UPSC DAILY CURRENT 09-06-2018

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एसोचैम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. एसोचैम एक गैर-लाभकारी संस्थान है, जिसकी स्थापना 1920 में प्रमोटर चेम्बर्स द्वारा की गई, जो भारत के केवल उद्योग क्षेत्र का प्रतिनिधित्त्व करते थे।
  2. एसोचैम को “चेंबर ऑफ चेंबर” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें 400 से अधिक उद्योग चैंबर हैं।
  3. एसोचैम देश के व्यापार, वाणिज्य और औद्योगिक पर्यावरण को आकार देने में उत्प्रेरक भूमिका निभाकर महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (C)
व्याख्या :

एसोचैम (ASSOCHAM)

Assocham

  • एसोचैम एक गैर-लाभकारी संस्थान है, जिसकी स्थापना 1920 में प्रमोटर चेम्बर्स द्वारा की गई थी तथा यह भारत के सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते थे। अतः पहला कथन सही नहीं है।
  • यह देश के व्यापार, वाणिज्य और औद्योगिक पर्यावरण को आकार देने में उत्प्रेरक भूमिका निभाकर महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। अतः तीसरा कथन सही है। 
  • एसोचैम देश भर में 4,50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सदस्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इसे “चेंबर ऑफ चेंबर” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें 400 से अधिक उद्योग चैंबर हैं। अतः दूसरा कथन सही है।
  • इसके साथ ही वर्तमान में, एसोचैम में 100 से अधिक राष्ट्रीय परिषदें हैं, जो भारत में आर्थिक गतिविधियों के संपूर्ण क्षेत्र को कवर करती हैं।

विजन

  • ज्ञान को प्रेरित करके भारतीय उद्यम को सशक्त बनाना, जो बाधाहीन प्रौद्योगिकी संचालित वैश्विक बाज़ार में वृद्धि का उत्प्रेरक साबित होगा और संबंधित व्यापार खंडों में उन्हें बड़े पैमाने पर संरेखित और उभरने में मदद करेगा।

 

मिशन

  • कॉर्पोरेट इंडिया के प्रतिनिधि अंग के रूप में, एसोचैम अपने सदस्यों की वास्तविक, वैध जरूरतों तथा हितों को व्यक्त करता है।
  • इसका लक्ष्य संतुलित आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिये नीति और विधायी वातावरण को प्रभावित करना है।
  • ये शिक्षा, आईटी, बीटी, स्वास्थ्य, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण को महत्त्वपूर्ण सफलता कारक मानते हैं। एसोचैम सदस्य निम्नलिखित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
    ♦ व्यापार (राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय)
    ♦ उद्योग (घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय)
    ♦ पेशेवर (उदाहरण के लिये सीए, वकील, सलाहकार)
    ♦ व्यापार और उद्योग संघों और वाणिज्य के अन्य चैंबर
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. जून 1893 को महात्मा गांधी को रंगभेद के कारण चलती ट्रेन से पीटरमैरिट्सबर्ग रेलवे स्टेशन पर फेंक दिया गया था।
  2. पीटरमैरिट्सबर्ग दक्षिण अफ़्रीका के क्वाज़ूलू-नताल प्रांत की राजधानी होने के साथ ही, इस प्रांत का सबसे बड़ा शहर भी है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (B)
व्याख्या:

Bowtswana

पीटरमैरिट्सबर्ग रेलवे स्टेशन की घटना की 125 वीं वर्षगांठ और दक्षिण अफ्रीकी के प्रतिष्ठित नेता, नेल्सन मंडेला की 100वीं जन्म शताब्दी के साथ-साथ भारत और दक्षिण अफ्रीका के कूटनीतिक संबंधों के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाँच दिवसीय दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर हैं।

