UPSC DAILY CURRENT 19-09-2018

[1]

भारत पर्यटन मार्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. ‘भारत पर्यटन मार्ट’ का आयोजन पर्यटन मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  2. ITM 2018 में विश्‍व भर से लगभग 225 मेज़बान अंतर्राष्‍ट्रीय खरीदार एवं मीडियाकर्मी भाग ले रहे हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (c)
व्याख्या :

  •  17 सितंबर, 2018 को भारत के पहले पर्यटन मार्ट (India Tourism Mart- ITM 2018) की शुरुआत की गई। ‘भारत पर्यटन मार्ट’ का आयोजन पर्यटन मंत्रालय राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों तथा भारतीय पर्यटन व अतिथि सत्कार परिसंघ (FAITH) के सहयोग से कर रहा है। इस आयोजन से पर्यटन व अतिथि सत्कार से जुड़े सभी हितधारकों को विचार-विमर्श करने का मौका मिलेगा और उन्हें व्यापार से जुड़े अवसरों की जानकारी मिलेगी। अतः कथन 1 सही है।
  • ITM 2018 में विश्‍व भर, जैसे कि उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पूर्वी एशिया, लैटिन अमेरिका, कॉमनवेल्थ देशों इत्‍यादि से लगभग 225 मेज़बान अंतर्राष्‍ट्रीय खरीदार एवं मीडियाकर्मी भाग ले रहे हैं। ITM 2018 के माध्यम से भारत पूरे विश्व, खासकर चीन, लैटिन अमेरिका, जापान आदि को अपने उन गंतव्यों की जानकारी दे सकता है जिनके बारे में पर्यटकों के पास जानकारी उपलब्ध नहीं होती। अतः कथन 2 सही है।
[2]

शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ जारी किया गया।
  2. 20 वर्षों तक सभी क्षेत्रों में शीतलता से संबंधित आवश्यकताओं इससे जुड़ी माँग तथा ऊर्जा की आवश्यकता का आकलन इसका प्रमुख लक्ष्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर :(b)
व्याख्या :

  • विश्व ओज़ोन दिवस (16 सितंबर) के अवसर पर सरकार, उद्योग, उद्योग संघ और सभी हितधारकों के बीच सक्रिय सहयोग पर बल देते हुये पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ जारी किया गया। उल्लेखनीय है कि भारत पहला देश है जिसने शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ तैयार किया है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • इस कार्ययोजना के प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:

♦ अगले 20 वर्षों तक सभी क्षेत्रों में शीतलता से संबंधित आवश्यकताओं इससे जुड़ी माँग तथा ऊर्जा की आवश्यकता का आकलन।
♦ शीतलता के लिये उपलब्ध तकनीकों की पहचान के साथ ही वैकल्पिक तकनीकों, अप्रत्यक्ष उपायों और अलग प्रकार की तकनीकों की पहचान करना।
♦ सभी क्षेत्रों में गर्मी से राहत दिलाने तथा सतत् शीतलता प्रदान करने वाले उपायों के बारे सलाह देना।
♦ तकनीशियनों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
♦ घरेलू वैकल्पिक तकनीकों के विकास हेतु ‘शोध एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र’ को विकसित करना। अतः कथन 2 सही है।

[3]

फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

A) इसका उद्देश्य ‘टेरर फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है।
B) इसका उद्देश्य दो देशों के बीच होने वाले सभी प्रकार के व्यापारों का नियमन करना है।
C) यह केवल सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित करता है।
D) यह वस्तुओं के व्यापार को प्रबंधित करता है।

उत्तर : (a)
व्याख्या :

  • फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स वर्ष 1989 में जी-7 की पहल पर स्थापित एक अंतः सरकारी संस्था है। इसका उद्देश्य ‘टेरर फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है। फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स किसी देश को निगरानी सूची में डाल सकती है और उसके बावजूद कार्रवाई न होने पर उसे ‘खतरनाक देश’ घोषित कर सकती है। उत्तर कोरिया, ईरान और युगांडा को भी इस सूची में डाला गया है। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम और अमेरिका जैसे देश इसकी रिपोर्ट का कड़ाई से पालन करते हैं।
[4]

