UPSC DAILY CURRENT 04-05-2018

भारत में पेरॉल रिपोर्टिंग (Payroll Reporting)

Payroll-Reporting

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme) के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office – CSO) ने सितंबर 2017 से फरवरी 2018 तक की अवधि के लिये देश के रोज़गार आउटलुक (Employment Outlook) पर रिपोर्ट जारी की है। यह विशिष्ट आयामों में प्रगति का आकलन करने के लिये चुनी हुई सरकारी एजेंसियों के साथ उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड पर आधारित है।

  • रोज़गार सांख्यिकी की इस श्रृंखला में यह पहली रिपोर्ट है।
  • यह रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित रोज़गार डाटा में सुधार लाने पर गठित कार्यबल की अनुशंसाओं का परिणाम है जिसने अगस्त 2017 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
  • एक अनुशंसा उच्च बारंबारता रोज़गार आँकड़े तैयार करने के लिये प्रशासनिक सांख्यिकी के उपयोग की खोज करने से संबंधित है।
  • पहली रिपोर्ट में ईपीएफओ, ईएसआईसी एवं एनपीएस से प्रशासनिक रिकॉर्डों का उपयोग औपचारिक क्षेत्र में आँकड़ों को संकलित करने के लिये किया गया है और यह सितंबर 2017 से फरवरी 2018 की अवधि से संबंधित है।
प्रधानमंत्री वय वंदना योजना

PMVY

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय समावेश और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकारी प्रतिबद्धता के अंतर्गत प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत निवेश सीमा को 7.5 लाख रुपए से दोगुना कर 15 लाख रुपए करने का निर्णय लिया है।

  • इसके साथ-साथ इसकी सदस्यता की समय सीमा को 4 मई, 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 करने की भी मंज़ूरी दी है।
  • इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के लिये सामाजिक सुरक्षा पहलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मौजूदा योजना में प्रति परिवार 7.5 लाख रुपए की निवेश सीमा को बढ़ाकर संशोधित पीएमवीवीवाई में प्रति वरिष्ठ नागरिक 15 लाख रुपए कर दिया गया है।
  • इससे वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 10,000 रुपए तक पेंशन मिल सकेगी।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री वय वंदना योजना वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (2014) की तरह ही है, जिसे साल 2014-15 में लॉन्च किया गया था।
  • इस स्कीम को सबसे पहले यूनियन बजट 2003-04 (अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल) के दौरान लॉन्च किया गया था।
  • पीएमवीवीवाई को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के ज़रिये क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।
  • भारतीय नागरिक जो कि 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के हैं, वो प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) में निवेश करने के पात्र हैं।
  • इसके साथ ही 60 साल एवं उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को अनिश्चित बाज़ार स्थितियों के चलते उनकी ब्याज आमदनी में किसी भी भावी कमी से उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा सके।
  • इस स्कीम के तहत 10 साल तक प्रति वर्ष 8 प्रतिशत की गारंटीड रिटर्न दर के आधार पर एक निश्चित या आश्वासित पेंशन दी जाती है और इसमें मासिक/तिमाही/छमाही एवं वार्षिक आधार पर पेंशन का चयन करने का विकल्प दिया गया है।
  • रिटर्न में अंतर अर्थात् एलआईसी द्वारा सृजित रिटर्न और प्रति वर्ष 8 प्रतिशत के आश्वासित रिटर्न में अंतर को वार्षिक आधार पर सब्सिडी के रूप में भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
‘धड़कन’ एप

pulsacion

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (रुड़की) ने एक ऐसा मोबाइल एप तैयार किया है, जो हृदयाघात की आशंका होने पर मरीज़ और उसके चिकित्सक को पहले ही अलर्ट संदेश प्रेक्षित कर देगा। पूर्व जानकारी होने से समय रहते मरीज़ का जीवन बचाया जा सकेगा।

