UPSC DAILY CURRENT 08-08-2018

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क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. भारत ने वित्त मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक पैनल गठित किया है जो यह सुनिश्चित करेगा कि यह व्यापार समझौता देश के सर्वोत्तम हित में है अथवा नहीं।
  2. RCEP समूह में 16 सदस्य हैं।
  3. RCEP की औपचारिक शुरुआत नवंबर 2015 में कंबोडिया में आसियान शिखर सम्मेलन में की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से गलत है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर : (c)
व्याख्या: 

  • भारत ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक पैनल गठित किया है जो यह सुनिश्चित करेगा कि यह व्यापार समझौता देश के सर्वोत्तम हित में है अथवा नहीं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • पैनल में वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु के अलावा  वित्त मंत्री पीयूष गोयल, रक्षा मंत्री (पूर्व वाणिज्य मंत्री) निर्मला सीतारमण तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

RCEP के बारे में :

  • RCEP या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के दस सदस्यीय देशों तथा छ: अन्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड), जिनके साथ आसियान का मुक्त व्यापार समझौता है, के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है।
  • इसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये इसके सदस्य देशों के बीच व्यापार नियमों को उदार एवं सरल बनाना है।
  • RCEP समूह में 16 सदस्य हैं। अतः कथन 2 सही है।
  • इसकी औपचारिक शुरुआत नवंबर 2012 में कंबोडिया में आसियान शिखर सम्मेलन में की गई थी। अतः कथन 3 सही नहीं है।
  • RCEP को ट्रांस-पैसिफिक भागीदारी के एक विकल्प के रूप में देखा जाता है।
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पूर्वोत्तर के तीन राज्य HIV हॉटस्पॉट के रूप में उभरकर सामने आए हैं, ये तीनों राज्य हैं:

A) मिज़ोरम, नागालैंड और त्रिपुरा
B) मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा
C) असम, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम
D) अरुणाचल प्रदेश, असम और नागालैंड
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उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा HIV के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं। अतः विकल्प (b) सही है।
  • मंत्रालय ने तीन पूर्वोत्तर राज्यों में HIV की घटनाओं में वृद्धि के लिये इन्जेक्टिंग ड्रग यूज़र (IDU)  और असुरक्षित यौन संबंध के उच्च जोखिम वाले व्यवहार को ज़िम्मेदार ठहराया है।
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गंगा हरीतिमा अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इस अभियान के तहत गंगा को प्रदूषण मुक्त करने हेतु उत्तर प्रदेश में गंगा तट पर स्थित 28 जनपदों (बिजनौर से बलिया तक) में गंगा किनारे वृक्षारोपण किया जाएगा।
  2. यह अभियान वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा समर्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (b)
व्याख्या

गंगा हरीतिमा अभियान

  • 7 अप्रैल, 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश स्तरीय गंगा हरीतिमा अभियान-2018 की शुरूआत की।
  • इस अभियान के तहत गंगा को प्रदूषण मुक्त करने हेतु गंगा तट पर स्थित 27 जनपदों (बिजनौर से बलिया तक) में गंगा किनारे वृक्षारोपण किया जाएगा।
  • गंगा हरीतिमा योजना के तहत गंगा नदी के दोनों किनारों पर उत्तर प्रदेश वन विभाग और मनरेगा की मदद से वृक्षारोपण किया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि यह अभियान वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा समर्थित है।
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स्‍थानीय क्षेत्र योजना (LOCAL AREA PLAN -LAP)  और शहरी नियोजन योजना (TOWN PLANNING SCHEME -TPS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. LAP/TPS तैयार करने के लिये चिन्हित किये गए 25 शहरों को 50 करोड़ रुपए (प्रत्येक शहर को 2.00 करोड़ रुपए) केंद्रीय सहायता के रूप में प्रदान किये जाएंगे।
  2. LAP और TPS तैयार करने के लिये संभावित अवधि 2 वर्ष होगी।

निम्नलिखित कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये :

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (a)
व्याख्या :

  • LAP/TPS तैयार करने के लिये चिन्हित किये गए 25 शहरों को 50 करोड़ रुपए (प्रत्येक शहर को 2.00 करोड़ रुपए) केंद्रीय सहायता के रूप में प्रदान किये जाएंगे। अतः कथन 1 सही है।
  • केंद्रीय सहायता 3 किस्तों में जारी की जाएगी –

♦ प्रारंभिक प्रस्ताव जमा करने के साथ 20%,
♦ ड्राफ्ट योजना जमा करने के दौरान 40%,
♦ अंतिम योजना जमा करने के दौरान शेष 40%।

  • LAP और TPS तैयार करने के लिये संभावित अवधि एक वर्ष (2 माह में प्रारंभिक प्रस्ताव तथा 10 माह मसौदा (draft) योजना तैयार करने के लिये होगी। अतः कथन 2 सही नहीं है।

 

 

अमेरिका ने ईरान पर फिर से लगाए प्रतिबंध : क्या हैं इन प्रतिबंधों के मायने

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

US Sanctions

संदर्भ

अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर से प्रतिबंध लगा दिये हैं। इन प्रतिबंधों के साथ ही ईरान पर वे प्रतिबंध फिर से लागू हो गए हैं वर्ष साल 2015 में हटा लिया गया था। उल्लेखनीय है कि पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ परमाणु समझौता हुआ था जिसके तहत ईरान से ये प्रतिबंध हटा लिये गए थे। अमेरिका का मानना है कि आर्थिक दबाव के कारण ईरान नए समझौते के लिये तैयार हो जाएगा और अपनी हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगा देगा।

क्या हैं प्रतिबंध?

  • ईरान सरकार द्वारा अमेरिकी डॉलर को खरीदने या रखने पर रोक।
  • सोने या अन्य कीमती धातुओं में व्यापार पर रोक।
  • ग्रेफ़ाइट, एल्युमीनियम, स्टील, कोयला और औद्योगिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर रोक।
  • ईरान की मुद्रा रियाल से जुड़े लेन-देन पर रोक
  • ईरान सरकार को ऋण देने से संबंधित गतिविधियों पर रोक।
  • ईरान के ऑटोमोटिव सेक्टर पर प्रतिबंध।
  • इन सबके अलावा ईरानी कालीन तथा खाद्य पदार्थों का आयात भी बंद कर दिया जाएगा।

अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई भी कंपनी या देश इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करेगा तो उन्हें इसके गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

5 नवंबर से लगाए जाने वाले प्रतिबंध

  • ईरान के बंदरगाहों का संचालन करने वालों पर प्रतिबंध।
  • ऊर्जा, शिपिंग और जहाज़ निर्माण सेक्टर पर प्रतिबंध।
  • ईरान के पेट्रोलियम संबंधित लेन-देन पर प्रतिबंध।
  • सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के साथ विदेशी वित्त संस्थानों के लेन-देन पर प्रतिबंध।

प्रतिबंधों का प्रभाव

  • दोबारा लगाए गए प्रतिबंध अपरदेशीय (extraterritorial) हैं। ये प्रतिबंध न केवल अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों पर लागू होते हैं, बल्कि गैर-अमेरिकी व्यवसायों या व्यक्तियों पर भी लागू होते हैं।
  • इन प्रतिबंधों का उद्देश्य द्वारा ईरान से संबंधित व्यापार और निवेश गतिविधि में शामिल उन सभी लोगों को दंडित करना है जिन्हें इन प्रतिबंधों के तहत कोई विशेष छूट प्राप्त नहीं है।
  • कई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने पहले से ही अपने ईरानी व्यवसाय बंद कर दिये हैं या ऐसा करने की तैयारी कर रहे हैं।

