UPSC DAILY CURRENT 05-06-2018

[1]

इंटरस्टेलर मैपिंग और एक्सेलेरेशन प्रोब मिशन (आईएमएपी) के संदर्भ में निम्न्लिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. वर्ष 2024 में नासा द्वारा इस मिशन को लॉन्च किये जाने की उम्मीद है, जो इंटरस्टेलर अंतरिक्ष के किनारों से पृथ्वी पर स्ट्रीमिंग कणों का नमूना, विश्लेषण और नक्शा लेने में सक्षम होगा।
  2. ‘ब्रह्मांडीय फ़िल्टर’ कैसे काम करता है, यह मिशन इस पहेली को भी हल करेगा।
  3. यह मिशन हेलीओस्फीयर में ब्रह्मांडीय किरणों की पीढ़ी के बारे में हमारी जानकारी को बढ़ा सकता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर (D)
व्याख्या:

NASA

  • नासा ने 2024 में लॉन्च करने के लिये एक विज्ञान मिशन का चयन किया है, जो इंटरस्टेलर अंतरिक्ष के किनारों से पृथ्वी पर स्ट्रीमिंग कणों का नमूना, विश्लेषण और नक्शा लेने में सक्षम होगा। अतः पहला कथन सत्य है।
  • इंटरस्टेलर मैपिंग और एक्सेलेरेशन प्रोब (आईएमएपी) मिशन शोधकर्त्ताओं को हेलीओस्फीयर की सीमा को समझने में मदद करेगा। § यह आसपास स्थित एक प्रकार का चुंबकीय बुलबुला है, जो हमारे सौर मंडल की रक्षा करेगा।
  • यह ऐसा क्षेत्र है, जहाँ से सूर्य से कणों का निरंतर प्रवाह बना रहता है और जिसे सौर हवा कहा जाता है। § ये सौर हवाएँ शेष आकाशगंगा की सामग्री के साथ टकराती हैं तथा यह टकराव हेलीओस्फीयर में प्रवेश करने वाले हानिकारक कॉस्मिक विकिरण की मात्रा को सीमित करता है।
  • गौरतलब है कि आईएमएपी इन कणों को इकट्ठा कर विश्लेषित करेगा, जो इसे बनाते हैं।
  • आईएमएपी इस समझ में विस्तार करने के लिये महत्त्वपूर्ण है कि यह ‘ब्रह्मांडीय फ़िल्टर’ कैसे काम करता है। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।
  • मिशन का एक अन्य उद्देश्य हेलीओस्फीयर में ब्रह्मांडीय किरणों की पीढ़ी के बारे में और जानना है। अतः तीसरा कथन भी सत्य है। § यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से सूर्य की ओर एक लाख मील (1.5 मिलियन किलोमीटर) की दूरी स्थित होगा, जिसे पहला लग्रेंज बिंदु (Lagrange point) या एल1 कहा जाता है।
  • मिशन अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू अनुसंधान संगठनों और विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान किए गये 10 विज्ञान उपकरणों को ले जाएगा।
[2]

हाल ही में किस राज्य द्वारा सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और उत्पीड़न के मामलों में खतरनाक वृद्धि के चलते ‘अभय’ नामक ऐप अपनाये जाने की योजना है?

A) आंध्र प्रदेश
B) राजस्थान
C) हिमाचल प्रदेश
D) दिल्ली
Hide Answer –

उत्तर (A)
व्याख्या:

  • सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और उत्पीड़न के मामलों में खतरनाक वृद्धि के चलते, आंध्र प्रदेश सरकार ‘अभय’ नामक सुरक्षा तंत्र परियोजना शुरू करने की योजना बना रही है। अतः विकल्प (A) सही है। 
  • आईओटी (इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स) पर आधारित इस परियोजना की लागत 58 करोड़ रुपए है।
  • यह परियोजना कृष्णा और विशाखापत्तनम ज़िलों में एक पायलट परियोजना के रूप में लागू की जाएगी, जहाँ शहरी महिलाओं और कॉलेज जाने वाली लड़कियों की जनसंख्या अधिक है।
  • अक्टूबर तक ऑटो-रिक्शा में लगभग 50,000 आईओटी डिवाइस बक्से स्थापित किए जाएंगे।
  • डिवाइस में रीयल टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और डेटा संचार दोनों के लिये एक अंतर्निहित ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) और मोबाइल संचार के लिये ग्लोबल सिस्टम (जीएसएम) या जनरल पैकेट रेडियो सर्विस (जीपीआरएस) होगा।
  • यात्री के बारे में कोई व्यक्तिगत जानकारी मांगे बिना, ऐप उसे फोटो कैप्चर करने, अलर्ट भेजने, मार्ग और वाहन स्थान को अभिभावक को साझा करने में सक्षम बनाएगा।
  • ऐप में एक शाउट (shout ) बटन भी होगा, जिसे दबाए जाने पर वीडियो या ऑडियो स्थानीय भाषा में पुलिस और अभिभावक को ऑटो-अलर्ट करेगा।
[3]