पीटरमैरिट्सबर्ग रेलवे स्टेशन की घटना 

  • गांधी जी 1893 में व्यापारी दादा अब्दुल्ला को कानूनी सलाह देने के लिये  दक्षिण अफ्रीका के डरबन में पहुँचे थे।
  • जून में, उन्हें दादा अब्दुल्ला ने ट्रांसवाल में प्रिटोरिया की यात्रा करने के लिये कहा था, पहली बार गांधी जी पिटर्मैरिट्जबर्ग गए।
  • वहाँ, गांधी जी एक ट्रेन में प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे थे, क्योंकि उन्होंने प्रथम श्रेणी के टिकट खरीदे थे, चूँकि गैर-गोरे लोगों को प्रथम श्रेणी के डिब्बों में यात्रा करने की स्पष्ट रूप से अनुमति नहीं थी।
  • अतः 7 जून, 1893 को महात्मा गांधी को चलती ट्रेन से फेंक दिया गया था।
  • इस दौरान इन्होंने दक्षिण अफ्रिका में भारतीयों के प्रति रंगभेद की नीति को स्पष्ट रूप से महसूस किया।
  • ऐसी परिस्थितियों में गांधी जी पहली बार नस्लवाद से परिचित हुए और इस घटना ने गांधी जी को सत्याग्रह आंदोलन के लिये प्रेरित किया था। उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर पहला कथन सही है।
  • महात्मा गांधी को रेलगाड़ी के डिब्बे से फेंके जाने की इस घटना के 125 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।

पीटरमैरिट्सबर्ग

  • पीटरमैरिट्सबर्ग दक्षिण अफ़्रीका के क्वाज़ूलू-नताल प्रांत की राजधानी है हालाँकि, इस प्रांत का सबसे बड़ा शहर डरबन है। अतः दूसरा कथन सही नहीं है।
  • केप कॉलोनी के बोअर ने 1838 में ब्लड रिवर में जुलस पर विजय के बाद इसकी स्थापना की और इसे अपने मृत नेताओं पिट रिटिफ़ और गेरिट मारिट्स का सम्मान करने के लिये नामित किया।
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हाल ही में  किस भारतीय उद्यमियों के समूह ने ‘वूमन सेफ्टी एक्स प्राइज’ के तहत दी जाने वाली पुरस्कार राशि को जीता है?

A) फिक्‍की महिला संगठन
B) बचपन बचाओं समूह
C) एसोचैम लीफ
D) वीयरैबल्स
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उत्तर (D)
व्याख्या:

Wearables

  • हाल ही में युवा भारतीय उद्यमियों के एक समूह लीफ वीयरैबल्स (Leaf Wearables) ने पहनने योग्य स्मार्ट डिवाइस विकसित करके $ 1 मिलियन डॉलर का पुरस्कार जीता है। अतः विकल्प (D) ही सही उत्तर है ।
  • गौरतलब है कि यह डिवाइस महिलाओं को धमकी या हमला करने के खिलाफ आपातकालीन अलर्ट भेजने हेतु उपयोग किया जा सकता हैं।
  • ‘सेफर प्रो’ नामक इस डिवाइस को संयुक्त राष्ट्र में दिए जाने वाले “वूमन सेफ्टी एक्स प्राइज” हेतु चुना गया है।
  • लीफ वेयरबेल के माणिक मेहता, निहारिका, राजीव और अविनाश बंसल ने इस पुरस्कार राशि को जीता है।
  • इस पुस्कार को भारतीय-अमेरिकी समाजसेवी नवीन जैन और उनकी पत्नी अनु जैन फंड करती है।
  • पुरस्कार पाने के लिये 18 देशों की 85 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिनमें पाँच टीमों को फाइनल हेतु चुना गया।
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क्वाड के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. क्वाड के गठन में जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देश शामिल हैं।
  2. क्वाड के गठन उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिये वैकल्पिक ऋण वित्त पोषण प्रदान करना भी है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (C)
व्याख्या:

हाल ही में क्वाड (Quad ) देशों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र के आतंकवाद और अप्रसार (counter-terrorism and non-proliferation) जैसे “सामान्य रुचि के मुद्दों” पर सिंगापुर में परामर्श किया।

क्वाड (Quad) क्या है?

