UPSC DAILY CURRENT 15-05-2018

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औषधि परीक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. दवा निर्माताओं द्वारा औषधि परीक्षण को स्वीकृति इंडियन फार्माकोपिया कमीशन द्वारा दी जाती है।
  2. किसी पदार्थ की अशुद्धियों अथवा साइडइफेक्ट्स की जाँच हेतु मानवों पर पायरोजेन परीक्षण किया जाता था।
  3. मोनोसाइट एक्टिवेशन टेस्ट औषधि परीक्षण की ऐसी तकनीक है, जिसमें पशुओं की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

उपर्युक्त में से कौन- से कथन सही हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D)
उपर्युक्त सभी।
Hide Answer –

उत्तर (c)
व्याख्या:

दवा निर्माताओं द्वारा औषधि परीक्षण को स्वीकृति इंडियन फार्माकोपिया कमीशन  (IPC) द्वारा दी जाती है। अतः कथन 1 सही है।यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है जिसका कार्य दवाओं के लिये मानक तय करना है। 

अभी तक भारत में दवाओं के परीक्षण के लिये मुख्यतः पायरोजेन परीक्षण (Pyrogen Test) तथा एब्नार्मल टॉक्सिसिटी टेस्ट (Abnormal toxicity Test)।

  1. पायरोजेन परीक्षण को खरगोशों पर किया जाता है तथा इससे यह जाँचा जाता है कि उस औषधि में किसी पदार्थ की अशुद्धि तो नहीं अथवा उसके कोई साइडइफेक्ट्स तो नहीं है। अतः कथन 2 सही नहीं  है।
  2. एब्नार्मल टॉक्सिसिटी टेस्ट इसमें किसी जैविक संदूषक की उपस्थिति के लिये स्व-जीव परीक्षण किया जाता है।

पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स (PETA) के द्वारा दबाव बनाये जाने के बाद अब IPC द्वारा इन दोनों परीक्षणों के स्थान पर दो वैकल्पिक परीक्षणों के लिये मंजूरी दे दी गयी है – बैक्टीरियल इंडोटॉक्सिन टेस्ट तथा मोनोसाइट एक्टिवेशन टेस्ट। इन दोनों परीक्षणों के लिये पशुओं पर परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होती है तथा ये टेस्ट ट्यूब में किये जा सकते हैं। अतः कथन 3 सही है।

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पैसिफ़िक आइलैंड्स फोरम के संबंध में, निम्नलखित में कौन-सा कथन सही हैं?

  1. यह दक्षिण प्रशांत के स्वतंत्र एवं स्वशासी देशों की साझा परेशानियों पर चर्चा करने हेतु एक मंच है।
  2. इसे यूनाइटेड नेशंस ऑफिस एट जिनेवा (UNOG) में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया है।
  3. इस फोरम द्वारा  बिकेतावा घोषणा को अपनाया गया जो प्रशांत के पारिस्थितिक क्षय की समस्या के समाधान हेतु प्रतिक्रिया थी।

कूट:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपर्युक्त सभी।
Hide Answer –

उत्तर (a)
व्याख्या :

  • पैसिफ़िक आइलैंड्स फोरम की स्थापना 1971 में दक्षिण प्रशांत के स्वतंत्र एवं स्वशासी देशों साझा परेशानियों पर चर्चा करने हेतु एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गयी थी। अतः कथन 1 सही है।
  • इसके ऑस्ट्रेलिया, कुक आइलैंड्स, फिजी माइक्रोनेशिया समेत 18 सदस्य हैं।
  • हाल ही में इसे यूनाइटेड नेशंस ऑफिस एट जिनेवा (UNOG) में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया है। अतः कथन 2 सही है।
  • वर्ष 2000 में इस फोरम द्वारा  बिकेतावा घोषणा जो अपनाया गया को क्षेत्रीय राजनैतिक अस्थिरता के प्रति एक प्रतिक्रिया थी। अतः कथन 3 सही नहीं है। 
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अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह संयुक्त राष्ट्र से स्वतंत्र संस्था है।
  2. यह संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् दोनों को रिपोर्ट करती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
Hide Answer –

उत्तर (c)
व्याख्या:

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency – IAEA) परमाणु क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु सहयोग केंद्र है। इसे वर्ष 1957 में दुनिया के “शांति के लिये परमाणु” संगठन (“Atoms for Peace” organization) के रूप में स्थापित किया गया था।
  • यह संगठन परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिये परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने का कार्य करता है।
  • ध्यातव्य है कि यह संगठन संयुक्त राष्ट्र के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं आता है तथा एक स्वतंत्र संस्था है। अतः कथन 1 सही है।
  • हालाँकि, एक अंतर्राष्ट्रीय संधि के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी स्थापना की गई थी।
  • आई.ए.ई.ए. संधि के अनुसार, यह संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (United Nations Security Council) दोनों को रिपोर्ट करता है। अतः कथन 1 सही है।
  • आई.ए.ई.ए. सचिवालय का मुख्यालय ऑस्ट्रिया (Austria) के विएना (Vienna) शहर में है।
  • आई.ए.ई.ए. दुनिया भर में परमाणु प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग हेतु एक अंतर-सरकारी मंच के रूप में भी कार्य करता है।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के द्वारा संचालित अल्प विकसित देशों (LDCs) के लिये कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह अल्प विकसित देशों के लिये इस्तांबुल कार्यक्रम की कार्रवाई का समर्थन करता है।
  2. यह गरीबी उन्मूलन के लिये कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करता है।
  3. 2021-2030 को इस्तांबुल कार्यक्रम की कार्रवाई के रूप में मनाने का निर्णय किया गया है।