बैंकों के विलय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बड़े बैंकों देना बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा तथा विजया बैंक के विलय का फैसला लिया।
  2. विलय के बाद ये बैंक संयुक्त रूप से कार्य करेंगे तथा इनका संयुक्त व्यापार लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का होगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (a)
व्याख्या :

  • हाल में वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बड़े बैंकों देना बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा तथा विजया बैंक के विलय का फैसला लिया। इन बैंकों के विलय के साथ ही देश का तीसरा बड़ा बैंक अस्तित्व में आ जाएगा। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य एक ऐसे बड़े बैंक की स्थापना करना है जो टिकाऊ हो तथा उसकी ऋण क्षमता बहुत अधिक हो। यह निर्णय एक वैकल्पिक तंत्र जिसका गठन सरकार ने अक्तूबर, 2017 में राज्य संचालित बैंकों के विलय संबंधी प्रस्तावों को मंज़ूरी प्रदान करने के लिये किया था, की बैठक में लिया गया। अतः कथन 1 सही है।
  • विलय के बाद भी ये बैंक स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहेंगे।अनुमानतः इन बैंकों का संयुक्त व्यापार 14.82 लाख करोड़ रुपए का होगा। यह निर्णय बैंकों की क़र्ज़ देने की क्षमता बढ़ाने, बैंकिंग प्रणाली को दुरुस्त करने तथा आर्थिक वृद्धि को गति देने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि देना बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे के तहत ऋण देने से प्रतिबंधित किया गया है, शेष दो बैंकों में से केवल विजया बैंक ने 2017-18 में लाभ प्रदर्शित किया था। अतः कथन 2 सही नहीं है।
[5]

डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 10,881 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ इसकी शुरुआत की गई है।
  2. सरकार ने इस योजना का क्रियान्वयन 10 राज्यों से बढ़ाकर 25 राज्यों में कर दिया है।
  3. इस योजना के तहत एनडीडीबी को 440 करोड़ रुपए की पहली किस्त दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तर : (c)
व्याख्या :

  • हाल ही में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 10,881 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ “डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष” की शुरुआत की है। इस कोष की शुरुआत डेयरी किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से की गई है। सरकार के अनुमान के मुताबिक डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष से 50 हज़ार गाँवों में 95 लाख दूध उत्पादक लाभान्वित होंगे। अतः कथन 1 सही है।
  • सरकार ने इस योजना का क्रियान्वयन 14 राज्यों से बढ़ाकर 18 राज्यों में कर दिया है। अब तक 1148 करोड़ रुपए की लागत वाली कुल 15 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन स्वीकृत परियोजनाओं में कर्नाटक (776.39 करोड़ रुपए की 5 उप- परियोजनाएँ), पंजाब (318.01 करोड़ रुपए की 4 उप- परियोजनाएँ) और हरियाणा (54.21 करोड़ रुपए की 6 उप-परियोजनाएँ) शामिल हैं। अतः कथन 2 सही नहीं है।
  • इस योजना से प्रतिदिन 126 लाख लीटर की अतिरिक्त दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता, 210 टन दूध को सुखाने की दैनिक क्षमता, प्रतिदिन 140 लाख लीटर दुग्ध अवशीतन की क्षमता का सृजन होगा। इस योजना के अंतर्गत सहकारी दुग्ध संस्थाओं को 8004 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता ऋण के रूप में 5% वार्षिक ब्याज दर पर प्रदान की जाएगी जिसकी भरपाई 10 वर्ष की अवधि में करनी होगी। इस ऋण पर भारत सरकार ने ब्याज सब्सिडी का प्रावधान भी रखा है। डेयरी किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिये तैयार किये गए डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) के तहत एनडीडीबी को 440 करोड़ रुपए की पहली किस्त दी गई है। अतः कथन 3 सही है।

