UPSC DAILY CURRENT 15-06-2018

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निम्नलिखित कथनों पर विचार किजिये:

  1. खादी और ग्रामोद्योग आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
  2. यह संगठन सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर (B)
व्याख्या:

  • हाल ही में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने दावा किया है कि उसने ज़ांगली सेना क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर में एक ही दिन में अधिकतम संख्या में मधुमक्खी बक्से वितरित करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
  • ध्यातव्य है कि इस दौरान ज़ांगली सेना क्षेत्र में 233 लाभार्थियों के बीच दो हज़ार तीन सौ तीस (2330) मधुमक्खी बक्से वितरित किए गए हैं।

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खादी और ग्रामोद्योग आयोग 

  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग संसद के एक अधिनियम द्वारा सृजित संगठन या सांविधिक निकाय है। अतः पहला कथन सही  नहीं है।
  • इसे संसद के एक अधिनियम, 1956 के खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था।
  • अप्रैल 1957 में इसने अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग मंडल का कार्यभार अपने हाथ में लिया।
  • यह संगठन सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है। अतः दूसरा कथन सही है।

उद्देश्यः

  • सामाजिक उद्देश्य : रोजगार सृजन करना।
  • आर्थिक उद्देश्य : बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना तथा
  • व्यापक उद्देश्य : जनता में आत्मनिर्भरता एवं सुदृढ़ ग्राम स्वराज की भावना का विकास करना है।
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हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने किसका प्रयोग करके ऐसे माइक्रोकैप्सूल बनाएँ हैं, जिसके द्वारा कैंसर वैक्सीन को सीधे प्रतिरक्षा प्रणाली तक पहुँचाया जाना संभव हो सका है?

A) शहतूत के कीड़े द्वारा निर्मित रेशम से
B) मकड़ी द्वारा निर्मित रेशम से
C) कपास से प्राप्त रूई से
D) इनमें से कोई नहीं
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उत्तर (B)
व्याख्या:

  • वैज्ञानिकों ने मकड़ी द्वारा निर्मित रेशम से बने माइक्रोकैप्सूल विकसित किए हैं, जो हमारे दिल की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सीधे कैंसर की टीकाएं पहुँचाने में सक्षम हैं।
  • इसके माध्यम से कैंसर वैक्सीन को सीधे प्रतिरक्षा प्रणाली तक पहुँचाया जा सकता है।
  • इस तरह की वैक्सीन ट्यूमर सेल्स की पहचान करके प्रतिरक्षा प्रणाली को कार्य करने के लिये प्रेरित करती है हालाँकि, यह जरूरी नहीं है कि प्रतिरक्षा प्रणाली अपेक्षित कार्य करे ही।
  • इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ज़र्मनी की फ्रीवर्ग यूनिवार्सिटी (UNIFR) और लुडविग मैक्सिमीलियन यूनिवार्सिटी के शोधकर्त्ताओं नें मिलकर मकड़ी रेशम से बने मैक्रोकैप्सूल विकसित किए हैं।
  • इस टीके का प्रयोग संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिये निवारक टीकों के रूप में भी लागू किया जा सकता है।
  • गौरतलब है कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली काफी हद तक दो प्रकार की कोशिकाओं पर आधारित होती है: जो बी लिम्फोसाइट्स (विभिन्न संक्रमणों के खिलाफ बचाव के लिये आवश्यक एंटीबॉडी उत्त्पन्न करती हैं) तथा टी लिम्फोसाइट्स हैं।
  • कैंसर और कुछ अन्य संक्रामक बीमारियों जैसे तपेदिक आदि में, टी लिम्फोसाइट्स को उत्तेजित करने की आवश्यकता होती है।
  • रेशम माइक्रोप्रैक्टिकल एक परिवहन योग्य कैप्सूल बनाते हैं, जो शरीर में तेजी से गिरते टीकाइड पेप्टाइड की रक्षा करता है और पेप्टाइड को लिम्फ नोड कोशिकाओं के केंद्र में पहुँचाता है, जिससे टी लिम्फोसाइट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में काफी वृद्धि होती है।
  • सिंथेटिक रेशम बायोपॉलिमर कण उच्च ताप पर उच्च प्रतिरोध का प्रदर्शन करते हैं, ये बिना नुकसान के कई घंटे के लिये  100 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी का सामना कर सकते हैं।
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हाल ही में किस संगठन ने पहली बार दूर से संचालित होने वाले इखाना विमान (Ikhana aircraft) को सार्वजनिक हवाई क्षेत्र में, बिना चेज विमान (chase airplane) के सफलतापूर्वक उड़ाया है?

