UPSC DAILY CURRENT 03-07-2018

[1]

गोल्डन ग्लोब रेस (Golden globe race) 2018 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।

  1. यह सौर ऊर्जा चालित वायुयान द्वारा की जाने वाली वैश्विक परिक्रमा है।
  2. हाल ही में इस यात्रा की शुरुआत फ्राँस से हुई है।
  3. इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी पारंपरिक तकनीकों का ही प्रयोग कर सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर: (c)
व्याख्या:

  • गोल्डन ग्लोब रेस (Golden globe race) 2018 एक नौकायन दौड़ है। इस दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन सर्वप्रथम 1968-69 में किया गया था। यह एक नॉन-स्टॉप, एकल संचालनीय ( single handed), विश्व के चारों तरफ यात्रा करने वाली नौका दौड़ है। अतः कथन 1 गलत है।
  • गोल्डन ग्लोब रेस (Golden globe race) 2018 1 जुलाई, 2018 को फ्राँस के लेस सेबल्स-डीओलोन (les sables-d’olonne) नामक बंदरगाह से शुरू हुई है। अतः कथन 2 सत्य है।
  • इस दौड़ की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का प्रयोग वर्जित है और इस नौका की तकनीक 1968 के बाद की न हो।इसलिये कथन 3 भी सही है।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टॉमी (Abhilash Tomy) इस दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले एशिया के एकमात्र प्रतियोगी हैं। कमांडर अभिलाष ने अपनी नौका थूरिया (Thuriya) के साथ इस प्रतियोगिता में भाग लिया है।
[2]

RIMPAC के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

  1. यह विश्व का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है।
  2. भारत की ओर से आईएनएस सह्याद्री ने इस संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लिया।
  3. वर्ष 2018 में इस अभ्यास की मेज़बानी indopacom के द्वारा की गई।

नीचे दिये गए कूटों की सहायता से उत्तर दीजिये।

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर: (d)
व्याख्या:

  • हाल ही में RIMPAC 2018  युद्ध अभ्यास हवाई तट पर संपन्न हुआ जिसमें 25 देशों के लगभग 25,000 कर्मियों ने भागीदारी की। RIMPAC (Rim of the pacefic Exercice) विश्व का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है। इसलिये कथन 1 सही है।
  • भारत की तरफ से इस युद्धाभ्यास में स्वदेश निर्मित युद्धपोत आईएनएस सह्याद्री (INS sahyadri) ने हिस्सा लिया। अतः कथन 2 सही है।
  • सैन्याभ्यास के इस 26वें संस्करण का आयोजन यू. एस.-इंडो पैसेफिक कमांड की मेज़बानी में संपन्न हुआ। इस दौरान 21 जून (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) को भारतीय नौसेना के कर्मियों द्वारा योगाभ्यास किया गया तथा शासन में योग के एकीकरण के लिये पुरस्कार भी दिया गया।इसलिये कथन 3 भी सही है।
[3]

अग्नि-V के संदर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?

A) यह भारत का एक अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
B) यह मिसाइल नाभिकीय हथियार ले जाने में भी सक्षम है।
C) इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर है।
D) भारत विश्व में एकमात्र देश है, जिसके पास अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
Hide Answer –

उत्तर: (d)
व्याख्या:

अग्नि-V  भारत की सबसे अधिक लंबी दूरी की मिसाइल है। यह एक अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका, रूस, फ्राँस और चीन के पास अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल पहले से ही मौजूद है। इस तरह भारत ऐसा पाँचवाँ देश है जिसके पास अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की सुविधा उपलब्ध है।

इसका विकास रक्षा अनुसंधान और विकास परिषद (drdo) द्वारा किया गया है। सरकार द्वारा जल्द ही इसे परमाणु शस्त्रागार में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।

अग्नि शृंखला की मिसाइलें भारत की परमाणु हथियार की रीढ़ हैं जिसमे पृथ्वी लघु दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और लड़ाकू विमान शामिल हैं।

[4]

रामानुजाचार्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।

  1. इन्होंनें अद्वैतवाद के नाम से अपने मत का प्रतिपादन किया है।
  2. रामानुजाचार्य मुगल शासक बाबर के समकालीन थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
Hide Answer –

उत्तर: (d)
व्याख्या:

रामानुजाचार्य एक भक्तिकालीन वैष्णव संत थे, इन्होंने ‘विशिष्टाद्वैत’ के नाम से अपने मत का प्रतिपादन किया है। इनका जन्म 1017 ईसा पूर्व हुआ था। उल्लेखनीय है कि मुगल शासक अकबर का जीवनकाल 1542-1605 है। इस तरह दोनों कथन गलत है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को उनके जन्म स्थान श्रीपेरंबुदुर में श्री रामानुजाचार्य के 1000वें जयंती समारोह (वर्ष 2017 में) के सुचारु संचालन के लिये उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। रामानुजाचार्य के गुरु यादव प्रकाश थे।

हाल ही में सरकार ने हैदराबाद के शम्शाबाद हवाई अड्डे के नज़दीक रामानुजाचार्य की (बैठे हुए अवस्था में) 260 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा बनाने का फैसला किया है। इस प्रतिमा के बनने से यह विश्व की दूसरी सबसे ऊँची (बैठे हुए अवस्था में)   प्रतिमा बन जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में, थाईलैंड का महान बुद्ध (302 फीट) सबसे ऊँची मूर्ति है।

[5]

सरकार द्वारा नवगठित नवीन ढोलकिया समिति का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?

A) राज्य और जिला स्तर के आँकड़ों के लिये संग्रह के मानदंडों को अपग्रेड करने हेतु
B) बैकिंग धोखाधड़ी से निपटने हेतु एक कार्यबल
C) पर्यावरण में बढ़ते विषाक्त कणों के अध्ययन के लिये
D) भारत में रोजगार के अवसरों के सृजन हेतु
Hide Answer –

उत्तर : (a)
व्याख्या:

  • केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय लेखा या सकल घरेलू उत्पाद (gdp) की गणना के लिये आधार वर्ष को संशोधित करने की योजनाओं की पृष्ठभूमि में राज्य और ज़िला स्तर के आँकड़ों के संग्रह के मानदंडों को अपग्रेड करने  हेतु उप-राष्ट्रीय खातों के लिये नवीन ढोलकिया की अध्यक्षता में एक 13 सदस्यीय समिति का गठन गया किया है।
  • यह समिति राज्य घरेलू उत्पाद (sdp) और जिला घरेलू उत्पाद (ddp) की तैयारी तथा संशोधित दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने के लिये अवधारणाओं, परिभाषाओं, वर्गीकरण, आँकड़ा सम्मेलनों, आँकड़ा स्रोतों और आँकड़ों की आवश्यकता के संदर्भ में समीक्षा करेगी।

 

एएमसीडीआरआर, 2018
(AMCDRR 2018)

AMCDRR

3 से 6 जुलाई, 2018 तक मंगोलिया के उलानबाटार (Ulaanbaatar) में आपदा जोखिम में कमी लाने के संबंध में एक एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2018 (Asian Ministerial Conference on Disaster Risk Reduction- AMCDRR, 2018) का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू करेंगे।

  • AMCDRR 2018 की थीम: ‘आपदा जोखिम की रोकथाम: सतत् विकास की सुरक्षा’ (Preventing Disaster Risk: Protecting Sustainable Development) सेंडाई संरचना के सार तत्त्व को प्रदर्शित करती है। जो विकास के मार्ग में आने वाले जोखिमों पर विचार नहीं करता, वह सतत् नहीं हो सकता। इसलिये, आपदा जोखिम में कमी लाना सतत विकास लक्ष्यों को अर्जित करने का मुख्य माध्यम है।

AMCDRR

  • AMCDRR पर एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन, आईएसडीआर-एशिया साझेदारी फोरम द्वारा समर्थित तथा प्रशांत क्षेत्र में उप-क्षेत्रीय मंचों के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय मंच संरचना का निर्माण करता है।
  • द्विवार्षिक AMCDRR को वैश्विक और क्षेत्रीय आपदा चुनौतियों का समाधान करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित किया गया है। इसके अंतर्गत अंतर्देशीय नेतृत्व और समाधान के माध्यम से ऐसे मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जाता है जिससे लोगों के साथ-साथ क्षेत्र विशेष को भी लाभ पहुँच सके।
  • इसके प्रत्येक सम्मेलन का आयोजन मेजबान देश और यूएनआईएसडीआर (United Nations Office for Disaster Risk Reduction – UNISDR) द्वारा सह-संगठित रूप से किया जाता है।
  • यह आयोजन सरकारों को सेंडाई फ्रेमवर्क को लागू करने के लिये उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का एक अवसर प्रदान करता है।
37वाँ वर्ल्ड हेरीटेज साइट्स भारत में

art-deco

एक अन्य ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में ‘मुंबई के विक्टोरियन गोथिक एवं आर्ट डेको इंसेबल्स’ (Victorian and Art Deco Ensembles of Mumbai) को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरीटेज साइट्स की सूची में अंकित किया गया है। यह ऐतिहासिक निर्णय बहरीन के मनामा (Manama) में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 42वें सत्र में लिया गया।