 

उज़्बेक मकोम फोरम

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प्राच्य मकोम कला को व्यापक रूप से बढ़ावा देने, युवा पीढ़ी के बीच इसकी स्वीकृति दिलवाने और राष्ट्रीय शास्त्रीय संगीत में रुचि बढ़ाने के उद्देश्य के साथ इस इंटरनेशनल फोरम का आयोजन उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियॉयव की पहल पर किया गया है।

  • मकोम पूरे एशिया में तार और आघात वाद्य यंत्रों द्वारा बजाई जाने वाली संगीत की प्राच्य प्रणाली है।
  • भारत के उस्ताद इकबाल अहमद खान को एकल श्रेणी में उनके प्रदर्शन के लिये द्वितीय पुरस्कार दिया गया।
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत की 50 से अधिक वर्षों से सेवा करने वाले, दिल्ली घराना के गायक उस्ताद इकबाल अहमद खान अपनी बहुमुखी प्रतिभा और मुखर अभिव्यक्ति के लिये जाने जाते हैं।
  • ख्याल, ठुमरी, दादरा, भजन, गज़ल जैसी संगीत की कई विधाओं में विशेषज्ञता उनकी सीमा को व्यापक बनाती है। शास्त्रीय गायन की उनकी शैली ने उन्हें बेहद सम्मान और प्रशंसा दिलवाई है।
  • वह शास्त्रीय संगीत में अपने योगदान के लिये संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, जिसे भारतीय संगीत के दिल्ली घराने के खलीफा या प्रमुख के रूप में जाना जाता है।
  • उज़्बेकिस्तान में पहली बार मकोम आर्ट के इंटरनेशनल फोरम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम हर दो साल में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के समन्वय की ज़िम्मेदारी उज़्बेकिस्तान के संस्कृति मंत्रालय और अन्य हितधारकों के हाथों में है।
  • यह फोरम यूनेस्को के संरक्षण में आयोजित किया गया है।
फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) 

FATF

फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ पाकिस्तान की हालिया कार्रवाई को, खासतौर पर “कानूनी” मोर्चे पर (जैसे परिसंपत्तियों को ज़ब्त करना, वित्त की ज़ब्ती, आतंकवादी समूह के बुनियादी ढाँचे को नष्ट करना इत्यादि) असंतोषजनक पाया है।

फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स

  • फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स वर्ष 1989 में जी-7 की पहल पर स्थापित एक अंतः सरकारी संस्था है।
  • इसका उद्देश्य ‘टेरर फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है।

क्यों महत्त्वपूर्ण है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स?

  • फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स किसी देश को निगरानी सूची में डाल सकती है और उसके बावजूद कार्रवाई न होने पर उसे ‘खतरनाक देश’ घोषित कर सकती है।
  • उत्तर कोरिया, ईरान और युगांडा को भी इस सूची में डाला गया है।
  • उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम और अमेरिका जैसे देश इसकी रिपोर्ट का कड़ाई से पालन करते हैं।
भारत पर्यटन मार्ट

ITM

17 सितंबर, 2018 को भारत के पहले पर्यटन मार्ट (India Tourism Mart- ITM 2018) की शुरुआत की गई।

  • ‘भारत पर्यटन मार्ट’ का आयोजन पर्यटन मंत्रालय राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों तथा भारतीय पर्यटन व अतिथि सत्कार परिसंघ (FAITH) के सहयोग से कर रहा है। ITM 2018 में विश्‍व भर, जैसे कि उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पूर्वी एशिया, लैटिन अमेरिका, कॉमनवेल्थ देशों इत्‍यादि से लगभग 225 मेज़बान अंतर्राष्‍ट्रीय खरीदार एवं मीडियाकर्मी भाग ले रहे हैं।
  • इस आयोजन से पर्यटन व अतिथि सत्कार से जुड़े सभी हितधारकों को विचार-विमर्श करने का मौका मिलेगा और उन्हें व्यापार से जुड़े अवसरों की जानकारी मिलेगी।
  • ITM 2018 के माध्यम से भारत पूरे विश्व, खासकर चीन, लैटिन अमेरिका, जापान आदि को अपने उन गंतव्यों की जानकारी दे सकता है जिनके बारे में पर्यटकों के पास जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ तैयार करने वाला भारत पहला देश

