UPSC DAILY CURRENT 13-06-2018

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हिंदुस्तान जिंक द्वारा संचालित रामपुर अगुचा और सिंधार खुर्द की जिंक खानें तथा चंदेरिया और दरिबा जैसे प्रमुख आधुनिक प्रगलन परिसरें किस राज्य में अवस्थित है/हैं ?

A) मध्यप्रदेश
B) गुजरात
C) आंद्रप्रदेश
D) राजस्थान
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उत्तर (D)
व्याख्या:

  • हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न खानें और गंधक परिसरें जैसे- चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और जवार आदि उदयपुर के आसपास के स्थानों में स्थित हैं।

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड

  • हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को 10 जनवरी, 1966 को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में भारत के पूर्व धातु निगम में शामिल किया गया था।
  • सेसा स्टरलाइट का नाम बदलकर अप्रैल 2015 में वेदांत लिमिटेड रखा गया था।
  • अप्रैल 2002 में, स्टरलाइट अपोर्चुनिटी और वेंचर्स लिमिटेड (एसओवीएल) ने कंपनी के शेयरों के अधिग्रहण के लिये एक खुली पेशकश की थी, वर्तमान में हिंदुस्तान जिंक वेदांत लिमिटेड की सीधी सहायक कंपनी है।
  • हिंदुस्तान जिंक जस्ता, सीसा और चांदी के कारोबार में वेदांत समूह की कंपनी है।
  • ये दुनिया के सबसे कम लागत वाले उत्पादकों में से एक हैं और एशियाई देशों की बढ़ती मांग को पूरा करने का कार्य भी करता है।
  • हिंदुस्तान जिंक बीएसई और एनएसई सूचीबद्ध वेदांत लिमिटेड, जो लंदन सूचीबद्ध विविध धातुओं और खनन प्रमुख, वेदांत रिसोर्सेज पीएलसी का एक हिस्सा है।
  • इसका मुख्य व्यवसाय में कैप्टिव पावर जनरेशन के साथ जिंक और सीसा के खनन और प्रगलन करना है।
  • रामपुर अगुचा और सिंधार खुर्द में मुख्य लीड-जिंक खानों के साथ ही इस कंपनी की प्रति मिलियन टन से अधिक धातु उत्पादन क्षमता है और चंदेरिया और दरिबा जैसे प्रमुख आधुनिक प्रग्लन परिसरें भी भारत के राजस्थान राज्य में अवस्थित हैं। अतः विकल्प (D) सही उत्तर है।
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ईपीआईसी (EPIC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह पृथ्वी से छह गुना बड़ा और 600 प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारे के समान सूर्य के चारों ओर घूमने वाला एक गृह है।
  2. यह ग्रह शनि की तुलना में आकार में छोटा है, जबकि नेप्च्यून से बड़ा है।
  3. पारस (PARAS) नामक स्पेक्ट्रोग्राफ से इस गृह के द्रव्यमान की माप की गई है।
  4. उच्च तापमान के कारण इस गृह पर जीवन की अनुकूल दशाएँ नहीं हैं।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1 और 4
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी
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उत्तर (D)
व्याख्या:

  • इसरो के वैज्ञानिकों ने पहली बार पृथ्वी से छह गुना बड़ा और 600 प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारे के समान सूर्य के चारों ओर घूमने वाले गृह को देखा है। अतः पहला कथन सही है।
  • गौरतलब है कि इस खोज के साथ भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने तारों के चारों ओर ग्रहों की खोज की है।

