UPSC DAILY CURRENT 25-01-2019

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सौर ऊर्जा और जल उपचार प्रौद्योगिकी मिशन केंद्रों की शुरुआत

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने चेन्नई स्थित IIT मद्रास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा स्‍थापित तीन प्रमुख केंद्रों की शुरुआत की।

पहला केंद्र

  • इसका नाम DST-IITM Solar Energy Harnessing Centre है।
  • इस केंद्र में सिलिकॉन सोलर सेल जैसी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों की विस्‍तृत श्रृंखला पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा।
  • उच्‍च दक्षता युक्‍त सिलिकॉन सोलर सेल भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल होते हैं।
  • इस केंद्र में नियुक्‍त अनुसंधानकर्त्ताओं के नेटवर्क में IIT मद्रास, IIT गुवाहाटी, अन्‍ना विश्‍वविद्यालय, ICT मुंबई, BHEL और KGDS के वैज्ञानिक शामिल हैं। इस नेटवर्क का भविष्य में और विस्‍तार किया जाएगा।
  • इस केंद्र का उद्देश्‍य ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जिससे पारिस्थितिकी प्रणाली के ज्ञान को मजबूत कर आसानी से आगे बढ़ाया जा सके।
  • यह केंद्र भारत के ऊर्जा परिदृश्‍य में बदलाव लाने में सहायक हो सकता है।
  • इस कंसोर्टियम से मेक इन इंडिया की भावना के अनुसार सतत् आवश्‍यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

दूसरा केंद्र

  • इसका नाम DST-IITM Water-IC for SUTRAM of Easy Water है।
  • इसे अपशिष्‍ट जल प्रबंधन, जल उपचार, सेंसर विकास, चक्रवाती जल प्रबंधन, वितरण और एकत्रीकरण प्रणालियों से संबंधित विभिन्‍न मुद्दों के बारे में समावेशी अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजित करने के उद्देश्‍य से स्‍थापित किया गया है।
  • यह बहुविध संस्‍थागत वर्चुअल केंद्र, अपशिष्‍ट जल उपचार, पुन: उपयोग, तूफान जल प्रबंधन के माध्‍यम से जल संसाधनों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये एक स्‍थायी दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
  • यह केंद्र अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से बहुत अधिक प्रदूषित और जल का अधिक उपयोग करने वाले उद्योगों के साथ ही ग्रामीण और शहरी भारत के लिये पेयजल के पर्याप्‍त, सुरक्षित, विश्‍वसनीय और सतत् स्रोतों को सुनिश्चित करेगा।
  • यह केंद्र समावेशी तरीके से कार्य करने और सहयोग करने के लिये अपशिष्‍ट जल प्रबंधन, जल शोधन, सेंसर विकास और चक्रवाती जल प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्‍न प्रमुख संगठनों के विभिन्‍न समूहों के लिये अवसर उपलब्‍ध कराएगा।

तीसरा केंद्र

  • इसका नाम The Test Bed on Solar Thermal Desalination Solutions है।
  • IITM–Imperial KGDS द्वारा रामनाथपुरम जिले के नारिपयूर में स्थापित इस केंद्र का उद्देश्‍य बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित शुष्‍क तटीय गाँवों में मौजूद जल चुनौतियों से निपटने के लिये तकनीकी समाधान उपलब्‍ध कराना है।
  • इसके विकास में सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए तटीय क्षेत्रों में पीने का पानी उपलब्‍ध कराने के लिये अनुकूल प्रौद्योगिकीय जल समाधान उपलब्‍ध होंगे।

IIT मद्रास

IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) मद्रास उच्च तकनीकी शिक्षा, बुनियादी और प्रायोगिक अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्त्व के अग्रणी संस्थानों में से एक है। 1956 में जर्मनी सरकार ने इसके लिये तकनीकी सहयोग की पेशकश की थी और 1959 से IIT मद्रास ने काम करना शुरू कर दिया था। इसकी स्थापना के लिये पश्चिम जर्मनी के बॉन में इंडो-जर्मन समझौते पर 1959 में हस्ताक्षर किये गए थे। इसका औपचारिक उद्घाटन 1959 में तत्कालीन केंद्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री प्रो. हुमायूँ कबीर ने किया था।


स्रोत: PIB


विविध

2019 में वैश्विक स्वास्थ्य को दस खतरे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दस ऐसी बीमारियों की सूची जारी की है जो 2019 के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकती हैं।

