UPSC DAILY CURRENT 12-06-2018

[1]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र तेजी से स्वास्थ्य मूल्यांकन और प्रयोगशाला आधारित नैदानिक ​​सेवाओं पर राज्यों और संघ शासित प्रदेशों (यूटी) को विशेषज्ञता प्रदान करता है।
  2. यह संस्थान स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C)  1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
Hide Answer –

उत्तर (C)
व्याख्या :

हाल ही में राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र (एनसीडीसी) ने कहा कि निपाह संक्रमण के प्राथमिक कारण के रूप में फल खाने वाले चमगादडों की संभावना का अध्ययन कर रहा है।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र (एनसीडीसी)

  • राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र (एनसीडीसी) को पूर्व में एनआईसीडी के नाम से जाना जाता था।
  • वर्तमान एनसीडीसी संस्थान को संक्रमण योग्य बीमारियों के नियंत्रण में उत्कृष्टता हेतु राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करने करने हेतु स्थापित किया गया था।
  • इस संस्थान के कार्य में बहु-अनुशासनात्मक एकीकृत दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रशिक्षण और अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

संगठन

  • यह संस्थान स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है। अतः दूसरा कथन भी सही है। 
  • केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा के सार्वजनिक स्वास्थ्य उप-कैडर के अधिकारी, संस्थान के प्रशासनिक और तकनीकी प्रमुख होते हैं।
  • इस संस्थान का मुख्यालय दिल्ली में है और इसकी  8 क्षेत्रीय शाखाएँ भी हैं।
  • इसमें अलवर (राजस्थान), बेंगलुरू (कर्नाटक), कोझिकोड (केरल), कूनूर (तमिलनाडु), जगदलपुर (छत्तीसगढ़), पटना (बिहार), राजमुंदरी (आंध्रप्रदेश) और वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में स्थित हैं।
  • संस्थान के मुख्यालय में कई तकनीकी विभाग हैं, इसके अंतर्गत सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी और पैरासाइट डिजीज माइक्रोबायोलॉजी विभाग, ज़ूनोसिस का डिवीजन, एचआईवी/एड्स केंद्र और संबंधित बीमारियाँ, मेडिकल एंटोमोलॉजी सेंटर और वेक्टर प्रबंधन, मलेरिया और समन्वय विभाग, जैव रसायन और जैव प्रौद्योगिकी विभाग आदि शामिल हैं।

कार्य

  • इस संस्थान में रोग मॉनिटरिंग सेल है, जो रोगों के प्रकोप से संबंधित पूछताछ का जवाब देने के लिये 24×7 घंटों के दौरान सेवाएँ प्रदान करती हैं, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा द्वारा राज्यों और ज़िलों के बीमारी निगरानी केंद्रों के नेटवर्क के साथ बातचीत करने हेतु समन्वय स्थापित किया जाता है।
  • इसके अलावा, यह संस्थान तेजी से स्वास्थ्य मूल्यांकन और प्रयोगशाला आधारित नैदानिक ​​सेवाओं पर राज्यों और संघ शासित प्रदेशों (यूटी) को विशेषज्ञता प्रदान करता है। अतः पहला कथन सही है।
[2]

राजस्व खूफिया निदेशालय (डीआरआई) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह निदेशालय दवाओं, सोने, हीरे, इलेक्ट्रॉनिक्स, विदेशी मुद्रा, नकली भारतीय मुद्रा इत्यादि की तस्करी को खत्म करने का कार्य करता है।
  2. राजस्व खूफिया निदेशालय वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड के तहत आता है।
  3. प्रारंभिक दौर में यह निदेशालय केवल स्वर्ण तस्करी का मुकाबला करने हेतु प्रतिबद्ध था, लेकिन अब इसके कार्यों का दयारा काफी व्यापक है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर (D)
व्याख्या: 

  • राजस्व खूफिया निदेशालय के न्हावा शेवा (महाराष्ट्र) क्षेत्रीय इकाई द्वारा हाल ही में कई ड्रोनों को जब्त कर लिया गया है, जो ट्रांसइडिया लॉजिस्टिक्स पार्क कस्टम फ्रेट स्टेशन पर खिलौनों के सामान के साथ भारत में तस्करी किये गये थे ।
  • जब्त ड्रोन की अनुमानित लागत 14 लाख रूपए आँकी गई है।

राजस्व खूफिया निदेशालय (डीआरआई)