planet

प्रमुख बिंदु

  • इस ग्रह को ईपीआईसी (EPIC) 211945201b (या K2-236 B) नाम दिया गया है, जबकि मेजबान तारे का नाम ईपीआईसी 211945201 या K2-236 रखा गया है।
  • यह ग्रह शनि की तुलना में आकार में छोटा है, जबकि नेप्च्यून से बड़ा है। अतः दूसरा कथन सही है।
  • इसका द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 27 गुना और त्रिज्या पृथ्वी के छह गुना है।
  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस गृह का 60% से अधिक द्रव्यमान बर्फ, सिलिकेट और लौह जैसे भारी तत्वों से बना हो सकता है।
  • ईपीआईसी, तारे के समान सूर्य के बहुत करीब घूम रहा था, लगभग 19.5 दिनों में एक बार सूर्य के आस-पास जा रहा था और इसके उच्च सतह का तापमान 600 डिग्री सेल्सियस होने के कारण यहाँ जीवन योग्य संभावनाएँ भी नहीं पाई गई हैं। अतः चौथा कथन भी सही है।
  • स्वदेशी डिजाइन किए गये पीआरएल एडवांस रेडियल-वेल्सीटी आबू-स्काई सर्च या पीआरएएस स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग करके ग्रह के द्रव्यमान का माप किया गया है, जो राजस्थान के माउंट आबू में पीआरएल के गुरुशिखार वेधशाला में स्थित 1.2 मीटर दूरबीन के साथ एकीकृत है।
  • ध्यातव्य है कि स्पेक्ट्रोग्राफ एक ऐसा उपकरण है, जो प्रकाश को आवृत्ति स्पेक्ट्रम में अलग करता है और कैमरे का उपयोग करके सिग्नल रिकॉर्ड करता है।
  • पारस (PARAS) एक एशेल स्पेक्ट्रोग्राफ है, जो पीआरएल के खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी विभाग के सदस्यों द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इसी के द्वारा नए गृह के द्रव्यमान की माप की माप की गई है। अतः तीसरा कथन  भी सही है।
  • भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के पालना के रूप में वर्णित पीआरएल, खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष समेत कई भौतिक विज्ञानों में मौलिक शोध आयोजित करता है।
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हाल ही में किस संस्थान द्वारा हिमपर्वत (iceberg) बी-15  की समाप्ति के अनुमान व्यक्त किये गये हैं?

A) नासा
B) जाक्सा
C) इसरो
D) यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी
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उत्तर (A)
व्याख्या:

  • नासा के मुताबिक, 18 साल पूर्व अंटार्कटिका के रॉस आइस शेल्फ से टूटकर दूर जाने वाला सबसे बड़ा हिमपर्वत (iceberg) बी -15 अपने अंतिम कगार पर है। अतः विकल्प (A) सही उत्तर है।
  • ध्यातव्य है कि जब मार्च 2000 में,  हिमपर्वत बी -15 पहली बार टूटा था, तो यह लगभग 296 किलोमीटर लंबा और 37 किलोमीटर चौड़ा था।
  • यह अब तक का अंटार्कटिका के रॉस आइस शेल्फ में दर्ज सबसे बड़ा हिमशैल/हिमपर्वत है।
  • 18 वर्षों से धाराओं के साथ बहते हुए हवा और समुद्र से घर्षण होने के कारण बी-15 कई छोटे वर्गों में टूट गया है और इसके  अधिकांश हिस्से पिघल गए हैं।

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  • नासा द्वारा 22 मई, 2018 को इस हिमपर्वत की तस्वीर ली गई, जिसमें पाया गया है कि बी-15Z लगभग 18 किलोमीटर लंबी और 9 किलोमीटर चौड़ी ही शेष रही है।
  • ध्यातव्य है कि बी-15Z मूल बी-15 हिमपर्वत का ही एक टुकड़ा है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. आईयूसीएन द्वारा निल्सनिया गैंगेटिका (Nilssonia gangetica) को लुप्तप्राय और चित्रा इंडिका (Chitra indica) को सुभेद्य सूची में शामिल किया गया है।
  2. टीएसए एक क्रिया-उन्मुख वैश्विक साझेदारी है, जो उन प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिन्हें विलुप्त होने का उच्च जोखिम है और यह दुनिया भर में कछुआ की विविधता हॉटस्पॉट में काम करती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (B)
व्याख्या:

  • आईयूसीएन द्वारा निल्सनिया गैंगेटिका (Nilssonia gangetica) या भारतीय सॉफ्टशेल कछुए को सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में और चित्रा इंडिका (Chitra indica) या दक्षिण एशियाई संकीर्ण सिर वाले सॉफ्टशेल कछुए को लुप्तप्राय(Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अतः पहला कथन सही नहीं है।
  • ये प्रजातियाँ उत्तर-पूर्वी भारत और बांग्लादेश की स्थानिक प्रजाति हैं।

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  • बांग्लादेश में केवल एक मंदिर तालाब में इनका अस्तित्व था किंतु हाल ही में, असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी जल निकासी और कुछ अन्य क्षेत्रों के मंदिर के तालाबों में इन प्रजातियों के होने की पुष्टि की गई है।

कछुआ उत्तरजीविता गठबंधन (टीएसए)
Turtle Survival Alliance (TSA)

  • वर्ष 2001 में कछुआ उत्तरजीविता गठबंधन (टीएसए) का गठन “ताजा पानी के कछुओं और कछुआ के टिकाऊ कैप्टिव प्रबंधन के लिये आईयूसीएन की साझेदारी के रूप में हुआ था।
  • टीएसए एक क्रिया-उन्मुख वैश्विक साझेदारी है, जो उन प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिन्हें विलुप्त होने का उच्च जोखिम है और यह दुनिया भर में कछुआ की विविधता हॉटस्पॉट में काम करती है। अतः दूसरा कथन सही है।
  • 21 वीं शताब्दी में टीएसए ने शून्य कछुआ की विलुप्ती हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
  • वर्ष 2013 से, टीएसए इंडिया ने असम में चयनित मंदिर तालाबों में स्थितियों में सुधार के लिये परिश्रमपूर्वक काम किया है, जहाँ इन कछुओं की खोज की गई थी।
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“ग्रीनवाशिंग” पद के संबंध  में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये?

  1. 1990 के दशक में कॉर्पोरेट पर्यावरणीय दावों का वर्णन करने के लिये “ग्रीनवाशिंग” शब्द अपनाया गया था।
  2. यह एक सक्रिय विपणन तकनीकों के उपयोग को संदर्भित करता है, ताकि कंपनी के उत्पादों को पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C)  1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (B)
व्याख्या:

ग्रीनवाशिंग (Greenwashing) क्या है?

  • 1980 के दशक में कॉर्पोरेट पर्यावरणीय दावों का वर्णन करने के लिये “ग्रीनवाशिंग” शब्द अपनाया गया था। अतः पहला कथान सही नहीं है।
  • यह एक सक्रिय विपणन तकनीकों के उपयोग को संदर्भित करता है, ताकि कंपनी के उत्पादों को पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके। अतः दूसरा कथन सही है।
  • हालाँकि, ग्रीनवाशिंग में शामिल कंपनियाँ पर्यावरण की भलाई की अपेक्षा अपनी छवि के बारे में अधिक चिंतित रहती हैं।
  • यह अभ्यास आम तौर पर उन व्यवसायों द्वारा अपनाया जाता है, जिनके उत्पादन पर्यावरण प्रदूषण में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
  • अपने उत्पादों की पारिस्थितिक अनुकूल प्रकृति के बारे में नियामकों को मनाने की कोशिश करने के अलावा, ये कंपनियाँ उन उपभोक्ताओं को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं, जो अपने दैनिक खरीद करने का निर्णय लेने के दौरान पर्यावरण के बारे में जागरूक रहते हैं।

 