  • आईआईटी रुड़की के कंप्यूटेशनल बायोलॉजी ग्रुप ने ‘धड़कन’ नामक एक मोबाइल एप बनाया है।
  • इस एप के माध्यम से हृदय की समस्या से ग्रसित रहे मरीज़ों के रक्तचाप, हृदय गति की दर एवं वज़न में तीव्र बदलाव होने संबंधी जानकारी तत्काल प्रभाव से मरीज़ के डॉक्टर तक पहुँच जाएगी, जिससे समय रहते मरीज़ को बचाया जा सकता है।
  • इस एप को मरीज़ और उसका इलाज कर रहे डॉक्टर के मोबाइल पर डाउनलोड करना होगा।
  • आमतौर पर हार्ट फेल के खतरे से जूझ रहे मरीज़ों के रक्तचाप एवं हृदय गति की दर में एक सप्ताह में करीब दस फीसदी तक अंतर और वज़न एक किलो घट या बढ़ सकता है।
  • आवश्यक होने पर इसके ज़रिये मरीज़ चिकित्सक को ईसीजी रिपोर्ट भी भेज सकते हैं।
विजय प्रहार

Vijay-Prahar

इन दिनों सूरतगढ़ (राजस्थान) के समीप महाजन रेंज में युद्धाभ्यास ‘विजय प्रहार’ के ज़रिये राजस्थान में तैनात सेना की दक्षिण-पश्चिम कमान के 20 हज़ार सैनिक दुश्मन के परमाणु हमले से निपटने का अभ्यास कर रहे हैं।

  • इस दौरान थलसेना के सैनिकों को वायुसेना के साथ तालमेल बैठाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस युद्ध्याभ्यास में अत्याधुनिक बहुउद्देश्यीय हथियारों का प्रयोग किया जा रहा है।
  • युद्धाभ्यास पश्चिमी सीमा पर होने वाले किसी भी आक्रमण से निपटने के लिये किया जा रहा है।
  • इसमें वायुसेना और थलसेना के जवान संयुक्त ऑपरेशन में लड़ाकू विमानों, टैंकों व तोपों के साथ खुफिया सूचनाएँ, चौकसी व गहन सर्वेक्षण के बीच तालमेल बैठाने का अभ्यास कर रहे हैं।
  • इस दौरान परमाणु हमले से निपटने हेतु सैटेलाइट, ड्रोन के उपयोग आदि का भी अभ्यास कराया जा रहा है।
  • इस दौरान परमाणु युद्ध के हालातों का सामना करने के लिये अपनाई जाने वाली नीतियों को बेहतर बनाया जाएगा।
  • इसके अलावा कमान के सैनिकों को फार्मेशन नेटवर्क केंद्रित वातावरण में अत्याधुनिक हथियारों के संवेदनशील उपकरणों का प्रयोग, लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की तैनाती का भी अभ्यास कराया जा रहा है।

स्रोतः द हिंदू एवं पी.आई.बी.

 

तंबाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ रूपरेखा समझौता 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड-10 : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

WHO

चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तंबाकू उत्पादों में अवैध व्यापार को समाप्त करने के लिये तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization – WHO) के रूपरेखा समझौते के अंतर्गत प्रोटोकॉल को स्वीकार करने की स्वीकृति दी।

  • यह ध्रूमपान और तंबाकू चबाने या धुआँ रहित तंबाकू (Smokeless Tobacco – SLT)  के रूपों में तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रूपरेखा समझौते की धारा 15 के अंतर्गत समझौता वार्ता (World Health Organization Framework Convention on Tobacco Control – WHO FCTC) को अंगीकार करना है।
  • भारत डब्लयूएचओ एफसीटीसी समझौते में शामिल है।

प्रमुख बिंदु

  • प्रोटोकॉल में विभिन्न पक्षों के दायित्व निर्धारित किये गए हैं। इसमें कहा गया है कि सप्लाई चेन नियंत्रण उपाय सभी पक्षों द्वारा अपनाए जाने चाहिये।
  • इन उपायों में तंबाकू उत्पाद बनाने के लिये लाइसेंस, तंबाकू बनाने के लिये मशीनरी, उत्पादन में शामिल पक्षों के लिये उचित उद्यम, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग व्यवस्था, रिकॉर्ड कीपिंग और सुरक्षा शामिल हैं।
  • ई-कॉमर्स, मुक्त व्यापार क्षेत्रों में निर्माण तथा शुल्क मुक्त बिक्री में शामिल पक्षों द्वारा कदम उठाए जाएंगे।
  • प्रोटोकॉल में अपराधों, ज़ब्ती तथा ज़ब्त उत्पादों के निस्तारण जैसे प्रवर्तन उपायों को शामिल किया गया है।
  • इसमें सूचना साझा करने, गोपनीयता बनाए रखने, प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तथा तकनीकी और प्रौद्योगिकी मामलों में तकनीकी सहायता और सहयोग के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रावधान किया गया है।

इसका प्रभाव क्या होगा?

