UPSC DAILY CURRENT 09-05-2018

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कोरोनल होल (Coronal Hole) का संबंध हैः

A) सौर तूफान से
B) पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से
C) ब्लैक होल से
D) न्यूट्रिनो से
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उत्तर: (a)
व्याख्याः

कोरोनल होल का संबंध सौर तूफान से है। सूर्य की सतह पर बड़े पैमाने के विस्फोट होते हैं, जिसके दौरान कुछ हिस्से बेहद चमकीले प्रकाश के साथ असीम ऊर्जा छोड़ते हैं जिसे सन फ्लेयर कहा जाता है। सूर्य की सतह पर होने वाले इस विस्फोट से उसकी सतह से बड़ी मात्रा में चुंबकीय ऊर्जा निकलती है, जिससे सूरज के कोरोना (सूर्य की सतह का बाहरी परत) का कुछ हिस्सा खुल जाता है। इससे ऊर्जा बाहर की ओर निकलती है, जो आग की लपटों की तरह दिखाई देती है। ये असीम ऊर्जा लगातार कई दिनों तक निकलती रहे तो इससे अति सूक्ष्म न्यूक्लियर पार्टिकल भी निकलते है। यह कण पूरी ऊर्जा के साथ ब्रह्मांड में फैल जाते हैं। जिसे सौर तूफान कहा जाता है। इस ऊर्जा में जबरदस्त न्यूक्लियर रेडिएशन होता है, जो इसे सबसे ज्यादा खतरनाक बनाता है। अतः विकल्प (a) सही है।

Coronal-Hole

  • वैज्ञानिकों के अनुसार सौर तूफान से धरती पर कुछ समय के लिए ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है तथा उपग्रह आधारित सेवाएँ जैसे- मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा जीवों पर रेडिएशन के खतरे की भी आशंका रहती है।
  • सौर तूफान के दौरान धरती के नॉर्थ और साउथ पोल में तेज रोशनी नजर आती है।
  • सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्त्पन्न होते हैं। नेशनल ओशन एंड एटमॉस्फियर एसोसिएशन द्वारा इन्हें पाँच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक होता है।
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यांगली त्योहार (Yangli Festival) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः

  1. यह त्योहार सिक्किम के तिवा जनजातीय लोगों के द्वारा मनाया जाता है।
  2. यह त्योहार कृषि से संबंधित है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर- (b)
व्याख्याः

यांगली त्योहार (Yangli Festival)

यांगली त्योहार, असम के कार्बी एंग्लोंग के तिवा जनजाति लोग मनाते हैं। अतः पहला कथन असत्य है।

यांगली त्योहार का संबंध कृषि से है। कार्बी एंग्लोंग के तिवा जनजाति के लोंगों की अर्थव्यवस्था के मुख्य स्रोत कृषि होने के कारण उनके लिये यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है। अतः दूसरा कथन सत्य है।

यांगली के दौरान तिवा लोग अच्छी फसल उत्पादन के साथ-साथ हानिकारक कीटों और प्राकृतिक आपदाओं से अपनी फसलों की सुरक्षा के लिये प्रार्थना करते हैं।

यांगली त्योहार को तिवा लोग हर तीन साल बाद मनाते हैं।

इस उत्सव के तुरंत बाद तिवा जनजाति के लोग धान की बुवाई शुरू करते हैं।

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भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित सुस्त भालू अभयारण्य (Sloth Bear Sanctuary) के संबंध में कौन- सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?

1. रलनमहल सुस्त भालू अभयारण्य     –    गुजरात
2. जेसोर सुस्त भालू अभयारण्य          –    महाराष्ट्र
3. दारोजी सुस्त भालू अभयारण्य         –    कर्नाटक

कूटः

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी
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उत्तर: (c)
व्याख्याः

सुस्त भालू (Sloth Bear)

Bear

  • सुस्त भालू/ स्लोथ भालू की दुनिया में सबसे बड़ी आबादी भारत में पाई जाती है। भारत के अलावा ये श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में पाये जाते हैं।
  • सुस्त भालू देश के अनेक राज्यों, जैसे-उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में पाये हैं।
  • IUCN द्वारा इन भालूओं को “सुभेद्य” (vulnerable) घोषित किया गया है।

