UPSC DAILY CURRENT 11-05-2018

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“धरोहर गोद ले योजना” के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. यह योजना देश के स्मारकों, धरोहरों और पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के अनुकूल विकसित करने हेतु शुरू की गई है।
  2. यह परियोजना संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है।
  3. इस योजना में केवल निजी क्षेत्र की कंपनियाँ ही शामिल हो सकती हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तरः (a)
व्याख्याः 

धरोहर गोद ले योजना (Adopt a Heritage Scheme)

Heritage-Scheme

  • विश्‍व पर्यटन दिवस अर्थात् 27 सितम्‍बर, 2017 को पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘एक धरोहर गोद ले योजना’ का शुभारंभ किया गया। इस योजना का उद्देश्य देशभर के स्‍मारकों, धरोहरों और पर्यटन स्‍थलों को विकसित कर पर्यटक अनुकूल बनाने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पर्यटन संभावना तथा सांस्‍कृतिक महत्त्व को बढ़ाना है। भारत अपने समृद्ध और विविध सांस्‍कृतिक तथा प्राकृतिक स्‍मारकों के लिए विश्‍वभर में प्रसिद्ध है। अतः पहला कथन सत्य है।
  • यह योजना संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। अतः दूसरा कथन असत्य है।
  • इस योजना में निजी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कॉरपोरेट जगत के व्‍यक्तियों को स्‍मारक स्‍थलों को गोद लेने और संरक्षण तथा विकास के माध्‍यम से स्‍मारकों और पर्यटन स्‍थलों को स्‍थायी बनाने बनाने हेतु शामिल किया गया है।अतः तीसरा कथन भी असत्य है।
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एक्सपैंडेड आसियान मैरीटाइम फोरम (EAMF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. इसकी स्थापना 2008 में फिलीपींस में किया गया।
  2. भारत इस फोरम का सदस्य हैं।
  3. यह फोरम सदस्य देशों के मध्य समुद्री सीमा विवाद, पायरेसी और समुद्री विनियमन हेतु कार्य करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) उपरोक्त सभी।
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व्याख्या:
उत्तरः (b)

एक्सपैंडेड आसियान मैरीटाइम फोरम (Expanded ASEAN Maritime Forum)

  • EAMF की स्थापना ·2012 में मनीला, फिलीपींस में आसियान शिखर सम्मलेन के दौरान की गई थी।
  • इसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूसी संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका अमेरिका सहित आसियान के 10 सदस्य देश शामिल हैं।
  • यह फोरम मुख्य रूप से समुद्री मुद्दों पर केंद्रित है। यह फोरम सदस्य देशों के मध्य समुद्री सीमा विवाद सुलझाने, समुद्री डकैती (पायरेसी) से निपटने और समुद्री विनियमन हेतु कार्य करता है। अतः पहला कथन गलत है तथा दूसरा व तीसरा कथन सत्य है।
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भारत में निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र संरक्षित समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत शामिल हैं?

  1. कच्छ की खाड़ी
  2. मन्नार की खाड़ी
  3. गहिरमाया
  4. महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान

कूटः

A)  केवल 1 और 2
B)  केवल 2 और 3
C)  केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी।
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उत्तरः (d)
व्याख्याः 

जिस तरह से पृथ्वी के भू-भाग पर भू-जैव संपदा के संरक्षण के लिये अभयारण्य बनाए जाते हैं, उसी तरह से महासागरों में समुद्री जैव संपदा के संरक्षण के लिये समुद्री संरक्षित क्षेत्र (Marine Protected Area- MPA) निर्धारित किये जाते हैं, जहाँ मानवीय गतिविधियाँ पूर्णतया सख्त नियमों के तहत संचालित की जाती हैं। अभी तक विश्व के महासागरों का केवल 3 प्रतिशत ही संरक्षित किया गया है, जबकि सम्बद्ध समुद्री निकाय इसके 30 प्रतिशत संरक्षण को उचित मानते हैं। स्थानीय, राज्य, क्षेत्रीय, देशी, क्षेत्रीय, या राष्ट्रीय अधिकारियों द्वारा प्राकृतिक या ऐतिहासिक समुद्री संसाधनों के लिए इन स्थानों को विशेष सुरक्षा दी जाती है।

