UPSC DAILY CURRENT 21-07-2018

[1]

हाल ही में चर्चा में रही गेंगेटिक डॉल्फिन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. विक्रमशिला गेंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य भारत के राष्ट्रीय जलीय जीवों के लिये एकमात्र अभयारण्य है।
  2. मालवाहक जहाजों का आवागमन तथा निष्कर्षण संबंधी गतिविधियों को सुचारु रूप से नियंत्रित किये जाने के कारण  इनकी संख्या में वृद्धि दर्ज़  की गई है।
  3. इसे IUCN की संकटग्रस्त (ENDANGERED) श्रेणी में स्थान प्राप्त है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर: (B)

[2]

उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं को केरल के सबरीमाला मंदिर में बगैर किसी भेदभाव के पुरुषों की तरह पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान करने का फैसला सुनाया।
उपर्युक्त फैसले को किस अनुच्छेद के तहत संवैधानिक अधिकार घोषित किया गया है ?

A) अनुच्छेद 14
B) अनुच्छेद 17
C) अनुच्छेद 25
D) अनुच्छेद 26
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उत्तर: (C)

[3]

यह फोलिडोटा गण का स्तनधारी प्राणी है तथा अफ्रीका और एशिया में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। भारत में इसे सल्लू सांप भी कहते है। इसके निवास स्थान अंधविश्वासी प्रथाओं के कारण तेजी से नष्ट किये जा रहे हैं। IUCN के अनुसार इन पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में औषधीय गुणों के कारण इनकी तस्करी चर्चा का विषय रही है।
उपर्युक्त विशेषताएं निम्नलिखित में से किस जीव से संबंधित है ?

A) पंगोलिन
B) निलगिरि के लंगूर
C) डोडो पक्षी
D) तेंदुआ
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उत्तर: (A)

[4]

सयनोथीस (Cyanothece) बैक्टीरिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने में सक्षम है।
  2. यह प्रकाश संश्लेषण के लिये क्लोरोफिल बनाने में वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग करता है।
  3. ये बैक्टीरिया श्वसन के माध्यम से प्रकाश संश्लेषण के दौरान अधिकांश ऑक्सीजन को हटाने के बाद सायनोथीस दिन में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के दौरान सूर्य के प्रकाश को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिये ईंधन के रूप में उपयोग करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर: (D)

[5]

अविश्वास प्रस्ताव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?

A) जब लोकसभा में किसी विपक्षी पार्टी को लगता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है या सदन में सरकार विश्वास खो चुकी है तो वह अविश्वास प्रस्ताव लाती है।
B) लोकसभा के प्रक्रि‍या तथा कार्य संचालन नियमावाली के नि‍यम 198(1) से 198(5) तक मंत्रि‍परि‍षद में अवि‍श्‍वास का प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने हेतु प्रक्रि‍या नि‍र्धारि‍त की गई है।
C) यदि राष्ट्रपति अविश्वास प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दे, तो लोकसभा में पेश करने के 10 दिनों के अदंर इस पर चर्चा की जानी ज़रूरी है।
D) प्रस्ताव के पक्ष में कम-से-कम 50 सदस्यों का होना आवश्यक है। यदि इतने सांसद न हों तो अध्यक्ष प्रस्ताव रखने की अनुमति नहीं देते।
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उत्तर: (C)

 

FRDI विधेयक की विफलता : नीति-निर्माण में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

FRDI Bill

संदर्भ

वित्तीय समाधान और जमा राशि बीमा विधेयक (FRDI), 2017 पर केंद्र द्वारा अचानक लिया गया यू-टर्न नीति निर्माण में सावधानी बरतने की आवश्यकता को दर्शाता है। विधेयक, जिसे स्पष्ट रूप से वित्तीय प्रणाली में सुधार और बैंकों की स्थिति को मज़बूत करने के उद्देश्य से लक्षित किया गया था, को सार्वजनिक प्रतिक्रिया के कारण बीच में ही छोड़ना पड़ा।

नोट : सरकार द्वारा FRDI विधेयक को वापिस लेने के फैसले से संबंधित न्यूज़ 19 जुलाई, 2018 को अपलोड की गई थी। यहाँ हम इस विषय का विश्लेषण करेंगे।

