UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 11-10-2018

अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संगठन श्रेष्ठ कार्यप्रणाली पुरस्कार

ESIC-ISSA

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (Employees’ State Insurance Corporation – ESIC) ने मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिये क्षेत्रीय सामाजिक सुरक्षा फोरम में कवरेज विस्तार के प्रशासनिक समाधान के लिये आईएसएसए (International Social Security Association-ISSA) श्रेष्ठ कार्यप्रणाली पुरस्कार जीत लिया है।

  • यह पुरस्कार ESIC द्वारा कवरेज विस्तार – स्प्री (Scheme for Promoting Registration of Employers and Employees- SPREE), नए क्रियान्वित क्षेत्रों में 24 महीनों के लिये अंशदान दर में कमी तथा ESIC अधिनियम के अंतर्गत कवरेज के लिये वेतन सीमा बढ़ाने जैसे उठाए गए कदमों को मान्यता देता है।
  • रीजनल सोशल सिक्यूरिटी फोरम फॉर एशिया (Regional Social Security Forum for Asia) एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिये त्रैवार्षिक मंच (triennial Forum) है। यह क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा आयोजन है।
  • ISSA एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र के लिये श्रेष्ठ कार्यप्रणाली पुरस्कार के आवेदन आमंत्रित करता है। फोरम ISSA के सदस्य संस्थानों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा प्रबंधकों को प्रमुख सामाजिक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और अपने अनुभवों को साझा करने का अऩूठा अवसर प्रदान करता है।

ISSA

  • यह सामाजिक सुरक्षा संगठनों, सरकारों तथा सामाजिक सुरक्षा विभागों के लिये प्रधान अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 1927 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization – ILO), जिनेवा के तत्त्वावधान में की गई थी।
  • इसका उद्देश्य पेशेवर दिशा-निर्देशों, विशेष ज्ञान तथा सेवाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में श्रेष्ठता को बढ़ावा देना और अपने सदस्यों को गतिशील सामाजिक सुरक्षा प्रणाली विकसित करने में सहायता देना है।
  • ESI कॉरपोरेशन, नई दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के लिये ISSA के संपर्क कार्यालय की मेज़बानी करता है। संपर्क कार्यालय सामाजिक सुरक्षा से संबंधित ISSA की गतिविधियों पर सदस्य देशों तथा भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और ईरान में सामाजिक सुरक्षा संस्थानों के साथ समन्वय का काम करता है।
मेडवाच

Medwatch

  • भारतीय वायुसेना ने अपनी 86वीं वर्षगाँठ पर ‘डिजिटल इंडिया, आयुष्‍मान भारत और‍मिशन इन्‍द्रधनुष’ के संबंध में ‘मेडवाच’ नामक एक मोबाइल हेल्‍थ एप की शुरुआत की है।
  • स्वदेश निर्मित इस एप को बहुत कम लागत पर सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय द्वारा विकसित किया गया है। ‘मेडवाच’ तीनों सशस्‍त्र सेनाओं में सबसे पहला मोबाइल हेल्‍थ एप है।
  • ‘मेडवाच’ से वायुसेनाके जवान और देश के सभी नागरिकों को स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में सही-सही एवं वैज्ञानिक तथा विश्‍वस्‍त विवरण उपलब्‍ध होगा।
  • इसमें मूलभूत प्राथमिक उपचार, स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े मुद्दे तथा पोषक आहार पर आधारित विवरण, समयानुसार स्‍वास्‍थ्‍य समीक्षा, रोग प्रतिरक्षण और स्‍वास्‍थ्‍य रिकॉर्ड कार्ड, बीएमआई कैलकुलेटर, हेल्‍पलाइन नंबरों और वेब लिंकों जैसे उपयोगी माध्‍यम शामिल हैं।
राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद की सहायता हेतु SPG का गठन

SPG

हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा और सामरिक हितों के मामले में प्रधानमंत्री की सलाहकारी राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद की सहायता हेतु एक रणनीतिक नीति समूह (Strategic Policy Group- SPG) का गठन किया है।

  • SPG राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की सहायता के साथ ही देश के सुरक्षा मामलों की दीर्घकालिक रणनीतिक समीक्षा समेत दूसरे कार्य करेगा।
  • इसकी अध्‍यक्षता राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष, मंत्रिमंडल के सचिव, तीनों सेनाओं के अध्‍यक्ष, रिज़र्व बैंक के गवर्नर, विदेश सचिव, गृह सचिव, वित्‍त सचिव और रक्षा सचिव इसके सदस्‍य होंगे। इनके अलावा रक्षा उत्‍पादन और आपूर्ति सचिव, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और मंत्रिमंडल के सचिव भी इस समूह का हिस्सा होंगे।
  • इसके अतिरिक्त राजस्व विभाग के सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव, अंतरिक्ष विभाग के सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के सचिव भी इस समूह के सदस्य होंगे।

SPG क्या है?

