UPSC DAILY CURRENT 04-09-2018

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कृष्ण कुटीर का संबंध निम्लिखित में से किससे है?

A) अनाथ बच्चों के लिये समर्पित एक सामुदायिक आवास
B) एक आधुनिक गौशाला
C) विधवा महिलाओं के लिये निर्मित एक विशेष गृह
D) खादी ग्रामोद्योग की एक नई पहल

उत्तर: (c)
व्यख्या: 

  • कृष्ण कुटीर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मंत्रालय की स्वाधार गृह योजना के तहत 1000 विधवाओं के लिये निर्मित एक विशेष गृह है और किसी सरकारी संगठन द्वारा सृजित अपनी तरह का अब तक का सबसे बड़ा सुविधा केंद्र है। विधवाओं हेतु गृह ‘कृष्ण कुटीर’ का निर्माण उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा के वृंदावन में राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (NBCC) द्वारा 57.48 करोड़ रुपए (भूमि की लागत सहित) की लागत से 1.4 हेक्टेयर भूमि पर किया गया है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संबंधित नीतिगत मामलों पर सलाह देने के लिये  मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजय राघवन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
  2. यह समिति नीतियों और निर्णयों के निर्माण और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करेगी, कार्रवाई-उन्मुख और आने वाले समय के अनुकूल सलाह प्रदान करेगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (c)
व्याख्या : 

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संबंधित नीतिगत मामलों पर सलाह देने के लिये  एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। PM-STIAC (Prime Minister’s Science, Technology and Innovation Advisory Council) के रूप में नामित 21 सदस्यीय समिति, जिसमें एक दर्जन सदस्य विशेष रूप से आमंत्रित हैं, की अध्यक्षता मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजय राघवन करेंगे। अतः कथन 1 सही है।
  • यह समिति नीतियों और निर्णयों के निर्माण और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करेगी, कार्रवाई-उन्मुख और आने वाले समय के अनुकूल सलाह प्रदान करेगी तथा देश में सामाजिक आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिये विज्ञान और तकनीकी को निर्देशित करने में सहायता करेगी। यह शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग इत्यादि में नवाचार लाने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। PM-STIAC प्रभावी रूप से SAC-कैबिनेट और SAC-PM (2014 से चल रही वैज्ञानिक सलाहकार समितियाँ) को भंग कर देगी। अतः कथन 2 सही है।
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सिंधु जल समझौता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच दुबई में भारत-पाकिस्तान स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) की 120वीं बैठक संपन्न हुई।
  2. इस समझौते के तहत पश्चिमी नदियों पर भारत का असीमित अधिकार है तथा भारत इन 6 नदियों का 30% जल पाकिस्तान को देता है और 70% जल का उपभोग स्वयं करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच लाहौर में भारत-पाकिस्तान स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) की 115वीं बैठक संपन्न हुई। इस बैठक के परिणामस्वरूप भारत ने पाकिस्तान को पाकल दुल और लोअर कलनाई जलविद्युत परियोजनाओं के स्थलों का मुआयना करने के लिये आमंत्रित किया है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • 19 सितंबर, 1960 को भारत और पाकिस्तान के मध्य हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौते के तहत छह नदियों—व्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को दोनों देशों के बीच बाँटा गया था। 3 पूर्वी नदियों का नियंत्रण भारत के पास है; इनमें व्यास, रावी और सतलज आती हैं तथा 3 पश्चिमी नदियों का नियंत्रण पाकिस्तान के पास है; इनमें सिंधु, चिनाब और झेलम आती हैं। पश्चिमी नदियों पर भारत का सीमित अधिकार है। भारत इन 6 नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को देता है और 20% पानी भारत के हिस्से आता है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
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चौथे अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद कॉन्ग्रेस का आयोजन कहाँ किया जा रहा है?

A) रूस में
B) अमेरिका में
C) डेनमार्क में
D) नीदरलैंड में

उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री श्रीपद येस्सो नाइक नीदरलैंड में चौथे अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद कॉन्ग्रेस का उद्घाटन करेंगे। 1-4 सितंबर, 2018 तक चलने वाली इस कॉन्ग्रेस का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय महर्षि आयुर्वेद फाउंडेशन, नीदरलैंड; अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कॉन्ग्रेस, नई दिल्ली एवं अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद अकादमी, पुणे द्वारा नीदरलैंड में भारतीय दूतावास के सहयोग से संयुक्त रूप से किया जा रहा है यह कॉन्ग्रेस नीदरलैंड एवं यूरोप को उसके पड़ोसी देशों में आयुर्वेद के संवर्द्धन एवं प्रचार पर फोकस करेगी।
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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) निम्नलिखित में किसके द्वारा प्रकाशित किया जाता है?

A) केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय
B) औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग
C) केंद्रीय श्रम ब्यूरो
D) उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय

उत्तर : (a)
व्याख्या :

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production) प्रत्येक माह केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा संकलित एवं प्रकाशित किया जाता है।
  • हाल ही में CSO द्वारा इसके आधार वर्ष (Base year) को वर्ष 2004-05 से परिवर्तित कर 2011-12 कर दिया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि IIP में आधार वर्ष के साथ-साथ वस्तुओं एवं भारांश में भी परिवर्तन किया गया है।

 

मोवेलो साइक्लोथोन

Movelo Cyclothon

नीति आयोग ने शहरों को साइकिल के अनुकूल बनाने के लिये एक अनोखा कदम उठाते हुए मोवेलो साइक्लोथोन (Movelo Cyclothon), स्वच्छता तथा परिवहन के सुलभ तरीके को बढ़ावा देने के लिए एक साइकिल रैली, की शुरुआत की।

  • इस साइकिल रैली की शुरुआत वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए आयोजित किये जाने वाले गतिशीलता सप्ताह के अंतर्गत किया गया।

‘गतिशीलता सप्ताह’ के बारे में:

  • ‘गतिशीलता सप्ताह’ में 31 अगस्त, 2018 से 6 सितंबर, 2018 तक 7 दिनों के अंदर 17 कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है।
  • ये कार्यक्रम गतिशीलता के क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत को सुविधाजनक बनाएंगे।

वैश्विक गतिशीलता शिखर सम्मेलन के बारे में: 

  • इसका आयोजन नीति आयोग द्वारा विभिन्न मंत्रालयों व उद्योग जगत के सहयोग से किया जाएगा।
  • इसमें विश्वभर के राजनेता तथा उद्योगपति, शोध संस्थान, शिक्षा जगत और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
  • इस सम्मेलन से सरकार के लक्ष्यों यथा बिजली से चलने वाले वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण तथा रोज़गार के अवसरों के सृजन आदि को प्रोत्साहन मिलेगा।

सम्मेलन के मुख्य विषय 

♦ सार्वजनिक पारगमन सुविधा पर विचार करना।
♦ आँकड़ों का विश्लेषण और मोबिलिटी।
♦ परिसंपत्ति ऊपयोगिता एवं सेवाएँ।
♦ वैकल्पिक ऊर्जा।
♦ व्यापक विद्युतीकरण।
♦ माल परिवहन।

नेता एप

App NETA

हाल ही में नेशनल इलेक्टोरल ट्रांसफॉर्मेशन एप (National Electoral Transformation App- NETA) लॉन्च किया गया। उल्लेखनीय है कि इस एप को पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा लॉन्च किया गया।

  • यह एप एक ऐसा मंच है जहाँ मतदाता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यों की समीक्षा और उनका मूल्यांकन कर सकते हैं और साथ ही प्रतिनिधियों को उनके कर्त्तव्यों के लिये ज़िम्मेदार भी ठहरा सकते हैं।
  • यह एप युवा आईटी विशेषज्ञ प्रथम मित्तल द्वारा विकसित किया गया है।
  • अमेरिका की समर्थन प्रणाली से प्रेरित यह एप उपयोगकर्त्ताओं को अपने विधायकों और सांसदों का मूल्यांकन करने की अनुमति देता है।
  • राजस्थान के अजमेर और अलवर निर्वाचन क्षेत्रों में फरवरी, 2018 के उपचुनाव के दौरान इस एप को प्रस्तुत किया गया था तथा बाद में इसका उपयोग मई 2018 में विधानसभा चुनावों से पहले कर्नाटक में किया गया था।
मिल बाँचें कार्यक्रम

Madahy Pradesh

  • हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में मिल-बाँचें कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • राज्य के सरकारी स्कूलों और समाज के बीच शुरू किया जाने वाला यह कार्यक्रम अपनी तरह का पहला संवादात्मक कार्यक्रम है।
  • 80,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूलों को उपहार देने की इच्छा व्यक्त की है। इन उपहारों में किताबों के अलावा अन्य वस्तुएँ शामिल हैं जो छात्रों के लिये उपयोगी हो सकती हैं।
  • राज्य में इस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य बच्चों का बहु-आयामी विकास करना है।
  • ‘मिल-बाँचें मध्य प्रदेश’ कार्यक्रम के लिये पंजीकृत 2 लाख से अधिक स्वयंसेवकों में 820 इंजीनियर, 843 डॉक्टर, 36 हज़ार निजी क्षेत्र के कर्मचारी, 19 हज़ार सार्वजनिक प्रतिनिधि और लगभग 45 हज़ार सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं।