  • नियमों को मज़बूत बनाकर तंबाकू उत्पाद में अवैध व्यापार की समाप्ति से व्यापक तंबाकू नियंत्रण को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
  • इससे तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कम होगा, परिणामस्वरूप बीमारी के बोझ में कमी आएगी और तंबाकू के इस्तेमाल के कारण होने वाली मृत्यु में भी कमी होगी।
  • ऐसी संधि को मान लेने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले वर्तमान व्यवहारों के विरुद्ध कार्रवाई योग्य विकल्प उपलब्ध होंगे।
  • भारत तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अग्रणी है और ऐसे अवैध व्यापार को नियंत्रित करने में विश्व सीमा शुल्क संगठन (World Custom Organization) सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को प्रभावित करने में समक्ष होगा।
  • तंबाकू के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को मज़बूत बनाने में तंबाकू उत्पाद में अवैध व्यापार की समाप्ति से संबंधी प्रोटोकॉल पथ-प्रदर्शक पहल है और सार्वजनिक स्वास्थ्य में नया कानूनी उपाय भी है।
  • यह तंबाकू उत्पादों में अवैध व्यापार का मुकाबला करने और उसे समाप्त करने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग के लिये कानूनी पहलुओं को मज़बूत बनाने का व्यापक औजार है।

पृष्ठभूमि

FCTC

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक धूम्रपान-विरोधी समझौता किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सभी 192 सदस्य देशों ने तंबाकू-नियंत्रण पर इस संधि के प्रारूप का अनुमोदन कर दिया है।
  • तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन समझौता डब्ल्यूएचओ के तत्त्वाधान में की गई पहली अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संधि है।
  • इसके तहत तंबाकू के विज्ञापनों और स्पॉन्सरशिप पर कड़े प्रतिबन्ध लागू कर दिये जाएंगे।
  • इस समझौते के तहत, पाँच वर्षों के अंदर तंबाकू के विज्ञापनों और प्रायोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
  • सिगरेट के पैकेटों पर कम से कम एक-तिहाई हिस्से पर धूम्रपान से सेहत को पहुँचने वाले नुकसान के बारे में चेतावनी देना आवश्यक होगा, जिसमें धूम्रपान से रोग-ग्रस्त फेफड़ों की तस्वीरें भी शामिल होंगी।

उद्देश्य

  • FCTC का उद्देश्य राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर तंबाकू नियंत्रण के लिये आपूर्ति मांग कटौती उपायों की रूपरेखा उपलब्ध कराना है।
  • WHO FCTC की धारा 15 में शामिल प्रमुख तंबाकू आपूर्ति कटौती रणनीति में सभी तरह के अवैध व्यापार यानी तस्करी, अवैध निर्माण तथा जालसाजी सहित सभी तरह के अवैध व्यापार की समाप्ति की परिकल्पना की गई है।
  • इसी के अनुरूप यह प्रोटोकॉल  विकसित किया गया है और सम्मेलन में शामिल पक्षों (Conference of Parties – COP) द्वारा अपनाया गया है।
  • सीओपी एफसीटीसी की गवर्निंग बॉडी है।
  • प्रोटोकॉल दस भागों में विभाजित है और इसमें 47 धाराएँ है।

स्रोत : इकोनॉमिक टाइम्स एवं पी.आई.बी.

