UPSC DAILY CURRENT IN HINDI 13-10-2018

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निम्नलिखित में से किन्हें रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड में निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है?

  1. अरविंद राजू
  2. सचिन चतुर्वेदी
  3. रेवथी अय्यर
  4. वी. संपत

नीचे दिये गए कूटों की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिये:

A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) केवल 2 और 4
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उत्तर : (c)
व्याख्या :

  • सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड में नचिकेत मोर के स्थान पर दिल्ली स्थित थिंक टैंक रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) के प्रमुख सचिन चतुर्वेदी को नियुक्त किया है। श्री चतुर्वेदी के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्व भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा अधिकारी सुश्री रेवथी अय्यर को भी आरबीआई बोर्ड में नामित किया गया। दोनों को 19 सितंबर, 2018 से लेकर चार साल की अवधि के लिये नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में एक गवर्नर और चार डिप्टी गवर्नर सहित 18 सदस्य होंगे। आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, टीमलीज़ सर्विसेज़ के चेयरमैन और सह-संस्थापक मनीष सभरवाल तथा यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक के पूर्व चेयरमैन और सीईओ सतीश मराठे आदि सदस्य शामिल हैं।
[2]

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2018 में भारत की तरफ से निम्नलिखित में से कौन-सा पोत भाग लेगा?

A) आईएनएस सह्याद्रि
B) आईएनएस राणा
C) आईएनएस कलवरी
D) आईएनएस अरिहंत
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उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के मद्देनज़र वर्तमान में उत्तर-पश्चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में विशेष परिचालन के तहत तैनात किया गया पोत आईएनएस राणा अब कोरिया गणराज्य के जेजू क्षेत्र में पहुँच गया है, जहाँ वह इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2018 में शिरकत करेगा। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का आयोजन 8 अक्तूबर से 15 अक्तूबर, 2018 तक किया जाएगा। अपनी सात दिवसीय यात्रा के दौरान कैप्टन अतुल देसवाल के नेतृत्व में आईएनएस राणा कोरिया की नौसेना सहित आईएफआर में भाग ले रही अन्य विदेशी नौसेनाओं के साथ भी कई विश्वास संवर्द्धन अभ्यास कार्यक्रमों में भाग लेगा।
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पर्यावरणीय प्रवाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. हाल ही में केंद्र सरकार ने यमुना नदी के लिये न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह को अधिसूचित किया है।
  2. पर्यावरणीय प्रवाह वास्तव में वह स्वीकार्य प्रवाह है जो किसी नदी को अपेक्षित पर्यावरणीय स्थिति अथवा पूर्व निर्धारित स्थिति में बनाए रखने के लिये आवश्यक होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (b)
व्याख्या :

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने गंगा नदी के लिये न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow or E-Flow) को अधिसूचित किया जिसे इस नदी में विभिन्न स्थानों पर निश्चित तौर पर बनाए रखना है। गंगा नदी के लिये E-Flow की अधिसूचना जारी हो जाने से इसके ‘अविरल प्रवाह’ को सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • पर्यावरणीय प्रवाह वास्तव में वह स्वीकार्य प्रवाह है जो किसी नदी को अपेक्षित पर्यावरणीय स्थिति अथवा पूर्व निर्धारित स्थिति में बनाए रखने के लिये आवश्यक होता है। न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह का अनुपालन सभी मौजूदा, निर्माणाधीन और भावी परियोजनाओं के लिये मान्य है। जो वर्तमान परियोजनाएँ फिलहाल इन मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं उन्हें तीन वर्षों की अवधि के अंदर निश्चित रूप से अपेक्षित पर्यावरणीय प्रवाह मानकों का अनुपालन करना होगा। अतः कथन 2 सही है।
[4]

राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. NCVET केवल दीर्घकालीन व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के काम में लगे निकायों के कामकाज को नियमित करेगी।
  2. NCVET व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों का प्रत्यक्ष नियमन करेगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (d)
व्याख्या :