A) नासा
B) जाक्सा
C) इसरो
D) यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी
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उत्तर (A)
व्याख्या:

Ikhana aircraft

  • नासा ने पहली बार दूर से संचालित होने वाले इखाना विमान (Ikhana aircraft) को सार्वजनिक हवाई क्षेत्र में, सुरक्षा के लिये पीछा करने वाले हवाई जहाज अथवा चेज ऐयरप्लेन  (chase airplane) के बिना सफलतापूर्वक उड़ाया गया है। अतः विकल्प (A) ही सही उत्तर है।
  • यह ऐतिहासिक उड़ान अमेरिका को वाणिज्यिक और निजी पायलटों द्वारा उपयोग किए जाने वाले हवाई क्षेत्र में मानव रहित विमान संचालन को सामान्यतः प्रयोग करने की दिशा में यह एक सराहनीय कदम है।
  • गौरतलब है कि यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने नासा को छूट या प्राधिकरण के प्रमाण पत्र के तहत इस उड़ान का संचालन करने के लिये विशेष अनुमति दी है।
  • नासा के अनुसार, अमेरिका द्वारा इन बड़े दूरस्थ रूप से संचालित विमानों के सफलतापूर्वक उड़ान से नई आपातकालीन खोज, बचाव अभियान, जंगल की आग की निगरानी तथा युद्ध जैसी सेवाओं के दरवाजे खुल गए हैं।
  • ध्यातव्य है कि पारंपरिक रूप से इखाना जैसे बड़े मानव विमान की उड़ानों की रक्षा हेतु एक सुरक्षा पीछा करने वाले चेज विमान की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह वाणिज्यिक विमान द्वारा उपयोग किए जाने वाले हवाई क्षेत्र से ही यात्रा करती है।

पीछा करने वाले हवाई जहाज (chase airplane)

  • चेज विमान जो ““मुख्य विमान”, अंतरिक्ष यान या रॉकेट का पीछा करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य उड़ान के दौरान “मुख्य विमान” को सुरक्षा प्रदान करना, वास्तविक समय का अवलोकन करना, हवाई तश्वीरें लेना और वीडियो बनाना होता है।
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हाल ही में समाचारों में रहे एएच-64ई अपाचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. एएच-64ई अपाचे एक बहु-भूमिका युक्त मुकाबला करने वाला हेलीकॉप्टर है और इसका उपयोग अमेरिकी सेना और कई रक्षा बलों द्वारा किया जाता है।
  2. वर्ष 1991 में ‘ऑपरेशन डेज़र्ट’ के दौरान एएच-64ई अपाचे मिसाइल को पर्याप्त संख्या में तैनात किया गया था।
  3. संयुक्त राज्य सरकार ने हाल ही में भारतीय सेना के लिये छह एएच-64ई अपाचे (AH-64E Apache) हेलीकॉप्टर बेचने संबंधी सौदे को मंजूरी दी है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (C)
व्याख्या:

  • हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने 930 मिलियन डॉलर के छह एएच-64ई अपाचे (AH-64E Apache) हेलीकॉप्टर भारतीय सेना को बेचने संबंधी सौदे को मंजूरी दे दी है। अतः तीसरा कथन भी सही है।

AH-64D

  • समझौते को अमेरिकी कॉंन्ग्रेस की मंजूरी हेतु अनुमति दे दी गई है, यदि कोई अमेरिकी सांसद आपत्ति नहीं उठाता है, तो इस अनुबंध के आगे बढ़ने की उम्मीद है।
  • हालाँकि बोइंग और भारतीय साझेदार टाटा ने भारत में एक संयंत्र में अपाचे फ्यूजलेज का उत्पादन शुरू कर दिया है, लेकिन वर्तमान समझौता, अमेरिकी निर्माताओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सीधी बिक्री से संबंधित है।
  • विमान के अलावा इस समझौते में अग्नि नियंत्रण रडार, हेलफ़ीयर लोंगबो मिसाइल, स्टिंगर ब्लॉक I-92H मिसाइल, नाइट विजन सेंसर और नेविगेशन सिस्टम भी शामिल हैं।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2008 से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा व्यापार शून्य से बढ़कर 15 अरब डॉलर हो गया है।

एएच-64ई अपाचे (AH-64E Apache)