सुस्त भालू अभयारण्य (Sloth Bear Sanctuary)

  1. रतनमहल सुस्त भालू अभयारण्य: 
    ♦ रतनमहल सुस्त भालू अभयारण्य गुजरात के दाहोद जिले में स्थित है। यह अभयारण्य गुजरात के साथ मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित है।
    ♦ स्थानीय स्तर पर पाया जाने वाला माहुदा नामक वृक्ष सुस्त भालू का पसंदीदा भोजन है जो इस क्षेत्र में प्रचुरता में पाया जाता है। अतः पहला युग्म सही सुमेलित है।
  2.  जेसोर सुस्त भालू अभयारण्य: 
    ♦ जेसोर सुस्त भालू अभयारण्य गुजरात के बनसकंठा जिले में स्थित है। यह अभयारण्य जेसोर पहाड़ी और इसके आसपास के जंगली क्षेत्रों में 180 वर्ग किमी. से अधिक क्षेत्र में फैला है। अतः दूसरा युग्म सही सुमेलित नहीं है।
  3. दारोजी सुस्त भालू अभयारण्य: 
    ♦ दारोजी सुस्त भालू अभयारण्य कर्नाटक के बल्लारी जिले के हम्पी के पास स्थित है। यह  बिलिकल्लू (Bilikallu) वन रिजर्व के भीतर अवस्थित है। अतः तीसरा युग्म सही सुमेलित है।
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हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे दुर्लभ वानर प्रजाति “तपनुली ओरंगुटन” विलुप्त होने की कगार है। वानरो की यह प्रजाति कहाँ पाई जाती है?

A) चीन
B) भारत
C) नेपाल
D) इंडोनेशिया
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उत्तर: (d)
व्याख्याः

तपनुली ओरंगुटन (Tapnulee orangutan)

Tapnulee-orangutan

  • हाल ही में पर्यावरणीय वैज्ञानिकों ने कहा है कि, पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे दुर्लभ वानर प्रजाति तपनुली ओरंगुटन विलुप्त होने की कगार पर है। वर्तमान समय में तपनुली ओरंगुटन प्रजाति के 800 से भी कम सदस्य जीवित हैं।
  • इस प्रजाति की खोज सुमात्रा, इंडोनेशिया में 2017 में हुई थी।
  • वानरों की यह प्रजाति इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर बटांग तोरू वन में रहती है। तपनुली ओरंगुटन (पोंगो तपनुलियेंसिस) इंडोनेशिया में सुमात्रा द्वीप में दक्षिण तपनुली के मूल निवासी ओरंगुटान की प्रजाति है। ये दुनिया के सबसे लुप्तप्राय ‘ग्रेट एप’ हैं।
  • उनके लिए एक बड़ा खतरा एक चीनी राज्य के स्वामित्व वाली निगम द्वारा निर्मित होने वाली 1.6 बिलियन बड़ी बांध परियोजना है साथ ही वनों की कटाई, सड़क निर्माण और शिकार के कारण भी ये खतरे में हैं।
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उत्तर कोरिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः

  1. अमनोक नदी और तुमेन नदी उत्तर कोरिया और चीन के बीच सीमा का निर्धारण करती हैं।
  2. 38वीं समानांतर रेखा उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विभाजन रेखा का कार्य करती है।
  3. इसके पूर्व में पीला सागर तथा पश्चिम में जापान सागर अस्थित है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सत्य हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) उपरोक्त सभी।
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उत्तर: (a)
व्याख्याः