MPA

भारत के प्रमुख समुद्री संरक्षित क्षेत्र हैं:

1. कच्छ की खाड़ी में स्थित समुद्री राष्ट्रीय उद्यान: यह भारत के गुजरात राज्य में स्थित भारत का सर्वप्रथम समुद्री राष्ट्रीय उद्यान है जो 1982 में स्थापित किया गया था। इस क्षेत्र में स्पंज की 70 प्रजातियाँ , 52 मूंगा की प्रजातियाँ, 27 प्रजातियों की झींगा और 30 प्रजाति के केकड़ों पायी जाती हैं।

2. मन्नार की खाड़ी: भारत के तमिल नाडु राज्य में रामनाथपुरम जिले में मन्नार की खाड़ी में 21 (अब 19) द्वीपों पर आधारित एक समुद्री राष्ट्रीय उद्यान है। यहाँ 11 समुंदरी घास की प्रजाति पायी जाती हैं जिसमे एनहलस अकोरिडस घास सबसे प्रचलित है। इस क्षेत्र में समुंद्री गायों, समुंद्री एनीमोन, समुंद्री ककड़ी, समुंद्री घोड़ा और डॉल्फ़िन पाए जाते हैं।

3. महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान: अंडमान द्वीप समूह पर स्थित है। यह पार्क वंडूर नेशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्री राष्ट्रीय उद्यान बंगाल की खाड़ी में अंडमान के दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित है। इस पार्क को 24 मई 1983 को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत क्षेत्र में प्रचलित कोरल और घोंसले के शिकार समुद्री कछुए जैसे समुद्री जीवन की रक्षा के लिए बनाया गया था। यह पार्क उष्णकटिबंधीय जंगल के साथ कवर किया गया है।

4. गहिरमाथा समुद्री वन्यजीव अभयारण्य: ओडिशा राज्य में बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। यह क्षेत्र  ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के लिए प्रसिद्ध है। गहिरमाथा समुद्री वन्यजीव अभयारण्य भितरकनिका बायोस्फीयर रिजर्व के अंतर्गत आता है। भितरकनिका बायोस्फीयर रिजर्व में इसमें तीन संरक्षित क्षेत्र अर्थात् भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य, भीतरकणिका राष्ट्रीय उद्यान और गहिरमाथा समुद्री वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।

भारतीय उप-महाद्वीप में भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य में खारे पानी के मगरमच्छों की आबादी सबसे अधिक है।

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गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओशन रिसर्च (NCAOR) के वैज्ञानिकों ने हिमाचल के स्पीति के चंद्रा बेसिन स्थित श्रुति ग्लेशियर में क्रायोकोनाइट छिद्र (Cryoconite Holes) का पता लगाया गया है। क्रायोकोनाइट छिद्र के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. ये ग्लेसियर पर धूल के कण जमा होने से बनते हैं।
  2. ये ग्लेशियरों के पिघलने की दर को बढ़ा देते हैं।

कूटः

A)  केवल 1
B)  केवल 2
C)  1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तरः (c)
व्याख्याः

क्रायोकोनाइट छिद्र (Cryoconite Holes)

Cryoconite-Holes

क्रायोकोनाइट दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है- क्रायोस (kryos) जिसका अर्थ बर्फ और दूसरा कोनिस (konis) जिसका अर्थ धूल होता है।

सामान्यतः ग्लेशियरों पर किसी भी प्रकार के धूलकण नहीं होते हैं। लेकिन कई बार आँधी और तूफान के साथ उड़कर धूलकण ग्लेशियरों तक पहुँच जाते हैं।

