UPSC DAILY CURRENT 07-06-2018

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‘एक टाईप’ और ‘मुक्ता’ पदों का संबंध निम्नलिखित में से किससे है/हैं?

A) साइबर अपराध
B) बिटकोइन
C) फॉण्ट विकसित करने का खुला, सहयोगात्मक और एकरुप मंच
D) जी.एस.टी के ढाँचे को सुपरिभाषित करने वाला मंच
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उत्तर (C)
व्याख्या :

एक टाईप (Ek Type)

  • एक टाईप (Ek Type), यह समविचारिक लोगों द्वारा बनाई गई एक भारतीय टाईप फाउंड्री हैं, जिन्हें भारतीय भाषाओं के विविध फॉण्टस्  विकसित करने में विशेषज्ञता प्राप्त है।
  • लिपि व्याकरण और लिपि परंपरा को मह्त्त्व देते हुए, यह विभिन्न तरह के मानकीकृत फॉण्टस् विकसित करती है, जिनका सभी सॉफ्टवेयर मंचों पर उपयोग किया जा सकता है।
  • एक टाईप में विभिन्न आयु वर्ग और भिन्न-भिन्न कौशल वाले अनुभवी फॉण्ट रचनाकार, अनुसंधानकर्त्ता और शिक्षक मौजूद हैं, जो साथ मिलकर कुशलता का नया स्तर स्थापित करते हैं।
  • फॉण्ट के विकास और बिक्री के अलावा एक टाईप भारतीय मुद्रण कला (टाईपोग्राफी) के प्रलेखन और इसके प्रति जागरूकता विकसित करने के क्षेत्र में कार्य करती है।
  • इसके अलावा यह संस्था नए फॉण्ट रचनाकारों के साथ जुड़कर उन्हें फॉण्ट रचना की विकास प्रक्रिया में शामिल करती है और उन्हें अपने हुनर को सिद्ध करने का एक मंच प्रदान करती है।
  • ‘एक टाईप’ फॉण्ट विकसित करने का खुला, सहयोगात्मक और एकरुप मंच है, जो बहुभाषिक भारत की विविधता में एकता का प्रतीक है।

मुक्ता 

  • मुक्ता मीडिया वेबसाइटों, ब्रांड विज्ञापन और पैकेजिंग, साइनेज, आदि में बहुतायत में प्रयोग किया जाता है।
  • यह विशेष रूप से वहाँ प्रभावी है, जहाँ कई भाषा स्क्रिप्ट एक साथ देखी जाती हैं और वर्तमान में यह पाँच भाषाओं में स्क्रिप्ट उपलब्ध है।
  • जब Google ने फैसला किया कि वे ओपन-सोर्स फोंट में निवेश करेंगे, तो वे दुनिया भर के डिजाइनरों तक पहुँचे।
  • भारत में भाषाओं और लिपियों की अधिकता के कारण अतिरिक्त जटिलता है परिणामतः ऐसे विभिन्न स्क्रिप्ट को प्राप्त करना मुश्किल था, जो समान डिजाइन व्याकरण और एक-दूसरे के साथ सामंजस्य तो बनाये ही रखें साथ ही, उनकी मूल विशेषताओं को भी बनाये रखते हो।
  • इस प्रकार ऐसी समस्याओं को हल करने के लिये एक प्रकार (Ek Type) की स्थापना की गई।
  • उपर्युक्त व्याख्या के अनुसार विकल्प (C) ही सही उत्तर होगा 
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 मालाबार नौसैनिक अभ्यास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह एक नौसैनिक अभ्यास है और इस वर्ष इस युद्धाभ्यास में भारत, अमेरिका तथा कोरिया की नौसेनाएँ भाग लेंगी।
  2. इस अभ्यास का उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिये साझा खतरों और चुनौतियों की विविधता को संबोधित करना है।
  3. इस नौसैनिक अभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्त्व केवल आईएनएस सह्याद्री और एंटी-सबमरीन वारफेयर कार्वेट जैसे स्वदेश निर्मित जहाजों द्वारा किया जाएगा।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (B)
व्याख्या:

ports

मालाबार नौसैनिक अभ्यास 

  • 7 से 16 जून तक अमरीका के गुआम में होने वाले नौसैनिक अभ्यास मालाबार के 22 वें संस्करण में भारत भाग लेगा।
  • गौरतलब है कि भारत, अमेरिका और जापान के बीच होने वाला वार्षिक नौसैनिक अभ्यास है।
  • यह पहली बार है कि मालाबार नौसैनिक अभ्यास अमेरिकी क्षेत्र के गुआम में आयोजित किया जा रहा है और इसमें भारत, अमेरिका और जापान से नौसेना की भागीदारी होगी। अतः पहला कथन सही नहीं है। 
  • इस नौसैनिक अभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्त्व दो स्वदेश निर्मित जहाज जिसमें बहुउद्देश्यीय फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री और एंटी-सबमरीन वारफेयर कार्वेट शामिल हैं, के साथ ही आईएनएस कामोरटा, बेड़े टैंकर आईएनएस शक्ति और लंबी दूरी समुद्री पेट्रोल विमान P8I द्वारा किया जाएगा। अतः तीसरा कथन सही नहीं है।

उद्देश्य

  • पिछले 26 वर्षों में, इस समुद्री अभ्यास ने संभावनाओं और जटिलताओं को बढाया है और इसका उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिये साझा खतरों और चुनौतियों की विविधता को संबोधित करना है। अतः दूसरा कथन सही है। 
  • इसके अलावा, यह अभ्यास पारस्परिक समझ, अंतर-संचालन और तीन नौसेनाओं के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के साझाकरण के स्तर को बढ़ाने में योगदान देता है।
  • 11 जून से 16 जून तक इसके समुद्र अभ्यास के चरण में समुद्री वाहक संचालन, वायु रक्षा, एंटी-पनडुब्बी युद्ध (एएसडब्ल्यू), सतह युद्ध, यात्रा बोर्ड खोज और जब्त (वीबीएसएस), संयुक्त चालक तथा रणनीतिक प्रक्रियाओं सहित समुद्र में गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होगी।
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हाल ही में भारतीय वायुसेना के किस लड़ाकू विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना चर्चा  का कारण बना रहा?

A) जगुआर
B) मिराज -2000
C) मिग -21 बिशन
D) मिग 29
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उत्तर (A)
व्याख्या :

  • 5 जून, 2018 को भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का एक लड़ाकू विमान जगुआर कच्छ जिले के मुंद्रा के पास बरजा गांव में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें एक पायलट की मृत्यु हो गई। अतः विकल्प (A) सही है। 
  • जब यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ तब जामनगर वायुसेना स्टेशन के वायु अधिकारी कमांडिंग एयर कमांडर संजय चौहान एक नियमित मिशन पर जगुआर फाइटर विमान का संचालन कर रहे थे।

जगुआर (Jaguar)

  • जगुआर एक दो इंजन युक्त विमान है, जो जमीन पर हमला करने के उद्देश्य से संयुक्त रूप से फ़्रांस के ब्रुगेट (अब डेसॉल्ट का हिस्सा) और ब्रिटेन स्थित ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (बीएसी) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • दोनों कंपनियों ने विमान विकसित करने के लिये एसईपीईसीएटी (SEPECAT) नामक एक संयुक्त उद्यम का गठन किया।
  • यह अभी भी भारतीय वायुसेना के साथ महत्त्वपूर्ण रूप से अपग्रेड किए गये रूप में सेवारत है।
  • इसकी अधिकतम गति 1350 किमी/घंटा (मैक 1.3) की है। यह दो 30 मिमी बंदूकें और दो आर-350 मैजिक सीसीएम (ओवरविंग) के साथ 4750 किलोग्राम बाहरी स्टोर (बम/ईंधन) ले जाने में सक्षम हैं।
  • जगुआर विमान का आगे का हिस्सा (cockpit) पूरी तरह से डिजीलीकृत है, जो कॉकपिट हेड-अप डिस्प्ले, मल्टी-फ़ंक्शनल डिस्प्ले, नाइट विजन और जीपीएस आदि तकीनीकों से लैस है।
  • भारत की एचएएल द्वारा नवंबर 2012 में एक अपग्रेड किए गये जगुआर विमान, डारिन III की पहली सफल उड़ान आयोजित की थी।
  • डारिन III में जगुआर पर उन्नत एवियनिक्स के अलावा आधुनिक नेविगेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हथियार वितरण प्रणाली की सुविधा उपलब्ध हैं।
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विश्व पर्यावरण दिवस 2018 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का वैश्विक मेज़बान भारत था।
  2. विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण को हराएं” रखा गया था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (C)
व्याख्या:

विश्व पर्यावरण दिवस

  • 5 जून, 2018 को आयोजित होने वाले विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का वैश्विक मेज़बान भारत था। अतः पहला कथन सही है। 
  • विषय:  विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण को हराएं” (“Beat Plastic Pollution”) रखा गया था। अतः दूसरा कथन भी सही है।  
  • पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के प्रमुख एरिक सोलहाइम, ने संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि भारत विश्व पर्यावरण दिवस यानी 5 जून, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय समारोह की मेज़बानी करेगा।

प्लास्टिक प्रदूषण से जुड़े तथ्य:

  • प्रत्येक वर्ष पूरी दुनिया में 500 अरब प्लास्टिक बैगों का उपयोग किया जाता है।
  • प्रत्येक वर्ष, कम से कम 8 मिलियन टन प्लास्टिक महासागरों में पहुँचता है, जो प्रति मिनट एक कूड़े से भरे ट्रक के बराबर है।
  • पिछले एक दशक के दौरान उत्पादित किये गए प्लास्टिक की मात्रा, पिछली एक शताब्दी के दौरान उत्पादित किये गए प्लास्टिक की मात्रा से अधिक थी।
  • हमारे द्वारा प्रयोग किये जाने वाले प्लास्टिक में से 50% प्लास्टिक का सिर्फ एक बार उपयोग होता है।
  • हर मिनट 10 लाख प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती हैं।
  • हमारे द्वारा उत्पन्न किए गए कुल कचरे में 10% योगदान प्लास्टिक का होता है।

World Environment Day.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के बारे में:

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, पर्यावरण के मुद्दे पर अग्रणी वैश्विक संस्थान है।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण अपने कार्य को सात व्यापक विषयगत क्षेत्रों में वर्गीकृत करता है, जिसमें  जलवायु परिवर्तन, आपदाएं और संघर्ष, पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन, पर्यावरण शासन, रसायन और अपशिष्ट, संसाधन दक्षता, और समीक्षा के तहत पर्यावरण शामिल हैं।
  • यह राष्ट्रों और लोगों को आने वाली पीढ़ियों के जीवन से समझौता किए बगैर, उनके जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिये प्रेरित करता है, उन्हें जानकारी देता है और योग्य बनाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण दुनिया भर में सरकारों, प्राइवेट सेक्टर, सिविल सोसाइटी और संयुक्त राष्ट्र की अन्य इकाईयों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करता है।
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नाटो के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह एक अंतर्सरकारी सैन्य गठबंधन है।
  2. इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है तथा इसका संबंध वाशिंगटन संधि से नहीं है।
  3. कोलंबिया नाटो समूह का हिस्सा बनने वाला पहला लैटिन अमेरिकी राष्ट्र होगा।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (C)
व्याख्या:

  • हाल ही में कोलंबिया के राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस ने जल्द ही कोलंबिया के औपचारिक रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल होने संबंधी घोषणा की है।
  • गौरतलब है कि कोलंबिया नाटो समूह का हिस्सा बनने वाला पहला लैटिन अमेरिकी राष्ट्र होगा। अतः तीसरा कथन सही है। 
  • नाटो समूह में कोलंबिया एक “वैश्विक भागीदार” के रूप में शामिल होगा, अर्थात् यह सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लेगा।

नाटो (NATO)

  • उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) एक अंतर्सरकारी सैन्य गठबंधन है। अतः पहला कथन सही है।
  • इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है।
  • इसका औपचारिक नाम Organisationdu Traite de I’Atlantique Nord–OTAN है।
  • इसकी स्थापना 4 अप्रैल, 1949 में अमेरिका, कनाडा तथा 10 पश्चिमी यूरोपीय देशों (ब्रिटेन, फ्राँस, इटली, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, पुर्तगाल, डेनमार्क, नार्वे, आइसलैंड तथा लक्ज़मबर्ग) द्वारा वाशिंगटन संधि (उत्तर अटलांटिक संधि) पर हस्ताक्षर के रूप में की गई थी। अतः दूसरा कथन सही नहीं है। 