उत्तर कोरिया

South-Korea

  • उत्तर कोरिया, पूर्वी एशिया में कोरिया प्रायद्वीप के उत्तर में बसा हुआ एक देश है। इस देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर प्योंगयांग है।
  • उत्तर कोरिया की उत्तरी सीमा चीन और रूस के साथ मिलती है तथा दक्षिणी सीमा दक्षिण कोरिया के साथ मिलती है।
  • अमनोक नदी और तुमेन नदी उत्तर कोरिया और चीन के बीच सीमा का निर्धारण करती है, वहीं धुर उत्तर-पूर्वी छोर पर तुमेन नदी की एक शाखा रूस के साथ सीमा बनाती है। अतः पहला कथन सत्य है।
  • कोरिया प्रायद्वीप के 38वां समानांतर पर बनाया गया कोरियाई सैन्यविहीन क्षेत्र उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विभाजन रेखा के रूप में कार्य करता है अर्थात् 38वीं समानांतर रेखा उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विभाजन रेखा का कार्य करती है। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।
  • उत्तर कोरिया के पूर्व में जापान सागर तथा पश्चिम में पीला सागर अस्थित है। अतः तीसरा कथन असत्य है।

 

यूरेनस ग्रह पर पाई गई तीक्ष्ण दुर्गंध युक्त हाइड्रोजन सल्फाइड गैस 

uranus-planet

  • इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने यूरेनस ग्रह पर एक अति दुर्गंध युक्त गैस हाइड्रोजन सल्फाइड की खोज की है।
  • इसका पता हवाई द्वीप समूह स्थित जैमिनी नॉर्थ टेलिस्कोप द्वारा लगाया गया है।
  • यूरेनस के वातावरण में शनि ग्रह की तुलना में चार गुना अधिक हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा पाई गई है।
  • इस गैस की गंध सड़े अंडे से आने वाली तीव्र दुर्गंध जैसी होती है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी रहस्यों पर से पर्दा हटाने में मदद मिलेगी।
  • यूरेनस आकार में पृथ्वी से चार गुना और और भार में 14 गुना अधिक है।
  • इस ग्रह पर हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन जैसी अन्य गैसें भी मौजूद हैं।
  • यह गहरे नीले रंग का कम चमक वाला ग्रह है। इस कारण इसे दूरबीन द्वारा अच्छी तरह से देखा जा सकता है।
विलुप्त होने के कगार पर दुनिया का सबसे दुर्लभ एप 

tapanuli-orangutan

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, तपानुली आरंगुटान (Tapanuli Orangutan) नामक सबसे दुर्लभ प्रजाति का एप लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है और इसे बचाए जाने हेतु निर्णायक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
  • इस प्रजाति के 800 से भी कम सदस्य जीवित बचे हैं और उन पर भी शिकार, बड़ी परियोजनाओं, वनों की कटाई, सड़क निर्माण आदि के कारण संकट छाया हुआ है।
  • शोधकर्त्ताओं के अनुसार, इंडोनेशिया के सुमात्रा में चीन द्वारा एक बड़ी बाँध-परियोजना का निर्माण किये जाने की योजना है, जिसके कारण इस प्रजाति के आवास क्षेत्र का अहम हिस्सा जलमग्न हो जाएगा।
  • यह अब तक खोजी गईं ग्रेट एप की प्रजातियों में से केवल सातवीं प्रजाति है।
  • यह प्रजाति सामान्यतः उन्हीं क्षेत्रों में निवास करती है , जहाँ पर सड़क जैसे पारगमन माध्यमों का अभाव रहता है।
  • इस प्रजाति का प्राकृतिक आवास इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप है।
3डी बायो स्किन प्रिंटर