ये धूलकण आसपास की बर्फ की अपेक्षा ज्यादा सूर्य की रोशनी को अवशोषित करते हैं जिससे जहाँ पर ये इकट्ठा होते हैं वहाँ पर ग्लेशियरों में छिद्र बन जाते हैं और इन्हीं छिद्रों को क्रायोनाइट छिद्र (Cryoconite Holes) कहते हैं। क्रायोनाइट छिद्र ग्लेशियरों के पिघलने की दर को बढ़ा देते हैं। अतः पहला व दूसरा दोनों कथन सत्य है।

सूरज की रोशनी और पानी की उपस्थिति में रासायनिक और जैविक प्रक्रियाएँ धूल में संचालित होती है और जीवन के विकास की ओर यह प्रक्रिया अग्रसर होती है। इस तरह क्रायोनाइट छिद्र में कुछ अद्वितीय सूक्ष्मजीव एवं अकशेरूकिया (Invertebrates) केा उत्पन्न होते हुए देखा जा सकता है।

हाल ही में गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओशन रिसर्च (NCAOR) के वैज्ञानिकों ने हिमाचल के स्पीति के चंद्रा बेसिन स्थित श्रुति ग्लेशियर में बहुत सोर उथले पानी के छोटे-छोटे पुडल (Puddle) (क्रायोकोनाइट छिद्र) प्राप्त हुए हैं। ये पुडल बेलनाकार छिद्र के समान है जो लगभग 5.50 सेमी. व्यास तथा 20 सेमी. तक गहरे हैं।

[5]

किस राज्य ने महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGS) को प्रशिक्षित करने हेतु शी मीन्स बिज़नेस (She Means Business) कार्यक्रम शुरू किया है?

A)  मध्य प्रदेश
B)  पंजाब
C) उड़ीसा
D) पश्चिम बंगाल
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उत्तरः (c)
व्याख्याः

राज्य न ओडिशा सरकार द्वारा महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGS) को प्रशिक्षित करने हेतु शी मीन  बिज़नेस (She Means Business) कार्यक्रम शुरू किया है।

यह कार्यक्रम ओडिशा सरकार के एमएसएमई (माइक्रो, छोटे और मध्यम उद्यम) विभाग और फेसबुक द्वारा परियोजना मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत ओडिशा सरकार राज्य भर में 25000 महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार महिलाओं और SHG सदस्यों को डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान करना है।

इस कार्यक्रम के तहत महिला उद्यमियों को मुफ्त में डिजिटल मार्केटिंग पर प्रशिक्षण मिलेगा और इस व्यवसाय का प्रचार सोशल मीडिया के द्वारा फेसबुक में मध्य से किया जाएगा। साथ ही उन्हें अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अपनी वेबसाइट तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी।

SheMeansBusiness व्यापार ओडीआई राज्य सहित देश भर में और अधिक महिलाओं को प्रेरित करेगा।  यह कार्यक्रम महिलाओं को नए अवसरों, नए बाजारों, नए विचारों, अपने स्वयं के घर से उपलब्ध कराएगा।  फेसबुक राज्य में उद्यमियों का डेटाबेस भी बनायेगा और एक वर्ष के बाद उनके विकास, कारोबार और लाभ की निगरानी करेगा।

 

व्यापार उपाय महानिदेशालय

DGAD

भारत सरकार ने 7 मई, 2018 को भारत सरकार (व्यवसाय का आवंटन) नियम, (Allocation of Business), 1961 में संशोधन कर वाणिज्य विभाग में ‘डंपिंग रोधी एवं संबद्ध शुल्क महानिदेशालय’ (Directorate General of Anti-Dumping and Allied Duties-DGAD) के स्थान पर ‘व्यापार उपाय महानिदेशालय’ (Directorate General of Trade Remedie – DGTR) का सृजन किया।