DRI

  • राजस्व खूफिया निदेशालय (डीआरआई) एक भारतीय खूफिया एजेंसी है।
  • इसका गठन दिसंबर 1957 में किया गया था।
  • डीआरआई ऐसी प्रमुख खूफिया एजेंसी है, जो दवाओं, सोने, हीरे, इलेक्ट्रॉनिक्स, विदेशी मुद्रा, नकली भारतीय मुद्रा इत्यादि की तस्करी को खत्म करने का कार्य करती है। अतः पहला कथन सही है।
  • राजस्व खूफिया निदेशालय वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड के तहत आता है। अतः दूसरा कथन भी सही है। 
  • निदेशालय केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क के अधिकारियों द्वारा चलाया जाता है।
  • प्रारंभिक दौर में यह निदेशालय केवल स्वर्ण तस्करी का मुकाबला करने हेतु प्रतिबद्ध था, लेकिन वर्तमान में यह नशीले पदार्थों और आर्थिक अपराधों से संबंधित कार्यों को भी देखता है। अतः तीसरा कथन भी सही है।
[3]

भारत-आसियान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. सिंगापुर में शांगरी-ला वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड और सिंगापुर के साथ नए त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की थी।
  2. भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाएँ जावा सागर में अपना पहला द्विपक्षीय अभ्यास आयोजित करेंगे।
  3. CORPAT का 31वाँ संस्करण 9 जून को समाप्त हुआ था, जिसमें भारत ने अपने कोरा क्लास मिसाइल कार्वेट और एक डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान आईएनएस कुलीश को तैनात किया था।
  4. भारत इंडोनेशिया के साथ द्विपक्षीय कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (CORPAT) नामक नौसैनिक अभ्यास करता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1 और 4
B)  केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी
Hide Answer –

उत्तर (D)
व्याख्या:

CORPAT

  • भारत बढ़ते सैन्य-से-सैन्य सहयोग के हिस्से के रूप में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (एशियान) के समूह के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय नौसेना अभ्यास की एक श्रृंखला स्थापित करने जा रहा है।
  • इसके तहत जावा सागर में इंडोनेशिया के साथ एक द्विपक्षीय अभ्यास आयोजित किया जाएगा। अतः दूसरा कथन सही है।
  • इसके अलावा यह क्षमता निर्माण और सैन्य हार्डवेयर की बिक्री में देशों की अतिरिक्त सहायता भी करेगा।
  • इस महीने के अंत में, भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाएँ जावा सागर में अपना पहला द्विपक्षीय अभ्यास आयोजित करेंगी।
  • भारत जल्द ही थाईलैंड और सिंगापुर के साथ एक नया त्रिपक्षीय अभ्यास भी करेगा।
  • भारत द्वारा इंडोनेशिया के साथ द्विपक्षीय कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (CORPAT) के अलावा भी कुछ अन्य पहल की जाएगी। अतः तीसरा कथन भी सही है।
  • गौरतलब है कि CORPAT का 31वाँ संस्करण 9 जून को समाप्त हुआ था, जिसमें भारत ने कोरा क्लास मिसाइल कार्वेट, और एक डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान आईएनएस कुलीश तैनात किया था। अतः तीसरा कथन भी सही है।
  • सिंगापुर में शांगरी-ला वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड और सिंगापुर के साथ नए त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की थी। अतः पहला कथन सही है।
  • इसी प्रकार, नौसेना ने हाल ही में म्याँमार, थाईलैंड और वियतनाम के साथ भी अपना पहला द्विपक्षीय अभ्यास आयोजित किया था।
[4]

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. डीएसी की स्थापना रक्षा मंत्रालय के तहत, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिये किया गया था।
  2. डीएसी रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण (Procurement) संबंधी मामलों का निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री द्वारा की जाती है।
  3. डीएसी द्वारा अभी हाल ही में 12 हाई पावर रडार स्वैच्छिक रूप से ‘बाय इंडियन आईडीडीएम श्रेणी’ [Buy (Indian) IDDM’ category] के तहत खरीदे जाने की घोषणा की गई है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D)  1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर (D)
व्याख्या:

 DAC

  • रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने हाल ही में सेना, तट रक्षक बलों, भारतीय वायुसेना और वायु कुशन वाहनों (ACVs) के लिये उच्च शक्ति वाले 5,500 करोड़ रुपए की लागत के रडारों की खरीद को मंजूरी दी है।
  • ये 12 हाई पावर रडार स्वैच्छिक रूप से ‘बाय इंडियन आईडीडीएम श्रेणी’ [Buy (Indian) IDDM’ category] के तहत खरीदे जाएंगे। अतः तीसरा कथन भी सही है। 
  • ये रडार लंबी दूरी के मध्यम और उच्च ऊँचाई  कवर प्रदान करेंगे, जिसमें उच्च गति लक्ष्य का पता लगाने और ट्रैक करने की क्षमता होगी।
  • तकनीकी रूप से बेहतर, रडार में एंटीना के यांत्रिक रोटेशन के बिना 360 डिग्री स्कैन करने की क्षमता होगी और न्यूनतम रखरखाव आवश्यकता के साथ 24×7 आधार पर संचालित होगा।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)

  • रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)  की स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी।
  • इस परिषद की स्थापना रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिये किया गया था। अतः पहला कथन सही है।
  • इसका मुख्य कार्य क्षमताओं के संदर्भ में सशस्त्र बलों के अनुमोदित आवश्यकताओं की शीघ्र खरीद और आवंटित बजटीय संसाधनों का निर्धारित समय सीमा में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
  • डीएसी रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण (Procurement) संबंधी मामलों का निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री द्वारा की जाती है। अतः दूसरा कथन भी सही है।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद ने मई, 2017 में रक्षा क्षेत्र में सामरिक भागीदारी पर नीति को मंज़ूरी दी थी तथा इसे रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DPP)-2016 के तहत प्रकाशित किया गया था।

सामरिक भागीदारी मॉडल (Strategic Partnership Model -SPM)

  • इस अवधारणा का पहली बार उल्लेख धीरेन्द्र सिंह समिति की जुलाई 2015 की एक रिपोर्ट में किया गया था।
  • इस मॉडल के तहत रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मिलकर काम करेंगे।
  • इस नीति के प्रारंभिक चरण में सरकार किसी एक मुख्य सैन्य प्रणाली के निर्माण हेतु सामरिक भागीदार के रूप में एक निजी भारतीय इकाई की पहचान करेगी।
  • चयनित कंपनियाँ इन प्रणालियों के उत्पादन के लिये विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर सकती हैं।
  • ये कंपनियाँ विदेशी प्रतिष्ठानों के साथ नियमों के अनुसार भागीदारी कर रक्षा उपकरणों को देश में ही बना सकेंगी तथा बाद में इस सूची में अन्य रक्षा उपकरणों को भी शामिल किया जाएगा।
  • DPP-2016 के अध्याय-I में रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत अधिग्रहण की निम्नलिखित श्रेणियाँ उल्लेखित हैं-

♦ Buy (Indian-IDDM)
♦ Buy (Indian)
♦ Buy & Make (Indian)
♦ Buy & Make
♦ Buy (Global)

  • सामरिक भागीदारी मॉडल (एसपीएम) डीपीपी-2016 के अध्याय-I में उल्लेखित इन मौजूदा श्रेणियों के अतिरिक्त पूंजीगत अधिग्रहण की एक पृथक श्रेणी है।
[5]

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. एमओएफ का उपयोग गैस भंडारण, शुद्धिकरण और अलगाव, साथ ही उत्प्रेरण और संवेदन अनुप्रयोगों के लिये किया जा सकता है।
  2. एमओएफ को अपनी सोखन क्षमताओं और चयनात्मकता के कारण “मिरेकल मटेरियल” के रूप में भी जाना जाता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
Hide Answer –

उत्तर (C)
व्याख्या :

  • यूएस में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं द्वारा विकसित प्रोटोटाइप, जो बहुत कम आर्द्रता और कम लागत पर हवा से दिन/रात पीने योग्य पानी निकाल सकने में सक्षम है।
  • यह वातावरण के सूर्य के प्रकाश तथा तापमान पर संचालित होता है और बिना अतिरिक्त ऊर्जा इनपुट के इसके माध्यम से रेगिस्तान में पानी एकत्रित किया जा सकता है।
  • स्कॉट्सडेल में परीक्षण के दौरान, जहाँ सापेक्ष आर्द्रता रात में 40 प्रतिशत से गिरकर दिन की अपेक्षा 8 प्रतिशत कम हो जाती है, वहाँ हार्वेस्टर को केवल पानी के अवशोषक यानी एक धातु-जैविक ढाँचे (एमओएफ) नामक एक अत्यधिक छिद्रपूर्ण सामग्री को जोड़कर स्केल करना आसान हो जाएगा।

धातु-जैविक ढाँचे (एमओएफ)
Metal-Organic Framework (MOF)