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विश्व ओज़ोन दिवस (16 सितंबर) के अवसर पर सरकार, उद्योग, उद्योग संघ और सभी हितधारकों के बीच सक्रिय सहयोग पर बल देते हुये पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ जारी किया गया। उल्लेखनीय है कि भारत पहला देश है जिसने शीतलता कार्ययोजना पर दस्तावेज़ तैयार किया है। इस कार्ययोजना के प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • अगले 20 वर्षों तक सभी क्षेत्रों में शीतलता से संबंधित आवश्यकताओं इससे जुड़ी माँग तथा ऊर्जा की आवश्यकता का आकलन।
  • शीतलता के लिये उपलब्ध तकनीकों की पहचान के साथ ही वैकल्पिक तकनीकों, अप्रत्यक्ष उपायों और अलग प्रकार की तकनीकों की पहचान करना।
  • सभी क्षेत्रों में गर्मी से राहत दिलाने तथा सतत् शीतलता प्रदान करने वाले उपायों के बारे सलाह देना।
  • तकनीशियनों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • घरेलू वैकल्पिक तकनीकों के विकास हेतु ‘शोध एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र’ को विकसित करना।

अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस के बारे में

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर होने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प के अनुक्रम में 1995 के बाद से प्रतिवर्ष 16 सितंबर को ओज़ोन परत के संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस का आयोजन किया जाता है।
  • यह आयोजन मुख्यतः ओज़ोन परत के क्षरण के बारे में लोगों को जागरूक करने और इसके बचाव हेतु संभव समाधान की खोज करने के लिये मनाया जाता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को इतिहास में सबसे सफल अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधि के रूप में जाना जाता है।
  • वर्ष 2018 के लिये अंतर्राष्ट्रीय दिवस की थीम “शीतलता बनाए रखो और प्रगति करो” (Keep Cool and Carry On) है।

 

स्थानांतरित कृषि पर स्पष्ट नीति हेतु नीति आयोग की पहल

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 05 : प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशुपालन संबंधी अर्थशास्त्र।)

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चर्चा में क्यों?

विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में की जाने वाली स्थानांतरित कृषि पर हाल ही में नीति आयोग के प्रकाशन में सिफारिश की गई है कि कृषि मंत्रालय को अंतर-मंत्रालयी अभिसरण सुनिश्चित करने के लिये “स्थानांतरित कृषि पर मिशन” के लिये प्रयास करना चाहिये।

प्रमुख बिंदु

  • ‘स्थानांतरित कृषि पर मिशन: एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की ओर’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि “केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार के वन और पर्यावरण विभागों, कृषि तथा संबद्ध विभागों का अक्सर स्थानांतरित कृषि के लिये अलग-अलग दृष्टिकोण होता है और यह ज़मीनी स्तर के श्रमिकों और झूम कृषकों के बीच भ्रम पैदा करता है।”
  • समेकित नीति की मांग करने वाले इस दस्तावेज़ के अनुसार, स्थानांतरित कृषि के लिये उपयोग की जाने वाली भूमि को “कृषि भूमि” के रूप में पहचाना जाना चाहिये जहाँ किसान जंगल भूमि की बजाय खाद्य उत्पादन के लिये कृषि-वानिकी का अभ्यास करते हैं।