  • इससे एकीकृत एकल छत्र (अम्ब्रेला) राष्ट्रीय प्राधिकरण के सृजन का मार्ग प्रशस्त हो गया है जो व्यापार उपाय महानिदेशालय (DGTR) के नाम से जाना जाएगा।
  • DGTR का सृजन देश में एक व्यापक एवं त्वरित व्यापार सुरक्षा व्यवस्था के निर्माण के उद्देश्य से किया गया है।
  • व्यवसाय आवंटन नियमों में किए गए संशोधन के माध्यम से वाणिज्य विभाग को मात्रात्मक नियंत्रण संबंधी उपायों की सिफारिश करने से संबंधित कार्य करने की भी ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
  • नई व्यवस्था के तहत ‘विदेश व्यापार महानिदेशालय’ (DGFT) के ‘डंपिंग रोधी एवं सम्बद्ध प्रशुल्क महानिदेशालय’ (DGAD), रक्षोपाय महानिदेशालय (DGS) और मात्रात्मक प्रतिबंध (QR) संबंधी कार्य DGTR के दायरे में आ जाएंगे। परिणामतः इन सभी का विलय एकल राष्ट्रीय निकाय में करना संभव होगा।
  • डंपिंग रोधी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी की जाँच और मात्रात्मक प्रतिबंध संबंधी उपाय DGTR के दायरे में आएंगे।
  • DGTR वाणिज्य विभाग के एक संबद्ध कार्यालय के रूप में काम करेगा।
  • डंपिंग रोधी,काउंटरवेलिंग ड्यूटी एवं मात्रात्मक प्रतिबंध शुल्क लगाने के लिए DGTR द्वारा की जाने वाली सिफारिशों पर राजस्व विभाग विचार करेगा।
15वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद

Finance Commission

15वें वित्त आयोग (Fifteenth Finance Commission) ने एक सलाहकार परिषद (Advisory Council) का गठन किया है जो आयोग को परामर्श देने के साथ-साथ आवश्यक सहायता भी प्रदान करेगी। सलाहकार परिषद की भूमिका और उसके कामकाज-

  • आयोग के विचारार्थ विषयों (Terms of Reference – ToR) अथवा किसी ऐसे मसले पर आयोग को परामर्श देना जो प्रासंगिक हो सकता है।
  • ऐसे प्रपत्र अथवा अनुसंधान को तैयार करने में मदद प्रदान करना जो विचारार्थ विषयों में शामिल मुद्दों पर आयोग की समझ बढ़ाएंगे।
  • वित्तीय हस्तांतरण से संबंधित विषयों पर सर्वोत्तम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं का पता लगाने के साथ-साथ आयोग की सिफारिशों की गुणवत्ता एवं पहुँच उनके कार्यान्वयन को बेहतर करने के लिए आयोग के दायरे एवं समझ का विस्तार करने में मदद करना।
मित्र फफूंद से कृषि अवशेषों का निस्तारण

CSA

चंद्रशेखर आज़ाद (CSA) कृषि विश्वविद्यालय के प्लांट पैथोलॉजी विभाग ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एक नया उपाय खोजा है। शोधकर्त्ताओं ने एक खास तरह की मित्र फफूंद विकसित की है, जिसकी सहायता से कृषि अपशिष्ट को खाद के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।