  • SPG का गठन अप्रैल 1999 में किया गया था। उस समय सरकार में कैबिनेट सेक्रेटरी को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, परंतु बाद में कैबिनेट सेक्रेटरी की बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को इसका अध्यक्ष बनाए जाने का निर्णय लिया गया।
  • SPG का गठन बाहरी, आंतरिक और आर्थिक सुरक्षा के मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की मदद के लिये किया गया था। इसका मुख्य कार्य कैबिनेट सचिव के फैसलों पर अमल को लेकर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
  • केंद्र सरकार ने एसपीजी के सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 18 करने का भी फैसला किया है। इसमें 2 अतिरिक्त नए सदस्यों के तौर पर कैबिनेट सेक्रेटरी और नीति आयोग के चेयरमैन को शामिल किया गया है।

 

सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन। 
(खंड-01 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)

sovereign

भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिये सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड जारी करने का निर्णय लिया है। सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड अक्तूबर 2018 से लेकर फरवरी 2019 तक हर महीने जारी किये जाएंगे।

पृष्ठभूमि

  • सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में की गई थी।
  • इस योजना के तहत कम-से-कम एक ग्राम सोना और अधिक-से-अधिक 500gm सोने के वज़न के मूल्य के बराबर बॉण्ड ख़रीदे जा सकते हैं। इसकी मियाद आठ वर्ष और इसके लिये ब्याज की दर 2.5% है।
  • इसका उद्देश्य देश के मंदिरों तथा घरों में जमा सोने की विशाल मात्रा को उत्पादक कार्यों में लगाना, सोने का आयात कम करना, विदेशी मुद्रा का संरक्षण करना तथा चालू खाता घाटे को कम करना है।
क्र.सं. मद विवरण
1. निर्गमन (Issuance) भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये जाएंगे।
2. पात्रता बॉण्डों की बिक्री विभिन्न व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार (HUFs), ट्रस्ट, विश्वविद्यालयों और धर्मार्थ संस्थानों जैसे निवासी निकायों तक ही सीमित रहेगी।
3. मूल्य वर्ग बॉण्डों को 1 ग्राम की बुनियादी इकाई के साथ सोने के ग्राम संबंधी गुणक में अंकित किया जाएगा।
4. अवधि बॉण्ड की अवधि 8 साल होगी और 5वें, छठे एवं 7वें साल में इससे बाहर निकलने का विकल्प उपलब्ध होगा।
5. न्यूनतम आकार न्यूनतम स्वीकार्य सीमा 1 ग्राम सोना है।
6. अधिकतम सीमा खरीदने की अधिकतम सीमा व्यक्तियों के लिये 4 kg, HUFs (Hindu Undivided Families) के लिये भी 4 kg और ट्रस्ट एवं इसी तरह के निकायों के लिये 20 kg प्रति वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) होगी, जिसके बारे में सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाता है।
7. संयुक्त धारक  संयुक्त रूप से धारण किये जाने की स्थिति में 4 किलोग्राम की निवेश सीमा केवल प्रथम आवेदक पर लागू होगी।
8. भुगतान बॉण्ड का भुगतान या तो नकद अदायगी (अधिकतम 20,000 रुपए तक) अथवा डिमांड ड्राफ्ट या चेक अथवा इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग के जरिये किया जा सकेगा।
9. निर्गमन फॉर्म  गोल्ड बॉण्डों को जीएस अधिनियम, 2006 के तहत भारत सरकार के स्टॉक के रूप में जारी किया जाएगा। निवेशकों को इसके लिये एक धारण (होल्डिंग) प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। बॉण्डों को डिमैट स्वरूप में बदला जा सकेगा।
10. विमोचन मूल्य विमोचन मूल्य भारतीय रुपए में होगा जो 999 शुद्धता वाले सोने के बंद मूल्य के पिछले 3 कार्य दिवसों के सामान्य औसत पर आधारित होगा। इसका प्रकाशन इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा किया जाएगा।
11. बिक्री का माध्यम  बॉण्डों की बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), नामित डाकघरों (जिन्हें अधिसूचित किया जा सकता है) और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों जैसे कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के जरिये या तो सीधे अथवा एजेंटों के जरिये की जाएगी।
12. ब्याज दर निवेशकों को प्रतिवर्ष 2.50 प्रतिशत की निश्चित दर से ब्याज दिया जाएगा, जो अंकित मूल्य पर हर छह महीने में देय होगा।
13. जमानत या गारंटी के रूप में बॉण्डों का उपयोग ऋणों के लिये जमानत या गारंटी के रूप में किया जा सकता है।
14. टैक्स देनदारी  आयकर अधिनियम, 1961 (43, 1961) के प्रावधान के अनुसार, गोल्ड बॉण्ड पर प्राप्त होने वाले ब्याज पर टैक्स अदा करना होगा। किसी भी व्यक्ति को SGB के विमोचन पर होने वाले पूंजीगत लाभ को कर मुक्त कर दिया गया है।
15 ट्रेडिंग पात्रता किसी भी निर्धारित तिथि पर बॉण्ड जारी होने के एक पखवाड़े के भीतर बॉण्डों की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंजो पर हो सकेगी, जैसा कि आरबीआई द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।