प्रमुख बिंदु

  • वर्तमान में हमारी दुनिया स्वास्थ्य संबंधी ढेरों चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें वैक्सीन से ठीक हो सकने वाली बीमारियों जैसे- खसरा और डिप्थीरिया के प्रकोप से लेकर, दवा-प्रतिरोधी बीमारियाँ, मोटापे की बढ़ती दर और पर्यावरण प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन व मानवीय संकटों से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं।
  • इन्हीं खतरों से निपटने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन 2019 में नई पंच वर्षीय रणनीतिक योजना की शुरुआत करने जा रहा है। यहाँ उन 10 स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा की गई है जो 2019 में WHO और अन्य स्वास्थ्य सहयोगियों के लिये चुनौती साबित हो सकती हैं।

दस खतरनाक बीमारियाँ और भारत की तैयारी

  • वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन (Air pollution, climate change)

♦ वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सबसे गंभीर जोखिम हैं। दुनिया भर में 10 में से 9 लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं।
♦ वायु प्रदूषण के कारण विश्व में समय से पहले होने वाली मौतों की तुलना में भारत में लगभग 26% अधिक मौतें होती हैं।

  • गैर – संचारी रोग (Noncommunicable diseases)

♦ दुनिया भर में 70% से अधिक मौतें (41 मिलियन) गैर-संचारी रोगों, जैसे- मधुमेह, कैंसर और हृदय रोग की वज़ह से होती है।
♦ भारत को ‘दुनिया की मधुमेह राजधानी’ के रूप में जाना जाता है। भारत में वर्तमान में अनुमानित कैंसर रोगियों की संख्या आने वाले 20 वर्षों में लगभग दोगुनी हो जाएगी।

  • वैश्विक इन्फ्लूएंजा महामारी (Global influenza pandemic)

♦ WHO का कहना है कि दुनिया को एक और इन्फ्लूएंजा महामारी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, हम नहीं जानते हैं कि यह कब होगी और यह कितनी गंभीर होगी।
♦ 13 जनवरी, 2019 तक भारत में स्वाइन फ्लू के कुल 1,694 मामले सामने आए, जिसमें 49 लोगों की मृत्यु हो गईं। 2018 में कुल 14,992 मामले सामने आए, जबकि कुल 1,103 लोगों की मृत्यु हुईं।

  • नाजुक, सुभेद्य हालत (Fragile, vulnerable settings)

♦ 1.6 बिलियन से अधिक लोग (वैश्विक आबादी का 22%) उन स्थानों पर निवास करते हैं जहाँ सूखे, अकाल, संघर्ष और जनसंख्या विस्थापन तथा खराब स्वास्थ्य सेवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
♦ भारत के कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आए हालिया संकटों ने कामकाज हेतु आंतरिक प्रवास बढ़ा दिया है। यह प्रवासी आबादी अक्सर बुनियादी देखभाल सुविधाओं की कमी का सामना करते हुए अस्वच्छ परिस्थितियों में रहती है।

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR)

♦ एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध करने की बैक्टीरिया, परजीवी, वायरस और कवकों की क्षमता हमारे लिये खतरा है।
♦ दवाओं का प्रतिरोध लोगों और जानवरों में रोगाणुरोधी के अति प्रयोग की वज़ह से होता है, विशेष रूप से खाद्य उत्पादन के लिये उपयोग किया जाता है, साथ ही साथ पर्यावरण में भी।
♦ AMR किसी पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे के बिना बड़े पैमाने पर दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री का भी परिणाम है।
♦ 2016 में एमडीआर-टीबी (मल्टीड्रग-रेज़िस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) की वैश्विक घटनाओं में भारत, चीन और रूस का 47% हिस्सा था। भारत में एक AMR नीति है लेकिन इसका कार्यान्वयन खराब है।

  • खराब प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (Weak primary healthcare)

♦ कई देशों में पर्याप्त प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा नहीं है। यह उपेक्षा निम्न या मध्यम आय वाले देशों में संसाधनों की कमी के कारण हो सकती है और संभवतः पिछले कुछ दशकों में एकल रोग कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण भी।
♦ भारत में आयुष्मान भारत की प्राथमिक देखभाल शाखा पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत का बीमा पहलू) की तुलना में कम ध्यान दिया गया है।
♦ भारत में 2017 के लिये ग्रामीण स्वास्थ्य आँकड़े दिखाते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के लगभग 8,000 पद खाली हैं (लगभग 27,000 की आवश्यकता के मुकाबले) और कुल 25,000 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से लगभग 2000 पर कोई डॉक्टर नहीं हैं।

