UPSC DAILY CURRENT 13-09-2018

अप्सरा-उन्नत

Apsara

10 सितंबर, 2018 को ट्रॉम्बे में स्विमिंग पूल के आकार वाले शोध रिएक्टर “अप्सरा-उन्नत” (Apsara-U) का परिचालन शुरू किया गया।

  • उच्च क्षमता वाले इस रिएक्टर को स्थापित करने में पूर्णतः स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो स्वास्थ्य देखभाल, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सुविधाएँ प्रदान करने वाली जटिल संरचना का निर्माण करने में भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की क्षमता को रेखांकित करता है।
  • इसमें निम्न परिष्कृत यूरेनियम (Low Enriched Uranium – LEU) से निर्मित प्लेट के आकार वाले प्रकीर्णन ईंधन (dispersion fuel) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • उच्च न्यूट्रॉन प्रवाह के कारण यह रिएक्टर स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रयोग किये जाने वाले रेडियो-आइसोटोप के स्वदेशी उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि करेगा।
  • इसका उपयोग नाभिकीय भौतिकी, भौतिक विज्ञान और रेडियोधर्मी आवरण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किया जाएगा।
  • एशिया के पहले अनुसंधान रिएक्टर “अप्सरा” का परिचालन अगस्त 1956 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के ट्रॉम्बे परिसर में शुरू हुआ था।
  • पाँच दशक से अधिक समय तक समर्पित सेवा प्रदान करने के बाद इस रिएक्टर को 2009 में बंद कर दिया गया था।
आदर्श परिवर्तनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (Model- ICTAI)

ICTAI

हाल ही में नीति आयोग, इंटेल और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान ने घोषणा की है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता व अनुप्रयोग आधारित शोध परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन के लिये परिवर्तनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता आदर्श अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (Model International Center for Transformative Artificial Intelligence -ICTAI) की स्थापना की जाएगी।

  • यह पहल नीति आयोग के कार्यक्रम ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये राष्ट्रीय रणनीति’ का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित नीतियों तथा मानकों का विकास करना है।
  • बंगलूरू स्थित यह आदर्श ICTAI कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आधारभूत ढाँचे को विकसित करने के साथ ही स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और गतिशीलता के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधान की तलाश करेगा तथा उनका संचालन करेगा।
  • यह आदर्श केंद्र अनुप्रयोग आधारित शोध को प्रोत्साहन देने के लिये AI तकनीकों का विकास करेगा।
  • आदर्श ICTAI उद्योग जगत की हस्तियों, नवाचार उद्यमियों तथा AI सेवा प्रदाताओं के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगा।
  • इस आदर्श ICTAI द्वारा विकसित ज्ञान और सर्वोत्तम अभ्यासों का उपयोग नीति आयोग पूरे देश में स्थापित होने वाले ICTAI केन्द्रों के निर्माण में करेगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है? 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी।
  • इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जनक जॉन मैकार्थी के अनुसार, यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है अर्थात् यह मशीनों द्वारा प्रदर्शित बुद्धिमत्ता है।
  • यह कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह से सोचने वाला सॉफ़्टवेयर बनाने का एक तरीका है।
‘युद्ध अभ्यास-2018’

Warfare

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध-अभ्यास’ के चौदहवें संस्करण का आयोजन 16 से 29 सितंबर, 2018 के बीच उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रानीखेत के पास चौबटिया में किया जाएगा।

  • इस सैन्य अभ्यास का आयोजन दोनों देशों के बीच बारी-बारी से किया जाता है।
  • ‘युद्ध-अभ्यास-2018’ एक ऐसे परिदृश्य का अनुसरण करेगा जिसमें दोनों देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार पहाड़ी इलाके में विद्रोह और आतंकवाद के माहौल के खिलाफ संघर्ष का अभ्यास करेंगे।
  • दो सप्ताह तक चलने वाले इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों से 350-350 सैनिक भाग लेंगे।
  • युद्ध अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी और इसका आयोजन अमेरिकी सेना के शांति सहभागिता कार्यक्रम के तहत किया जाता है।
भारत का पहला मिसाइल ट्रैकिंग जहाज़

HSL

देश की प्रमुख जहाज़ निर्माता कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) भारत के पहले मिसाइल ट्रैकिंग जहाज़ का समुद्री परीक्षण करने के लिये तैयार है।