  • विश्व धरोहर समिति की अनुशंसा पर इंसेबल को नया नाम ‘मुंबई के विक्टोरियन गोथिक एवं आर्ट डेको इंसेबल्स‘ दिया गया है, जिसे भारत सरकार ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
  • एलिफेंटा गुफाओं और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बाद यह मुबंई की तीसरी ऐसी साइट है जिसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।
  • अहमदाबाद के बाद मुंबई भारत में ऐसा दूसरा शहर बन गया है जो यूनेस्को की विश्व धरोहर संपदा की सूची में अंकित है।
  • यह इंसेम्बल दो वास्तुशिल्पीय शैलियों, 19वीं सदी की विक्टोरियन संरचनाओं के संग्रह (अर्थात् विक्टोरियन गोथिक पुनर्जागरण के भवनों) एवं समुद्र तट के साथ 20वीं सदी के आर्ट डेको भवनों से निर्मित्त है, इसके मध्य में ओवल मैदान स्थित है।
  • यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज साइट्स में शामिल होने वाली यह 37वीं भारतीय साइट है। विश्व धरोहरों की संख्या के मामले में भारत, चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा एशिया-पैसिफिक देश बन गया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर इसका छठा स्थान है।
  • वर्तमान में देश के 42 स्थल विश्व धरोहर की प्रायोगिक सूची में शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रत्येक वर्ष यूनेस्को की सूची हेतु नामांकन के लिये एक भारतीय संपत्ति की अनुशंसा की जाती है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति

  • विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee) उन स्थलों का चयन करती है जिन्हें यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है।
  • यह न केवल विश्व धरोहर कन्वेंशन के कार्यान्वयन के लिये उत्तरदायी होती है, बल्कि विश्व धरोहर कोष के इस्तेमाल को परिभाषित करने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र दलों के अनुरोध पर वित्तीय सहायता का आवंटन भी करती है।
  • वर्तमान में इस समिति के सदस्यों की संख्या 21 है।
  • विश्व धरोहर कन्वेंशन के नियमानुसार, समिति के सदस्य राष्ट्र का कार्यकाल छह साल का होता है, लेकिन कई राष्ट्र दल स्वेच्छा से केवल चार साल के लिये ही समिति के सदस्य बने रहना स्वीकार करते हैं ताकि, दूसरे राष्ट्र दलों को भी समिति का सदस्य बनने का अवसर प्राप्त हो सके।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष : एस. रमेश

CBIC

श्रीमती वनाजा एन. सरना के सेवानिवृत्त होने पर एस. रमेश ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs -CBIC) के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। अपनी पदोन्नति से वह पूर्व बोर्ड में सदस्य (प्रशासन) थे।

  • एस. रमेश ने अपने कॅरिअर की शुरुआत मुंबई में केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं उसके बाद मुंबई सीमा शुल्क के सहायक आयुक्त के रूप में की।
  • वर्ष 2013 से 2016 तक वह सीमा शुल्क ज़ोन (चेन्नई) के मुख्य आयुक्त रहे। इसके बाद उन्होंने प्रणाली एवं डाटा प्रबंधन के महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला। सितंबर 2016 में वह सदस्य (आईटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर) के रूप में बोर्ड में शामिल हुए।

सीबीईसी

  • सीबीईसी, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग का एक हिस्सा है।
  • सीबीईसी के अधिकारों के तहत यह सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और नारकोटिक्स से संबंधित तस्करी और प्रशासनिक मामलों के संबंध में कार्य करता है। यह सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर के संग्रहण और लेवी से संबंधित नीतिगत कार्यों से संबंधित विभाग है।
  • यह अपने अधीनस्थ संगठनों के लिये एक प्रशासनिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है, जिसमें कस्टम हाउस, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर आयुक्त तथा केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला शामिल है।
पानी से ईंधन बनाने का सस्ता तरीका