 

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018 

 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-11 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।)
(खंड-13 : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायो-टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता।)

DOT

चर्चा में क्यों?
हाल ही में दूरसंचार विभाग (DOT) ने नई दूरसंचार नीति का मसौदा, ‘राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018’ के नाम से जारी किया है। ध्यातव्य है कि इसके तहत, वर्ष 2022 तक 40 लाख नए रोजगार सृजन करने के महत्त्वपूर्ण लक्ष्य के साथ ही अन्य कई सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख बिंदु

    • इस नई पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत, टेलिकॉम सेक्टर को कर्ज से उबारने पर ध्यान दिया गया है।
    • इसके साथ ही टेलिकॉम कंपनियों की लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम शुल्क की समीक्षा भी की जाएगी।
    • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में कारोबार को आसान बनाने पर भी ज़ोर दिया गया है।

user

  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में निम्नलिखित लक्ष्यों का निर्धारण किया गया है-
    ♦ 2020 तक सभी ग्राम पंचायतों को 1 gbps ब्रॉडबैंड की सुविधा प्रदान कराना ।
    ♦ 2022 तक 10 gbps ब्रॉडबैंड की सुविधा प्रदान कराना।
    ♦ टेलिकॉम सेक्टर में 100 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना।
    ♦ 50 mbps स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध करवाना।
    ♦ 40 लाख नए लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाना।
    ♦ 2020 तक यूनिक मोबाइल सब्सक्राइबर घनत्व (unique mobile subscriber density) को 55 तथा 2022 तक 65 तक बढ़ाना।
  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत, ‘राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान’(National Broadband Mission) की स्थापना की बात कही गई है, जो USOF और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के वित्त पोषण माध्यम से सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड की पहुँच सुनिश्चित करेगा।
  • इसके साथ ही नई नीति के तहत, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (SCT) को मज़बूत करने के बारे में भी उल्लेख किया गया है।
  • 50 प्रतिशत घरों तक लैंडलाइन ब्रॉडबैंड की पहुँच सुनिश्चित करना तथा लैंडलाइन पोर्टेबिलिटी सेवाएँ प्रारंभ करना।
  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में डिजिटल संचार के लिये टिकाऊ और किफायती पहुँच सुनिश्चित करने हेतु “स्पेक्ट्रम की इष्टतम मूल्य निर्धारण”(Optimal Pricing of Spectrum) की नीति अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिये मिड बैंड स्पेक्ट्रम, विशेष तौर पर 3 GHz से 24 GHz रेंज को पहचानने का प्रस्ताव निहित है।
  • बढ़ती मांग को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय प्रचलन के अनुसार E (71-76/81-86 GHz) और V (57-64 MHz)  बैंड में मोबाइल टावरों के बीच संकेतों को प्रेषित करने के लिये उच्चतम रोडमैप का रेखांकन किया गया है।
  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में ऋण के बोझ से दबे दूरसंचार क्षेत्र को उबारने का प्रयास भी शामिल है।
  • ऋण के बोझ से दबे दूरसंचार क्षेत्र को उबारने के लिये दूरसंचार कंपनियों की लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम शुल्क की समीक्षा करना इस ड्राफ्ट में शामिल है। गौरतलब है कि इन सभी शुल्कों के कारण दूरसंचार सेवा की लागत बढ़ती है।
  • डिजिटल संचार उपकरण, बुनियादी ढाँचें और सेवाओं पर कर तथा लेवी को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव भी इस ड्राफ्ट में निहित है।
  • नई पॉलिसी के ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य निवेश, नवाचार और उपभोक्ता हित को प्रभावित करने वाले  विनियामक बाधाओं और नियामक बोझ को कम करना है।

निष्कर्ष: विभिन्न सेवाओं की आपूर्ति के लिये संचार आज सबसे अहम घटक है। संचार क्षेत्र के लिये एक व्यवस्थित बाज़ार और स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा वाले माहौल का होना अति आवश्यक है। भारत, चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार उपभोक्ता बाज़ार है और इसमें दुनिया का सबसे सफलतम दूरसंचार बाज़ार बनने की क्षमता है। यदि 2022 तक भारत इन सभी लक्ष्यों की प्राप्ति कर लेता है तो अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ के आईसीटी विकास सूचकांक (ICT) में 134वाँ रैंक के साथ 50  शीर्ष देशों में शामिल हो जाएगा किंतु इसके लिये विभिन्न मंत्रालयों के बीच बड़े समन्वय की आवश्यकता होगी और सरकार द्वारा इस नीति के सुचारु क्रियान्वयन के साथ ही टेलिकॉम क्षेत्र में ओम्बुड्समैन की नियुक्ति करना भी आवश्यक है, ताकि इस क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जा सके।

स्रोत : बिज़नेस लाइन, टाइम्स ऑफ़ इंडिया

 