bio-skin-printer

  • कनाडा के वैज्ञानिकों ने जलने या अन्य कारणों से बने घाव भरने के लिए एक 3डी बायो स्किन प्रिंटर विकसित किया है। यह प्रिंटर मात्र दो मिनट में टिश्यू बनाकर जख्म पर प्रत्यारोपित कर देता है।
  • कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं द्वारा तैयार किये गए इस प्रिंटर का इस्तेमाल जलने से हुए ऐसे घावों को ठीक करने में किया जा सकता है, जिनमें त्वचा की तीनों सतह एपिडर्मिस, डर्मिस, और हाइपोडर्मिस क्षतिग्रस्त हुई हों।
  • वर्त्तमान में इनका इलाज स्प्लिट थिकनेस स्किन ग्राफटिंग विधि से किया जाता था। इसमें स्वस्थ व्यक्ति की त्वचा को मरीज के एपिडर्मिस और डर्मिस पर प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • घाव को पूरी तरह से ढकने के लिए अधिक मात्रा में स्वस्थ त्वचा की जरूरत होती है, जो कई बार उपलब्ध नहीं हो पाती। इस कारण स्प्लिट थिकनेस स्किन ग्राफ्टिंग विधि से उपचार में समस्या आती है।
  • फिलहाल जो 3डी प्रिंटर मौजूद हैं, वो बहुत ही भारी हैं। इसके अलावा उनकी गति बहुत धीमी है और उनका खर्च भी बहुत अधिक होता है।
  • जूते के डिब्बे के बराबर आकार वाले नए प्रिंटर का वजन एक किलोग्राम से भी कम है। साथ ही इसे चलाने के लिए किसी खास प्रशिक्षण की आवश्यकता भी नहीं होती है।
एशिया पावर इंडेक्‍स में चौथे स्‍थान पर भारत

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  • ऑस्‍ट्रेलिया के थिंक टैंक लॉवी इंस्‍टीट्यूट एशिया पावर इंडेक्‍स में एशिया-प्रशांत के 25 देशों का आकलन प्रस्तुत किया गया, जिसमें भारत को चौथे स्थान दिया गया। किसी भी देश की ताकत का आकलन 8 बिंदुओं के तहत व्यक्त किया जाता है। इनमें आर्थिक संसाधन, सैन्‍य क्षमता, लचीलापन, फ्यूचर ट्रेंड्स, राजनयिक प्रभाव, इकोनॉमिक रिलेशनशिप, डिफेंस नेटवर्क और सांस्‍कृतिक प्रभाव शामिल हैं।
  • आर्थिक संसाधन, सैन्‍य क्षमता, राजनयिक प्रभाव के मामले में भारत चौथे स्थान पर रहा,लेकिन लचीलेपन के मामले में भारत का 5वाँ जबकि सांस्‍कृतिक प्रभाव और फ्यूचर ट्रेंड्स में भारत का स्‍थान तीसरा रहा।
  • सबसे खराब प्रदर्शन इकोनॉमिक रिलेशनशिप और डिफेंस नेटवर्क में दर्ज किया गया, जिनमें भारत की रैंकिंग क्रमश: 7वीं और 10वीं रही।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, पावर स्‍टेटस का बड़ा हिस्‍सा जापान और भारत के हिस्‍से में है। टोक्‍यो स्‍मार्ट पावर है, जबकि नई दिल्‍ली भविष्‍य की ताकत है।
  • इस रिसर्च की मानें तो दुनिया की 4 सबसे सबसे बड़ी इकोनॉमी में से तीन एशिया में हैं।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार,भारत एशिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली इकोनॉमी बनने की ओर अग्रसर है।
  • वहीं रूस, ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, न्‍यूज़ीलैंड, वियतनाम, पाकिस्‍तान, ताइवान, फिलीपींस और उत्तर कोरिया को मिडिल पावर का दर्जा दिया गया है, जबकि बांग्‍लादेश, ब्रुनेइ, म्‍याँमार, श्रीलंका, कंबोडिया, मंगोलिया, लाओस और नेपाल को मामूली ताकत का दर्जा दिया गया है।

 

क्या ट्रेडिंग सिस्टम से FTA समाप्त हो गए हैं?

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-18 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

FTAs

संदर्भ
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जगदीश भगवती ने अपनी पुस्तक Termites in the Trading System: How Preferential Agreements Undermine Free Trade में खेद व्यक्त किया कि कैसे मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की बढ़ती संख्या विश्व व्यापार प्रणाली के लिये एक खतरा है।

क्या है मुक्त व्यापार संधि (Free Trade Agreement-FTA)?