कम होता क्षेत्र

  • स्थानीय तौर पर झूम खेती के रूप में प्रचलित इस प्रणाली को अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पर्याप्त जनसंख्या के लिये खाद्य उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण आधार माना जाता है।
  • इस प्रकाशन में कहा गया है कि वर्ष 2000 से 2010 के बीच स्थानांतरित कृषि के तहत भूमि में 70% की कमी आई। यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सांख्यिकीय वर्ष पुस्तक -2014 में प्रकाशित भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद के आँकड़ों का उल्लेख करती है। इसके अनुसार, वर्ष 2000 में 35,142 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र झूम कृषि के तहत था जो वर्ष 2010 में कम होकर 10,306 वर्ग किलोमीटर रह गया।
  • इन आँकड़ों की सत्यता और बेहतर डेटा संग्रह की पुष्टि करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है, “वेस्टलैंड एटलस मैप दो वर्षों में उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थानांतरित कृषि में 16,435.18 वर्ग किमी की तुलना में 8,771.62 वर्ग किमी तक की कमी प्रदर्शित करता है।”

खाद्य सुरक्षा 

  • स्थानांतरित कृषि प्रणाली अपनाने वाले समुदायों की आकांक्षाओं में वृद्धि हुई है। जबकि स्थानांतरित कृषि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, यह परिवारों को पर्याप्त नकदी प्रदान नहीं करती है और इस प्रकार वे नियमित कृषि, विशेष रूप से बागवानी की ओर रूख कर रहे हैं। मनरेगा ने भी स्थानांतरित कृषि पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को कम करने में प्रभाव डाला है।
  • अनाज और अन्य बुनियादी खाद्य पदार्थों तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को विस्तारित करके संक्रमण और परिवर्तन के दौरान झूम कृषि में शामिल समुदायों के खाद्य और पोषण सुरक्षा के मुद्दे पर भी इस रिपोर्ट में चर्चा की गई है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, “यह कार्य पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से स्थापित और अच्छी तरह से प्रदर्शन करने वाले स्वयं सहायता समूहों के संघों को स्थापित करके किया जा सकता है।”
  • पहले झूम कृषक परती भूमि पर 10-12 साल बाद लौटते थे, अब वे 3-5 साल में लौट रहे हैं। इसने मिट्टी की गुणवत्ता पर असर डाला है।
  • इस प्रकाशन ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानांतरित कृषि की परती भूमि को कानूनी मान्यता दी जानी चाहिये और इसे परती पुनरुद्धार के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिये तथा साख सुविधाओं को उन लोगों तक विस्तारित किया जाना चाहिये जो कि स्थानांतरित कृषि करते हैं।

स्थानांतरित कृषि या झूम कृषि क्या है? 

  • झूम कृषि के तहत पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है| इसके बाद साफ की गई भूमि की पुराने उपकरणों (लकड़ी के हलों आदि) से जुताई करके बीज बो दिये जाते हैं। फसल पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर होती है और उत्पादन बहुत कम हो पाता है।
  • कुछ वर्षों (प्रायः दो या तीन वर्ष) तक जब तक मृदा में उर्वरता बनी रहती है, इस भूमि पर खेती की जाती है। इसके पश्चात् इस भूमि को छोड़ दिया जाता है, जिस पर पुनः पेड़-पौधे उग आते हैं। अब अन्यत्र वन भूमि को साफ करके कृषि के लिये नई भूमि प्राप्त की जाती है और उस पर भी कुछ ही वर्ष तक खेती की जाती है। इस प्रकार झूम कृषि  स्थानानंतरणशील कृषि है, जिसमें थोड़े-थोड़े समयांतराल पर खेत बदलते रहते हैं।

 

विश्व आर्थिक मंच ने जारी की ‘द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018’ रिपोर्ट 

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र–3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन। 
(खंड- 13 : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो- प्रौद्योगिकी, बायो- प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता)