  • क्वाड के इस नए चतुर्भुज गठन में जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देश शामिल हैं। अतः पहला कथन सही है।
  • “चतुर्भुज” समूह या “क्वाड” का उद्देश्य बढ़ते चीन और इसकी “हिंसक” आर्थिक और व्यापार नीतियों को शामिल करना है।
  • इसका उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिये वैकल्पिक ऋण वित्त पोषण प्रदान करना भी है।
  • नवंबर 2017 में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के अधिकारियों ने मनीला में आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान एक दशक तक अपने चतुर्भुज सहयोग के पुनरुत्थान को शुरू करने के लिये मुलाकात की थी।

पृठभूमि

  • इस बैठक की अवधारणा नई नहीं है। इसका पहला प्रस्ताव 2008 में तब रखा गया था, जब 2007 में  भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने बंगाल की खाड़ी में मालाबार साझा नौसैनिक अभ्यास किया था।
  • बाद में  ऑस्ट्रेलिया इससे अलग हो गया था, क्योंकि चीन ने इस बहुपक्षीय साझा अभ्यास पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
  • अब एक दशक बाद यह विचार फिर तब जीवित हुआ, जब कुछ समय पूर्व जापान के विदेश मंत्री ने चारों देशों के बीच ऐसी बैठक का प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका ने तत्काल मंज़ूरी दे दी थी।
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भीमा-कोरेगांव युद्ध के संबध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. जनवरी, 1818 को पेशवा और ब्रिटिश सैनिकों के बीच युद्ध हुआ, इस युद्ध में ब्रिटिश सेना को पेशवाओं पर जीत हासिल हुई।
  2. 1851 में अंग्रेजों द्वारा भीमा-कोरेगांव में एक स्मारक का निर्माण कराया था, जहाँ हर साल 1 जनवरी को इस दिन की याद में दलित समुदाय के लोग एकत्र होते हैं।
  3. इस युद्ध में महार जाति के लोगों ने पेशवाओं का साथ दिया था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (C)
व्याख्या :

  • हाल ही में जनवरी में हुए भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और दिल्ली से पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है।
  • गौरतलब है कि जनवरी माह में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200 वीं वर्षगांठ मनाने के लिये यहाँ लोग एकत्रित हुए थे।
  • कथित तौर पर विवादास्पद पुस्तिकाओं को फैलाने और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत घृणित भाषण देने के लिए सभी पाँचों को गिरफ्तार किया गया है।
  • गिरफ्तार लोगों में मुंबई के प्रमुख दलित कार्यकर्त्ता-प्रकाशक सुधीर ढवाले, आदिवासी मानव अधिकार वकील सुरेंद्र गडलिंग, जनजातीय कार्यकर्त्ता महेश राउत और नागपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी प्रोफेसर शोमा सेन  और नई दिल्ली में कार्यकर्त्ता रोना विल्सन शामिल हैं।

 

भीमा-कोरेगांव युद्ध क्या है?

Bhima-War

  • 1 जनवरी, 1818 को पेशवा और ब्रिटिश सैनिकों के बीच युद्ध हुआ, इस युद्ध में ब्रिटिश सेना को पेशवाओं पर जीत हासिल हुई। अतः पहला कथन सही है।
  • इस युद्ध की याद में अंग्रेजों ने 1851 में भीमा-कोरेगांव में एक स्मारक का निर्माण कराया था, जहाँ हर साल 1 जनवरी को इस दिन की याद में दलित समुदाय के लोग एकत्र होते हैं। अतः दूसरा कथन भी सही है। 
  • हालाँकि, यह स्मारक अंग्रेजों द्वारा अपनी शक्ति के प्रतीक के रूप में बनाया गया था, लेकिन अब यह महारों यानी दलित जाति के स्मारक के रूप में जाना जाता है।

महारों ने युद्ध में अंग्रेजों का साथ क्यों दिया ?

