UPSC DAILY CURRENT 06-03-2019

भारतीय अर्थव्यवस्था

RBI ने सात बैंकों पर लगाया जुर्माना

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने स्विफ्ट मैसेजिंग सॉफ्टवेयर के तहत दिये गए निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण 7 बैंकों पर जुर्माना लगाया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने 4 बैंकों – कर्नाटक बैंक (Karnataka Bank) पर 4 करोड़ रुपए, सिटी यूनियन बैंक (City Union Bank) पर 3 करोड़ रुपए, DCB बैंक (DCB Bank) पर 2 करोड़ रुपए तथा करूर वैश्य बैंक लिमिटेड (Karur Vysya Bank Ltd.) पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।
  • इन चार बैंकों के अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक ने इंडियन बैंक (Indian Bank) पर 4 करोड़ रुपए, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (United Bank of India) और इंडियन ओवरसीज़ बैंक (Indian Overseas Bank-IOB) पर 3-3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।
  • इस जुर्माने को बैंकों पर स्विफ्ट संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करने के लिये लगाया गया है जिसको 14 दिनों के अंदर जमा करना अनिवार्य है।

क्या है मामला?

  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 14,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के बाद RBI ने 20 फरवरी, 2018 को एक परिपत्र में स्विफ्ट-संबंधित परिचालन नियंत्रणों के समयबद्ध कार्यान्वयन और सुदृढ़ीकरण को लेकर बैंकों को निर्देशित किया था।
  • कुछ दिन पहले ही भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक और IDBI बैंक ने विभिन्न दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिये उन पर लगाए गए मौद्रिक दंड के बारे में एक्सचेंजों को सूचित किया था।
  • सितंबर 2018 में RBI ने KVB (Karur Vysya Bank) पर परिसंपत्तियों के वर्गीकरण मानदंडों, धोखाधड़ी की रिपोर्ट और चालू खाते खोलने के समय अनुशासन की आवश्यकता पर दिये गए निर्देशों का पालन नहीं करने के लिये 5 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

क्‍या है ‘स्विफ्ट’?

  • SWIFT का तात्पर्य ‘सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस’ (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) है।
  • यह एक तरह का मैसेज भेजने और प्राप्‍त करने वाला नेटवर्क है, जि‍सका इस्‍तेमाल दुनि‍या भर के बैंक और फाइनेंशि‍यल सेवाएँ देने वाली दूसरी संस्‍थाएँ करती हैं।
  • इस नेटवर्क के माध्‍यम से पेमेंट बहुत जल्दी हो जाता है। हर बैंक को उसका एक स्विफ्ट कोड मि‍लता है, जि‍ससे उसकी पहचान होती है।

स्रोत – द हिंदू


भारतीय अर्थव्यवस्था

DIPAM

चर्चा में क्यों?

वित्त मंत्रालय ने केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों (Central Public Sector Enterprises- CPSEs) की गैर-प्राथमिक परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण में तेज़ी लाने के लिये निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के तहत एक विशेष सेल स्थापित करने की योजना बनाई है ।

प्रमुख बिंदु

  • इसके तहत नीति आयोग द्वारा CPSEs की गैर-प्राथमिक परिसंपत्तियों की सूची तैयार की जाएगी।
  • इस सूची पर परामर्शदाता समूह के साथ चर्चा के बाद परिसंपत्तियों को अलग-अलग कर बेचा जा सकता है।
  • इस समूह में प्रशासनिक मंत्रालयों, आर्थिक मामलों के विभाग, निवेश विभाग और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन के अधिकारी शामिल हैं।
  • वित्त मंत्री की अध्यक्षता में विनिवेश पर वैकल्पिक तंत्र द्वारा नीति आयोग की रिपोर्ट ली जाएगी, जिसके बाद CPSEs और संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय मौद्रीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
  • गौरतलब है कि नीति आयोग पहले से ही लगभग 35 CPSEs की पहचान कर चुका है जो खुले बाज़ार में एकमुश्त बिक्री के लिये जा सकते हैं।
  • संपत्ति मौद्रीकरण सेल ही उन लोगों की अचल संपत्ति की बिक्री से संबंधित मामलों को भी देखेगा जो पाकिस्तान या चीन चले गए और अब भारत के नागरिक नहीं हैं।
  • यह केंद्र सरकार की CPSEs की गैर-प्राथमिक परिसंपत्तियों, मुख्य रूप से भूमि और भवन, के मौद्रीकरण के लिये प्रक्रिया और तंत्र अपनाने की समग्र योजनाओं का एक हिस्सा है।

पृष्ठभूमि

  • गैर-प्राथमिक परिसंपत्तियाँ ऐसी संपत्तियाँ हैं जो या तो आवश्यक नहीं हैं या कंपनी के व्यावसायिक कार्यों में उपयोग नहीं की जाती हैं।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में रणनीतिक विनिवेश और शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन के तहत अचल संपत्तियों के मौद्रीकरण के लिये संस्थागत ढांचा तैयार करने की मंजूरी दी है।
  • साथ ही CPSEs की परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की योजना वित्त मंत्रालय की रही है जिसके तहत नीति आयोग इन कपनियों की प्रत्येक गैर-प्राथमिक परिसंपत्तियों की सूची तैयार करेगा।

क्या है DIPAM?