उद्देश्य

  • राजनीतिक, सैनिक, आर्थिक तथा वैज्ञानिक क्षेत्रों में सहयोग एवं परामर्श के माध्यम से उत्तरी अमेरिका और यूरोप के देशों को उनकी सामूहिक सुरक्षा के लिये एकजुट करना।
  • यह संगठन संगठित रक्षा के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • इस सिद्धांत के अनुसार यदि नाटो के एक या एक से अधिक सदस्यों के खिलाफ सशस्त्र हमला किया जाता है, तो उसे संगठन के सभी सदस्य देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर : महेश कुमार जैन

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आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक महेश कुमार जैन को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया है। श्री जैन को एस.एस. मुंद्रा के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

  • वित्तीय क्षेत्र नियामक नियुक्ति समिति द्वारा यह नियुक्ति की गई है। इस समिति में आरबीआई के गवर्नर, वित्तीय सेवाओं के सचिव के अलावा अन्य स्वतंत्र सदस्य शामिल होते हैं।

महेश कुमार जैन

  • इससे पहले वे इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक के तौर भी काम कर चुके हैं।
  • इसके अलावा वे बैंकिंग क्षेत्र की कई समितियों जैसे कि बसंत सेठ समिति, का भी हिस्सा रहे हैं। इस समिति को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऑडिट प्रणाली की आंतरिक एवं समवर्ती समीक्षा तथा संशोधन करने हेतु गठित किया गया था।

डिप्टी गवर्नर

  • आरबीआई अधिनियम के अनुसार, केंद्रीय बैंक में चार डिप्टी गवर्नर होने चाहिये। इनमें से दो डिप्टी गवर्नर, एक वाणिज्यिक बैंकर तथा एक अर्थशास्त्री होना चाहिये।
  • आरबीआई के डिप्टी गवर्नर को सवा दो लाख रुपए का तय मासिक वेतन और अन्य भत्ते दिये जाते हैं।
वित्तीय साक्षरता सप्ताह

RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 4 जून से 8 जून, 2018 तक ‘वित्तीय साक्षरता सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘वित्तीय साक्षरता सप्ताह’ की थीम- ‘ग्राहकों का संरक्षण’ (Customer Protection) है।

  • वित्तीय साक्षरता सप्ताह आयोजित करने का उद्देश्य लोगों को डिजीटल बैंकिंग के साथ-साथ सुरक्षित बैंकिंग प्रणाली के बारे में जागरूक करना है।
  • ग्राहकों को बैंकिंग संबंधी जोखिमों से सचेत करने तथा अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 2016 से ‘वित्तीय साक्षरता सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • इस कार्यक्रम के दौरान बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ग्राहकों को चार विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इनमें फर्जी निवेश योजनाओं के झाँसे में न आने, बैंकिंग संबंधी शिकायत के लिये ‘बैंकिंग लोकपाल’ व्यवस्था का प्रयोग, सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करने तथा अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन में ग्राहक व बैंकों की देयता के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है।
  • वित्तीय रूप से पिछड़े एवं वंचित क्षेत्रों में सभी बैंकिंग शाखाओं में कार्यशालाओं, शिविरों, प्रश्नोत्तरी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
  • आरबीआई द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, एटीएम से असफल लेन-देन, ग्राहक की जानकारी के बिना बैंक खाते में शुल्क लगाने आदि के संबंध में कोई भी ग्राहक अपनी नज़दीकी शाखा में शिकायत कर सकता है। यदि ग्राहक की शिकायत के संदर्भ में एक महीने के अंदर समाधान नहीं होता है तो वह बैंकिंग लोकपाल के समक्ष इसकी शिकायत कर सकता है।