  • पेशवाओं द्वारा महारों के साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जाता था अतः महार जाति के लोग बहुत अपमानित महसूस करते थे उनका सामाजिक दायरा काफी सीमित था।
  • महारों को ऐसे सार्वजनिक जगहों पर जाने की मनाही थी, जहाँ  सवर्ण जाति के लोग जाया करते थे। यहाँ तक की, वो सार्वजनिक कुएं से पानी भी नहीं ले सकते थे अतः पीड़ित महार जाति के लोगों ने युद्ध में अंग्रेजों का साथ दिया था। अतः तीसरा कथन सही नहीं है।

 

सेंटोसा द्वीप
(Sentosa Island)

Sentosa Island

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की वार्ता के लिये सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप को चुना गया है, यह द्वीप विश्व के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। इस शिखर सम्मेलन के लिये सेंटोसा द्वीप को चुने जाने का निर्णय तार्किक है। यह सिंगापुर के मुख्य द्वीप के दक्षिणी तट से केवल आधा किलोमीटर दूर एक जलडमरू (Strait) के पार स्थित है। काफी एकांत में स्थित होने के कारण यह द्वीप न केवल गोपनीयता प्रदान करता है बल्कि दोनों देशों के नेताओं के लिये एक सुरक्षित जगह भी है।

  • इतिहास में यहाँ 400 से अधिक एलायड ट्रूप्स (सहयोगी सेना) के सैनिकों को कठोर स्थितियों में कैदी बनाकर रखने का उल्लेख मिलता था।
  • वर्ष 1942 में सिंगापुर पर जापानियों ने कब्जा कर लिया था। जिसके बाद यहाँ जापान विरोधी विचारधारा वाले लोगों की बड़ी संख्या में हत्या कर दी गई। सिंगापुर में रहने वाले चीनी नागरिकों सहित जापान विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले या संदेह वाले स्थानीय नागरिकों को सेंटोसा द्वीप पर फाँसी दे दी जाती थी।
  • यह एक ब्रिटिश सैन्य बेस और एक जापानी युद्ध बंदी शिविर (prisoner of war camp) रहा है।
  • 1972 तक सेंटोसा द्वीप को ‘पुलाऊ बेलाकांग मति’ (Pulau Blakang Mati) अर्थात् मृत्यु का द्वीप (Island of death from behind) नाम से जाना जाता था।
  • इसके बाद एक सरकारी अभियान के भाग के रूप में इसका नाम बदलकर रिसॉर्ट द्वीप कर दिया गया।
गुरुग्राम में देश का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस

Digital India

हाल ही में हरियाणा के गुरुग्राम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority-DLSA) का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस (Digital Front Office) शुरू किया गया। यह देश का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो इस मॉडल को हरियाणा के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • डिजिटल फ्रंट ऑफिस की स्थापना के बाद डीएलएसए का समस्त रिकॉर्ड डिजिटाइज़ किया जाएगा। अभी तक इन सभी रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिये रजिस्टरों का उपयोग किया जाता है।
  • फ्रंट ऑफिस से डीएलएसए के पास मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने हेतु आने वाले प्रार्थी को पैनल के किस अधिवक्ता के पास भेजा जाएगा, मामले की सुनवाई की तारीख आदि के संबंध में सभी जानकारियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा।
  • डिजिटल फ्रंट ऑफिस को कॉल सेंटर से कनेक्ट किया जाएगा, ताकि किसी भी अभावग्रस्त व्यक्ति को फोन करके भी बताया जा सके कि उसे कानूनी तौर पर कैसे राहत मिल सकती है।
  • इसके साथ-साथ इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोगों को न्याय दिलाने में अधिक-से-अधिक सहायक प्रदान की जा सके।
सीबीडीटी ने पखवाड़े को प्रभाव-पुष्टि मामलों की लंबित अपील को समर्पित किया

CBDT

लोक शिकायतों का निपटान एवं करदाताओं की सेवा सीबीडीटी एवं आयकर विभाग के लिये शीर्ष प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। इसीलिये सीबीडीटी ने 1 जून से 15 जून, 2018 के पखवाड़े को प्रभाव-समाधान मसलों के लंबित अपील के त्‍वरित निपटान को समर्पित किया है।

  • आकलन अधिकारियों को ऐसे मामलों को शीर्ष प्राथमिकता देने एवं इस क्षेत्र में विशेष ध्‍यान देने का निर्देश दिया गया है, जिससे इस वजह से आने वाली शिकायतों का जल्‍द-से-जल्‍द निपटारा किया जा सके।
  • सभी करदाताओं, आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया) के स्‍थानीय चैप्‍टर्स एवं बार एसोसिएशंस से आग्रह किया गया है कि वे इस अवसर का उपयोग अपील प्रभाव एवं समाधान के तहत अपने लंबि‍त मुद्दों के समाधान के लिये करे।