Fuel

हाल ही में अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अनुसंधानकर्त्ताओं ने एक ऐसे किफायती उत्प्रेरक को विकसित करने में सफलता हासिल की है, जिसकी सहायता से पानी से हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है।

  • पानी के अवयवों हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग करने के लिये अधिकतर प्रणालियों में दो उत्प्रेरकों की आवश्यकता होती है। एक उत्प्रेरक की सहायता से हाइड्रोजन और दूसरे से ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाता है।
  • इस नए आविष्कार के पश्चात् हाइड्रोजन को तोड़ने के लिये नए उत्प्रेरक की आवश्यकता नहीं होगी, साथ ही इससे हाइड्रोजन ईंधन के निर्माण की लागत में भी उल्लेखनीय रूप से कमी आएगी।
  • नया उत्प्रेरक आयरन और डिनिकल फॉस्फाइड से बना है, जो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध निकेल फोम पर दोनों कार्य करने में सक्षम है।
  • हाइड्रोजन को कई औद्योगिक उपयोगों में स्वच्छ ऊर्जा के वांछनीय स्रोत के रूप में जाना जाता है। इसका कारण यह है कि इसे कंप्रेस्ड किया जा सकता है, साथ ही तरल रूप में भी परिवर्तित किया जा सकता है इसलिये ऊर्जा के कुछ अन्य स्वरूपों की तुलना में इसका काफी आसानी से भंडारण किया जा सकता है।

 

हिंद महासागर क्षेत्र में नरम कूटनीति अपनाना भारत के लिये बेहतर

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)
(खंड-19 : भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।)

seychelles-template

संदर्भ 

एजम्पशन आइलैंड पर नौसैनिक अड्डा बनाने को लेकर भारत और सेशेल्स के बीच बनी सहमति सामरिक नज़रिये से काफी अहम है। यह सही है कि 2015 का यह समझौता इस साल संशोधित किये जाने के बाद भी वहाँ की संसद की मंज़ूरी नहीं पा सका है। मगर दोनों देश एक-दूसरे के हितों को देखते हुए आपस में मिलकर इस नौसैनिक अड्डे पर काम करने के लिये सहमत हुए हैं और यह बात सुकून देने वाली है। इसे सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉर के भारत दौरे की ‘बेस्ट पॉसिबल आउटकम’ कहा जा रहा है, यानी सबसे अच्छा संभावित नतीजा।

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • मौजूदा स्थिति में इससे बेहतर परिणाम नहीं निकल सकता था। अगर यह समझौता रद्द हो जाता (जिससे जुड़ी रिपोर्ट कुछ दिनों पहले खबरों में आई थी), तो हमें खासा नुकसान हो सकता था।
  • मगर अब उम्मीद बंधी है कि अगले चुनाव में सेशेल्स के मौजूदा राष्ट्रपति यदि और अधिक प्रभावी तरीके से सत्ता में आते हैं, तो यह समझौता वहाँ की संसद की रजामंदी पा सकता है।

नौसैनिक अड्डे को लेकर भारत की उत्सुकता 

  • नौसैनिक अड्डे को लेकर भारत की उत्सुकता और सेशेल्स की झिझक को समझना मुश्किल नहीं है। चीन इसकी एक बड़ी वजह है। उसका प्रभाव हिंद महासागर में लगातार बढ़ रहा है।
  • यहाँ पहले भारत प्रभावी भूमिका में था और चीन दक्षिण चीन सागर में। मगर अब हिंद महासागर में चीन के दखल के बाद क्षेत्र की राजनीतिक व सामरिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
  • उसने पूर्वी अफ्रीकी देश जिबूती में अपना सैन्य अड्डा तो बना ही लिया है, ग्वादर (पाकिस्तान) और हम्बनटोटा (श्रीलंका) बंदरगाहों को भी अपने खाते में डाल लिया है।
  • इस बदलते घटनाक्रम से नई दिल्ली का चिंतित होना स्वाभाविक है। इस लिहाज से हमारे लिये एजम्पशन आइलैंड उम्मीद की एक बड़ी किरण है। यहाँ यदि नौसैनिक अड्डा बनकर तैयार हो जाता है, तो यह चीन को करारा जवाब देने जैसा होगा। मगर दुर्भाग्य से चीन के दबाव के कारण ही सेशेल्स फिलहाल उलझन में दिख रहा है।

सेशेल्स क्यों झिझक दिखा रहा है?