  • टीका लगवाने में संकोच (Vaccine hesitancy)

♦ टीके की उपलब्धता के बावजूद टीका लगवाने में संकोच वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से निपटने में हुई प्रगति को पलट सकता है।
♦ टीकाकरण प्रति वर्ष 2-3 मिलियन मौतों को रोकता है और यदि टीकाकरण के वैश्विक कवरेज में सुधार किया जाता है, तो आगे 1.5 मिलियन लोगों को बचाया जा सकता है।

  • डेंगू (Dengue)

♦ डेंगू, मच्छर जनित बीमारी है जो फ्लू जैसे लक्षणों का कारण बनती है और घातक होती है। गंभीर डेंगू से पीड़ित 20% लोगों की मृत्यु हो जाती है।
♦ WHO का अनुमान है कि दुनिया की 40% आबादी पर डेंगू खतरा है जिससे प्रति वर्ष लगभग 390 मिलियन लोग संक्रमित होते हैं।
♦ डेंगू भारत के लिये स्थानिक बीमारी है और इससे पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। 25 नवंबर, 2018 तक भारत में 89,974 डेंगू के मामले देखने को मिले, जबकि 144 लोगों की मृत्यु हो गई।

  • HIV

♦ WHO के अनुसार, हर साल HIV/AIDS की वज़ह से लगभग दस लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। इस महामारी की शुरुआत के बाद से 70 मिलियन से अधिक लोग इस संक्रमण के शिकार हुए हैं, जबकि लगभग 35 मिलियन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। आज, दुनिया भर में लगभग 37 मिलियन लोग HIV से ग्रस्त हैं।
♦ भारत ने एक परीक्षण और उपचार नीति शुरू की है, जिसमें HIV का उपचार हर व्यक्ति का अधिकार है। भारत ने HIV/AIDS अधिनियम, 2018 भी लागू किया है जो HIV/AIDS से पीड़ित लोगों को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

  • इबोला, अन्य उच्च खतरे वाले रोगजनक

♦ WHO ने उन बीमारियों और रोगजनकों की पहचान की है जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल पैदा करने की क्षमता है लेकिन उनके प्रभावी उपचार और टीकों की कमी है।
♦ इस सूची में इबोला, ज़ीका, निपा, मध्य-पूर्व श्वसन सिंड्रोम कोरोनावायरस (MERS-CoV) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) तथा रोग X शामिल हैं, जो किसी अज्ञात महामारी हेतु तैयार रहने के लिये आगाह करते हैं। ऐसी बीमारियाँ किसी गंभीर महामारी का कारण बन सकती हैं।
♦ भारत में इबोला का कोई मामला देखने को नहीं मिला, लेकिन कई भारतीय राज्यों में 2018 के दौरान ज़ीका का प्रकोप देखा गया और निपा संक्रमण से केरल में कम-से-कम 17 लोगों की मृत्यु हुई।


स्रोत- WHO


जीव विज्ञान और पर्यावरण

भारतीय संस्थानों द्वारा नाइट्रोजन प्रदूषण का अध्ययन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom-UK) द्वारा 50 अनुसंधान संस्थानों को नाइट्रोजन प्रदूषण के आकलन और अध्ययन के लिये 20 मिलियन पाउंड का वित्त प्रदान किया गया। इन 50 अनुसंधान संस्थानों में भारत के 18 संस्थान भी शामिल हैं।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यूनाइटेड किंगडम द्वारा दक्षिण एशिया में पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिये नाइट्रोजन प्रदूषण की चुनौती से निपटने हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान कार्यक्रम पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
  • दक्षिण एशियाई नाइट्रोजन हब, यूनाइटेड किंगडम के सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी (Centre for Ecology & Hydrology) के अंतर्गत एक सहयोगी की भूमिका में काम कर रहे हैं, जिसमें ब्रिटेन और दक्षिण एशिया के 50 से अधिक संगठन शामिल किये गए हैं।
  • नाइट्रोजन प्रदूषण के आकलन और अध्ययन हेतु इस वित्त को ग्लोबल चैलेंज रिसर्च फंड (Global Challenges Research Fund-GCRF) के तहत यूनाइटेड किंगडम रिसर्च एंड इनोवेशन (United Kingdom Research and Innovation-UKRRI) द्वारा दिया जाएगा।
  • आने वाले पाँच वर्षों में 19.6 मिलियन पाउंड दिया जाएगा जिसमें URKI से 17.1 मिलियन तथा UK एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों से 2.5 मिलियन पाउंड का सहयोग शामिल है। इसमें दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (SACEP) भी शामिल है।
  • जिसका उद्देश्य विकासशील देशों एवं वैश्विक स्तर पर सतत् विकास में आने वाली चुनौतियों के लिये सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, भागीदारों और गैर सरकारी संगठनों के रचनात्मक और टिकाऊ समाधान विकसित करना है