  • विनिवेश विभाग वित्त मंत्रालय के अधीन एक विभाग था।
  • 14 अप्रैल, 2016 से विनिवेश विभाग का नाम बदलकर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) कर दिया गया।

DIPAM के अंतर्गत निम्नलिखित मामले आते हैं:

  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में इक्विटी के विनिवेश सहित इक्विटी में केंद्र सरकार के निवेश से संबंधित सभी मामले।
  • बिक्री या निजी प्लेसमेंट या पूर्ववर्ती केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में केंद्र सरकार की इक्विटी की बिक्री से संबंधित सभी मामले।

स्रोत: द हिन्दू बिज़नस लाइन


भारतीय अर्थव्यवस्था

खुला बाज़ार परिचालन

चर्चा में क्यों?

कुछ समय पूर्व भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations-OMO) के माध्यम से अर्थव्यवस्था में पूंजी डालने का निर्णय लिया था। हाल ही में OMO के ज़रिये पूंजी डालने के बावजूद तरलता परिदृश्य में कमी होने की बात सामने आई है।

प्रमुख बिंदु

  • खुला बाज़ार परिचालन (OMO) धन की कुल मात्रा को विनियमित या नियंत्रित करने के लिये मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिये नियोजित की गई है।
  • RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री या खरीद के माध्यम से मुद्रा आपूर्ति की स्थिति को समायोजित करने के लिये खुले बाज़ार का संचालन किया जाता है।
  • केंद्रीय बैंक, आर्थिक प्रणाली के अंतर्गत तरलता में कमी लाने के लिये सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है और इस प्रणाली को नियंत्रित रखने के लिये सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है।
  • अक्सर ये परिचालन दिन-प्रतिदिन के आधार पर किये जाते हैं, जो बैंकों को उधार देने में मदद के साथ-साथ मुद्रास्फीति को संतुलित करते हैं।
  • RBI द्वारा अर्थव्यवस्था में रुपए के मूल्य को समायोजित करने के लिये अन्य मौद्रिक नीति उपकरणों जैसे रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक तरलता अनुपात के साथ OMO का उपयोग किया जाता है।

क्या है मामला?

  • CARE रेटिंग रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations-OMO) के माध्यम से बाज़ार में डाली गई मुद्रा (12,500 करोड़ रुपए) तथा वेतन और पेंशन के उच्च सरकारी खर्चों के बावजूद 34,266 करोड़ रुपए की कमी आई है।
  • 15 फरवरी को समाप्त पखवाड़े के दौरान गैर-खाद्य ऋण या व्यक्तियों और कंपनियों के लिये ऋण 14.3 प्रतिशत प्रति वर्ष बढ़ा, जो पिछले एक पखवाड़े में 14.4 प्रतिशत (पिछले वर्षों की तुलना में) धीमा था। इसने जमा वृद्धि को पार कर 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
  • बैंक विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च ऋण वृद्धि के बीच कम जमा वृद्धि बैंकिंग प्रणाली में तरलता की कमी में योगदान करने वाला एक कारक रहा है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

युवा विज्ञानी कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization-ISRO) ने इस वर्ष से स्कूली बच्चों हेतु ‘युवा विज्ञानी कार्यक्रम’ (Young Scientist Programme-युविका) नामक एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की है।

प्रमुख बिंदु

  • इसरो द्वारा शुरू किये गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य रूप से अंतरिक्ष के उभरते क्षेत्र में रुचि जगाने के इरादे से युवाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर मूलभूत ज्ञान प्रदान करना है।
  • इस कार्यक्रम के तहत गर्मियों की छुट्टियों के दौरान लगभग दो सप्ताह तक आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेगा।
  • इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये हर साल राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से 3 छात्रों का चयन किया जाना प्रस्तावित है। इसमें ऐसे राज्य शामिल होंगे जो CBSE, ICSE और राज्य के पाठ्यक्रम को कवर करते हैं।
  • 8वीं कक्षा में उत्तीर्ण तथा वर्तमान में 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्र इस कार्यक्रम के लिये पात्र होंगे। इस कार्यक्रम हेतु चयनित छात्रों को इसरो के अतिथिगृह/हॉस्टल में ठहराया जाएगा।
  • पूरे पाठ्यक्रम के दौरान छात्र द्वारा की जाने वाली यात्रा हेतु रेलगाड़ी के द्वितीय श्रेणी का किराया, पाठ्य सामग्री, रहने एवं खाने इत्यादि में आने वाले खर्च का वहन भी इसरो द्वारा ही किया जाएगा।
  • चयनित छात्र को इसरो के रिपोर्टिंग केंद्र तक लाने एवं ले जाने हेतु एक अभिभावक/माता-पिता को भी रेलगाड़ी में द्वितीय श्रेणी के किराये की सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • ध्यातव्य है कि इसरो ने त्रिपुरा में एक इनक्यूबेशन केंद्र विकसित किया है और भविष्य में ऐसे ही चार अन्य केंद्र त्रिची, नागपुर, राउरकेला और इंदौर में विकसित किये जाने की योजना है।

चयन प्रक्रिया

  • इसरो ने भारत में संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासकों से संपर्क किया है ताकि वे अपने संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश से तीन छात्रों के चयन की व्यवस्था कर सकें और इसरो को सूची के बारे में बता सकें।
  • यह चयन शैक्षणिक प्रदर्शन और पाठ्येतर गतिविधियों पर आधारित है, जो स्पष्ट रूप से चयन मानदंड में वर्णित है और जिसे राज्यों के मुख्य सचिवों/संघ शासित प्रदेशों के प्रशासकों को पहले से ही परिचालित कर दिया गया है।
  • ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित छात्रों को चयन मानदंडों में विशेष भारांक दिया गया है। मार्च 2019 के अंत तक प्रत्येक राज्य से चयनित उम्मीदवारों की सूची अपेक्षित है।

स्रोत- पीआईबी