जमा राशि की सुरक्षा को लेकर भयभीत हुआ आम आदमी

  • शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब आम आदमी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमा राशि की सुरक्षा को लेकर भयभीत था। पेंशनभोगी या एक वृद्ध माँ जिसने अपने जीवन भर की जमा पूंजी बैंक में रखी थी आदि जैसे बहुत से लोग इस बारे में सवाल पूछते हुए नज़र आए कि बैंक उनकी जमापूंजी को हड़प लेंगे ।

विधेयक के कारण बैंकों को भी हुआ नुकसान

  • पिछले वर्ष कई जमाकर्त्ताओं ने इस विधेयक के कारण बैंकों से अपनी जमा राशि वापिस ले ली थी।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आँकड़ों के अनुसार, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा पूंजी अप्रैल 2018 में 116.84 लाख करोड़ रुपए से घटकर मई 2018 के अंत तक 116.52 लाख करोड़ हो गई थी।
  • मांग जमा (Demand Deposit) और सावधि जमा (Fixed Deposit) 1,53,000 करोड़ रुपए से गिरकर 1,52,100 करोड़ रुपए हो गई थी।

देश में नकदी की कमी का कारण भी FRDI

  • हालाँकि इन सभी के दर के लिये FRDI विधेयक को पूरी तरह से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है फिर भी यह एक प्रवृत्ति को इंगित कर सकता है।
  • कुछ ही समय पहले पूरे देश में नकदी के संकट की स्थिति दिखाई दी और इस स्थिति को वरिष्ठ बैंकरों ने इस विधेयक के प्रभाव से जोड़ा था।

बैंकों की छवि हुई खराब

  • एक बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो 2016 में बिना किसी पूर्व तयारी के विमुद्रीकरण जैसी विशाल योजना को लागू करना,  ज़रूरतों के अनुसार बैंकों द्वारा ग्राहकों को पर्याप्त नकदी प्रदान करने में असमर्थता और FRDI विधेयक ने निश्चित रूप से बैंकों की छवि को ख़राब किया है तथा इससे बैंकों पर लोगों का विश्वास कम हुआ है।

नीति-निर्माताओं और जनता के बीच संबंधों की विफलता

  • उपरोक्त घटनाएँ नीति-निर्माताओं और आम जनता के बीच संबंधों की पूर्ण विफलता को दर्शाती हैं।
  • यदि सरकार का इरादा सिस्टम को साफ करना था, तो पहले पूर्ण पारदर्शिता के साथ बड़े पैमाने पर संदेश अभियान चलाना चाहिये था लेकिन सरकार इस पूरी प्रक्रिया में चूक गई।
  • प्रस्तावित विधेयक के ‘बेल-इन’  प्रावधान की स्पष्टता में कमी और जमा बीमा क्रेडिट गारंटी अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों पर उत्पन्न भ्रम के कारण भी नुकसान हुआ।
  • इस पूरे घटनाक्रम में आम आदमी सबसे अधिक परेशान था जिसने कई ऐसे प्रश्नों के जवाब तलाशने की कोशिश की जिनके बारे में उसने यह नहीं सोचा था कि कभी ऐसे प्रश्न भी सामने आएंगे।

निष्कर्ष

  • सरकार को जनता के बीच आत्मविश्वास पैदा करने और बिना किसी शोर-शराबे के बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को शुरू करने के लिये और अधिक व्यावहारिक एवं पारदर्शी नीतियाँ लागू करने की आवश्यकता है।

 

बाल विवाह को रद्द करने का मामला कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 : शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-12 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय)
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

WCD

चर्चा में क्यों?

