UPSC DAILY CURRENT 24-07-2018

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हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक में 100 रूपये के नोट का पहला प्रारूप जारी किया है जिसमें गुजरात के पाटन में सरस्वती नदी के किनारे स्थित बावड़ी ‘रानी की वाव’का चित्रांकन भी किया गया है। ‘रानी की वाव’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में 2015 में शामिल किया गया है।
  2. इसका निर्माण राजा भोज प्रथम की स्मृति में उनकी पत्नी रानी उदयामति ने करवाया था।
  3. इसमें मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली का उपयोग किया गया है।
  4. इसकी स्थापत्य शैली में धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष चित्रों को उकेरा गया है जो प्राय: साहित्यिक कार्यों का भी संदर्भ प्रदान करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) केवल 3 और 4
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उत्तर : (D)
व्याख्या :

  • 22 जून 2014 को इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल किया गया था।
  • इसका निर्माण सोलंकी साम्राज्य के संस्थापक मुलराज के बेटे भीमदेव प्रथम (AD 1022 से 1063) की स्मृति में सन 1050 ई. में उनकी विधवा रानी उदयामती ने बनवाया था।
  • इसमें मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली का उपयोग किया गया है। तथा इसकी स्थापत्य शैली धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष चित्रों को उकेरा गया है जो प्राय: साहित्यिक कार्यों का भी संदर्भ प्रदान करते हैं।
  • अतः कथन 3 और 4 सही हैं। जबकि 1 और 2 सही नहीं हैं।
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भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधयेक 2018 के के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. इस क़ानून के दायरे में कुल 200 करोड़ रुपए अथवा अधिक मूल्‍य के आर्थिक अपराध आएंगे।
  2. ऐसे अपराधी की बेनामी संपत्ति सहित भारत और विदेशों में मौज़ूद अन्‍य संपत्तियों को जब्‍त करने का भी प्रावधान है।
  3. भगोड़े आर्थिक अपराधी को किसी सिविल दावे का बचाव करने से अपात्र बनाया जाएगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 1 और 2
C) केवल 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर : (A)
व्याख्या: 
 कथन 1 सही नहीं है  क्योंकि इस क़ानून के दायरे में कुल 100 करोड़ रुपए अथवा अधिक मूल्‍य के आर्थिक अपराध आएंगे।

[3]

वित्तीय प्रणाली में सुधार और बैंकों की स्थिति को मज़बूत करने के उद्देश्य से वित्तीय समाधान और जमा राशि बीमा विधेयक (FRDI), 2017 केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया । विधेयक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. किसी वित्तीय सेवा प्रदाता के विफल या दिवालिया होने की स्थिति में यह जमाकर्ता  के हित में समाधान व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
  2. एक समाधान निगम बनाने का भी प्रावधान है।
  3. इसमें पांच चरणों वाला वित्तीय सेहत वर्गीकरण शुरू करके वित्तीय कंपनियों में प्रारंभिक दिवालियेपन का पता लगाने की व्यवस्था की गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर: (D)
व्याख्या:
 उपर्युक्त तीनों कथन सही हैं ।

वर्तमान में भारत में वित्तीय कंपनियों के परिसमापन सहित समाधान के लिए कोई भी व्यापक और एकीकृत क़ानूनी ढांचा या रूपरेखा नहीं है। वित्तीय सेवाप्रदाताओं से जुड़े मामलों के समाधान के लिए अधिकार और जिम्मेदारियां विभिन्न कानूनों के तहत नियामकों ,सरकार और न्यायालयों को दी जाती हैं ,जिससे विशिष्ट समाधान क्षमताओं का विकास नहीं हो पाता है तथा वित्तीय समूहों से जुड़े मामलों का समाधान मुश्किल हो जाता है , अतः वित्तीय प्रणाली में सुधार और बैंकों की स्थिति को मज़बूत करने के उद्देश्य से वित्तीय समाधान और जमा राशि बीमा विधेयक (FRDI), 2017 केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया।  जिसके तहत उपर्युक्त प्रवधानों के अतिरिक्त वित्तीय कंपनी की समूची परिसंपत्तियों एवं देनदारियों अथवा इसके एक हिस्से को किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित करना ,अधिग्रहण,विलय या एकीकरण,संकट से उबारने के उपाय करना …आदि शामिल हैं।

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भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिकों के एक समूह ने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) की मुक्की रेंज में इनकी प्राप्ति की सूचना दी है। संरक्षित वन के कारण पश्चिमी घाट और मध्य भारतीय जंगलों में इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। इनके विषय में अधिक जानकारी न होने के कारण इनका संरक्षण किया जाना कठिन है। IUCN ने इसे लुप्तप्राय श्रेणी (EN) में रखा है।
उपर्युक्त विशेषताएं निम्नलिखित में से किस-से संबंधित हैं?