  • इस जहाज़ निर्माण की नींव 30 जून, 2014 को रखी गई थी।
  • इसका निर्माण राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एक तकनीकी खुफिया एजेंसी जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की देखरेख में काम करती है) के लिये किया गया है।
  • इस परियोजना की लागत लगभग 750 करोड़ रुपए है।
  • भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद इसका नामकरण किया जाएगा। फिलहाल, इसे केवल VC 11184 नाम दिया गया है।
  • यह अपनी तरह का पहला महासागर निगरानी जहाज़ होगा।
  • इस जहाज़ के सफल परीक्षण के साथ ही भारत ऐसे देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास इस तरह का परिष्कृत महासागर निगरानी जहाज़ है।
  • 300 चालक दल वाले इस जहाज़ में उच्च तकनीकी यंत्र और संचार उपकरण लगे हुए हैं, यह  दो डीज़ल इंजनों द्वारा संचालित होता है तथा हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिये इसमें पर्याप्त स्थान है।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड

  • आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित HSL देश की प्रमुख जहाज़ निर्माण कंपनी है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1941 में भारत में महान उद्योगपति और दूरदर्शी सेठ वालचंद हीराचंद ने ‘सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड’ के नाम से की थी।
  • वर्ष 1952 में भारत  सरकार ने इस कंपनी के दो तिहाई भाग पर अधिग्रहण प्राप्त किया तथा 21 जनवरी, 1952 को इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के नाम से निगमित किया गया।
  • जुलाई 1961 में सरकार ने कंपनी का शेष एक-तिहाई हिस्सा हासिल किया और शिपिंग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत यह शिपयार्ड पूरी तरह से भारत सरकार के उपक्रम के रूप में स्थापित हुआ।
  • देश की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, यार्ड को 22 फरवरी 2010 को रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया था।
  • कंपनी का पंजीकृत कार्यालय विशाखापत्तनम में तथा क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

 

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अगला संकट मुद्रा ऋण की वज़ह से

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 01 :  भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

MUDRA

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेतावनी दी है कि भारत के बैंकिंग क्षेत्र में अगला संकट असंगठित सूक्ष्म और लघु व्यवसायों को दिये गए ऋण (जिसे मुद्रा ऋण कहा जाता है) और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बढ़ाए गए साख के कारण उत्पन्न हो सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • एनडीए सरकार द्वारा 2015 में लॉन्च की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना या PMMY के तहत मुद्रा ऋण की पेशकश की जाती है। सूक्ष्म इकाइयों के विकास और पुनर्वित्त एजेंसी (MUDRA) वेबसाइट के आँकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा इस योजना के तहत कुल 6.37 लाख करोड़ रुपए वितरित किये गए हैं।
  • संसदीय अनुमान समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के अनुरोध पर बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) पर तैयार किये गए एक नोट में डॉ. राजन ने कहा कि सरकार को महत्वाकांक्षी क्रेडिट लक्ष्यों को स्थापित करने या ऋणों में छूट देने से बचना चाहिये।
  • डॉ. राजन ने अपने 17-पेज के नोट में लिखा, ” लोकप्रिय होने के बावजूद मुद्रा ऋण के साथ-साथ किसान क्रेडिट कार्ड दोनों की संभावित क्रेडिट जोखिम के चलते अधिक बारीकी से जाँच की जानी चाहिये।”
  • उन्होंने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा संचालित MSME के लिये क्रेडिट गारंटी योजना को भी सूचित किया और इसे “एक बढ़ती आकस्मिक देयता” कहा जिसे तत्काल परीक्षण की आवश्यकता है।
  • उन्होंने लिखा, “2006-2008 की उस अवधि में बड़ी संख्या में NPA उत्पन्न हुए थे जब आर्थिक विकास मजबूत था। यह ऐसा समय होता है जब बैंक गलतियाँ करते हैं।”
  • छोटे ऋणों की समस्या पर उन्होंने नोट में कहा, ” मुझे इस मोर्चे पर प्रगति की जानकारी नहीं है। यह एक ऐसा मामला है जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।”
  • डॉ राजन ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे कृषि ऋण पर छूट न देने के लिये सहमत हों क्योंकि इस तरह के छूट क्रेडिट संस्कृति को खराब करते हैं और अंततः क्रेडिट के प्रवाह को कम करते हैं।
  • उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक के खिलाफ लगे आरोपों का बचाव किया कि एनपीए की गड़बड़ी रिज़र्व बैंक की वज़ह से है। उन्होंने कहा, “सच यह है कि बैंकर, प्रमोटर और परिस्थितियाँ NPA की समस्या पैदा करते हैं। वाणिज्यिक ऋण की प्रक्रिया में आरबीआई मुख्य रूप से एक रेफरी की भूमिका निभाता है, न कि एक खिलाड़ी की।”
  • इसी तरह, उन्होंने इस बात का विरोध किया कि जबरन एनपीए की पहचान ने क्रेडिट और अर्थव्यवस्था में मंदी को आमंत्रित किया है। उन्होंने लिखा, “सबूतों को देखने पर पता चलता है कि यह दावा हस्यास्पद है और उन लोगों द्वारा किया गया है जिन्हें इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है।“

गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियाँ (NPA)

  • गैर-निष्पादनकरी परिसंपत्तियाँ (Non-Performing Assets – NPAs) वित्तीय संस्थानों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऐसा वर्गीकरण है जिसका सीधा संबंध कर्ज़/ऋण/लोन न चुकाने से होता है|
  • जब ऋण लेने वाला व्यक्ति 90 दिनों तक ब्याज अथवा मूलधन का भुगतान करने में विफल रहता है तो उसको दिया गया ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति माना जाता है| दूसरे शब्दों में, एनपीए वैसी परिसंपत्ति होती है जो मूल रूप से वसूली की अनुमानित अवधि तक नकद मौद्रिक प्रवाह का हिस्सा नहीं बनती है|

 

नासा के स्पिट्ज़र दूरबीन ने अंतरिक्ष में पूरे किये 15 साल

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 11 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।)
(खंड- 13 : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायो-टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।)

spitzer-telescope

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नासा के स्पिट्ज़र स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष में 15 साल पूरे कर लिये हैं। उल्लेखनीय है स्पिट्ज़र को 25 अगस्त, 2003 को सौर कक्षा में लॉन्च किया गया था।

स्पिट्ज़र के बारे में

  • यह नासा के चार ‘ग्रेट ऑब्ज़र्वेटरी’ कार्यक्रमों का आखिरी टेलीस्कोप था। अन्य तीन कार्यक्रम थे- हबल स्पेस टेलीस्कोप, द कॉम्पटन गामा रे ऑब्ज़र्वेटरी व चंद्रा एक्स-रे ऑब्जरवेटरी।
  • शुरुआत में इस दूरबीन को केवल 2.5 वर्ष के लिये निर्धारित किया गया था लेकिन अब यह अपने अपेक्षित जीवन-काल से काफी आगे निकल गया है।
  • स्पिट्ज़र अवरक्त किरणों (infrared light) का पता लगाता है जो प्रायः गर्म वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित उष्मीय विकिरण है। पृथ्वी पर अवरक्त किरणों का उपयोग विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों में किया जाता है जिसमें नाइट-विज़न यंत्र आदि शामिल हैं।
  • स्पिट्ज़र ने अपनी अवरक्त दृष्टि (infrared vision) और उच्च संवेदनशीलता के साथ, ज्ञात ब्रह्मांड में कुछ सबसे दूर स्थित आकाशगंगाओं के अध्ययन में योगदान दिया है।
  • स्पिट्ज़र ने इस अवलोकन में लगभग 106,000 घंटे व्यतीत किये हैं।
  • स्पिट्ज़र द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा का उल्लेख 8,000 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में किया गया है।

स्पिट्ज़र द्वारा की गई कुछ प्रमुख खोजें

  • इस अंतरिक्ष दूरबीन ने न केवल ब्रह्मांड में सबसे पुरानी आकाशगंगाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है बल्कि शनि के चारों ओर एक नए वलय का भी खुलासा किया है। साथ ही, धूलकणों के विशालकाय भंडार के माध्यम से नए सितारों और ब्लैक होल्स का भी अध्ययन किया।
  • स्पिट्ज़र ने हमारे सौरमंडल से परे अन्य ग्रहों की खोज में सहायता की, जिसमें पृथ्वी के आकार वाले सात ग्रह जो TRAPPIST-1 के चारों तरफ प्रक्रिमा कर रहे थे, के बारे में पता लगाना भी शामिल है।

स्पिट्ज़र द्वारा की गई कुछ खोज निम्नलिखित है:

  • शनि के चारों ओर एक पतले तथा धुँधले वलय की खोज (जो शनि के व्यास का लगभग 300 गुना है।)
  • एक गैसीय एक्सोप्लेनेट की सतह पर तापमान की विविधता को प्रदर्शित करने वाले पहले एक्सोप्लेनेट  मौसम का मानचित्रण।
  • क्षुद्रग्रह और ग्रहों के टुकड़े।
  • नवजात सितारों की छिपी हुई परतें।
  • अंतरिक्ष में बकीबॉल्स (Buckyballs)। (Buckyballs  अंतरिक्ष में 60 कार्बन परमाणुओं से बनी त्रि-आयामी, गोलाकार संरचनाएँ हैं।)
  • आकाशगंगाओं के विशाल समूह।
  • आकाशगंगा (Milky way) का सबसे व्यापक मानचित्रण।