  • मुक्त व्यापार संधि का प्रयोग व्यापार को सरल बनाने के लिये किया जाता है।
  • FTA के तहत दो देशों के बीच आयात-निर्यात के तहत उत्पादों पर सीमा शुल्क, नियामक कानून, सब्सिडी और कोटा आदि को सरल बनाया जाता है।
  • इसका एक बड़ा लाभ यह होता है कि जिन दो देशों के बीच में यह संधि की जाती है, उनकी उत्पादन लागत बाकी देशों के मुकाबले सस्ती हो जाती है।
  • इसके लाभ को देखते हुए दुनिया भर के बहुत से देश आपस में मुक्त व्यापार संधि कर रहे हैं।
  • इससे व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
  • इससे वैश्विक व्यापार को बढ़ाने में भी मदद मिलती रही है। हालाँकि, कुछ कारणों के चलते इस मुक्त व्यापार का विरोध भी किया जाता रहा है।

FTA बुरा क्यों है? 

  • भगवती FTA को व्यापार परिवर्तन और व्यापार सृजन के प्रभावों के कारण बुरा मानते हैं।बड़ा सवाल यह है कि ये प्रभाव विश्व व्यापार को किस हद तक विकृत करते हैं।
  • FTA मार्ग के माध्यम से विश्व व्यापार कितना होता है, इस बात का पता इस माध्यम से लगाया जा सकता है।
  • चूँकि FTA अधिकतर उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क पर व्यापार की इजाजत देता है और 280 से अधिक FTA दुनिया भर में परिचालित हो रहे हैं, इसलिये माना जाता है कि अधिकांश विश्व व्यापार FTA मार्ग के माध्यम से होता है।
  • हालाँकि, वैश्विक और द्विपक्षीय निर्यात-आयात डेटा से पता चलता है कि विश्व व्यापार का अधिकांश हिस्सा FTA के बाहर होता है (इसमें अंतर-ईयू व्यापार शामिल नहीं है, क्योंकि यूरोपीय संघ एक एकीकृत आर्थिक इकाई है)।
  • यूरोपीय संघ के निर्यात और आयात का केवल 13.6 प्रतिशत FTA साझेदार देशों के माध्यम से होता है। दक्षिण कोरिया को छोड़कर 41 FTA भागीदारों में से अधिकांश कच्चे माल और कम अंतिम उत्पादों की आपूर्ति करते हैं।
  • जापान के लिये, 17 FTA साझेदार देशों के माध्यम से केवल 20.8 प्रतिशत निर्यात और 24 प्रतिशत आयात होता है।
  • एशियन और चीन पूर्वी एशियाई अंतर्राष्ट्रीय उत्पादन नेटवर्क के केंद्र हैं लेकिन चीन के निर्यात का केवल 30.1 प्रतिशत और आयात का 23.2 प्रतिशत FTA साझेदार देशों के माध्यम से होता है और आसियान का 31.1 प्रतिशत निर्यात और 42.1 प्रतिशत आयात छह FTA साझेदार देशों के माध्यम से होता है।

