेक्शन दिया जाएगा और इसे 10 किश्तों में वसूला जाएगा।
  • सभी घरों को बिजली पहुँचाने के लिये प्री-पेड मॉडल अपनाया जाएगा।

स्रोत : द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस 

 

“चीन के साथ व्यापार घाटे के कारण आरसीईपी वार्ता पर बढ़ती चिंताएँ” 

 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-17 : भारत एवं इसके पड़ोसी – संबंध।)
(खंड -18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

RCEP

चर्चा में क्यों ?

चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2017-18 में बढ़कर $62.8 बिलियन पहुँच गया है जो 2016-17 में  $51 बिलियन था। चिंता जताई जा रही है कि प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के कारण यह स्थिति और खराब हो सकती है क्योंकि इस समझौते के अंतर्गत बड़े स्तर पर टैरिफों का उन्मूलन किया जाना है जिससे भारतीय बाज़ारों में चीनी माल की  बाढ़ आ सकती है।

प्रमुख बिंदु 

  • 16 आरसीईपी देशों के अधिकारी जिनमें 10 सदस्यीय आसियान, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं, सिंगापुर में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं और साल के अंत तक वार्ता संपन्न करने हेतु प्रयासरत हैं।
  • भारतीय अधिकारियों के अनुसार, भारत से आसियान देशों और चीन द्वारा उनकी वस्तुओं हेतु भारतीय बाज़ार तक पहुँच (market access) में और अधिक वृद्धि की मांग की जा रही है। लेकिन, चूँकि भारत और चीन के मध्य व्यापार घाटे में निरंतर वृद्धि हो रही है, अतः चीन को वैसी ही रियायतें नहीं दी जा सकती जैसी आसियान देशों को दी जा सकती हैं।
  • आसियान देश चाहते हैं कि भारत 92 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म करने के लिए सहमत हो और सभी सदस्यों को समान रियायतें देकर अपने ऑफरों में समानता बनाए रखे।
  • आसियान भारत पर महत्त्वाकांक्षी टैरिफ कटौती हेतु सहमत होने के लिये दबाव डाल रहा है ताकि 2018 के अंत तक वार्ता समाप्त हो जाए और इसमें ज़्यादा देरी न हो।
  • भारतीय अधिकारियों के अनुसार, भारत आरसीईपी वार्ता में उस पर बनाए जा रहे दबाव को कम करने की कोशिश करेगा, क्योंकि अन्य सदस्य देशों द्वारा सेवाओं के मामले में दिये गए ऑफरों में भी सुधार की आवश्यकता है।
  • अधिकांश आरसीईपी सदस्यों ने सेवाओं में बहुत रूढ़िवादी ऑफर दिये हैं, जिनसे बाज़ार पहुँच में मज़बूत सुधार की संभावना कम है।
  • भारत न केवल टैरिफ कटौती के बाद संभावित चीनी वस्तुओं की बाढ़ से अपने बाज़ार को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि यह अपनी प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन हेतु एक लंबी अवधि भी चाहता है।
  • भारतीय उद्योग चीन को बड़ी टैरिफ कटौती की पेशकश करने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे घरेलू कारोबार में काफी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
  • ध्यातव्य है कि चीन से भारत का आयात 2017-18 में $76.27 बिलियन हो गया, जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में $61.28 बिलियन था। जबकि भारत का चीन को 2017-18 में निर्यात $13.33 बिलियन एवं 2016-17 में  $10.17 बिलियन था।

क्या है आरसीईपी?

  • यह एक मेगा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है। इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 16 देश शामिल हैं।
  • इसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये इसके सदस्य देशों के बीच व्यापार नियमों

को उदार एवं सरल बनाना है।

  • भारत  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) पर वार्ता को आगे ले जाने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है, परंतु, इसके लाभ को समान रूप से साझा करने के लिये आवश्यक है कि यह समझौता सभी 16  देशों के बीच संतुलित हो।
  • आरसीईपी समझौते के संपन्न होने के पश्चात् यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापारिक ब्लॉक हो सकता है क्योंकि इसके अंतर्गत दुनिया की 45 प्रतिशत जनसंख्या आती है और इसका सकल घरेलू उत्पाद लगभग $21 ट्रिलियन है।

स्रोत : द हिंदू (बिज़नेस लाइन)