वित्तीय साक्षरता

  • वित्तीय साक्षरता का अर्थ है वित्त को समझने की क्षमता।
  • ‘वित्तीय शिक्षा’ का अर्थ होता है, ‘धन’ के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना, जिससे हम अपने ‘धन’ का सही प्रबंधन करते हुए, अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित एवं बेहतर बना सकेंl
बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006

Banking

इस योजना को 1 जनवरी, 2006 में शुरू किया गया था। बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 बैंकों द्वारा दी जा रही कतिपय सेवाओं से संबंधित बैंक ग्राहकों की शिकायतों के समाधान पर कार्रवाई करती है। बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार वर्ष 1995 में लागू की गई थी। वर्ष 2002 में इसे संशोधित किया गया।

बैंकिंग लोकपाल

  • यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त वह व्‍यक्ति होता है जो बैंकिंग सेवाओं में कतिपय कमियों के संबंध में ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करता है। इस योजना के अंतर्गत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय बैंक और अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक शामिल हैं।
  • यह एक अर्द्ध न्‍यायिक प्राधिकारी होता है। विचार-विमर्श के माध्‍यम से शिकायतों के समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिये इसे दोनों पक्षों – बैंक और ग्राहक को बुलाने का अधिकार है। इनके कार्यालय अधिकांशत राज्‍यों की राजधानियों में स्थित होते हैं।
  • बैंकिंग लोकपाल भारत में अपना खाता रखने वाले अनिवासी भारतीयों से विदेश से उनके विप्रेषित जमाराशियों और बैंक संबंधी अन्‍य मामलों के संबंध में प्राप्‍त शिकायतों पर विचार कर सकता है।
  • बैंकिंग लोकपाल ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करने के लिये कोई शुल्‍क वसूल नहीं करता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग लोकपाल योजना का गठन बैंकों के ग्राहकों को एक शीघ्र शिकायत निवारण व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध कराने के लिये किया गया है। यह बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतों तथा इस योजना में यथा निर्दिष्‍ट अन्‍य मामलों के समाधान हेतु एक सांस्थिक (Statistical) और विधिक ढाँचा उपलब्‍ध कराता है।
  • रिज़र्व बैंक अपने सेवारत वरिष्‍ठ अधिकारियों की भी बैंकिंग लोकपाल के रुप में नियुक्ति करेगा और बेहतर प्रभाव के लिये इसे पूर्णरुप से निधि भी प्रदान करेगा।

बैंकिंग लोकपाल किस प्रकार के मामलों पर विचार कर सकता है?

  • किसी भी प्रयोजन हेतु अदायगी के लिये प्रद्त कम मूल्‍य वर्ग के नोटों का बिना पर्याप्‍त कारण के स्‍वीकार नहीं किया जाना तथा इस संबंध में किसी भी तरह का कमीशन वसूल करना।
  • बैंक द्वारा अनु‍रक्षित बचत, चालू या अन्‍य खाते में जमाराशियों पर लागू ब्‍याज दर के संबंध में रिज़र्व बैंक के निर्देश (यदि कोई हों) का पालन न करना, जमाराशियों का भुगतान न करना, पार्टियों के खातों में आय जमा न करना या विलंब करना।
  • निर्यातकों के लिये निर्यात प्राप्तियॉं मिलने, निर्यात बिलों पर कार्रवाई, बिलों की वसूली आदि में विलंब, बशर्ते कि ऐसी शिकायतें बैंक के भारत में परिचालन से संबंधित हों।
  • एटीएम/डेबिट कार्ड परिचालन या क्रेडिट कार्ड परिचालन पर रिज़र्व बैंक के अनुदेशों का बैंक अथवा उनके अनुषंगियों द्वारा अनुपालन न किया जाना।
  • पेंशन संवितरण में विलंब अथवा संवितरण न करना (कुछ हद तक इस शिकायत हेतु संबंधित बैंक द्वारा की गई कार्रवाई के लिये बैंक को उत्तरदायी ठहरा सकते हैं लेकिन उनके कर्मचारियों के मामले में नहीं)।
  • सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी करने से इनकार अथवा विलंब करना, या सेवा प्रदान करने में असमर्थता अथवा सेवा प्रदान करने या शोधन में विलंब करना।
  • बिना पर्याप्‍त सूचना अथवा पर्याप्‍त कारण के जमा लेखों को जबरन बंद करना, लेखे बंद करने से इनकार या बंद करने में विलंब करना।

बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006, पुरानी बैंकिंग लोकपाल योजना 2002 से किस प्रकार भिन्‍न है?