 

भारत का पहला राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-14 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

Environment Survey

चर्चा में क्यों?

जनवरी 2019 में 24 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के 55 ज़िलों में भारत का पहला राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण (NES) शुरू किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु 

  • सर्वेक्षण के संपूर्ण ग्रीन डेटा का पहला सेट 2020 से उपलब्ध होगा जो कि ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर निर्णय लेने के लिये नीति निर्माताओं के हाथों में एक महत्त्वपूर्ण उपकरण प्रदान करेगा।
  • सर्वेक्षण विभिन्न पर्यावरणीय मानकों जैसे- वायु, जल, मिट्टी की गुणवत्ता, उत्सर्जन सूची, ठोस, खतरनाक तथा ई-अपशिष्ट, वन तथा वन्यजीव, जीव तथा वनस्पति, आर्द्रभूमि, झीलों, नदियों और अन्य जल निकायों पर व्यापक डेटा एकत्र करने के लिये ग्रिड-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से किया जाएगा।
  • यह देश भर के सभी ज़िलों की कार्बन प्रच्छादन क्षमता का भी आकलन करेगा।
  • NES सभी ज़िलों को उनके पर्यावरण प्रदर्शन पर रैंक प्रदान करेगा और उनकी सर्वोत्तम हरित प्रथाओं को प्रलेखित करेगा।
  • जब तक नीति निर्माताओं के पास सभी पर्यावरण मानकों पर सटीक डेटा उपलब्ध नहीं होगा वे उचित निर्णय नहीं ले सकेंगे। देश का पहला पर्यावरण सर्वेक्षण मौजूदा डेटा में अंतर को भर देगा।
  • वर्तमान में देश के अधिकांश मानकों पर द्वितीयक डेटा उपलब्ध है। हालाँकि, NES पहली बार सभी हरित भागों पर प्राथमिक डेटा प्रदान करेगा, जिस तरह से राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) समय-समय पर विभिन्न सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र करता है।
  • डेटा का पहला सेट एक वर्ष में संकलित किया जाएगा क्योंकि हमें वायु प्रदूषण और वनस्पतियों तथा जीवों के मामले में मौसमी चक्रों को कवर करने की आवश्यकता है।
  • देश के सभी 716 ज़िलों में तीन से चार साल की अवधि में सर्वेक्षण किये जाने की उम्मीद है।  वर्तमान में, सभी 55 ज़िलों में आवश्यक प्रारंभिक कार्य और प्रशिक्षण किया जा रहा है जहाँ अगले वर्ष NES आयोजित किया जाएगा।
  • इन 55 ज़िलों में दक्षिण दिल्ली, महाराष्ट्र में पुणे और पालघर, हरियाणा में गुरुग्राम और मेवाट (नुह) शामिल हैं, हिमाचल प्रदेश में कुल्लू, बिहार में नालंदा, झारखंड में धनबाद, गुजरात में जामनगर एवं मेहसाना, राजस्थान में अलवर एवं बाड़मेर, तमिलनाडु में कोयम्बटूर एवं मदुरै, कर्नाटक में शिमोगा तथा तेलंगाना में हैदराबाद शामिल हैं।