  • हाल ही में मंत्रिमंडल ने कौशल विकास के मद्देनज़र मौजूदा नियामक संस्थानों- राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (National Council for Vocational Training- NCVT) और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (National Skill Development Agency- NSDA) को मिलाकर राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (National Council for Vocational Education and Training- NCVET) की स्थापना को मंज़ूरी दे दी है। NCVET दीर्घकालीन और अल्पकालीन दोनों तरह के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के काम में लगे निकायों के कामकाज को नियमित करेगी तथा इन निकायों के कामकाज के लिये न्यूनतम मानक तैयार करेगी। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • NCVET द्वारा किये जाने वाले प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं- निर्णायक निकायों, मूल्यांकनकर्त्ता निकायों और कौशल संबंधी सूचना प्रदाताओं की मान्यता तथा उनका नियमन; निर्णायक निकायों और क्षेत्र कौशल परिषदों (Sector Skill Councils- SSCs) द्वारा विकसित पात्रताओं की मंज़ूरी; निर्णायक निकायों और मूल्यांकनकर्त्ता एजेंसियों के ज़रिये व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों का अप्रत्यक्ष नियमन; अनुसंधान एवं सूचना प्रसार से संबंधित शिकायतों का निवारण। अतः कथन 2 सही नहीं है।
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हाल ही में IPCC द्वारा जारी की गई एक विशेष रिपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. IPCC की इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्सर्जन को कम करके 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरी तरह से प्राप्त करना असंभव हो गया है।
  2. रिपोर्ट के अनुसार, तटीय राष्ट्रों और एशिया तथा अफ्रीका की कृषि अर्थव्यवस्था सबसे ज़्यादा प्रभावित होगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर : (c)
व्याख्या :

  • हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) द्वारा एक विशेष रिपोर्ट जारी की गई है। IPCC की इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्सर्जन को कम करके 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पूरी तरह से प्राप्त करना असंभव हो गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्सर्जन की वर्तमान दर यदि बरकरार रही तो ग्लोबल वार्मिंग 2030 से 2052 के बीच 1.5 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर जाएगा। पूर्व-औद्योगिक युग के मुकाबले वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग 1.2 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा है। अतः कथन 1 सही है।
  • रिपोर्ट बताती है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस से 2 डिग्री सेल्सियस तक का संक्रमण जोखिमों से भरा है। यदि ग्लोबल वार्मिंग 2 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार करता है तो इसका असर IPCC की पिछली रिपोर्ट में कथित विनाश के मुकाबले कई गुना ज़्यादा विनाशकारी होगा। तटीय राष्ट्रों और एशिया तथा अफ्रीका की कृषि अर्थव्यवस्था सबसे ज़्यादा प्रभावित होगी। फसल की पैदावार में गिरावट, अभूतपूर्व जलवायु अस्थिरता और संवेदनशीलता 2050 तक गरीबी को बढ़ाकर कई सौ मिलियन के आँकड़े तक पहुँचा सकती है। अतः कथन 2 सही है।

 

‘माइकल’ तूफान

Michael Storm

  • हाल ही में अमेरिका के फ्लोरिडा में माइकल नामक तूफान ने दस्तक दी। यह तूफान 250 किमी/घंटा की गति से चलने वाली विनाशकारी हवाओं के साथ फ्लोरिडा के उत्तर-पश्चिमी तट पर छोटे से शहर मेक्सिको बीच के पास तट से टकरा गया।
  • साफिर-सिम्पसन पैमाने के अनुसार, तट से टकराते समय तीव्र गति से चलने वाला यह तूफान चतुर्थ श्रेणी का तूफान था।
  • उल्लेखनीय है कि ‘माइकल’ अमेरिकी भूमि पर दस्तक देने वाला तीसरा सबसे शक्तिशाली तूफान था।
  • इस तूफान ने कपास, लकड़ी, पेकान और मूंगफली को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है। एक अनुमान के मुताबिक, इससे 1.9 बिलियन डॉलर की संपति का नुकसान तथा 3.7 मिलियन एकड़ में फैली हुई फसल भी प्रभावित हुई है।
  • तूफान की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैरोमेट्रिक दबाव मात्र 919 मिलीबार दर्ज किया गया।
  • अभिलेखों के मुताबिक, 1969 में मिसिसिप्पी खाड़ी के तट पर आये केमिली तूफान तथा 1935 के लेबर डे तूफान के बाद माइकलसंयुक्त राज्य अमेरिका का तीसरा सबसे भयावह तूफान था।
CORPAT अभ्यास

