UPSC DAILY CURRENT 20-09-2018

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हाल ही में परमाणु ऊर्जा आयोग का प्रमुख किसे बनाया गया है?

A) अनिंदो मजूमदार
B) कमलेश नीलकंठ व्यास
C) के. सिवान
D) एस. पी. वैद

उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • केंद्र ने कमलेश नीलकंठ व्यास को परमाणु ऊर्जा विभाग के नए सचिव और 3 मई, 2021 तक परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। वर्तमान में कमलेश नीलकंठ व्यास भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), मुंबई के निदेशक हैं। वे प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक शेखर बसु का स्थान लेंगे। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 64 वर्ष की आयु तक इनकी नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। व्यास ने रिएक्टर इंजीनियरिंग डिवीजन में अपना करियर शुरू करने के बाद परमाणु ईंधन के डिज़ाइन और विश्लेषण पर बड़े पैमाने पर काम किया है। इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियर्स के अध्येता रहे व्यास ने होमी भाभा विज्ञान और प्रौद्योगिकी पुरस्कार समेत कई पुरस्कार जीते हैं।
[2]

सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. वर्ष 1978 में मेनका गांधी बनाम संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के मौलिक ढाँचे के सिद्धांत को पारित किया।
  2. वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय मौलिक अधिकारों से संबंधित मामलों के लिये एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण बना।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • मेनका गांधी बनाम संघ 1978 : वर्ष 1977 में मेनका गांधी (वर्तमान महिला और बाल विकास मंत्री) का पासपोर्ट तत्कालीन सत्तारूढ़ जनता पार्टी सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया था। इसके जवाब में उन्होंने सरकार के आदेश को चुनौती देने के लिये सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। हालाँकि, कोर्ट ने इस मामले में सरकार का पक्ष न लेते हुए एक अहम फैसला सुनाया। यह निर्णय सात न्यायाधीशीय खंडपीठ द्वारा किया गया, जिसमें इस खंडपीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को दोहराया गया, जिससे यह फैसला मौलिक अधिकारों से संबंधित मामलों के लिये एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण बना। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • केशवानंद भारती मामला 1973 : वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 13 जजों की अब तक की सबसे बड़ी संविधान पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि भारत में संसद नहीं बल्कि संविधान सर्वोच्च है। साथ ही, न्यायपालिका ने टकराव की स्थिति को खत्म करने के लिये संविधान के मौलिक ढाँचे के सिद्धांत को भी पारित कर दिया। इसमें कहा गया कि संसद ऐसा कोई संशोधन नहीं कर सकती है जो संविधान के मौलिक ढाँचे को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित करता हो। न्यायिक पुनरावलोकन के अधिकार के तहत न्यायपालिका संसद द्वारा किये गए संशोधन की जाँच संविधान के मूल ढाँचे के आलोक में करने के लिये स्वतंत्र है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
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अखिल भारतीय पेंशन अदालत से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा ‘पेंशन अदालत’ की शुरुआत की गई।
  2. पेंशन अदालतों को विभिन्न मामलों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्‍याण विभाग द्वारा ‘पेंशन अदालत’ की शुरुआत की गई। इसके माध्यम से पेंशनभोगियों को ‘जीवन निर्वाह में सुगमता’ का अधिकार सुनिश्चित करने का कार्य किया गया है। वस्तुतः इसकी सहायता से पेंशनभोगियों को अपनी शिकायतों के निवारण के लिये बाधा मुक्‍त प्रशासनिक प्रणाली सुलभ कराए जाने का प्रयास किया गया है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • पेंशन अदालतों को विभिन्न मामलों जैसे – असंतुष्ट पेंशनभोगी, संबंधित विभाग, बैंक या CGHS (Central Government Health Scheme) प्रतिनिधि,अर्थात् जहाँ भी प्रासंगिक हो, को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, ताकि संबंधित मामलों का मौजूदा नियमों के भीतर निपटारा किया जा सके। अतः कथन 2 सही है।
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सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) एक कंप्यूटर उपकरण है जिसमें मांग के आधार पर ऑडियो और वीडियो उपलब्ध कराने वाला विशेष एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है।
  2. इसे एक विशेष इंटरनेट सेवा प्रदाता या डेटा कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है।
  3. कोई भी उपयोगकर्त्ता किसी भी स्मार्ट डिवाइस के माध्यम से वाई-फाई के साथ कनेक्ट हो सकता है और उपलब्ध जानकारी को मुफ्त में प्राप्त कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तर : (c)
व्याख्या :

  • इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सुशासन के लिये सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) लॉन्च किया है। सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) एक कंप्यूटर उपकरण है जिसमें मांग के आधार पर ऑडियो और वीडियो उपलब्ध कराने वाला विशेष एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है। कम लागत वाली यह किफायती प्रणाली शक्तिशाली और ऊर्जा कुशल मल्टीकोर प्रोसेसर वाले सिंगल बोर्ड कंप्यूटर के साथ तैयार की गई है। अतः कथन 1 सही है।
  • इसे किसी विशेष इंटरनेट सेवा प्रदाता या डेटा कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं है। इसमें ऑफलाइन रहने की स्थिति में वीडियो देखने या डाउनलोड करने के लिये टेक्स्ट प्रदर्शित करने, तस्वीरें देखने, वीडियो स्ट्रीमिंग, ई-ब्रोशर जैसी सामान्य विशेषताओं को शामिल किया गया है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
  • CIMS को स्थापित करना काफी सरल है, इसे संसद, (मौजूदा राज्यसभा, सदस्यों के विवरण), शिक्षण संस्थानों (ई-बुक्स, समय सारिणी, दिन की खबरों, सूचनाओं), रेलवे स्टेशनों (ट्रेन चलने की जानकारी, स्टेशन लेआउट मैपिंग), अस्पतालों (ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, रोगियों के रिकार्ड) जैसी जगहों पर आसानी से संचालित किया जा सकता है। कोई भी उपयोगकर्त्ता किसी भी स्मार्ट डिवाइस के माध्यम से वाई-फाई के साथ कनेक्ट हो सकता है और उपलब्ध जानकारी को मुफ्त में प्राप्त कर सकता है। अतः कथन 3 सही है।
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साइक्लोन -30 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. साइक्लोन -30, भारत का सबसे बड़ा साइक्लोट्रॉन है।
  2. यह केंद्र देश भर के लिये और विशेष रूप से पूर्वी भारत के लिये किफायती रेडियो आइसोटोप और संबंधित रेडियो फार्मास्यूटिकल्स उपलब्ध कराएगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (c)
व्याख्या :

  • साइक्लोन -30, भारत का सबसे बड़ा साइक्लोट्रॉन है। जैसे ही 30 एमवी बीम पहली बार फैराडे कप (Faraday Cup) तक पहुँचने में सक्षम हुआ, उसी के साथ यह इस माह (सितंबर) से परिचालित हो गया। कैंसर देखभाल में नैदानिक और चिकित्सकीय उपयोग हेतु साइक्लोट्रॉन का उपयोग रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करने के लिये किया जाता है। यह केंद्र सहायक परमाणु प्रणालियों और नियामक मंज़ूरी प्राप्त होने के बाद अगले वर्ष के मध्य तक नियमित रूप से उत्पादन कार्य शुरू कर देगा। अतः कथन 1 सही है।
  • परिवर्तनीय ऊर्जा साइक्लोट्रॉन केंद्र (Variable Energy Cyclotron Centre-VECC), कोलकाता में स्थित साइक्लोन -30 परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy – DAE) की एक इकाई है, इसके अंतर्गत बहुत-सी अद्वितीय विशेषताएँ निहित हैं। Cyclone-30 (commissioning re-emphasises the capability of Indian scientists and engineers to deliver at the highest level of science and technology) यह केंद्र देश भर के लिये और विशेष रूप से पूर्वी भारत के लिये किफायती रेडियो आइसोटोप और संबंधित रेडियो फार्मास्यूटिकल्स उपलब्ध कराएगा। इसके साथ-साथ यह जर्मेनियम-68/गैलियम-68 जनरेटर के लिये स्व:स्थाने  (in-situ) पैलेडियम-103 एवं गैलियम-68 आइसोटोप की उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि करेगा। इन आइसोटोपस का इस्तेमाल स्तन कैंसर के निदान और पौरुष ग्रंथि कैंसर (prostate cancer) के उपचार के लिये किया जाता है। अतः कथन 2 सही है।