preferential-trade

  • भारत के मामले में, 19.4 प्रतिशत निर्यात और 18.1 प्रतिशत आयात FTA के साझेदार देशों के माध्यम से होता है।
  • ध्यातव्य है कि हमारे पास अभी तक चीन के साथ पूर्ण FTA नहीं है।
  • जबकि, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया दो अपवाद हैं, जहाँ FTA देशों के साथ उच्चतम साझा व्यापार है।
  • ऑस्ट्रेलिया का 71 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का 76.9 प्रतिशत निर्यात FTA पार्टनर देशों में होता है।
  • हमने यह भी देखा कि FTA हमेशा भागीदारों के बीच व्यापार या व्यापार के विकास में वृद्धि नहीं करता है।
  • यूएस-कनाडा-मेक्सिको के बीच 1994 में हस्ताक्षर किये गए उत्तरी अमेरिकी FTA (NAFTA) एक उदाहरण है।
  • 1994 में NAFTA पर हस्ताक्षर करने से ठीक पहले अमेरिकी व्यापार में NAFTA का हिस्सा 28.9 प्रतिशत था जो आज 31.8 प्रतिशत है।
  • यदि हम NAFTA से बाहर निकल जाते हैं, तो यूएस निर्यात का केवल 13.2 प्रतिशत और इसके आयात का 8.3 प्रतिशत शेष 18 FTA भागीदारों से आता है।
  • इन उदाहरणों से पता चलता है कि FTA भागीदारों के साथ अधिकांश देशों के व्यापार का हिस्सा उनके कुल वैश्विक व्यापार का 20-40 प्रतिशत ही है।
  • हालाँकि, अधिकांश व्यापार FTA के बाहर होने के कई कारण हैं।
  • FTA आयात शुल्क को कम करता है, लेकिन यदि यह पहले से ही शून्य है, तो FTA कोई लाभ नहीं दे सकता है और आधे विश्व व्यापार को कवर करने वाले उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य है तो डब्ल्यूटीओ में सामंजस्यपूर्ण बातचीत की जा सकती है।
  • FTA के कम उपयोग के अन्य कारणों में उत्पत्ति के जटिल नियम हैं। उत्पत्ति के नियम न्यूनतम मूल्य वृद्धि जैसी स्थितियों को लागू करते है, जिन्हें किसी उत्पाद को बनाने के लिये गैर-FTA साझेदार देश के इनपुट का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।
  • क्योंकि अधिकांश (लगभग 83-85 प्रतिशत) विश्व व्यापार FTA के बाहर होता है। केवल 15-17 प्रतिशत व्यापार अधिमानी शर्तों पर होता है।
  • लेकिन टैरिफ बढ़ाने और चीन की प्रतिक्रिया में अमेरिकी कार्रवाई के चलते टैरिफ अभी भी आयात को विनियमित करने का केंद्रीय साधन हैं और इन्हें केवल FTA के माध्यम से कम किया जाना चाहिये जब आर्थिक लाभ स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किये जा सकते हैं।

निष्कर्ष
दरअसल, इसमें कोई शक नहीं है कि एफटीए, सिद्धांत की दृष्टि से एक उद्देश्यपूर्ण आर्थिक नीति है, लेकिन क्या यह व्यवहार में भी उतनी ही लाभदायक है? इस पर बहस की जा सकती है। इसलिये भारत को सोच-समझकर आगे कदम बढ़ाना चाहिये। यह दिलचस्प है कि वर्ष 2004 में प्रमुख अर्थशास्त्री पॉल सैमुअलसन ने कहा था कि ‘मुक्त व्यापार वास्तव में श्रमिकों के लिये बदतर हालत पैदा कर सकता है’। मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते समय हमें रोज़गार सृजन की चिंताओं को भी ध्यान में रखना होगा। अतः सरकार को गैर-टैरिफ बाधाएँ, सार्वजनिक खरीद में स्थानीय वरीयता पर भी ध्यान देना चाहिये। जब हम बात मुक्त व्यापार की कर रहे हैं, तो हमें सिद्धांतों एवं वास्तविकताओं का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना होगा।

स्रोत: द हिंदू (बिज़नेस लाइन)

 

कुशल मज़दूरों को ऊपर उठाने की आवश्यकता 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र–3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-18 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित)

Global Village

संदर्भ

वर्तमान विश्व में तेज़ी से विघटनकारी प्रौद्योगिकियाँ हमारे जीवन को बदल रही हैं और तेज़ी से ऐसा प्रचार होते दिख रहा है कि एआई, ऑटोमेशन व रोबोटिक्स वह कार्य कर रहे हैं जिन्हें मनुष्य द्वारा किया जाना असंभव है। अतः चिंताएँ बढ़ रही हैं कि ये प्रौद्योगिकियाँ मानव का स्थान ले रही हैं और उन्हें बेरोज़गार बना रही हैं। इसका प्रभाव उन क्षेत्रों में ज्यादा व्यापक तौर पर दिखाई दे रहा है, जहाँ  अकुशल श्रमिकों की संख्या अधिक है।