भारत में बाल विवाह समाप्त करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) बाल विवाह को रद्द करने संबंधी कानून में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष पेश करने को तैयार है। वर्तमान में, भारत में 21 साल से कम उम्र के व्यक्ति और 18 साल से कम उम्र की महिला के बीच विवाह को केवल अनुबंधित पक्षों (Contracting Parties) के निवेदन पर शून्यकरणीय (Voidable) घोषित किया जा सकता है।

प्रमुख बिंदु 

  • बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA), 2006,  बाल विवाह को न सिर्फ  अमान्य करता है बल्कि अभिभावक के माध्यम से इसे रद्द करने का विकल्प देता है।
  • मंत्रालय द्वारा कैबिनेट को एक मसौदा भेजा गया है जिसमें बाल विवाह को प्रारंभ से ही शून्य (void) बनाने का प्रस्ताव है|
  • मसौदे में PCMA की धारा 3 में संशोधन का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके तहत वर्तमान में बाल विवाह अनुबंध केवल पक्षों के विकल्प पर ही शून्यकरणीय (voidable) है|
  • यदि कैबिनेट की मंज़ूरी मिलती है, तो कानून में एक असंगति को दूर किया जा सकेगा जिसके संबंध में अक्टूबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद बाल विवाह जारी है| अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 18 साल से कम उम्र की नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बलात्कार माना जाएगा चाहे उसकी सहमति ली गई हो अथवा नहीं|

देश में बाल विवाह की स्थिति 

  • 2014 में यूनिसेफ की रिपोर्ट, महिलाओं के बीच बाल विवाह की उच्च दर के संबंध में भारत को शीर्ष 10 देशों में छठे स्थान पर रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यंत गरीब समुदायों (20 प्रतिशत) में बालिकाओं की शादी की  औसत आयु 15.4 वर्ष थी, जबकि अमीर समुदायों में यह 19.7 वर्ष पाई गई थी।
  • 2011 की जनगणना के आँकड़ों का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 12 मिलियन बाल विवाह दर्ज किये गए हैं जिनमें 21 साल से कम उम्र के 7 मिलियन लड़के और 18 साल से कम उम्र की 5 मिलियन लड़कियाँ हैं|

प्रस्तावित संशोधन और बाल विवाह से संबंधित मुद्दे 

  • PCMA में प्रस्तावित संशोधन भारत में बाल विवाह को समाप्त करने और प्रारंभिक गर्भधारण, यौन हिंसा, और शिक्षा के अधिकार तथा शारीरिक स्वायत्तता से इनकार करने जैसे मुद्दों पर एक लंबा सफर तय करेगा। हालाँकि, यह अभी भी निजी कानूनों के तहत अनुबंधित विवाह के मुद्दे को अनसुलझा छोड़ देता है, जब तक कि ऐसे कानूनों में भी संशोधन नहीं किया जाता है।
  • मिसाल के तौर पर  हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, (हिंदुओं, बौद्धों, सिखों, जैनों के लिये) और मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939  अभी भी बाल विवाह को शून्य (void) नहीं मानते हैं।
  • दोनों कानून केवल तभी एक लड़की की शादी के विघटन की इज़ाज़त देते हैं, जब उसकी शादी 15 साल की उम्र से पहले की गई हो  और वह 18 वर्ष की आयु के बाद शादी को तोड़ने (विघटन) के लिये आवेदन करे।
  • मुस्लिम व्यक्तिगत कानून उन लड़कियों को विवाह तोड़ने की अनुमति देता है जिन्होंने विवाह करने के लिये 15 साल की आयु प्राप्त कर ली हो|
  • भारतीय क्रिश्चियन विवाह अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम दोनों ही बाल विवाह को जारी रखने की अनुमति देने के मामले में पर्याप्त रूप से उदार हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाल विवाह के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। देश में प्रतिदिन 39,000 नाबालिग लड़कियों की शादी होती है। यहाँ तक कि सर्वाधिक साक्षरता वाले राज्य केरल और हिमाचल प्रदेश भी इस बुराई से मुक्त नहीं हैं।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -4 (2015-16) के मुताबिक, भारत में  20 से 24 साल के बीच 26 प्रतिशत महिलाओं का नाबालिग अवस्था में विवाह हुआ।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आँकड़ों से पता चलता है कि 2016 में  पूरे देश में PCMA के तहत मात्र 326 मामले दर्ज किये गए थे।

निष्कर्ष 

  • बेशक मुगल और ब्रिटिश राजशाही के दौर में लड़कियों को बलात्कार एवं अन्य प्रकार के उत्पीडऩ से बचाने के लिये बाल विवाह को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता था परंतु आज हालात बदल चुके हैं और बाल विवाह के दुष्परिणामों को देखते हुए इसे रोकने की आवश्यकता है।