Jobs Report

चर्चा में क्यों

तकनीकी में उन्नयन और नवाचार के साथ ही मानव कौशल से जुड़े कामों में मशीनों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। हाल ही में विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ‘द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018’ में यह दावा किया गया है कि 2025 तक आधे से अधिक नौकरियों पर मशीनों का कब्ज़ा होगा। स्वचालित रोबोटों के इस्तेमाल से काम का स्वरुप तथा मानव श्रम का तरीका भी बदल जाएगा। विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने कामों के मशीनीकरण की रफ़्तार तथा उसमें आने वाले बदलाव का विश्लेषण करते हुए यह अनुमान लगाया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • ‘द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018’ रिपोर्ट में उद्योग क्षेत्रों की विस्तृत श्रृंखला से 300 से अधिक वैश्विक कंपनियों को शामिल किया गया है।
  • इस सर्वे में 1.5 करोड़ से अधिक कर्मचारी और 20 विकसित तथा उभरती अर्थव्यवस्थाएँ शामिल थीं जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 70 प्रतिशत धारण करती हैं।
  • वर्तमान में कुल कार्य का 71 फ़ीसदी हिस्सा मानव श्रम द्वारा होता है।
  • 2022 तक आते-आते यह हिस्सा 58 तक रह जाएगा, वहीं 2025 तक यह हिस्सेदारी 48 पर सिमट जाएगी।
  • विश्व आर्थिक मंच ने अपनी रिपोर्ट ‘द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018’ में यह दावा किया है।
  • नौकरियों में व्यापक स्तर पर छटनी किये जाने के बावजूद कंप्यूटर प्रोग्राम वाली मशीनें, रोबोट मानव रोज़गार पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
  • चूँकि इसी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रोबोट क्रांति यानी ऑटोमेशन की इस प्रक्रिया के दौरान अगले पाँच सालों में 5 करोड़ 80 लाख नई नौकरियों का सृजन होगा।

चुनौतियाँ क्या हैं?

  • एक तरफ रोज़गार के अवसरों में सकारात्मक वृद्धि होने का अनुमान है तो वहीं दूसरी तरफ, इससे मानव श्रम की नई भूमिकाओं की गुणवत्ता, स्थान, स्वरुप और स्थायित्व में महत्त्वपूर्ण बदलाव आएंगे।
  • कंप्यूटर प्रोग्राम वाली मशीनों, रोबोटों की गति के साथ तालमेल बिठाते हुए मानव श्रम के कौशल को निखारना होगा।
  • यह वाकई आलोचनात्मक है कि ज़्यादातर उद्योग अपने मौजूदा मानव संसाधन के कौशल को विकसित करने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते हैं।
  • ऐसे उद्योग जो गतिशील, औरों से अलग तथा प्रतिस्पर्द्धी बने रहना चाहते हैं उन्हें अपने मानव संसाधनों में भी निवेश करना ही होगा।
  • मशीनी औद्योगिक क्रांति के इस चरण में मानव संसाधन में निवेश करना आर्थिक तथा नैतिक आधारों पर अनिवार्य है।

आगे की राह

सबसे पहले हमें रोबोट क्रांति के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रभावों के संबंध में एक समग्र अध्ययन करना होगा। लेकिन एक ही दशक में मध्य देश का एक बड़ा तबका नौकरियों से हाथ धो बैठेगा। अतः ऑटोमेशन को लेकर सरकार को सतर्क रहना होगा।  मशीनीकरण के माध्यम से आए बदलावों से सर्वाधिक प्रभावित वे समूह होते हैं जो अपने कौशल क्षमता में निश्चित समय के भीतर आवश्यक सुधार लाने में असमर्थ होते हैं। अतः सरकार तथा उद्योगों को चाहिये कि ऐसे लोगों को प्रशिक्षण के लिये पर्याप्त समय के साथ-साथ संसाधन भी उपलब्ध कराए।  तकनीकों के इस बदलते दौर में ज़रूरत इस बात की है कि विशेषज्ञतापूर्ण कार्यों के लिये लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाए और इसके लिये अवसंरचना का भी विकास किया जाए।