प्रमुख बिंदु 

  • यह महत्त्वपूर्ण है कि इन तकनीकी बदलावों के वास्तविक होने के बावजूद, नौकरियाँ बढ़ती रहेंगी किंतु इसके साथ ही बढ़ी अनिवार्यता के अनुरूप कुशल, रीस्किल्ड श्रमिकों को बढ़ाना भी महत्त्वपूर्ण है ताकि देश और व्यवसाय नई अर्थव्यवस्था में सफल हो सकें।
  • तकनीकी, कौशल भविष्य में समाज और डिजिटल कौशल की मुद्रा की तरह है और तकनीकी नौकरियों में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता और उनकी मांग अन्य क्षेत्रों में भी समान रूप से है।
  • ज़ाहिर है, वैश्विक स्तर पर कौशल अंतराल विद्यमान है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या हम भविष्य के लिये इस अंतर को कम करने हेतु उचित कदम उठा रहे हैं?
  • इसी संदर्भ में कैपेगिनी द्वारा किए गये एक वैश्विक अध्ययन जिससे पता चलता है कि 55 प्रतिशत संगठनों ने यह स्वीकार किया था कि न केवल कौशल अंतराल बढ़ा है बल्कि यह निरंतर जारी है।
  • जब विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का अध्ययन किया गया तो पाया गया की 70 प्रतिशत अमेरिकी कंपनियों ने कौशल अंतराल को स्वीकार किया जबकि भारत ने 64 प्रतिशत, ब्रिटेन ने 57 प्रतिशत, जर्मनी ने 55 प्रतिशत तथा फ्रांस में 52 प्रतिशत कौशल अंतराल को स्वीकार किया।
  • गार्टनर के अनुसार इस अंतर को पाटना इतना आसान नहीं है और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2020 तक डिजिटल नौकरियों में प्रासंगिक प्रतिभा की अनुपलब्धता के कारण 30 प्रतिशत तकनीकी नौकरियाँ अनुपलब्ध होंगी।

कौशल विकास और विश्व परिदृश्य

  • दुनिया भर में कंपनियों को जल्द से जल्द यह समझना होगा कि ये विशिष्ट कौशल क्या हैं और अल्पकालिक अवधि के लिये क्या किया जाना आवश्यक है।
  • प्रतिभा गतिशीलता (Talent mobility) अल्पकालिक चुनौतियों का समाधान तो करेगी, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि केंद्रित री-स्किलिंग ड्राइव से नहीं बचा जा सकता और सभी राष्ट्रों को इससे गुज़रना ही होगा।
  • डिजिटल क्रांति के अवसरों को प्राप्त करने के लिये आवश्यक आधारभूत कौशल स्टेम (Science, Technology, Engineering and Math) प्रतिभा पूल का विस्तार करने की आवश्यकता है।
  • अमेरिका जो नवाचार और प्रौद्योगिकी में अग्रणी है हर साल 1 प्रतिशत से भी कम की दर से स्टेम डिग्रियाँ बढ़ा रहा है। हालाँकि, सॉफ्टवेयर विकास रोज़गार और योग्य अमेरिकी आवेदकों के बीच 2020 में 1.4 मिलियन लोगों का अंतर है।
  • वहीं यूके में 40,000 स्टेम स्नातकों की कमी है, जिससे अतिरिक्त सकल घरेलू उत्पाद में सालाना 63 अरब पाउंड की हानि होने का अनुमान है।
  • इसके अलावा एआई और डेटा वैज्ञानिक नौकरियों की मांग आपूर्ति से अधिक है साथ ही, अगले तीन वर्षों में साइबर सुरक्षा और कौशल की कमी का अनुमान 3 मिलियन से अधिक है तथा DevOps और Cloud Architecture जैसी नौकरियों में उम्मीदवारों की तुलना में रिक्तियाँ अधिक हैं।
  • वास्तविकता यही है कि कोई भी देश या कंपनी इन चुनौतियों का सामना किये बिना विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ कर सकता है।