हाल ही में एक अंतर्राष्ट्रीय टीम द्वारा किये गये एक शोध, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बीच लवणता के व्यापक अंतर से संबंधित है, के लिये किस भारतीय शोध जहाज का उपयोग किया गया था?

A) सिंधु संकल्प
B) सिंधु साधना
C) गवेशनी
D) सागर सुक्ति
Hide Answer –

उत्तर (B)
व्याख्या:

  • शोधकर्त्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम द्वारा दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में व्यापक रूप से महासागर-वायुमंडल इंटरफ़ेस और वातावरण के भौतिक, रासायनिक और जैविक मानकों के स्वस्थाने डेटासेट अवलोकन को प्रारंभ किया गया है।
  • भारत में गर्मियों के मॉनसून से जुड़े मौसम प्रणालियों को नियंत्रित करने में महासागर-वायुमंडल इंटरफ़ेस एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • भारत के शोध जहाजों में से एक सिंधु साधना पर डेटासेट एकत्र करने के लिये बंगाल की खाड़ी सीमा परत प्रयोग (BoBBLE) के हिस्से के रूप में फील्ड कार्यक्रम चलाया गया था। अतः विकल्प (B) सही है।
  • समुद्र के पानी में लवणता, चालकता, तापमान, ऑक्सीजन की कमी और क्लोरोफिल सामग्री को मापने के लिये दो महीने (जून से जुलाई 2016) के इस अध्ययन में कई प्लेटफार्मों जैसे-जहाज, महासागर, ग्लाइडर्स और एग्रोफ्लोट्स आदि का प्रयोग किया गया था।
  • अध्ययन के मुताबिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बीच लवणता का अंतर बड़ा व्यापक है।
  • अरब सागर जिसे बहुत ताजा पानी नहीं मिलता यानी यहाँ कम नदियों का विसर्जन होता है अतः वह बंगाल की खाड़ी की अपेक्षा अधिक लवणीय है।
  • शोध मुख्य रूप से श्रीलंका के पूर्व में पानी पर केंद्रित था, जो ग्रीष्मकालीन मॉनसून धारा और श्रीलंकाई डोम के रूप में चिह्नित है।
  • शोधकर्त्ता अब यह समझने के लिये आँकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं कि दक्षिणी बंगाल की खाड़ी से मानसून प्रणाली और महासागर वायुमंडलीय तंत्र किस प्रकार अंतर्संबंधित हैं।
[4]

इंडो-पैसिफिक कमांड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  • यह अमेरिका की मुख्य लड़ाकू कमांड है, जिसके अंतर्गत बहुत से अन्य देश भी शामिल हैं।
  • प्रशांत एवं हिंद महासागर के साझेदारों के साथ अमेरिका के संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिये यह बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  • इसका उद्देश्य चीन के बढ़ते आर्थिक एवं सैन्य प्रभाव को नियंत्रित करना है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर (D)
व्याख्या:

इंडो-पैसिफिक कमांड (Indo-Pacific Command) 

indo-pacific-command

हाल ही में अमेरिका ने अपने सबसे पुराने एवं सबसे बड़े सैन्य कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड करके भारत के महत्त्व को प्रदर्शित किया है।

पहले इस कमांड का नाम पैसिफिक कमांड था। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनज़र यह निर्णय लिया है।

इसका उद्देश्य चीन के बढ़ते आर्थिक एवं सैन्य प्रभाव को नियंत्रित करना है। अतः तीसरा कथन भी सही है।  

हिंद और प्रशांत महासागर में बढ़ती कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया हैं।

यह अमेरिका की मुख्य लड़ाकू कमांड है, जिसके अंतर्गत बहुत से अन्य देश भी शामिल हैं। अतः पहला कथन सही है।  

प्रशांत एवं हिंद महासागर के साझेदारों के साथ अमेरिका के संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिये यह बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। अतः दूसरा कथन भी सही है।   