  • इस प्रक्रिया के अनुप्रयोग से कृषि अपशिष्टों को जलाने, फसलों की कटाई के बाद उनके अवशेषों का निस्तारण करने संबंधी समस्या का हल संभव होगा।
  • ट्राइकोडरमा (फफूंद) की इस खास प्रजाति को जैव नियंत्रित प्रयोगशाला में विकसित किया गया है। गौरतलब है कि यह फफूंद तीन से चार महीने में अपशिष्टों को खाद में परिवर्तित कर देती है।
  • शोधकर्त्ताओं द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, ट्राइकोडरमा को नगर के जैव अपशिष्ट कचरे में प्रयोग किया जा सकता है, यह प्लास्टिक और पॉलीथिन (अजैव अपशिष्ट) के संदर्भ में काम नहीं करेगा।
  • इससे पहले मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को खाद में परिवर्तित करने के लिये मित्र फफूंद का इस्तेमाल किया जा चुका है जिसके इसके बेहतर परिणाम प्राप्त हुए।
  • मित्र फफूंद का इस्तेमाल करके कृषि अवशेष की समस्या को तो दूर किया ही जा सकता है, साथ ही कृषि अवशेषों को जलाने से उत्पन्न होने वाले धुएँ से वायु प्रदूषण के खतरे से भी बचा जा सकता है। साथ ही, यह आर्थिक दृष्टि से भी किसानों के लिये फायदेमंद साबित होगी।
घदुनिया की सबसे पुरानी चट्टान ओडिशा में

Odisha

लगभग आठ साल पहले ओडिशा के केंदुझार ज़िले में चम्पुआ नामक स्थान से एक चट्टान का नमूना प्राप्त किया गया था जिसने भारत को विश्व के भूगर्भीय शोधों में सबसे आगे रखा है। वैज्ञानिकों ने चट्टान में मैग्मैटिक ज़िरकॉन (एक खनिज जिसमें रेडियोधर्मी आइसोटोप के लक्षण पाए जाते हैं) का पता लगाया है, जो अनुमानतः 4,240 मिलियन वर्ष पुराना है- यह पृथ्वी के प्रारंभिक वर्षों का अध्ययन करने की दृष्टि से एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

  • चट्टान में पाया गया 4.2 बिलियन पुराना ज़िरकॉन (zircon) पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में ताजा संकेत प्रदान करता है।
  • यह खोज चाइनीज़ एकेडमी ऑफ जियोलॉजिकल साइंसेज़, बीजिंग के शोधकर्त्ताओं के साथ-साथ कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा कर्टिन विश्वविद्यालय, मलेशिया के भूवैज्ञानिकों द्वारा की गई।
  • इस पुराने ज़िरकॉन का एकमात्र उदाहरण जैक हिल, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पाया गया था जो 4,400 मिलियन वर्ष पुराना है तथा सबसे प्राचीन ज्ञात चट्टान का नमूना है।
  • सिंघभूम चट्टान जिसका निर्माण मैग्मा द्वारा हुआ था, के विपरीत ऑस्ट्रेलिया में पाए गए ज़िरकॉन का निर्माण रूपांतरित अवसादी शैल से हुआ था।
  • इस प्रकार, सिंघभूम चट्टान (जहां से जिरकॉन प्राप्त किया गया ), विश्व की दूसरी सबसे पुरानी चट्टान है तथा उसमें पाया गया ज़िरकॉन पृथ्वी पर सबसे पुराना मैग्मैटिक ज़िरकॉन है।
  • इसके विश्लेषण के लिए जिस मशीन का प्रयोग किया गया उसका नाम सेंसेटिव हाई रिज़ॉल्यूशन आयन माइक्रोब (Sensitive High Resolution Ion Microprobe -SHRIMP)है। यह भारत में उपलब्ध नहीं है।
  • विश्लेषण में 4,240 मिलियन और 4,030 मिलियन वर्ष पुराने दो जिरकॉन कणों की उपस्थिति की पुष्टि की गई है।
  • इसका अध्ययन पृथ्वी के इतिहास के शुरुआती कुछ सौ मिलियन वर्षों में पानी की उपस्थिति के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करेगा। यह हमे प्लेट विवर्तिनिकी (Plate Tectonics) की शुरुआत के बारे में भी जानकारी देगा।

स्रोत: द हिंदू एवं पी.आई.बी

 