मोबाइल एप ‘मेन्यू ऑन रेल्स’ हुआ लॉन्च

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चर्चा में क्यों?
रेल यात्रा के दौरान परोसे जाने वाले भोजन या खाद्य पदार्थों के बारे में रेल यात्रियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिये आईआरसीटीसी द्वारा विकसित एक नए मोबाइल एप ‘मेन्यू ऑन रेल्स’ को लॉन्च किया गया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह मोबाइल एप सभी प्रकार की रेलगाड़ियों में परोसे जाने वाले मेन्यू (व्यंजन-सूची) के बारे में व्यापक जानकारी देता है।
  • इसमें खाद्य पदार्थ चार श्रेणियों में शामिल हैं, अर्थात् पेय पदार्थ, नाश्ता, भोजन और ए-ला-कार्टे (अलग-अलग कीमतों के साथ सूचीबद्ध व्यक्तिगत व्यंजन वाले मेनू)।
  • ए-ला-कार्टे में नाश्ता, हल्का भोजन, कॉम्बो भोजन, ,माँसाहारी, जैन भोजन, मिठाई, मधुमेह रोगियों के लिये खाद्य पदार्थ आदि की श्रेणियों के तहत 96 वस्तुओं की एक सूची शामिल है।
  • मानक खाद्य वस्तुओं के लिये दरों (करों सहित) को ट्रेनों के साथ-साथ स्टेशनों (खाद्य प्लाजा और फास्ट फूड इकाइयों को छोड़कर) के लिये निर्धारित किया जाता है।
  • यह मोबाइल एप राजधानी/शताब्दी/दुरंतो समूह की ट्रेनों में परोसे जाने वाले मेन्यू के बारे में भी जानकारी देता है ।
  • शताब्दी ट्रेनों में एक्जीक्यूटिव क्लास एवं चेयर कार क्लास और राजधानी एवं दुरंतो ट्रेनों में फर्स्ट एसी, सेकेंड एसी तथा थर्ड एसी क्लास के लिये परोसे जाने वाले भोजन (पहले से ही बुक किये गए) को अलग से दर्शाया जाता है। दुरंतो ट्रेनों में स्लीपर क्लास के लिये भी खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किये जाते हैं। इन ट्रेनों के देरी से चलने की स्थिति में भी मेन्यू दिया जाता है।
  • गतिमान और तेजस ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन (पहले से ही बुक किये गए) को भी दर्शाया जाता है।
  • शताब्दी/राजधानी/दुरंतो/गतिमान/तेजस इत्यादि ट्रेनों के यात्रीगण पहले से ही खाद्य पदार्थों को बुक करने की स्थिति में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों और उनकी मात्राओं के बारे में अवगत होंगे।
  • मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में यह मोबाइल एप खान-पान की वस्तुओं की अधिक कीमतें वसूले जाने की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखने में मदद करेगा।
‘रेल मदद’

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चर्चा में क्यों?
भारतीय रेलवे ने पहली बार शिकायत प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की पहल करते हुए ‘रेल मदद’ नामक एप जारी किया है। यह एप यात्रियों की शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया को सुधारने एवं उसमें तेज़ी लाने के लिये जारी किया गया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • इस मोबाइल एप्लीकेशन का विकास उत्तर रेलवे द्वारा किया गया है।
  • यह एप यात्रियों की शिकायतों को दर्ज करेगा और शिकायतों के निवारण की स्थिति के बारे में उन्हें लगातार जानकारी उपलब्ध कराएगा।
  • यात्री को पंजीकरण के तुरंत बाद sms द्वारा शिकायत संख्या उपलब्ध कराई जाएगी जिसके बाद रेलवे द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी sms द्वारा दी जाती रहेगी।
  • रेल मदद यात्रियों की शिकायतों को न्यूनतम जानकारी एवं फोटोग्राफ के साथ दर्ज़ करता है तथा एक शिकायत संख्या जारी करता है और तुरंत ही इस जानकारी को डिवीजन के संबंधित फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध करवाता है।
  • यह एप यात्री को शिकायत के संबंध में की गई कार्यवाही से भी अवगत कराता है, जिससे शिकायत के पंजीकरण एवं समाधान की पूरी प्रक्रिया को त्वरित बनाया जाता है।
  • रेल मदद विभिन्न प्रकार की सहायता सेवाओं के नंबर भी प्रदर्शित करता है और साथ ही तत्काल सहायता के लिये सीधे फोन करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
  • आँकड़ों का विश्लेषण रेलगाड़ियों एवं स्टेशनों के विभिन्न पहलुओं जैसे- स्वच्छता और सुविधाओं के बारे में जानकारी देता है ताकि प्रबंधकीय निर्णय और सटीक एवं प्रभावी बन सकें।
‘घोस्ट पार्टिकल’