नीचे दिये गए कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर दीजिये:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर: (a)
व्याख्या:

  • वर्ष 2003 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के द्वारा अल्प विकसित देशों (LDCs) की विशेष समस्याओं और आवश्यकताओं के समाधान के लिये और इन देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने के लिये राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जलविद्युत सेवाओं (NMHSs) की क्षमता को बढ़ाने हेतु ये एक ट्रस्ट फंड की स्थापना की गई है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के द्वारा संचालित कार्यक्रम के निम्नलिखित विशिष्ट उद्देश्य हैं, जो अल्प विकसित देशों के लिये इस्तांबुल कार्यक्रम की कार्रवाई दशक 2011-2020 का समर्थन करता है। अतः कथन 1 सही है जबकि कथन 3 सही नहीं है।

इस कार्यक्रम के उद्देश्यों में शामिल हैं-

  • सभी क्षेत्रों में व्यवहार्य राष्ट्रीय उत्पादक क्षमता का निर्माण करना विशेष रूप से आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और अन्य मौसम, जलवायु तथा जल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
  • कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास रणनीतियों को प्रोत्साहन देना जो छोटे कृषकों के समर्थन को मजबूत करते हैं और गरीबी उन्मूलन में योगदान देते हैं।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, जल और स्वच्छता के लिये बुनियादी सेवाओं में निवेश करना।
  • शांतिपूर्ण और विकास उद्देश्यों सहित राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय संस्थानों को मज़बूत बनाना और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप विज्ञान और प्रोद्योगिकी को बढ़ावा देना।
  • अल्प विकसित देशों (LDCS) के सतत् और समावेशी आर्थिक विकास के लिये वैश्विक साझेदारी और सार्वजनिक-निजी साझेदारी को मज़बूत करना।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के बारे में

  • यह एक अंतर सरकारी संगठन है, जिसे 23 मार्च, 1950 को मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization)  अभिसमय की पुष्टि के द्वारा स्थापित किया गया है।
  • इसका मुख्यालय जेनेवा में स्थित है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के लिये मौसम विज्ञान (मौसम और जलवायु) की एक विशिष्ट एजेंसी है।
  • उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम दिवस मनाया जाता है।
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पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह मैंगनीज हाइड्रॅाक्साइड और लौह युक्त घनी परतों की चट्टानी संरचना है।
  2. हाल ही में अंतराष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी द्वारा भारत को पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स की निकासी हेतु पेरू बेसिन आवंटित किया गया है।
  3. भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स के अन्वेषण और उपयोग पर कार्यक्रम संचालित कर रहा है।

नीचे दिये गए कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर दीजिये:

A) केवल 1
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
Hide Answer –

उत्तर: (a)
व्याख्या:

पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स (Polymetallic nodules) जिन्हें मैंगनीज़ नोड्यूल्स भी कहा जाता है, एक ऐसी चट्टानी संरचना है जो  एक कोर के चारों ओर मैंगनीज़ हाइड्रॅाक्साइड [Mg (OH)2] और लौह की परत जमने से निर्मित होती है। इसके अतिरिक्त इसमें तांबा, निकल, सीसा, कोबाल्ट, कैडमियम, टायटेनियम, मॉलिब्डेनम, वैनेडियम भी संचित रहते हैं। अतः कथन 1 सत्य है।

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी द्वारा भारत को पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स की निकासी हेतु मध्य हिंद महासागर बेसिन का क्षेत्र आवंटित किया गया है। अतः कथन 2 सही नहीं है।

भारत सरकार का पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स के अन्वेषण और उपयोग पर कार्यक्रम संचालित कर रहा है। अतः कथन 3 सही नहीं है।

 

दिवाला और दिवालियापन संहिता संबंधित अस्पष्ट ग्राहक अधिकार
May 14, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

Bankruptcy-code

संदर्भ 
वर्ष 2016 में पारित दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी),  सभी सुधारों में एक अत्यंत प्रमुख पहल है, किंतु इसमें बहुत से क्षेत्रों को अपरिभाषित ही छोड़ दिया गया है, जिनको लेकर हाल के दिनों में चर्चाएँ शुरू हो गई है और इसमें शामिल ऐसा ही एक अपरिभाषित क्षेत्र ग्राहकों के अधिकारों से संबंधित है।