कौशल विकास और भारत

  • भारत का तकनीकी क्षेत्र भी अपनी डिजिटल क्षमताओं के निर्माण और अपनी स्टेम प्रतिभा को बढ़ाने के लिये समान रूप से ध्यान दे रहा है।
  • लगभग 25 अरब डॉलर के डिजिटल राजस्व और आधे मिलियन प्रशिक्षित डिजिटल पेशेवरों के साथ, उद्योग तेज़ी से वैश्विक कॉरपोरेशन के लिये डिजिटल समाधान का भागीदार बन रहा है।
  • इससे उद्योग शिफ्ट को व्यावसायिक मॉडल में बदलने में सहायता मिलती है, जिसमें डोमेन और तकनीकी पेशेवरों का वैश्विक प्रतिभा पूल बनाना, प्रमुख बाजारों में नवाचार केंद्र स्थापित करना, नए तकनीक तथा रचनात्मक डिज़ाइन और स्टार्टअप के साथ साझेदारी के लिये  अधिग्रहण शामिल हैं।
  • हमारे उद्योग वैश्विक स्तर पर स्किलिंग और रीस्किलिंग पहलों पर समान रूप से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
  • साथ ही औद्योगिक क्षेत्र अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान साझेदारी, इंटर्नशिप, राज्य स्तरीय संलग्नक, छात्रवृत्ति और सामाजिक पहलों में स्टेम कार्यक्रम, स्किलिंग आदि गतिविधियाँ अपना रहे हैं।
  • इसके आलवा इंटरप्ले पर नौ नई उभरती प्रौद्योगिकियाँ जिनपर ध्यान देने की भी आवश्यकता है, जो इस प्रकार हैं – सोशल/मोबाइल, क्लाउड, बिग डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वीआर, 3डी प्रिंटिंग और साइबर सिक्योरिटी।
  • अनुमानतः इस श्रृंखला के परिणामस्वरूप 55 नए रोज़गारों की भूमिका बढ़ेगी।
  • ध्यातव्य है कि चौथी औद्योगिक क्रांति के परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है और इसमें फिर से स्किलिंग सहित अभिनव सोच में एक बड़ा कदम शामिल है।
  • साथ ही, कुशल प्रतिभा गतिशीलता के लिये यह एक देश, कंपनियों और नागरिकों के लिये एक सफल परिदृश्य भी है।
  • नवाचार का विचार एक स्तरीय है। मिसाल के तौर पर भारत, अमेरिका और इज़राइल के तीन राष्ट्रों में स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र बहुत परिपक्व हैं, लेकिन यह बाहर से आने वाले नवाचारों की तुलना में बहुत अलग है।
  • भारत अनुप्रयोग नवाचार के लिये एक मज़बूत दावा कर सकता है, जबकि, इज़राइल में, यह टिकाऊ नवाचार का विषय है और वहीं अमेरिका में अकसर सफलतापूर्वक नवाचार (breakthrough innovation) को अपनाया जाता है।
  • राष्ट्रों को सहयोग करने, आईपी स्थानांतरित करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, प्रतिभा को तैयार करने और एक-दूसरे के पूरक के लिये  भारत के पास ज़बरदस्त अवसर है और यह तभी संभव है जब प्रतिभा भौगोलिक सीमाओं और आप्रवासन कानूनों द्वारा सीमित न हो, जो कि दंडनीय हैं।

क्या हो आगे का रास्ता?

  • तकनीकों के इस बदलते दौर में लोगों को ‘फिटर’ और ‘प्लम्बर’ जैसे कार्यों के लिये प्रशिक्षित करना उतना व्यावहारिक नहीं है।
  • अब ज़रूरत इस बात की है कि उन्हें ड्रोन और रोबोट्स के कल-पुर्ज़े ठीक करने का कौशल दिया जाए और इस कौशल विकास की ज़िम्मेदारी हमारी शिक्षा व्यवस्था को उठानी होगी।
  • लोगों को विशेषज्ञतापूर्ण कार्यों के लिये कौशल दिया जाए और इसके लिये अवसंरचना का भी विकास किया जाए।
  • पूर्व की औद्योगिक क्रांतियों के अनुभवों से यह ज्ञात होता है कि इन परिवर्तनों से सर्वाधिक प्रभावित वे समूह होते हैं जो अपनी कौशल क्षमता में निश्चित समय के भीतर वांछनीय सुधार लाने में असमर्थ होते हैं अतः सरकार को चाहिये कि ऐसे लोगों को प्रशिक्षण के लिये पर्याप्त समय के साथ-साथ संसाधन भी उपलब्ध कराए।