UPSC DAILY CURRENT 08-05-2018

कोछलियर इंप्लांट जागरूकता कार्यक्रम
Cochlear Implant Awareness Programme

cochlear-implant

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) का दिव्यांगजन (Divyangjan) सशक्तीकरण भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी (Indian Red Cross Society) एवं सर्वोदय हॉस्पिटल एवं अनुसंधान केंद्र (Sarvodaya Hospital & Research Centre) के सहयोग से 6 मई, 2018 को फरीदाबाद (हरियाणा) में ‘कोछलियर इंप्लांट जागरूकता कार्यक्रम’ (Cochlear Implant Awareness Programme) का आयोजन किया गया।
स्वर स्वागतम नाम का यह समारोह विभाग की एडीआईपी (Scheme of Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances – ADIP) योजना के तहत, कोछलियर इंप्लांट कार्यक्रम के बारे में आम लोगों को जागरूक बनाने के लिये बेहद महत्त्वपूर्ण है।

  • कोछलियर इंप्लांट ऐसे बच्चों की सहायता करने की एक आधुनिक प्रौद्योगिकी है जिन्हें दोनों कानों से सुनने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
  • कोछलियर इंप्लांट महँगे होते हैं और सब के लिये इसका खर्च उठाना मुश्किल होता है।
  • ‘सबका साथ सबका विकास’ को ध्यान में रखते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के डीईपीडब्ल्यूडी (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ गरीबों को भी उपलब्ध करा रहा है।
  • इस दिशा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने गरीब एवं ज़रूरतमंद बच्चों के लिये एड्स एवं ऐप्लायंसेज (एडीआईपी) की खरीद एवं फिटिंग के लिये सहायता की संशोधित योजना के तहत, कोछलियर इंप्लांट कार्यक्रम शुरू किया है।
एक्सोप्लैनेट के पास हीलियम गैस

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खगोलविदों को पृथ्वी के सौर मंडल से काफी दूर स्थित एक तारे की कक्षा में मौजूद एक ग्रह के वातावरण में हीलियम गैस के होने की जानकारी प्राप्त हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि खगोलविदों को किसी एक्सोप्लैनेट के समीप हीलियम गैस के होने की जानकारी मिली हो।

  • ब्रिटेन स्थित एक्सेटर यूनिवर्सिटी की शोधकर्त्ता जेसिका स्पेक के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा यह खोज की गई है। शोधकर्त्ताओं को पृथ्वी से 200 प्रकाश वर्ष दूर Virgo constellation में मौजूद सुपर नेपच्यून एक्सोप्लैनेट डब्ल्यूएएसपी 107बी पर इस निष्क्रिय गैस की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं।
  • नेचर नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन-पत्र के मुताबिक, इस एक्सोप्लैनेट पर हीलियम गैस की उपस्थिति की जानकारी सर्वप्रथम 2017 में प्राप्त हुई थी। हालाँकि, इसकी पुष्टि अब की गई है।
  • ब्रह्मांड में हीलियम दूसरा सामान्य तत्त्व है। यह एक निष्क्रिय गैस या नोबेल गैस (Noble gas) है।
  • यह रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन, विष-हीन (नॉन-टॉक्सिक) होती है। इसका परमाणु क्रमांक 2 है।
  • वैज्ञानिकों के कथनानुसार, हीलियम के सिग्नल बहुत मज़बूत होते हैं। इनकी मदद से अंतरिक्ष में हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित किसी ग्रह के ऊपरी वातावरण का पता लगाया जा सकता है।
सीमा सड़क संगठन
Border Roads Organisation (BRO)

BRO

सीमा सड़क संगठन 7 मई, 2018 को अपना संस्थापना दिवस मना रहा है। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में ढाँचागत विकास के क्षेत्र में अग्रणी संगठन बीआरओ राष्ट्र की 58 वर्षों की गौरवशाली सेवा का समारोह मना रहा है।