  • एएच-64ई अपाचे एक बहु-भूमिका युक्त मुकाबला करने वाला हेलीकॉप्टर है और इसका उपयोग अमेरिकी सेना और कई रक्षा बलों द्वारा किया जाता है। अतः पहला कथन सही है।
  • अपाचे हेलीकॉप्टर दुश्मन बलों को नष्ट करने, रोकने या पकड़ने के लिये निकट युद्ध में शामिल होने के लिये जल्दी प्रतिक्रिया दे सकता है।
  • वर्ष 1991 में ‘ऑपरेशन डेज़र्ट’ के दौरान एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर को पर्याप्त संख्या में तैनात किया गया था। अतः दूसरा कथन सही नहीं है।  
  • इराक़ियों द्वारा अपाचे को “ब्लैक डेथ” नाम दिया गया था।
  • पूर्व गणराज्य युगोस्लाविया और बोस्निया में शांति स्थापित करने के लिये तथा वर्ष 2003 के दूसरे खाड़ी युद्ध के दौरान एएच-64ई अपाचे का प्रयोग किया गया।
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हाल ही में चर्चा में रहे भोरमदेव मंदिर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. एक हज़ार साल पुराना यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।
  2. भोरमदेव मंदिर के चारों ओर मैकाल पर्वतसमूह फैला हुआ है।
  3. इस मंदिर की बनावट की तुलना खजुराहो तथा कोणार्क के मंदिरों से की जाती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर (B)
व्याख्या:

bhoramdeo-temple

  • हाल ही में भोरमदेव मंदिर में पुरातत्त्व विभाग द्वारा कुछ झुकाव देखा गया है, जिसे हज़ारों साल पुराने इस मंदिर के अस्तित्त्व के खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

भोरमदेव मंदिर (Bhoramdeo Temple)

  • भोरमदेव मंदिर लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना है।
  • यह मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले से 18 कि.मी. दूर तथा रायपुर से 125 कि.मी. दूर चौरागाँव में अवस्थित है।
  • यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। अतः पहला कथन सही नहीं है।
  • यह लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था।
  • भोरमदेव मंदिर के चारों ओर मैकाल पर्वतसमूह फैला हुआ है और इसके मध्य में हरी-भरी घाटी में यह मंदिर स्थित है।
  • मंदिर की बाहरी दीवारों पर भगवान शिव की लीलाओं, विष्णु के विभिन्न अवतारों और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। अतः दूसरा कथन सही है।
  • मंदिर की बनावट खजुराहो तथा कोणार्क के मंदिरों के समान है, जिसके कारण इस मंदिर को ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहते हैं। अतः तीसरा कथन भी सही है।
  • गोंड राजाओं के देवता भोरमदेव थे अतः उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम भोरमदेव पड़ा।

 

तेज़ी से रक्त परीक्षण करने वाला स्वचालित रोबोट डिवाइस

Blood Test

चर्चा में क्यों?

शोधकर्त्ताओं ने रक्त का आहरण और उसका परीक्षण करने के लिये एक स्वचालित उपकरण विकसित किया है जो तेज़ी से परिणाम उपलब्ध कराता है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • जर्नल टेक्नोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह उपकरण फ्लोरोसेंट माइक्रोबैड्स के साथ रक्त जैसे तरल पदार्थ का उपयोग करके, सफेद रक्त कोशिका परीक्षण के संबंध में अत्यधिक सटीक परिणाम प्रदान करता है।
  • शोधकर्त्ताओं के अनुसार, इसमें नसों से रक्त खींचने के लिये एक छवि-निर्देशित रोबोट, एक नमूना-हैंडलिंग मॉड्यूल आधारित रक्त विश्लेषक शामिल है।
  • परीक्षण में प्लास्टिक ट्यूबों के साथ कृत्रिम उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है जो रक्त वाहिकाओं के रूप में कार्य करता है।
  • रक्त नमूनों को मैन्युअल रूप से चित्रित करने की सफलता दर चिकित्सकों के कौशल और रोगी के शरीर विज्ञान पर निर्भर करती है।
कछुए की नई प्रजाति

Tortoise

चर्चा में क्यों?