वर्तमान में भारत समेत प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिये पैसिफिक कमांड में तकरीबन 3,75,000 सैन्य और असैन्य कर्मियों को शामिल किया गया है।

यूएस पैसिफिक कमांड  दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूएस पैसिफिक कमांड अथवा पैकोम का गठन किया गया था।

हालाँकि, यहाँ यह जानना अधिक महत्त्वपूर्ण है कि कमांड का नाम बदलने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका द्वारा इस क्षेत्र में अतिरिक्त संसाधन भेजे जाएंगे, बल्कि इसका अर्थ यह है कि यह भारत की बढ़ती सैन्य एवं आर्थिक प्रगति को महत्त्व दे रहा है।

वर्ष 2016 में अमेरिका और भारत के बीच एक-दूसरे के सैन्य अड्डों के इस्तेमाल हेतु एक समझौता किया गया था ताकि सैन्य संसाधनों की आपूर्ति एवं मरम्मत हेतु एक-दूसरे की सहायता की जा सके।

[5]

हीमोफिलिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिससे महिलाएं पीड़ित होती हैं और पुरुष इस बीमारी के वाहक होते हैं।
  2. महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हीमोफिलिया ए और बी अधिक आम हैं।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
Hide Answer –

उत्तर (B)
व्याख्या:

  • विशेषज्ञों ने कहा कि देश में लगभग 16,000 हीमोफिलिया रोगी पंजीकृत हैं और विभिन्न रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि यह संख्या सात गुना ज्यादा हो सकती है।
  • भारत में सभी हीमोफिलिया मामलों में से लगभग 15% की पहचान की जाती है, जबकि शेष अव्यवस्थित हो जाते हैं।

हीमोफीलिया क्या है?

  • यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिससे पुरुष पीड़ित होते हैं और महिलाएं इस बीमारी की वाहक होती हैं। अतः पहला कथन सही नहीं है।
  • जिसमें एक व्यक्ति में ‘क्लोटिंग कारक’ नामक प्रोटीन के निम्न स्तर होते हैं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होता है परिणामस्वरूप रक्त का थक्का नहीं बनता है।
  • 13 प्रकार के ऐसे क्लोटिंग कारक हैं, जो रक्त के प्लेटों के साथ मिलकर थक्का बनाने में मदद करते हैं।
  • वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया के संस्थापक फ्रैंक कैनबेल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस के रूप में मनाया जाता है।

haemophilia

हीमोफिलिया के प्रकार

  • हीमोफिलिया के तीन रूप हैं: जो ए, बी और सी जीनो में एक दोष के कारण होता है।
  • महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हीमोफिलिया ए और बी अधिक आम हैं। अतः दूसरा कथन सही है।
  • जबकि हीमोफिलिया सी बीमारी का एक ऑटोसोमल विरासत रूप है, जिसका अर्थ यह है कि यह पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करता है।

लक्षण

  • इसके लक्षण तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता को इंगित करते हैं, इनमें गंभीर सिरदर्द, लगातार उल्टी, गर्दन का दर्द, अत्यधिक नींद और चोट से लगातार खून बहना आदि शामिल हैं।
  • हीमोफिलिया लाइलाज़ बीमारी है।

 

 

                                                                                सेवा भोज योजना

service-banquet-scheme

भारत सरकार के संस्‍कृति मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिये कुल 325 करोड़ रुपए की लागत से ‘सेवा भोज योजना’ नामक नई योजना शुरू की है।

उद्देश्य

  • इस योजना के तहत भोजन/प्रसाद/लंगर (सामुदायिक रसोई) /भंडारे के लिये घी/तेल/आटा/मैदा/रवा, चावल, दाल, चीनी, बुरा/गुड़ जैसी कच्‍ची सामग्री की खरीदारी पर केंद्रीय वस्‍तु और सेवाकर (सीजीएसटी) तथा एकीकृत वस्‍तु और सेवाकर (आईजीएसटी) का केंद्र सरकार का हिस्‍सा लौटा दिया जाएगा, ताकि लोगों/श्रद्धालुओं को बगैर किसी भेदभाव के निःशुल्‍क भोजन/प्रसाद/लंगर (सामुदायिक रसोई) /भंडारा प्रदान करने वाले परोपकारी धार्मिक संस्‍थानों का वित्‍तीय बोझ कम किया जा सके।

कौन-कौन पात्र होंगे?