 

अखिल भारतीय पेंशन अदालत
(All India Pension Adalat)

pension-adalat

  • भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्‍याण विभाग द्वारा किया ‘पेंशन अदालत’ की शुरुआत की गई।
  • इसके साथ विभागों के लिये संस्‍थागत स्‍मृति को संयोजित करने के कार्य में उल्‍लेखनीय योगदान देने के लिये 6 पेंशनभोगियों को ‘अनुभव’ पुरस्‍कार, 2018 से भी सम्मानित किया गया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आव्हान पर वर्ष 2015 में ‘अनुभव योजना’ की शुरुआत की गई थी।
  • इसके माध्यम से पेंशनभोगियों को ‘जीवन निर्वाह में सुगमता’ का अधिकार सुनिश्चित करने का कार्य किया गया है। वस्तुतः इसकी सहायता से पेंशनभोगियों को अपनी शिकायतों के निवारण के लिये बाधा मुक्‍त प्रशासनिक प्रणाली सुलभ कराए जाने का प्रयास किया गया है।

उद्देश्य

  • पेंशन अदालतों को विभिन्न मामलों जैसे – असंतुष्ट पेंशनभोगी, संबंधित विभाग, बैंक या CGHS (Central Government Health Scheme) प्रतिनिधि, अर्थात् जहाँ भी प्रासंगिक हो, को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, ताकि संबंधित मामलों का मौजूदा नियमों के भीतर निपटारा किया जा सके।
  • पेंशन अदालत के अलावा, अगले 6 महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पूर्व-सेवानिवृत्ति परामर्श (Pre-Retirement Counselling – PRC) प्रदान करने का कार्य भी किया जाता है।
  • PRC कार्यशाला का उद्देश्य न केवल सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों में उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना है, बल्कि उन्हें चिकित्सा सुविधाओं और स्वैच्छिक गतिविधियों में भागीदारी सहित अग्रिम योजना के विषय में शिक्षित करना भी है।
सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर
(C-DAC Information Media Server)

C-DAC

  • इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सुशासन के लिये सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) लॉन्च किया है।
  • सी-डैक सूचना मीडिया सर्वर (CIMS) एक कंप्यूटर उपकरण है जिसमें मांग के आधार पर ऑडियो और वीडियो उपलब्ध कराने वाला विशेष एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है।
  • कम लागत वाली यह किफायती प्रणाली शक्तिशाली और ऊर्जा कुशल मल्टीकोर प्रोसेसर वाले सिंगल बोर्ड कंप्यूटर के साथ तैयार की गई है।
  • इसे किसी विशेष इंटरनेट सेवा प्रदाता या डेटा कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं है। इसमें ऑफलाइन रहने की स्थिति में वीडियो देखने या डाउनलोड करने के लिये टेक्स्ट प्रदर्शित करने, तस्वीरें देखने, वीडियो स्ट्रीमिंग, ई-ब्रोशर जैसी सामान्य विशेषताओं को शामिल किया गया है।
  • CIMS को स्थापित करना काफी सरल है, इसे संसद, (मौजूदा राज्यसभा, सदस्यों के विवरण), शिक्षण संस्थानों (ई-बुक्स, समय सारिणी, दिन की खबरों, सूचनाओं), रेलवे स्टेशनों (ट्रेन चलने की जानकारी, स्टेशन लेआउट मैपिंग), अस्पतालों (ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, रोगियों के रिकार्ड) जैसी जगहों पर आसानी से संचालित किया जा सकता है।
  • कोई भी उपयोगकर्त्ता किसी भी स्मार्ट डिवाइस के माध्यम से वाई-फाई के साथ कनेक्ट हो सकता है और उपलब्ध जानकारी को मुफ्त में प्राप्त कर सकता है।
परिवर्तनीय ऊर्जा साइक्लोट्रॉन केंद्र
(Variable Energy Cyclotron Centre)