वित्त प्राप्त भारतीय अनुसंधान संस्थान निम्नलिखित हैं –

  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
  • सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी
  • काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च
  • राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
  • राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान
  • राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी परिसर
  • भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान
  • हिंद महासागर रिम एसोसिएशन, पारिस्थितिक समाधान
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
  • कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी
  • नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट
  • नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी
  • प्रकृति संरक्षण सोसाइटी
  • सस्टेनेबल इंडिया ट्रस्ट
  • ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI)

नाइट्रोजन प्रदूषण

  • नाइट्रोजन – वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस सबसे ज़्यादा मात्रा में पाई जाने वाली एक निष्क्रिय गैस है। परंतु जब यह गैस खेतों, नालों और जैविक कचरे के यौगिकों से निकलती है तो क्रियाशील होकर प्रदूषणकारी हो जाती है, इसका प्रभाव ग्रीन हाउस गैस जैसा भी हो सकता है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा अब तक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और इसके ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया लेकिन नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव के लिये 300 गुना अधिक शक्तिशाली है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • अंतर्राष्ट्रीय नाइट्रोजन पहल (International Nitrogen Initiative-INI) के अध्यक्ष तथा नई दिल्ली में जैव प्रौद्योगिकी के एक प्रोफेसर के अनुसार, नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) की मात्रा वायुमंडल में नगण्य है, लेकिन प्रदूषण से यह बढ़ सकती है और निकट भविष्य में कार्बन डाईऑक्साइड से ज़्यादा खतरनाक हो सकती है।
  • वायु प्रदूषण के साथ-साथ नाइट्रोजन प्रदूषण, जैव विविधता, नदियों एवं समुद्रों के प्रदूषण, ओज़ोन परत , स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आजीविका पर भी बुरा असर डाल सकता है। उदाहरण के लिये –

♦ नाइट्रोजन प्रदूषण सामान्यतः रासायनिक उर्वरकों, पशुओं के मल और जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जन के कारण होता है। अमोनिया और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैसें वायु प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग करती हैं जो वैश्विक स्तर पर श्वसन एवं हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकती हैं।
♦ रासायनिक उर्वरक, नाइट्रेट और उद्योग धंधों से निकलने वाले अवशिष्ट नाइट्रोजनी पदार्थ नदियों और समुद्रों को प्रदूषित करते हैं, जो मनुष्यों, मछलियों, प्रवाल और पौधों के जीवन पर बुरा प्रभाव डालते हैं।


स्रोत – द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

इसरो का 2019 में प्रथम सफल अभियान

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization-ISRO) ने PSLV C-44 द्वारा दो उपग्रह माइक्रोसैट-R एवं कलामसेट को कक्षा में स्थापित करने में सफलता हासिल की।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह PSLV की उत्तम तकनीक को प्रदर्शित करता है, क्योंकि यह सिर्फ दो इंजनों से संलग्न प्रथम प्रक्षेपण था जिसे PSLV-DL, D नाम से संबोधित किया गया।
  • इस प्रक्षेपण से PSLV के सामान्य 6 स्तरीय संलग्न इंजनों (साइड रॉकेट बूस्टर) का विकल्प प्रदान किया गया है जो पहले की तुलना में ज़्यादा पेलोड ले जाने में सक्षम है।

मिशन का महत्त्व

माइक्रोसेट –R

  • माइक्रोसेट-R एक सैन्य इमेजिंग उपग्रह है, जिसका वज़न 130 किलोग्राम है, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organization-DRDO) द्वारा बनाया गया है।
  • इसे निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। ऐसा पहली बार है जब भारतीय उपग्रह को ISRO द्वारा 274 किमी की ऊँचाई से कम कक्षा में रखा गया है।