  • नई योजना का विस्‍तार क्षेत्र 2002 की पूर्व योजना से व्‍यापक है।
  • नई योजना में शिकायतों का ऑनलाइन प्रस्‍तुतीकरण की सुविधा भी उपलब्‍ध है।
  • नई योजना लोकपाल द्वारा पारित अधिनिर्णय के विरुद्ध अपील हेतु बैंक तथा शिकायकर्त्ता दोनों के लिये अतिरिक्त रुप से ‘अपीलीय प्राधिकार’ नामक एक संस्‍था भी उपलब्‍ध कराती है।
भारतीय रिज़र्व बैंक

RBI.

भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई। रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कोलकाता में स्थपित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित किया गया। प्रारंभ में यह निजी स्वामित्व वाला बैंक था, 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व है।

उद्देश्य
भारत में मौद्रिक स्थिरता प्राप्त करने की दृष्टि से बैंक नोटों के निर्गम को विनियमित करना तथा प्रारक्षित निधि को बनाएं रखना और सामान्य रूप से देश के हित में मुद्रा व ऋण प्रणाली संचालित करना, अत्यधिक जटिल अर्थव्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिये आधुनिक मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क रखना, वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना।

केंद्रीय निदेशक बोर्ड
रिज़र्व बैंक का कामकाज केंद्रीय निदेशक बोर्ड द्वारा शासित होता है। भारत सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अनुसार इस बोर्ड को नियुक्‍त करती है।

  • नियुक्ति/नामन चार वर्ष के लिये होता है।
  • गठन : एक सरकारी निदेशक (पूर्णकालिक : गवर्नर और अधिकतम चार उप गवर्नर)।
  • गैर- सरकारी निदेशक (सरकार द्वारा नामित : विभिन्न क्षेत्रों से दस निदेशक और दो सरकारी अधिकारी तथा अन्य : चार निदेशक – चार स्थानीय बोर्डों में से प्रत्येक से एक)।

प्रमुख कार्य
मौद्रिक प्राधिकारी

  • मौद्रिक नीति तैयार करता है, उसका कार्यान्वयन करता है और उसकी निगरानी करता है।
  • उद्देश्य: विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना।

वित्तीय प्रणाली का विनियामक और पर्यवेक्षक

  • बैंकिंग परिचालन के लिये विस्तृत मानदंड निर्धारित करता है जिसके अंतर्गत देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली काम करती है।
  • उद्देश्यः प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना, जमाकर्त्ताओं के हितों की रक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराना।

विदेशी मुद्रा प्रबंधक

  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 का प्रबंध करता है।
  • उद्देश्यः विदेश व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना तथा भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का क्रमिक विकास करना एवं उसे बनाए रखना।

मुद्रा जारीकर्त्ता

  • करेंसी जारी करता है और उसका विनिमय करता है अथवा परिचालन के योग्य नहीं रहने पर करेंसी और सिक्कों को नष्ट करता है।
  • उद्देश्य : आम जनता को अच्छी गुणवत्ता वाले करेंसी नोटों और सिक्कों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराना।

विकासात्मक भूमिका

  • राष्ट्रीय उद्देश्यों की सहायता के लिये व्यापक स्तर पर प्रोत्साहनात्मक कार्य करना।

संबंधित कार्य

  • सरकार का बैंकर : केंद्र और राज्य सरकारों के लिये व्यापारी बैंक की भूमिका अदा करता है; उनके बैंकर का कार्य भी करता है।
  • बैंकों के लिये बैंकर : सभी अनुसूचित बैंकों के बैंक खाते रखता है।

स्रोत : द हिंदू, फिनांशियल एक्सप्रेस एवं पी.आई.बी.