  • वित्‍तीय सहायता/अनुदान के लिये आवेदन करने से पहले कम-से-कम पाँच वर्षों तक कार्यरत मंदिर, गुरूद्वारा, मस्जिद, गिरिजाघर, धार्मिक आश्रम, दरगाह, मठ जैसे परोपकारी धार्मिक संस्‍थान और एक महीने में कम-से-कम 5,000 लोगों को निःशुल्‍क भोजन प्रदान करने तथा आयकर की धारा 10 (23बीबीए) के तहत आने वाले संस्‍थान या सोसायटी पंजीकरण अधिनियम (1860 की XXI) के अंतर्गत सोसायटी के रूप में पंजीकृत संस्‍थान अथवा किसी भी अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक धार्मिक संस्‍था के बनने के समय लागू कानून के तहत जन न्‍यास के तौर पर या आयकर अधिनियम की धारा 12 एए के तहत पंजीकृत संस्‍थान इस योजना के तहत अनुदान पाने के पात्र होंगे।

अन्य प्रमुख बिंदु

  • संस्‍कृति मंत्रालय वित्त आयोग की अवधि के साथ समाप्‍त होने वाली समयावधि के लिये पात्र परोपकारी धर्मार्थ संस्‍थान का पंजीकरण करेगा। इसके बाद संस्‍थान के कार्यों का आकलन करने के पश्‍चात् मंत्रालय पंजीकरण का नवीनीकरण कर सकता है।
  • जन साधारण, जीएसटी प्राधिकारियों और संस्‍था/संस्‍थान के लिये पंजीकृत संस्‍थान का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्‍ध होगा।
  • संस्‍था/संस्‍थान को जीएसटी और आईजीएसटी के केंद्र सरकार के हिस्‍से को वापस पाने के लिये इसे राज्‍य स्‍तर पर जीएसटी विभाग के निर्धारित अधिकारी को पंजीकरण की मान्‍यता के दौरान निर्दिष्‍ट प्रारूप में भेजना होगा। सहयोग ज्ञापन, कर्मचारियों या निशुल्‍क भोजन सेवा के स्‍थान को बढ़ाने/कम करने के किसी भी प्रकार के बदलाव के बारे में मंत्रालय को जानकारी देने की ज़िम्‍मेदारी संस्‍थान/संस्‍था की होगी।
  • सभी पात्र संस्‍थानों का दर्पण पोर्टल में पंजीकरण आवश्‍यक है। मंत्रालय को प्राप्‍त हुए सभी आवेदनों की जाँच चार सप्‍ताह के भीतर इस उद्देश्‍य से गठित समिति द्वारा की जाएगी।
  • समिति की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारी ऊपर बताई गई विशेष सामग्रियों पर सीजीएसटी और आईजीएसटी का केंद्र सरकार का हिस्‍सा वापस लौटाने के लिये परोपकारी धार्मिक संस्‍थानों का पंजीकरण करेगा।
देश की पहली आधुनिक फोरेंसिक लैब

CFSL

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (Central Forensic Science Lab-CFSL), चंडीगढ़ में सखी सुरक्षा एडवांस फोरेंसिक डीएनए लैबो‍रेट्री (Sakhi Suraksha Advanced Forensic DNA Laboratory) की आधारशिला रखी। आपराधिक जाँच प्रक्रिया में फोरेंसिक परीक्षण की बहुत अहम भूमिका होती है।

  • यह लैब आदर्श फोरेंसिक लैब के तौर पर स्‍थापित की जा रही है, जल्द ही देश के अन्‍य हिस्‍सों में भी ऐसी ही लैब शुरू की जाएंगी।
  • CFSL, चंडीगढ़ की वर्तमान क्षमता 160 मामले/प्रतिवर्ष से भी कम है और सखी सुरक्षा आधुनिक डीएनए फोरेंसिक लैबोरेट्री से यह क्षमता लगभग 2,000 मामले/प्रतिवर्ष बढ़ जाएगी।
  • अगले तीन माह में पाँच और आधुनिक फोरेंसिक लैब मुंबई, चेन्‍नई, गुवाहाटी, पुणे एवं भोपाल में खुलेंगी, जिससे प्रयोगशालाओं की कुल न्‍यूनतम वार्षिक क्षमता 50,000 मामले हो जाएगी।चेन्‍नई और मुंबई में प्रयोगशालाओं की स्‍थापना महिला और बाल विकास मंत्रालय के कोष से होगी, जबकि शेष तीन लैब की स्‍थापना के लिये वित्तीय सहायता गृह मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाएगी।