कलामसैट

  • ISRO ने स्पेस किड्ज इंडिया के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए एक उपग्रह, ‘कलामसैट’ को भी लॉन्च किया है, जिसका वज़न सिर्फ 1.26 किलोग्राम है।
  • कलामसैट दुनिया का सबसे छोटा और सबसे हल्का संचार उपग्रह है।
  • स्पेस किड्ज इंडिया (Space Kidz India) एक ऐसा संगठन है जो शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के लिये नवीन अवधारणाओं को विकसित करने के लिए समर्पित है।

चतुर्थ चरण (PS4) की उपयोगिता

  • उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराने के बाद इसरो ने इस प्रक्षेपण का उपयोग रॉकेट के चतुर्थ चरण की उपयोगिता को प्रदर्शित करने के एक अवसर के रूप में किया।
  • रॉकेट का अंतिम यानि चतुर्थ चरण किसी उपग्रह को उचित गंतव्य तक पहुँचाने के बाद सामान्य रूप से मलबे में बदल जाता है।
  • अब अंतरिक्ष में प्रयोग करने की इच्छुक एजेंसी चौथे चरण का उपयोग तब तक कर सकती है जब तक कि वह प्राकृतिक रूप से विघटित न हो जाए। रॉकेट का चौथा चरण छह महीने से एक साल तक अंतरिक्ष में परिक्रमा करता रहेगा।
  • ISRO का लक्ष्य इस समय-सीमा का उपयोग करना है ताकि इच्छुक एजेंसियों को कम समय के प्रयोगों को चलाने में सक्षम बनाया जा सके।
  • कलामसैट (Kalamsat ) चतुर्थ चरण को अंतरिक्ष के कक्षीय मंच के रूप में उपयोग करने वाला पहला उपग्रह होगा।
  • कलामसैट के साथ प्रयोग टेक-ऑफ से लगभग 1.5 घंटे बाद शुरू होगा और लगभग 14 घंटे तक चलेगा। बाद में PS4 के साथ प्रयोगों की अवधि में धीरे-धीरे सुधार किया जाएगा।

