UPSC DAILY CURRENT 18-05-2018

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हाल ही में समाचारों में रहे ग्रीन प्रोपेलेंट के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्रीन प्रोपेलेंट नामक पर्यावरण के अनुकूल प्रणोदक का विकास किया है।
  2. यह पारंपरिक हाइड्राज़िन रॉकेट के ईंधन जो कैंसरजन्य रसायन का कारक है, का स्थान लेगा।

नीचे दिये गए कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिये:

A)  केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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व्याख्या
उत्तर :(C)

इसरो का ग्रीन प्रोपेलेंट (propellant) हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने बिजली उपग्रहों और अंतरिक्ष यान के लिये पर्यावरण के अनुकूल प्रणोदक के विकास में प्रगति की सूचना दी है। अतः पहला कथन सत्य है।

  • इस प्रणोदक के विकास का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हाइड्राज़िन रॉकेट के ईंधन से उत्सर्जित अत्यधिक जहरीले और कैंसरजन्य रसायन को एक पर्यावरण हितैषी हरित प्रणोदक में रूपांतरित करना है। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।  
  • तरल प्रणोदन में एक शोध दल द्वारा प्रारंभिक परीक्षण सिस्टम्स सेंटर (LPSC) ने हाइड्रोक्साइल-अमोनियम नाइट्रेट (HAN) के आधार पर प्रणोदक मिश्रण के निर्माण और संबंधित परीक्षणों में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं।

हाइड्रोक्साइल-अमोनियम नाइट्रेट (HAN) – LPSC टीम ने एचएएन-आधारित मोनोप्रोपेलेंट तैयार किया है यह मोनोप्रोपेलेंट एक रासायनिक प्रोपल्सन ईंधन है, जिसे अलग ऑक्सीडाइज़र की आवश्यकता नहीं होती है।

  • इसका उपयोग कक्षीय सुधार और अभिविन्यास नियंत्रण के लिये उपग्रह प्रणोदक में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • इन-हाउस फॉर्मूलेशन में एचएएन, अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल और पानी मेथनॉल को दहन अस्थिरता को कम करने के लिये जोड़ा गया था, अमोनियम नाइट्रेट को चुनने का कारण जलने की  दर को नियंत्रित करने और प्रणोदक के ठंडक बिंदु को कम करने की इसकी क्षमता के कारण किया गया था।
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हाल ही में समाचारों में रहे ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही स्टीव प्लेन ने 126 दिनों के सबसे कम समय में सभी सात महाद्वीपों की ऊँची चोटियों पर चढ़ाई करने का रिकॉर्ड बनाया है।
  2. स्टीव प्लेन ने इस अभियान की शुरुआत अंटार्कटिका की चोटी माउंट विन्सन पर चढ़ाई के साथ शुरू की थी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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व्याख्या
उत्तर :(B)

हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही स्टीव प्लेन ने माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ाई कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

  • साथ ही, स्टीव प्लेन ने सबसे कम समय में (सिर्फ 117 दिन में) सभी सात महाद्वीपों की  सबसे ऊँची चोटीयों पर चढ़ाई करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। अतः पहला कथन सत्य नहीं हैं।
  • इससे पूर्व पोलैंड के पर्वतारोही जानुस्ज कोचंस्की (Janusz Kochanski) ने 126 दिनों में सात महाद्वीपों की सात सबसे ऊँची चोटियों पर फतह हासिल कर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
  • ऑस्ट्रेलियाई निवासी स्टीव प्लेन ने इस अभियान की शुरुआत 16 जनवरी को अंटार्कटिका की चोटी माउंट विन्सन पर चढ़ाई से शुरू की। अतः दूसरा कथन सत्य है।
  • इसके पश्चात् उन्होंने क्रमशः दक्षिण अमेरिका के माउंट एकांकागुआ, अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो, पापुआ न्यू गिनी के माउंट कार्स्टेंज़ पिरामिड (जिसमें ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया शामिल हैं), यूरोप के माउंट एलब्रस और उत्तरी अमेरिका के डेनाली पर्वत पर चढ़ाई की थी।
  • गौरतलब है कि 69 वर्षीय एक चीनी पर्वतारोही जिया बोयु ने भी इसी दिन डबल-एम्प्यूट (double-amputee) यानी कृत्रिम पैरों के द्वारा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी हालाँकि, वह ऐसे पहले पर्वतारोही नहीं हैं, जो एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले डबल-एम्प्यूट हैं किंतु, वह सबसे उम्रदराज़ ज़रूर हैं।
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‘भरोसा’ समर्थन केंद्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिये समर्थन हेतु एक अत्याधुनिक केंद्र है।
  2. यह केंद्र सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गैर-लाभकारी सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है।
  3. हाल ही में यूनेस्को ने भरोसा में कौशल विकास केंद्र की स्थापना हेतु समझौता किया है।