दुष्‍कर्म मामलों के लिये विशेष फोरेंसिक किट

  • दुष्‍कर्म मामलों के लिये विशेष फोरेंसिक किट जुलाई तक सभी पुलिस थानों और अस्‍पतालों में वितरित कर दी जाएगी। खराब न होने वाली इस किट का इस्‍तेमाल अप्रदूषित सबूत देने के लिये किया जाएगा।
  • इस किट में सबूत एकत्रित करने के लिये आवश्‍यक उपकरण के साथ लिये जाने वाले साक्ष्‍य/नमूनों की पूरी सूची होगी। इस किट को फोरेंसिक लैब में भेजने से पहले ताला लगाकर बंद कर दिया जाएगा। व्‍यक्ति का नाम, दिनांक और किट बंद करने का समय उस पर दर्ज किया जाएगा।
  • यौन उत्‍पीड़न के मामलों में जाँच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने की आदर्श समयसीमा 90 दिन है। इसके अलावा, जैविक अपराध से संबंधित सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाना ज़रूरी है, ताकि कोई भी जाँच/रिपोर्ट तर्कसंगत तैयार हो सके।
  • वर्तमान में छह CFSL चंडीगढ़, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे और भोपाल तथा प्रत्‍येक राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेश में एक फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला है। इन प्रयोगशालाओं में देश भर के यौन उत्‍पीड़न, आपराधिक पैतृत्‍व और हत्‍या सहित सभी मामलों की फोरेंसिक जाँच की जाती है।
  • महिलाओं से जुड़े मामलों से निपटने के लिये सखी सुरक्षा आधुनिक डीएनए फोरेंसिक प्रयोगशाला में चार इकाइयाँ स्‍थापित की जाएंगी-
    ♦ यौन उत्‍पीड़न और हत्‍या इकाई
    ♦ पैतृत्‍व इकाई
    ♦ मानव पहचान इकाई
    ♦ माइटोकोंड्रियल इकाई
चीन का नया पृथ्वी अवलोकन उपग्रह

satellite

  • हाल ही में चीन ने एक नए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘गाओफेन -6’ (Gaofen-6) का सफल प्रक्षेपण किया। मुख्य रूप से इसका उपयोग कृषि संसाधन अनुसंधान और आपदा निगरानी के लिये किया जाएगा।
  • इस सैटेलाइट को लॉन्ग मार्च-2 डी रॉकेट से उत्तर पश्चिमी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर (Jiuquan Satellite Launch Centre) से प्रक्षेपित किया गया।
  • इसके अतिरिक्त, इसी समय लुओजिया -1 (Luojia-1) नामक एक वैज्ञानिक प्रयोग उपग्रह को भी अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह लॉन्ग मार्च रॉकेट श्रृंखला का 276 वाँ मिशन था।
एक्सोप्लैनेट पर मिले पानी और धातु की उपस्थिति के संकेत

exoplanet

हाल ही में ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज तथा स्पेन के इंस्टीट्यूट डी एस्ट्रोफिसिया डी कैनेरियास के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के संबंध में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वैज्ञानिकों को ग्रैन टेलीस्कोप कैनेरियास की सहायता से कम घनत्व वाले एक एक्सोप्लैनेट पर पानी और धातुओं की उपस्थिति के प्रमाण मिले हैं।

  • डब्ल्यूएएसपी-127बी नामक यह एक्सोप्लैनेट बृहस्पति ग्रह से 1.4 गुना बड़ा है, लेकिन इसकी तुलना में इस एक्सोप्लैनेट का द्रव्यमान 20 फीसदी ही है। अभी तक खोजे गए सभी एक्सोप्लैनेट में इतने कम घनत्व वाला यह अकेला ग्रह है।
  • इस एक्सोप्लैनेट के वातावरण में क्षारीय धातुओं के साथ-साथ सोडियम, पोटैशियम और लीथियम की उपस्थिति के भी संकेत मिले हैं। सोडियम और पोटैशियम की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी एक्सोप्लैनेट की तुलना में इस ग्रह का वायुमंडल स्वच्छ होगा।
  • इसके अतिरिक्त इस एक्सोप्लैनेट पर पानी की उपस्थिति के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
  • डब्ल्यूएएसपी-127बी जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है उस तारे पर भी काफी अधिक मात्रा में लीथियम उपलब्ध है।
  • यही कारण है कि इस एक्सोप्लैनेट पर मौजूद लीथियम के विषय में जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता है ताकि ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में अध्ययन किया जा सके।

स्रोत : द हिंदू, डी.एन.ए एवं पी.आई.बी.