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चर्चा में क्यों?
जर्मनी के शोधकर्त्ताओं ने ब्रह्मांड के सबसे हल्के कण के द्रव्यमान को निर्धारित करने में मदद के लिये 60 मिलियन यूरो ($ 71 मिलियन) लागत से निर्मित मशीन के साथ डेटा एकत्र करना शुरू किया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भौतिकविदों, इंजीनियरों और तकनीशियनों को उम्मीद है कि 200-मीट्रिक टन वज़नी यह डिवाइस न्यूट्रिनो के वास्तविक द्रव्यमान का पता लगाने में मदद करेगा।
  • न्यूट्रिनो को कभी-कभी “घोस्ट पार्टिकल” भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पहचानना बहुत मुश्किल होता है।
  • शोधकर्त्ताओं का अनुमान है कि अगले दशक में न्यूट्रिनों के द्रव्यमान की सही माप ली जा सकेगी।
  • न्यूट्रिनो के द्रव्यमान का निर्धारण कण भौतिकी के सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्नों में से एक है और यह वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
  • सात देशों के 20 संस्थानों के 200 लोग इस परियोजना का हिस्सा हैं।
पृथ्वी के समान आकार वाले तीन नए ग्रहों की खोज

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चर्चा में क्यों?
वैज्ञानिकों ने दो नई ग्रह प्रणालियों (planetary systems) की खोज की है, जिनमें से एक प्रणाली में पृथ्वी के आकार के तीन ग्रह हैं।

प्रमुख बिंदु

  • स्पेन इंस्टीटयूट डी एस्ट्रोफिसिका डी कैनारीस (आईएसी) और स्पेन में ओवियडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ताओं ने नासा के K-2 मिशन द्वारा एकत्रित आँकड़ों का विश्लेषण किया जो कि 2013 में शुरू किया गया था।
  • मासिक पत्रिका ‘मंथली नोटिसिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी’ (MNRAS) में प्रकाशित अध्ययन में सितारों के प्रकाश में उत्पन्न ग्रहण से पता चला है कि यहाँ दो नई ग्रह प्रणालियों का अस्तित्व भी है।
  • पहला एक्सोप्लानेटरी सिस्टम स्टार K2-239 में स्थित है, जो कि रोक डी लॉस मुचैचोस ऑब्जर्वेटरी, गारफिया, ला पाल्मा (Roque de los Muchachos Observatory, Garafia, La Palma) में ग्रैन टेलीस्कोपियो कैनारीस (Gran Telescopio Canarias-GTS) के साथ किये गए अवलोकन से क्षुद्र तारा M3 की विशेषता बताता है।
  • यह सूर्य से लगभग 160 प्रकाश वर्ष पर सेक्स्टेंट के नक्षत्र में स्थित है।
  • इसमें पृथ्वी (1.1, 1.0 और 1.1 पृथ्वी त्रिज्या) के समान आकार के कम-से-कम तीन चट्टानी ग्रहों की एक कॉम्पैक्ट प्रणाली है।
  • इन ग्रहों को अपने मूल तारे का चक्कर लगाने में क्रमश: 5.2, 7.8 और 10.1 दिन का समय लगता है।
  • दूसरा लाल रंग का क्षुद्र तारा जिसका नाम K-240 है, के पास पृथ्वी के समान दो बड़े ग्रह हैं इनका आकार हमारी पृथ्वी के आकार का लगभग दोगुना है।
  • K-239 तथा K-240 जिसके चारों ओर ये ग्रह परिक्रमा करते हैं, का वायुमंडलीय तापमान क्रमशः 3,450 तथा 3,800 केल्विन है जो कि सूर्य के तापमान का लगभग आधा है।

स्रोत : द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, पी.आई.बी. एवं अन्य