VECC

  • कैंसर देखभाल में नैदानिक और चिकित्सकीय उपयोग हेतु साइक्लोट्रॉन का उपयोग रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करने के लिये किया जाता है।
  • साइक्लोन -30, भारत का सबसे बड़ा साइक्लोट्रॉन है। जैसे ही 30 एमवी बीम पहली बार फैराडे कप (Faraday Cup) तक पहुँचने में सक्षम होगा, उसी के साथ यह इस माह (सितंबर) से परिचालित हो गया।
  • इसके बाद इस केंद्र के माध्यम से बीम का उपयोग 18 एफ (फ्लूराइन -18 आइसोटोप) के उत्पादन के लिये किया गया।
  • आपकी जानकारी के लिये बता दें कि 18 FlFluorodeoxyglucose (FDG), बीआरआईटी (Board of Radiation & Isotope Technology – BRIT) द्वारा उपयोग किये जाने वाला एक रेडियो-फार्मास्यूटिकल है।
  • यह केंद्र सहायक परमाणु प्रणालियों और नियामक मंज़ूरी प्राप्त होने के बाद अगले वर्ष के मध्य तक नियमित रूप से उत्पादन कार्य शुरू कर देगा।
  • VECC, कोलकाता में स्थित साइक्लोन -30 परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy – DAE) की एक इकाई है, इसके अंतर्गत बहुत-सी अद्वितीय विशेषताएँ निहित हैं।
  • Cyclone-30 (commissioning re-emphasises the capability of Indian scientists and engineers to deliver at the highest level of science and technology) यह केंद्र देश भर के लिये और विशेष रूप से पूर्वी भारत के लिये किफायती रेडियो आइसोटोप और संबंधित रेडियो फार्मास्यूटिकल्स उपलब्ध कराएगा।
  • इसके साथ-साथ यह जर्मेनियम-68/गैलियम-68 जनरेटर के लिये स्व:स्थाने  (in-situ) पैलेडियम-103 एवं गैलियम-68 आइसोटोप की उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि करेगा।
  • इन आइसोटोपस का इस्तेमाल स्तन कैंसर के निदान और पौरुष ग्रंथि कैंसर (prostate cancer) के उपचार के लिये किया जाता है।
  • साइक्लोन -30 के परिचालन से जहाँ एक ओर भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की क्षमता में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर, देश को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्चतम स्तर पर पहुँचने में भी सहायता मिलेगी।
ई-सहज पोर्टल

देश के कुछ विशेष संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी मंज़ूरी को आसान करने के लिये सरकार ने ‘ई-सहज’ नमक एक पोर्टल  शुरू किया है।

  • इससे सुरक्षा मंज़ूरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा तेज़ी आएगी।
  • कुछ विशेष संवेदनशील क्षेत्रों में कंपनियों, बोलीदाताओं और व्यक्तियों को लाइसेंस/परमिट/मंज़ूरी/कॉन्ट्रैक्ट आदि देने से पहले सुरक्षा संबंधी मंज़ूरियाँ प्रदान करने हेतु गृह मंत्रालय एक नोडल मंत्रालय है।

उद्देश्य

  • राष्ट्रीय सुरक्षा मंज़ूरी का उद्देश्य आर्थिक खतरों सहित संभावित सुरक्षा खतरों का मूल्यांकन करना और प्रमुख क्षेत्रों में निवेश और परियोजना प्रस्तावों को मंज़ूरी देने से पहले जोखिम का मूल्यांकन प्रदान करना है।
  • इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं को पूरा करना और व्यापार में आसानी लाने तथा देश में निवेश को बढ़ावा देने के बीच स्वस्थ संतुलन स्थापित करना है।

 

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे प्रभावशाली निर्णय

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध
(खंड- 01 : भारतीय संविधान–ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना )

Judgements

चर्चा में क्यों?