पवन ऊर्जा पर पुनर्विचार 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

wind-power

चर्चा में क्यों?
पश्चिमी घाटों की अनावृत चोटियाँ एक प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो असंख्य जीवों की प्रजातियों से परिपूर्ण होने के साथ-साथ पवन और पवनचक्कियों की अपार संभावनाओं से भरे हुए हैं किन्तु हाल के वैश्विक शोध से इस तथ्य के प्रमाण मिले हैं कि इससे पारिस्थितिकी तंत्र पर अप्रत्यक्ष प्रभाव धीरे-धीरे प्रकट हो रहे हैं| वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान ने वन्यजीवन पर पवनचक्कियों के प्रभाव को उजागर किया है।

पवन ऊर्जा की संभावनाएं 

  • चूंकि भारत 175 गीगा वाट के महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहा है, इसलिये पवनचक्कियां कम से कम 65 वर्ग किमी वन क्षेत्रों में लाई जा रही हैं, जिसमें 30 या उससे अधिक वर्ग किमी के लिये अनुमोदन लंबित हैं।
  • भारत का संभावित पवन ऊर्जा परिक्षेत्र पश्चिमी घाट (केरल से गुजरात तक) और पूर्वी घाट के एक बड़े हिस्से में है।

पर्यावरणीय प्रभाव 

  • पर्यावरणीय प्रभाव अक्सर चिंता का विषय रहा है| अक्सर स्थानीयकृत विरोध या नागरिक कार्रवाई याचिकाएं दाखिल होती रही हैं|
  • इन्हें स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र में अपूरणीय परिवर्तनों को रोकने के लिये नीति में स्पष्ट किया जाना चाहिये।
  • पोलैंड में, पोलैंड के पवनचक्की क्षेत्रों में कृंतकों(rodent) के बीच उच्च तनाव का स्तर देखा गया है, जबकि पुर्तगाल में, भेड़िया प्रजनन स्थलों के नजदीक पवनचक्की होने के कारण कम प्रजनन दर की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
  • टेक्सास में, विंडफार्म के भीतर तटीय तालाबों में लाल बालों वाले बत्तखों की संख्या में 77% की कमी आई है।

भारतीय पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव 

  • भारत में स्थिति इससे अलग नहीं है। वन के प्रत्येक वर्ग किलोमीटर में जैव विविधता के बदतर स्थिति पर विचार किया जा सकता है।
  • उदाहरण के लिये, राजस्थान में ट्रांसमिशन लाइनों और कताई ब्लेड ने गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की मृत्यु दर में वृद्धि की है।
  • आंध्र प्रदेश के पवन खेतों के अध्ययन में प्रत्यक्ष टक्कर की घटनाएँ देखने को मिली है।
  • कर्नाटक में, जहां 6,000 एकड़ वन भूमि को पवनचक्कियों के लिये बदल दिया गया है, जिससे इस बात के सबूत मिले हैं कि इससे न केवल पक्षी, बल्कि उभयचर और स्तनधारी भी प्रभावित हो सकते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययन 

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू के मारिया ठाकर और उनकी टीम पवनचक्की के चारों ओर फैन-थ्रोटेड लिजार्ड(fan-throated lizard) का अध्ययन कर रही है।
  • उन्होंने इस अध्ययन के दौरान पाया है कि पक्षियों के अलावा, छोटे कृन्तक और स्तनधारी लगातार घनघनाते टर्बाइनों के कारण भी इन पैबंदों(patches) से बचते हैं।
  • इस परभक्षी रहित सूक्ष्म पर्यावरण में, लिजार्ड की आबादी में वृद्धि हुई है, जिससे प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और उपभोग्य संसाधनों में कमी आई है। पारिस्थितिकी तंत्र का संपूर्ण स्वरूप ही बदल गया है।
  • खाद्य श्रृंखला परस्पर जुड़ी हुई है, और नित नई परियोजनाओं के अनुपालन से प्रभावित हो रही है|

निष्कर्ष 
स्पष्ट रूप से इस विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श किये जाने की आवश्यकता है ताकि सतत विकास की रह में बाधा बनती इन समस्याओं का समाधान किया जा सके|

स्रोत: द हिन्दू