CORPAT

  • हाल ही में भारतीय नौसेना के जहाज और विमान 32वें भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त (IND-INDO CORPAT) के लिये इंडोनेशिया के बेलवान बंदरगाह पर पहुँचे गए।
  • अंडमान और निकोबार कमांड से भारतीय नौसेना पोत कुलीत, कोरा क्लास मिसाइल कार्वेट तथा एक भारतीय डोर्नियर (नौसेना समुद्री गश्ती विमान) ने भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त (IND-INDO CORPAT) के 32वें संस्करण के उदघाटन समारोह के लिये इंडोनेशिया के बेलवान बंदरगाह में प्रवेश किया।
  • यह समारोह 11 से 27 अक्तूबर, 2018 तक आयोजित किया जाएगा।
  • दोनों देशों के जहाज और विमान 236 नॉटिकल माइल लंबी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा से संबंधित भाग पर गश्त करेंगे। यह गश्त तीन चरणों में संपन्न होगी।
ब्लैक लेपर्ड

Black Leppard

  • ताडोबा अंधारी वन्य रिज़र्व में एक गाड़ी चालक ने अपने दैनिक जंगल सफारी के दौरान 8 अक्तूबर को पहली बार एक काले तेंदुए को देखा।
  • ब्लैक लेपर्ड

♦ ब्लैक लेपर्ड ज़्यादातर दक्षिण भारत के घने जंगली इलाकों में पाये जाते हैं। ब्लैक लेपर्ड को जंगल का भूत भी कहा जाता है। आमतौर पर ये कर्नाटक, केरल और असम के घने उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं।

  • अस्तित्त्व का खतरा

♦ इसके अस्तित्त्व पर खतरे की वज़ह कहीं-न-कहीं वनों की सघनता में गिरावट आना भी है, जो कि शिकार करते वक्त इसके गहरे रंग की वज़ह से इसे छद्मावरण प्रदान नहीं कर पाता है। यही कारण है कि वे अन्य तेंदुओं की तरह नहीं बच पाते हैं।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

NHRC

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर नई दिल्ली में रजत जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्थापना वर्ष 1993 में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी।
  • यह मानवाधिकारों के संरक्षण के क्षेत्र में भारत की सर्वोच्च संस्था है जो भारतीय संविधान एवं अंतर्राष्ट्रीय संधियों के आधार पर व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता, गरिमा जैसे मानवाधिकारों के सरंक्षण एवं प्रसार का कार्य करती है।
  • आयोग में एक अध्यक्ष जो कि सुप्रीम कोर्ट का सेवारत अथवा पूर्व मुख्य न्यायाधीश होता है, सदस्य के तौर पर एक सुप्रीम कोर्ट का सेवारत अथवा पूर्व न्यायाधीश, एक अन्य सदस्य के तौर पर हाईकोर्ट का सेवारत अथवा पूर्व मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। साथ ही मानव अधिकार के क्षेत्र में विशेष जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों को भी सदस्य के तौर पर नियुक्त किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रपति द्वारा अध्यक्ष और सदस्य नियुक्त किये जाते हैं।
  • लोक संहिता प्रक्रिया, 1908 (code of civil procedure, 1908) के अधीन आयोग को सिविल न्यायालय की समस्त शक्तियाँ प्राप्त हैं।
  • आयोग किसी पीड़ित अथवा उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दायर किसी याचिका पर स्वयं सुनवाई एवं कार्यवाही कर सकता है।
  • इसके अलावा, आयोग न्यायालय की स्वीकृति से न्यायालय के समक्ष लंबित मानवाधिकारों के प्रति हिंसा संबंधी किसी मामले में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • आयोग संबंधित अधिकारियों को पूर्व सूचित करके किसी भी कारागार का निरीक्षण कर सकता है।

यह आयोग मानवाधिकारों से संबंधित संधियों इत्यादि का अध्ययन करता है तथा उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी देता है।

 

चौथी औद्योगिक क्रांति के केंद्र की शुरुआत

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैवविविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड-11 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)
(खंड-13 : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायो-टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता)

Industrial Revolution

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी औद्योगिक क्रांति के लिये विश्व आर्थिक मंच (WEF) के केंद्र की शुरुआत के अवसर पर कहा कि ‘उद्योग 4.0’ में मानव जीवन के वर्तमान और भविष्य को बदलने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि सैन फ्रांसिस्को, टोकियो और पेइचिंग के बाद दुनिया में यह चौथा केंद्र है, जिसकी शुरुआत होने से भविष्य में अपार संभावनाओं के दरवाज़े खुलेंगे।