  • एमओएफ धातु आयन से युक्त यौगिक होते हैं। इस उपकरण के माध्यम से केवल 10 प्रतिशत आर्द्रता वाली शुष्क हवा से भी पानी बनाया जा सकता है।
  • यह नया उपकरण सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा से संचालित हो सकता है।
  • एमओएफ का उपयोग गैस भंडारण, शुद्धिकरण और अलगाव, साथ ही उत्प्रेरण और संवेदन अनुप्रयोगों के लिये भी किया जा सकता है।अतः पहला कथन सही है।
  • एमओएफ को अपनी सोखन क्षमताओं और चयनात्मकता के कारण “मिरेकल मटेरियल” के रूप में भी जाना जाता है। अतः दूसरा कथन भी सही है।

 

विश्व महासागर दिवस

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चर्चा में क्यों?
8 जून को पूरी दुनिया में विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day) के रूप में मनाया गया। यह दिवस महासागरों के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के लिये मनाया जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • विश्व महासागर दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित ‘पृथ्वी ग्रह’ नामक फोरम में लाया गया था।
  • इसी दिन विश्व महासागर दिवस को हमेशा मनाए जाने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने इससे संबंधित प्रस्ताव को 2008 में पारित किया था औऱ इस दिन को आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी।
  • पहली बार विश्व महासागर दिवस 8 जून, 2018 को मनाया गया था।
  • इसका उद्देश्य केवल महासागरों के प्रति जागरुकता फैलाना ही नहीं बल्कि दुनिया को महासागरों के महत्त्व और भविष्य में इनके सामने खड़ी चुनौतियों से भी अवगत कराना है।
  • इस दिन कई महासागरीय पहलुओं जैसे- सामुद्रिक संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग, पारिस्थितिक संतुलन, खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता, तथा जलवायु परिवर्तन आदि पर भी प्रकाश डाला जाता है।
मॉरीशस करेगा विश्व हिंदी सम्मेलन की मेज़बानी

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चर्चा में क्यों?
11वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 18-20 अगस्त, 2018 तक मॉरीशस में आयोजित किया जाएगा। इसका आयोजन विदेश मंत्रालय द्वारा मॉरीशस सरकार के सहयोग से किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन को मॉरीशस में आयोजित करने का निर्णय सितंबर 2015 में भारत के भोपाल शहर में आयोजित 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में लिया गया था।
  • प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन वर्ष 1975 में नागपुर में किया गया था।
  • विश्व के अलग-अलग भागों में ऐसे 10 सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है।
  • 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के लिये विदेश मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। सम्मेलन के व्यवस्थित एवं निर्बाध आयोजन के लिये विभिन्न समितियाँ गठित की गई हैं।
  • सम्मेलन का मुख्य विषय “हिंदी विश्‍व और भारतीय संस्‍कृति” है।
  • सम्मेलन का आयोजन स्थल “स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सभा केंद्र” पाई, मॉरीशस है।
  • सम्मेलन स्थल पर हिंदी भाषा के विकास से संबंधित कई प्रदर्शनियाँ लगाई जाएंगी।
  • परंपरा के अनुरूप सम्मेलन के दौरान भारत एवं अन्य देशों के हिंदी विद्वानों को हिंदी के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिये “विश्व हिंदी सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा।

अब तक संपन्न हुए 10 विश्व हिंदी सम्मेलनों की सूची

क्रमांक सम्मेलन स्थान सम्मेलन वर्ष
1. प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर, भारत 10-12 जनवरी,1975
2. द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन पोर्ट लुई, मॉरीशस 28-30 अगस्त,1976
3. तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन नई दिल्ली, भारत 28-30 अक्तूबर,1983
4. चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन पोर्ट लुई, मॉरीशस 02-04 दिसंबर,1993
5. पाँचवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन पोर्ट ऑफ स्पेन, ट्रिनिडाड एण्ड टोबेगो 04-08 अप्रैल,1996
6. छठा विश्व हिंदी सम्मेलन लंदन, यू. के. 14-18 सितंबर,1999
7. सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन पारामारिबो, सूरीनाम 06-09 जून, 2003
8. आठवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन न्यूयार्क, अमरीका 13-15 जुलाई, 2007
9. नौवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन जोहांसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका 22-24 सितंबर, 2012
10 दसवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन भोपाल, भारत 10-12 सितंबर, 2015
कैंसर की लड़ाई में एक नया सहयोगी

NCI

चर्चा में क्यों?
हाल ही में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI) के  अमेरिका के इंटरनेशनल कैंसर प्रोटीजेनोम कंसोर्टियम (ICPC) में शामिल होने के साथ ही भारत इसमें शामिल शामिल होने वाला 12 वाँ देश बन गया। यह दुनिया के अग्रणी कैंसर और प्रोटीजेनोमिक शोध केंद्रों के बीच सहयोग के लिये एक मंच है।