 

पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिये एनजीटी द्वारा उठाया गया कदम

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

Conserve Ghats

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने केरल समेत छह पश्चिमी घाट वाले राज्यों को उन गतिविधियों के लिये पर्यावरणीय मंज़ूरी देने से रोक दिया है जो पर्वत श्रृंखलाओं के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

प्रमुख बिंदु

  • माधव गाडगिल के नेतृत्व वाली पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) की रिपोर्ट ने राज्य में राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया था। इस रिपोर्ट का विरोध अधिकांश राजनीतिक दलों और चर्च के एक वर्ग ने किया था।
  • इस पैनल ने निर्देश दिया था कि पश्चिमी घाटों के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की सीमा जिसे केंद्र सरकार ने पहले अधिसूचित किया था, को हाल ही में केरल में आई बाढ़ के संदर्भ में कम नहीं किया जाना चाहिये।
  • अधिकरण की न्यायपीठ ने अपने आदेश में इस बात की विशेष रूप से व्याख्या की कि इन क्षेत्रों की मसौदा अधिसूचना में कोई भी बदलाव पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, विशेष तौर पर केरल की हालिया घटनाओं को देखते हुए। न्यायपीठ द्वारा जारी किया गया यह आदेश गोवा फाउंडेशन की दायर याचिका के संदर्भ में था।
  • पैनल की प्रमुख न्यायपीठ ने पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF and CC) को 26 अगस्त को समाप्त होने वाली पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर मसौदा अधिसूचना को दोबारा प्रकाशित करने की अनुमति दी थी। साथ ही पैनल ने आदेश दिया कि मामले का निपटारा छः महीने के भीतर किया जाए।
  • इसने यह आदेश दिया कि पुन: प्रकाशित अधिसूचना का मसौदा ट्रिब्यूनल के रिकॉर्ड में रखा जाएगा।

न्यायपीठ ने देरी के लिये चेताया

  • अधिकरण ने अधिसूचना के संबंध में आपत्तियों को दर्ज करने में देरी के लिये पश्चिमी घाट वाले राज्यों की आलोचना की और पाया कि “राज्यों की आपत्तियों के कारण देरी पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिये अनुकूल नहीं हो सकती है” और मामले को जल्द-से-जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिये।
  • इस पीठ की अध्यक्षता एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल द्वारा की गई तथा न्यायमूर्ति एसपी वांगडी सदस्य के रूप में और नागिन नंदा विशेषज्ञ सदस्य के रूप में इसमें शामिल थे।
  • पूर्व में WGEEP ने पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अधिक विस्तृत क्षेत्र को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। हालाँकि कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाले उच्च स्तरीय कार्य समूह जिसे पर्यावरण मंत्रालय द्वारा QSERP रिपोर्ट की जाँच के लिये नियुक्त किया गया था, ने इसे कम कर दिया था। मंत्रालय ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर मसौदा अधिसूचनाएँ जारी कर दी थीं।
  • अधिकरण की प्रमुख न्यायपीठ, जिसने यह उल्लेख किया था कि पश्चिमी घाट क्षेत्र की पारिस्थितिकी गंभीर खतरे में है, ने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि पश्चिमी घाट क्षेत्र सबसे धनी जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण

  • पर्यावरण संरक्षण एवं वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्रगामी निपटारे के लिये राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के अंतर्गत 18 अक्तूबर, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना की गई।
  • यह एक विशिष्ट निकाय है जो बहु-अनुशासनात्मक समस्याओं वाले पर्यावरणीय विवादों के निपटारे हेतु आवश्यक विशेषज्ञता द्वारा सुसज्जित है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसकी अन्य चार पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं।
  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं तथा इसमें 10 न्यायिक सदस्य होते हैं जो विभिन्न उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं। पर्यावरण संबंधी मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले 10 अन्य सदस्यों को भी न्यायाधिकरण में शामिल किया जाता है।
  • न्यायाधिकरण को यह अधिकार प्राप्त है कि वह पर्यावरण संबंधी विभिन्न मुद्दों पर स्वत: संज्ञान ले सकता है। पर्यावरणीय क्षति पहुँचाने या नियमों का उल्लंघन करने के दोषी लोगों को दंडित कर सकता है, व्यक्तिगत रूप से 10 करोड़ रुपए या किसी कंपनी पर 25 करोड़ रुपए का दंड लगा सकता है तथा सश्रम कारावास की सज़ा भी सुना सकता है।