  • सीमा सड़क संगठन की स्थापना 7 मई, 1960 को हुई थी।
  • इसका उद्देश्य शांतिकाल में सीमावर्ती इलाकों में जनरल स्टॉफ की ऑपरेशनल सड़कों का विकास व रख-रखाव व सीमावर्ती राज्यों का आर्थिक व सामाजिक उत्थान करना है। जबकि युद्धकाल में वास्तविक इलाकों से तथा पुनर्तैनाती इलाकों से नियंत्रण रेखा के लिए सड़क का विकास व देखभाल करता है।
  • सीमा सड़क संगठन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क मार्ग के निर्माण एवं व्यवस्थापन का कार्य करता है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में पहाड़ी इलाके होने से भूमिस्खलन तथा चट्टानों के गिरते-टूटते रहने से सड़कें टूटती रहती हैं। इनको सुचारु बनाए रखने के लिये संगठन को पूरे वर्ष कार्यरत रहना पड़ता है।
  • इसके अलावा सरकार द्वारा युद्धकाल के दौरान विनिर्दिष्ट अन्य अतिरिक्त कार्यों का निष्पादन भी करता है।
NASA का ‘इनसाइट’ मिशन

NASA

5 मई को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा मंगल ग्रह का आंतरिक अध्ययन करने के लिये अपने पहले मिशन को लॉन्च किया गया है। इस मिशन को इनसाइट (Interior Exploration using Seismic Investigations, Geodesy and Heat Transport) नाम दिया गया है।

  • इसे कैलिफोर्निया के वेंडेनबर्ग वायु सेना बेस से एटलस वी रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया।
  • नासा के अनुसार, इनसाइट एक प्रकार का लैंडर है, जो मंगल की सतह पर उतरेगा। यह एक प्रकार से वैज्ञानिक टाइम मशीन है।
  • यह 4.5 अरब साल पहले हुई मंगल की उत्पत्ति की प्रारंभिक अवस्था के बारे में जानकारी प्रदत्त करेगा। इससे हमें धरती और चंद्रमा समेत सौर मंडलों के दूसरे ग्रहों की चट्टान संरचना के निर्माण के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
  • इसकी सहायता से वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि किस तरह से मंगल की बाहरी परतों एवं इसके आतंरिक भाग की संरचना पृथ्वी की संरचना से भिन्न है?

इनसाइट की विशेषताएँ

  • इनसाइट या इंटीरियर एक्सप्लोरेशन में आँकड़ों के संग्रहण के लिये कई प्रकार के संवदेनशील उपकरणों को स्थापित किया गया है।
  • इसमें मंगल ग्रह पर भूकंप की जाँच हेतु अति संवेदनशील सिस्मोमीटर (seismometer) लगाया गया है। इस सिस्मोमीटर को फ्राँस के नेशनल स्पेस सेंटर द्वारा तैयार किया गया है।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी.

 

ग्राम स्वराज अभियान आंशिक रूप से सफल

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध। 
(खंड-12 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।)
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/ सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

Gram-Swaraj-Abhiyan

चर्चा में क्यों ?
14 अप्रैल से लेकर 5 मई तक चले तीन सप्ताह के अभियान के अंतर्गत, सात प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं को लक्षित गाँवों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया। ये ऐसे गाँव हैं, जिनमें बड़ी संख्या में गरीब, अनुसूचित जाति, और अनुसूचित जनजाति वाले परिवार निवास करते हैं। लेकिन, सरकारी आँकड़ों के अनुसार, यहाँ लक्षित परिवारों में से केवल 30 प्रतिशत परिवारों को ही बिजली कनेक्शन मिल सका, जबकि 40 प्रतिशत परिवारों को गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ।