उपर्युक्त में से कौन- से कथन सही हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपर्युक्त सभी।
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व्याख्या
उत्तर :(A)

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ‘भरोसा’ (Bharosa) समर्थन केंद्र के लाभार्थीयों हेतु एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने जा रहा है।

  • गौरतलब है कि ‘भरोसा’ हैदराबाद, तेलंगाना में हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिये एक एकीकृत सहायता केंद्र है।
  • यह समझौता इन महिलाओं को विपणन योग्य कौशल सीखने और आय के अवसरों से जुड़ने में सक्षम बनाने के लिए समर्थन प्रदान करता है।
  • इस पहल का उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके कमजोर और हाशिए वाली महिलाओं को सशक्त बनाना है।

भरोसा (Bharosa)

  • हैदराबाद शहर की  पुलिस द्वारा ‘भरोसा’ नामक  एक केंद्र की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी।
  • यह हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिये समर्थन हेतु एक अत्याधुनिक केंद्र है।
  • यह केंद्र एक ही छत के नीचे गोपनीयता बनाए रखने के हेतु पूरी तरह से निजी परामर्श कक्षों में पुलिस, चिकित्सा, कानूनी सलाह, मनो-चिकित्सकीय परामर्श और राहत और पुनर्वास जैसी सुविधाएँ 24X7 प्रदान करता है।
  • ‘भरोसा’ समर्थन केंद्र में आने वाले प्रत्येक मामले को अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा दर्ज किया जाता है।
  • ये प्रशिक्षित कर्मचारी पीड़ितों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बातचीत करते हैं और प्रत्येक मामले को वर्गीकृत कर पीड़ितों को उनकी आवश्यकताओं के आधार पर मार्गदर्शन करते हैं।
  • ‘भरोसा’- समर्थन केंद्र सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी सोसाइटी है।
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हाल ही में जारी किये गये राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इस नीति द्वारा हाइब्रिड परियोजनाओं के तहत पवन और सौर ऊर्जा हेतु उपलब्ध सभी वित्तीय प्रोत्साहनों को  विस्तार मिलेगा।
  2. यह नीति टैरिफ आधारित पारदर्शी बोली प्रक्रिया पर आधारित होगी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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व्याख्या
उत्तर :(C)

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति जारी की है।

प्रमुख बिंदु 

  • यह नई नीति ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और भूमि के कुशल उपयोग के लिये बड़े ग्रिड से जुड़े पवन-सौर फोटो वोल्टिक (पीवी) हाइब्रिड सिस्टम के प्रसार के लिये व्यापक रूपरेखा प्रदान करेगा।
  • ध्यातव्य है कि सरकार ने 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से स्थापित क्षमता के 175 गीगावाट को हासिल करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 100 गीगावाट सौर ऊर्जा और 60 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता शामिल है।
  • पिछले वित्तीय वर्ष में देश में कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता लगभग 70 गीगावाट थी।
  • इस नीति से अक्षय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता और बेहतर ग्रिड स्थिरता प्राप्त की जा सकेगी।
  • इस नीति के तहत विनियामक प्राधिकरणों को पवन-सौर हाइब्रिड प्रणालियों के लिये आवश्यक मानकों और विनियमों को तैयार करना भी अनिवार्य है।
  • नई नीति वर्तमान पवन और सौर दोनों ऊर्जा स्रोतों के AC और DC दोनों उर्जा स्तरों पर एकीकरण प्रदान करती है।
  • इस नीति के तहत, सरकार हाइब्रिड परियोजनाओं में पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपलब्ध सभी वित्तीय प्रोत्साहनों का विस्तार करेगी। अतः पहला कथन सत्य है।  
  • यह क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं को भी समर्थन करेगा।
  • यह नीति टैरिफ आधारित पारदर्शी बोली प्रक्रिया पर आधारित होगी जिसके लिये सरकारी संस्थाऍ बोलियाँ हेतु आमंत्रित कर सकती हैं। अतः दूसरा कथन भी सत्य है।

कर्नाटक में सबसे नए मेंढक की खोज

Frog

  • हाल ही में भारत में मेंढक की एक नवीनतम प्रजाति संकीर्ण मुख वाला मंगलुरु मेंढक की खोज की गई है ।
  • यह कर्नाटक के तटीय औद्योगिक क्षेत्र में पाया गया है।
  • इस शहरी क्षेत्र में अपने छोटे आकार के कारण मेंढक की उपस्थिति को आसानी से अनदेखा किया  जा सकता है।
  • धूसर भूरे रंग के इस मेंढक की लंबाई केवल 2 सेमी है।
  • व्यवहारिक अवलोकनों से पता चला कि मेंढक केवल मानसून के दौरान पैदा होते हैं।
  • ध्यातव्य है कि मंगलुरु संकीर्ण मुख वाला मेंढक दक्षिण एशिया  में पाए जाने वाले माइक्रोहिला जीनस (genus Microhyla) की 42 वीं प्रजाति है।
  • जिस औद्योगिक क्षेत्र में इस संकीर्ण मुख वाले मंगलुरु मेंढक को खोजा गया है, वहाँ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से लकडियाँ आयात की जाती हैं।
  • अतः संभावना जताई गई हैं कि आयातित लकड़ियों के साथ यह मेंढक भूलवश आ गया हो।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय पिता-पुत्री की जोड़ी