हाल ही में मेक्सिको में पाए जाने वाले कछुओं को नई प्रजाति के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • वैज्ञानिकों ने इन कछुओं को दुनिया की नवीनतम प्रजातियों, किनोस्टर्नन वोग्टी (Kinosternon vogti) के रूप में नामांकित किया है।
  • कछुओं की इस प्रजाति का नाम अमेरिकी सरीसृप विज्ञानवेत्ता (herpetologist) रिचर्ड वोगट ने रखा था, जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक अमेरिकी, मेक्सिकन और मध्य अमेरिकी कछुओं का अध्ययन किया है।
  • नाक पर पीले रंग के निशान से पहचाने जाने वाले ये कछुए भी लुप्तप्राय हैं।
  • शोधकर्त्ताओं के अनुसार, ये कछुए केवल प्वेर्टो वल्लर्टा के आसपास की धाराओं और नदियों में पाए जाते हैं।
  • इन कछुओं की लंबाई केवल 10 सेंटीमीटर (चार इंच) है तथा ये कछुए हाथ की हथेली में आसानी से फिट होते हैं।
  • लंबाई की तुलना में इन कछुओं की चौड़ाई अधिक है जो कि अन्य कछुओं के विपरीत है।
  • अभी तक इस प्रजाति के केवल चार कछुए जीवित मिले हैं जिनमें से तीन नर और एक मादा है।
  • पाँच अन्य कछुए मृत अवस्था में पाए गए हैं जिन्हें मेक्सिको के सबसे बड़े विश्वविद्यालय नेशनल ऑटोनोमस यूनिवर्सिटी में शोध के लिये ले जाया गया है।
  • जीवित कछुओं में से एक नर और एक मादा को प्रजनन केंद्र में ले जाया गया है।
  • अन्य दो कछुओं को प्वेर्टो वल्लर्टा के वन्यजीव पार्क में ले जाया गया है।
  • इस खोज के बारे में चेलोनियन कंज़र्वेशन एंड बायोलॉजी (Chelonian Conservation and Biology) में प्रकाशित किया गया था जो कछुओं के बारे में जानकारी प्रदान करने वाली विशिष्ट शैक्षणिक पत्रिका है।
संक्रमण का शीघ्र पता लगाने का नया तरीका

Infection

चर्चा में क्यों?

हाल में वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसी विधि विकसित की गई है जो हानिकारक विषाणु या अन्य रोगाणुओं द्वारा किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का तेज़ी से तथा सटीकता से पता लगा सकती है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह विधि अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास एट सैन एंटोनियो (UTSA) द्वारा विकसित की गई है।
  • यह विधि व्यक्ति में संक्रमण की स्थिति की उग्रता का सटीक प्रदर्शन करती है।
  • शोधकर्त्ताओं द्वारा ऐसे अणुओं का निर्माण किया गया है जो ल्यूकोसाईट एंजाइम को संगठित करते हैं तथा संक्रमण की उपस्थिति को दर्शाने के लिये इलेक्ट्रिक करंट को संकेत के रूप में प्रेषित करते हैं।
  • इन कणों को एक परीक्षण पट्टी (testing strip) पर संचित किया गया है।
  • संक्रमित शारीरिक तरल पदार्थ से संपर्क करने के बाद पट्टी को एक कंप्यूटर मॉनीटर से जोड़ा जाता है जो संक्रमण की गंभीरता का प्रदर्शन करने वाले इलेक्ट्रोकेमिकल प्रतिक्रिया की एक स्पष्ट श्रृंखला को प्रदर्शित करता है।
  • वर्तमान समय में संक्रमण की जाँच करने के लिये एक ऐसी पट्टी का प्रयोग किया जाता है जो संक्रमित तरल के संपर्क में आने पर अपना रंग बदल लेती है।
एक्सेंचर का नया टूल

Accenture

चर्चा में क्यों?

कंसल्टिंग फर्म एक्सेंचर (ACCENTURE) ने अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता सॉफ्टवेर में लैंगिक, नस्लीय तथा धर्म एवं भाषा से संबंधित पूर्वाग्रह का पता लगाने और उसे समाप्त करने के लिये एक नया टूल लॉन्च किया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • एक्सेंचर द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर टूल तीन काम करता है:

♦ यह उपयोगकर्त्ताओं को उन डेटा फ़ील्ड को परिभाषित करने देता है, जिन्हें वे संवेदनशील मानते हैं जैसे कि जाति, लिंग या आयु।
♦ यह उत्पाद एक विज़ुअलाइजेशन भी प्रदान करता है जो डेवलपर्स को यह दर्शाता है कि उनके मॉडल की समग्र सटीकता कैसे प्रभावित होती है।
♦ अंत में, एक्सेंचर की विधि “पूर्वानुमानित समानता” के संदर्भ में एल्गोरिदम की निष्पक्षता का आकलन करती है

  • एक्सेंचर आपसी जानकारी नामक एक तकनीक का उपयोग करता है जो अनिवार्य रूप से एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह को समाप्त करता है।
  • यह टूल डेवलपर्स को दिखाता है कि उनके मॉडल की समग्र सटीकता के साथ क्या होता है।
  • एक्सेंचर का टूल यह दृढ़ता से प्रदर्शित करता है कि अक्सर एल्गोरिदम और उनकी निष्पक्षता की समग्र सटीकता के बीच एक व्यापारिक संबंध होता है।
  • एक्सेंचर के प्रदर्शन में, जिसने अल्गोरिदमिक निष्पक्षता की जांच करने वाले अकादमिक शोधकर्त्ताओं द्वारा जर्मन क्रेडिट स्कोर डेटा का व्यापक रूप से उपयोग किया।

स्रोत : टाइम्स ऑफ़ इंडिया, डी.एन.ए एवं इंडियन एक्सप्रेस