ईरान पर लगे प्रतिबंधों का भारत पर असर

  • चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल ख़रीदार है। वहीं, ईरान भी अपने दस प्रतिशत तेल का निर्यात केवल भारत को ही करता है।
  • भारत के लिये यह एक मुश्किल स्थिति है। एक तरफ़ जहाँ ईरान के साथ उसके गहरे संबंध हैं वहीँ दूसरी ओर, वह ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के फ़ैसले से भी सहमत नहीं है।
  • भारत पर इस समय अमेरिकी दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
  • भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिये भी निवेश किया है जो भारत-अफ़ग़ानिस्तान के बीच एक महत्त्वपूर्ण लिंक है। अमेरिकी प्रतिबंध इस परियोजना के विकास में बाधा डाल सकते हैं।

 

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी: भारत के हित में व्यापार संधि का आकलन करेगी कमेटी


संदर्भ
RCEP

16 देशों कि क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) में शामिल होने के बारे में भारत एक बार फिर से विचार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि RCEP में चीन भी शामिल है जिसके साथ भारत का व्यापार घाटा सबसे अधिक है।

प्रमुख बिंदु

  • क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी का विरोध सिर्फ उद्योग ही नहीं बल्कि कुछ मंत्रालयों द्वारा भी किया जा रहा है।
  • बढ़ते घरेलू प्रतिरोध के बीच भारत ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक पैनल गठित किया है जो यह सुनिश्चित करेगा कि यह व्यापार समझौता देश के सर्वोत्तम हित में है अथवा नहीं।
  • पैनल में वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु के अलावा  वित्त मंत्री पीयूष गोयल, रक्षा मंत्री (पूर्व वाणिज्य मंत्री) निर्मला सीतारमण तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि हरदीप सिंह पुरी को IFS अधिकारी के रूप में व्यापार कूटनीति में पूर्व के अनुभव के लिये चुना गया है।
  • संभवतः सरकार ने यह कदम इस साल के अंत तक वार्ता में पर्याप्त प्रगति प्रदर्शित करने के लिये अन्य संभावित RCEP सदस्यों के दबाव में उठाया है।

RCEP समझौते का विरोध

  • इस्पात से लेकर फार्मास्यूटिकल्स तक के घरेलू उद्योग सभी आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ विभिन्न मौजूदा व्यापार समझौतों की आलोचना कर रहे हैं कि इन समझौतों के बाद इन देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा केवल बढ़ गया है।
  • इसके अलावा, 2017-18 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 63 बिलियन डॉलर का था।
  • चीन जो इस समझौते में शामिल है, के कारण सस्ते उत्पाद बाज़ार में बहुत अधिक मात्र में आएंगे। उदाहरण के लिये, इस्पात मंत्रालय का तर्क है कि किसी भी FTA (Free Trade Agreement) के बिना भी भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा (इस्पात में) 2 मिलियन टन का है और इस बात पर विचार करना आवश्यक है कि RCEP पर हस्ताक्षर करने के बाद यह व्यापार घाटा और अधिक बढ़ जाएगा।
  • फार्मा उद्योग को भी डर है कि सस्ते चीनी उत्पादों का भारत में अप्रतिबंधित रूप से प्रवेश होगा।
  • इसके अलावा, वित्त मंत्रालय द्वारा 2016 के अनुमान के मुताबिक, अगर भारत व्यापारिक आयात पर टैरिफ को पूरी तरह से घटा देता है तो इसे सालाना 75,733 करोड़ रुपए के कर राजस्व का नुकसान हो सकता है।

RCEP के बारे में :

  • RCEP या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के दस सदस्यीय देशों तथा छ: अन्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड), जिनके साथ आसियान का मुक्त व्यापार समझौता है, के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है।
  • इसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये इसके सदस्य देशों के बीच व्यापार नियमों को उदार एवं सरल बनाना है।
  • RCEP समूह में 16 सदस्य हैं।
  • इसकी औपचारिक शुरुआत नवंबर 2012 में कंबोडिया में आसियान शिखर सम्मेलन में की गई थी।
  • RCEP को ट्रांस-पैसिफिक भागीदारी के एक विकल्प के रूप में देखा जाता है।