mount everest

  • गुड़गाँव निवासी अजीत बजाज और दीया बजाज दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले भारतीय पिता-पुत्री बन गए हैं।
  • 24 वर्षीय दीया सुबह साढ़े चार बजे पर्वत शिखर पर पहुँची इसके पश्चात् उनके पिता 15 मिनट बाद एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में सफल रहे।
  • अजीत और दिया ने अपना यह अभियान 16 अप्रैल को शुरू किया था।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2011 में पिता-बेटी की यह जोड़ी ग्रीनलैंड आइस कैप को स्की करने वाली इस प्रकार की पहली ऐसी भारतीय जोड़ी बनी थी।
  • इसके साथ ही उनकी इस उपलब्धि को स्वीकार करते हुए वर्ष 2012 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था।

स्रोत: द हिंदू ,द इंडियन एक्सप्रेस

 

मंत्रिमंडल ने नई जैव ईंधन नीति को मंजूरी दी 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-09 : बुनियादी ढाँचा : ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।)

biofuels-policy

चर्चा में क्यों ?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जैव ईंधन पर राष्‍ट्रीय नीति-2018 को मंजूरी दे दी है। इस नीति से न केवल गन्ना किसानों को अपना अधिशेष स्टॉक निपटाने में मदद मिलेगी, बल्कि देश की तेल आयात पर निर्भरता में भी कमी आएगी।

प्रमुख बिंदु 

  • नीति में गन्‍ने का रस, शुगर वाली वस्‍तुओं जैसे चुकंदर, स्‍वीट सोरगम, स्‍टार्च वाली वस्तुएँ जैसे – कॉर्न, कसावा, मनुष्‍य के उपभोग के लिये अनुपयुक्त बेकार अनाज जैसे गेहूँ , टूटा चावल, सड़े हुए आलू, के इस्‍तेमाल की अनुमति देकर इथेनॉल उत्‍पादन के लिये कच्‍चे माल का दायरा बढ़ाया गया है।
  • अतिरिक्‍त उत्‍पादन के चरण के दौरान किसानों को उनके उत्‍पाद का उचित मूल्‍य नहीं मिलने का खतरा होता है। इसे ध्‍यान में रखते हुए इस नीति में राष्‍ट्रीय जैव ईंधन समन्‍वय समिति की मंजूरी से इथेनॉल उत्‍पादन के लिये पेट्रोल के साथ उसे मिलाने हेतु अधिशेष अनाजों के इस्‍तेमाल की अनुमति दी गई है।
  • नीति में जैव ईंधनों को ‘आधारभूत जैव ईंधनों’  यानी पहली पीढ़ी (1जी) के जैव इथेनॉल और जैव डीजल तथा ‘विकसित जैव ईंधनों’ यानी दूसरी पीढ़ी (2जी) के इथेनॉल,  निगम के ठोस कचरे (एमएसडब्‍ल्‍यू) से लेकर ड्रॉप-इन ईंधन, तीसरी पीढ़ी (3जी) के जैव ईंधन, जैव सीएनजी आदि को श्रेणीबद्ध किया गया है, ताकि प्रत्‍येक श्रेणी के अंतर्गत उचित वित्तीय और आर्थिक प्रोत्‍साहन बढ़ाया जा सके।
  • जैव ईंधनों के लिये नीति में 2जी इथेनॉल जैव रिफाइनरी के लिये 1जी जैव ईंधनों की तुलना में अतिरिक्‍त कर प्रोत्‍साहनों, उच्‍च खरीद मूल्‍य के अलावा 6 वर्षों में 5000 करोड़ रुपये की निधियन योजना के लिये वायबिलिटी गैप फंडिंग का संकेत दिया गया है।
  • नीति गैर-खाद्य तिलहनों, इस्‍तेमाल किये जा चुके खाना पकाने के तेल, लघु गाभ फसलों (short gestation crops) से बायोडीजल उत्‍पादन के लिये आपूर्ति श्रृंखला तंत्र स्‍थापित करने को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • नीति दस्‍तावेज़ में जैव ईंधनों के संबंध में सभी मंत्रालयों/विभागों की भूमिकाओं और जिम्‍मेदारियों को शामिल किया गया है, ताकि प्रयासों में तालमेल बनाया जा सके।