A) ढोल या रेड डॉग
B) कस्तूरी मृग
C) सफ़ेद गैंडा
D) अजगर
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उत्तर : (A)
व्याख्या:  
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिकों के समूह ने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) की मुक्की रेंज में ढोल या रेड डॉग की प्राप्ति की सूचना दी है। संरक्षित वन के कारण पश्चिमी घाट और मध्य भारतीय जंगलों में इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। इनके विषय में अधिक जानकारी न होने के कारण इनका संरक्षण किया जाना कठिन है। IUCN ने इसे लुप्तप्राय श्रेणी (EN) में रखा है।

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बेहदीनखलम के संदर्भ  में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह अरुणाचल की जयंतिया पहाड़ियों पर निवास करने वाली जनजातियों द्वारा मनाया जाता है
  2. यह नानार जनजातियों के मध्य मनाया जाने वाला धार्मिक त्योहार है।
  3. यह बुवाई खत्म होने के बाद हर वर्ष मध्य जुलाई में मनाया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
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उत्तर: (B)
व्याख्या: 

  • बेहदीनखलम मेघालय में जयंतिया पहाड़ियों पर निवास करने वाली जनजातियों द्वारा मनाया जाता है।
  • इस उत्सव में पूल ‘एटबाड़’ में 12 रोट या ‘रथ’ का रंगीन प्रदर्शन किया गया।
  • विशेषकर यह पनार जनजातियों के बीच सबसे ज़्यादा मनाया जाने वाला धार्मिक त्यौहार है।
  • यह बुवाई खत्म होने के बाद हर साल मध्य जुलाई में मनाया जाता है।
  • त्योहार दिव्य शक्तियों के लिए अंतिम अभिवादन के साथ समाप्त होता है।

अतः कथन 2 और 3 सही हैं जबकि कथन 1 सही नहीं है

 

सालिकोर्निया (salicornia)

Salicornia

  • सालिकोर्निया एक प्रकार का पौधा है जो मैंग्रोव आर्द्रभूमि में लवणीय (salty), दलदली स्थानों पर उगता है। इसे कम सोडियम कंटेंट के साथ नमक के लिये एक विकल्प माना जाता है।
  • राज्य सरकारों ने इस पौधे की खेती के माध्यम से वाणिज्यिक लाभ लेने के प्रयास तेज़ कर दिये हैं।
  • भारतीय शहरों में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए इजराइल और स्कैंडिनेवियाई देशों से सालिकोर्निया का आयात किया जा रहा है।
  • उच्च रक्तचाप, मधुमेह और गैस्ट्रिक से संबंधित बीमारियों से पीड़ित मरीज़ सालिकोर्निया को सलाद और नमक के रूप में पसंद करते हैं।
जीडीपी डिफ्लेटर

GDP

  • यह मुद्रास्फीति को मापने का एक अधिक व्यापक तरीका है क्योंकि डिफ्लेटर थोक या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के लिये सीमित कमोडिटी बास्केट के मुकाबले अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की पूरी श्रृंखला को शामिल करता है।
  • यह उन वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का अनुपात है जो अर्थव्यवस्था किसी विशेष वर्ष में मौजूदा कीमतों पर आधार वर्ष के दौरान प्रचलित कीमतों के लिये उत्पादन करती है।
  • यह अनुपात आउटपुट में वृद्धि के बजाए उच्च कीमतों के कारण सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की सीमा को दिखाने में मदद करता है।
  • सकल घरेलू उत्पाद की कीमत को डिफ्लेटर वास्तविक जीडीपी और मामूली (nominal) जीडीपी के बीच अंतर के रूप में मापता है।
  • सकल घरेलू उत्पाद मूल्य डिफ्लेटर प्राप्त करने का फार्मूला  : जीडीपी मूल्य डिफ्लेटर = (मामूली सकल घरेलू उत्पाद ÷ वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद) x 100
  • जीडीपी डिफ्लेटर अप-टू-डेट व्यय पैटर्न को दर्शाता है।
  • जीडीपी डिफ्लेटर केवल सकल घरेलू उत्पाद के अनुमान के साथ त्रैमासिक आधार पर उपलब्ध होता है, जबकि सीपीआई और डब्ल्यूपीआई डेटा प्रतिमाह जारी किये जाते हैं।

 

वाटरशेड विकास परियोजनाएँ क्यों पिछड़ रही हैं?

सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन 
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

Watershed Development

चर्चा में क्यों?

संसदीय स्थायी समिति (PSC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का एक महत्त्वपूर्ण घटक वाटरशेड विकास है, जो बुरी तरह से पिछड़ता जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में हुई अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय पर चर्चा की जानी चाहिये थी।

प्रमुख बिंदु 

  • जब यह रिपोर्ट पहली बार जुलाई में पेश की गई थी, तो ग्रामीण विकास को लेकर स्थायी समिति ने कहा था कि 2009 और 2015 के बीच 50,740 करोड़ रुपए की लागत वाली स्वीकृत 8,214 परियोजनाओं में से एक को भी पूरा नहीं किया गया|इस प्रतिक्रिया पर भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने अद्यतन किया था कि 11 राज्यों में 849 परियोजनाएँ अक्टूबर 2017 तक पूरी की गई थीं लेकिन विभाग ने स्वीकार किया कि 1,257 परियोजनाएँ अभी पूरी नहीं की जा सकी हैं|

वाटरशेड परियोजनाओं के विकास में सुस्ती 

  • सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए समिति ने पिछले सप्ताह संसद में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
  • इस योजना के विकास में “सुस्ती” को देखते हुए समिति ने DoLR से आग्रह किया कि “शेष परियोजनाओं को त्वरित गति से पूरा करें|
  • नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (NIRD और PR) के कृषि अध्ययन केंद्र की प्रमुख डॉ. राधिका रानी द्वारा दी गई संक्षिप्त परिभाषा के अनुसार, “यह वर्षा आधारित (rainfed) क्षेत्रों के लिये जल संरक्षण और पुनर्भरण तथा  मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के लिये एकमात्र विकल्प है|”
  • वाटरशेड विकास परियोजना स्थल के भीतर एक रिज की पहचान की जाती है और रोधक बांध, अंतःश्रवण बांध, तालाब तथा चैनल जैसी संरचनाएँ पहाड़ी से घाटी तक बनाई जाती हैं।
  • योजना के दिशा-निर्देशों के मुताबिक परियोजनाओं को पूरा करने में चार से सात साल का समय लगता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मई 2018 के मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी) अधिनियम के तहत पीएमकेएसवाई के साथ वाटरशेड घटक को जल और भूमि प्रबंधन परियोजनाओं के साथ लागू किया गया है।
  • लगभग 78% लाभार्थियों ने वाटर टेबल में वृद्धि, जबकि 66% ने चारे की बेहतर उपलब्धता से लाभान्वित होने की सूचना दी|
  • दुर्भाग्यवश, ऐसे दीर्घकालिक परिणाम “तुरंत नहीं दिखाई दे रहे हैं| केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न 90:10 को 2016 में 60:40 किये जाने से भी इसमें सुस्ती देखी गई|

समन्वय में देरी

  • 2015 से यह कार्यक्रम अभिसरण मोड में रहा है और यह ज़मीनी स्तर पर चुनौतीपूर्ण है| इसमें DoLR और मनरेगा के अलावा कृषि मंत्रालय, पशु संसाधन और पशुपालन तथा मत्स्यपालन विभाग सहित  सभी की भूमिका होती है और यही कारण है ज़मीनी स्तर पर समन्वय में समय लगता है|
  • अभिसरण का विचार अच्छा है लेकिन व्यावहारिक रूप से  सरकारी विभाग अलग-अलग ढंग से काम करते हैं| भारी सरकारी निवेश के बावजूद वाटरशेड विकास के लाभ लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो रहे हैं| इसके लिये भौतिक संरचनाएँ तो बनाई जा सकती हैं किंतु शासकीय संरचनाएँ गायब हैं।
  • जब वाटरशेड प्रबंधन परियोजनाओं के परिणामस्वरूप भूजल तालिका बढ़ जाती है, तो क्षेत्र के किसान जल गहन फसल जैसे- गन्ना, उगाने लगते हैं और भूमिगत जल की निकासी करने लगते हैं।
  • एक परियोजना को सरकार अपनी एजेंसियों या एनजीओ के माध्यम से कार्यान्वित कर सकती है, लेकिन परियोजना के समाप्त होने के बाद इसे बनाए रखने की ज़िम्मेदारी किसकी है?
  • यदि स्थानीय पंचायती राज नेतृत्व और वाटरशेड उपयोगकर्त्ता संघों को मज़बूत और सशक्त नहीं किया जाता है तो कोई भी लाभ केवल आवर्ती और अल्पकालिक होगा|