सीबीडीटी

  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अंतर्गत एक सांविधिक प्राधिकरण के तौर पर कार्यरत है। अपने पदेन सामर्थ्य में इसके अधिकारी मंत्रालय के प्रभाग के तौर पर भी कार्य करते हैं जो प्रत्यक्ष कर के उदग्रहण तथा संग्रहण से संबंधित मामलों से व्यवहार करते हैं।
  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में एक अध्यक्ष तथा छह सदस्य शामिल होते हैं।

पृष्ठभूमि

  • विभाग के शीर्ष निकाय के तौर पर केंद्रीय राजस्व बोर्ड, कर प्रबंधन का उत्तरदायित्व, केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1924 के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया। प्रारंभिक तौर पर बोर्ड को दोनों प्रकार के प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों का उत्तरदायित्व सौंपा गया था।
  • जब कर का प्रबंधन एक बोर्ड के लिये संभालना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हुआ तब बोर्ड को प्रभावी तिथि 1 जनवर, 1964 को दो भागों में विभक्त कर दिया गया जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड का नाम दिया गया।
  • यह द्विभाजन केद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 की धारा 3 के अंतर्गत दो बोर्डों के संविधान के अनुसार प्रस्तुत किया गया।
प्रतिभाशाली खिलाडि़यों के लिये पेंशन में उर्ध्‍वमुखी संशोधन

Upward

खिलाड़ियों के कल्‍याण के संबंध में एक बड़े कदम के रूप में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिये पेंशन में ऊर्ध्वमुखी संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के तहत अन्‍तर्राष्‍ट्रीय खेल स्‍पर्धाओं में पदक जीतने वालों के लिये पेंशन की वर्तमान राशि दोगुनी कर दी गई है।

क्या संशोधन किये गये है-

  • ओलम्पिक/पैराओलम्पिक खेलों में पदक विजेता के लिये पेंशन को 20,000 रुपए किया गया है।
  • विश्‍व कप/विश्‍व चैम्पियनशिप में स्‍वर्ण पदक विजेता (ओलम्पिक/एशियाई खेल प्रतिस्‍पर्धाओं) के लिये 16,000 रुपए।
  • विश्‍व कप/विश्‍व चैम्पियनशिप में रजत/कांस्‍य  पदक विजेता (ओलम्पिक/ए‍शियाई खेल प्रतिस्‍पर्धाओं) और एशियाई खेलों/राष्‍ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में स्‍वर्ण पदक विजेता के लिये 14,000 रुपए।
  • एशियाई खेलों/राष्‍ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में रजत और कांस्‍य पदक विजेता के लिये 12,000 रुपए करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्य तथ्य 

  • पैरा-ओलम्पिक खेलों एवं पैरा-एशियाई खेलों में पदक विजेताओं की पेंशन की राशि क्रमश: ओलम्पिक खेलों एवं एशियाई खेलों में पदक विजेताओं के समकक्ष होगी।
  • पेंशन के लिये चार वर्षों में एक बार आयोजित की जाने वाली विश्‍व चैम्पियनशिप पर ही विचार किया जाएगा।
  • संशोधित योजना में रेखांकित किया गया है कि खिलाड़ियों को इस योजना के तहत पेंशन के लिये आवेदन करने के समय सक्रिय खेल करियर से सेवानिवृत्‍त हो जाना चाहिये तथा 30 वर्ष की आयु पूरी कर लेनी चाहिये।
  • इस आशय की स्वीकृति खिलाड़ियों द्वारा आवेदन प्रारूप में ही दी जाएगी तथा आवेदक की उपलब्धियों के सत्‍यापन के लिये आवेदन को अग्रसारित करते समय एसएआई से भी इसकी पुष्टि की जाएगी।
  • वर्तमान पेंशनधारियों के मामले में पेंशन की राशि में संशोधन 1 अप्रैल, 2018 से प्रभावी होगा।

स्रोत : द हिन्दू, डी.एन.ए एवं पी.आई.बी.