प्रमुख बिंदु 

  • कृत्रिम बौद्धिकता, मशीन-लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन और बिग डाटा जैसे उभरते क्षेत्र भारत को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं तथा नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
  • यह भारत के लिये न सिर्फ एक औद्योगिक परिवर्तन है बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी है। ‘उद्योग 4.0’ में भारत में अपरिवर्तनीय रचनात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। इससे भारत में कामों में आवश्यक तेज़ी आएगी और काम-काज बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
  • डिजिटल इंडिया अभियान ने डेटा को भारत के गाँवों तक पहुँचाया है। निकट भविष्य में संचार-सघनता, इंटरनेट कवरेज और मोबाइल इंटरनेट सुविधा लेने वालों की तादाद बहुत बढ़ने की संभावना है।
  • दूरसंचार के क्षेत्र में 93% की वृद्धि हुई है और लगभग 50 करोड़ भारतीयों के पास अब मोबाइल फोन हैं।
  • विश्व में सबसे अधिक मोबाइल डेटा खपत भारत में होती है और भारत एक ऐसा देश है जहाँ डेटा सबसे कम कीमत पर उपलब्ध है। इस संदर्भ में भारत की डिजिटल अवसंरचना और आधार, यूपीआई, ई-नाम तथा जीईएम सहित उसके इंटरफेस की प्रमुख भूमिका रही है।
  • ऑप्टिक फाइबर के साथ सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा। 2014 में केवल 59 ग्राम पंचायतें ऑप्टिक फाइबर से जुड़ी थी, जबकि वर्तमान में यह संख्या 1 लाख से अधिक पहुँच गई है|
  • कृत्रिम बौद्धिकता में अनुसंधान के लिये कुछ महीने पूर्व एक मज़बूत अवसंरचना बनाने के लिये राष्ट्रीय रणनीति तैयार की गई है। नए केंद्र से इस प्रक्रिया को बल मिलेगा।
  • उद्योग 4.0’ और कृत्रिम बौद्धिकता के विस्तार से स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर सुधार होगा और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कम होगा। इससे किसानों को मदद मिलेगी और यह कृषि क्षेत्र के लिये काफी सहायक होगा।
  • यातायात और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में यह केंद्र अहम भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में कार्य में होने वाली प्रगति के मद्देनज़र ‘भारत के लिये समाधान, विश्व के लिये समाधान’ हमारा लक्ष्य है।
  • स्किल इंडिया मिशन, स्टार्टअप इंडिया और अटल नवाचार अभियान जैसी सरकार की पहलें युवाओं को नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिये तैयार कर रही हैं।

चतुर्थ औद्योगिक क्रांति या उद्योग 4.0

  • पहली औद्योगिक क्रांति जल व भाप की शक्ति से हुई थी। दूसरी विद्युत ऊर्जा से, तीसरी क्रांति वर्तमान में चल रही इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रोद्योगिकी जनित है।
  • चौथी औद्योगिक क्रांति में आइटी व विनिर्माण सेक्टर को मिलाकर कार्य किया जाएगा। अमेरिका और जर्मनी ने 2010 के बाद इस पर कार्य शुरू किया।
  • ‘उद्योग 4.0’ विश्व आर्थिक फोरम की 2016 में आयोजित वार्षिक बैठक की थीम थी, जिसके बाद चतुर्थ औद्योगिक क्रांति का विचार तेज़ी से प्रसिद्ध होता गया।
  • ‘उद्योग 4.0’ विश्वभऱ में एक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है और इसे अगली औद्योगिक क्रांति कहा जा रहा है। यह मुख्यत: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बाधा रहित इंटरनेट कनेक्टिविटी, तीव्र गति वाली संचार तकनीकियों और 3डी प्रिंटिंग जैसे अनुप्रयोगों पर आधारित है, जिसके अंतर्गत अधिक डिजिटलीकरण तथा उत्पादों, वैल्यू चेन, व्यापार मॉडल को एक-दूसरे से अधिकाधिक जोड़ने की परिकल्पना की गई है।

 

21% भारतीय बच्चे हैं कम वज़न वाले: ग्लोबल हंगर इंडेक्स

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र–2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
(खंड-13 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)
(खंड-14 : गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय)

Global Hunger Index

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी किये गए ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 के अनुसार, पाँच वर्ष से कम आयु के पाँच भारतीय बच्चों में से कम-से-कम एक बहुत अधिक कमज़ोर है, इसका मतलब है कि उनकी लंबाई के अनुपात में उनका वज़न अत्यंत कम है, जो कि अल्पपोषण की विकट स्थिति को दर्शाता है।