 

कोयला ब्लॉकों का मूल्य निर्धारण करने के लिये सूचकांक

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)
(खंड-9 : बुनियादी ढाँचा : ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।)

coal-blocks

संदर्भ

वर्ष 2017 में सरकार ने कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया की जाँच करने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। हाल ही में इस समिति ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं जिसमें कोयला ब्लॉकों की वर्तमान नीलामी प्रक्रिया में बड़े बदलाव का सुझाव दिया गया है।

चार सिद्धांतों पर आधारित हैं सिफारिशें
समिति द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशें चार सिद्धांतों पर निर्भर हैं –

  • पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना (ensuring transparency and fairness)
  • समान शेयर (equity)
  • कोयला ब्लॉक का शीघ्र विकास (early development of coal blocks)
  • सिफारिशों के कार्यान्वयन में सहजता (simplicity of implementation of the recommendations)

प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य

  • बोलीदाताओं की संख्या में लोच (flexibility) लाना,
  • कार्ययोजना को पूरा करने में चूक होने पर जुर्माना (और बैंक गारंटी की निरस्तता),
  • परियोजना निष्पादन  (project execution)
  • बाज़ार में कोयले को बेचने के लिये सीमित संख्या में खनिकों को छूट देना।

समिति की सिफारिशें

  • पैनल ने ब्लॉक के मूल्य और राज्यों के साथ राजस्व-साझा मॉडल का निर्धारण करने के लिये कोयला इंडेक्स विकसित करने की सिफारिश की है। वर्तमान में मूल्यांकन कोल इंडिया लिमिटेड की अधिसूचित कीमत के आधार पर किया जाता है।
  • यदि बोलीदाताओं की संख्या तीन से कम हो तो ऐसी स्थिति में समिति ने नीलामी रद्द करने की वर्तमान प्रणाली को समाप्त करने का सुझाव दिया है। समिति का कहना है कि बोली लगाने योग्य पात्र बोलीदाताओं को खोजने में असफल होने पर एकल बोली स्वीकार की जानी चाहिये, बशर्ते प्रस्तावित मूल्य आरक्षित मूल्य के मानदंडों के अनुसार हो।
  • उल्लेखनीय है कि पिछली नीलामी में अधिकांश ब्लॉकों को आवंटित नहीं किया जा सका क्योंकि पात्र बोलीदाताओं की संख्या तीन से कम थी।

वर्तमान प्रणाली को समाप्त करना क्यों आवश्यक है? 

  • यदि प्रस्तावित सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है तो यह मौजूदा प्रणाली में एक व्यापक बदलाव को प्रदर्शित करेगा। उल्लेखनीय हैं कि मौज़ूदा प्रणाली की शुरुआत 204 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द होने के बाद की गई थी।
  • वर्तमान प्रक्रिया लागू होने के बाद बोलीदाताओं ने कोयला ब्लॉकों की को खरीदने में कोई रूचि नहीं दिखाई।
  • यहाँ तक कि जिन कंपनियों ने ब्लॉक ख़रीदे भी उन्होंने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये खानों का विकास करने की बजाय कोयले के आयात को अधिक महत्त्व दिया क्योंकि यह कोयला ब्लॉको का विकास करने की तुलना में अधिक सस्ता था।
  • इसके बाद इन ब्लॉकों को खरीदने वाला कोई नहीं था जिसके चलते सरकार को इस पर पुनर्विचार करने के लिये मजबूर होना पड़ा।

समिति का गठन

  • विशेषज्ञों की समिति जिसका गठन “वर्तमान नीलामी प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों और परिवर्तनों की सिफारिश’ पर रिपोर्ट देने के लिये किया गया था, की अध्यक्षता प्रत्यूष सिन्हा ने की तथा इसमें नौकरशाहों, पूर्व नौकरशाहों और एसबीआई तथा यूनियन बैंक के पूर्व अध्यक्ष को शामिल किया गया था।

कोयला ब्लॉकों के विस्तार की गति धीमी होने के कारण

  • नीलामी के दौरान कुछ बोलीदाताओं द्वारा लगाई गईं आक्रामक बोलियाँ (Aggressive Bids),
  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में और साथ ही ई-नीलामी में कोयले की कीमतों में गिरावट,
  • कोयला-ब्लॉक हासिल करने वाली कुछ कंपनियों की कमज़ोर वित्तीय स्थिति।