प्रमुख बिंदु 

  • ग्रामीण लोगों के वित्तीय समावेशन हेतु चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत जन धन बैंक खाते और जीवन एवं दुर्घटना बीमा ने उच्च स्तर की परिपूर्णता प्राप्त की है।
  • गर्भवती महिलाओं और दो साल से कम उम्र के सभी बच्चों के पूर्ण टीकाकरण की योजना लगभग सभी लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच गई।
  • ग्राम स्वराज अभियान डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को ऐसे गाँवों को लक्षित करके शुरू किया गया था, जहाँ दलित और जनजातीय लोगों का आधिक्य है।
  • यह अभियान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संशोधन के पश्चात् उपजे देशव्यापी विरोध के बाद शुरू किया गया था।
  • इसका लक्ष्य सामाजिक सौहार्द को बढ़ाना, गरीबों हेतु चलाए जा रहे सरकारी कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाना और उन्हें इन योजनाओं के अंतर्गत पंजीकृत करवाना है।
  • कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के ऐसे गाँवों को इसमें शामिल नहीं किया गया, जहाँ चुनावी आचार संहिता लागू थी।
  • सौभाग्य योजना, जिसके अंतर्गत प्रत्येक घर तक बिजली कनेक्शन पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है, के अंतर्गत 4 लाख घरों में कनेक्शन हो पाए, जबकि यह लक्ष्य 14.5 लाख घरों का था। अर्थात् इसका विस्तार लक्षित लाभार्थियों के 27 प्रतिशत तक ही हो पाया।
  • उज्ज्वला योजना, जिसके तहत सभी घरों को गैस कनेक्शन प्रदान किये जाने का लक्ष्य है, केवल 39 प्रतिशत या 5.6 लाख परिवारों तक विस्तारित हो सकी, जबकि इसके अंतर्गत कुल 14.4 लाख परिवारों तक पहुँच सुनिश्चित की जानी है।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार योजनाओं के अंतर्गत बहुत से आवेदकों के केवाईसी की प्रक्रिया जारी है, खासकर उज्ज्वला योजना के लिये, जिसके अंतर्गत 11 लाख आवेदन प्राप्त हुए।
  • अधिकारियों का कहना है कि हालाँकि, ग्राम स्वराज अभियान आधिकारिक रूप से 5 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार इसे आगे भी पूर्ण संतृप्ति(full saturation) प्राप्त करने तक जारी रखना चाहती है।
  • वित्तीय योजनाओं के अंतर्गत भी उच्च संतृप्ति देखी गई, जहाँ बड़ी मात्रा में जन धन बैंक खाते खोले गए।
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत, लक्षित लोगों में से 73 प्रतिशत नामांकित हुए।
  • जबकि, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जो आकस्मिक मौत या अक्षमता से संबंधित एक रिस्क इंश्योरेंस योजना है, के अंतर्गत लगभग 88 प्रतिशत लक्षित लोग नामांकित किये गए।

स्रोत : द हिंदू

 

अंतर-देशीय अभिभावकीय बाल अपहरण : हेग कन्वेंशन के प्रमुख सिद्धांत पर केंद्रीय पैनल को आपत्ति  

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

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चर्चा में क्यों ?
अंतर-देशीय अभिभावकीय बाल अपहरण के मुद्दे पर एक रिपोर्ट तैयार करने हेतु केंद्र द्वारा गठित किये गए पैनल ने हेग कन्वेंशन के बुनियादी सिद्धांतों में से एक पर सवाल उठाया है। इस पैनल का कहना है कि बच्चे की अपने अभ्यस्त निवास (habitual residence) पर वापसी उसके सर्वोत्तम हित में हो, यह कतई आवश्यक नहीं है।