क्रिप्टोकरेंसी के विनियमन का प्रयास

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

cryptography

चर्चा में क्यों? 
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने) अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान बैंकों समेत सभी विनियामक एजेंसियों को क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency  से निपटने हेतु किसी भी व्यक्ति या इकाई द्वारा आभासी मुद्राओं (VC) के व्यवसाय को रोकने के लिये निर्देशित किया था।

प्रमुख बिंदु

  • RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को आभासी मुद्राओं में काम करने वाले लोगों की सभी सेवाओं को रोकना है।
  • इसके तहत ऐसे व्यक्तियों के आभासी मुद्रा में विभिन्न गतिविधियों, जैसे- खातों को बनाए रखना, पंजीकरण करना, समाशोधन करना(clearing), आभासी टोकन के माध्यम से ऋण देना, संपार्श्विक(collateral ) आदि को रोकना है।
  • RBI और वित्त मंत्रालय ने बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी को पोंजी स्कीम की तरह माना है और इन्हें मान्यता नहीं दी है।
पोंजी स्कीम

  • पोंजी स्कीम से आशय ऐसी फर्जी योजनाओं अथवा निवेश से है, जिसमें संचालक पुराने निवेशकों को रिटर्न नए निवेशकों से प्राप्त धनराशि से देता है।
  • यह एक ऐसी स्कीम होती है जिसमें किसी व्यावसायिक गतिविधि या कारोबार में पैसा नहीं लगाया जाता, बल्कि कुछ व्यक्तियों से पैसा इकठ्ठा कर एक व्यक्ति को रिटर्न के रूप में दे दिया जाता है।
  • इस  प्रकार यह एक चेन का रूप ले लेती है और जिसमें बाद में पैसा लगाने वाले ज्यादातर लोगों का पैसा बर्बाद हो जाता है।
  • साथ ही नीति निर्माताओं ने यह आशंका व्यक्त की है कि क्रिप्टोकरेंसियाँ, फिएट मुद्रा के मूल्य का वैकल्पिक स्रोत होने की वजह से इसका इस्तेमाल आतंकी फंडिंग, तस्करी और मनी लांड्रींग जैसे गैर-कानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है।
  • गौरतलब है कि ‘फिएट क्रिप्टोकरेंसी’ एक डिजिटल मुद्रा है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किया जाएगा।

क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) क्या है?

  • यह एक डिजिटल या आभासी मुद्रा है जिसमें सुरक्षा के लिये क्रिप्टोग्राफी तकनीक उपयोग में लाई जाती है। इसकी सुरक्षा वैशिष्ट्य के कारण इसका जाली रूप बनाना मुश्किल है।
  • इसे किसी केन्द्रीय या सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं किया जाता है। अतः सैद्धांतिक रूप से यह सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त है।
  • सन् 2009 में किसी समूह या व्यक्ति ने सतोशी नाकामोतो के छद्म नाम से ‘बिटकोइन’ के नाम से पहली क्रिप्टोकरेंसी बनाई।

क्या है फिएट और नॉन-फिएट क्रिप्टोकरेंसी?

  • “नॉन-फिएट” क्रिप्टोकरेंसी (“non-fiat” cryptocurrency) को लेकर भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ-साथ सरकारें भी समय-समय पर एडवाइजरी ज़ारी करती रहती हैं।
  • एक ‘नॉन-फिएट’ क्रिप्टोकरेंसी जैसे कि बिटकॉइन, एक निजी क्रिप्टोकरेंसी है। जबकि ‘फिएट क्रिप्टोकरेंसी’ एक डिजिटल मुद्रा है जो देश के केद्रीय बैंक द्वारा जारी किया जाता है।
  • “नॉन-फिएट” क्रिप्टोकरेंसी को लेकर तमाम तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं और यह तकनीकी उन्नयन विनाशकारी साबित हो सकता है।
  • यदि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कोई आभासी मुद्रा जारी की जाती है, तो उसे फ़िएट क्रिप्टो-करेंसी कहा जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि सभी क्रिप्टो-करेंसी बिटकॉइन नहीं हैं, जबकि सभी बिटकॉइन क्रिप्टो-करेंसी हैं। बिटकॉइन (bitcoin), एथ्रॉम (ethereum) और रिप्पल (ripple) कुछ लोकप्रिय क्रिप्टो-करेंसी हैं।