स्रोत – द हिंदू


विविध
  • 25 जनवरी: राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National Voters’ Day)। देशभर में नौवें राष्ट्रीय मतदाता दिवस का आयोजन किया गया। 25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी और इसलिये 2011 में इसे राष्ट्रीय मतदाता दिवस घोषित किया गया। इसका उद्देश्य मतदाताओं के पंजीकरण में वृद्धि करना, विशेषकर युवा मतदाताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित करना है। इस वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस की दो थीम रखी गई हैं- समावेशी और गुणात्मक भागीदारी तथा कोई मतदाता पीछे न छूटे।
  • 24 जनवरी की देर रात इसरो ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इमेजिंग सैटेलाइट Microsat R को PSLV-C44 प्रक्षेपण यान से सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। इसके साथ कलामसैट (Kalamsat) भी शामिल था, जो एक पेलोड है, जिसे विद्यार्थियों और स्पेस किड्स इंडिया ने मिलकर विकसित किया है। ‘कलामसैट’ नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। आपको बता दें कि इस प्रक्षेपण यान को PSLV-DL नाम दिया गया है और यह नए प्रकार के रॉकेट PSLV-C44 का पहला अभियान था।
  • भारतीय वायुसेना ने अपने विमानों में बायो-फ्यूल के इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी है। सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) की मंज़ूरी मिलने के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा बायो-फ्यूल का इस्तेमाल सबसे पहले अपने परिवहन बेड़े और हेलीकॉप्टरों में किये जाने की संभावना है। गौरतलब है कि सभी सैन्य और नागरिक विमानों में बायो-फ्यूल के इस्तेमाल के लिये भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सभी हितधारकों के साथ मिलकर नए मानदंड बनाए हैं।
  • नौसेनाध्यक्ष सुनील लांबा ने अंडमान के द्वीप पर स्थित तीसरे नौसैनिक केंद्र INS कोहासा को नौसेना में शामिल किया। पोर्ट ब्लेयर से 300 किलोमीटर दूर बने इस केंद्र में नौसैनिक बंदरगाह के अलावा हैलीपैड और बमवर्षक विमानों के लिये हवाई पट्टियाँ बनाई गई हैं। जिस क्षेत्र में यह केंद्र बनाया गया है, वह सामरिक रूप से हिंद महासागर का अहम इलाका है। नौसेना ने अपने शिबपुर हवाई अड्डे का विस्तार कर इसे INS कोहासा नाम दिया है। आपको बता दें कि अंडमान के आस-पास पाए जाने वाले सफेद समुद्री बाज का नाम कोहासा है।
  • भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर नौसैन्य युद्धपोत INS चेन्नई से सतह से हवा में लंबी दूरी तक मार करने वालीबराक-8 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। बराक मिसाइल 2469 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से 70 किमी. तक लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है। इसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ और DRDO ने मिलकर तैयार किया है।
  • सामान्य वर्ग को दिये गए 10 फीसदी आरक्षण पर तत्काल रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। लेकिन जनहित याचिका को सुनवाई के लिये स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार से 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है। इसके अलावा एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST संशोधित कानून पर यह कहते हुए रोक लगाने से इनकार कर दिया कि ऐसे मामलों में रोक नहीं लगाई जा सकती। इस मामले पर सुनवाई के लिये अभी न्याय पीठ का गठन नहीं हुआ है।
  • टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने डीटीएच यूज़र्स के लिये नए नियम बनाए हैं। इनके तहत हर यूज़र को चैनल सलेक्ट करने की सुविधा दी गई है और उसे केवल उन्हीं चैनल्स के लिये पैसा देना होगा, जो उसने चुने हैं। यूज़र्स की सुविधा के लिये TRAI ने नया वेब एप लॉन्च किया है जिसे चैनल सेलेक्टरनाम दिया गया है। यूज़र्स इसकी सहायता से अपने मनपसंद चैनल्स चुन सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि चुने हुए पैकेज के लिये उन्हें कितने पैसे चुकाने होंगे।
  • मुस्लिम बहुल देश मलेशिया के राज परिवार ने खेलों में रुचि रखने वाले सुल्तान अब्दुल्ला सुल्तान अहमद शाह को नया राजा चुना है। वह अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल संघ और एशियाई हॉकी एसोसिएशन सहित कई खेल संगठनों से जुड़े हैं। गौरतलब है कि पिछले माह सुल्तान मुहम्मद पंचम ने अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही राजगद्दी छोड़ दी थी। मलेशिया के संवैधानिक राजतंत्र में हर पाँच साल पर देश का नया राजा चुनने की व्यवस्था है। इसके तहत देश के नौ राज्यों के शासकों को ही रोटेशन प्रणाली के तहत बारी-बारी से राजगद्दी पर बैठने का मौका मिलता है। सुल्तान अब्दुल्ला सुल्तान अहमद शाह मलेशिया के 16वें राजा हैं।
  • मिस्र का कहना है कि पुरातत्त्वविदों को नील नदी के डेल्टा में 1782-1570 ईसा पूर्व की द्वितीय मध्यकालिक इंटरमीडिएट अवधि की प्राचीन कब्रों का पता चला है। इनमें प्राचीन जानवरों के अवशेष, पत्थर की कलाकृतियाँ और चित्र के साथ मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिले हैं, लेकिन इन्हें संभाल कर नहीं रखा गया। मिस्र के पुरातात्त्विक मंत्रालय ने कहा कि पुरातत्त्वविदों को काहिरा के उत्तर में लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर कोम अल-खोलगन (Kom al-Kholgan) पुरातात्त्विक स्थल में 20 कब्रिस्तान भी मिले, जो प्री-डायनेस्टिक काल (3100 वर्ष ईसा पूर्व) के प्रतीत होते हैं।
  • हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा सोबती का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1950 में कहानी ‘लामा’ से उन्होंने अपना साहित्यिक सफर शुरू किया था। 1966 में प्रकाशित हुए उनके उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’ और ‘ज़िंदगीनामा’ को हिंदी साहित्य की कालजयी रचनाओं में गिना जाता है। ‘ज़िंदगीनामा’ के लिये उन्हें 1980 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया था। इनके अलावा ‘सूरजमुखी अंधेरे के’, ‘दिलोदानिश’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘हम हशमत’, ‘बादलों के घेरे’, ‘बुद्ध का कमंडल लद्दाख’ और ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ जैसी रचनाओं को उन्होंने कलमबद्ध किया। उन्हें 1996 में अकादमी के सर्वोच्च सम्मान साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दिया गया था। इसके अलावा कृष्णा सोबती को पद्मभूषण, व्यास सम्मान और शलाका सम्मान से भी नवाज़ा गया था। 2017 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।