प्रमुख बिंदु 

  • भारत पर अमेरिका द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण के नागरिक पहलुओं पर हेग कन्वेंशन में शामिल होने का दवाब बनाया जा रहा है।
  • पैनल का मानना है कि अभ्यस्त निवास की अवधारणा बच्चे के सर्वोत्तम हित के साथ तुल्यकालिक (synchronous) नहीं है।
  • इसका मानना है कि बच्चे की अनिवार्यतः अभ्यस्त स्थान पर वापसी, उसे गैर-सौहार्दपूर्ण माहौल में धकेल सकती है।
  • पैनल ने बच्चों के हितों के साथ ही माता-पिता, विशेष रूप से माताओं की सुरक्षा के लिये एक मसौदा कानून भी तैयार किया है।
  • प्रस्तावित मसौदा कानून में नौ अपवाद दिये गए हैं, जिनके अंतर्गत बच्चे को उसके अभ्यस्त निवास वाले देश में वापस नहीं लौटाया जाएगा।
  • जिन महत्त्वपूर्ण परिस्थितियों में बच्चे की वापसी से इनकार किया जा सकता है, वे हैं – बच्चे का सर्वोत्तम हित, घरेलू हिंसा या मानसिक या शारीरिक क्रूरता या उत्पीड़न के कारण बच्चे के साथ भागा परिजन (माता या पिता), उस परिजन द्वारा बच्चे की कस्टडी की मांग जो बच्चे को उसके पास से हटाए जाने के समय कस्टडी अधिकारों का उपयोग नहीं कर रहा था और बच्चे को वापस भेजने की स्थिति में शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान का गंभीर जोखिम।
  • पैनल ने बच्चे के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करने के लिये ‘भारतीय परिवार प्रणाली’ के महत्त्व पर ज़ोर दिया है।
  • पैनल द्वारा जारी रिपोर्ट में एक अंतर-देशीय अभिभावक बाल निष्कासन विवाद समाधान प्राधिकरण (Inter-Country Parental Child Removal Disputes Resolution Authority) के गठन की भी मांग की है, जो बच्चे की कस्टडी पर निर्णय लेने हेतु नोडल एजेंसी होगा। साथ ही यह विवाद में शामिल पक्षों के बीच मध्यस्थता भी करेगा एवं बच्चे की अभ्यस्त निवास वाले देश में वापसी हेतु आदेश भी देगा।
  • जस्टिस राजेश बिंदल समिति या पैनल की स्थापना पिछले वर्ष की गई थी। इसे बच्चे के हितों की रक्षा हेतु मॉडल कानून सुझाना था।
  • सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि जब भी वह प्राधिकरण के गठन का निर्णय लेगी, तो वह इस बात पर भी निर्णय लेगी कि भारत को हेग कन्वेंशन में शामिल होना चाहिये या नहीं।
  • 2016 में सरकार ने हेग संधि पर इस आधार पर हस्ताक्षर न करने का फैसला किया था कि यह उन महिलाओं के लिये हानिकारक हो सकता है जिन्होंने अपमानजनक शादी (abusive marriage) से पलायन किया है।

क्या है हेग कन्वेंशन?

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो उन बच्चों की त्वरित वापसी को सुनिश्चित करती है, जिनका “अपहरण” (abduction) कर उन्हें उस जगह पर रहने से वंचित कर दिया गया है, जहाँ वे रहने के अभ्यस्त हैं।
  • इस संधि का केंद्रबिंदु ‘अभ्यस्त निवास’ का मानदंड है, जिसका प्रयोग यह निर्धारित करने के लिये किया जाता है कि क्या वाकई किसी बच्चे को उसके किसी एक परिजन द्वारा दूसरे परिजन के पास से गलत तरीके से हटाया गया है।
  • अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद, भारत ने अभी तक इस कन्वेंशन की पुष्टि नहीं की है। कन्वेंशन के तहत, हस्ताक्षर करने वाले देशों को उनके अभ्यस्त निवास स्थान से गैरकानूनी ढंग से निकाले गए बच्चों का पता लगाने और उनकी वापसी को सुनिश्चित करने के लिये एक केंद्रीय प्राधिकरण का निर्माण करना होगा।
  • मान लिया जाए कि किसी देश ने हेग कन्वेंशन पर हस्ताक्षर कर रखा है और इस मसले पर उस देश का अपना कानून कोई अलग राय रखता हो, तो भी उसे कन्वेंशन के नियमों के तहत ही कार्य करना होगा।

स्रोत : द हिंदू