प्रमुख बिंदु

  • यह पहली बार है जब  भारत के शोधकर्त्ता कैंसर ट्यूमर के प्रोटीन और जीन का अध्ययन एक साथ करेंगे।
  • दो आशाजनक विज्ञानों (प्रोटीमिक्स और जीनोमिक्स) के बीच विलय का उद्देश्य नई दवाएँ प्राप्त और व्यक्तिगत कैंसर उपचार प्रदान करना है।
  • भारतीय टीम में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे प्रोटीमिक्स का अध्ययन करेगा और टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई (भारत का प्रमुख कैंसर संस्थान) तीन प्रकार के कैंसर यथा स्तन, सिर तथा गर्दन और गर्भाशय ग्रीवा के जीनोमिक्स का अध्ययन करेगा।
  • एक पायलट परियोजना के रूप में शोधकर्त्ता इन कैंसर में से प्रत्येक समूह के 100 नमूनों का अध्ययन करेंगे।
  • यह पहली बार है कि कैंसर ट्यूमर के प्रोटीमिक्स और जीनोमिक्स का अध्ययन एक ही नमूने से किया जाएगा।
  • जीनोमिक्स के क्षेत्र में सिस्टम या जीव के अंदर उपस्थित सभी संभावित जीनों का अध्ययन करना और उनके उत्परिवर्तनों का विश्लेषण करना शामिल है।
  • डीएनए, जो आनुवंशिक निर्देशों का भंडार है एक जटिल प्रक्रिया के माध्यम से  प्रोटीन का निर्माण करता है।
  • एनसीआई के अनुसार, पिछले अध्ययनों से पता चला है कि प्रोटीन स्तर पर जीनोमिक परिवर्तन हमेशा मौजूद नहीं होते हैं।
  • यह पाँच साल की परियोजना संस्थानों धन प्राप्त कर पायलट चरण को पूरा करने का प्रयास करेगी।
एंटीबैक्टीरियल गुणों वाला प्लास्टिक

Plastic

चर्चा में क्यों?
मिट्टी में अंतःस्थापित सिल्वर नैनोकणों को अब प्लास्टिक के अंदर फ़ैलाने में सफलता हासिल की गई है जिसे नई एंटीमिक्राबियल फिल्मों, फिलामेंट्स तथा प्लास्टिक की अन्य वस्तुओं के निर्माण के लिये भी प्रयोग किया जा सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • सिल्वर नैनोपार्टिकल-एम्बेडेड प्लास्टिक में एस्चेर्चिया कोलाई (Escherchia coli) और स्टाफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) जैसे सामान्य बैक्टीरियल रोगजनकों के खिलाफ 99% से अधिक एंटीबैक्टीरियल गतिविधियाँ देखी गई हैं।
  • इस शोध में लगभग 10 नैनोमीटर आकार के सिल्वर नैनोकणों को लगभग 200-300 नैनोमीटर लंबाई के मिट्टी के कणों पर जमा किया गया था।
  • शोधकर्त्ताओं ने इस प्रक्रिया में मोंटमोरीलोनाइट नामक ज्वालामुखीय साइटों में पाए गए एक अकार्बनिक मिट्टी का इस्तेमाल किया।
  • मिट्टी तथा चाँदी का यौगिक जिसमें 10% चाँदी उपस्थित थी, को मेल्ट कंपाउंडिंग विधि का प्रयोग करके उच्च घनत्व वाले पालीथिलिन प्लास्टिक में लोड किया गया था।
  • इसके बाद उन्होंने नए गठित चाँदी-मिट्टी-प्लास्टिक नैनोकोमोसाइट को फिल्मों, फिलामेंट्स में परिवर्तित कर दिया और इन्हें नमूने में ढाला और जीवाणुरोधी गुणों की जाँच की।
  • फिल्मों और फिलामेंट्स ने ढाले गए प्लास्टिक की तुलना में उच्च गतिविधि प्रदर्शित की।
  • टीम ने चांदी के स्थान पर जस्ता और तांबा जैसे अन्य धातु आयनों की भी कोशिश की।
  • इन नैनोकोमोसाइट प्लास्टिक में चाँदी की सामग्री बहुत कम है इसलिये मानव कोशिकाओं के लिये कोई विषाक्तता नहीं है।

स्रोत : द हिंदू एवं इंडियन एक्सप्रेस