  • दरअसल, वर्ष 2004 के बाद से सेशेल्स में चीन का निवेश काफी बढ़ गया है। और जिस तरह हिंद महासागर में भारत व चीन के बीच स्पर्द्धा चल रही है, उसमें सेशेल्स, मॉरीशस, मालदीव जैसे आस-पास के तमाम छोटे-बड़े देश व आइलैंड खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं।
  • वे भारत को खुलेआम समर्थन देकर चीन की नाराजगी नहीं मोल लेना चाहते। एक समस्या यह भी रही है कि कुछ सामरिक विद्वानों ने एजम्पशन आइलैंड के नौसैनिक अड्डे को इस रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया था, मानो यह अड्डा भारत का होगा और यहाँ से चीन के जहाजों पर नज़र रखी जाएगी। इस अति-उत्साह ने भी सेशेल्स को अभी आगे बढ़ने से रोका है।
  • अगर वह यह कहता कि नौसैनिक अड्डा भारत ही बनाएगा, तो भारत-चीन प्रतिस्पर्द्धा में संभवत: वह भी इसका हिस्सा नज़र आता। हालाँकि अब भी बहुत कुछ नहीं बिगड़ा है। अच्छी बात यह है कि सेशेल्स से हमारे रिश्तों में खटास नहीं आई है।

भारत और सेशेल्स के बीच बनी वर्तमान सहमति क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • भारत और सेशेल्स के बीच बनी ताज़ा सहमति हमारे लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। संयुक्त नौसैनिक अड्डा हिंद महासागर में हमारी सामरिक ताकत को बढ़ाएगा। यहाँ भारत को घेरने के लिये चीन की विस्तारवादी नीतियाँ अपनी गति से चल रही हैं।
  • उसकी पनडुब्बियाँ कभी-कभी दक्षिण एशियाई सागर में भी आ जाती हैं और हम उन्हें पकड़ नहीं पाते। हालाँकि इसकी वजह तकनीक और साज़ो-सामान के मामले में हमारा चीन से कमतर होना भी है।
  • अगर सेशेल्स का नौसैनिक अड्डा बनता है और भारत की मौजूदगी वहाँ बढ़ती है, तो इस महासागर में चीन के दखल पर हमारी नज़र बनी रहेगी।
  • भारत का प्रयास मालदीव और मेडागास्कर जैसे राष्ट्रों से रिश्ता बढ़ाकर भी उसे रोकने का रहा है, जिसमें सफलता नहीं मिल पाई। फिर चीन का इन देशों पर आर्थिक व राजनीतिक प्रभाव भी अधिक है। इस लिहाज़ से देखें, तो सेशेल्स से समझौता हो पाना ही अपने-आप में बड़ी उपलब्धि है।
  • हिंद महासागर में भारत को चीन से एक और चुनौती ‘वन बेल्ट वन रोड इनिशिएटिव’ के रूप में मिल रही है। इसके तहत महासागरीय क्षेत्र में भी तमाम तरह के निवेश किये जा रहे हैं।
  • इसके प्रत्युत्तर में भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर एक ‘चतुष्कोणीय’ गुट बनाने को तत्पर है। यह एक राजनीतिक समूह तो होगा ही, इंफ़्रास्ट्रक्चर के विकास के लिये भी इसका अस्तित्व काफी मायने रखेगा।
  • एक संयुक्त क्षेत्रीय ढाँचागत योजना तैयार करने पर चारों देश विचार कर रहे हैं। अगर यह विचार साकार हो जाता है, तो भारत चीन को कई मामलों में चुनौती दे सकेगा।
  • भारत को अपनी उस ‘नेबरहुड पॉलिसी’ (पड़ोसी देशों को खास महत्त्व देने की नीति) को भी नई धार देनी होगी, जिसकी तरफ 2015 में कदम बढ़ाए गए थे। यह न सिर्फ हिंद महासागर क्षेत्र के लिये, बल्कि दक्षिण एशिया के लिहाज़ से भी किया जाना ज़रूरी है।
  • आज भूटान, नेपाल जैसे हमारे करीबी पड़ोसी देश भी चीन के पाले में जाते दिख रहे हैं। हमें उन्हें समझाना होगा कि चीन या अमेरिका की तुलना में भारत के साथ रिश्तों को मज़बूती देना उनके लिये कहीं ज्यादा फायदेमंद है।