 

स्वास्थ्य क्षेत्र में दलित महिलाओं की चिंतनीय दशा

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-12 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय)
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

healthcare

संदर्भ

भारत में दलित महिलाओं की सवर्ण जाति की महिलाओं की तुलना में कम उम्र में मृत्यु हो जाती है। उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और लगभग सभी स्वास्थ्य संकेतकों में दलित महिलाएँ पीछे रहती हैं। यह तथ्य हाल ही के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़ों से निकल कर सामने आया है।

प्रमुख बिंदु 

  • दलितों के विरुद्ध हिंसा भले ही बाहरी दुनिया के लिये भेदभाव का दिखता हुआ मुख्य कारक हो सकता है, लेकिन कई अन्य कारक भी हैं, जो दलितों के साथ भेदभाव की वजह बनते हैं। स्वास्थ्य उन्हीं में से एक कारक है।
  • दलितों के लिये, जो देश की कुल जनसंख्या का 16.6% हैं, स्वास्थ्य असमानताएँ पूर्व  और वर्तमान में हो रहे भेदभावों का परिणाम हैं। इनके अंतर्गत सीमित शैक्षिक अवसर, उच्च स्वास्थ्य जोखिम वाले व्यवसायों को अपनाने की मजबूरी, भूमिहीनता और रोजगार,आवास जैसे अन्य संसाधनों तक पहुँच में भेदभाव आदि कारक शामिल हैं।
  • स्वास्थ्य से संबंधित लगभग सभी मानकों में दलित महिलाओं का राष्ट्रीय औसत से खराब प्रदर्शन रहा है। जैसे- एनीमिया के मामले में हालिया आँकड़ों के अनुसार, 25-49 आयु वर्ग की जो महिलाएँ एनीमिया का शिकार हुईं, उनमें से 55.9% दलित समुदाय से संबंधित हैं। जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 53% है।
  • हालाँकि, एनीमिया भारत में महिलाओं द्वारा झेली जाने वाली व्यापक समस्या है, लेकिन दलित महिलाओं के संदर्भ में यह समस्या और जटिल हो जाती है।
  • जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में, दलित महिलाओं की मृत्यु की औसत आयु सवर्ण महिलाओं से 14.6 साल कम है। उच्च जाति की महिलाओं की औसत मृत्यु आयु 54.1 वर्ष है, जबकि दलित महिलाओं के लिये यह 39.5 वर्ष है।
  • भारतीय कानून के तहत अस्पृश्यता के आधार पर अस्पताल, डिस्पेंसरी आदि में प्रवेश से इनकार करना एक दंडनीय अपराध है। फिर भी, उत्तर प्रदेश के पूरनपुर में 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नर्सिंग स्टाफ ने कथित तौर पर एक गर्भवती दलित महिला को एडमिट करने से इनकार कर दिया। महिला को बिना किसी की सहायता के बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिणामस्वरूप, जन्म के कुछ घंटे पश्चात् बच्चे ने दम तोड़ दिया।
  • भेदभाव का यह एकमात्र मामला नहीं है। दलितों को अस्पतालों में प्रवेश न देने या उपचार प्रदान न करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। साथ ही बहुत सारे ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें उन्हें एडमिट तो कर लिया गया, लेकिन उनके साथ उपचार में भेदभाव बरता गया।
  • एनएफएचएस के आँकड़ों के अनुसार, दलित समुदाय की महिलाओं में से 70.4% को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच स्थापित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके लिये अस्पताल जाने की इजाजत न मिलना, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूर अवस्थिति, धन की कमी जैसे कारणों को जिम्मेदार पाया गया।
  • संस्थागत और घरेलू प्रसव के संदर्भ में पिछले पाँच वर्षों में दलित समुदाय की 15-49 वर्ष आयु वर्ग की  52.2% महिलाओं ने डॉक्टर की उपस्थिति में बच्चे को जन्म दिया, जबकि उच्च जाति की महिलाओं के मामले में यह आँकड़ा 66.8% था।
  • दलित महिलाओं की पोषण संबंधी स्थिति: 15-49 आयु वर्ग की दलित समुदाय की महिलाओं में प्रत्येक चार में से एक महिला को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के अनुसार अल्प-पोषित करार दिया गया है, जबकि उच्च जाति की महिलाओं के संदर्भ में यह स्थिति प्रत्येक छह में से एक महिला के स्तर पर थी।

स्रोत : लाइव मिंट