भारत के सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आम कानून व्यवस्था में न्याय देने के लिये आधार का कार्य करने के साथ ही, एक उदाहरण स्थापित करने का भी कार्य करता है। इसी संदर्भ में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के मामले और धारा 377 पर दिये गए फैसले को निस्संदेह इतिहास में ऐतिहासिक निर्णय के रूप में गिना जाएगा और यह भविष्य के कई मामलों को प्रभावित भी करेगा।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख प्रगतिशील निर्णय

  • मेनका गांधी मामले ने 1970 के दशक के अंत में कानूनी न्यायशास्त्र में बदलाव का जिक्र किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अधिक सक्रिय भूमिका निभाई और आपातकाल के बाद अपनी वैधता पर ज़ोर देने की कोशिश की।
मेनका गांधी बनाम संघ 1978

  • वर्ष 1977 में मेनका गांधी (वर्तमान महिला और बाल विकास मंत्री) का पासपोर्ट वर्तमान सत्तारूढ़ जनता पार्टी सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया था।
  • इसके जवाब में उन्होंने सरकार के आदेश को चुनौती देने के लिये सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की।
  • हालाँकि, कोर्ट ने इस मामले में सरकार का पक्ष न लेते हुए एक अहम फैसला सुनाया।
  • यह निर्णय सात न्यायाधीशीय खंडपीठ द्वारा किया गया, जिसमें इस खंडपीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को दोहराया गया, जिससे यह फैसला मौलिक अधिकारों से संबंधित मामलों के लिये एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण बना।

केशवानंद भारती मामला 1973

  • वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 13 जजों की अब तक की सबसे बड़ी संविधान पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि भारत में संसद नहीं बल्कि संविधान सर्वोच्च है।
  • साथ ही, न्यायपालिका ने टकराव की स्थिति को खत्म करने के लिये संविधान के मौलिक ढाँचे के सिद्धांत को भी पारित कर दिया। इसमें कहा गया कि संसद ऐसा कोई संशोधन नहीं कर सकती है जो संविधान के मौलिक ढाँचे को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित करता हो।
  • न्यायिक पुनरावलोकन के अधिकार के तहत न्यायपालिका संसद द्वारा किये गए संशोधन की जाँच संविधान के मूल ढाँचे के आलोक में करने के लिये स्वतंत्र है।
  • इसी तरह, केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने संसद को अपनी ‘मूल संरचना’ को बदलने से रोका, जो भारतीय राज्य को अपने कई दक्षिण एशियाई समकक्षों (चाहे अधिनायकवादी शासन हो या अन्य अतिरिक्त संवैधानिक माध्यमों से) के समान गिरने से बचाने के लिये व्यापक रूप से जाना जाता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट एक अभिलेखीय अदालत होगी और इस तरह की अदालत को सभी शक्तियाँ प्राप्त होंगी, जिसमें स्वयं की अवमानना ​​के लिये दंडित करने की शक्ति भी शामिल है।
  • अभिलेख न्यायालय से आशय उस उच्च न्यायालय से है, जिसके ‘निर्णय’ सदा के लिये लेखबद्ध होते हैं और जिसके अभिलेखों का प्रमाणित मूल्य होता है।
  • उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में प्रक्रियात्मक मुद्दों से निपटने के लिये सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित उदाहरण महत्त्वपूर्ण हैं।