प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इस सूचकांक में 119 देशों में से 103वाँ स्थान दिया गया है तथा देश में भुखमरी के स्तर को ‘गंभीर’ श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष भारत की रैंकिंग में तीन स्थान की गिरावट आई है।
  • भारत ने तुलनात्मक रूप से संदर्भ वर्षों में तीन संकेतकों में सुधार किया है। जनसंख्या में अल्पपोषित लोगों का प्रतिशत वर्ष 2000 के 18.2% से घटकर वर्ष 2018 में 14.8% हो गया है।
  • इसी अवधि में बाल मृत्यु दर 9.2% से घटकर लगभग आधी अर्थात् 4.3% हो गई है, जबकि बच्चों में बौनापन 54.2% से घटकर 38.4% हो गया।
  • हालाँकि, बच्चों में आयु के अनुपात में कम वज़न का जनसंख्या में प्रसार वास्तव में पिछले संदर्भ वर्षों की तुलना में बदतर हो चुका है। वर्ष 2000 में यह 17.1% था जो कि बढ़कर वर्ष 2005 में 20% तक हो गया और वर्ष 2018 में  यह 21% है।
  • दक्षिण सूडान में बच्चों में आयु के अनुपात में कम वज़न का जनसंख्या में प्रसार 28% है जो कि विश्व में सर्वाधिक है।
  • संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं के मुताबिक, दक्षिण एशिया में बच्चों में आयु के अनुपात में कम वज़न की दर उच्च है, जो ‘संकटपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ का निर्माण करती है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि 0 से 5 महीने तक के शिशुओं के लिये आयु के अनुपात में कम वज़न की दर सबसे अधिक है। साथ ही रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि जन्म संबंधी आँकड़ों और स्तनपान पर ध्यान दिया जाना महत्त्वपूर्ण है।
  • इसके अलावा, दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों में कम वज़न का संबंध मातृ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से है, जो गर्भावस्था के दौरान माँ की पोषण संबंधी स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता का सुझाव देता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में पारिवारिक संपत्ति की तुलना में मातृ BMI और बेहतर जल एवं स्वच्छता तक पहुँच बच्चे में आयु के अनुपात में कम वज़न की दरों से अधिक निकटता से जुड़ी हुई है, जो यह बताती है कि अकेले गरीबी में कमी समस्या के समाधान के लिये पर्याप्त नहीं हो सकती है।
  • दक्षिण एशिया में बच्चों में कम वज़न की समस्या को जो कारक कम कर सकते हैं  उनमें गैर-प्रमुख खाद्य पदार्थों की खपत, स्वच्छता तक पहुँच, महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षित जल तक पहुँच, लिंग समानता और राष्ट्रीय खाद्य उपलब्धता में वृद्धि शामिल हैं।
  • पिछले दो दशकों में सुधार के बावजूद वैश्विक तौर पर अभी भी भुखमरी का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह सूचकांक इस बात का अनुमान व्यक्त करता है कि प्रगति की वर्तमान दर पर विश्व के 50 देश वर्ष 2030 तक भुखमरी की ‘निम्न’ श्रेणी तक पहुँचने में असफल रहेंगे।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्य 2 को खतरे में डालता है, जिसका उद्देश्य 2030 तक भुखमरी को समाप्त करना है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स

  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स नामक यह रिपोर्ट वेल्टहंगरहिल्फ़ और कंसर्न वर्ल्डवाइड द्वारा सालाना तौर पर जारी किया जाने वाला एक संयुक्त-समीक्षा प्रकाशन है जो वैश्विक, क्षेत्रीय और देश के स्तर पर भुखमरी को व्यापक रूप से मापने और उसकी पहचान करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। (इस वर्ष तक इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट भी इसके प्रकाशन में शामिल था।)
  • रिपोर्ट में भुखमरी के स्तर की गणना करने के लिये चार मुख्य संकेतकों का उपयोग किया जाता है। पहला संकेतक अल्पपोषण है, जो कि जनसंख्या के उस हिस्से को इंगित करता है जो अल्पपोषित है और अपर्याप्त कैलोरी उपभोग को दर्शाता है।
  • अन्य तीन संकेतक पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिये निम्नलिखित आँकड़ों का उपयोग करते हैं: बच्चे में कमज़ोरी (ऊँचाई के अनुपात में कम वजन); बच्चे में बौनापन (उम्र के अनुपात में कम ऊँचाई) और बाल मृत्यु।
  • जीएचआई का उद्देश्य दुनिया भर में भुखमरी को कम करने के लिये कार्रवाई को शुरू करना है।
  • भुखमरी से लड़ने में प्रगति और असफलताओं का आकलन करने के लिये प्रत्येक वर्ष जीएचआई स्कोर की गणना की जाती है।