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क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता के कारण 
निजता बनाए रखने में मददगार: 

  • क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये लेन-देन के दौरान छद्म नाम एवं पहचान बताए जाते हैं। ऐसे में अपनी निजता को लेकर अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तियों को यह माध्यम उपयुक्त जान पड़ता है।

एक लागत-प्रभावी विकल्प:

  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन संबंधी लागत अत्यंत ही कम है। धरेलू हो या अंतर्राष्ट्रीय किसी भी लेन-देन की लागत एक समान ही होती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये होने वाले लेन-देन में ‘थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन’ (third party certification) की आवश्यकता नहीं होती। अतः धन एवं समय दोनों की बचत होती है।

न के बराबर हैं प्रवेश जनक बाधाएँ:

  • गौरतलब है कि बैंक में अकाउंट खोलने से लेकर लगभग सभी लेन-देन के लिये कई तरह के प्रमाण पत्रों की ज़रूरत होती है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी के मामले में ऐसा नहीं है।
  • वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले लेन-देन के लिये भी कई तरह की औपचारिकताओं से गुज़रना होता है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले लेन-देन में इन बातों का संज्ञान नहीं लिया जाता है।

पारंपरिक बैकिंग व्यवस्था का एक विकल्प: 

security

  • बैंकिंग प्रणालियों तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले लेन-देन पर सरकार का सख्त नियंत्रण होता है।
  • वहीं क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्त्ताओं को राष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम के प्रत्यक्ष नियंत्रण के बाहर धन के आदान-प्रदान का एक विश्वसनीय और सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है।

ओपन सोर्स पद्धति:

  • गौरतलब है कि अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म ओपन सोर्स पद्धति पर आधारित होते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के सॉफ्टवेयर कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहते हैं।
  • इसका प्रभाव यह होता है कि क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफार्म में लगातार सुधार की संभावनाएँ बनी रहती हैं।

वित्तीय दंड से सुरक्षा:

  • विदित हो कि सरकारों के पास बैंक खाते को फ्रीज या जब्त करने का अधिकार है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के मामले में वे ऐसा नहीं कर सकती हैं।
  • अतः सरकार के नियंत्रण से बचाव के एक प्रभावकारी विकल्प के रूप में भी क्रिप्टोकरेंसी का प्रयोग किया जा रहा है।

क्रिप्टोकरेंसी का प्रचलन खतरनाक क्यों?
एक असुरक्षित मुद्रा:

  • क्रिप्टोकरेंसी की सम्पूर्ण व्यवस्था के ऑनलाइन होने के कारण इसकी सुरक्षा कमज़ोर हो जाती है और इसके हैक होने का खतरा बना रहता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी समस्या है इसका ऑनलाइन होना और यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी को एक असुरक्षित मुद्रा माना जा रहा है।

crypto-currency

देश की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: 

  • यह ‘मुख्य वित्तीय सिस्टम’ और ‘बैंकिंग प्रणाली’ से बाहर रहकर काम करती है। यही कारण है कि इसके स्रोत और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न उठते रहते हैं।
  • इस डिजिटल मुद्रा को फ्रॉड, हवाला मनी और आतंकी गतिविधियों को पोषित करने वाली मुद्रा के रूप में संबोधित किया जाता रहा है।

नियंत्रण एवं प्रबन्धन की समस्या:

  • क्रिप्टो-करेंसी से संबंधित एक बड़ी समस्या इसके नियंत्रण एवं प्रबंधन की भी है। भारत जैसे कई देशों ने अभी तक इसे मुद्रा के रूप में स्वीकृति प्रदान नहीं की है, ऐसे में इसका प्रबंधन एक बड़ी समस्या है।
  • आर्थिक जानकारों का भी मानना है कि इसकी तकनीकी जानकारी रखे बिना इसमें निवेश करने के भारी दुष्परिणाम हो सकते हैं।

पर्यावरणीय चिंताएँ: 

  • गौरतलब है कि प्रत्येक बिटकॉइन लेन-देन के लिये लगभग 237 किलोवाट बिजली की खपत होती है और इससे प्रतिघंटा लगभग 92 किलो कार्बन का उत्सर्जन होता है।

स्रोत: द हिंदू