प्रमुख तथ्य 

  • जब आईबीसी 2016 पेश किया गया था, तो उसमें कंपनी के लेनदारों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जिसमें पहला, वित्तीय लेनदारों (बैंक और वित्तीय संस्थाएँ) और दूसरा परिचालन लेनदारों (आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं) से संबंधित है।
  • आईबीसी ने अन्य लेनदारों या ग्राहकों की स्थिति को संबोधित नहीं किया था जो इन दो श्रेणियों में से किसी एक में भी फिट नहीं हो सके हैं।
  • इन अन्य लेनदारों में होमबॉयर्स, जमा धारक और ग्राहक जैसे सेगमेंट शामिल थे, जिन्होंने खरीदारी के लिये अग्रिम भुगतान भी किया था।
  • गौरतलब है कि ग्राहकों संबंधी यह मुद्दा जेपी इंफ्राटेक के होमबॉयर्स, टेलीकॉम फर्म एयरसेल और नाथला ज्वैलर्स के मामले के दौरान प्रकाश में आया और अगस्त 2017 में कॉर्पोरेट दिवालियापन प्रक्रिया नियमों में एक संशोधन के तहत एक नया नियम जोड़ा गया।
  • इस संशोधन के तहत विनियमन 9ए में लेनदारों की एक नई अवशिष्ट श्रेणी अर्थात् अन्य लेनदारों (वित्तीय और परिचालन के अलावा सभी लेनदारों) को शामिल किया गया।
  • यह विनियम रीजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के साथ फॉर्म एफ को भरकर दिवालियापन संहिता के तहत अन्य लेनदारों को एक फर्म के खिलाफ दावा दायर करने हेतु सक्षम बनाता है।
  • अन्य लेनदारों संबंधी इस नियम के बावजूद, अभी भी उन ग्राहकों के लिए अनिश्चितता है जिन्होंने कंपनी को अग्रिम भुगतान किया था।
  • अभी भी मुख्य मुद्दा यह बना हुआ है कि क्या अग्रिम भुगतान करने वाले ग्राहकों को कंपनी के कर्जदार बैंकों और अन्य विक्रेताओं के सामान ही व्यापार के सामान्य नियमों के अनुसार समान व्यवहार किया जाएगा और क्या इस प्राथमिकता क्रम के अनुसार दिवालियापन प्रक्रिया के तहत पुनर्भुगतान किया जाएगा।
क्या है ‘द इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016’?

  • पिछले ही वर्ष केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाते हुए एक नया दिवालियापन संहिता संबंधी विधेयक पारित किया था।
  • गौरतलब है कि यह नया कानून 1909 के ‘प्रेसीडेंसी टाउन इन्सॉल्ववेन्सी एक्ट’ और ‘प्रोवेंशियल इन्सॉल्ववेन्सी एक्ट 1920 को रद्द करता है और कंपनी एक्ट, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट और ‘सेक्यूटाईजेशन एक्ट’ समेत कई कानूनों में संशोधन करता है।
  • दरअसल, कंपनी या साझेदारी फर्म व्यवसाय में नुकसान के चलते कभी भी दिवालिया हो सकते हैं। यदि कोई आर्थिक इकाई दिवालिया होती है तो इसका मतलब यह है कि वह अपने संसाधनों के आधार पर अपने ऋणों को चुका पाने में असमर्थ है।
  • ऐसी स्थिति में कानून में स्पष्टता न होने पर ऋणदाताओं को भी नुकसान होता है और स्वयं उस व्यक्ति या फर्म को भी तरह-तरह की मानसिक एवं अन्य प्रताडऩाओं से गुज़रना पड़ता है।
  • देश में अभी तक दिवालियापन से संबंधित कम से कम 12 कानून थे जिनमें से कुछ तो 100 साल से भी ज़्यादा पुराने हैं।

संबंधित कानूनी सुरक्षा क्या है?
इसमें कोई शक नहीं कि जमाकर्त्ताओं के हितों की रक्षा के लिये कानूनी सुरक्षा प्रदान करना ज़रूरी है। आईबीसी अभी अपने शुरुआती दिनों में है और इससे संबंधित मूल प्रश्न यह है कि वह अपने भिन्न-भिन्न ग्राहकों को किस तरह वर्गीकृत करता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन फर्मों के लिये ग्राहकों का व्यक्तिगत संपर्क छोटा हो सकता है लेकिन, सामूहिक रूप से वे बकाया धन का एक बड़ा हिस्सा भी बनाते हैं। सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है कि वह कोड इस बड़े अछूते भाग को स्पष्ट करने के लिये शीघ्र ही आवश्यक कदम उठाएगा, जो मिश्रित प्रकार के इन ग्राहकों से संबंधित अहम मुद्दा रहा है और जहाँ त्वरित समाधान की ज़रूरत है।

स्रोत: द हिंदू