नीति के अपेक्षित लाभ

  • एक करोड़ लीटर ई-10 वर्तमान दरों पर 28 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत करेगा। वर्ष 2017-18 में करीब 150 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति होने की उम्‍मीद है, जिससे 4000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • एक करोड़ लीटर ई-10 से करीब 20,000 हजार टन कार्बन-डाइ-ऑक्साइड का उत्‍सर्जन कम होगा।
  • इस्‍तेमाल हो चुका खाना पकाने का तेल, जिसका बार-बार प्रयोग स्वास्थ्य के लिये हानिकारक साबित हो सकता है , वह जैव ईंधन के लिये संभावित फीडस्‍टॉक हो सकता है और जैव ईंधन बनाने के लिये इसके इस्‍तेमाल से खाद्य उद्योगों में खाना पकाने के तेल के दोबारा इस्‍तेमाल से बचा जा सकता है।
  • एक अनुमान के अनुसार भारत में हर वर्ष नगरपालिकाओं से 62 एमएमटी ठोस कचरा (Municipal Solid Waste) निकलता है। ऐसी प्रौद्योगिकियाँ उपलब्‍ध हैं, जो कचरा/प्‍लास्टिक, एमएसडब्‍ल्‍यू को ईंधन में परिवर्तित कर सकती हैं।
  • सामान्यतः एक 100 केएलपीडी की जैव रिफाइनरी के लिये करीब 800 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की आवश्‍यकता होती है। वर्तमान में तेल विपणन कंपनियाँ करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से बारह 2जी रिफाइनरियाँ स्‍थापित करने की प्रक्रिया में है। 2जी जैव रिफाइनरियों की संख्या में और वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • एक 100 केएलपीडी 2जी जैव रिफाइनरी संयंत्र परिचालनों, ग्रामीण स्‍तर के उद्यमों और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में 1200 नौकरियों का योगदान दे सकती है।
  • 2जी प्रौद्योगिकियों को अपना कर कृषि‍संबंधी अवशिष्‍टों/ कचरे को इथेनॉल में बदला जा सकता है और यदि इसके लिये बाजार विकसित कर दिया जाए तो कचरे का मूल्‍य मिल सकता है जिसे अन्‍यथा किसान जला देते हैं। साथ ही, अतिरिक्‍त उत्‍पादन चरण के दौरान उनके उत्‍पादों के लिये उचित मूल्‍य नहीं मिलने का खतरा रहता है।

स्रोत : पीआईबी

 

स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के परिणाम जारी

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता , पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

SWATCH-BHARAT

चर्चा में क्यों ?

सरकार ने ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ के परिणाम जारी कर दिये हैं। इंदौर को लगातार दूसरे वर्ष सबसे स्वच्छ शहर करार दिया गया है, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमशः भोपाल और चंडीगढ़ का नाम आता है।

प्रमुख  बिंदु

  • इस सर्वेक्षण का लक्ष्य देश के सभी नगरपालिका शहरों का भारत सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत हो रही प्रगति का आकलन करना है।
  • हालाँकि, शहरी मामले मंत्रालय ने सर्वे के अंतर्गत कवर किये गए सभी शहरों के आँकड़े जारी नहीं किये हैं।
  • मंत्रालय का कहना है कि डैशबोर्ड के तैयार होने के बाद जल्द ही सारे आँकड़े उपलब्ध करा दिये जाएंगे।
  • इसके अलावा, सूची में दिल्ली के नगरपालिका निकायों का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • सूची में बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु राज्यों के शहरों का उल्लेख भी नहीं किया गया है।
  • हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि, फुल लिस्ट में सभी शहरों और उनकी रैंकिंग का उल्लेख किया जाएगा।
  • सर्वेक्षण में झारखंड को ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य’ (Best Performing State) घोषित किया गया है।
  • दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र और तीसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ का नाम आता है।
  • विजयवाड़ा को ‘सबसे स्वच्छ बड़ा शहर’ (Cleanest Big City) करार दिया गया है। यह सर्वेक्षण 4 जनवरी, 2018 से 10 मार्च, 2018 के मध्य संपन्न किया गया।
  • इस बार विभिन्न शहरों के  4,203 स्थानीय शहरी निकायों को शामिल किया गया।
  • इस वर्ष के सर्वेक्षण में नागरिकों के दैनिक अनुभवों के आधार पर दिये गए फीडबैक को अधिक भार प्रदान किया गया।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के अंतर्गत कुल 37.66 लाख नागरिकों के फीडबैक इकठ्ठा किये गए।
  • इसके अतिरिक्त 53.58 लाख स्वच्छता एप डाउनलोड किये गए।
  • स्वच्छता एप पर दर्ज कराई गई शिकायतों की संख्या लगभग 1.18 करोड़ थी।

स्रोत : इंडियन एक्सप्रेस